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बांग्लादेश की संसद में सत्तारूढ़ BNP के सांसद ने अपने देश के स्पीकर से एक बेहद बचकाना मांग की है. बांग्लादेश के सांसद जीएम सिराज ने अपने देश की संसद में कहा है कि पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की बयानबाजियों पर लगाम लगाया जाए, उनके बयान भारत-बांग्लादेश की दोस्ती के हित में नहीं हैं।
सिराज ने बांग्लादेश की संसद में 2026-27 वित्तीय वर्ष के प्रस्तावित बजट पर चर्चा के दौरान यह बात कही. सिराज ने भारत-बांग्लादेश सीमा पर भारत की ओर से घुसपैठ रोकने की भी मांग की।
BNP सांसद ने संसद की कार्यवाही के दौरान कहा, "माननीय स्पीकर महोदय, मैं आपके माध्यम से मोदी सरकार से कहना चाहता हूं कि पश्चिम बंगाल के नेता शुभेंदु बाबू को रोका जाना चाहिए. बांग्लादेश के खिलाफ उनके सभी बयान, जो वे समय-समय पर देते रहते हैं, दोनों देशों की दोस्ती में बाधा बन गए हैं।
उन्होंने कहा कि यहां शेख हसीना का कोई लेना-देना नहीं है. हमें शेख हसीना की कोई चिंता नहीं है. वह अब बांग्लादेश में नहीं हैं. वे अब सीन से बाहर हैं।
यह कहते हुए कि बांग्लादेश की राजनीति में शेख हसीना अब अहम नहीं रहीं, जीएम सिराज ने आगे कहा, "हम सभी बांग्लादेश-भारत की दोस्ती को दोस्ताना और सम्मानजनक तरीके से बनाए रखना चाहते हैं।
जीएम सिराज ने कहा कि कोई अपने पड़ोसी से मुंह नहीं मोड़ सकता. उन्होंने ने कहा, "दो दोस्तों के बीच दोस्ती कम समय की हो सकती है; यहां तक कि पति-पत्नी का रिश्ता भी कम समय का हो सकता है. पति-पत्नी का तलाक हो सकता है. लेकिन भारत और बांग्लादेश के बीच पड़ोसी के इस रिश्ते में तलाक नहीं हो सकता।
बांग्लादेश में भारत के नए हाई कमिश्नर दिनेश त्रिवेदी के बांग्लादेश पहुंचने के बाद दोनों देशों के रिश्तों पर दिए गए बयानों का ज़िक्र करते हुए, जीएम सिराज ने कहा कि उन बयानों ने सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी थी।
इस सांसद ने भारत से लोगों का दिल जीतने की अपील करते हुए कहा कि हम भारत-विरोधी या बांग्लादेश-विरोधी भावना नहीं चाहते. ऐसी बातें नहीं होनी चाहिए. हम शांतिपूर्ण स्थिति में रहना चाहते हैं. इस संबंध में भारत की मौजूदा सरकार से मेरा विनम्र अनुरोध है कि कृपया लोगों को जबरन वापस भेजने (पुश-इन) की कार्रवाई बंद करें।
बता दें कि पश्चिम बंगाल समेत भारत के अन्य हिस्सों में अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ अभियान चल रहा है. सरकार ऐसे बांग्लादेशियों को पकड़कर वापस भेज रही है. हालांकि बांग्लादेश इन कदमों का विरोध कर रहा है और कह रहा है कि इन्हें भारत जबरन बांग्लादेश में धकेल रहा है।
]]>बांग्लादेश की संसद में सत्तारूढ़ BNP के सांसद ने अपने देश के स्पीकर से एक बेहद बचकाना मांग की है. बांग्लादेश के सांसद जीएम सिराज ने अपने देश की संसद में कहा है कि पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की बयानबाजियों पर लगाम लगाया जाए, उनके बयान भारत-बांग्लादेश की दोस्ती के हित में नहीं हैं।
सिराज ने बांग्लादेश की संसद में 2026-27 वित्तीय वर्ष के प्रस्तावित बजट पर चर्चा के दौरान यह बात कही. सिराज ने भारत-बांग्लादेश सीमा पर भारत की ओर से घुसपैठ रोकने की भी मांग की।
BNP सांसद ने संसद की कार्यवाही के दौरान कहा, "माननीय स्पीकर महोदय, मैं आपके माध्यम से मोदी सरकार से कहना चाहता हूं कि पश्चिम बंगाल के नेता शुभेंदु बाबू को रोका जाना चाहिए. बांग्लादेश के खिलाफ उनके सभी बयान, जो वे समय-समय पर देते रहते हैं, दोनों देशों की दोस्ती में बाधा बन गए हैं।
उन्होंने कहा कि यहां शेख हसीना का कोई लेना-देना नहीं है. हमें शेख हसीना की कोई चिंता नहीं है. वह अब बांग्लादेश में नहीं हैं. वे अब सीन से बाहर हैं।
यह कहते हुए कि बांग्लादेश की राजनीति में शेख हसीना अब अहम नहीं रहीं, जीएम सिराज ने आगे कहा, "हम सभी बांग्लादेश-भारत की दोस्ती को दोस्ताना और सम्मानजनक तरीके से बनाए रखना चाहते हैं।
जीएम सिराज ने कहा कि कोई अपने पड़ोसी से मुंह नहीं मोड़ सकता. उन्होंने ने कहा, "दो दोस्तों के बीच दोस्ती कम समय की हो सकती है; यहां तक कि पति-पत्नी का रिश्ता भी कम समय का हो सकता है. पति-पत्नी का तलाक हो सकता है. लेकिन भारत और बांग्लादेश के बीच पड़ोसी के इस रिश्ते में तलाक नहीं हो सकता।
बांग्लादेश में भारत के नए हाई कमिश्नर दिनेश त्रिवेदी के बांग्लादेश पहुंचने के बाद दोनों देशों के रिश्तों पर दिए गए बयानों का ज़िक्र करते हुए, जीएम सिराज ने कहा कि उन बयानों ने सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी थी।
इस सांसद ने भारत से लोगों का दिल जीतने की अपील करते हुए कहा कि हम भारत-विरोधी या बांग्लादेश-विरोधी भावना नहीं चाहते. ऐसी बातें नहीं होनी चाहिए. हम शांतिपूर्ण स्थिति में रहना चाहते हैं. इस संबंध में भारत की मौजूदा सरकार से मेरा विनम्र अनुरोध है कि कृपया लोगों को जबरन वापस भेजने (पुश-इन) की कार्रवाई बंद करें।
बता दें कि पश्चिम बंगाल समेत भारत के अन्य हिस्सों में अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ अभियान चल रहा है. सरकार ऐसे बांग्लादेशियों को पकड़कर वापस भेज रही है. हालांकि बांग्लादेश इन कदमों का विरोध कर रहा है और कह रहा है कि इन्हें भारत जबरन बांग्लादेश में धकेल रहा है।
]]>वेनेजुएला में आए लगातार दो जोरदार भूकंपों ने भारी तबाही की आशंका पैदा कर दी है. राजधानी कराकास सहित कई इलाकों में इमारतों के ढहने की खबरें सामने आई हैं, जबकि हजारों लोग घरों और दफ्तरों से बाहर निकलकर सड़कों पर आ गए. USGS यानी यूनाइटेड स्टेट्स जियोलॉजिकल सर्वे ने चेतावनी दी है कि इस आपदा में मरने वालों की संख्या 10 हजार से ज्यादा हो सकती है।
वेनेजुएला में पहला भूकंप 7.1 तीव्रता का था, जिसका केंद्र वेनेजुएला के कैरेबियाई तट पर स्थित मोरोन इलाके के पश्चिम में था। भूकंप की गहराई करीब 22 किलोमीटर दर्ज की गई. इसके कुछ ही वक्त बाद एक और शक्तिशाली झटका महसूस किया गया, जिससे लोगों में दहशत फैल गई।
अमेजन शहर तक भूकंप का असर
एपी की रिपोर्ट के मुताबिक, 7.2 और 7.5 तीव्रता वाले भूकंपों ने पूरे इलाके को हिलाकर रख दिया. यहां तक कि करीब 1,700 किलोमीटर दूर ब्राजील के अमेजन जैसे शहरों में भी इमारतों को खाली कराना पड़ा. बुधवार देर रात, कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज ने कहा कि वह देश को संबोधित करने की तैयारी कर रही थीं।
भूकंप के तीन घंटे के अंदर देश को संबोधित न करने और उस दौरान सरकार की ओर से किसी के घायल होने या मारे जाने की कोई रिपोर्ट न दिए जाने पर राजनेताओं और वेनेज़ुएला के लोगों ने रोड्रिग्ज की आलोचना की।
वेनेजुएला में जबरदस्त भूकंप के बाद अफरा-तफरी और भारी तबाही जैसे हालात
वेनेजुएला की राजधानी में आए भूकंप के बाद तबाही जैसे हालात हैं. सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियोज में वेनेजुएला के उत्तरी तट पर एक के बाद एक आए जबरदस्त भूकंप के कारण डरे हुए लोग और गिरी हुई इमारतें दिखाई दे रही हैं।
वेनेज़ुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति ने की हेल्थ वर्कर्स से काम पर लौटने की अपील
वेनेज़ुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति ने डॉक्टरों और नर्सों से कहा है कि वे भूकंप में घायल हुए लोगों के इलाज में मदद के लिए स्थानीय अस्पतालों और इमरजेंसी रूम में रिपोर्ट करें।
वेनेज़ुएला के अख़बार 'एल नैशनल' के मुताबिक, देश को संबोधित करते हुए रोड्रिगेज ने कहा, "मैं डॉक्टरों, नर्सों और सभी हेल्थ वर्कर्स से काम पर लौटने की अपील करती हूं, जिससे हम उन लोगों का इलाज कर सकें, जिन्हें अस्पतालों और प्राइवेट हेल्थ सेंटरों के इमरजेंसी रूम में लाया जा रहा है।
रोड्रिगेज ने कहा कि राष्ट्रीय, राज्य और नगरपालिका अधिकारी इस संकट से निपटने के लिए काम कर रहे हैं और देश के सबसे ज़्यादा प्रभावित राज्यों में सबसे पहले मदद भेजी जा रही है।
अमेरिकी ऊर्जा मंत्री ने वेनेज़ुएला के प्रति संवेदना जताई
अमेरिकी ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट भी उन विदेशी अधिकारियों में शामिल हो गए हैं जिन्होंने वेनेज़ुएला के साथ एकजुटता दिखाई है।
उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, "हम उन परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हैं, जिन्होंने अपनों को खोया है. इस मुश्किल वक्त में प्रभावित सभी समुदायों के लिए हिम्मत, सुरक्षा और जल्द ठीक होने की कामना करते हैं।
वेनेजुएला में भूकंप के बाद इमरजेंसी का ऐलान
वेनेज़ुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने जबरदस्त भूकंपों के बाद इमरजेंसी का ऐलान किया है। सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, भूकंप के बाद अपनी में रोड्रिगेज ने मौतों की पुष्टि की, लेकिन यह नहीं बताया कि कितने लोगों की मौत हुई है. इसके साथ ही, उन्होंने खोज और बचाव कार्यों की देखरेख के लिए एक हाई-लेवल टास्क फोर्स बनाने का भी ऐलान किया है।
भूकंप के बाद पूरे वेनेजुएला में इंटरनेट कनेक्टिविटी पर पड़ा असर
वॉचडॉग 'NetBlocks' के मुताबिक, भूकंप से बिजली और टेलीकम्युनिकेशन इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान पहुंचने के बाद वेनेजुएला में इंटरनेट कनेक्टिविटी पर बुरा असर पड़ा है. अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि प्रभावित इलाकों में बड़े पैमाने पर बिजली कटौती भी हुई है या नहीं।
कनेक्टिविटी में रुकावट की वजह से आने वाले कुछ घंटों में हॉटस्पॉट से मिलने वाली जानकारी और वीडियो की उपलब्धता पर भी असर पड़ सकता है.
मेक्सिको ने वेनेज़ुएला के साथ जताई एकजुटता
मेक्सिको के विदेश मंत्रालय ने वेनेज़ुएला में भूकंप आने के बाद वहां के लोगों के प्रति सहानुभूति जताई है. इसके साथ ही मेक्सिकों ने भूकंप से हुए नुकसान खेद प्रकट की है।
पल भर में बदल गई तीव्रता
US जियोलॉजिकल सर्वे (USGS) ने शुरू में कहा कि पहला भूकंप 7.1 तीव्रता का था, जिसे बाद में बदलकर 7.2 कर दिया गया. इसका केंद्र कैरेबियन तट पर बसे मोरोन इलाके के पश्चिम में था, जो काराकस से करीब 168 किलोमीटर पश्चिम में है. भूकंप की गहराई 22 किलोमीटर थी।
USGS ने ठीक एक मिनट बाद 7.5 तीव्रता के और भी बड़े भूकंप की जानकारी दी. दूसरे भूकंप की गहराई 10 किलोमीटर थी और इसका केंद्र मोरोन से 16 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में था।
दंग रह गए लोग
वेनेजुएला में आए ये भूकंप एक सदी से भी ज्यादा वक्त में वेनेजुएला में आए सबसे शक्तिशाली भूकंपों में से थे. राजधानी काराकस में लोग हिलती हुई इमारतों से बाहर निकल आए. कई लोग यह देखकर हैरान रह गए कि पूरी की पूरी दीवारें गिर गई थीं और सड़क से ही घर का फर्नीचर दिखाई दे रहा था. राजधानी के दो इलाकों में धूल के गुबार भी देखे गए, जहां आमतौर पर रेस्तरां और अन्य कारोबारों में काफी चहल-पहल रहती है।
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वेनेजुएला में आए लगातार दो जोरदार भूकंपों ने भारी तबाही की आशंका पैदा कर दी है. राजधानी कराकास सहित कई इलाकों में इमारतों के ढहने की खबरें सामने आई हैं, जबकि हजारों लोग घरों और दफ्तरों से बाहर निकलकर सड़कों पर आ गए. USGS यानी यूनाइटेड स्टेट्स जियोलॉजिकल सर्वे ने चेतावनी दी है कि इस आपदा में मरने वालों की संख्या 10 हजार से ज्यादा हो सकती है।
वेनेजुएला में पहला भूकंप 7.1 तीव्रता का था, जिसका केंद्र वेनेजुएला के कैरेबियाई तट पर स्थित मोरोन इलाके के पश्चिम में था। भूकंप की गहराई करीब 22 किलोमीटर दर्ज की गई. इसके कुछ ही वक्त बाद एक और शक्तिशाली झटका महसूस किया गया, जिससे लोगों में दहशत फैल गई।
अमेजन शहर तक भूकंप का असर
एपी की रिपोर्ट के मुताबिक, 7.2 और 7.5 तीव्रता वाले भूकंपों ने पूरे इलाके को हिलाकर रख दिया. यहां तक कि करीब 1,700 किलोमीटर दूर ब्राजील के अमेजन जैसे शहरों में भी इमारतों को खाली कराना पड़ा. बुधवार देर रात, कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज ने कहा कि वह देश को संबोधित करने की तैयारी कर रही थीं।
भूकंप के तीन घंटे के अंदर देश को संबोधित न करने और उस दौरान सरकार की ओर से किसी के घायल होने या मारे जाने की कोई रिपोर्ट न दिए जाने पर राजनेताओं और वेनेज़ुएला के लोगों ने रोड्रिग्ज की आलोचना की।
वेनेजुएला में जबरदस्त भूकंप के बाद अफरा-तफरी और भारी तबाही जैसे हालात
वेनेजुएला की राजधानी में आए भूकंप के बाद तबाही जैसे हालात हैं. सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियोज में वेनेजुएला के उत्तरी तट पर एक के बाद एक आए जबरदस्त भूकंप के कारण डरे हुए लोग और गिरी हुई इमारतें दिखाई दे रही हैं।
वेनेज़ुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति ने की हेल्थ वर्कर्स से काम पर लौटने की अपील
वेनेज़ुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति ने डॉक्टरों और नर्सों से कहा है कि वे भूकंप में घायल हुए लोगों के इलाज में मदद के लिए स्थानीय अस्पतालों और इमरजेंसी रूम में रिपोर्ट करें।
वेनेज़ुएला के अख़बार 'एल नैशनल' के मुताबिक, देश को संबोधित करते हुए रोड्रिगेज ने कहा, "मैं डॉक्टरों, नर्सों और सभी हेल्थ वर्कर्स से काम पर लौटने की अपील करती हूं, जिससे हम उन लोगों का इलाज कर सकें, जिन्हें अस्पतालों और प्राइवेट हेल्थ सेंटरों के इमरजेंसी रूम में लाया जा रहा है।
रोड्रिगेज ने कहा कि राष्ट्रीय, राज्य और नगरपालिका अधिकारी इस संकट से निपटने के लिए काम कर रहे हैं और देश के सबसे ज़्यादा प्रभावित राज्यों में सबसे पहले मदद भेजी जा रही है।
अमेरिकी ऊर्जा मंत्री ने वेनेज़ुएला के प्रति संवेदना जताई
अमेरिकी ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट भी उन विदेशी अधिकारियों में शामिल हो गए हैं जिन्होंने वेनेज़ुएला के साथ एकजुटता दिखाई है।
उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, "हम उन परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हैं, जिन्होंने अपनों को खोया है. इस मुश्किल वक्त में प्रभावित सभी समुदायों के लिए हिम्मत, सुरक्षा और जल्द ठीक होने की कामना करते हैं।
वेनेजुएला में भूकंप के बाद इमरजेंसी का ऐलान
वेनेज़ुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने जबरदस्त भूकंपों के बाद इमरजेंसी का ऐलान किया है। सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, भूकंप के बाद अपनी में रोड्रिगेज ने मौतों की पुष्टि की, लेकिन यह नहीं बताया कि कितने लोगों की मौत हुई है. इसके साथ ही, उन्होंने खोज और बचाव कार्यों की देखरेख के लिए एक हाई-लेवल टास्क फोर्स बनाने का भी ऐलान किया है।
भूकंप के बाद पूरे वेनेजुएला में इंटरनेट कनेक्टिविटी पर पड़ा असर
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कनेक्टिविटी में रुकावट की वजह से आने वाले कुछ घंटों में हॉटस्पॉट से मिलने वाली जानकारी और वीडियो की उपलब्धता पर भी असर पड़ सकता है.
मेक्सिको ने वेनेज़ुएला के साथ जताई एकजुटता
मेक्सिको के विदेश मंत्रालय ने वेनेज़ुएला में भूकंप आने के बाद वहां के लोगों के प्रति सहानुभूति जताई है. इसके साथ ही मेक्सिकों ने भूकंप से हुए नुकसान खेद प्रकट की है।
पल भर में बदल गई तीव्रता
US जियोलॉजिकल सर्वे (USGS) ने शुरू में कहा कि पहला भूकंप 7.1 तीव्रता का था, जिसे बाद में बदलकर 7.2 कर दिया गया. इसका केंद्र कैरेबियन तट पर बसे मोरोन इलाके के पश्चिम में था, जो काराकस से करीब 168 किलोमीटर पश्चिम में है. भूकंप की गहराई 22 किलोमीटर थी।
USGS ने ठीक एक मिनट बाद 7.5 तीव्रता के और भी बड़े भूकंप की जानकारी दी. दूसरे भूकंप की गहराई 10 किलोमीटर थी और इसका केंद्र मोरोन से 16 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में था।
दंग रह गए लोग
वेनेजुएला में आए ये भूकंप एक सदी से भी ज्यादा वक्त में वेनेजुएला में आए सबसे शक्तिशाली भूकंपों में से थे. राजधानी काराकस में लोग हिलती हुई इमारतों से बाहर निकल आए. कई लोग यह देखकर हैरान रह गए कि पूरी की पूरी दीवारें गिर गई थीं और सड़क से ही घर का फर्नीचर दिखाई दे रहा था. राजधानी के दो इलाकों में धूल के गुबार भी देखे गए, जहां आमतौर पर रेस्तरां और अन्य कारोबारों में काफी चहल-पहल रहती है।
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अल जजीरा की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अब्दुलरहमान अल थानी का मानना है कि खाड़ी राज्य, ईरान के आर्थिक सुधार के लिए वित्तीय मदद दे सकते हैं. कतर के प्रधानमंत्री की ये टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत जारी है।
दरअसल ये प्रस्तावित ढांचा 300 अरब डॉलर के निवेश कोष की रिपोर्टों से जुड़ा हुआ है. इस फंड का मकसद जंग के बाद ईरान की अर्थव्यवस्था को संभालना और वहां मची अफरा-तफरी को संभालना है।
ईरान और अमेरिका के बीच मिडिएटर बना कतर
इस मामले में कतर ईरान और अमेरिका के बीच मिडिएटर की तरह काम कर रहा है. इसके साथ ही, कतर ईरान की फ्रीज की गई संपत्तियों को रिलीज कराने और क्षेत्र में तनाव कम करने से जुड़ी वार्ताओं में भी सीधे तौर पर शामिल रहा है।
कतर ने खाड़ी देशों को तीन सुझाव दिए हैं, जिसके जरिए वो ईरान की मदद कर सकते हैं।
खाड़ी देश कई इन्वेस्टमेंट प्रोजेक्ट्स के जरिए ईरान मदद कर सकते हैं.
वो फाइनेंसिंग मैकेनिज्म का हिस्सा बन सकते हैं,
खाड़ी देश आर्थिक विकास से जुड़ी पहलों में सहयोग दे सकते हैं.
वार्ता के नतीजों पर टिका है भविष्य
हालांकि, इस योजना को लेकर अभी तक किसी भी तरह की कमिटमेंट या फंडिंग का ऐलान नहीं हुआ है. ऐसे किसी भी फंड का बनना पूरी तरह से अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत के अंतिम नतीजों पर ही निर्भर करेगा. ये इस बात पर भी निर्भर करेगा कि दोनों देशों के बीच होने वाले अंतिम समझौते को किस तरह लागू किया जाता है।
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अल जजीरा की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अब्दुलरहमान अल थानी का मानना है कि खाड़ी राज्य, ईरान के आर्थिक सुधार के लिए वित्तीय मदद दे सकते हैं. कतर के प्रधानमंत्री की ये टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत जारी है।
दरअसल ये प्रस्तावित ढांचा 300 अरब डॉलर के निवेश कोष की रिपोर्टों से जुड़ा हुआ है. इस फंड का मकसद जंग के बाद ईरान की अर्थव्यवस्था को संभालना और वहां मची अफरा-तफरी को संभालना है।
ईरान और अमेरिका के बीच मिडिएटर बना कतर
इस मामले में कतर ईरान और अमेरिका के बीच मिडिएटर की तरह काम कर रहा है. इसके साथ ही, कतर ईरान की फ्रीज की गई संपत्तियों को रिलीज कराने और क्षेत्र में तनाव कम करने से जुड़ी वार्ताओं में भी सीधे तौर पर शामिल रहा है।
कतर ने खाड़ी देशों को तीन सुझाव दिए हैं, जिसके जरिए वो ईरान की मदद कर सकते हैं।
खाड़ी देश कई इन्वेस्टमेंट प्रोजेक्ट्स के जरिए ईरान मदद कर सकते हैं.
वो फाइनेंसिंग मैकेनिज्म का हिस्सा बन सकते हैं,
खाड़ी देश आर्थिक विकास से जुड़ी पहलों में सहयोग दे सकते हैं.
वार्ता के नतीजों पर टिका है भविष्य
हालांकि, इस योजना को लेकर अभी तक किसी भी तरह की कमिटमेंट या फंडिंग का ऐलान नहीं हुआ है. ऐसे किसी भी फंड का बनना पूरी तरह से अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत के अंतिम नतीजों पर ही निर्भर करेगा. ये इस बात पर भी निर्भर करेगा कि दोनों देशों के बीच होने वाले अंतिम समझौते को किस तरह लागू किया जाता है।
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माइक्रोसॉफ्ट के को-फाउंडर बिल गेट्स ने अपने तीन एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर्स का खुलासा किया है. गेट्स ने यौन अपराधी जेफरी एपस्टीन पर आरोप लगाया कि वो उनके एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर्स के बारे में जानता था. बिल गेट्स की मानें तो एपस्टीन उन्हें ब्लैकमेल करने की साजिश रच रहा था।
जेफरी एपस्टीन के नेटवर्क और उसके संपर्कों की जांच कर रही यूएस हाउस ओवरसाइट कमेटी की रिपोर्ट में बिल गेट्स को लेकर ये खुलासा हुआ है. हाल ही में न्याय विभाग ने कुछ नए दस्तावेज जारी किए थे, जिसके बाद एपस्टीन के साथ बिल गेट्स के पुराने संबंधों की फिर से जांच शुरू हुई।
इसी सिलसिले में सांसदों ने गेट्स का बयान दर्ज किया. वो 10 जून को खुद इस कमेटी के सामने पेश हुए थे. इस दौरान गेट्स ने बताया कि एपस्टीन को उनके दो रूसी महिलाओं के साथ अफेयर्स के बारे में पूरी जानकारी थी।
इन तीन महिलाओं संग चल रहा था गेट्स का अफेयर
गेट्स ने बताया कि उनका रूसी ब्रिज खिलाड़ी मिला अंतोनोवा और न्यूक्लियर फिजिसिस्ट करीमा निगमातुलिना के साथ एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर था. गेट्स ने मेडिकल इंडस्ट्रलिस्ट एलिस जैकब्स नेसेलरॉड के साथ भी एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर होने की पुष्टि की।
जारी किए गए गवाही के ट्रांसक्रिप्ट के मुताबिक, बिल गेट्स ने कहा, 'इन अफेयर्स का एपस्टीन के साथ मेरी बातचीत से कोई लेना-देना नहीं था, लेकिन ये मेरे परिवार के लिए दर्दनाक थे. एपस्टीन मेरी बेवफाई की जानकारी का इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहा था. इसके साथ ही उसने कई झूठ भी जोड़े थे. ताकि वो मुझ पर दोबारा उसके साथ जुड़ने के लिए दबाव बना सके।
हालांकि बिल गेट्स ने एपस्टीन के किसी भी जुर्म में शामिल होने से साफ इनकार किया. उन्होंने माना कि उसके साथ संपर्क बनाए रखना एक गलती थी. गेट्स ने बताया कि वो फिलांथ्रोपी के कामों पर चर्चा को लेकर एपस्टीन से मिलते थे. उन्होंने कहा, 'मैं जानता हूं कि वो दोषी ठहराया गया था. मुझे इसके बारे में पता था. मैं एक सीमित भूमिका में उससे मिलने का रिस्क उठाने के लिए तैयार था।
क्या एपस्टीन ने ब्लैकमेल करने की कोशिश की?
बिल गेट्स ने दावा किया कि एपस्टीन उनकी पर्सनल लाइफ की जानकारी का गलत फायदा उठाने की कोशिश कर रहा था. एपस्टीन उनके अफेयर्स के बारे में जानने के बाद उन्हें ब्लैकमेल करने के बारे में सोच रहा था. हालांकि, उसने ऐसा कभी नहीं किया. गेट्स ने कहा, 'उसने मुझे कभी ब्लैकमेल नहीं किया, लेकिन इन ईमेल्स को देखने से ये खतरा पैदा होता है कि उसने मुझे ब्लैकमेल करने के बारे में सोचा था।
माइक्रोसॉफ्ट के को-फाउंडर बिल गेट्स ने अपने तीन एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर्स का खुलासा किया है. गेट्स ने यौन अपराधी जेफरी एपस्टीन पर आरोप लगाया कि वो उनके एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर्स के बारे में जानता था. बिल गेट्स की मानें तो एपस्टीन उन्हें ब्लैकमेल करने की साजिश रच रहा था।
जेफरी एपस्टीन के नेटवर्क और उसके संपर्कों की जांच कर रही यूएस हाउस ओवरसाइट कमेटी की रिपोर्ट में बिल गेट्स को लेकर ये खुलासा हुआ है. हाल ही में न्याय विभाग ने कुछ नए दस्तावेज जारी किए थे, जिसके बाद एपस्टीन के साथ बिल गेट्स के पुराने संबंधों की फिर से जांच शुरू हुई।
इसी सिलसिले में सांसदों ने गेट्स का बयान दर्ज किया. वो 10 जून को खुद इस कमेटी के सामने पेश हुए थे. इस दौरान गेट्स ने बताया कि एपस्टीन को उनके दो रूसी महिलाओं के साथ अफेयर्स के बारे में पूरी जानकारी थी।
इन तीन महिलाओं संग चल रहा था गेट्स का अफेयर
गेट्स ने बताया कि उनका रूसी ब्रिज खिलाड़ी मिला अंतोनोवा और न्यूक्लियर फिजिसिस्ट करीमा निगमातुलिना के साथ एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर था. गेट्स ने मेडिकल इंडस्ट्रलिस्ट एलिस जैकब्स नेसेलरॉड के साथ भी एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर होने की पुष्टि की।
जारी किए गए गवाही के ट्रांसक्रिप्ट के मुताबिक, बिल गेट्स ने कहा, 'इन अफेयर्स का एपस्टीन के साथ मेरी बातचीत से कोई लेना-देना नहीं था, लेकिन ये मेरे परिवार के लिए दर्दनाक थे. एपस्टीन मेरी बेवफाई की जानकारी का इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहा था. इसके साथ ही उसने कई झूठ भी जोड़े थे. ताकि वो मुझ पर दोबारा उसके साथ जुड़ने के लिए दबाव बना सके।
हालांकि बिल गेट्स ने एपस्टीन के किसी भी जुर्म में शामिल होने से साफ इनकार किया. उन्होंने माना कि उसके साथ संपर्क बनाए रखना एक गलती थी. गेट्स ने बताया कि वो फिलांथ्रोपी के कामों पर चर्चा को लेकर एपस्टीन से मिलते थे. उन्होंने कहा, 'मैं जानता हूं कि वो दोषी ठहराया गया था. मुझे इसके बारे में पता था. मैं एक सीमित भूमिका में उससे मिलने का रिस्क उठाने के लिए तैयार था।
क्या एपस्टीन ने ब्लैकमेल करने की कोशिश की?
बिल गेट्स ने दावा किया कि एपस्टीन उनकी पर्सनल लाइफ की जानकारी का गलत फायदा उठाने की कोशिश कर रहा था. एपस्टीन उनके अफेयर्स के बारे में जानने के बाद उन्हें ब्लैकमेल करने के बारे में सोच रहा था. हालांकि, उसने ऐसा कभी नहीं किया. गेट्स ने कहा, 'उसने मुझे कभी ब्लैकमेल नहीं किया, लेकिन इन ईमेल्स को देखने से ये खतरा पैदा होता है कि उसने मुझे ब्लैकमेल करने के बारे में सोचा था।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का गोल्डन डोम फॉर अमेरिका (GDA) प्रोजेक्ट देश की सबसे महत्वाकांक्षी मिसाइल डिफेंस प्रोजेक्ट है. हाल ही में इसका पहला लाइव इंटरसेप्ट टेस्ट सफल रहा. पेंटागन के अनुसार DDAD (Dynamic Defense Autonomous Defeat) सिस्टम ने ऑटोमैटिकली कई खतरे वाले लक्ष्यों को पहचाना, ट्रैक किया और डायरेक्टेड एनर्जी (लेजर और माइक्रोवेव) से उन्हें नष्ट कर दिया।
यह इजरायल के आयरन डोम से प्रेरित है लेकिन बहुत बड़ा और एडवांस है. इसका लक्ष्य अमेरिकी धरती को बैलिस्टिक मिसाइलों, हाइपरसोनिक हथियारों, क्रूज मिसाइलों, ड्रोन्स और अन्य हवाई खतरों से पूर्ण सुरक्षा प्रदान करना है. प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत शुरू में 175 बिलियन डॉलर बताई गई थी, लेकिन अब यह 1.2 ट्रिलियन डॉलर या इससे भी ज्यादा पहुंच सकती है।
डायरेक्टेड एनर्जी और ऑटोनॉमस सिस्टम
टेस्ट के दौरान एलीट सैनिकों ने अगली पीढ़ी की तकनीक के साथ काम किया. पारंपरिक मिसाइल इंटरसेप्टर्स के साथ-साथ डायरेक्टेड एनर्जी हथियारों का इस्तेमाल किया गया, जो बिना गोला-बारूद के लक्ष्य को जलाकर या बिजली से नष्ट कर देते हैं।
यह सफलता इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि आधुनिक युद्ध में ड्रोन स्वार्म और हाइपरसोनिक मिसाइलें बड़ी चुनौती हैं. DDAD सिस्टम ने स्वायत्त रूप से निर्णय लेकर खतरे को रोका, जो भविष्य के युद्ध में बहुत उपयोगी साबित होगा. ट्रंप ने इसे देखते हुए कहा कि यह रीगन के स्ट्रैटेजिक डिफेंस इनिशिएटिव (SDI) यानी स्टार वॉर्स सपने को हकीकत बना रहा है. वन बिग ब्यूटीफुल बिल से मिले फंडिंग ने इस मील के पत्थर को संभव बनाया।
गोल्डन डोम की परतें: लेयर्ड डिफेंस सिस्टम
गोल्डन डोम एक 'सिस्टम ऑफ सिस्टम्स' है. इसमें जमीन, समुद्र, हवा और स्पेस आधारित सेंसर और इंटरसेप्टर्स शामिल हैं।
स्पेस-बेस्ड सेंसर: शुरुआती चेतावनी के लिए उपग्रह।
ग्राउंड और शिप-बेस्ड इंटरसेप्टर्स: पारंपरिक मिसाइलों को रोकने के लिए.
डायरेक्टेड एनर्जी: लेजर और माइक्रोवेव हथियार तेज और सस्ते हमलों के लिए।
ऑटोनॉमस कंट्रोल: AI और मशीन लर्निंग से ऑटोमैटिक फैसले।
यह सिस्टम पूरे अमेरिकी हवाई क्षेत्र को कवर करेगा. दुश्मन के किसी भी हमले को पहले चरण में ही रोकने की कोशिश करेगा।
रीगन के SDI से तुलना और विकास
1980 के दशक में राष्ट्रपति रीगन ने SDI की घोषणा की थी, जो स्पेस-बेस्ड मिसाइल डिफेंस का सपना था. उस समय तकनीक कच्ची थी, इसलिए इसे स्टार वॉर्स कहा गया. अब आधुनिक सेंसर, AI, डायरेक्टेड एनर्जी और सस्ती स्पेस लॉन्च तकनीक के कारण गोल्डन डोम ज्यादा व्यावहारिक लग रहा है. ट्रंप ने जनवरी 2025 में एग्जीक्यूटिव ऑर्डर से इसकी शुरुआत की. मई 2025 में इसे गोल्डन डोम नाम दिया गया. लक्ष्य है 2029 तक शुरुआती क्षमता हासिल करना।
लागत, तकनीक और अंतरराष्ट्रीय प्रभाव
विशेषज्ञों के अनुसार लागत 1 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा हो सकती है. स्पेस-बेस्ड इंटरसेप्टर्स महंगे और मुश्किल हैं. कुछ विश्लेषक कहते हैं कि 100 प्रतिशत सुरक्षा असंभव है, खासकर रूस और चीन जैसे बड़े दुश्मनों के खिलाफ. रूस और चीन इसे आक्रामक मानकर अपना हथियार कार्यक्रम बढ़ा सकते हैं।
इससे हथियारों की नई दौड़ शुरू हो सकती है. अमेरिका को औद्योगिक क्षमता बढ़ानी होगी ताकि बड़े पैमाने पर उत्पादन हो सके. फिर भी समर्थक कहते हैं कि यह पीस थ्रू स्ट्रेंथ की नीति है. दुश्मन हमला करने से पहले सोचेंगे. यह सफल टेस्ट गोल्डन डोम को आगे बढ़ाएगा। अगले चरणों में ज्यादा बड़े टेस्ट और स्पेस कंपोनेंट्स शामिल किए जाएंगे. पेंटागन और इंडस्ट्री मिलकर काम कर रही है. ट्रंप प्रशासन इसे वॉर डिपार्टमेंट के तहत मजबूत कर रहा है. अगर सफल हुआ तो अमेरिका की होमलैंड सुरक्षा अभूतपूर्व स्तर पर पहुंच जाएगी।
यह प्रोजेक्ट दिखाता है कि अमेरिका कैसे पारंपरिक युद्ध से आगे बढ़कर हाई-टेक डिफेंस पर फोकस कर रहा है. ड्रोन्स, हाइपरसोनिक और न्यूक्लियर खतरे के युग में ऐसी सुरक्षा जरूरी है।
सुरक्षा का नया युग
गोल्डन डोम सिर्फ एक हथियार प्रणाली नहीं है, बल्कि अमेरिका की रक्षा सोच का बदलाव है. पहला टेस्ट सफल होने से उम्मीद बढ़ी है. हालांकि चुनौतियां बाकी हैं – लागत, समय और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया. अगर यह प्रोजेक्ट अपनी राह पर रही तो 21वीं सदी के अंत तक अमेरिका के पास दुनिया का सबसे मजबूत मिसाइल डिफेंस शील्ड होगा. ट्रंप इसे अपनी विरासत बना रहे हैं, जो रीगन की तरह इतिहास में दर्ज होगी।
अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के प्रमुख राफेल मारियानो ग्रॉसी ने बुधवार को संकेत दिया कि ईरान के न्यूक्लियर एनरिचमेंट साइट्स का निरीक्षण उनकी टीम द्वारा किया जाएगा. यह अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध समाप्त करने के लिए हुए अंतरिम समझौते का एक अहम हिस्सा माना जा रहा है. IAEA प्रमुख का यह इस मामले में अब तक का सबसे स्पष्ट बयान है. संयुक्त राष्ट्र की यह परमाणु निगरानी एजेंसी ईरान के परमाणु भंडार की स्थिति तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
इजरायल ने ईरान के साथ 2025 में 12 दिनों तक चले युद्ध के दौरान उनके परमाणु स्थलों को निशाना बनाया था. अमेरिका ने भी B-2 बमवर्षक विमानों से ईरान के फोर्दो, नतांज और इस्फहान न्यूक्लियर फैसेलिटी पर हमले किए थे. इन हमलों के बाद से ईरान ने IAEA को उन परमाणु सुविधाओं तक पहुंचने से रोक रखा है. इन परमाणु सुविधाओं में ईरान के पास इतना उच्च स्तर पर संवर्धित यूरेनियम होने का अनुमान है कि यदि वह चाहे तो लगभग 10 परमाणु बम बना सकता है।
ईरान लगातार यह दावा करता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण है. हालांकि, वह दुनिया का एकमात्र ऐसा देश है जिसके पास बिना किसी घोषित वेपन प्रोग्राम के 60 प्रतिशत तक संवर्धित यूरेनियम मौजूद है. इन परमाणु स्थलों का IAEA की टीम द्वारा निरीक्षण करने के मामले में अमेरिका और ईरान ने 23 जून को विरोधाभासी बयान दिए थे. अमेरिका ने दावा किया था कि ईरान ने अपने परमाणु स्थलों का निरीक्षण करने की अनुमति दे दी है. वहीं, ईरान ने इस तरह की कोई अनुमति देने से इनकार किया था।
ईरान के परमाणु स्थलों का निरीक्षण होकर रहेगा: IAEA
जापान के फुकुशिमा दाइची परमाणु संयंत्र में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में IAEA प्रमुख राफेल मारियानो ग्रॉसी ने पत्रकारों से कहा, 'मैं राजनीतिक बयानों को समझ सकता हूं, वे वास्तविकता का हिस्सा हैं. लेकिन मैं आपको यह याद दिलाना चाहता हूं कि दोनों देशों के राष्ट्रपतियों द्वारा एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं. उस समझौते में स्पष्ट रूप से लिखा है कि परमाणु सामग्री और परमाणु सुविधाओं से जुड़ी गतिविधियों की निगरानी IAEA द्वारा की जाएगी. जाहिर है, ऐसा करने के लिए हमें निरीक्षण करना होगा. यह निरीक्षण परसों हो, एक हफ्ते बाद हो या 10 दिन बाद, यह महत्वपूर्ण जरूर है, लेकिन सबसे जरूरी बात यह है कि यह होगा।
ये निरीक्षण इसलिए बेहद अहम माने जा रहे हैं क्योंकि समझौते के तहत ईरान के उच्च स्तर पर संवर्धित यूरेनियम भंडार को कम संवर्धित स्तर तक लाने यानी 'डाउनब्लेंड' करने की बात कही गई है. ईरान की ओर से ग्रॉसी के इस बयान पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है. ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने मंगलवार को तेहरान में पत्रकारों से कहा था कि पिछले साल अमेरिका द्वारा बमबारी किए गए परमाणु स्थलों का निरीक्षण करने के लिए संयुक्त राष्ट्र के निरीक्षकों के आने की कोई योजना नहीं है।
उन्होंने यह बयान अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की टिप्पणी को खारिज करते हुए दिया था. पिछले साल के 12 दिन तक चले युद्ध के बाद से IAEA को ईरान के कुछ अन्य परमाणु स्थलों, जैसे बुशेहर परमाणु ऊर्जा संयंत्र, का दौरा करने की अनुमति दी गई है. लेकिन संवर्धन स्थलों तक पहुंच न होने के कारण एजेंसी यह सत्यापित नहीं कर पा रही है कि ईरान के यूरेनियम भंडार की वास्तविक स्थिति क्या है और यूरेनियम संवर्धन में इस्तेमाल होने वाली सेंट्रीफ्यूज मशीनों की स्थिति कैसी है. ईरान और IAEA दोनों का कहना है कि तेहरान फिलहाल यूरेनियम संवर्धन नहीं कर रहा है. हालांकि, परमाणु विशेषज्ञों को आशंका है कि ईरान अपने यूरेनियम भंडार को किसी गुप्त स्थान पर स्थानांतरित कर सकता है।
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