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यहां के सिविल अस्पताल में एक बेहद गंभीर मामला सामने आ रहा है। अस्पताल के पास दो भाई चाय की स्टाल लगते थे। कुछ समय पहले छोटे भाई की तबीयत खराब होने पर खूनी दस्त होने लगी। इस पर पिता और भाई ने खरसिया सिविल अस्पताल में जांच कराकर परामर्श लिया।
पिता राजेंद्र प्रसाद शर्मा ने बताया कि छोटे बेटे ताम्रेश्वर शर्मा को खूनी दस्त होने पर खरसिया सिविल अस्पताल के डाक्टर विक्रम राठिया से जांच कराई। जांच के बाद डॉक्टर ने ऑपरेशन कराने की जरुरत बताई। इस पर पिता ने आपरेशन के लिए सहमति दे दी। गुरुवार ताम्रेश्वर को अस्पताल में भर्ती कराया गया।
यहां जांच के बाद आपरेशन थिएटर में ले जाया गया। पिता ऑपरेशन थियेटर के गेट पर अपने बेटे का आपरेशन पूरा होने का इंतजार करते रहे। कुछ समय बाद आपरेशन थिएटर से निकले डाक्टर और उनके सहयोगी नर्स ने पिता को बताया गया कि ताम्रेश्वर को होश नहीं आ रहा है उसे मेडिकल कालेज अस्पताल रेफर किया जाएगा।
इसके बाद पिता मरीज को लेकर रायगढ़ पहुंचे। यहां बताया गया कि तम्रेश्वर की मौत खरसिया में ही हो गई थी। इस बात की जानकारी से परिजन आक्रोशित हुए और खरसिया अस्पताल पहुंचकर हंगामा करने लगे। नौजवान की मृत्यु से आक्रोशित लोगों ने सड़क जाम कर दिया।
इसकी जानकारी होने पर पुलिस-प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और स्थिति पर काबू पाने की कोशिश करती रही। पिता का आरोप है कि पुत्र की मृत्यु डाक्टर की लापरवाही से हुई है। पुत्र को केवल पाइल्स की शिकायत थी। इसके आपरेशन से किसी की मृत्यु नहीं होती। 22 साल के युवक की मृत्यु डाक्टर की लापरवाही के कारण हुई है।
खरसिया नगर कांग्रेस के अध्यक्ष सुनील शर्मा ने खरसिया सिविल अस्पताल में युवक की मृत्यु के विरोध में चक्का जाम को अपना समर्थन दिया।
पूर्व में किडनी कांड के लिप्त व्यक्ति को खरसिया सिविल अस्पताल का प्रभारी बनाए जाने पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि बवासीर के ऑपरेशन से युवक की मृत्यु की घटना ने सिविल अस्पताल की शाख को कलंकित किया है। ऐसे डाक्टरों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए।
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पर्यटन एवं संस्कृति मंत्रीराजेश अग्रवाल आज लखनपुर में आयोजित शाला प्रवेश उत्सव कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने नवप्रवेशी विद्यार्थियों का पुष्प एवं तिलक लगाकर आत्मीय स्वागत किया तथा उन्हें अध्ययन सामग्री प्रदान कर नए शैक्षणिक जीवन की शुभकामनाएं दीं। कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने आकर्षक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देकर सभी अतिथियों का स्वागत किया, जिससे पूरा वातावरण उत्साह और उल्लास से भर गया।
अपने संबोधन में मंत्रीराजेश अग्रवाल ने विद्यार्थियों के साथ अपने विद्यार्थी जीवन की स्मृतियां साझा करते हुए कहा कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। नियमित अध्ययन, अनुशासन, शिक्षकों का सम्मान और माता-पिता का आशीर्वाद ही जीवन में आगे बढ़ने का सबसे मजबूत मार्ग है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक विद्यार्थी को बड़े सपने देखने चाहिए और उन्हें साकार करने के लिए पूरी निष्ठा एवं लगन से प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज के विद्यार्थी ही कल के वैज्ञानिक, चिकित्सक, शिक्षक, प्रशासक और जनप्रतिनिधि बनकर देश एवं समाज के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्रीराजेश अग्रवाल ने कहा कि शिक्षा, ज्ञान और संस्कार ही जीवन की सबसे बड़ी पूंजी हैं। यही तीनों किसी भी विद्यार्थी की सफलता का मजबूत आधार बनते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से मन लगाकर अध्ययन करने, अनुशासन का पालन करने, अपने लक्ष्य स्पष्ट रखने तथा निरंतर मेहनत के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया।
उन्होंने शिक्षकों का आह्वान किया कि वे विद्यार्थियों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ नैतिक मूल्यों एवं संस्कारों का भी विकास करें, जबकि अभिभावकों से बच्चों की पढ़ाई में निरंतर सहयोग देने की अपील की। उन्होंने कहा कि विद्यालय केवल शिक्षा प्राप्त करने का स्थान नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण की सबसे महत्वपूर्ण पाठशाला है।
मंत्रीअग्रवाल ने सभी विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों को नवीन शैक्षणिक सत्र की शुभकामनाएं देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि सभी विद्यार्थी पूरे मनोयोग से अध्ययन कर अपने विद्यालय, परिवार, क्षेत्र और प्रदेश का नाम रोशन करेंगे। कार्यक्रम में लुण्ड्रा विधायकप्रबोध मिंज, शिक्षकगण, अभिभावक, बड़ी संख्या में विद्यार्थी तथा स्थानीय जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, नवप्रवेशी विद्यार्थियों के सम्मान और सामूहिक सहभागिता ने शाला प्रवेश उत्सव को उत्साहपूर्ण बना दिया।
]]>पर्यटन एवं संस्कृति मंत्रीराजेश अग्रवाल गांधी स्टेडियम, अंबिकापुर में सरगुजा जिला बास्केटबॉल संघ के तत्वावधान में आयोजित जिला स्तरीय बास्केटबॉल लीग चौम्पियनशिप-2026 के समापन समारोह में शामिल हुए। उन्होंने प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को पदक एवं ट्रॉफी प्रदान कर सम्मानित किया तथा सभी प्रतिभागी खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दी।
इस अवसर पर मंत्रीराजेश अग्रवाल ने कहा कि खेल केवल जीत और हार का माध्यम नहीं हैं, बल्कि अनुशासन, टीम भावना, नेतृत्व क्षमता, आत्मविश्वास और संघर्ष करने का जज्बा भी सिखाते हैं। खेलों से बच्चे शारीरिक एवं मानसिक रूप से सशक्त बनते हैं तथा जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा प्राप्त करते हैं। उन्होंने कहा कि खेल युवा शक्ति के व्यक्तित्व विकास का सबसे प्रभावी माध्यम हैं और प्रत्येक खिलाड़ी को पूरे समर्पण, ईमानदारी और खेल भावना के साथ आगे बढ़ना चाहिए।
उन्होंने प्रतियोगिता में भाग लेने वाले सभी खिलाड़ियों की सराहना करते हुए कहा कि प्रतिस्पर्धा का वास्तविक उद्देश्य प्रतिभा को निखारना और बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित करना है। ऐसे आयोजन खिलाड़ियों को अपनी क्षमता प्रदर्शित करने के साथ-साथ बड़े मंचों तक पहुंचने का अवसर प्रदान करते हैं। उन्होंने सभी खिलाड़ियों से नियमित अभ्यास जारी रखने और प्रदेश व देश का नाम रोशन करने का आह्वान किया।
समापन समारोह में फाइनल मुकाबलों के बाद विजेता एवं उपविजेता टीमों को पदक और ट्रॉफी प्रदान कर सम्मानित किया गया। प्रतियोगिता में भाग लेने वाले सभी खिलाड़ियों को जिला स्तरीय सहभागिता प्रमाण-पत्र भी वितरित किए गए। बालिका वर्ग के फाइनल में सरगुजा बॉयलर्स ने सरगुजा फाइटर्स को पराजित कर खिताब अपने नाम किया, जबकि बालक वर्ग के फाइनल में सरगुजा लायंस ने सरगुजा ब्लैक पैंथर्स को हराकर चौम्पियन बनने का गौरव प्राप्त किया।
जिला स्तरीय बास्केटबॉल लीग चौम्पियनशिप का आयोजन खिलाड़ियों को अधिक से अधिक प्रतिस्पर्धात्मक मैचों का अनुभव उपलब्ध कराने और जिले में बास्केटबॉल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से किया गया। प्रतियोगिता में बड़ी संख्या में खिलाड़ियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
इस अवसर पर पूर्व राष्ट्रीय बास्केटबॉल कोचराजेश प्रताप सिंह, पूर्व खिलाड़ी एवं समाजसेवीसंजय अग्रवाल, प्रदेश कार्यकारिणी सदस्यनिशांत सिंह गोयल सहित खेल प्रेमी, खिलाड़ी, प्रशिक्षक और बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे। प्रतियोगिता के सफल आयोजन में आयोजन समिति एवं जिला बास्केटबॉल संघ के पदाधिकारियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
]]>पर्यटन एवं संस्कृति मंत्रीराजेश अग्रवाल गांधी स्टेडियम, अंबिकापुर में सरगुजा जिला बास्केटबॉल संघ के तत्वावधान में आयोजित जिला स्तरीय बास्केटबॉल लीग चौम्पियनशिप-2026 के समापन समारोह में शामिल हुए। उन्होंने प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को पदक एवं ट्रॉफी प्रदान कर सम्मानित किया तथा सभी प्रतिभागी खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दी।
इस अवसर पर मंत्रीराजेश अग्रवाल ने कहा कि खेल केवल जीत और हार का माध्यम नहीं हैं, बल्कि अनुशासन, टीम भावना, नेतृत्व क्षमता, आत्मविश्वास और संघर्ष करने का जज्बा भी सिखाते हैं। खेलों से बच्चे शारीरिक एवं मानसिक रूप से सशक्त बनते हैं तथा जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा प्राप्त करते हैं। उन्होंने कहा कि खेल युवा शक्ति के व्यक्तित्व विकास का सबसे प्रभावी माध्यम हैं और प्रत्येक खिलाड़ी को पूरे समर्पण, ईमानदारी और खेल भावना के साथ आगे बढ़ना चाहिए।
उन्होंने प्रतियोगिता में भाग लेने वाले सभी खिलाड़ियों की सराहना करते हुए कहा कि प्रतिस्पर्धा का वास्तविक उद्देश्य प्रतिभा को निखारना और बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित करना है। ऐसे आयोजन खिलाड़ियों को अपनी क्षमता प्रदर्शित करने के साथ-साथ बड़े मंचों तक पहुंचने का अवसर प्रदान करते हैं। उन्होंने सभी खिलाड़ियों से नियमित अभ्यास जारी रखने और प्रदेश व देश का नाम रोशन करने का आह्वान किया।
समापन समारोह में फाइनल मुकाबलों के बाद विजेता एवं उपविजेता टीमों को पदक और ट्रॉफी प्रदान कर सम्मानित किया गया। प्रतियोगिता में भाग लेने वाले सभी खिलाड़ियों को जिला स्तरीय सहभागिता प्रमाण-पत्र भी वितरित किए गए। बालिका वर्ग के फाइनल में सरगुजा बॉयलर्स ने सरगुजा फाइटर्स को पराजित कर खिताब अपने नाम किया, जबकि बालक वर्ग के फाइनल में सरगुजा लायंस ने सरगुजा ब्लैक पैंथर्स को हराकर चौम्पियन बनने का गौरव प्राप्त किया।
जिला स्तरीय बास्केटबॉल लीग चौम्पियनशिप का आयोजन खिलाड़ियों को अधिक से अधिक प्रतिस्पर्धात्मक मैचों का अनुभव उपलब्ध कराने और जिले में बास्केटबॉल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से किया गया। प्रतियोगिता में बड़ी संख्या में खिलाड़ियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
इस अवसर पर पूर्व राष्ट्रीय बास्केटबॉल कोचराजेश प्रताप सिंह, पूर्व खिलाड़ी एवं समाजसेवीसंजय अग्रवाल, प्रदेश कार्यकारिणी सदस्यनिशांत सिंह गोयल सहित खेल प्रेमी, खिलाड़ी, प्रशिक्षक और बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे। प्रतियोगिता के सफल आयोजन में आयोजन समिति एवं जिला बास्केटबॉल संघ के पदाधिकारियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
]]>छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड द्वारा 24 जून को रायपुर में वैद्यों के हितकारी योजनाओं की कार्ययोजना एवं भविष्य के रोडमैप पर महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता बोर्ड के अध्यक्ष श्री विकास मरकाम ने की। इस अवसर पर राज्य के विभिन्न जिलों एवं सुदूर अंचलों से आए 8 वैद्य संघों के 60 प्रतिनिधि वैद्य शामिल हुए।
वैद्य समुदाय के योगदान का किया गया सम्मान
बैठक के प्रारंभ में बोर्ड के अध्यक्ष श्री विकास मरकाम एवं उपाध्यक्ष श्री अंजय शुक्ला ने सभी वैद्य प्रतिनिधियों का स्वागत एवं अभिनंदन किया। बोर्ड के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री जे. ए. सी. एस. राव ने बोर्ड द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं की जानकारी देते हुए वैद्यों के संरक्षण और सशक्तिकरण के लिए किए जा रहे प्रयासों पर प्रकाश डाला।
पारंपरिक ज्ञान को सहेजने के लिए आयोजित हो रहे वैद्य सम्मेलन
मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने बताया कि पारंपरिक उपचार पद्धतियों और औषधीय ज्ञान को संरक्षित कर नई पीढ़ी तक पहुंचाने के उद्देश्य से नियमित रूप से वैद्य सम्मेलनों का आयोजन किया जाता है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में अब तक कुल 11 वैद्य सम्मेलन आयोजित किए जा चुके हैं, जिनमें 1 राज्य स्तरीय, 6 संभाग स्तरीय और 4 जिला स्तरीय सम्मेलन शामिल हैं।
औषधीय पौधों की खेती और संरक्षण का दिया जा रहा प्रशिक्षण
बोर्ड द्वारा वैद्यों को औषधीय पौधों की खेती, विनाश-विहीन विदोहन तकनीक तथा वनौषधियों के संरक्षण संबंधी प्रशिक्षण प्रदान किए जाते हैं। इन प्रशिक्षणों के माध्यम से वैद्य पारंपरिक उपचार पद्धतियों से जुड़े अपने अनुभवों और ज्ञान का आदान-प्रदान भी करते हैं।
37 वैद्यों का हुआ प्रमाणीकरण
वैद्यों की पारंपरिक उपचार पद्धतियों को मान्यता देने के उद्देश्य से बोर्ड द्वारा क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया (QCI) के माध्यम से अब तक 37 वैद्यों का प्रमाणीकरण कराया गया है। इससे उनकी सेवाओं की विश्वसनीयता और पहचान को बढ़ावा मिला है।
हीलर हर्बल गार्डन योजना से मिल रहा सहयोग
बोर्ड द्वारा संचालित हीलर हर्बल गार्डन योजना के तहत वैद्यों को उनके घर या बाड़ी में उपयोगी औषधीय पौधों का उद्यान विकसित करने के लिए तकनीकी एवं आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। इसके साथ ही वैद्यों के निवास ग्रामों के विद्यालयों में स्कूल हर्बल गार्डन विकसित करने तथा उनकी देखरेख के लिए भी सहायता उपलब्ध कराई जाती है।
निःशुल्क औषधीय पौधा वितरण और पल्वराइजर मशीन की सुविधा
बोर्ड द्वारा होम हर्बल गार्डन योजना के अंतर्गत निःशुल्क औषधीय पौधों का वितरण किया जा रहा है। वहीं आर्थिक रूप से कमजोर वैद्यों को जड़ी-बूटियों के प्रसंस्करण में सुविधा देने के लिए राज्य के 28 जिलों में कुल 40 निःशुल्क पल्वराइजर मशीनें उपलब्ध कराई गई हैं।
योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए बनी विस्तृत कार्ययोजना
बैठक में हीलर हर्बल गार्डन, स्कूल एवं होम हर्बल गार्डन, वैद्य सम्मेलन, प्रशिक्षण कार्यक्रम, वैद्य प्रमाणीकरण तथा पल्वराइजर मशीन वितरण जैसी योजनाओं के प्रभावी संचालन और भविष्य की कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा की गई। सभी वैद्य प्रतिनिधियों की सहमति से इन योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश तय किए गए।
वैद्यों के संरक्षण और उत्थान के लिए बोर्ड प्रतिबद्ध
बैठक के अंत में अध्यक्ष श्री विकास मरकाम ने कहा कि बोर्ड राज्य के वैद्यों की स्वास्थ्य परंपराओं, पारंपरिक उपचार पद्धतियों, ज्ञान संरक्षण, क्षमता विकास और सामाजिक-आर्थिक उत्थान के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहा है।
वहीं उपाध्यक्ष श्री अंजय शुक्ला ने कहा कि वैद्यों की मांग के अनुरूप ग्राम पंचायतों के माध्यम से जड़ी-बूटी आधारित उपचार एवं परामर्श केंद्रों के लिए स्थान उपलब्ध कराने के प्रयास किए जाएंगे, ताकि पारंपरिक चिकित्सा पद्धति को और अधिक मजबूती मिल सके।
छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड द्वारा 24 जून को रायपुर में वैद्यों के हितकारी योजनाओं की कार्ययोजना एवं भविष्य के रोडमैप पर महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता बोर्ड के अध्यक्ष श्री विकास मरकाम ने की। इस अवसर पर राज्य के विभिन्न जिलों एवं सुदूर अंचलों से आए 8 वैद्य संघों के 60 प्रतिनिधि वैद्य शामिल हुए।
वैद्य समुदाय के योगदान का किया गया सम्मान
बैठक के प्रारंभ में बोर्ड के अध्यक्ष श्री विकास मरकाम एवं उपाध्यक्ष श्री अंजय शुक्ला ने सभी वैद्य प्रतिनिधियों का स्वागत एवं अभिनंदन किया। बोर्ड के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री जे. ए. सी. एस. राव ने बोर्ड द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं की जानकारी देते हुए वैद्यों के संरक्षण और सशक्तिकरण के लिए किए जा रहे प्रयासों पर प्रकाश डाला।
पारंपरिक ज्ञान को सहेजने के लिए आयोजित हो रहे वैद्य सम्मेलन
मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने बताया कि पारंपरिक उपचार पद्धतियों और औषधीय ज्ञान को संरक्षित कर नई पीढ़ी तक पहुंचाने के उद्देश्य से नियमित रूप से वैद्य सम्मेलनों का आयोजन किया जाता है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में अब तक कुल 11 वैद्य सम्मेलन आयोजित किए जा चुके हैं, जिनमें 1 राज्य स्तरीय, 6 संभाग स्तरीय और 4 जिला स्तरीय सम्मेलन शामिल हैं।
औषधीय पौधों की खेती और संरक्षण का दिया जा रहा प्रशिक्षण
बोर्ड द्वारा वैद्यों को औषधीय पौधों की खेती, विनाश-विहीन विदोहन तकनीक तथा वनौषधियों के संरक्षण संबंधी प्रशिक्षण प्रदान किए जाते हैं। इन प्रशिक्षणों के माध्यम से वैद्य पारंपरिक उपचार पद्धतियों से जुड़े अपने अनुभवों और ज्ञान का आदान-प्रदान भी करते हैं।
37 वैद्यों का हुआ प्रमाणीकरण
वैद्यों की पारंपरिक उपचार पद्धतियों को मान्यता देने के उद्देश्य से बोर्ड द्वारा क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया (QCI) के माध्यम से अब तक 37 वैद्यों का प्रमाणीकरण कराया गया है। इससे उनकी सेवाओं की विश्वसनीयता और पहचान को बढ़ावा मिला है।
हीलर हर्बल गार्डन योजना से मिल रहा सहयोग
बोर्ड द्वारा संचालित हीलर हर्बल गार्डन योजना के तहत वैद्यों को उनके घर या बाड़ी में उपयोगी औषधीय पौधों का उद्यान विकसित करने के लिए तकनीकी एवं आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। इसके साथ ही वैद्यों के निवास ग्रामों के विद्यालयों में स्कूल हर्बल गार्डन विकसित करने तथा उनकी देखरेख के लिए भी सहायता उपलब्ध कराई जाती है।
निःशुल्क औषधीय पौधा वितरण और पल्वराइजर मशीन की सुविधा
बोर्ड द्वारा होम हर्बल गार्डन योजना के अंतर्गत निःशुल्क औषधीय पौधों का वितरण किया जा रहा है। वहीं आर्थिक रूप से कमजोर वैद्यों को जड़ी-बूटियों के प्रसंस्करण में सुविधा देने के लिए राज्य के 28 जिलों में कुल 40 निःशुल्क पल्वराइजर मशीनें उपलब्ध कराई गई हैं।
योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए बनी विस्तृत कार्ययोजना
बैठक में हीलर हर्बल गार्डन, स्कूल एवं होम हर्बल गार्डन, वैद्य सम्मेलन, प्रशिक्षण कार्यक्रम, वैद्य प्रमाणीकरण तथा पल्वराइजर मशीन वितरण जैसी योजनाओं के प्रभावी संचालन और भविष्य की कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा की गई। सभी वैद्य प्रतिनिधियों की सहमति से इन योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश तय किए गए।
वैद्यों के संरक्षण और उत्थान के लिए बोर्ड प्रतिबद्ध
बैठक के अंत में अध्यक्ष श्री विकास मरकाम ने कहा कि बोर्ड राज्य के वैद्यों की स्वास्थ्य परंपराओं, पारंपरिक उपचार पद्धतियों, ज्ञान संरक्षण, क्षमता विकास और सामाजिक-आर्थिक उत्थान के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहा है।
वहीं उपाध्यक्ष श्री अंजय शुक्ला ने कहा कि वैद्यों की मांग के अनुरूप ग्राम पंचायतों के माध्यम से जड़ी-बूटी आधारित उपचार एवं परामर्श केंद्रों के लिए स्थान उपलब्ध कराने के प्रयास किए जाएंगे, ताकि पारंपरिक चिकित्सा पद्धति को और अधिक मजबूती मिल सके।
मुख्यमंत्रीविष्णु देव साय के सख्त प्रशासनिक रुख का असर अब खनिज माफियाओं पर साफ दिखाई देने लगा है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर राज्यभर में खनिजों के अवैध उत्खनन, परिवहन और भंडारण के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत ताबड़तोड़ कार्रवाई का सिलसिला लगातार जारी है। राज्य में अप्रैल और मई 2026 के दौरान उक्त कार्रवाई के तहत 1,747 प्रकरण दर्ज कर 6 करोड़ 49 लाख 50 हजार 903 रुपये से अधिक की दाण्डिक राशि वसूल की गई है।
अभियान के दौरान सबसे अधिक 1,487 मामले अवैध परिवहन के सामने आए, जबकि 231 प्रकरण अवैध उत्खनन और 29 मामले अवैध भंडारण के दर्ज किए गए। इससे यह पता चलता है कि सरकार ने खनिजों की पूरी आपूर्ति श्रृंखला पर कड़ी निगरानी रखते हुए कार्रवाई तेज कर दी है।
अवैध उत्खनन के मामलों में बलौदाबाजार-भाटापारा जिला सबसे ऊपर रहा है, जहां 44 प्रकरण दर्ज किए गए। इसके बाद रायपुर में 15 तथा कबीरधाम में 14 और बालोद में 14 प्रकरण दर्ज किए गए हैं। दूसरी ओर, अवैध परिवहन के सबसे अधिक रायपुर में 173 मामले दर्ज हुए। इसके बाद जांजगीर-चांपा में 162, बिलासपुर में 101 और धमतरी में 101 मामले पकड़ में आए हैं। अवैध भंडारण के सर्वाधिक 8 प्रकरण रायपुर में दर्ज किए गए, जबकि दंतेवाड़ा में 4 तथा कांकेर में 3 और बिलासपुर में 3 मामले पकड़ाए हैं।
अवैध उत्खनन में सबसे अधिक 55.32 लाख रुपये की दाण्डिक राशि दंतेवाड़ा जिले में वसूल की गई है। अवैध परिवहन में सर्वाधिक 54.69 लाख रुपये रायपुर से वसूले गए, जबकि अवैध भंडारण में भी सबसे अधिक 12.58 लाख रुपये की दाण्डिक राशि रायपुर में वसूली गई। इस प्रकार कुल दांडिक राशि की वसूली के मामले में रायपुर जिला पूरे प्रदेश में सबसे आगे रहा है।
गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ में अब अवैध खनिज उत्खनन, परिवहन और भंडारण करना पहले जितना आसान नहीं रह गया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सख्त प्रशासनिक रुख के चलते सरकार ने एक ओर राज्यभर में खनिज माफियाओं के खिलाफ व्यापक अभियान छेड़ रखा है, वहीं दूसरी ओर नियमों में बदलाव कर जुर्माने और दण्ड के प्रावधान भी पहले से कहीं अधिक कठोर कर दिए हैं। मुख्यमंत्रीसाय का कहना है कि राज्य के खनिज संसाधनों की लूट किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
गौण खनिज नियमों में संशोधन के बाद अब किसी भी मामले में समझौता (प्रशमन) राशि 25 हजार रुपये से कम नहीं होगी। अवैध परिवहन पर प्रति टन 2 हजार रुपये की दर से प्रशमन शुल्क के साथ-साथ खनिज का पूरा मूल्य भी अलग से वसूला जाएगा। ट्रैक्टर से अवैध रेत परिवहन करने पर भी न्यूनतम 25 हजार रुपये का जुर्माना और रेत का मूल्य देना होगा। जब्त वाहन, मशीन या उपकरण की सुपुर्दगी से पहले संबंधित न्यायालय में वाहन की श्रेणी के अनुसार 50 हजार रुपये से लेकर 3 लाख रुपये तक की सुरक्षा राशि जमा करनी होगी, इसके बाद ही वाहन छोड़ा जाएगा।
]]>मुख्यमंत्रीविष्णु देव साय के सख्त प्रशासनिक रुख का असर अब खनिज माफियाओं पर साफ दिखाई देने लगा है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर राज्यभर में खनिजों के अवैध उत्खनन, परिवहन और भंडारण के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत ताबड़तोड़ कार्रवाई का सिलसिला लगातार जारी है। राज्य में अप्रैल और मई 2026 के दौरान उक्त कार्रवाई के तहत 1,747 प्रकरण दर्ज कर 6 करोड़ 49 लाख 50 हजार 903 रुपये से अधिक की दाण्डिक राशि वसूल की गई है।
अभियान के दौरान सबसे अधिक 1,487 मामले अवैध परिवहन के सामने आए, जबकि 231 प्रकरण अवैध उत्खनन और 29 मामले अवैध भंडारण के दर्ज किए गए। इससे यह पता चलता है कि सरकार ने खनिजों की पूरी आपूर्ति श्रृंखला पर कड़ी निगरानी रखते हुए कार्रवाई तेज कर दी है।
अवैध उत्खनन के मामलों में बलौदाबाजार-भाटापारा जिला सबसे ऊपर रहा है, जहां 44 प्रकरण दर्ज किए गए। इसके बाद रायपुर में 15 तथा कबीरधाम में 14 और बालोद में 14 प्रकरण दर्ज किए गए हैं। दूसरी ओर, अवैध परिवहन के सबसे अधिक रायपुर में 173 मामले दर्ज हुए। इसके बाद जांजगीर-चांपा में 162, बिलासपुर में 101 और धमतरी में 101 मामले पकड़ में आए हैं। अवैध भंडारण के सर्वाधिक 8 प्रकरण रायपुर में दर्ज किए गए, जबकि दंतेवाड़ा में 4 तथा कांकेर में 3 और बिलासपुर में 3 मामले पकड़ाए हैं।
अवैध उत्खनन में सबसे अधिक 55.32 लाख रुपये की दाण्डिक राशि दंतेवाड़ा जिले में वसूल की गई है। अवैध परिवहन में सर्वाधिक 54.69 लाख रुपये रायपुर से वसूले गए, जबकि अवैध भंडारण में भी सबसे अधिक 12.58 लाख रुपये की दाण्डिक राशि रायपुर में वसूली गई। इस प्रकार कुल दांडिक राशि की वसूली के मामले में रायपुर जिला पूरे प्रदेश में सबसे आगे रहा है।
गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ में अब अवैध खनिज उत्खनन, परिवहन और भंडारण करना पहले जितना आसान नहीं रह गया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सख्त प्रशासनिक रुख के चलते सरकार ने एक ओर राज्यभर में खनिज माफियाओं के खिलाफ व्यापक अभियान छेड़ रखा है, वहीं दूसरी ओर नियमों में बदलाव कर जुर्माने और दण्ड के प्रावधान भी पहले से कहीं अधिक कठोर कर दिए हैं। मुख्यमंत्रीसाय का कहना है कि राज्य के खनिज संसाधनों की लूट किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
गौण खनिज नियमों में संशोधन के बाद अब किसी भी मामले में समझौता (प्रशमन) राशि 25 हजार रुपये से कम नहीं होगी। अवैध परिवहन पर प्रति टन 2 हजार रुपये की दर से प्रशमन शुल्क के साथ-साथ खनिज का पूरा मूल्य भी अलग से वसूला जाएगा। ट्रैक्टर से अवैध रेत परिवहन करने पर भी न्यूनतम 25 हजार रुपये का जुर्माना और रेत का मूल्य देना होगा। जब्त वाहन, मशीन या उपकरण की सुपुर्दगी से पहले संबंधित न्यायालय में वाहन की श्रेणी के अनुसार 50 हजार रुपये से लेकर 3 लाख रुपये तक की सुरक्षा राशि जमा करनी होगी, इसके बाद ही वाहन छोड़ा जाएगा।
]]>भारत जैसे कृषि प्रधान देश में बढ़ती जनसंख्या, घटती कृषि भूमि और जल संसाधनों पर बढ़ते दबाव के बीच खेती की नई और टिकाऊ तकनीकों की आवश्यकता लगातार महसूस की जा रही है। ऐसे समय में हाइड्रोपोनिक्स तकनीक कृषि क्षेत्र में एक अभिनव और प्रभावी विकल्प बनकर उभर रही है। यह ऐसी आधुनिक खेती पद्धति है, जिसमें मिट्टी की आवश्यकता नहीं होती और पौधों को पानी में घुले पोषक तत्वों के माध्यम से उगाया जाता है।
क्या है हाइड्रोपोनिक्स तकनीक?
हाइड्रोपोनिक्स एक वैज्ञानिक कृषि पद्धति है, जिसमें पौधों की जड़ों को पोषक तत्वों से युक्त पानी में रखा जाता है। इस तकनीक में मिट्टी के स्थान पर विशेष माध्यमों का उपयोग किया जाता है, जिससे पौधों को आवश्यक पोषण सीधे प्राप्त होता है। परिणामस्वरूप पौधों की वृद्धि तेजी से होती है और उत्पादन भी बेहतर मिलता है।
कम संसाधनों में अधिक उत्पादन
हाइड्रोपोनिक्स तकनीक की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें पारंपरिक खेती की तुलना में बहुत कम पानी की आवश्यकता होती है। सीमित भूमि वाले किसान, शहरी क्षेत्रों के निवासी तथा छोटे उद्यमी भी इस तकनीक के माध्यम से सफलतापूर्वक खेती कर सकते हैं। नियंत्रित वातावरण में फसल उत्पादन होने के कारण मौसम का प्रभाव भी अपेक्षाकृत कम पड़ता है।
पोषण सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण में सहायक
विशेषज्ञों के अनुसार हाइड्रोपोनिक्स तकनीक गुणवत्तापूर्ण और सुरक्षित खाद्य उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। कम पानी की खपत, रासायनिक उर्वरकों के सीमित उपयोग और भूमि पर कम दबाव के कारण यह तकनीक पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान देती है। यही कारण है कि इसे भविष्य की टिकाऊ कृषि पद्धतियों में शामिल किया जा रहा है।
युवाओं और उद्यमियों के लिए नए अवसर
हाइड्रोपोनिक्स तकनीक केवल खेती तक सीमित नहीं है, बल्कि यह स्वरोजगार और कृषि उद्यमिता के नए अवसर भी प्रदान करती है। कम स्थान में व्यावसायिक स्तर पर सब्जियां, हरी पत्तेदार फसलें और अन्य उच्च मूल्य वाली फसलें उगाकर अच्छी आय अर्जित की जा सकती है। इससे युवाओं को कृषि आधारित स्टार्टअप शुरू करने का अवसर मिल रहा है।
सरकार दे रही आधुनिक कृषि को बढ़ावा
केंद्र और राज्य सरकारें किसानों की आय बढ़ाने, जल संरक्षण को प्रोत्साहित करने और आधुनिक कृषि तकनीकों के प्रसार के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित कर रही हैं। कृषि विज्ञान केंद्रों, कृषि विभाग तथा विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों को नई तकनीकों की जानकारी दी जा रही है। इससे किसान आधुनिक खेती अपनाकर उत्पादन और आय दोनों बढ़ा सकते हैं।
भविष्य की खेती की ओर एक मजबूत कदम
हाइड्रोपोनिक्स तकनीक कृषि क्षेत्र में नवाचार और आत्मनिर्भरता का नया मार्ग खोल रही है। यह तकनीक कम संसाधनों में अधिक उत्पादन, बेहतर गुणवत्ता और पर्यावरण संरक्षण का संतुलित समाधान प्रस्तुत करती है। आने वाले समय में यह पद्धति किसानों, युवाओं और कृषि उद्यमियों के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोल सकती है।
आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक सोच के साथ हाइड्रोपोनिक्स खेती न केवल कृषि को अधिक लाभकारी बना रही है, बल्कि खाद्य एवं पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
भारत जैसे कृषि प्रधान देश में बढ़ती जनसंख्या, घटती कृषि भूमि और जल संसाधनों पर बढ़ते दबाव के बीच खेती की नई और टिकाऊ तकनीकों की आवश्यकता लगातार महसूस की जा रही है। ऐसे समय में हाइड्रोपोनिक्स तकनीक कृषि क्षेत्र में एक अभिनव और प्रभावी विकल्प बनकर उभर रही है। यह ऐसी आधुनिक खेती पद्धति है, जिसमें मिट्टी की आवश्यकता नहीं होती और पौधों को पानी में घुले पोषक तत्वों के माध्यम से उगाया जाता है।
क्या है हाइड्रोपोनिक्स तकनीक?
हाइड्रोपोनिक्स एक वैज्ञानिक कृषि पद्धति है, जिसमें पौधों की जड़ों को पोषक तत्वों से युक्त पानी में रखा जाता है। इस तकनीक में मिट्टी के स्थान पर विशेष माध्यमों का उपयोग किया जाता है, जिससे पौधों को आवश्यक पोषण सीधे प्राप्त होता है। परिणामस्वरूप पौधों की वृद्धि तेजी से होती है और उत्पादन भी बेहतर मिलता है।
कम संसाधनों में अधिक उत्पादन
हाइड्रोपोनिक्स तकनीक की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें पारंपरिक खेती की तुलना में बहुत कम पानी की आवश्यकता होती है। सीमित भूमि वाले किसान, शहरी क्षेत्रों के निवासी तथा छोटे उद्यमी भी इस तकनीक के माध्यम से सफलतापूर्वक खेती कर सकते हैं। नियंत्रित वातावरण में फसल उत्पादन होने के कारण मौसम का प्रभाव भी अपेक्षाकृत कम पड़ता है।
पोषण सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण में सहायक
विशेषज्ञों के अनुसार हाइड्रोपोनिक्स तकनीक गुणवत्तापूर्ण और सुरक्षित खाद्य उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। कम पानी की खपत, रासायनिक उर्वरकों के सीमित उपयोग और भूमि पर कम दबाव के कारण यह तकनीक पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान देती है। यही कारण है कि इसे भविष्य की टिकाऊ कृषि पद्धतियों में शामिल किया जा रहा है।
युवाओं और उद्यमियों के लिए नए अवसर
हाइड्रोपोनिक्स तकनीक केवल खेती तक सीमित नहीं है, बल्कि यह स्वरोजगार और कृषि उद्यमिता के नए अवसर भी प्रदान करती है। कम स्थान में व्यावसायिक स्तर पर सब्जियां, हरी पत्तेदार फसलें और अन्य उच्च मूल्य वाली फसलें उगाकर अच्छी आय अर्जित की जा सकती है। इससे युवाओं को कृषि आधारित स्टार्टअप शुरू करने का अवसर मिल रहा है।
सरकार दे रही आधुनिक कृषि को बढ़ावा
केंद्र और राज्य सरकारें किसानों की आय बढ़ाने, जल संरक्षण को प्रोत्साहित करने और आधुनिक कृषि तकनीकों के प्रसार के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित कर रही हैं। कृषि विज्ञान केंद्रों, कृषि विभाग तथा विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों को नई तकनीकों की जानकारी दी जा रही है। इससे किसान आधुनिक खेती अपनाकर उत्पादन और आय दोनों बढ़ा सकते हैं।
भविष्य की खेती की ओर एक मजबूत कदम
हाइड्रोपोनिक्स तकनीक कृषि क्षेत्र में नवाचार और आत्मनिर्भरता का नया मार्ग खोल रही है। यह तकनीक कम संसाधनों में अधिक उत्पादन, बेहतर गुणवत्ता और पर्यावरण संरक्षण का संतुलित समाधान प्रस्तुत करती है। आने वाले समय में यह पद्धति किसानों, युवाओं और कृषि उद्यमियों के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोल सकती है।
आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक सोच के साथ हाइड्रोपोनिक्स खेती न केवल कृषि को अधिक लाभकारी बना रही है, बल्कि खाद्य एवं पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।