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भारत का महत्वाकांक्षी एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) प्रोजेक्ट नई मुश्किल में फंस गया है. अमेरिका की GE एयरोस्पेस कंपनी का F414 इंजन, जो AMCA Mk-1 और तेजस Mk-2 दोनों के लिए चुना गया था, अब महंगा हो गया है. पहले एक इंजन की कीमत करीब 70-80 करोड़ रुपये थी, जो अब 200 करोड़ रुपये से ज्यादा पहुंच गई है।
यह बढ़ोतरी DRDO और एरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (ADA) के लिए बड़ी चिंता बन गई है. तकनीकी बातचीत में प्रगति हुई थी, लेकिन कीमत, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर, प्रोडक्शन और निवेश जैसे व्यावसायिक मुद्दों पर गतिरोध है. GE ने भारत में F414 इंजन की असेंबली और मैन्युफैक्चरिंग यूनिट लगाने का प्रस्ताव दिया है, जिसके लिए 800 मिलियन डॉलर (लगभग 6000 करोड़ रुपये) से ज्यादा निवेश की मांग की गई है।
F414 इंजन मूल रूप से तेजस Mk-2 के लिए चुना गया था. AMCA Mk-1 के शुरुआती संस्करणों के लिए अंतरिम इंजन के रूप में रखा गया है. योजना के अनुसार पहले 2-4 स्क्वॉड्रनों में यह इंजन लगेगा. बाद में ज्यादा शक्तिशाली स्वदेशी इंजन आएगा. AMCA ट्विन इंजन वाला स्टेल्थ फाइटर है, इसलिए प्रोटोटाइप में 5 प्रोटोटाइप्स के लिए करीब 15 इंजनों की जरूरत पड़ेगी।
कैबिनेट कमिटी ऑन सिक्योरिटी ने प्रोटोटाइप विकास के लिए 15 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा मंजूर किए हैं. उड़ान परीक्षण में 1800 सॉर्टीज और सात साल लगेंगे. इंजन की समस्या से पूरा कार्यक्रम प्रभावित हो सकता है।
GE के साथ समझौते की चुनौतियां
GE F414 पर भारत और अमेरिका के बीच मोदी और बाइडेन के समय मजबूत राजनीतिक समर्थन मिला था. HAL और GE के बीच MoU को रक्षा सहयोग की बड़ी उपलब्धि माना गया. लेकिन व्यावसायिक बातचीत जटिल हो गई है. GE की फैक्ट्री न सिर्फ AMCA बल्कि तेजस Mk-2 और ट्विन इंजन डेक-बेस्ड फाइटर (TEDBF) की जरूरतें भी पूरी कर सकती है।
फिर भी कीमत में अचानक वृद्धि और निवेश की ऊंची मांग ने बातचीत को मुश्किल बना दिया है. कुछ चर्चाओं में शुरुआती इंजन खरीद की संख्या घटाने पर भी विचार हुआ, लेकिन कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है।
विकल्पों की तलाश: सैफ्रान और रोल्स-रॉयस
अब भारतीय एजेंसियां विकल्प देख रही हैं. फ्रांस की सैफ्रान और ब्रिटेन की रोल्स-रॉयस कंपनियां पहले भी भारत के साथ इंजन विकास में साझेदारी के लिए इच्छुक रही हैं. दोनों कंपनियां टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और औद्योगिक सहयोग का बेहतर प्रस्ताव दे सकती हैं।
हालांकि इंजन बदलना आसान नहीं है क्योंकि यह उड़ान नियंत्रण, सर्टिफिकेशन, परीक्षण और परफॉर्मेंस को प्रभावित करता है. एयरफ्रेम डिजाइन लगभग फाइनल हो चुका है, इसलिए नया इंजन अनुकूलित करना पड़ेगा, पूरी डिजाइन नहीं बदलनी होगी।
तेजस Mk-1A पहले ही इंजन सप्लाई की समस्या से देरी झेल रहा है. AMCA में भी यही समस्या समयरेखा प्रभावित कर सकती है. यह कार्यक्रम भारत की स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी की स्टेल्थ तकनीक हासिल करने की दिशा में महत्वपूर्ण है।
विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार को मजबूत वार्ता करनी चाहिए. अगर GE से समझौता नहीं होता तो विकल्पों को तेजी से आगे बढ़ाना होगा. AMCA की सफलता न सिर्फ वायुसेना की ताकत बढ़ाएगी बल्कि भारत को वैश्विक रक्षा निर्यातक बनाने में भी मदद करेगी।
वर्तमान में तीन निजी कंपनियों – टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स, L&T-BEL और भारत फोर्ज-BEML को प्रोटोटाइप विकास के लिए RFP जारी किए गए हैं. इंजन मुद्दे का जल्द समाधान AMCA कार्यक्रम की गति बनाए रखने के लिए जरूरी है।
]]>भोपाल के प्रतिष्ठित रवीन्द्र भवन में आपातकाल दिवस के अवसर पर आज शुक्रवार को एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। इस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शामिल होंगे।कार्यक्रम में लोकतंत्र सेनानी संघ के अध्यक्ष तपन भौमिक के साथ-साथ आपातकाल के दौरान जेल जाने वाले करीब दो हजार मीसाबंदी परिवारों के सदस्य शिरकत करेंगे।इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव स्वयं मीसाबंदियों तथा उनके परिजनों को मंच से सम्मानित करेंगे, जो लोकतंत्र की रक्षा के लिए उनके द्वारा किए गए संघर्ष और बलिदान के प्रति सरकार की कृतज्ञता को प्रकट करेगा।
मुख्यमंत्री मोहन यादव होंगे मुख्य अतिथि
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। इस दौरान वे आपातकाल के समय लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले मीसाबंदियों और उनके परिजनों को सम्मानित करेंगे।
लोकतंत्र सेनानियों के संघर्ष को किया जाएगा याद
समारोह में आपातकाल के दौरान जेल गए लोकतंत्र सेनानियों के योगदान और बलिदान को याद किया जाएगा। राज्य सरकार उनके संघर्ष के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए मंच से सम्मान प्रदान करेगी।
2000 परिवारों की रहेगी मौजूदगी
कार्यक्रम में प्रदेशभर से करीब 2000 मीसाबंदी परिवारों के सदस्य शामिल होंगे। आयोजन का उद्देश्य लोकतंत्र की रक्षा के लिए किए गए त्याग और संघर्ष को नई पीढ़ी तक पहुंचाना तथा लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।
इंदिरा सरकार के अहंकार ने आपातकाल लगाया- सीएम
इस अवसर पर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सोशल मीडिया पर लिखा कि 25 जून, 1975… देश में लोकतंत्र के इतिहास का सबसे काला दिन, जब इंदिरा सरकार के अहंकार ने आपातकाल लगाया। इस विभीषिका के विरुद्ध डटकर खड़े होने वाले लोकतंत्र के प्रहरियों को सादर नमन करता हूं। आइए, संकल्प लें कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए सदैव समर्पित होकर देश की सेवा करते रहेंगे।
25 जून 1975 को लगा था आपातकाल
उल्लेखनीय है कि देश में 25 जून 1975 को आपातकाल लागू किया गया था। भारतीय लोकतंत्र के इतिहास के इस महत्वपूर्ण अध्याय के 50 वर्ष पूरे होने पर विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। भोपाल में आयोजित यह कार्यक्रम भी उसी श्रृंखला का हिस्सा होगा, जिसमें लोकतंत्र सेनानियों को विशेष सम्मान दिया जाएगा।
25 जून 1975 को लागू हुआ था आपातकाल
भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में 25 जून 1975 का दिन महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी दिन देश में आपातकाल लागू किया गया था, जो मार्च 1977 तक प्रभावी रहा। इस अवधि में कई नागरिक अधिकारों पर प्रतिबंध लगाए गए थे और अनेक राजनीतिक नेताओं तथा सामाजिक कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया था। सरकार और विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा हर वर्ष आपातकाल दिवस के अवसर पर लोकतंत्र सेनानियों के योगदान को याद करते हुए कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
क्या है आपातकाल दिवस ?
आपातकाल दिवस भारतीय लोकतांत्रिक इतिहास के उस सबसे काले अध्याय की याद दिलाता है, जिसकी शुरुआत तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के कार्यकाल के दौरान हुई थी। 25 जून 1975 की आधी रात को देश में आधिकारिक रूप से आपातकाल (इमरजेंसी) की घोषणा की गई थी, जो 21 महीनों तक यानी 21 मार्च 1977 तक लागू रही।
इस दौरान भारतीय नागरिकों के मौलिक अधिकार निलंबित कर दिए गए थे, प्रेस और मीडिया पर सख्त सेंसरशिप लागू कर दी गई थी, और सरकार की नीतियों का विरोध करने वाले विपक्षी नेताओं व सामाजिक कार्यकर्ताओं को बिना किसी मुकदमे के जेलों में डाल दिया गया था।
]]>मध्यप्रदेश के सरकारी सेवकों के लिए अच्छी खबर आई है। प्रदेश के अधिकारी, कर्मचारियों की 10 साल से अटकी पदोन्नति की प्रक्रिया 10-15 दिन में शुरू हो सकती है। राज्य सरकार ने इसकी पूरी तैयारी कर ली है। पदोन्नति की प्रक्रिया में बाधा बन रहे कानूनी मसले को सुलझाने के लिए अनेक वरिष्ठ अधिवक्ताओं से भी परामर्श लिया गया है। राज्य सरकार ने इस मुद्दे पर जबलपुर के अलावा दिल्ली के वरिष्ठ वकीलों और विधि विशेषज्ञों की राय ली है। संबंधित अधिकारियों ने सलाह के आधार पर ही मसौदा तैयार किया है। सीएम मोहन यादव CM Mohan Yadav ने 2016 से बंद पदोन्नति चालू करने का 2025 में ऐलान किया था। सरकार के इस फैसले से प्रदेश के 4.50 लाख सरकारी सेवकों को फायदा होगा। कर्मचारियों, अधिकारियों के प्रमोशन से कई पद भी खाली होंगे जिनपर युवाओं को भर्ती के मौके मिलेंगे।
सरकार ने अलग से अपर मुख्य सचिवों, प्रमुख सचिवों, सचिवों, भारसाधक सचिवों व विभागाध्यक्षों को मौखिक रूप से पदोन्नति शुरू करने को कहा है। बड़ी संख्या में कर्मचारियों, अधिकारियों के पदोन्नत होने से करीब दो लाख पद खाली होने की उम्मीद है। इससे युवाओं की नौकरी का रास्ता साफ होगा।
प्रदेश के मुख्य सचिव अनुराग जैन ने अधिकारियों से कहा कि वर्षों पुराने बने गैर जरूरी कानूनों को खत्म करने पर काम करें। वे गुरुवार को कलेक्टर-कमिश्नरों संग वीसी करेंगे, उसके लिए सभी विभाग प्रमुखों को तैयार रहने के लिए कहा है।
प्रदेश में 10 साल से पदोन्नतियों पर रोक लगी है, 2016 मई से पदोन्नति बंद
बता दें कि प्रदेश में 10 साल से पदोन्नतियों पर रोक लगी है, 2016 मई से पदोन्नति बंद है। इससे कर्मचारी, अधिकारी बिना प्रमोशन के ही रिटायर्ड हो रहे हैं। अभी तक लाखों सरकारी सेवक रिटायर्ड हो चुके हैं। सीएम मोहन यादव ने पिछले साल प्रदेश के कर्मचारियों, अधिकारियों के हित में पदोन्नतियां देने की घोषणा की थी। तब से इस संबंध में अनेक बैठकें हो चुकी हैं।
17 जून को कैबिनेट ने मप्र लोकसेवा पदोन्नति नियम- 2025 को मंजूरी दी। उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की। इसमें 20 जुलाई से शुरू होने वाले विधानसभा के मानसून सत्र की तैयारी, कोर्ट केस प्राथमिकता से निराकृत करने, केंद्र-राज्य के काम को गंभीरता से करने, सीएम हेल्पलाइन की शिकायतों का निपटारा करने के लिए कहा। बताते हैं, बैठक में पदोन्नति संबंधी बात भी कही।
10 साल में ऐसे हालात
2016 मई से प्रदेश में पदोन्नति बंद है।
10 साल से बिना पदोन्नति ही रिटायर्ड हो रहे कर्मचारी
2026 मई तक लाखों सरकारी सेवक रिटायर्ड हुए
सीएम यादव ने पदोन्नति देने की घोषणा की
2025 में बंद पदोन्नति चालू करने का किया ऐलान
10 दिन में शुरु करने की कवायद
4.50 लाख सरकारी सेवकों को फायदा
पदोन्न्ति से दो लाख पद खाली होंगे
युवाओं की नौकरी का रास्ता साफ होगा
पिछले कुछ दशकों में भारत की तस्वीर तेजी से बदली है, कभी गांवों का देश कहा जाने वाले भारत की एक बहुत बड़ी आबादी रोजगार, बेहतर शिक्षा और आधुनिक जीवनशैली की तलाश में शहरों का रुख कर चुकी है, लेकिन इस सामूहिक पलायन ने एक गंभीर और डरावने सवाल को जन्म दे दिया है, जब शहरों में ज़मीन सीमित है, तो आने वाले समय में ये लोग रहेंगे कहां रहेंगे।
रिपोर्ट्स के मुताबिक साल 2030 तक भारत की 40% से अधिक आबादी शहरों में रह रही होगी, इतनी बड़ी आबादी का दबाव झेलने के लिए हमारे शहरों के पास पर्याप्त जगह ही नहीं बची है. ज़मीन का यह संकट अब केवल एक अंदेशा नहीं, बल्कि हकीकत बन चुका है।
देश के प्रमुख आर्थिक केंद्र इस समय ज़मीन की भारी किल्लत से जूझ रहे हैं. मुंबई भौगोलिक रूप से तीन तरफ से पानी से घिरा है. कई रिपोर्ट्स बताती हैं कि मुंबई के पास अब हॉरिजॉन्टल विस्तार के लिए जमीन का एक टुकड़ा भी नहीं बचा है. यही वजह है कि यहां झुग्गी-झोपड़ियों की संख्या बढ़ी और रीडेवलपमेंट ही एकमात्र रास्ता रह गया. जमीन की कमी के कारण मुंबई भारत का सबसे महंगा और घना शहर बन चुका है।
नोएडा में जमीन खत्म होने के कगार पर
दिल्ली-NCR का सबसे पसंदीदा डेस्टिनेशन माना जाने वाला नोएडा भी अब इसी संकट के मुहाने पर खड़ा है. हालिया मीडिया रिपोर्ट्स और नोएडा अथॉरिटी की बैठकों से यह साफ हुआ है कि मूल नोएडा (Noida Master Plan 2031 के तहत) में अब नया अलॉटमेंट करने के लिए ज़मीन लगभग खत्म हो चुकी है. औद्योगिक, कमर्शियल और आवासीय प्लॉट्स के लिए अथॉरिटी के पास जगह नहीं बची है. यही वजह है कि अब उत्तर प्रदेश सरकार को 'न्यू नोएडा' (दादरी-नोएडा-गाजियाबाद इनवेस्टमेंट रीजन) बसाने के लिए मास्टर प्लान 2041 को मंजूरी देनी पड़ी है, जिसके तहत बुलंदशहर और गौतमबुद्ध नगर के 80 गांवों की जमीन अधिग्रहित की जा रही है।
क्या है इसका विकल्प?
जब ज़मीन खत्म हो रही हो, तो शहरों के पास फैलने का नहीं, बल्कि ऊपर उठने का ही विकल्प बचता है, आने वाले समय में शहरी आबादी पूरी तरह से हाईराइज इमारतों और वर्टिकल लिविंग पर निर्भर हो जाएगी. आने वाले समय में सरकारें FSI यानी ज़मीन के मुकाबले कितनी ऊंची इमारत बनाई जा सकती है के नियमों को और ढीला करेंगी, जहां पहले 4 से 5 मंजिला इमारतें बनती थीं, अब 40 से 50 मंजिला आवासीय टावर आम हो जाएंगे, एक ही एकड़ ज़मीन पर अब 50 परिवारों के बजाय 500 परिवार रह सकेंगे।
भविष्य के शहर हाईराइज सोसायटियों के अंदर सिमट जाएंगे. इन्हें 'वर्टिकल विलेज' कहा जाता है, जहां एक ही गगनचुंबी इमारत या परिसर के भीतर पार्क, जिम, स्विमिंग पूल, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स और यहां तक कि स्कूल-अस्पताल भी मौजूद होंगे. लोगों की जमीन से निर्भरता पूरी तरह खत्म हो जाएगी. नोएडा की तर्ज पर अब हर बड़े शहर के पास जैसे न्यू नोएडा, नवी मुंबई, न्यू गुड़गांव बसाए जा रहे हैं. साथ ही रेलवे और मेट्रो स्टेशनों के आसपास हाई-डेंसिटी ऊंची इमारतें बनाई जा रही हैं ताकि लोग कम ज़मीन में रहकर सीधे पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल कर सकें।
क्या हैं चुनौतियां?
बेशक हाईराइज इमारतें जमीन की कमी का समाधान हैं, लेकिन यह राह इतनी आसान नहीं है. 50 मंजिला इमारत में रहने वाले लोगों के लिए पानी, बिजली और सीवरेज सिस्टम का मैनेजमेंट करना बेहद जटिल होता जा रहा है. कंक्रीट के इन ऊंचे जंगलों के कारण शहरों में 'अर्बन हीट आइलैंड' बन रहे हैं, जिससे शहरों का तापमान गांवों के मुकाबले 3 से 5 डिग्री तक ज्यादा रहता है. भूकंप या आग लगने की स्थिति में इतनी ऊंची इमारतों से लोगों को सुरक्षित निकालना आज भी एक बड़ी चुनौती है।
गांवों से शहरों की तरफ बढ़ता इंसानी सैलाब रुकने वाला नहीं है और जमीन को रबर की तरह खींचा नहीं जा सकता, इसलिए भविष्य के भारत को 'आसमान' में ही अपनी जगह ढूंढनी होगी।
]]>ब्रिक्स की मीटिंग में पीएम मोदी ने ट्रंप को कैसे दे दिया सबसे बड़ा झटका?
कुछ महीने पहले तक डॉनल्ड ट्रंप ब्रिक्स को लेकर बड़ी धमकियां देते थे. ट्रंप ब्रिक्स का नाम लेकर दुनिया को धमकाते थे कि ऐसा मत करो. लेकिन आज ट्रंप की ऐसी हालत है कि कोई उनका लोड नहीं ले रहा है. नरेंद्र मोदी तो ट्रंप का बिल्कुल भी लोड नहीं लेते. पीएम मोदी ने पहले ट्रंप को मुंह पर सीधा सुना दिया था. अब ब्रिक्स देशों की मीटिंग से मोदी ने तगड़ा मैसेज दे दिया है।
भारत में ब्रिक्स देशों के एनएसए की अहम मीटिंग हो रही है. पीएम मोदी खुद इस ग्लोबल मीटिंग में पहुंच गए. वहां ब्रिक्स नेताओं की ग्रुप फोटो हुई और वन-टू-वन मुलाकात भी हुई. पीएम मोदी ने जो कड़क मैसेज दिया है, उससे ट्रंप के लोगों में हड़कंप मच गया है. पीएम मोदी ने कहा कि बदलते ग्लोबल हालात में ब्रिक्स की भूमिका बहुत अहम है. उन्होंने आतंकवाद और साइबर सुरक्षा पर बहुत ज्यादा जोर दिया।
पीएम मोदी ने साफ कर दिया कि भारत ग्लोबल साउथ का पूरा समर्थन करेगा. भारत एक सुरक्षित और समावेशी दुनिया बनाने के लिए अपनी ताकत लगाएगा. पीएम मोदी ने एक ही मीटिंग से दो बड़े काम निपटा दिए हैं. एक तरफ ब्रिक्स को अहम बताकर अमेरिका को पीछे हटने का मैसेज दे दिया. दूसरी तरफ ब्रिक्स के मंच से आतंकवाद का मुद्दा उठाकर सबको अलर्ट कर दिया।
ट्रंप को अमेरिका में वोट वाला झटका कैसे लगा और अब वह क्या बहाने बना रहे हैं?
अमेरिका में मध्यावधि चुनाव बहुत नजदीक हैं और डॉनल्ड ट्रंप लगातार दावे कर रहे हैं. लेकिन ट्रंप को हाल ही में एक बहुत बड़ा वोट वाला झटका लगा है. अमेरिका के भीतर ही ट्रंप का वोट बेस अब खिसकता हुआ नजर आ रहा है. ट्रंप पहले जो वादे कर रहे थे, अब वहां की जनता उन पर सवाल उठा रही है. चुनाव में अपनी स्थिति कमजोर होते देख ट्रंप अब रोज नए बहाने बना रहे हैं।
ट्रंप खुद कह चुके हैं कि अगर दुनिया में कुछ हुआ तो वह भारत के साथ खड़े होंगे. ट्रंप को यह अच्छे से पता है कि भारतीय मूल के वोटर अमेरिका में क्या ताकत रखते हैं. इसलिए ट्रंप अब भारत और पीएम मोदी की तारीफ करके अपना वोट बैंक बचाने की कोशिश कर रहे हैं. लेकिन उनकी खुद की विदेश नीति अब पूरी तरह से फेल हो चुकी है।
ईरान को लेकर ट्रंप का स्टैंड अमेरिका में ही एक बड़ा मजाक बन गया है. ट्रंप को समझ नहीं आ रहा है कि इस बड़े ग्लोबल शिफ्ट को कैसे हैंडल किया जाए. अब ग्लोबल पॉलिटिक्स ऐसे नहीं चलेगी कि सब कुछ सिर्फ ट्रंप की मर्जी से होगा. अमेरिका जो तय कर लेगा अब दुनिया में वही नियम नहीं चलने वाला है।
चीन के विदेश मंत्री के साथ मुलाकात में पीएम मोदी ने कौन सा बड़ा खेल कर दिया?
ट्रंप के लिए सबसे बड़ा मैसेज यह है कि मोदी ने चीन के विदेश मंत्री से मुलाकात की. ब्रिक्स की बैठक में वांग यी के साथ हुई बातचीत की डिटेल से अमेरिका परेशान हो जाएगा. चीन के विदेश मंत्री ने बताया कि मोदी ने शी जिनपिंग को शुभकामनाएं भेजने को कहा है. पीएम मोदी ने कहा कि मौजूदा हालात में दोनों देशों को अपनी पारंपरिक दोस्ती आगे बढ़ानी चाहिए. दोनों देश हाई लेवल बातचीत जारी रखें और ग्लोबल साउथ के हितों को पूरी तरह सुरक्षित करें. चीन के साथ पीएम मोदी की इस बात से अमेरिका को जरूर बड़ी आग लग जाएगी।
ट्रंप तो शुरू से ही ब्रिक्स और चीन के बिल्कुल खिलाफ रहे हैं. चीन ने भी साफ कर दिया है कि वह भारत के साथ मिलकर काम करना चाहता है. चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने कहा, ‘दोनों देश एकजुटता बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं.’ चीन अब ब्रिक्स की अध्यक्षता में भारत की जिम्मेदारियों का पूरा समर्थन करेगा. चीन अब भारत के साथ भरोसा बढ़ाने और संदेह दूर करने के लिए पूरी तरह तैयार है. चीन के बयान से साफ है कि वह भारत से टकराव नहीं बल्कि दोस्ती चाहता है।
ईरान और इजराइल जैसे कट्टर दुश्मनों को पीएम मोदी कैसे एक साथ हैंडल कर रहे हैं?
ब्रिक्स की अहम बैठक से अलग पीएम मोदी ने ईरान के टॉप अधिकारियों से भी मुलाकात की है. ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के डिप्टी सेक्रेटरी डॉ गदीर निजामीपुर पीएम मोदी से मिले. यह मीटिंग ऐसे वक्त में हो रही है जब अमेरिका ने ईरान के तेल पर भारी छूट दी है।
ग्लोबल मार्केट में ईरान का तेल आने से भारत को बड़ा आर्थिक फायदा हो सकता है. ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने पीएम मोदी को ईरान आने का बड़ा न्योता दिया है. उन्होंने सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई के विदाई कार्यक्रम का औपचारिक निमंत्रण भेजा है. यहां लोग कह रहे थे कि इजराइल से दोस्ती के चक्कर में भारत ने ईरान से रिश्ते बिगाड़ लिए. लेकिन मोदी ईरान के टॉप अधिकारियों से मिलकर नया ग्लोबल नैरेटिव सेट कर रहे हैं।
उधर भारत इजराइल से भी अपने रिश्तों को लगातार और ज्यादा मजबूत कर रहा है. सोमवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह इजराइल के रक्षा मंत्रालय के डायरेक्टर जनरल से मिले. दोनों देशों के बीच डिफेंस सहयोग बढ़ाने और ज्वाइंट प्रोडक्शन पर अहम बातचीत हुई है. एक तरफ ईरान और दूसरी तरफ इजराइल के साथ भारत का यह बैलेंस अमेरिका को हैरान कर रहा है।
मोदी सरकार ने कौन सी विदेशी फंडिंग रोक दी जिससे इकोसिस्टम की कमर टूट गई?
नरेंद्र मोदी एक तरफ भारत को ग्लोबल पॉलिटिक्स के सेंटर में पूरी तरह ला रहे हैं. दूसरी तरफ मोदी उस इकोसिस्टम पर भी कड़ी स्ट्राइक कर रहे हैं जो सरकार गिराने का काम करता है. यह विदेशी इकोसिस्टम पीएम मोदी को कुर्सी से हटाने के लिए कुछ भी करने को तैयार रहता है. लेकिन मोदी सरकार ने एक ऐसा बड़ा फैसला लिया है जिसने इस इकोसिस्टम की कमर तोड़ दी है. सरकार ने विदेशी फंडिंग वाले कई बड़े एनजीओ के लाइसेंस हमेशा के लिए रद्द कर दिए हैं।
देश में अशांति फैलाने और सरकार के खिलाफ माहौल बनाने के लिए विदेशों से भारी फंडिंग आती थी. मोदी सरकार ने इस अवैध फंडिंग के पाइपलाइन को ही पूरी तरह ब्लॉक कर दिया है. विदेशी पैसे से चलने वाला सरकार गिराने का यह बड़ा ‘हथियार’ अब हमेशा के लिए निपट गया है. इसी वजह से इस पूरे लेफ्ट इकोसिस्टम में अब भारी हंगामा मचा हुआ है. बिना विदेशी पैसे के यह गैंग अब भारत में अपना झूठा एजेंडा नहीं चला पा रहा है. भारत के खिलाफ काम करने वाले सभी संगठनों की फंडिंग पर अब सरकार की सख्त नजर है।
एफएटीएफ के डर से पाकिस्तान के पसीने क्यों छूट रहे हैं और यूएई को क्या चाहिए?
डॉनल्ड ट्रंप ने ग्लोबल कूटनीति में अमेरिका का जो भरोसा था उसे पूरी तरह हिला दिया है. आज दुनिया भारत की तरफ एक भरोसेमंद और पावरफुल पार्टनर के रूप में देख रही है. पाकिस्तान से अपना मुल्क नहीं संभल रहा है और वह भारत पर अटैक करने की बातें करता है. पाकिस्तान बुरी तरह से अलबलाया हुआ है क्योंकि उसे भारत की ताकत का अंदाजा है. पाकिस्तान को डर है कि भारत कभी भी उस पर एक बड़ा मिलिट्री स्ट्राइक कर सकता है।
दूसरी तरफ एफएटीएफ की नंगी तलवार भी पाकिस्तान की गर्दन पर लगातार लटकी हुई है. एफएटीएफ की ग्लोबल मीटिंग में पाकिस्तान के टेरर फंडिंग को लेकर बड़ा एक्शन लिया जा सकता है. पाकिस्तान अगर आतंकवाद को पालेगा तो एफएटीएफ उसे फिर से अपनी ब्लैक लिस्ट में डाल देगा. भारत एफएटीएफ में पाकिस्तान के सभी काले कारनामों के पक्के सबूत पेश करने की तैयारी कर चुका है.
इधर गल्फ के देश अब डिफेंस के लिए अमेरिका की जगह भारत की तरफ देख रहे हैं. यूएई भारत से सुपरसोनिक ब्रह्मोस मिसाइल खरीदने के लिए बहुत अहम बातचीत कर रहा है. यूएई को ब्रह्मोस के साथ-साथ भारत का फुली ऑटोमेटेड आकाशतीर सिस्टम भी तुरंत चाहिए. ब्रह्मोस मिसाइल ने ही ऑपरेशन सिंदूर में कमाल किया था और पाकिस्तान के एयरबेस फोड़ दिए थे।
भारत का डिफेंस प्रोडक्शन और एक्सपोर्ट किस तरह से दुनिया के रिकॉर्ड तोड़ रहा है?
भारत का डिफेंस सेक्टर अब ग्लोबल लेवल पर अपनी धाक जमा रहा है. भारत अब सिर्फ हथियार खरीद नहीं रहा है बल्कि दुनिया को अपने हथियार बेच भी रहा है. नरेंद्र मोदी लगातार ग्लोबल मंच पर भारत को एक पावरफुल मिलिट्री प्लेयर बना रहे हैं. भारत एक ऐसा देश बन गया है जिस पर अब पूरी दुनिया आंख बंद करके भरोसा कर सकती है. इसी भरोसे की वजह से इस साल कई बड़े देशों के नेता भारत आ चुके हैं. इस साल अभी तक पीएम मोदी 27 ग्लोबल लीडर्स को भारत बुलाकर मीटिंग कर चुके हैं. यूरोपियन यूनियन के अलावा फ्रांस और जर्मनी के बड़े नेता भी भारत का चक्कर लगा चुके हैं।
भारत का डिफेंस प्रोडक्शन आज के समय में बहुत तेजी से आगे बढ़ रहा है. साल 2013-14 में भारत का डिफेंस प्रोडक्शन सिर्फ 43746 करोड़ रुपये के करीब था. लेकिन साल 2025-26 में यह प्रोडक्शन बढ़कर 1.78 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है. भारत का डिफेंस एक्सपोर्ट भी अब पुराने सभी रिकॉर्ड तोड़कर आसमान छू रहा है. साल 2014 में भारत का डिफेंस एक्सपोर्ट सिर्फ 686 करोड़ रुपये था. अब यह एक्सपोर्ट बड़ी छलांग लगाकर 38424 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
]]>वृषभ राशि- आज के दिन स्ट्रेस से बचने के लिए मेडिटेशन का सहारा ले सकते हैं। दिन धन और वित्त के मामले में अच्छा रहेगा। अपनी एक्सपर्टीज बढ़ाने और कुछ नई स्किल्स सीखने में निवेश करने के लिए यह अच्छा दिन होगा।
मिथुन राशि- आज के दिन कार्य संतुष्टि में कमी हो सकती है। हो सकता है कि आप अपने लक्ष्य हासिल न कर पाएं और खर्चे बढ़ जाएं और आपका बजट गड़बड़ा जाए। व्यापार से जुड़े लोगों को आज काफी मेहनत करनी पड़ेगी।
कर्क राशि- आज के दिन हेल्थ आज अच्छी रहेगी। कॉन्फिडेंस में आपके कमी आ सकती है। लाइफ पार्टनर के साथ बॉन्ड को स्ट्रांग बनाने के लिए आप डेट प्लान कर सकते हैं। अपने काम से संबंधित कुछ निराशाओं का सामना करना पड़ेगा। आपके सिनीयर्स आप पर बिना किसी वजह के प्रेशर डाल सकते हैं।
सिंह राशि- प्रोडक्टिविटी आज के दिन रोज के मुकाबले नॉर्मल से स्लो रहेगी और यह आपको बेचैन कर देगी। कुछ अप्रत्याशित समस्याएं सामने आ सकती हैं, जिससे आपकी प्लानिंग पूरी होने में देरी हो सकती है। कारोबार से जुड़े लोगों को आज सावधान रहने की जरूरत है।
कन्या राशि- आपकी कुछ योजनाएं गलत साबित हो सकती हैं और इसका भार आप पर भी आ सकता है। एडवाइस यह रहेगी कि सावधान रहें और केवल वही जिम्मेदारियां लें, जिनके बारे में आप आश्वस्त महसूस करते हैं।
तुला राशि- आज के दिन व्यवसायी लोग अपना कार्यक्षेत्र बदलना चाह रहे होंगे। आज आपको अपनी मेंटल हेल्थ का खास ख्याल रखना चाहिए। लाइफ में प्रॉब्लम आना नॉर्मल है। इसलिए हिम्मत न हारें और पॉजिटिव रहने की कोशिश करें।
वृश्चिक राशि- आज के दिन व्यापार अच्छा चलेगा और आप अच्छे मुनाफे की भी उम्मीद कर सकते हैं। आर्थिक रूप से यह एक अच्छा दिन है। आज अपने करियर में कुछ असफलताओं का अनुभव हो सकता है।
धनु राशि- आज के दिन कमाई नॉर्मल रहेगी और उम्मीद से कम रहेगी। दिन की शुरुआत में अपने करियर को लेकर आप स्ट्रगल करेंगे। काम का प्रेशर ज्यादा महसूस होगा। नौकरी में बदलाव की भी बड़ी संभावना है।
मकर राशि- आपको अपने सहकर्मियों से कही गई बातों में सावधानी बरतने की जरूरत है। धैर्य रखने की कोशिश करें और कठोर शब्दों का प्रयोग न करें। व्यवसायियों को स्टाफ संकट का सामना करना पड़ सकता है।
कुंभ राशि- व्यवसायियों को आज के दिन की शुरुआत में कुछ असफलताओं का सामना करना पड़ेगा लेकिन जैसे-जैसे दिन गुजरेगा चीजें बेहतर होंगी। आज के दिन दफ्तर में टिके रहने के लिए बहुत कड़ी मेहनत करनी होगी। हो सकता है कि आपके सहकर्मी सहयोगात्मक न हों।
मीन राशि- करियर के नए अवसर आपके सामने आएंगे। विदेश यात्रा के योग बन रहे हैं, जो लाभदायक रहेगी। आज आपको तारीफ मिल सकती है। इंकम बढ़ाने और प्रमोशन पाने के लिए आपको पूरे लगन के साथ ऑफिस के टास्क कंप्लीट करने चाहिए।
]]>यहां के सिविल अस्पताल में एक बेहद गंभीर मामला सामने आ रहा है। अस्पताल के पास दो भाई चाय की स्टाल लगते थे। कुछ समय पहले छोटे भाई की तबीयत खराब होने पर खूनी दस्त होने लगी। इस पर पिता और भाई ने खरसिया सिविल अस्पताल में जांच कराकर परामर्श लिया।
पिता राजेंद्र प्रसाद शर्मा ने बताया कि छोटे बेटे ताम्रेश्वर शर्मा को खूनी दस्त होने पर खरसिया सिविल अस्पताल के डाक्टर विक्रम राठिया से जांच कराई। जांच के बाद डॉक्टर ने ऑपरेशन कराने की जरुरत बताई। इस पर पिता ने आपरेशन के लिए सहमति दे दी। गुरुवार ताम्रेश्वर को अस्पताल में भर्ती कराया गया।
यहां जांच के बाद आपरेशन थिएटर में ले जाया गया। पिता ऑपरेशन थियेटर के गेट पर अपने बेटे का आपरेशन पूरा होने का इंतजार करते रहे। कुछ समय बाद आपरेशन थिएटर से निकले डाक्टर और उनके सहयोगी नर्स ने पिता को बताया गया कि ताम्रेश्वर को होश नहीं आ रहा है उसे मेडिकल कालेज अस्पताल रेफर किया जाएगा।
इसके बाद पिता मरीज को लेकर रायगढ़ पहुंचे। यहां बताया गया कि तम्रेश्वर की मौत खरसिया में ही हो गई थी। इस बात की जानकारी से परिजन आक्रोशित हुए और खरसिया अस्पताल पहुंचकर हंगामा करने लगे। नौजवान की मृत्यु से आक्रोशित लोगों ने सड़क जाम कर दिया।
इसकी जानकारी होने पर पुलिस-प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और स्थिति पर काबू पाने की कोशिश करती रही। पिता का आरोप है कि पुत्र की मृत्यु डाक्टर की लापरवाही से हुई है। पुत्र को केवल पाइल्स की शिकायत थी। इसके आपरेशन से किसी की मृत्यु नहीं होती। 22 साल के युवक की मृत्यु डाक्टर की लापरवाही के कारण हुई है।
खरसिया नगर कांग्रेस के अध्यक्ष सुनील शर्मा ने खरसिया सिविल अस्पताल में युवक की मृत्यु के विरोध में चक्का जाम को अपना समर्थन दिया।
पूर्व में किडनी कांड के लिप्त व्यक्ति को खरसिया सिविल अस्पताल का प्रभारी बनाए जाने पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि बवासीर के ऑपरेशन से युवक की मृत्यु की घटना ने सिविल अस्पताल की शाख को कलंकित किया है। ऐसे डाक्टरों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए।
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उज्जैन जिले के थाना बड़नगर क्षेत्र में डायल-112 जवानों की संवेदनशीलता एवं तत्पर कार्यवाही से घर का रास्ता भटक गए 05 वर्षीय बालक को सुरक्षित उसके परिजनों से मिलाया गया। समय पर की गई सहायता से बालक सकुशल अपने परिवार तक पहुँच सका।
24 जून को राज्य स्तरीय पुलिस कंट्रोल रूम डायल-112 भोपाल को सूचना प्राप्त हुई कि थाना बड़नगर क्षेत्र अंतर्गत व्यास कॉलोनी में एक 05 वर्षीय बालक मिला है, जो घर का रास्ता भटक गया है। पुलिस सहायता की आवश्यकता है। सूचना प्राप्त होते ही बड़नगर थाना क्षेत्र में तैनात डायल-112 वाहन को तत्काल मौके के लिए रवाना किया गया।
डायल-112 स्टाफ आरक्षक श्री राकेश एवं पायलट श्री नरेंद्र ने मौके पर पहुँचकर बालक को सुरक्षित अपने संरक्षण में लिया। डायल-112 जवानों ने बालक को डायल 112 वाहन में साथ लेकर आसपास क्षेत्र में उसके परिजनों की तलाश एवं पूछताछ की। साथ ही बालक के मिलने की जानकारी स्थानीय व्हाट्सएप समूहों में साझा की। कुछ समय पश्चात बालक के परिजन थाना पहुँचे। आवश्यक पहचान एवं सत्यापन उपरांत बालक को सुरक्षित उनके सुपुर्द किया गया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार बालक खेलते-खेलते घर से निकल गया था और रास्ता भटक गया था। अपने बच्चे को सकुशल पाकर परिजनों ने डायल-112 जवानों के प्रति आभार व्यक्त किया।
डायल-112 हीरोज श्रृंखला की यह घटना दर्शाती है कि डायल-112 सेवा केवल आपातकालीन सहायता ही नहीं, बल्कि बच्चों एवं आमजन की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए मानवीय संवेदनाओं के साथ हर परिस्थिति में सहायता पहुँचाने का कार्य भी निरंतर कर रही है।
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पर्यटन एवं संस्कृति मंत्रीराजेश अग्रवाल आज लखनपुर में आयोजित शाला प्रवेश उत्सव कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने नवप्रवेशी विद्यार्थियों का पुष्प एवं तिलक लगाकर आत्मीय स्वागत किया तथा उन्हें अध्ययन सामग्री प्रदान कर नए शैक्षणिक जीवन की शुभकामनाएं दीं। कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने आकर्षक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देकर सभी अतिथियों का स्वागत किया, जिससे पूरा वातावरण उत्साह और उल्लास से भर गया।
अपने संबोधन में मंत्रीराजेश अग्रवाल ने विद्यार्थियों के साथ अपने विद्यार्थी जीवन की स्मृतियां साझा करते हुए कहा कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। नियमित अध्ययन, अनुशासन, शिक्षकों का सम्मान और माता-पिता का आशीर्वाद ही जीवन में आगे बढ़ने का सबसे मजबूत मार्ग है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक विद्यार्थी को बड़े सपने देखने चाहिए और उन्हें साकार करने के लिए पूरी निष्ठा एवं लगन से प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज के विद्यार्थी ही कल के वैज्ञानिक, चिकित्सक, शिक्षक, प्रशासक और जनप्रतिनिधि बनकर देश एवं समाज के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्रीराजेश अग्रवाल ने कहा कि शिक्षा, ज्ञान और संस्कार ही जीवन की सबसे बड़ी पूंजी हैं। यही तीनों किसी भी विद्यार्थी की सफलता का मजबूत आधार बनते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से मन लगाकर अध्ययन करने, अनुशासन का पालन करने, अपने लक्ष्य स्पष्ट रखने तथा निरंतर मेहनत के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया।
उन्होंने शिक्षकों का आह्वान किया कि वे विद्यार्थियों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ नैतिक मूल्यों एवं संस्कारों का भी विकास करें, जबकि अभिभावकों से बच्चों की पढ़ाई में निरंतर सहयोग देने की अपील की। उन्होंने कहा कि विद्यालय केवल शिक्षा प्राप्त करने का स्थान नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण की सबसे महत्वपूर्ण पाठशाला है।
मंत्रीअग्रवाल ने सभी विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों को नवीन शैक्षणिक सत्र की शुभकामनाएं देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि सभी विद्यार्थी पूरे मनोयोग से अध्ययन कर अपने विद्यालय, परिवार, क्षेत्र और प्रदेश का नाम रोशन करेंगे। कार्यक्रम में लुण्ड्रा विधायकप्रबोध मिंज, शिक्षकगण, अभिभावक, बड़ी संख्या में विद्यार्थी तथा स्थानीय जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, नवप्रवेशी विद्यार्थियों के सम्मान और सामूहिक सहभागिता ने शाला प्रवेश उत्सव को उत्साहपूर्ण बना दिया।
]]>मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार शिक्षा के क्षेत्र में लगातार प्रभावी कार्य कर रही है। खासतौर पर पिछड़े वर्ग के छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने में योगी सरकार की छात्रवृत्ति योजनाएं बेहद कारगर साबित हुई हैं। सरकार की पिछड़ा वर्ग दशमोत्तर छात्रवृत्ति/शुल्क प्रतिपूर्ति योजना लाखों छात्रों के लिए उम्मीद की नई किरण बनकर उभरी है। लाभार्थियों की संख्या के मामले में प्रयागराज जिला पूरे प्रदेश में पहले स्थान पर रहा है।
प्रयागराज में सबसे ज्यादा 1.69 लाख से अधिक छात्रों को छात्रवृत्ति का लाभ मिला है। यह योजना आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के छात्रों को शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने का मजबूत आधार दे रही है। योगी सरकार की इस पहल से लाखों परिवारों को सीधा लाभ मिला है और छात्रों के लिए उच्च शिक्षा का मार्ग आसान हुआ है।
गाजीपुर में 1.34 लाख से ज्यादा छात्रों को मिली छात्रवृत्ति
वर्ष 2025-26 में पिछड़ा वर्ग दशमोत्तर छात्रवृत्ति योजना के तहत करीब 27 लाख से अधिक छात्रों को छात्रवृत्ति दी गई है। प्रयागराज में 1,69489 छात्रों को छात्रवृत्ति का लाभ मिला है। प्रयागराज के बाद गाजीपुर जिला दूसरे स्थान पर रहा है, जहां 1.34 लाख से अधिक छात्रों को छात्रवृत्ति दी गई है। वहीं आजमगढ़ में 1.19 लाख से ज्यादा छात्रों को लाभ मिला है। इसी तरह जौनपुर में 1.15 लाख से अधिक छात्रों को योजना का लाभ मिला है, जबकि वाराणसी में 88,859 छात्रों को छात्रवृत्ति प्रदान की गई है। यह आंकड़े बताते हैं कि प्रदेश के विभिन्न जिलों में छात्रवृत्ति योजना व्यापक स्तर पर प्रभाव छोड़ रही है।
छात्र-छात्राओं के साथ ट्रांसजेंडरों को भी मिली सहायता
छात्रवृत्ति वितरण के आंकड़ों पर नजर डालें तो कक्षा 11-12 में 4,72,764 छात्राओं को छात्रवृत्ति प्रदान की गई है। जबकि 3,80,667 छात्रों और 2 ट्रांसजेंडरों को भी छात्रवृत्ति दी गई है। वहीं उच्च शिक्षा के क्षेत्र में 10,01,084 छात्राओं, 9,31,906 छात्रों और 8 ट्रांसजेंडरों को छात्रवृत्ति का लाभ दिया गया है। दशमोत्तर छात्रवृत्ति योजना केवल इंटरमीडिएट स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि उच्च शिक्षा और प्रोफेशनल कोर्स तक को कवर करती है। कक्षा 11 और 12 के छात्रों के साथ-साथ बीटेक, एमबीबीएस, एमबीए जैसे प्रोफेशनल कोर्स तथा बीए, बीएससी, बीकॉम, आईटीआई और पॉलिटेक्निक जैसे पाठ्यक्रमों में अध्ययनरत छात्रों को भी इसका लाभ दिया जा रहा है।
छात्रवृत्ति वितरण प्रक्रिया को पारदर्शी और सरल बनाया
इस योजना का मुख्य उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने का अवसर देना है। जिन छात्रों के अभिभावकों की वार्षिक आय 2 लाख रुपये या उससे कम है, उन्हें योजना का लाभ दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में योगी सरकार ने छात्रवृत्ति वितरण प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और सरल बनाया है। छात्र छात्रवृत्ति प्रबंधन प्रणाली की वेबसाइट पर ऑनलाइन आवेदन करते हैं, जिससे प्रक्रिया तेज और आसान हुई है। स्वीकृति के बाद छात्रवृत्ति की धनराशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजी जाती है।
छात्रवृत्ति योजना का लाभ बड़ी संख्या में छात्रों तक पहुंच रहा
पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के निदेशक उमेश प्रताप सिंह ने कहा कि योगी सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश का कोई भी छात्र आर्थिक अभाव के कारण शिक्षा से वंचित न रहे। योजनाओं का लाभ बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं और अन्य पात्र वर्गों तक पहुंच रहा है। उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार शिक्षा को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। दशमोत्तर छात्रवृत्ति योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्रों को शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए मजबूत आर्थिक संबल प्रदान करना है।
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