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मध्य प्रदेश के खरगोन में 5 साल की बच्चियों से लेकर 60 साल की महिलाएं डांडिया की जगह तलवारबाजी सीख रही हैं। वे जोश और उमंग के साथ शस्त्र गरबा कर रही हैं। यह अनोखा गरबा आत्मरक्षा को बढ़ावा देने और महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए आयोजित किया जा रहा है।
खरगोन के मंडी प्रांगण में हो रहे इस गरबा में 21 फीट ऊंची मां जगदम्बे की प्रतिमा स्थापित की गई है। आयोजक पूर्वा व्यास के अनुसार लगभग 250 महिलाओं और बच्चियों ने एक महीने तक प्रशिक्षक सूरजपाल से तलवारबाजी सीखी है। यह शस्त्र गरबा खरगोन में पहली बार आयोजित किया जा रहा है।
गरबा में सिर्फ महिलाएं और बच्चियां लेती हैं हिस्सा
यह गरबा रोज रात 8:30 से 11:30 बजे तक सिर्फ महिलाओं और बच्चियों के लिए होता है। सभी को मर्यादित कपड़े पहनकर आना अनिवार्य है। अनुचित वस्त्र पहनकर आने वालों को वापस भेज दिया जाता है। पूर्वा व्यास ने स्पष्ट किया कि फूहड़ता के लिए हमारे गरबे में कोई जगह नहीं है।
मां काली और शस्त्रों की पूजा से शुरूआत
गरबा की शुरुआत मां काली और शस्त्रों की पूजा से होती है। केवल धार्मिक गीतों पर ही गरबा किया जाता है। पूर्वा व्यास ने बताया कि काली माता के प्रत्येक स्वरूप की विशेषता के मुताबिक हर दिन गरबे किए जाते हैं। सप्तमी को काली मां के रूप धारण कर प्रत्येक गरबा खेलने वाले आए और उन्होंने परफॉर्म किया।
संस्कृति और परंपरा से जुड़ेगी नई पीढ़ी
पूर्वा व्यास खुद एक मुस्लिम बाहुल्य वार्ड से पार्षद का चुनाव लड़ चुकी हैं। उनका कहना है कि आज के समय में महिलाओं और बच्चियों के लिए आत्मरक्षा बहुत जरूरी है। उनका मानना है कि बच्चियां घर से ममता भाव सीख जाती हैं लेकिन मां काली उन्हें शस्त्र चलाना सिखाती हैं। साथ ही वह इस गरबे को नई पीढ़ी को अपनी परंपरा और संस्कृति से जोड़ने का एक जरिया भी मानती हैं।
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