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फ्रांस में रविवार को संसदीय चुनाव के दूसरे चरण का मतदान हुआ। माना जा रहा है कि विभाजित संसद में दक्षिणपंथी पार्टी सबसे बड़ी ताकत बनकर उभर सकती है। इधर, चुनाव के बीच देश में तनावपूर्ण माहौल है, जिससे निपटने के लिए 30,000 पुलिस बल की तैनाती की गई है। मतदाता चिंतित हैं कि बदलते राजनीतिर परिदृश्य में चुनाव के बाद राजनीतिक भूकंप आ सकता है। स्ट्रासबर्ग के पूर्वी शहर के बाहर रोसहेम गांव में 72 वर्षीय एंटोनी श्रामेक ने समाचार एजेंसी एएफपी से कहा कि उन्हें डर है कि फ्रांस गणतंत्र के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ देखेगा।
राष्ट्रपति ने किया था समय से पहले चुनाव का एलान
41 वर्षीय सिविल सेवक एडेला फोरनियर ने सहमति व्यक्त की और कहा कि मैं चाहता हूं कि जनता का मूड शांत हो, लेकिन हम इससे बहुत दूर हैं। गौरतलब है कि राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन ने जून के यूरोपीय संसद वोट में हार के बाद समय से तीन साल पहले आकस्मिक चुनाव का ऐलान किया था। उनकी ओर से खेले गए इस जुए का उल्टा असर होता दिख रहा है।
पहले चरण में दक्षिणपंथी पार्टी को बढ़त
धुर दक्षिणपंथी नेता मरीन ले पेन की राष्ट्रीय रैली (RN) ने 30 जून को हुए पहले चरण के मतदान में बढ़त बनाई थी और अब रविवार को रन ऑफ दौड़ में इस उपलब्धि को दोहराने की ओर अग्रसर हैं। संभवत: वह पूर्ण बहुमत हासिल न कर पाएं, जिससे मैक्रॉन को ले पेन के लेफ्टिनेंट, आरएन पार्टी के 28 वर्षीय नेता जॉर्डन बार्डेला को पेरिस ओलंपिक की मेजबानी से कुछ हफ्ते पहले प्रधान मंत्री के रूप में नियुक्त करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।