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भारत में अवैध रूप से रहने वाले बांग्लादेशी नागरिकों के खिलाफ पश्चिम बंगाल और दिल्ली में दो अलग-अलग बड़ी कार्रवाइयां की गई हैं। पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी रोड स्टेशन पर रेलवे सुरक्षा बल (RPF) ने दिल्ली जाने वाली नॉर्थईस्ट एक्सप्रेस ट्रेन से 14 बांग्लादेशी नागरिकों को हिरासत में लिया है। पकड़े गए इन लोगों में चार महिलाएं और चार नाबालिग भी शामिल हैं।
फर्जी आधार कार्ड का संदेह
पकड़े गए इन व्यक्तियों के पास से आधार कार्ड बरामद हुए हैं। ये दस्तावेज फर्जी हैं या अवैध तरीकों से बनवाए गए हैं, इसकी सत्यता जांचने के लिए एक विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है। तलाशी के दौरान इनके पास से फर्जी दस्तावेजों के साथ-साथ मलेशियाई मुद्रा भी बरामद की गई है। पूछताछ के दौरान पकड़े गए लोगों ने बताया कि वे काम की तलाश में कश्मीर जा रहे थे।
समाचार एजेंसी ANI से बात करते हुए, आरपीएफ इंस्पेक्टर बिप्लब दत्ता ने बताया कि यह कार्रवाई विशिष्ट सूचनाओं के आधार पर और नियमित ट्रेन चेकिंग के दौरान की गई। उन्होंने कहा, 'सूत्रों से मिली जानकारी के आधार पर, हमारे आरपीएफ कर्मचारियों ने ट्रेनों के निरीक्षण के दौरान कई संदिग्ध व्यक्तियों की पहचान की। उनके आधार कार्ड की जांच करने पर, दस्तावेज़ फर्जी प्रतीत हुए। इसी पर कार्रवाई करते हुए हमने 5 पुरुषों, 5 महिलाओं और 4 बच्चों को हिरासत में लिया। ये सभी बांग्लादेश के निवासी हैं।'
दिल्ली पुलिस के 'विदेशी सेल' का बड़ा अभियान
इससे पहले 13 मार्च को, दिल्ली पुलिस के बाहरी जिले के विदेशी सेल ने भी अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों के खिलाफ एक सख्त कदम उठाया था। एक विशेष अभियान के तहत, पुलिस ने 10 बांग्लादेशी प्रवासियों को गिरफ्तार किया, जो कथित तौर पर फर्जी मेडिकल वीजा व्यवस्था का उपयोग कर रहे थे।
हिरासत में लिए गए इन अवैध नागरिकों को वापस भेजने के लिए विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय (FRRO) द्वारा निर्वासन की कार्यवाही शुरू कर दी गई है। विदेशी सेल की एक विशेष टीम को सत्यापन अभियान के दौरान सूचना मिली थी कि कुछ विदेशी नागरिक (जिनके बांग्लादेशी होने का संदेह था) अपने वीजा की अवधि समाप्त होने के बावजूद इलाके में रह रहे हैं।
बुल्गारिया जाने की फिराक में थे
जांच में एक और बड़ा खुलासा हुआ कि ये व्यक्ति भारत में रहने के लिए कोई वैध दस्तावेज न होने के बावजूद, बुल्गारिया के लिए मेडिकल वीजा प्राप्त करने का प्रयास कर रहे थे। बाहरी जिले का विदेशी सेल अपने अधिकार क्षेत्र में अवैध प्रवास के खिलाफ बड़े पैमाने पर अभियान चला रहा है। इसके तहत पुलिस की टीमें लगातार सत्यापन कर रही हैं, खुफिया जानकारी जुटा रही हैं और बिना वैध भारतीय दस्तावेजों के रहने वाले लोगों की पहचान कर रही हैं।
बच्चों के आधार कार्ड नए UIDAI ऐप पर अपडेट हो सकते हैं लेकिन बायोमेट्रिक डिटेल्स अपडेट कराने के लिए आपको आधार सेंटर जाना होगा।
क्या आपको अपने बच्चे का आधार अपडेट कराना है? सरकार ने 5 साल से बड़े बच्चों का आधार अपडेट कराना अनिवार्य कर दिया है। बता दें कि इसे MBU यानी कि Mandatory Biometric Update कहते हैं। इस उम्र से पहले बनने वाले आधार में बच्चों का बायोमेट्रिक डेटा जैसे कि आंखों का स्कैन (आईरिस स्कैन) और उंगलियों के निशान नहीं लिए जाते। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या ये ऑप्शन आपको UIDAI के ऐप में मिल जाएगा?
क्या आप ऑनलाइन घर बैठे बच्चों का MBU करवा सकते हैं? इसका जवाब है नहीं। दरअसल नए आधार ऐप में आप आधार से जुड़ी कुछ जानकारी अपडेट करवा सकते हैं लेकिन बायोमेट्रिक डिटेल्स ऐप से अपडेट नहीं कराई जा सकती।
क्या होता है MBU?
MBU का मतलब है Mandatory Biometric Update, जो कि बच्चों के आधार कार्ड के लिए होता है। 5 साल से कम उम्र के बच्चों का आधार कार्ड बनवाते समय उनके बायोमेट्रिक डेटा नहीं लिए जाते। बच्चों का आधार कार्ड माता-पिता के आधार से लिंक होता है। हालांकि 5 साल की उम्र के बाद आधार को अपडेट कराना जरूरी होता है। इसे ही MBU कहते हैं।
नए आधार ऐप से हो पाएगा काम?
हाल ही में UIDAI ने नया आधार ऐप लॉन्च किया था। इसमें कई तरह के फीचर्स दिए गए हैं। मसलन मोबाइल नंबर और पता बदलने का ऑप्शन इस ऐप में दिया गया है। हालांकि बायोमेट्रिक अपडेट के लिए यूजर को आधार सेंटर विजिट करना पड़ता है।
सेंटर पर ही क्यों अपडेट होता है डेटा?
सवाल उठता है कि आखिर बायोमेट्रिक डेटा आधार सेंटर पर ही क्यों अपडेट होता है? ऐसा इसलिए क्योंकि बायोमेट्रिक डेटा लेने के लिए कुछ खास मशीनों जैसे कि फिंगरप्रिंट रीडर, आईरिस स्कैनर आदि की जरूरत पड़ती है। यह डिवाइस सेंटर पर मौजूद होते हैं और इसके लिए शख्स या बच्चे का सेंटर पर मौजूद होना जरूरी हो जाता है। वहीं नाम या पता जैसी जानकारी ऐप पर भी जरूरी डॉक्यूमेंट सबमिट करके अपडेट हो सकती है।
Aadhaar ऐप ऐसे करेगा मदद
हालांकि ऐसा नहीं है कि आधार ऐप बच्चे का आधार अपडेट कराने में बिल्कुल मदद नहीं कर सकती। अगर आप नया आधार ऐप इस्तेमाल करते हैं, तो ऐप में नीचे मौजूद Help ऑप्शन के जरिए मदद ले सकते हैं।
Help सेक्शन में आपको FAQ और CONTACT US का ऑप्शन मिलता है।
आप CONTACT US ऑप्शन के जरिए अपने पास मौजूद आधार सेंटर का पता लगा सकते हैं।
इसके अलावा बच्चों के स्कूलों और पोस्ट ऑफिस में भी MBU का काम किया जा रहा है। आप इन दो जगहों पर भी बच्चे की बायोमेट्रिक डिटेल्स आधार में अपडेट करवा सकते हैं।
जिला मिशन समन्वयक समग्र शिक्षा रेखराज शर्मा द्वारा सभी विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी एवं विकासखंड स्त्रोत केंद्र समन्वयकों को निर्देशित करते हुए अभियान के प्रचार-प्रसार के लिए विद्यालयों को पालकों एवं विद्यार्थियों को जागरूक करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि अधिक से अधिक छात्र-छात्राएं शिविर में उपस्थित होकर अपना बायोमेट्रिक अपडेट करवा सकें। इस कार्य के सफल संचालन के लिए विकासखंड स्तर पर बीआरसी एवं संकुल स्तर पर संकुल समन्वयकों को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। पूरे अभियान की प्रतिदिन मॉनिटरिंग जिला शिक्षा अधिकारी महासमुंद द्वारा किया जाएगा। प्रथम चरण में 5 से 7 वर्ष एवं 15 से 17 वर्ष आयु वर्ग के विद्यार्थियों के बायोमेट्रिक अपडेट पर फोकस करते हुए शत-प्रतिशत लक्ष्य प्राप्त करने के निर्देश दिए गए हैं।
यूआईडीएआई द्वारा बायोमेट्रिक अपडेट की जानकारी यूडाईस पोर्टल पर अपडेट करने की सुविधा भी उपलब्ध करा दी गई है। साथ ही यूआईडीएआई के निर्देशानुसार 7 से 15 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों का अनिवार्य बायोमेट्रिक अपडेट एक वर्ष के लिए निःशुल्क किया गया है, जबकि 5 से 7 वर्ष एवं 17 वर्ष के बच्चों के लिए यह सुविधा पहले से ही निःशुल्क है। आधार ऑपरेटरों को प्रतिदिन शिविर की जानकारी निर्धारित प्रारूप में संधारित करने तथा शिविर स्थल पर आवश्यक दस्तावेज सूची, शुल्क सूची एवं अन्य निर्देश प्रदर्शित करने कहा गया हैं।
]]>अगर आपने भी आधार और मोबाइल नंबर को लिंक कराया है, तो आपको भी चौकन्ना हो जाना चाहिए। दरअसल साइबर अपराधियों ने लोगों के बैंक खाते खाली करने का नया तरीका निकाल लिया है। गुजरात के नडियाद में एक होटल मैनेजर के साथ ऐसा कुछ हुआ है, जिसने प्रशासन समेत आम आदमी की नींद भी उड़ा दी है। इस काम को अंजाम देने के लिए अपराधियों ने उस शख्स के मोबाइल नंबर और आधार कार्ड तक को कैंसिल कर दिया ताकि उसे कोई बैंक अलर्ट या OTP न मिल सके।
क्या है ठगी का नया तरीका?
इस मामले में पीड़ित नवलकिशोर सिंह बोहरा ने हाल ही में अपना आधार से जुड़ा मोबाइल नंबर बदला था। उनके नए नंबर से आधार कनेक्ट होता, उससे पहले ही उनके पुराने सिम के नेटवर्क गायब हो गए। जब वह टेलीकॉम सेंटर गए, तो मालूम पड़ा कि उनका आधार कार्ड कैंसिल हो गया है। इसी वजह से उनका सिम भी डिक्टिवेट हो गया था। पुलिस की मानें, तो साइबर अपराधियों ने अपने जुर्म को सफाई से अंजाम देने के मकसद से ही पीड़ित के आधार कार्ड को बंद किया था, ताकि बैंक खाता खाली होते समय उन्हें कोई मैसेज न मिल पाए। इस दौरान अपराधियों को पीड़ित के HDFC और SBI बैंक खातों में सेंध लगाने का मौका मिल गया।
बिना OTP कैसे हो पाई ठगी?
इस मामले में हैरान करने वाली बात यह है कि ठगों को पीड़ित का बैंक खाता खाली करने के लिए किसी OTP की जरूरत नहीं पड़ी। इससे भी बड़ी बात यह थी कि बिना ओटीपी बैंक से लाखों रुपये ट्रांसफर कर लिए गए। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार,(REF.) पुलिस जांच में सामने आया है कि ठगों ने वारदात को अंजाम देने से पहले पीड़ित की आधार डिटेल्स और बैंक खातों की जानकारी जुटाई थी। इसके बाद उनके आधार ऑथेंटिकेशन और सिम कार्ड को ब्लॉक करा दिया गया। सिम के चालू न होने के चलते पीड़ित को बैंक खातों के खाली होने का पता नहीं चल पाया और ठगों ने अलग-अलग बैंक खातों में 3.09 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए।
आप किन बातों का ध्यान रखें?
पुलिस के मुताबिक यह साइबर अपराधियों का ठगी का नया तरीका है। नडियाद पुलिस ने बैंक रिकॉर्ड्स और टेलीकॉम कंपनियों के साथ मिलकर उन खातों की तलाश शुरू कर दी है जिनमें पैसा भेजा गया है। पुलिस के अनुसार अगर आपके सिम कार्ड के नेटवर्क भी अचानक गायब हो जाएं और आपको कुछ भी संदिग्ध लगे, तो तुरंत बैंक को सूचित करें और साइबर हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें।
अगर आपने भी आधार और मोबाइल नंबर को लिंक कराया है, तो आपको भी चौकन्ना हो जाना चाहिए। दरअसल साइबर अपराधियों ने लोगों के बैंक खाते खाली करने का नया तरीका निकाल लिया है। गुजरात के नडियाद में एक होटल मैनेजर के साथ ऐसा कुछ हुआ है, जिसने प्रशासन समेत आम आदमी की नींद भी उड़ा दी है। इस काम को अंजाम देने के लिए अपराधियों ने उस शख्स के मोबाइल नंबर और आधार कार्ड तक को कैंसिल कर दिया ताकि उसे कोई बैंक अलर्ट या OTP न मिल सके।
क्या है ठगी का नया तरीका?
इस मामले में पीड़ित नवलकिशोर सिंह बोहरा ने हाल ही में अपना आधार से जुड़ा मोबाइल नंबर बदला था। उनके नए नंबर से आधार कनेक्ट होता, उससे पहले ही उनके पुराने सिम के नेटवर्क गायब हो गए। जब वह टेलीकॉम सेंटर गए, तो मालूम पड़ा कि उनका आधार कार्ड कैंसिल हो गया है। इसी वजह से उनका सिम भी डिक्टिवेट हो गया था। पुलिस की मानें, तो साइबर अपराधियों ने अपने जुर्म को सफाई से अंजाम देने के मकसद से ही पीड़ित के आधार कार्ड को बंद किया था, ताकि बैंक खाता खाली होते समय उन्हें कोई मैसेज न मिल पाए। इस दौरान अपराधियों को पीड़ित के HDFC और SBI बैंक खातों में सेंध लगाने का मौका मिल गया।
बिना OTP कैसे हो पाई ठगी?
इस मामले में हैरान करने वाली बात यह है कि ठगों को पीड़ित का बैंक खाता खाली करने के लिए किसी OTP की जरूरत नहीं पड़ी। इससे भी बड़ी बात यह थी कि बिना ओटीपी बैंक से लाखों रुपये ट्रांसफर कर लिए गए। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार,(REF.) पुलिस जांच में सामने आया है कि ठगों ने वारदात को अंजाम देने से पहले पीड़ित की आधार डिटेल्स और बैंक खातों की जानकारी जुटाई थी। इसके बाद उनके आधार ऑथेंटिकेशन और सिम कार्ड को ब्लॉक करा दिया गया। सिम के चालू न होने के चलते पीड़ित को बैंक खातों के खाली होने का पता नहीं चल पाया और ठगों ने अलग-अलग बैंक खातों में 3.09 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए।
आप किन बातों का ध्यान रखें?
पुलिस के मुताबिक यह साइबर अपराधियों का ठगी का नया तरीका है। नडियाद पुलिस ने बैंक रिकॉर्ड्स और टेलीकॉम कंपनियों के साथ मिलकर उन खातों की तलाश शुरू कर दी है जिनमें पैसा भेजा गया है। पुलिस के अनुसार अगर आपके सिम कार्ड के नेटवर्क भी अचानक गायब हो जाएं और आपको कुछ भी संदिग्ध लगे, तो तुरंत बैंक को सूचित करें और साइबर हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें।
केंद्र सरकार की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, आधार-आधारित फेस ऑथेंटिकेशन ने एक नया मानक स्थापित करते हुए मात्र 6 महीनों में दोगुना, 100 करोड़ से 200 करोड़ लेनदेन दर्ज किए हैं। आधार फेस ऑथेंटिकेशन से आधार धारक अपनी पहचान तुरंत, सुरक्षित और संपर्क रहित तरीके से, कभी भी, कहीं भी, बिना किसी दस्तावेज के सत्यापित कर सकते हैं। इलेक्ट्रानिक्स एवं आईटी मंत्रालय के अनुसार, 10 अगस्त, 2025 को यूआईडीएआई ने फेस ऑथेंटिकेशन के 200 करोड़ ट्रांजैक्शन का ऐतिहासिक जश्न मनाया, जो भारत के निर्बाध, सुरक्षित और कागज रहित प्रमाणीकरण की ओर तेजी से बढ़ते कदम को दर्शाता है।
आधार से पहचान साबित करने की प्रक्रिया अपनाने की गति तेजी से बढ़ रही है
आधार से पहचान साबित करने की प्रक्रिया अपनाने की गति तेजी से बढ़ रही है। जहां 2024 की छमाही तक 50 करोड़ लेनदेन दर्ज किए गए थे वहीं, लगभग पांच महीनों में जनवरी 2025 में यह संख्या दोगुनी होकर 100 करोड़ लेनदेन हो गई। मंत्रालय ने बताया कि छह महीने से भी कम समय में, यह आंकड़ा फिर से दोगुना होकर 200 करोड़ के मील के पत्थर तक पहुंच गया है। यूआईडीएआई के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) भुवनेश कुमार ने कहा, “इतने कम समय में 200 करोड़ आधार फेस ऑथेंटिकेशन लेनदेन तक पहुंचना, निवासियों और सेवा प्रदाताओं, दोनों के आधार के सुरक्षित, समावेशी और इनोवेटिव ऑथेंटिकेशन इकोसिस्टम में विश्वास और भरोसे को दर्शाता है।”
छह महीने से भी कम समय में 100 करोड़ से 200 करोड़ लेनदेन तक का सफर इसकी मापनीयता और देश की डिजिटल रेडीनेस का प्रमाण है
छह महीने से भी कम समय में 100 करोड़ से 200 करोड़ लेनदेन तक का सफर इसकी मापनीयता और देश की डिजिटल रेडीनेस का प्रमाण है।” उन्होंने आगे कहा, “गांवों से लेकर महानगरों तक, यूआईडीएआई सरकारों, बैंकों और सेवा प्रदाताओं के साथ मिलकर आधार फेस ऑथेंटिकेशन को एक बड़ी सफलता बनाने और प्रत्येक भारतीय को अपनी पहचान तुरंत, सुरक्षित और कहीं भी साबित करने की शक्ति प्रदान करने के लिए काम कर रहा है।” मंत्रालय ने कहा, “यह उपलब्धि केवल संख्याओं को लेकर नहीं है, यह इस बात का प्रमाण है कि कैसे समावेशी तकनीक, जब कुशलतापूर्वक उपयोग की जाती है, तो विभाजन को पाट सकती है, नागरिकों को सशक्त बना सकती है और वास्तव में आत्मविश्वास से भरे डिजिटल भविष्य की ओर भारत की यात्रा को गति दे सकती है।
]]>मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले में धरती आबा ग्राम उत्कर्ष अभियान जनजातीय समुदाय के जीवन में आशा की नई किरण बनकर उभरी है। इस योजना के अंतर्गत लगाए जा रहे शिविरों के माध्यम से दूरस्थ अंचलों तक आधार से संबंधित सेवाएं पहुँचाई जा रही हैं, जिससे हजारों नागरिकों को घर के पास ही राहत मिल रही है।
अब तक जिले में आयोजित शिविरों के माध्यम से 2340 से अधिक जनजातीय नागरिकों को आधार कार्ड बनाया, अद्यतन एवं समस्याओं का समाधान सफलतापूर्वक किया जा चुका है। इससे यह स्पष्ट होता है कि धरती आबा योजना केवल एक सरकारी पहल नहीं, बल्कि जनजातीय समाज के लिए एक डिजिटल सशक्तिकरण अभियान बन गई है।
जिले के आधार सेवा संचालक श्री लखन लाल साहू को जिला अंतर्गत राज्य में Best performing Operator in Aadhaar Enrolment &Update services in LWE Districts of Chhattisgarh State यह पुरस्कार UIDAI REGIONAL OFFICE HYDERABAD द्वारा 20 जून 2025 को रायपुर में आयोजित सम्मान समारोह में प्रदान किया गया।
धरती आबा ग्राम उत्कर्ष अभियान अंतर्गत नागरिकों को डिजिटल सेवा आधार, आय, जाति, निवास, बिजली की बिल भुगतान, गैस रिफिलिंग, ट्रेन टिकट, बैंकिग, किसानों का फसल बीमा, किसान पंजीयन, वोटर आईडी कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, पेन कार्ड, आदि सेवाएं जनजातीय समुदाय के नागरिकों को धरती आबा ग्राम उत्कर्ष अभियान शिविर में ग्राम स्तर पर ही मुहैया हो रहा है।
धरती आबा ग्राम उत्कर्ष अभियान आज ग्राम विकास, जन सुविधा और डिजिटल समावेश का प्रतीक बन चुकी है। यह पहल न केवल आधार जैसी महत्वपूर्ण सेवा को सुलभ बना रही है, बल्कि जनजातीय अंचलों को मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो रही है।
]]>मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले में धरती आबा ग्राम उत्कर्ष अभियान जनजातीय समुदाय के जीवन में आशा की नई किरण बनकर उभरी है। इस योजना के अंतर्गत लगाए जा रहे शिविरों के माध्यम से दूरस्थ अंचलों तक आधार से संबंधित सेवाएं पहुँचाई जा रही हैं, जिससे हजारों नागरिकों को घर के पास ही राहत मिल रही है।
अब तक जिले में आयोजित शिविरों के माध्यम से 2340 से अधिक जनजातीय नागरिकों को आधार कार्ड बनाया, अद्यतन एवं समस्याओं का समाधान सफलतापूर्वक किया जा चुका है। इससे यह स्पष्ट होता है कि धरती आबा योजना केवल एक सरकारी पहल नहीं, बल्कि जनजातीय समाज के लिए एक डिजिटल सशक्तिकरण अभियान बन गई है।
जिले के आधार सेवा संचालक श्री लखन लाल साहू को जिला अंतर्गत राज्य में Best performing Operator in Aadhaar Enrolment &Update services in LWE Districts of Chhattisgarh State यह पुरस्कार UIDAI REGIONAL OFFICE HYDERABAD द्वारा 20 जून 2025 को रायपुर में आयोजित सम्मान समारोह में प्रदान किया गया।
धरती आबा ग्राम उत्कर्ष अभियान अंतर्गत नागरिकों को डिजिटल सेवा आधार, आय, जाति, निवास, बिजली की बिल भुगतान, गैस रिफिलिंग, ट्रेन टिकट, बैंकिग, किसानों का फसल बीमा, किसान पंजीयन, वोटर आईडी कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, पेन कार्ड, आदि सेवाएं जनजातीय समुदाय के नागरिकों को धरती आबा ग्राम उत्कर्ष अभियान शिविर में ग्राम स्तर पर ही मुहैया हो रहा है।
धरती आबा ग्राम उत्कर्ष अभियान आज ग्राम विकास, जन सुविधा और डिजिटल समावेश का प्रतीक बन चुकी है। यह पहल न केवल आधार जैसी महत्वपूर्ण सेवा को सुलभ बना रही है, बल्कि जनजातीय अंचलों को मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो रही है।
]]>चुनाव आयोग अगले हफ्ते अहम बैठक करने वाला है। इस बैठक में केंद्रीय गृह मंत्रालय, कानून मंत्रालय और भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) के बड़े अधिकारी शामिल होंगे। ईसी सूत्रों ने बताया कि यह बैठक आधार को वोटर आईडी कार्ड से जोड़ने के बारे में होगी। 2021 में जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 में संशोधन के बाद, आधार को EPIC (इलेक्टर्स फोटो आइडेंटिटी कार्ड) जोड़ने की अनुमति मिल गई थी। इसके बाद चुनाव आयोग ने स्वैच्छिक आधार पर मतदाताओं से आधार नंबर लेना शुरू कर दिया। हालांकि, अभी तक दोनों डेटाबेस को लिंक नहीं किया गया है।
वोटर लिस्ट से फर्जी नाम हटाने पर जोर
इस कदम का मकसद वोटर लिस्ट से फर्जी नाम हटाना और उसे साफ-सुथरा बनाना था। इसके लिए आधार और वोटर कार्ड को जोड़ना जरूरी नहीं था। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और चुनाव आयुक्त विवेक जोशी 18 मार्च को केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन, विधायी विभाग के सचिव राजीव मणि और UIDAI के सीईओ भुवनेश कुमार से मिलेंगे।
आधार को EPIC से जोड़ने की चर्चा
इस बैठक में आधार को EPIC से जोड़ने पर चर्चा होगी। यह बैठक ऐसे समय हो रही है जब तृणमूल कांग्रेस ने पश्चिम बंगाल और अन्य राज्यों में मतदाताओं के एक ही EPIC नंबर होने का मुद्दा उठाया है। चुनाव आयोग ने माना है कि कुछ राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों ने EPIC नंबर जारी करते समय गलत अल्फान्यूमेरिक सीरीज का इस्तेमाल किया था।
चुनाव आयोग का प्लान क्या है
इलेक्शन कमीशन ने हाल ही में फैसला लिया है कि वह तीन महीने के अंदर डुप्लिकेट नंबर वाले मतदाताओं को नए EPIC नंबर जारी करेगा। आयोग ने कहा है कि डुप्लिकेट नंबर होने का मतलब फर्जी वोटर नहीं है। केवल वही लोग वोट डाल सकते हैं जो किसी विशेष निर्वाचन क्षेत्र में रजिस्टर्ड हैं। आधार को EPIC से जोड़ने के पीछे मुख्य उद्देश्य वोटर लिस्ट को साफ-सुथरा बनाना है। इससे फर्जी वोटरों की पहचान करने में मदद मिलेगी।
आधार कार्ड को वोटर आईडी से जोड़ने के कई फायदे
आधार कार्ड को वोटर आईडी से जोड़ने के कई फायदे हो सकते हैं। जैसे, इससे फर्जी वोटिंग रुक सकती है। एक व्यक्ति के एक से ज्यादा जगह वोट डालने की संभावना कम हो जाएगी। वोटर लिस्ट में एक ही व्यक्ति का नाम कई बार होने की समस्या भी दूर हो सकती है। चुनाव आयोग का मानना है कि इससे चुनाव प्रक्रिया और पारदर्शी होगी।
हालांकि, कुछ लोग इस कदम पर प्राइवेसी की चिंता भी जता रहे हैं। उनका मानना है कि इससे लोगों की निजी जानकारी लीक हो सकती है। वो निजता के उल्लंघन को लेकर चिंतित हैं। उनका कहना है कि आधार जैसी संवेदनशील जानकारी को वोटर आईडी से जोड़ना खतरनाक हो सकता है। यह लोगों के निजता के अधिकार का उल्लंघन भी हो सकता है।
आधार-वोटर आईडी जोड़ने का फैसला अहम
चुनाव ने इस मुद्दे पर सभी पक्षों से बातचीत करने का फैसला किया है। इसलिए गृह मंत्रालय, कानून मंत्रालय और UIDAI के अधिकारियों के साथ बैठक बुलाई गई है। इस बैठक में सभी पहलुओं पर विस्तार से चर्चा होगी। यह देखना होगा कि EC इस मुद्दे को कैसे संभालता है। आधार को वोटर कार्ड से जोड़ने का फैसला काफी अहम है। इससे चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता आ सकती है, लेकिन साथ ही लोगों की निजता की सुरक्षा भी जरूरी है। आने वाले समय में इस पर और भी चर्चा होगी।
]]>चुनाव आयोग अगले हफ्ते अहम बैठक करने वाला है। इस बैठक में केंद्रीय गृह मंत्रालय, कानून मंत्रालय और भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) के बड़े अधिकारी शामिल होंगे। ईसी सूत्रों ने बताया कि यह बैठक आधार को वोटर आईडी कार्ड से जोड़ने के बारे में होगी। 2021 में जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 में संशोधन के बाद, आधार को EPIC (इलेक्टर्स फोटो आइडेंटिटी कार्ड) जोड़ने की अनुमति मिल गई थी। इसके बाद चुनाव आयोग ने स्वैच्छिक आधार पर मतदाताओं से आधार नंबर लेना शुरू कर दिया। हालांकि, अभी तक दोनों डेटाबेस को लिंक नहीं किया गया है।
वोटर लिस्ट से फर्जी नाम हटाने पर जोर
इस कदम का मकसद वोटर लिस्ट से फर्जी नाम हटाना और उसे साफ-सुथरा बनाना था। इसके लिए आधार और वोटर कार्ड को जोड़ना जरूरी नहीं था। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और चुनाव आयुक्त विवेक जोशी 18 मार्च को केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन, विधायी विभाग के सचिव राजीव मणि और UIDAI के सीईओ भुवनेश कुमार से मिलेंगे।
आधार को EPIC से जोड़ने की चर्चा
इस बैठक में आधार को EPIC से जोड़ने पर चर्चा होगी। यह बैठक ऐसे समय हो रही है जब तृणमूल कांग्रेस ने पश्चिम बंगाल और अन्य राज्यों में मतदाताओं के एक ही EPIC नंबर होने का मुद्दा उठाया है। चुनाव आयोग ने माना है कि कुछ राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों ने EPIC नंबर जारी करते समय गलत अल्फान्यूमेरिक सीरीज का इस्तेमाल किया था।
चुनाव आयोग का प्लान क्या है
इलेक्शन कमीशन ने हाल ही में फैसला लिया है कि वह तीन महीने के अंदर डुप्लिकेट नंबर वाले मतदाताओं को नए EPIC नंबर जारी करेगा। आयोग ने कहा है कि डुप्लिकेट नंबर होने का मतलब फर्जी वोटर नहीं है। केवल वही लोग वोट डाल सकते हैं जो किसी विशेष निर्वाचन क्षेत्र में रजिस्टर्ड हैं। आधार को EPIC से जोड़ने के पीछे मुख्य उद्देश्य वोटर लिस्ट को साफ-सुथरा बनाना है। इससे फर्जी वोटरों की पहचान करने में मदद मिलेगी।
आधार कार्ड को वोटर आईडी से जोड़ने के कई फायदे
आधार कार्ड को वोटर आईडी से जोड़ने के कई फायदे हो सकते हैं। जैसे, इससे फर्जी वोटिंग रुक सकती है। एक व्यक्ति के एक से ज्यादा जगह वोट डालने की संभावना कम हो जाएगी। वोटर लिस्ट में एक ही व्यक्ति का नाम कई बार होने की समस्या भी दूर हो सकती है। चुनाव आयोग का मानना है कि इससे चुनाव प्रक्रिया और पारदर्शी होगी।
हालांकि, कुछ लोग इस कदम पर प्राइवेसी की चिंता भी जता रहे हैं। उनका मानना है कि इससे लोगों की निजी जानकारी लीक हो सकती है। वो निजता के उल्लंघन को लेकर चिंतित हैं। उनका कहना है कि आधार जैसी संवेदनशील जानकारी को वोटर आईडी से जोड़ना खतरनाक हो सकता है। यह लोगों के निजता के अधिकार का उल्लंघन भी हो सकता है।
आधार-वोटर आईडी जोड़ने का फैसला अहम
चुनाव ने इस मुद्दे पर सभी पक्षों से बातचीत करने का फैसला किया है। इसलिए गृह मंत्रालय, कानून मंत्रालय और UIDAI के अधिकारियों के साथ बैठक बुलाई गई है। इस बैठक में सभी पहलुओं पर विस्तार से चर्चा होगी। यह देखना होगा कि EC इस मुद्दे को कैसे संभालता है। आधार को वोटर कार्ड से जोड़ने का फैसला काफी अहम है। इससे चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता आ सकती है, लेकिन साथ ही लोगों की निजता की सुरक्षा भी जरूरी है। आने वाले समय में इस पर और भी चर्चा होगी।
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