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अडानी ग्रुप की कंपनी अडानी एयरपोर्ट होल्डिंग्स लिमिटेड (AAHL) करीब 1 अरब डॉलर की इक्विटी जुटाने की सोच रही है। यह पैसा विदेशी निवेशकों से आएगा। कंपनी इस पैसे का इस्तेमाल अपने विकास योजनाओं और नए एयरपोर्ट खरीदने के लिए कर सकती है। इकोनॉमिक टाइम्स के अनुसार यह जानकारी अडानी ग्रुप के सीएफओ जुगेशिंदर सिंह ने दी है।
यह पहली बार होगा जब अडानी का एयरपोर्ट कारोबार बाहर के निवेशकों से पैसा लेगा। अभी तक यह काम अडानी ग्रुप ही करता आया है। अडानी ग्रीन एनर्जी के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर सागर अडानी ने कहा, 'हर कोई हमारे साथ एयरपोर्ट कारोबार करना चाहता है। अमेरिका, मध्य पूर्व और ऑस्ट्रेलिया के निवेशकों ने इस कारोबार में पैसा लगाने की इच्छा जताई है।' सागर अडानी, ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी के भतीजे भी हैं।
क्या है कंपनी की स्थिति?
सूत्रों के अनुसार, अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड के पास एयरपोर्ट यूनिट का पूरा मालिकाना हक है। इसकी वैल्यू लगभग 20 अरब डॉलर आंकी गई है। यह GMR एयरपोर्ट्स से भी ज्यादा है, जिसका मार्केट कैप 10.4 अरब डॉलर है। GMR दिल्ली, हैदराबाद, गोवा और नागपुर जैसे शहरों में एयरपोर्ट चलाती है।
और बढ़ेगी यात्रियों की संख्या
डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) के अनुसार, भारत में घरेलू हवाई यात्रियों की संख्या में FY25 में 10.35% की वृद्धि हुई है। इसका मतलब है कि पिछले साल के मुकाबले इस साल ज्यादा लोगों ने हवाई यात्रा की है। हवाई यात्रा करने वालों की संख्या बढ़ रही है। एयरलाइंस ने कुल 14.54 मिलियन यात्रियों को यात्रा कराई।
केयरएज रेटिंग्स का अनुमान है कि भारत में हवाई यात्रियों की संख्या FY25 से FY27 के बीच 9% की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) से बढ़ेगी। इसका मतलब है कि अगले कुछ सालों में हवाई यात्रा करने वालों की संख्या तेजी से बढ़ेगी और यह 485 मिलियन तक पहुंच सकती है। CAGR का मतलब है कि हर साल औसतन 9% की वृद्धि होगी।
डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में घरेलू हवाई यात्रियों की संख्या में 10.35% की वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई। कुल 14.54 करोड़ यात्रियों ने उड़ान भरी। CareEdge Ratings के अनुसार, FY25 से FY27 के बीच भारत में हवाई यात्री यातायात में 9% की CAGR से वृद्धि की उम्मीद है, जिससे यह संख्या 485 मिलियन तक पहुंच सकती है।
अडानी एयरपोर्ट होल्डिंग्स, जो इस समय भारत का सबसे बड़ा प्राइवेट एयरपोर्ट ऑपरेटर है, वर्तमान में मुंबई, अहमदाबाद, लखनऊ, मंगलुरु, जयपुर, गुवाहाटी और तिरुवनंतपुरम जैसे 7 एयरपोर्ट्स का संचालन कर रहा है। कंपनी नवी मुंबई एयरपोर्ट को अगस्त तक शुरू करने की तैयारी में भी है। कंपनी अगले डेढ़ दशक में अपनी कैपेसिटी को तीन गुना करने की योजना बना रही है।
जुगेशिंदर सिंह ने आगे बताया कि AAHL को अगले 2–3 वर्षों में एक स्वतंत्र सब्सिडियरी के रूप में हाइव ऑफ किया जाएगा और इसके बाद इसका आईपीओ लाने की योजना है। उन्होंने यह भी कहा कि कंपनी भारत और विदेशों में अधिग्रहण के अवसरों के लिए तैयार है। विशेष रूप से ऐसे अंतरराष्ट्रीय शहरों में, जहां भारतीय प्रवासी बड़ी संख्या में जाते हैं। यदि ऐसे किसी एयरपोर्ट पर निवेश का मौका आता है, तो कंपनी उस दिशा में कदम बढ़ाएगी।
जनवरी में GMR ग्रुप ने अबू धाबी इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी (ADIA) से 6,300 करोड़ रुपये का निवेश प्राप्त किया था जिससे उनके प्रमोटर एंटिटी GMR इंटरप्राइजेज का कर्ज कम किया जा सके।
अडाणी एयरपोर्ट होल्डिंग्स ने FY25 में कुल 94 मिलियन यात्रियों को सेवा दी, जो FY24 की तुलना में 7% अधिक है।
अडानी के पास कितने एयरपोर्ट?
AAHL के पास मुंबई-नवी मुंबई और अन्य महत्वपूर्ण स्थानों पर एयरपोर्ट हैं। कंपनी अगले 15 सालों में अपनी क्षमता को तीन गुना करने का लक्ष्य लेकर चल रही है। इसका मतलब है कि कंपनी ज्यादा से ज्यादा यात्रियों को संभालने के लिए तैयार रहना चाहती है।
AAHL भारत की सबसे बड़ी प्राइवेट एयरपोर्ट ऑपरेटर है। यह वर्तमान में सात एयरपोर्ट मुंबई, अहमदाबाद, लखनऊ, मंगलुरु, जयपुर, गुवाहाटी और तिरुवनंतपुरम चलाती है। इसके अलावा, नवी मुंबई में एक और एयरपोर्ट बन रहा है, जो अगस्त में खुलने वाला है। कंपनी के पास अभी पर्याप्त पैसा है, लेकिन बाजार की स्थिति और जरूरत के हिसाब से वह और भी पैसा जुटा सकती है।
शेयर मार्केट में आ सकती है कंपनी
जुगेशिंदर सिंह, 'हम भारत और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अधिग्रहण के लिए खुले हैं। अंतरराष्ट्रीय सौदों के लिए यह एक अंतरराष्ट्रीय शहर जोड़ी होनी चाहिए जो भारतीय प्रवासियों को पूरा करती हो। यदि किसी विशेष शहर में किसी अन्य शहर में किसी विशिष्ट हवाई अड्डे पर बहुत सारे भारतीय यात्री जा रहे हैं और यदि वह अवसर आता है, तो हम उस पर विचार करेंगे।'
एयरपोर्ट कारोबार को अगले दो-तीन वर्षों में एक अलग सहायक कंपनी के रूप में अलग कर दिया जाएगा, जिसके बाद लिस्टिंग होगी। इसका मतलब है कि भविष्य में AAHL शेयर बाजार में लिस्ट हो सकती है। AAHL ने FY25 में 94 मिलियन यात्रियों को सेवा दी, जो FY24 से 7% अधिक है। इससे पता चलता है कि कंपनी का कारोबार लगातार बढ़ रहा है।
]]>देश के तीसरे बड़े औद्योगिक घराने अडानी ग्रुप ने वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान 74,945 करोड़ रुपये का टैक्स दिया जो पिछले साल के मुकाबले 29% ज्यादा है। इसमें डायरेक्ट और इनडायरेक्ट टैक्स दोनों शामिल हैं। इसके अलावा कर्मचारियों के सामाजिक सुरक्षा के लिए किए गए भुगतान भी इसमें शामिल हैं। पिछले साल यानी फाइनेंशियल ईयर 2023-24 गौतम अडानी की अगुवाई वाले ग्रुप ने 58,104 करोड़ रुपये का टैक्स दिया था।
ग्रुप ने एक बयान में कहा कि सरकारी खजाने में यह योगदान लिस्टेड कंपनियों के माध्यम से दिया गया है। इसमें से 28,720 करोड़ रुपये डायरेक्ट टैक्स के रूप में दिए गए। 45,407 करोड़ रुपये इनडायरेक्ट टैक्स के रूप में दिए गए। बाकी 818 करोड़ रुपये अन्य योगदानों में शामिल हैं। ग्रुप की लिस्टेड कंपनियों में अडानी एंटरप्राइजेज, अडानी पावर, अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकनॉमिक जोन, अडानी टोटल गैस, अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस, अडानी ग्रीन एनर्जी और अंबूजा सीमेंट शामिल हैं।
ओलंपिक से ज्यादा बजट
इन सात कंपनियों के अलावा ग्रुप की तीन अन्य लिस्टेड कंपनियों एनडीटीवी, एसीसी और सांघी इंडस्ट्रीज द्वारा दिए गए टैक्स को भी इस आंकड़े में शामिल किया गया है। अडानी ग्रुप ने साथ ही 'Basis of Preparation and Approach to Tax' नाम का एक डॉक्यूमेंट भी प्रकाशित किया है। यह डॉक्यूमेंट ग्रुप की सात कंपनियों की वेबसाइट पर उपलब्ध है। इसमें अडानी ग्रुप के ग्लोबल टैक्स और अन्य योगदानों का पूरा विवरण दिया गया है।
74,945 करोड़ रुपये की यह रकम बहुत बड़ी है। इतने पैसे में पूरा मुंबई मेट्रो नेटवर्क बनाया जा सकता है। यह नेटवर्क लाखों लोगों के लिए जीवन रेखा है। साथ ही इतने पैसे में देश में आधुनिक ओलंपिक खेलों का आयोजन भी किया जा सकता है। भारत 2036 में होने वाले ओलंपिक खेलों की मेजबानी के लिए बोली लगाने की तैयारी कर रही है। इस आयोजन पर 34,700 करोड़ से 64,000 करोड़ रुपये तक खर्च आने का अनुमान है।
पूरे मुंबई में मेट्रो नेटवर्क की लागत के बराबर टैक्स
इस पैसे का अंदाजा ऐसे लगाया जा सकता है कि 74,945 करोड़ रुपये लगभग पूरे मुंबई मेट्रो नेटवर्क को बनाने में लगने वाली लागत के बराबर है। यह रकम आधुनिक ओलंपिक खेलों के आयोजन में लगने वाले खर्च के लगभग बराबर भी है।
इस कुल रकम में से 28,720 करोड़ रुपये डायरेक्ट टैक्स, 45,407 करोड़ रुपये इनडायरेक्ट टैक्स, और 818 करोड़ रुपये दूसरे योगदान (जैसे कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा) के हैं।
सबसे ज्यादा टैक्स किसने दिया
अडानी ग्रुप की जिन मुख्य सूचीबद्ध कंपनियों (लिस्टेड कंपनियों) ने सबसे ज्यादा टैक्स दिया है, उनमें अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड (AEL), अडानी सीमेंट लिमिटेड (ACL), अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन (APSEZ), और अडानी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड (AGEL) शामिल हैं।
ग्रुप ने अपनी सात लिस्टेड कंपनियों की वार्षिक रिपोर्ट्स में यह जानकारी दी है। इनमें NDTV, ACC और सांघी इंडस्ट्रीज जैसी तीन और कंपनियों के टैक्स भी शामिल हैं, जिन पर ग्रुप की ये सात कंपनियां नियंत्रण रखती हैं।
कंपनियों की वेबसाइट पर जारी हुई डिटेल
अडानी ग्रुप ने टैक्स भुगतान की पूरी जानकारी देने के लिए एक दस्तावेज ('बेसिस ऑफ प्रिपरेशन एंड अप्रोच टू टैक्स') भी अपनी कंपनियों की वेबसाइट पर जारी किया है। इसमें बताया गया है कि दुनियाभर में उसकी कंपनियों ने कितना टैक्स दिया, दूसरों से वसूला हुआ टैक्स कितना सरकार को जमा कराया, और कर्मचारियों के लिए सामाजिक सुरक्षा में कितना योगदान दिया।
अडानी ग्रुप ने कहा कि वह टैक्स में पारदर्शिता को अपनी सामाजिक जिम्मेदारी (ESG) का हिस्सा मानता है। इस जानकारी को खुद से सार्वजनिक करके ग्रुप अपनी पारदर्शिता और भरोसेमंदी दिखाना चाहता है। ग्रुप का कहना है कि वह भारत के बुनियादी ढांचे को बदलने के साथ-साथ नवाचार को बढ़ावा देना और अपने सभी हितधारकों के लिए लॉन्ग टर्म वैल्यू पैदा करना चाहता है।
]]>बीते कुछ महीनों में भारतीय अरबपति गौतम अडानी (Gautam Adani) अमेरिकी में कथित तौर पर लगाए गए आरोपों के चलते विवादों में घिरे रहे, लेकिन इस बीच भी उनका फोकस अपने कारोबार विस्तार पर लगा रहा. अब साल के अंतिम महीने में अडानी ग्रुप (Adani Group) की ओर से एक बड़ी डील की गई है. इसके तहत अडानी डिफेंस सिस्टम्स एंड टेक्नोलॉजीज लिमिटेड ने Air Works India में मैजोरिटी हिस्सेदारी खरीदी है.
400 करोड़ में हुई है डील
गौतम अडानी ने जिस एयर वर्क्स (Air Works) कंपनी की अधिग्रहण किया है, वह भारत की प्रमुख प्राइवेट एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस कंपनी है. यह अधिग्रहण अडानी ग्रुप की कंपनी अडानी डिफेंस सिस्टम एंड टेक्नोलॉजीज लिमिटेड (ADSTL) ने किया है औऱ इसके साथ ही कंपनी की एंट्री विमान मैंटिनेंस, रखरखाव और ओवरहाल (MRO) इंडस्ट्री में अडानी की एंट्री हो गई है. अडानी ग्रुप की ओर से जारी प्रेस रिलीज के मुताबिक, ये पूरी डील 400 करोड़ रुपये में हुई है.
कंपनी में खरीदी 85% से ज्यादा हिस्सेदारी
इस 400 करोड़ रुपये की डील के जरिए अडानी डिफेंस सिस्टम्स एंड टेक्नोलॉजीज लिमिटेड ने एयर वर्क्स में 85.8 फीसदी हिस्सेदारी खरीदी है और एग्रीमेंट साइन किए हैं. इस संबंध में अडानी ग्रुप की ओर से एक बयान जारी कर जानकारी दी गई है. इसमें कहा गया है कि ADSTL ने देश की सबसे बड़ी प्राइवेट एमआरओ कंपनी एयर वर्क्स में मैजोरिटी हिस्सेदारी हासिल करने के लिए समझौते पर साइन किए हैं.
बड़ी एयरलाइंस को सर्विस देती है कंपनी
एयर वर्क्स इंडिया की स्थापना साल 1951 में की गई थी और ये देश की दिग्गज एयरलाइंस कंपनियों को सेवाएं देती है. इसकी कस्टमर लिस्ट में इंडिगो (IndiGo) और विस्तारा (Vistara) जैसे नाम शामिल हैं. इसके अलावा लुफ्थांसा, टर्किश एयरलाइंस समेत एतिहाद जैसी इंटरनेशनल एयरलाइंस भी इससे सर्विसेज लेती हैं. इसके साथ ही एयर वर्क्स इंडियन नेवी और एयरफोर्स के विमानों की भी देखभाल करती है.
इतनी है अडानी की नेटवर्थ
कभी दुनिया के टॉप-3 अमीरों में शामिल रहे गौतम अडानी की 10 कंपनियां शेयर बाजार (Stock Market) में लिस्टेड हैं और उनका कारोबार घर की रसोई से लेकर एयरपोर्ट्स तक फैला हुआ है. अगर संपत्ति की बात करें तो अडानी की नेटवर्थ (Gautam Adani Net Worth) ब्लूमबर्ग बिलेनियर्स इंडेक्स के मुताबिक, 75 अरब डॉलर है और इस आंकड़े के साथ दुनिया के टॉप अरबपतियों (World's Top Billionaires) की लिस्ट में वे 19वें पायदान पर काबिज हैं. बीते 24 घंटे में उनकी संपत्ति में 249 मिलियन डॉलर का इजाफा हुआ है.
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इसी तरह अडानी विल्मर, एसीसी और अंबुजा सीमेंट्स जैसी अन्य कंपनियों के शेयरों में 2-3% के बीच उछाल आया। कांग्रेस सांसदों ने अडानी ग्रुप पर रिश्वतखोरी के आरोप लगाए। कांग्रेस के राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा कि उनकी पार्टी चाहती है कि सोमवार को संसद की बैठक में सबसे पहले अडानी मुद्दे को उठाया जाए। उन्होंने कहा कि यह देश के आर्थिक और सुरक्षा हितों से जुड़ा एक गंभीर मुद्दा है। कंपनी पर आरोप है कि उसने अपनी सौर ऊर्जा परियोजनाओं के लिए अनुकूल सौदे पाने के लिए राजनेताओं और नौकरशाहों को कथित तौर पर 2,300 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया है।
ठोस आधार
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि इस मुद्दे पर चर्चा करने का निर्णय बिजनस एडवाइजरी कमेटीज पर निर्भर करता है और इसके लिए लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा के सभापति की मंजूरी की आवश्यकता होती है। अडानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी और अन्य पर अमेरिकी अभियोजकों ने रिश्वतखोरी का आरोप लगाया है। कानूनी जानकारों का कहना है कि अडानी के पास इसे चुनौती देने के लिए एक ठोस आधार है।
]]>अडानी समूह ने क्या कहा?
अडानी समूह के बयान में कहा, ‘‘ इस साझेदारी के जरिए अडानी गुजरात के खावड़ा में दुनिया के सबसे बड़े रिन्यूएबल एनर्जी प्लांट में स्थित एक नई सौर-पवन हाइब्रिड परियोजना से स्वच्छ ऊर्जा की आपूर्ति करेगी। इस नई परियोजना का वाणिज्यिक परिचालन 2025 की तीसरी तिमाही में शुरू होने की उम्मीद है।’’ यह इनोवेशन डील भारत में ‘क्लाउड’ सेवाओं तथा परिचालन को स्वच्छ ऊर्जा द्वारा समर्थित कर गूगल के चौबीसों घंटे कार्बन-मुक्त ऊर्जा लक्ष्य को आगे बढ़ाने में मदद करेगा। साथ ही इस प्रकार भारत में गूगल की सतत वृद्धि में योगदान देगा।
अडानी ग्रुप के शेयरों के हाल
आपको बता दें कि आज गुरुवार को शेयर बाजार 1500 अंक तक गिर गया है। इस दौरान अडानी समूह के शेयरों में भी गिरावट दर्ज की गई है। अडानी ग्रीन एनर्जी के शेयर कारोबार के इंट्रा डे में करीबन 5% तक गिरकर 1869.25 रुपये पर ट्रेड कर रहे थे। वहीं, अडानी एंटरप्राइजेज के शेयर में भी 3% तक की गिरावट है और यह शेयर इंट्रा डे में 3102.95 रुपये पर ट्रेड कर रहा है। अडानी पावर के शेयर में 3% से अधिक की गिरावट है और यह शेयर 633.10 रुपये पर ट्रेड कर रहा है। अडानी एनर्जी सॉल्यूशन के शेयर में 3% से अधिक की गिरावट है और कंपनी के शेयर 1039 रुपये पर ट्रेड कर रहे हैं। इसके अलावा अडानी टोटल गैस, अडानी पोर्ट और अडानी विल्मर तक के शेयरों में 3% तक की गिरावट देखी गई है।
इसके साथ ही गौतम अदाणी की ओर से एक फोटो पोस्ट की गई, जिसमें अदाणी पोर्ट्स एंड एसईजेड के एमडी करण अदाणी आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू को सहायता देते हुए नजर आ रहे हैं। गौतम अदाणी की पोस्ट को रिपोस्ट करते हुए करण अदाणी ने लिखा, "आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू के नेतृत्व में चल रहे राहत अभियान में योगदान देने का मौका मिला। हमारा दिल उन लोगों के साथ है जो अपने जीवन और आजीविका का पुनर्निर्माण कर रहे हैं।" बता दें कि आंध्र प्रदेश में भारी बारिश के कारण भीषण बाढ़ आई थी। हालांकि, अब पानी उतर चुका है। प्रभावित लोगों को राहत शिविरों में शिफ्ट किया गया है। बाढ़ प्रभावित इलाकों में लोगों को राहत पहुंचाने के लिए भारतीय सशस्त्र बलों को भी लगाया है।
बाढ़ पीड़ित के लिए मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू की ओर से भी राहत पैकेज का ऐलान किया जा चुका है। मुख्यमंत्री की ओर से बाढ़ पीड़ित लोगों से भी मुलाकात की जा चुकी है और मदद का भरोसा दिया गया है। बाढ़ को देखते हुए केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान की ओर से भी हाल ही में आंध्र प्रदेश और तेलंगाना का दौरा किया गया था। इस बाढ़ से हुए नुकसान की रिपोर्ट केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को सौंपी गई थी।
]]>ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार नैरोबी में जोमो केन्याटा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को अडानी एयरपोर्ट को लीज पर देने के केन्या सरकार के फैसले को अदालत में चुनौती दी गई है। केन्या ह्यूमन राइट्स कमीशन के साथ-साथ वकीलों की संस्था ने भी इस कदम को असंवैधानिक बताया है। उन्होंने अपनी याचिका में कहा है कि स्ट्रैटजिक और प्रॉफिट कमा रहे इस एयरपोर्ट को किसी प्राइवेट कंपनी को लीज पर देने का कोई तुक नहीं है। यह सुशासन, जवाबदेही, पारदर्शिता और पब्लिक मनी के विवेकपूर्ण और जिम्मेदार उपयोग के संवैधानिक सिद्धांतों का उल्लंघन है। हालांकि केन्या की सरकार ने डील का बचाव करते हुए कहा है कि JKIA की मौजूदा कैपेसिटी से संबंधी समस्याओं में तत्काल सुधार की जरूरत है।
अडानी की योजना
अडानी एंटरप्राइजेज ने अपनी अबू धाबी स्थित अपनी सहायक कंपनी ग्लोबल एयरपोर्ट्स ऑपरेटर के माध्यम से एयरपोर्ट्स इन्फ्रास्ट्रक्चर की स्थापना की है। कंपनी ने केन्या सरकार को 2029 तक एक नए टर्मिनल और टैक्सीवे सिस्टम के लिए $750 मिलियन के निवेश का प्रस्ताव दिया है। साथ ही 2035 तक एयरपोर्ट में सुधार के लिए अतिरिक्त $92 मिलियन का निवेश करने की भी योजना है। अगर यह डील होती है तो यह भारत के बाहर अडानी ग्रुप का पहला एयरपोर्ट होगा। अभी यह ग्रुप देश में आधा दर्जन से अधिक एयरपोर्ट्स का संचालन करता है।
क्या है विवाद?
इस प्रस्तावित निवेश के खिलाफ केन्या के कुछ स्थानीय समूहों और अधिकारियों ने आपत्ति जताई थी. उनका कहना था कि हवाई अड्डे का संचालन और प्रबंधन किसी बाहरी कंपनी को सौंपना देश की सुरक्षा और संप्रभुता पर नकारात्मक असर डाल सकता है. इन आपत्तियों के मद्देनजर मामला अदालत में पहुंचा, और अदालत ने सुनवाई के बाद फिलहाल निवेश प्रक्रिया पर रोक लगाने का निर्णय लिया.
अडानी ग्रुप क्या कह रही?
इस मामले में मुख्य विवाद यह है कि क्या हवाई अड्डे जैसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय ढांचे का नियंत्रण किसी विदेशी कंपनी को सौंपा जाना चाहिए या नहीं. केन्या के स्थानीय अधिकारियों और कार्यकर्ताओं का तर्क है कि इस हवाई अड्डे का प्रबंधन केन्या के पास ही रहना चाहिए, ताकि इसके संचालन में किसी प्रकार का बाहरी हस्तक्षेप न हो. दूसरी ओर, अडानी समूह का तर्क है कि उनके निवेश से हवाई अड्डे का आधुनिकीकरण होगा और यह अफ्रीका के सबसे व्यस्त हवाई अड्डों में से एक के रूप में और बेहतर तरीके से काम कर सकेगा.
अडानी के लिए कितना फायदेमंद है ये डील?
अडानी समूह पहले से ही हवाई अड्डों के प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है और भारत के कई बड़े हवाई अड्डों का संचालन कर रहा है. अडानी समूह का यह मानना है कि केन्या के हवाई अड्डे में निवेश करने से उन्हें अफ्रीकी बाजार में पैर जमाने का मौका मिलेगा, जिससे उनकी कंपनी की वैश्विक उपस्थिति बढ़ेगी. इसके साथ ही यह निवेश अफ्रीका के अन्य देशों में भी भविष्य के विस्तार की संभावनाओं को खोल सकता है.
]]> बांग्लादेश में शेख हसीना (Sheikh Hasina) सरकार के तख्तापलट के बाद आर्थिक संकट गहराता जा रहा है. अंतरिम सरकार के प्रधानमंत्री मोहम्मद यूनुस (Muhammad Yunus) ने हाल ही में वर्ल्ड बैंक (World Bank), आईएमएफ (IMF), एशियन डेवलपमेंट बैंक (ADB) समेत कई जगह कर्ज हासिल करने के लिए दरवाजा खटखटाया है. अब उसके सामने एक नया खतरा मंडराने लगा है. अडानी ग्रुप (Adani Group) ने बिजली सप्लाई के बिल को हासिल करने के लिए बांग्लादेश पर दबाव बनाना शुरू कर दिया है. उन्होंने अपने लगभग 50 करोड़ डॉलर पेमेंट की मांग की है.
मोहम्मद यूनुस ने पिछली सरकार की कई डील पर उठाई है उंगली
अडानी ग्रुप बांग्लादेश को अपने 1600 मेगावाट के गोड्डा प्लांट से बिजली सप्लाई करता है. यह समझौता शेख हसीना सरकार के दौरान किया गया है. अब मोहम्मद यूनुस इसे बहुत महंगी डील बताने लगे हैं. साथ ही उन्होंने कहा है कि इस डील में पारदर्शिता नहीं बरती गई. उन्होंने शेख हसीना सरकार के दौरान हुई कई इंफ्रास्ट्रक्चर डील पर उंगली उठाई है. फाइनेंशियल टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, मोहम्मद यूनुस सरकार लगभग 50 करोड़ डॉलर के इस पेमेंट को करने में आनाकानी कर रही है. इससे खफा होकर अडानी ग्रुप ने अंतरिम सरकार को चेतावनी जारी कर दी है.
अडानी ग्रुप को बिजली बिल समेत बांग्लादेश से लेने हैं 80 करोड़ डॉलर
अंतरिम सरकार के सामने सबसे बड़ा संकट बांग्लादेश का कर्ज है. अडानी ग्रुप के अनुसार, वह लगातार अंतरिम सरकार से वार्ता कर रहे हैं. हमने उन्हें हर स्थिति के बारे में अवगत करा दिया है. हम बांग्लादेश को बिजली सप्लाई करने के लिए प्रतिबद्ध हैं. मगर, अटके हुए पेमेंट से चिंताएं पैदा हो रही हैं. दोनों पक्षों की अपनी जिम्मेदारियां हैं. अगर उन्हें पूरा नहीं किया जाएगा तो समस्याएं पैदा होंगी. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि बांग्लादेश पर सिर्फ बिजली बिल का बकाया ही 3.7 अरब डॉलर हो चुका है. इसमें से लगभग 49.2 करोड़ डॉलर सिर्फ अडानी ग्रुप के हैं. पड़ोसी देश को अडानी ग्रुप को अन्य चीजों को मिलाकर करीब 80 करोड़ डॉलर चुकाने हैं.
]]>अडानी विल्मर में अडानी ग्रुप और सिंगापुर के विल्मर ग्रुप की हिस्सेदारी है। इसके पास फॉर्च्यून ऑयल और कोहिनूर राइस ब्रांड है। कंपनी हाल में स्टेक बेचने की तैयारी में थी लेकिन अब वह तेजी से कैपेक्स एक्सपेंडीचर कर रही है। अडानी की योजना कंज्यूमर फेसिंग बिजनस से रेवेन्यू को बढ़ाकर 25 से 30 फीसदी करने की है। इसमें फूड, एमएमसीजी, कमोडिटी और एयरपोर्ट बिजनस शामिल है। सूत्रों का कहना है कि अडानी विल्मर की अगले दो से तीन साल में कई कंपनियों को खरीदने की योजना है। ग्रुप की नजर खासकर साउथ और ईस्ट के मार्केट पर है। वहां इस साल और अगले साल कम से कम तीन कंपनियों के अधिग्रहण की योजना है।
एक अरब डॉलर का कैपेक्स
एक सूत्र ने कहा कि अडानी ग्रुप की योजना एफएमसीजी बिजनस पर 80 करोड़ से एक अरब डॉलर खर्च करने की योजना है। इनमें से प्रत्येक की वैल्यू कम 20 से 25 करोड़ डॉलर हो सकती है। अडानी विल्मर का पिछले साल रेवेन्यू 51,261.63 करोड़ रुपये रहा। फिलहाल कंपनी की मौजूदगी देश की पश्चिमी, सेंट्रल और उत्तरी राज्यों में है। लेकिन अब कंपनी दक्षिणी और पूर्वी राज्यों पर फोकस कर रही है। कंपनी इन इलाकों की टॉप कंपनियों की खरीदकर वहां अपनी मौजूदगी बढ़ाना चाहती है। टाटा और रिलायंस के बाद अडानी ग्रुप भारत का तीसरा बड़ा औद्योगिक ग्रुप है।
]]>मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य में 5.5 करोड़ पेड़ लगाने का संकल्प लिया है. इसका समर्थन करते हुए अदाणी समूह भी इंदौर में लगाए जाने के लिए 11 लाख पौधे उपलब्ध कराएगा. ये देशभर में 1.4 अरब पेड़ लगाने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शुरू किए गए बड़े लक्ष्य 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान का हिस्सा है. अदाणी समूह ने 2030 तक देश में 100 मिलियन पेड़ लगाने का संकल्प लिया है.
अदाणी समूह 10 करोड़ पेड़ लगाने और उनका पोषण करने के अपने संकल्प के तहत, अब मध्य प्रदेश सरकार के साथ जुड़ गया है और इंदौर में लगाए जाने वाले 51 लाख पेड़ों में से 11 लाख पौधे उपलब्ध कराएगा. 7 जुलाई से 14 जुलाई 2024 तक हरित अभियान भी चलाया गया, जो अदाणी समूह की सस्टेनेबल फ्यूचर की प्रतिबद्धता के अनुरूप है.
इस साल बढ़ते तापमान पर चिंता व्यक्त करते हुए मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव और कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने राज्य के 55 जिलों में 5.5 करोड़ पेड़ लगाने का संकल्प लिया था. ये देश भर में 1.4 बिलियन पेड़ लगाने के लक्ष्य का हिस्सा है.
इंदौर में लगाए जाने वाले 51 लाख पेड़ों में से 11 लाख पौधे अदाणी ग्रुप उपलब्ध कराएगा. ये पौधे 25 विभिन्न प्रजातियों के होंगे, जो शहर के ग्रीन जोन में जैव विविधता (बायोडायवर्सिटी) विकसित करने में मदद करेंगे.
अदाणी समूह का 100 मिलियन पेड़ लगाने का लक्ष्य
अदाणी समूह ने वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के "ट्रिलियन ट्रीज़ प्लेटफॉर्म" 1t.org पर साल 2030 तक 10 करोड़ पेड़ लगाने का संकल्प किया है. ये संकल्प It.org पर अब तक की गई सबसे महत्वाकांक्षी कॉर्पोरेट प्रतिबद्धताओं में से एक है. समूह, पहले ही करीब 3 करोड़ पेड़ लगाकर उनके संरक्षण का संकल्प ले चुका है.
एक जिम्मेदार बिजनेस ग्रुप के रूप में, अदाणी ग्रुप का लक्ष्य वैश्विक स्थिरता में योगदान देना है. अदाणी समूह का ये संकल्प भविष्य में नेट जीरो कार्बन के लक्ष्य को पूरा करेगा. पेड़ एक महत्वपूर्ण कार्बन सिंक हैं, वे बायोडायवर्सिटी को बढ़ाते हैं जो स्वस्थ ग्रह और समुदाय के लिए जरूरी है.
ये संकल्प पेरिस समझौते के तहत भारत का राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDC) की प्रतिबद्धता के अनुरूप है. देश 250 से 300 करोड़ टन कार्बन डाइऑक्साइड को अलग करने के लिए अतिरिक्त कार्बन सिंक बनाने के लिए प्रतिबद्ध है.
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