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सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को अहमदाबाद प्लेन क्रैश जुड़े मामले पर सुनवाई की. इस अदालत ने एयर इंडिया के बोइंग 787-8 ड्रीमलाइनर के पायलट-इन-कमांड, दिवंगत कैप्टन सुमीत सभरवाल के पिता से कहा, "देश में कोई भी यह नहीं मानता कि यह पायलट की गलती थी."
जस्टिस सूर्यकांत और जॉयमाल्य बागची की बेंच ने यह टिप्पणी 91 साल के पुष्कर सभरवाल की याचिका पर सुनवाई करते हुए की. पुष्कर सभरवाल ने इस क्रैश की एक स्वतंत्र और तकनीकी रूप से सही जांच की मांग की है, जिसकी निगरानी सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज करें.
हमदर्दी जताते हुए, बेंच ने याचिकाकर्ता पुष्कर सभरवाल को भरोसा दिलाया कि इस हादसे के लिए उनके बेटे को दोषी नहीं ठहराया जा रहा है.
इस साल जून में अहमदाबाद में दुर्घटनाग्रस्त हुए एयर इंडिया के लंदन जाने वाले विमान के पायलट को दोषी नहीं ठहराया जा सकता. कोर्ट ने कहा, "इस त्रासदी का कारण चाहे जो भी हो, पायलट इसका कारण नहीं है." बता दें कि इस विमान हादसे में 260 लोगों की जान चली गई थी.
न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ उस दुर्भाग्यपूर्ण उड़ान के पायलटों में से एक, कमांडर सुमित सभरवाल के पिता पुष्कर राज सभरवाल द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी. याचिका में शीर्ष अदालत के एक पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता में न्यायिक निगरानी वाली समिति से दुर्घटना की जांच कराने का अनुरोध किया गया था.
याचिका में तर्क दिया गया है कि दुर्घटना की प्रारंभिक जांच में भारी खामियां हैं. सभरवाल और फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स द्वारा दायर याचिका में कहा गया कि जांच दल ने व्यापक तकनीकी जांच करने के बजाय, मुख्य रूप से मृत पायलटों पर ध्यान केंद्रित किया है, जो अब अपना बचाव करने में असमर्थ हैं.
याचिका में कहा गया है कि प्रतिवादियों द्वारा की गई जांच में तथ्यों का चयनात्मक और अपूर्ण खुलासा, महत्वपूर्ण विसंगतियों की उपेक्षा, तथा उन प्रणालीगत कारणों को दबाना शामिल है जो डिजाइन या इलेक्ट्रॉनिक खराबी की ओर इशारा करते हैं. रिपोर्ट में बिना किसी पुष्टिकारक साक्ष्य या व्यापक तकनीकी विश्लेषण के जल्दबाजी में यह अनुमान लगाया गया है कि यह घटना पायलट की गलती से हुई है.
याचिका में भारत संघ, नागरिक उड्डयन महानिदेशालय और महानिदेशक, विमान दुर्घटना जांच बोर्ड (एएआईबी) को प्रतिवादी बनाया गया है. याचिका में कहा गया है कि प्रारंभिक रिपोर्ट में गंभीर तकनीकी खामियां और चूक हैं, जिससे इसके निष्कर्ष अविश्वसनीय हैं.
आज सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायण ने दलील दी कि उनके मुवक्किल निष्पक्ष जांच चाहते हैं और उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एएआईबी द्वारा की जा रही वर्तमान जांच स्वतंत्र नहीं है. उन्होंने पीठ से अनुरोध किया कि वह विमान (दुर्घटनाओं और घटनाओं की जांच) नियम के नियम 12 के तहत न्यायिक निगरानी में जांच का निर्देश दे.
न्यायमूर्ति ने कहा- "यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि यह दुर्घटना घटी और उन्होंने अपने बेटे को खो दिया. लेकिन उन्हें यह बोझ नहीं उठाना चाहिए कि उनके बेटे पर आरोप लगाया जा रहा है या उसे दोषी ठहराया जा रहा है. हम स्पष्ट कर देंगे, कोई भी उसे किसी भी चीज के लिए दोषी नहीं ठहरा सकता."
न्यायमूर्ति बागची ने कहा कि पायलट के खिलाफ कोई आरोप नहीं है और रिपोर्ट में दोष बांटने का कोई सवाल ही नहीं है और वास्तव में, जांच का उद्देश्य दोष बांटना नहीं है और इसका उद्देश्य बेहतर प्रदर्शन करना और भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं से बचना नहीं है. शंकरनारायण ने वॉल स्ट्रीट जर्नल में छपे एक लेख का उल्लेख किया, जो इस जांच से प्राप्त जानकारी पर आधारित है और जिसमें कहा गया है कि उनके मुवक्किल के बेटे पर हमला किया जा रहा है.
न्यायमूर्ति बागची ने कहा, "हमें इस बात की कोई परवाह नहीं है कि एक विदेशी प्रेस, आपके मुकदमे को अमेरिकी अदालत में डब्ल्यूएसजे के खिलाफ क्या कहना चाहिए था." वरिष्ठ वकील ने कहा कि डब्ल्यूएसजे एक भारतीय सरकारी सूत्र का हवाला दे रहा है. पीठ ने कहा कि इससे कोई फर्क नहीं पड़ता और आरोप एक विदेशी प्रेस द्वारा लगाया गया है, जिसका आक्षेप तथ्यात्मक रूप से गलत है.
न्यायमूर्ति कांत ने कहा कि इस तरह की घटिया रिपोर्टिंग इसलिए की जा रही है क्योंकि वे केवल भारत को दोष देना चाहते हैं. शंकरनारायणन ने कहा कि हमें इस घटिया रिपोर्टिंग को नज़रअंदाज करना चाहिए. पीठ ने जवाब दिया कि उनके समक्ष प्रस्तुत याचिका में ऐसा कुछ भी नहीं है.
वरिष्ठ वकील ने बताया कि 3 अगस्त को, प्रतिवादी संख्या 3, जो प्रारंभिक जांच कर रहे हैं ने अपने मुवक्किल, जो अब 91 वर्ष के हैं, के घर दो अधिकारियों को भेजा. उन्होंने सवाल किया कि आपके बेटे का तलाक कब हुआ. उसे बताया गया कि करीब 15 साल पहले. इस पर यह थ्योरी बनायी जाने लगी कि वह अवसाद से ग्रस्त था इसीलिए आत्महत्या करने की कोशिश की. उनके मुवक्किल से भी उनकी पत्नी का निधन के बारे में पूछा गया.
वरिष्ठ वकील ने कहा कि अधिकारियों ने उनके मुवक्किल से कहा कि इसलिए उनके बेटे को अवसाद है, जबकि उन्होंने जांचकर्ताओं के आचरण की आलोचना की. न्यायमूर्ति कांत ने कहा कि भारत कोई छोटा देश नहीं है, बल्कि 142 करोड़ लोगों वाला देश है. उन्होंने आगे कहा, "किसी को भी यह विश्वास नहीं है कि पायलट की कोई गलती थी. त्रासदी का कारण चाहे जो भी हो, पायलट इसका कारण नहीं है."
वरिष्ठ वकील ने कहा कि उनके मुवक्किल का बेटा पायलट था और उनका पोता भी पायलट है और वे राष्ट्र को अपनी सेवाएं दे रहे हैं. लोगों द्वारा इस तरह के आरोप लगाना गलत है. प्रतिवेदन सुनने के बाद, सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र से जवाब मांगा और 10 नवंबर को एक अन्य संबंधित मामले के साथ इस मामले पर भी सुनवाई करने पर सहमति जताई.
]]>जान-बूझकर फ्यूल स्विच बंद करने की बात गलत
विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) 12 जून को हुए इस हादसे की जांच कर रहा है। इस हादसे में विमान में सवार 241 लोगों सहित कुल 260 लोगों की जान चली गई थी। AAIB ने हाल ही में अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट जारी की। इस रिपोर्ट में एक महत्वपूर्ण बात सामने आई है। वह यह है कि ईंधन स्विच एक सेकंड के भीतर बदले गए थे। कुछ मीडिया रिपोर्टों में यह बात कही गई है कि यह जानबूझकर किया गया था। हालांकि, पायलट रह चुके कैप्टन एहसान खालिद इससे सहमत नहीं हैं। उन्होंने कहा कि यह घटना बहुत दुखद है। हमें उन सभी लोगों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करनी चाहिए जिन्होंने इस हादसे में अपनी जान गंवाई। हमें AAIB की जांच पूरी होने का इंतजार करना चाहिए ताकि दुर्घटना का असली कारण पता चल सके।
विमान में दो तरह के स्विच होते हैं, यह जान लीजिए
एयर इंडिया ड्रीमलाइनर 787-8 टेक-ऑफ के 32 सेकंड बाद एक मेडिकल कॉलेज के परिसर में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। विमान में दो तरह के स्विच होते हैं। इसमें एक रन स्विच होता है, जो इंजन को चालू रखता है। वहीं, दूसरा कटऑफ स्विच होता है, जिसके दबाते ही इंजन बंद हो जाता है।
विमान ने हासिल कर ली थी 100 नॉटिकल मील की स्पीड
AAIB की रिपोर्ट के अनुसार, विमान ने 08:08:42 UTC पर अपनी अधिकतम गति 180 समुद्री मील (knots) यानी करीब 185 किलोमीटर प्रति घंटे हासिल कर ली थी।। इसके बाद, इंजन 1 और 2 के लिए ईंधन कटऑफ स्विच एक सेकंड के अंतराल में रन से कटऑफ स्थिति में चले गए। इंजन 1 का ईंधन स्विच 08:08:52 UTC पर कटऑफ से रन पर वापस लाया गया। वहीं, इंजन 2 का स्विच 08:08:56 पर वापस लाया गया।
रन से कट ऑफ में दोनों स्विच बदले, यह संभव नहीं
रिपोर्ट में यह भी लिखा है कि एक पायलट ने दूसरे पायलट से पूछा कि उसने इंजन क्यों बंद कर दिया। इसके जवाब में दूसरे पायलट ने कहा कि उसने ऐसा नहीं किया। एक न्यूज चैनल एनडीटीवी से बात करते हुए एक्सपर्ट खालिद ने कहा-मैं एक नया गणितीय आकलन पेश करना चाहता हूं जो उन कहानियों को गलत साबित करता है जो चल रही हैं। 42 सेकंड के टाइमस्टैम्प पर ईंधन स्विच एक सेकंड के भीतर 'रन' से 'कट-ऑफ' में बदल गए। इसका मतलब है कि एक सेकंड के भीतर दोनों स्विच को बंद कर दिए गए। यह असंभव है।
पश्चिमी मीडिया रिपोर्ट की कहानी झूठी निकली
एक्सपर्ट खालिद ने कहा-फिर कहानी यह है कि दूसरे पायलट ने यह देखा और पूछा-आपने इंजन क्यों बंद कर दिया?' अगर यह सच है, तो मुझे लगता है कि इस कहानी को बताने वाले को अब यह बताना होगा कि उस व्यक्ति ने इस स्विच को वापस चालू करने के लिए 10 सेकंड तक इंतजार क्यों किया। पश्चिमी मीडिया रिपोर्टों में भी यह नहीं कहा गया है कि दोनों पायलट खुद को मारना चाहते थे।
अटकलों की बात छोड़ें, तकनीकी खामी से बंद हुए इंजन
खालिद ने बताया कि मुझे लगता है कि एक इलेक्ट्रिकल सिग्नल ने विमान के फ्यूल को बंद कर दिया था। स्विच को उस समय नहीं बदला गया था। शायद उन्हें बाद में तब बदला गया जब पायलट इंजन को फिर से चालू करने की कोशिश कर रहे थे ताकि दुर्घटना से बचा जा सके। मगर, उसे वे रोक नहीं पाए। कैप्टन खालिद का मानना है कि पायलटों ने जानबूझकर इंजन बंद नहीं किए थे। किसी तकनीकी खराबी के कारण इंजन बंद हो गए थे। उन्होंने यह भी कहा कि मीडिया को बिना किसी सबूत के अटकलें नहीं लगानी चाहिए।
हादसे की असली वजह के लिए ये 5 ब्लाइंड स्पॉट्स
फ्यूल स्विच के कटऑफ की कमांड: फ्यूल रन या कटऑफ के लिए थ्रॉटल कंट्रोल बॉक्स यूनिट का डुप्लीकेट टेस्ट कराया जा सकता है, ताकि पता चले कि कटऑफ कमांड इलेक्ट्रॉनिक गड़बड़ी का नतीजा थी या इसमें पायलटों का कोई दोष था।
पायलटों की आखिरी बातचीत की टाइमलाइन: एक पायलट ने पूछा था कि आपने फ्यूल क्यों बंद किया? दूसरे ने कहा-मैंने नहीं किया। इसे समझने के लिए CVR (कॉकपिट वॉइस रिकॉर्डर), FDR (फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर) की टाइमलाइन समान होना जरूरी है।
कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर में स्विच की आवाज है या नहीं: फ्यूल कंट्रोल स्विच घुमाने पर एक क्लिकिंग की आवाज आती है, जो CVR के एरिया माइक में दर्ज हो जाती है। अगर आवाज रिकॉर्ड नहीं हुई, तो इससे पता चलता है कि यह मैनुअली नहीं किया गया है।
FAA की एडवाइजरी का पालन हुआ था या नहीं: फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (FAA) ने 2018 में फ्यूल स्विच लॉकिंग मैकेनिज्म पर एडवाइजरी दी थी। जांच एजेंसी ने मेंटेनेंस रिकॉर्ड्स, सर्विस बुलेटिन लॉग्स, डीजीसीए से क्लीयरेंस कॉपी मांगी है। इसे नजरअंदाज करना गंभीर संचालन लापरवाही में आएगा।
इंजन के वॉल्व खुलने-बंद करने की जांच: किस सेंसर ने क्या संकेत दिया। प्रारंभिक रिपोर्ट में इसका कोई जिक्र नहीं है। बतया जा रहा है कि एएआईबी ने जीई व बोइंग से इन चैनलों का रॉ डेटा मांगा है। यह भी जांचा जाएगा कि 32 सेकेंड में किसी इंजन को फिर से स्टार्ट किया जा सकता है या नहीं।
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अहमदाबाद एयरपोर्ट के पास गुरुवार को एयर इंडिया का विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। ये हादसा इतना बड़ा था कि विमान में सवार क्रू मेंबर्स समेत सभी 242 लोगों की मौत । इस विमान में 169 भारतीय नागरिक, 53 ब्रिटिश नागरिक हैं, 1 कनाडाई नागरिक है और 7 पुर्तगाली नागरिक थे। विमान टेकऑफ करते ही डॉक्टरों के हॉस्टल पर जा गिरा
अहमदाबाद से उड़ान भरने के थोड़ी ही देर बाद ही एयर इंडिया की फ्लाइट AI-171 एक बड़े हादसे का शिकार हो गई। इस हादसे में विमान में सवार सभी 242 लोगों की मौत हो गई है। लंदन जा रहा यह विमान जब शहर के मेघानीनगर इलाके के पास पहुंचा, तो तुरंत ही हादसे का शिकार हो गया। इलाके में अचानक हुए धमाके और आसमान में उठते धुएं के गुबार ने लोगों में डर का माहौल पैदा कर दिया
अहमदाबाद में एयर इंडिया विमान क्रैश होने के बाद दुर्घटना स्थल पर बचाव और राहत कार्यों में कई एजेंसियां लगी हुई हैंAir India Plane Crash: अहमदाबाद में एयर इंडिया विमान क्रैश होने के बाद दुर्घटना स्थल पर बचाव और राहत कार्यों में कई एजेंसियां लगी हुई हैं
DNA टेस्ट से होगी शवों की पहचान
एयर इंडिया विमान हादसे में सभी 242 लोगों के मारे जाने की आशंका है। ये हादसा इतना भीषण था कि मरने वाले लोगों के शवों की पहचान तक करना मुश्किल हो रहा है। अब खबर आ रही है कि अहमदाबाद के सिविल अस्पताल ने उन लोगों से DNA सैंपल मांगे, जिनके अपने इस हादसे का शिकार हुए हैं, ताकि शवों की सही तरीके से पहचान की जा सके।
तो सही क्या ऊंचाई पर नहीं पहुंच पाया था विमान?
अहमदबाद में एयर इंडिया का विमान क्रैश हो गया, जिसमें सभी 242 लोगों के मारे जाने की आशंका जताई जा रही है। इस हादसे के कई वीडियो भी सामने आए हैं। एक वीडियो विमान के क्रैश होने से ठीक पहले का है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसारा, वीडियो के विश्लेषण के आधार पर कई एक्सपर्ट ने कहा कि बोइंग 787-8 ड्रीमलाइनर, एक ऐसा मॉडल है, जिसका सुरक्षा रिकॉर्ड बेदाग रहा है। ऐसे में वो अहमदाबाद में रनवे से उड़ान भरता है और इसके तुरंत बाद उसे मामूली थ्रस्ट का सामना करना पड़ता है।
विशेषज्ञों ने कहा कि पायलट इस समय लिफ्ट और ऊंचाई हासिल करने के कोशिश में योक को खींच रहे होंगे और वीडियो से पता चलता है कि उन्होंने विमान का लैंडिंग गियर भी नीचे छोड़ दिया था।
वीडियो को देख कर लगता है कि विमान ऊंचाई हासिल करने के लिए संघर्ष कर रहा था, इससे पहले कि वह अपने सही ऊंचाई पर पहुंचता, उससे पहले ही दुर्घटनाग्रस्त हो गया और आग के गोले में बदल गया।
कैसे होती है शवों की पहचान, जानिए पूरी प्रक्रिया
अचानक ये हादसे का शिकार हो गया. जब किसी विमान हादसे में जान-माल का नुकसान होता है, तो सबसे बड़ी चुनौती होती है मृतकों की पहचान करना.
हादसे की भयावहता इतनी होती है कि कई बार शव बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो जाते हैं और पहचानना बेहद मुश्किल हो जाता है. ऐसे में प्रशासन और विशेषज्ञों की एक टीम बेहद सावधानी और साइंटिफिक तरीकों से यह काम करती है. आइए जानते हैं कि किसी विमान हादसे के बाद शवों की पहचान कैसे की जाती है.
मौके पर सबसे पहले पहुंचती है रेस्क्यू टीम
हादसे के तुरंत बाद पुलिस, एनडीआरएफ, मेडिकल और फॉरेंसिक टीमें मौके पर पहुंचती हैं. सबसे पहले जिन्दा बचे लोगों को इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया जाता है. फिर घटनास्थल पर मौजूद शवों को इकट्ठा कर पोस्टमार्टम के लिए भेजा जाता है.
डीएनए जांच से होती है पुष्टि
अगर शव की हालत इतनी खराब होती है कि चेहरा या शरीर से पहचान संभव नहीं होती, तो वैज्ञानिक तरीका अपनाया जाता है – डीएनए टेस्ट. इसके लिए शव के ऊतक, बाल या हड्डियों से डीएनए सैंपल लिया जाता है और उसकी तुलना परिवार के किसी सदस्य से लिए गए सैंपल से की जाती है.
फिंगरप्रिंट और मेडिकल रिकॉर्ड की मदद
अगर शव का कोई हिस्सा सुरक्षित होता है, जैसे उंगलियां, तो फिंगरप्रिंट लेकर उसकी पहचान की जाती है. इसके अलावा, शवों के पुराने मेडिकल रिकॉर्ड, जैसे एक्स-रे, दांतों के इलाज की फाइल या सर्जरी के निशान भी पहचान में मदद करते हैं.
कपड़े, गहने और सामान भी मददगार
कई बार शवों के साथ मिले कपड़े, गहने, घड़ी, मोबाइल, चश्मा या कोई और निजी सामान से भी परिजन पहचान कर लेते हैं. लेकिन यह तरीका केवल प्रारंभिक पहचान के लिए होता है, अंतिम पुष्टि डीएनए या फिंगरप्रिंट से ही की जाती है.
परिवार से होता है संपर्क
हादसे में मारे गए लोगों की लिस्ट बनाकर उनके परिवार वालों से संपर्क किया जाता है. उन्हें शव की हालत और पहचान प्रक्रिया के बारे में बताया जाता है. परिवार की मौजूदगी में ही पहचान की पुष्टि होती है.
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