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मध्य प्रदेश में हवाई कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए हवाई पट्टियों की संख्या बढ़ाई जा रही है। अभी आठ हवाई अड्डों के अलावा 23 हवाई पट्टियां हैं। यह उपयोग में रहें और बेहतर मेंटेनेंस होता रहे, इसके लिए 11 हवाई पट्टियां निजी संस्थाओं को उपयोग के लिए दी गई हैं।
सिवनी, ढाना (सागर), गुना, रतलाम, उज्जैन, बिरवा (बालाघाट), उमरिया, छिंदवाड़ा, मंदसौर, नीमच और शिवपुरी की हवाई पट्टी को उड़ान प्रशिक्षण, अन्य विमानन गतिविधियों के संचालन के लिए निजी संस्थाओं को सौंपा गया है। अधिकारियों के अनुसार शिवपुरी और उज्जैन की हवाई पट्टियों के विकास व विस्तार के लिए भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण को जिम्मेदारी सौंपी गई है। हवाई पट्टियों को क्षेत्रीय हवाई अड्डों के रूप में विकसित किया जा रहा है।
नियमित हवाई सेवा के लिए जमीन अधिग्रहण शुरू
इससे नियमित हवाई सेवाएं शुरू की जा सकेंगी। इनके लिए जमीन अधिग्रहण की कार्रवाई की जा रही है। केंद्र की रीजनल कनेक्टिविटी स्कीम (RCS) के तहत 2024-25 में दतिया हवाई पट्टी को भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण को दिया गया था। दतिया प्रदेश का 8वां एयरपोर्ट। यहां से छोटे विमानों का संचालन शुरू हो चुका है।
सरकार की इस पहल का बड़ा असर कहां?
सरकार की इस पहल का सबसे बड़ा असर प्रदेश के पर्यटन और औद्योगिक क्षेत्रों पर देखने को मिल सकता है। उज्जैन, छिंदवाड़ा, शिवपुरी और सिवनी जैसे शहर पहले से ही धार्मिक, प्राकृतिक और औद्योगिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं। लेकिन सीमित कनेक्टिविटी के कारण इनकी पूरी क्षमता का उपयोग ही नहीं हो पा रहा है। अब सेवाएं शुरू होने से इन क्षेत्रों में पर्यटकों की संख्या बढ़ने और निवेश आने की उम्मीद है।
टूरिज्म को बढ़ावा
खासतौर पर उज्जैन, जो महाकाल लोक के कारण देश-दुनिया भर के श्रद्धालुओं का प्रमुख केंद्र बन चुका है। वहां हवाई सुविधा बढ़ने से यात्रा और आसान हो जाएगी। इसी तरह शिवपुरी और बालाघाट जैसे क्षेत्र, जो नेशनल पार्क और प्राकृतिक पर्यटन के लिए जाने जाते हैं। वहां भी पर्यटकों की पहुंच बढ़ेगी।
स्किल डेवलपमेंट को बढ़ावा मिलेगा
इसके अलावा उड़ान प्रशिक्षण और एविएशन की गतिविधियों के शुरू होने से स्थानीय युवाओं के लिए नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे। पायलट ट्रेनिंग, ग्राउंड स्टाफ, मेंटेनेंस और अन्य तकनीकी क्षेत्रों में स्किल डेवलपमेंट को बढ़ावा मिलेगा।
समय पर जमीन अधिग्रहण से विकास तक का काम तो होगा बड़ा फायदा
हालांकि इस पूरी योजना में सफलता की कहानी इन हवाई पट्टियों का विकास समय पर पूरा होने पर निर्भर करेगी। एयरलाइंस कंपनियां इन रूट्स पर नियमित सेवाएं शुरू करें। जमीन अधिग्रहण, इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट और संचालन से जुड़ी प्रक्रियाएं अगर तय समय सीमा में पूरी होती हैं, तो इसका पूरा फायदा प्रदेश को मिलेगा।
सरकार का पूरा फोकस फिलहाल छोटे शहरों को बड़े हवाई नेटवर्क से जोड़ने पर है। इससे आने वाले समय में मध्य प्रदेश के उभरते हवाई कनेक्टिविटी हब के रूप में भी सामने आ सकता है।
]]>झाबुआ के गोपालपुरा हवाई पटटी के नए सिरे से निर्माण की दिशा में कयावद शुरू हो गई है। विस्तार के लिए 120 हेक्टेयर जमीन की जरूरत होगी। इसमें से वर्तमान में 23.62 हेक्टेयर जमीन पूर्व से हवाई पट्टी के नाम से दर्ज है। इसके अलावा 71.33 हेक्टेयर वन भूमि और 0.41 हेक्टेयर निजी जमीन का अधिग्रहण करना होगा।
जबकि पास की 24.64 हेक्टेयर शासकीय जमीन का उपयोग भी इस कार्य के लिए किया जाएगा। विस्तारीकरण के बाद वर्तमान 792 मीटर की हवाई पटटी बढकऱ 1660 मीटर लंबी हो जाएगी। यहां 2 हेलीपेड के साथ 2250 वर्ग मीटर के एक हैंगर का निर्माण किया जाएगा। इसके अलावा अन्य कार्य भी होंगे। जिन पर कुल 95.37 करोड़ रुपए खर्च होंगे। कलेक्टर नेहा मीना ने प्रस्ताव तैयार करवाकर विमानन आयुक्त को भेज दिया है।
सिंहस्थ के दौरान उतर सकेंगे छोटे विमान
उज्जैन सिंहस्थ-2028 को देखते हुए जिला मुख्यालय से 4 किमी दूरी स्थित हवाई पट्टी के विस्तार का निर्णय लिया है, ताकि यहां छोटे विमान उतर सके। वर्तमान में एयर स्ट्रीप का उपयोग वीआईपी विजिट के दौरान हेलीकॉप्टर उतारने के लिए किया जाता है। दो बार झाबुआ दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हेलीकॉप्टर से यहीं उतरे थे। पीएम श्री पर्यटन वायु सेवा और पीएम श्री धार्मिक पर्यटन हेली सेवा में भी झाबुआ की एयर पट्टी का नाम शामिल है।
1660 मीटर तक बढ़ेगी लंबाई
निर्धारित मानक के अनुसार हवाई पटटी की लंबाई बढ़ाकर 1660 मीटर की जाएगी। जबकि चौड़ाई पूर्व की तरह ही 30 मीटर रहेगी। यहां 2 हेलीपेड के निर्माण के साथ प्लेन रखने के लिए हेंगर बनाया जाएगा। 1000 वर्ग मीटर में प्रशासकीय भवन और कर्मचारियों के रहने के लिए आई टाइप के दो मकान भी बनाए जाएंगे। 70 मीटर चौड़ाई में पुलिया का निर्माण होगा। पूरे क्षेत्र को सुरक्षित रखने के लिए 6621 मीटर लंबी और 2.10 मीटर ऊंची बाउंड्रीवाल बनाई जाएगी।
झाबुआ जिले में वर्षों से निष्क्रिय पड़ी गोपालपुरा एयर स्ट्रीप को अब सक्रिय बनाने की दिशा में बड़ी पहल की जा रही है। उज्जैन में 2028 में होने वाले सिंहस्थ महाकुंभ को ध्यान में रखते हुए झाबुआ में हवाई सेवाओं की शुरुआत की संभावनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। जिला मुख्यालय से मात्र 4 किलोमीटर दूर स्थित इस एयर स्ट्रीप के विस्तार के लिए लगभग 52 करोड़ रुपये का प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा गया है, जिसे जल्द स्वीकृति मिलने की उम्मीद है।
फिलहाल सीमित उपयोग, रनवे विस्तार की दरकार
वर्तमान में यह एयर स्ट्रीप केवल वीआईपी हेलीकॉप्टर लैंडिंग के लिए उपयोग की जाती है, क्योंकि इसका रनवे केवल 792 मीटर लंबा है, जो बड़े विमानों की लैंडिंग के लिए पर्याप्त नहीं है। नए प्रस्ताव के तहत रनवे को 2600 मीटर तक बढ़ाया जाएगा, ताकि छोटे हवाई जहाज भी यहां उतर सकें। इसके साथ ही विमान हेंगर, कंट्रोल रूम, विद्युतीकरण और बाउंड्रीवॉल जैसी आधारभूत संरचनाओं के निर्माण की योजना भी शामिल है।
भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया में वन विभाग की भूमिका
रनवे विस्तार के लिए अतिरिक्त भूमि की आवश्यकता पड़ेगी, जो फिलहाल वन विभाग के अधीन है। ऐसे में वन विभाग से अनुमति लेकर जमीन का हस्तांतरण किया जाना प्रस्तावित है। यह प्रक्रिया जैसे ही पूरी होती है, विस्तारीकरण कार्यों की शुरुआत की जा सकती है।
उज्जैन सिंहस्थ में निभाएगा अहम भूमिका
सिंहस्थ जैसे विशाल धार्मिक आयोजन के दौरान इंदौर एयरपोर्ट पर भीड़ अत्यधिक बढ़ सकती है। ऐसे में झाबुआ एयर स्ट्रीप का विकल्प के रूप में विकसित होना न केवल यात्री भार को बांटेगा, बल्कि यहां से सड़क मार्ग द्वारा तीर्थयात्रियों को सीधे उज्जैन पहुंचने की सुविधा भी मिल सकेगी। झाबुआ को पीएम श्री पर्यटन वायु सेवा और धार्मिक पर्यटन हेली सेवा योजनाओं में भी शामिल किया गया है, जो इसके महत्व को और बढ़ाता है।
35 साल पुराना है एयर स्ट्रीप का इतिहास
यह एयर स्ट्रीप वर्ष 1989-90 में बनाई गई थी और अब तक इसका उपयोग सीमित रूप से वीआईपी मूवमेंट के लिए होता रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी अपने झाबुआ दौरे के दौरान इसी एयर स्ट्रीप पर हेलीकॉप्टर से उतरे थे, जिससे इसकी रणनीतिक उपयोगिता साबित होती है।
विफल रही एविएशन ट्रेनिंग सेंटर की योजना
वर्ष 2006-07 में इस स्थान पर एक एविएशन ट्रेनिंग सेंटर स्थापित करने की योजना बनाई गई थी। इसके लिए राज्य सरकार और एयरोस्पेस एकेडमी ऑफ सेंट्रल इंडिया के बीच करार हुआ और एयर स्ट्रीप को 10 वर्षों के लिए लीज पर दिया गया था। परंतु योजना आगे नहीं बढ़ सकी और बाद में समझौता भी समाप्त हो गया।
विकास को गति मिलेगी
गोपालपुरा में स्थित हवाई पटटी के विस्तार का प्रारंभिक प्रस्ताव विमानन आयुक्त को भेजा है। उज्जैन सिंहस्थ को देखते हुए जल्द प्रस्ताव मंजूर होने की उम्मीद है।– नेहा मीना, कलेक्टर, झाबुआ
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