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प्राय: यह देखा गया है कि छोटे बच्चों को सादी रोटी खिलाने के लिये काफी मशक्कत करनी पड़ती है लेकिन यही रोटी अगर रंग-बिरंगी हो जाये, तो बच्चों की रूचि बढ़ जाती है। पोषण-युक्त आहार से बच्चों की सेहत में भी सुधार आता है। बच्चों को पोषण-युक्त आहार देने के उद्देश्य से सागर जिले में एक अभिनव पहल की गई है। कलेक्टर श्री संदीप जी.आर. ने 'रंगीन रोटी' कैम्पेन शुरू किया है, जिसमें आँगनवाड़ी केन्द्रों पर दिये जा रहे भोजन को और पोषण-युक्त बनाने के लिये बच्चों को मुनगे के पत्ते, गाजर, चुकन्दर, टमाटर आदि का उपयोग कर रंगीन रोटियाँ तैयार की जा रही हैं।
जिले में "रंगीन रोटी कैम्पेन" एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में शुरू किया गया, जिसका उद्देश्य आँगनवाड़ी के बच्चों को पोषण से भरपूर भोजन उपलब्ध कराना है। यह अभियान न केवल बच्चों के पोषण स्तर में सुधार लाने पर केन्द्रित है, बल्कि उन्हें भोजन के प्रति आकर्षित करना और रंग-बिरंगे तरीकों से उन्हें स्वस्थ भोजन का महत्व समझाना भी है।
इस अभियान के परिणाम स्वरूप बच्चों में पोषण स्तर में न सिर्फ धीरे-धीरे सुधार देखा गया, बल्कि बच्चों की रुचि भोजन में भी बढ़ी और वे नियमित रूप से आँगनवाड़ी केन्द्रों में आकर भोजन करने लगे। बच्चों के माता-पिता भी इस पहल से प्रभावित हुए और घर पर भी बच्चों के लिये पौष्टिक भोजन तैयार करने लगे। "रंगीन रोटी कैम्पेन" की सबसे बड़ी सफलता यह है कि इसके कारण आँगनवाड़ी केन्द्रों में बच्चों की उपस्थिति और उनके स्वास्थ्य का स्तर बेहतर हुआ।
]]>कोण्डागांव जिला के बनजुगानी गांव में एक ही परिवार के नौ बच्चे फूड प्वाइजनिंग का शिकार हो गए। बीमार सभी बच्चों को गंभीर हालत में कोण्डागांव जिला अस्पताल में उपचार के लिए भर्ती कराया गया है, जहां सभी का उपचार जारी है। बताया जा रहा है कि सभी बच्चे मंगलवार की सुबह घर के नजदीक आंगनबाड़ी केंद्र गए हुए थे, जहां खेलते-खेलते अधिकतर बच्चों ने रतनजोत का बीज खा लिया।
आंगनबाड़ी में खेलने के दौरान रतनजोत बीज खाने वाले बच्चों में नित्या पोयाम 4 वर्ष, दिवांसी पोयाम 4 वर्ष, कांति पोयाम 6 वर्ष, आयुष पोयाम 3 वर्ष, शिवानी पोयाम 5 वर्ष, नियासा पोयाम 4 वर्ष, दीपेश पोयाम 4 वर्ष, शामिल हैं। ये सभी बच्चे एक ही परिवार के हैं आंगनबाड़ी आए हुए थे जहां उन्होंने एक साथ रतनजोत का बीज खा लिया। घटना के तुरंत बाद परिजनों ने बच्चों को कोण्डागांव के जिला अस्पताल में उपचार के लिए भर्ती कराया है जहां सिविल सर्जन डॉ आरसी ठाकुर, पीडियाट्रिक डॉ रुद्र कश्यप, मेडिकल ऑफिसर डॉ अनामिका नेताम पीड़ितों का उपचार कर रहे हैं। डॉक्टर के अनुसार फिलहाल बच्चों की स्थिति खतरे से बाहर है।
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