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पहले दिन ही अनिल विज परिवहन मंत्री बनने पर एक्शन मोड़ में दिखाई दिए थे। निरीक्षण के दौरान मंत्री को बस अड्डे पर कई समस्याएं मिली थी। इन समस्याओं को देखकर मंत्री भड़क गए थे और अधिकारियों की जमकर क्लास लगाई थी। परंतु अब अनिल विज की फटकार के बाद रोडवेज के अधिकारियों ने अंबाला छावनी बस अड्डे पर काफी सुधार कर दिए हैं।
अंबाला छावनी का बस अड्डा सबसे व्यस्त बस अड्डा है। बस अड्डे में काउंटर के पिलर पर बस के जाने की समय सारणी लिखवाई गई है। शौचालय और बस अड्डा परिसर में कई लाइटें और पंखे खराब पड़े थे। इन सभी को बदलकर चालू किया गया है। बस अड्डे के अंदर से लाल कुर्ती की ओर जाने वाला रास्ता कई सालों से खुला हुआ था। उसे अब बंद करवाया गया है जिससे अब वहां पर लाल कुर्ती के लोग गंदगी न फैंक सके।
इस बारे में जानकारी देते हुए अतिरिक्त SS बस अड्डा विजेंद्र सिंह ने बताया कि अनिल विज पहले ही दिन परिवहन मंत्री बनने पर अंबाला कैंट बस स्टैंड पहुंचे थे और उन्हें बस स्टैंड पर कुछ कमियां मिली थी। जैसे गंदे शौचालय, पंखे, लाइटें खराब और साफ सफाई न होना, बस स्टैंड परिसर में बोर्ड फटा मिलना। यह सब कमियां पाई गई थी जिन कमियों को हमने दूर करने का प्रयास किया है और आगे भी करते रहेंगे।
]]>अनिल विज ने कहा कि चुनाव के दौरान उनके खिलाफ खूब खेल खेले गए। 'प्रशासन ने उन्हें हराने की पूरी कोशिश की, जो जांच का विषय है। नगर परिषद ने हमारी स्वीकृत सड़कों का निर्माण रोक दिया। इसके अलावा अन्य काम भी रोक दिए।'
शाहपुर गांव की घटना का जिक्र
मंत्री ने दावा किया कि प्रशासन ने इस चुनाव में खून-खराबा कराने की भी कोशिश की ताकि अनिल विज या उनका कार्यकर्ता मर जाए, ताकि चुनाव प्रभावित हो सके।' उन्होंने कहा, 'मुझे शाहपुर गांव की धर्मशाला में एक कार्यक्रम में जाना था और इसके लिए चुनाव आयोग से अनुमति ली थी। जब चुनाव आयोग अनुमति देता है तो पुलिस से एनओसी भी लेता है। जब मैं उस कार्यक्रम में गया तो वहां काफी लोग मौजूद थे, इसी बीच कई लोग लाठी-डंडे लेकर हॉल के अंदर आ गए और मारपीट शुरू हो गई। अगर इस झड़प में कुछ होता तो गलत होता। मैंने अपना धैर्य बनाए रखा, लेकिन मैं पूछना चाहता हूं कि उस समय पुलिस कहां थी?'
एक दिन पहले सुरक्षा क्यों वापस?
अनिल विज ने कहा कि उन्होंने कहा कि उन्हें जेड सुरक्षा मिली हुई है, लेकिन इस घटना से एक दिन पहले उनकी आधी सुरक्षा वापस ले ली गई। उस दिन सीआईडी कहां थी, उन्हें इस प्रदर्शन के बारे में क्यों नहीं पता चला? इसी तरह गांव गरनाला में भी एक घटना हुई और कार्यक्रम में जाने से पहले मैंने डीजीपी, डीसी, एसपी, चुनाव आयोग और आरओ को सूचित कर दिया था कि मेरा वहां कार्यक्रम है। लेकिन वहां भी झड़प हुई और अगर इस कार्यक्रम में किसी को कुछ हो जाता तो इसका जिम्मेदार कौन होता।
अनिल विज ने कसा तंज
कैबिनेट मंत्री ने कहा कि पुलिस प्रशासन अनिल विज को हराने की कोशिश कर रहा था और उनके इशारे पर कुछ कार्यकर्ताओं ने बगावत कर दी। चुनाव नतीजों के दिन सभी एग्जिट पोल एजेंसियों के दावे गलत साबित हुए। मुझे पूरा भरोसा था कि मैं चुनाव जीतूंगा, पार्टी जीतेगी और वह मंत्री भी बनेंगे। कई लोगों ने यह भ्रांति फैलाई कि अनिल विज को टिकट नहीं मिलेगा, फिर कहा कि वे जीतेंगे नहीं, फिर कहने लगे कि सरकार नहीं आएगी, ये सब झूठ साबित हुआ और ये लोग विपक्ष की गोद में जाकर बैठ गए। विज ने चुटकी लेते हुए कहा कि कसाई के कहने से भैंस नहीं मरती।
आशीष तायल पर अनिल विज का निशाना
विज ने कार्यकर्ताओं से अंबाला सदर नगर परिषद चुनाव के लिए तैयार रहने को भी कहा। उन्होंने कहा कि मेरे खिलाफ कई ताकतें लड़ीं। आशीष तायल नामक सज्जन ने गली-गली जाकर लोगों को चित्रा सरवारा के खेमे में शामिल करवाया और उनके पास इसके सारे सबूत हैं। उन्होंने फेसबुक पर नायब सैनी के साथ फोटो डाली ताकि वे अधिकारियों और कार्यकर्ताओं को प्रभावित कर सकें। मैं जानता हूं कि उनके मुख्यमंत्री के साथ क्या संबंध हैं। लेकिन मैं यह कहना चाहता हूं कि उन्होंने भाजपा के खिलाफ जो भी काम किया है, उन्हें हमारे मुख्यमंत्री के साथ फोटो डालने का कोई अधिकार नहीं है। उन्हें तुरंत फेसबुक से यह फोटो हटा देनी चाहिए और हम अपने मुख्यमंत्री का नाम बदनाम नहीं होने देंगे।
]]>अनिल विज ने ही बुधवार को भाजपा विधायक दल की मीटिंग में नायब सिंह सैनी के नाम का प्रस्ताव रखा। अनिल विज के अलावा कृष्ण बेदी ने भी नायब सैनी के नाम का प्रस्ताव रखा, जिस पर विधायकों ने ध्वनिमत से मुहर लगा दी। यह दृश्य दिलचस्प था क्योंकि अनिल विज ने चुनाव के बीच कहा था कि यदि भाजपा जीती तो इलेक्शन के बाद मुख्यमंत्री के तौर पर ही मुलाकात होगी। इसके बाद अब भाजपा नेतृत्व ने जब उनसे ही सैनी के नाम का प्रस्ताव रखवाया तो यह रोचक था।
अनिल विज लगातार 7वीं बार अंबाला कैंट विधानसभा से चुने गए हैं। वह लंबे समय से खुद को सीएम पद का दावेदार बताते रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के साढ़े 9 साल के कार्यकाल में वह होम मिनिस्टर थे और ताकतवर थे। इसके बाद भी उनके खट्टर से रिश्ते सहज नहीं थे। वहीं जब सैनी को सीएम बनाया गया तो वह मंत्री पद की शपथ लेने ही नहीं पहुंचे। इसे उनकी नाराजगी के तौर पर देखा गया था, लेकिन बाद में उनके सुर थोड़े नरम पड़े थे। यही वजह थी कि वह पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़े। हालांकि इलेक्शन कैंपेन के बीच ही उन्होंने खुद को सीएम का दावेदार बताकर हलचल पैदा कर दी थी।
]]>उन्होंने दावा किया कि सरकार भारतीय जनता पार्टी की ही बनेगी। उनके मुख्यमंत्री पद पर दावा करने के संबंध में पूछे गए सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी मुख्यमंत्री पद पर दावा नहीं किया। जब 2014 में भाजपा की सरकार बनी, तब भी वह मुख्यमंत्री बनाए जा सकते थे क्योंकि कांग्रेस की सरकार के कार्यकाल (2009-2014) में वह भाजपा विधायक दल के नेता थे और उन्होंने पांच साल सरकार की नाक में दम कर रखा था।
श्री विज ने कहा कि मार्च में जब मनोहर लाल खट्टर को हटाकर नायब सिंह सैनी को मुख्यमंत्री बनाया गया तब भी उन्होंने पद पर कोई दावा नहीं किया।
श्री विज ने कहा कि बाद में लोगों ने कहना शुरू किया कि वरिष्ठतम नेता होने के नाते विज को मुख्यमंत्री क्यों नहीं बनाया जा सकता, तब मैंने कहा कि यदि मुझे मुख्यमंत्री बनाया जाता है तो मैं हरियाणा की तकदीर और तस्वीर बदल दूंगा।
भाजपा नेता ने कहा कि अब भी पार्टी चाहेगी तो वह मुख्यमंत्री बनेंगे क्योंकि उन्होंने कभी पार्टी का कोई आदेश नहीं टाला।
उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों श्री विज के मुख्यमंत्री पद पर दावे के बाद भाजपा का शीर्ष नेतृत्व स्पष्ट कर चुका है कि पार्टी हरियाणा चुनाव श्री सैनी के नेतृत्व में लड़ रही है और वही पार्टी का मुख्यमंत्री चेहरा हैं।
]]>अनिल विज ने कहा कि इससे पहले उन्होंने कभी भी पार्टी के सामने कोई मांग नहीं रखी है। उन्होंने कहा, 'मेरे निर्वाचन क्षेत्र और दूसरी जगहों से भी लोग मेरे पास आ रहे हैं। वे कहते हैं कि सबसे सीनियर होने के बावजूद मैं मुख्यमंत्री क्यों नहीं बन सकता। इसलिए लोगों की मांग और अपनी वरिष्ठता के आधार पर मैंने आवाज उठाई। सीएम बनने के लिए मैं अपने दावे को आगे बढ़ाऊंगा।' पूर्व गृह मंत्री ने कहा कि अगर सरकार और पार्टी उन्हें टॉप पोस्ट के लिए चुना तो वह हरियाणा का चेहरा बदलकर रख देंगे।
'अब तक पार्टी से कुछ नहीं मांगा मगर…'
अंबाला में पत्रकारों से बातचीत के दौरान की गई टिप्पणी पर अनिल विज ने पीटीआई से बातचीत की। उन्होंने कहा, ‘मैं पार्टी का सबसे सीनियर विधायक हूं और 6 चुनाव जीत चुका हूं। 7वां चुनाव लड़ रहा हूं। मैंने अब तक अपनी पार्टी से कभी कुछ नहीं मांगा है। लेकिन, पूरे हरियाणा और मेरे अपने निर्वाचन क्षेत्र के लोग मुझसे मिल रहे हैं। मैं मुख्यमंत्री पद के लिए दावा पेश करूंगा। इस पर फैसला पार्टी आलाकमान को लेना है।’ जब उनसे कहा गया कि सैनी को पहले ही मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया जा चुका है तो विज ने कहा, ‘दावा करने पर कोई रोक नहीं है। मैं अपना दावा करूंगा, पार्टी को जो फैसला लेना होगा, वह लेगी।’
भाजपा आलाकमान का क्या रहा है पक्ष
हालांकि, 6 बार के विधायक अनिल विज की इस टिप्पणी से पहले ही भाजपा स्पष्ट कर चुकी है कि अगर वह सत्ता में लौटती है तो नायब सिंह सैनी ही मुख्यमंत्री रहेंगे। चुनाव में अब कुछ ही सप्ताह शेष रह गए हैं, ऐसे में उनके निर्णय के समय के बारे में पूछे जाने पर अनिल विज ने कहा कि लोगों के उनसे मिलने आने के बाद उन्होंने यह फैसला लिया। गौरतलब है कि मार्च में मनोहर लाल खट्टर की जगह सैनी को मुख्यमंत्री बनाया गया था। हरियाणा की 90 विधानसभा सीट के लिए 5 अक्टूबर को मतदान होगा और मतगणना 8 अक्टूबर को होगी।
इस पर अनिल विज ने कहा ‘आप’ का दिया बुझ चुका है। पंजाब और दिल्ली में बुरी तरह हार का सामना करना पड़ा है। विज ने कहा कि बुझा हुआ दीपक कभी जल नहीं सकता। दूसरे दीपक को जल रहा दीपक ही जला सकता है। ये बुझी हुई शमा है। बता दें कि चुनाव आयोग ने हरियाणा और जम्मू-कश्मीर के विधानसभा चुनाव का ऐलान कर दिया। हरियाणा की 90 विधानसभा सीटों के लिए एक चरण में ही एक अक्टूबर को चुनाव होंगे और नतीजों की घोषणा 4 अक्टूबर को होगी।
मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा, “90 में 73 सीटें सामान्य और 17 सीटें आरक्षित हैं। हरियाणा में 27 अगस्त को फाइनल वोटर लिस्ट जारी होगी। उन्होंने कहा कि हरियाणा में 2 करोड़ से ज्यादा मतदाता हैं। 20 हजार 629 पोलिंग बूथ हैं। 150 मॉडल पोलिंग बूथ हैं। मुख्य निर्वाचन आयुक्त राजीव कुमार ने कहा कि लोकसभा का चुनाव दुनिया में हमारी लोकतांत्रिक ताकत का प्रमाण है। इससे पहले, 2019 में हरियाणा में एक ही चरण में चुनाव हुआ था। 2019 के हरियाणा विधानसभा चुनाव में 68.20 फीसदी मतदाताओं ने अपने मताधिकार का उपयोग किया था।
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