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मध्यप्रदेश विधानसभा का एक दिवसीय विशेष सत्र 27 अप्रैल को होगा। मंगलवार को इसकी अधिसूचना जारी कर दी गई है। इस दिन नारीशक्ति वंदन विधेयक पर चर्चा होगी।मध्यप्रदेश विधानसभा का विशेष सत्र 27 अप्रैल को बुलाया गया है। राज्यपाल ने अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए इस विशेष सत्र को आमंत्रित किया है। नारीशक्ति वंदन अधिनयम पर यह एक दिवसीय सत्र बुलाया गया है। इसमें सभी सदस्यों को उपस्थित होने के लिए आमंत्रित किया गया है। सभी विधायक इस दिन राजधानी भोपाल में जुटेंगे।
विधानसभा सचिवालय की ओर से अधिसूचना जारी कर दी गई है। इस विशेष सत्र में नारी शक्ति वंदन से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होगी। इससे पहले सीएम मोहन यादव ने रविवार को प्रेस कांफ्रेंस कर विशेष सत्र बुलाए जाने की जानकारी दी थी। मोहन यादव ने कहा था कि महिलाओं से जुड़े इस अहम विषय पर विधानसभा में विस्तार से चर्चा की जाएगी। इससे पहले रविवार को सीएम मोहन यादव ने बीजेपी कार्यालय में मीडिया से कहा था कि लोकतंत्र एक निर्णायक दौर से गुजर रहा है और संसद में जो घटनाक्रम हुआ, वह बेहद निंदनीय और कष्टकारी है। गौरतलब है कि महिला आरक्षण बिल को लेकर आए इस विधेयक को संविधान का 131वां संशोधन बिल था, जिसे मोदी सरकार पास नहीं करा पाई।
दो पालियों में होगी बहस
विधानसभा सचिवालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, सदन की कार्यवाही दो पालियों में होगी। पहली पाली सुबह 11:00 बजे से दोपहर 1:30 बजे तक और दूसरी दोपहर 3:00 बजे से शाम 5:30 बजे तक चलेगी। सदस्यों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे संसदीय मर्यादा बनाए रखें और विचाराधीन मामलों पर टिप्पणी करने से बचें।
सीएम मोहन का प्रियंका गांधी पर सीधा वार
सत्र से पहले भाजपा ने भोपाल में जन आक्रोश रैली के जरिए अपनी ताकत दिखाई। इस दौरान मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि जब महिला आरक्षण बिल पास नहीं हो सका था, तब कांग्रेस ने इसका मजाक उड़ाया था। उन्होंने प्रियंका गांधी के 'लड़की हूं, लड़ सकती हूं' नारे पर तंज कसते हुए पूछा कि आज जब महिलाओं के हक की बात हो रही है, तो वह चुप्पी क्यों साधे हुए हैं?
जन आक्रोश रैली मे साधा था निशाना
इससे पहले सोमवार को भोपाल में भाजपा की ओर से नारी शक्ति वंदन बिल के समर्थन में आक्रोश रैली निकाली गई थी। इस रैली के जरिए पार्टी ने महिलाओं के अधिकारों के समर्थन में अपनी बात रखी थी।
जन आक्रोश रैली में सीएम मोहन यादव ने कहा था कि महिला आरक्षण बिल न पास होने पर कांग्रेस ने उसका मजाक उड़ाया। सीएम ने कांग्रेस पर भी हमला बोला। प्रियंका गांधी वॉड्रा के बयान पर कहा कि उन्हें शर्म आनी चाहिए। प्रियंका बड़ी-बड़ी बातें करती थीं, कहती थीं मैं लड़की हूं, लड़ सकती हूं। अब उनकी ये बड़ी-बड़ी बातें कहा गईं। जब बहनों के अधिकारों का उन्होंने गला घोट दिया गया।
कांग्रेस भी हुई हमलावर
इधर नारीशक्ति वंदन अधिनियम संशोधन विधेयक गिरने के बाद भाजपा एक तरफ कांग्रेस को कटघरे में खड़ा करते हुए उसे महिला विरोधी बता रही है। वहीं कांग्रेस भी हमलावर हो गई है। एमपी कांग्रेस ने मंगलवार को दोपहर प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में प्रेस कांफ्रेंस कर कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम की आड़ में परिसीमन के लिए संशोधन बिल लाकर जनता को गुमराह किया जा रहा है। महिला कांग्रेस की पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष शोभा ओझा और दिल्ली महिला कांग्रेस की अध्यक्ष पुष्पासिंह ने प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि हमारी मांग है कि भाजपा अभी इस महिला आरक्षण को लागू करे। 543 सीटों पर ही अभी महिला आरक्षण बिल को लागू किया जाए और जब यह जनगणना पूरी हो जाए तब परिसीमन किया जाए।
कांग्रेस का पलटवार
दूसरी ओर, कांग्रेस ने इसे बीजेपी का चुनावी हथकंडा करार दिया है। महिला कांग्रेस की पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष शोभा ओझा और पुष्पा सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आरोप लगाया कि बीजेपी नारी शक्ति वंदन अधिनियम की आड़ में जनता को गुमराह कर रही है। कांग्रेस की मांग है कि परिसीमन और जनगणना का इंतजार किए बिना सभी 543 लोकसभा सीटों पर तत्काल महिला आरक्षण लागू किया जाए।
हाल ही में महाशिवरात्रि के अवसर पर श्योपुर में निकली शिव बारात के दौरान विधायक बाबूलाल जंडेल का एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें वह कथित तौर पर हर्ष फायरिंग करते नजर आ रहे थे. वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने विधायक के खिलाफ FIR दर्ज की थी.
कांग्रेस ने इस कार्रवाई को 'षड्यंत्र' करार दिया है. सदन में कांग्रेस विधायकों ने आरोप लगाया कि सत्ता पक्ष जानबूझकर विपक्षी विधायकों को निशाना बना रहा है.
शीर्षासन करते हुए बातचीत
हैरानी की बात यह रही कि विधायक जंडेल ने शीर्षासन की मुद्रा में रहते हुए ही 'आजतक' से बात की और कहा, "मेरे खिलाफ द्वेषतापूर्वक कार्रवाई की गई है. सिर्फ इसलिए कि मैं विपक्षी दल का विधायक हूँ, मुझे निशाना बनाया जा रहा है. यह लोकतंत्र का अपमान है और मैं अपनी आवाज इसी तरह उठाता रहूंगा."
सदन में हंगामा और मांग
विधानसभा के अंदर भी कांग्रेस ने इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया. कांग्रेस नेताओं ने मांग की कि विधायक जंडेल के खिलाफ दर्ज 'झूठी' FIR को तत्काल निरस्त किया जाए. उन्होंने इसे सरकार की दमनकारी नीति बताया.
विधायक बोले- भगवान की खुशी में हर्ष फायर किया
कांग्रेस विधायक बाबू जंडेल ने कहा कि 15 फरवरी को हमारे क्षेत्र में यज्ञ का कार्यक्रम था। हजारों की संख्या में ब्राह्मण और साधु-संत मौजूद थे। मैंने शिवजी का चौतरा बनाकर विधि-विधान से तीन दिन तक हवन कराया, भगवान की स्थापना करवाई और उसके बाद शिव बारात का कार्यक्रम रखा गया।
शिव बारात में पालकियों और घोड़ों पर साधु-संत और ब्राह्मण सवार थे, फूल वर्षा हो रही थी और पटाखे चल रहे थे। मैं भी घोड़े पर सवार था। मेरे पास एक “चढ़ीमार” का एक राउंड था, जो दावत का राउंड होता है। भगवान की खुशी में मैंने एक हर्ष फायर किया। वह सिर्फ एक ही राउंड था। मेरे पास कोई एके 47 नहीं थी। मैं कोई उग्रवादी नहीं हूं, बल्कि यज्ञ का यजमान था।
बाबू जंडेल ने कहा– मेरे खिलाफ झूठे केस, आंदोलन करूंगा
बाबू जंडेल ने कहा- इससे तीन महीने पहले दिसंबर में मैंने गायों के मुद्दे को लेकर आंदोलन किया था और कलेक्टर के नाम ज्ञापन दिया था, तब भी मेरे खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी।
उन्होंने कहा कि मुझ पर अक्सर एफआईआर दर्ज की जाती हैं, लेकिन हाईकोर्ट ने सात मामलों में मुझे बरी किया है। सभी केस झूठे हैं। अगर सरकार यह केस वापस नहीं लेती है तो मैं गांधी आश्रम में भी आंदोलन करूंगा और सड़क पर उतरकर भी आंदोलन करूंगा। मुझे जेल जाने का कोई डर नहीं है।
जयवर्धन सिंह बोले- सीएम के संरक्षण में अवैध कॉलोनियां बन रही
कांग्रेस विधायक और पूर्व मंत्री जयवर्धन सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री के संरक्षण में अवैध कॉलोनियां और बिल्डर लगातार अवैध कॉलोनियों का विस्तार कर रहे हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि इस पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही है, जिससे अवैध निर्माण को बढ़ावा मिल रहा है। इसे लेकर सीधी विधायक रीति पाठक ने भी सदन में सवाल किया। इसके जवाब में नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि अवैध कॉलोनियों पर रोक लगाने के लिए तीन महीने के भीतर कड़ा कानून लागू किया जाएगा। इसका उद्देश्य अवैध कॉलोनियों के निर्माण को रोकना है।
कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि अवैध कॉलोनियां बनाने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
ध्यानाकर्षण में ये मुख्य मुद्दे उठाएंगे विधायक
डिंडोरी विधायक ओमकार सिंह मरकाम प्रदेश में धान खरीदी के लिए सर्वर न चलने से किसानों के स्लॉट बुक न होने से आ रही परेशानी को सदन में रखेंगे।
खातेगांव विधायक आशीष शर्मा खातेगांव क्षेत्र के फॉरेस्ट एरिया में किसानों के खिलाफ दर्ज किए गए झूठे मुकद्मों का मामला उठाएंगे।
राजगढ़ से बीजेपी विधायक अमर सिंह यादव प्रदेश में राजस्व अधिकारियों द्वारा भूमिहीन और गरीबों के लिए पट्टे और धारणाधिकार का काम समय पर न होने का मामला उठाएंगे।
नर्मदापुरम विधायक डॉ सीताशरण शर्मा प्रदेश में अतिथि विद्वानों को मानदेय न मिलने का मुद्दा उठाएंगे।
मुरैना विधायक दिनेश गुर्जर प्रदेश में राजस्व विभाग के अंतर्गत भू संसाधन प्रबंधन विभाग के जूनियर डाटा एंट्री ऑपरेटर्स का जिला मुख्यालयों पर अटैचमेंट किए जाने का मामला उठाएंगे।
जौरा विधायक पंकज उपाध्याय प्रदेश में इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) नीति और पीएम ई ड्राइव के क्रियान्वयन में नीति का पालन न करने का मामला उठाएंगे।
नागदा-खाचरोद विधायक डॉ तेज बहादुर सिंह चौहान उज्जैन जावरा रोड पर लगातार हो रही दुर्घटनाओं से मौतों का मामला उठाएंगे।
भितरवार विधायक मोहन सिंह राठौर प्रदेश भर में राजस्व अभिलेखों का कम्प्यूटराइजेशन और रिकॉर्ड में सुधार की समस्या उठाएंगे।
पोहरी से कांग्रेस विधायक कैलाश कुशवाह प्रदेश में खाद संकट और यूरिया-डीएपी खाद के दामों में बढ़ोत्तरी करने से किसानों पर आए आर्थिक बोझ का मुद्दा उठाएंगे।
]]>मध्यप्रदेश विधानसभा के बजट सत्र में एक ऐतिहासिक पहल करते हुए वरिष्ठ कांग्रेस विधायक और पूर्व विधानसभा उपाध्यक्ष डॉ. राजेंद्र कुमार सिंह ने 'सार्वभौम निःशुल्क स्वास्थ्य सुविधा' को लेकर एक निजी सदस्य विधेयक (Private Member's Bill) पेश किया है। इस विधेयक के माध्यम से उन्होंने मांग की है कि प्रदेश के हर नागरिक को, चाहे वह किसी भी वर्ग या आय समूह का हो, उसे हर साल 15 लाख रुपए तक का स्वास्थ्य कवरेज मिलना चाहिए।
विधेयक की मुख्य मांगें: इलाज का अधिकार
"सबसे बड़ा सुख निरोगी काया, सरकार चाहे तो कर्ज लेकर दे सुविधा"
डॉ. सिंह ने शास्त्रों का हवाला देते हुए कहा कि 'पहला सुख निरोगी काया' है। उन्होंने पंजाब सरकार का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां 10 लाख तक का यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज लागू किया गया है। मध्यप्रदेश की बड़ी आबादी के हिसाब से इस पर सालाना 8 से 9 हजार करोड़ रुपए का खर्च आएगा।
उन्होंने सरकार को सुझाव देते हुए कहा, "सरकार लाड़ली बहना योजना के लिए 23 हजार करोड़ खर्च कर रही है, हम उसका विरोध नहीं करते। लेकिन यदि जनता की जान बचाने और मुफ्त इलाज देने के लिए सरकार को कर्ज भी लेना पड़े, तो मैं उसका कभी विरोध नहीं करूंगा। यह जनता का विधेयक है, सरकार इसका पूरा श्रेय ले, लेकिन इसे लागू करे।"
आईएएस-आईपीएस की तर्ज पर हो आम जनता का इलाज
विधायक ने तीखा सवाल उठाते हुए कहा कि जब आईएएस और आईपीएस अधिकारियों, उनकी पत्नियों और आश्रितों को सेवाकाल और रिटायरमेंट के बाद भी शत-प्रतिशत मुफ्त इलाज मिल सकता है, तो आम जनता के साथ भेदभाव क्यों? उन्होंने 'सबका साथ, सबका विकास' के नारे की याद दिलाते हुए कहा कि स्वास्थ्य सुविधाओं में समानता होनी चाहिए।
क्या है निजी सदस्य विधेयक?
विधानसभा में आमतौर पर सरकार (मंत्री) ही विधेयक लाते हैं, लेकिन कोई भी विधायक (निजी सदस्य) अपनी ओर से कानून बनाने का प्रस्ताव रख सकता है। डॉ. राजेंद्र सिंह ने बताया कि मध्यप्रदेश विधानसभा के इतिहास में ऐसे अवसर बहुत कम आए हैं जब किसी सदस्य ने निजी विधेयक प्रस्तुत किया हो।
उन्होंने इसे अपनी प्राथमिक जिम्मेदारी बताते हुए सरकार से इस पर गंभीरता से विचार करने का आग्रह किया है।
उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने किया हस्तक्षेप
चर्चा के दौरान उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने कहा कि लाड़ली बहनों को मिलने वाली राशि से भी परिवारों को स्वास्थ्य की दृष्टि से सहारा मिलता है। जिस पर डॉ. सिंह ने पलटवार करते हुए कहा कि 1500 रुपये की राशि बड़े ऑपरेशनों के सामने केवल आने-जाने के किराए जितनी ही है।
विधायक डॉ. राजेंद्र सिंह ने स्वास्थ्य सुविधाओं को 'राजनीति और वोट के फंडे' से ऊपर उठाकर एक अनिवार्य अधिकार बनाने की वकालत की है। अब देखना यह है कि क्या सरकार इस निजी विधेयक को स्वीकार कर मध्यप्रदेश में स्वास्थ्य क्रांति की ओर कदम बढ़ाती है।
]]>नेता प्रतिपक्ष के नेतृत्व में कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन
इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों के मामले को लेकर विधानसभा के बजट सत्र के छठे दिन कांग्रेस ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। नेता प्रतिपक्ष के नेतृत्व में कांग्रेस विधायक गंदा पानी लेकर विधानसभा परिसर के बाहर पहुंचे और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
मप्र विधानसभा सत्र की कार्यवाही शुरू, इंदौर में हुई मौतों पर कांग्रेस का प्रदर्शन
मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र का आज दूसरा दिन है। आज सदन के हंगामेदार होने के आसार है। सदन में राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा होगी। इससे पहले वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा अनुपूरक बजट प्रस्तुत करेंगे। यह प्रावधान वित्तीय वर्ष के शेष महीनों के खर्चों की पूर्ति के लिए लाया जा रहा है।
तिलहन संघ कर्मचारियों के वेतनमान का मुद्दा भी सदन में उठा
विधानसभा में विधायक केशव देसाई ने न्यायालय के आदेश के बाद भी तिलहन संघ के कर्मचारियों को पांचवें वेतनमान का लाभ नहीं दिए जाने का मामला उठाया। इस सवाल का जवाब सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग की बजाय नगरीय विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने दिया।
उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे कोर्ट के आदेश जारी हो रहे हैं, वैसे-वैसे सरकार कार्रवाई कर रही है। शासन के विभिन्न विभागों में प्रतिनियुक्ति पर पदस्थ तिलहन संघ के कर्मचारियों के वेतनमान निर्धारण के संबंध में सामान्य प्रशासन विभाग और वित्त विभाग द्वारा निर्देश जारी किए गए हैं।
कर्मचारियों को छठा वेतनमान दिए जाने के संबंध में उन्होंने कहा कि यह मामला उच्च न्यायालय में विचाराधीन है। अपील और अवमानना के प्रकरण लंबित हैं, इसलिए कोर्ट का फैसला आने के बाद ही इस मामले में आगे कुछ कहा जा सकेगा।
भाजपा को शर्म आनी चाहिए- कांग्रेस विधायक
उज्जैन के तराना से कांग्रेस विधायक महेश परमार ने कहा कि इंदौर प्रशासन और भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने पूरे विश्व में शर्मसार किया है। दूषित पानी पीने से लगभग 35 से 40 लोगों की मौत हो गई। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई करने के बजाय उन्हें पदोन्नति देकर ऊपर भेज दिया गया। इन मासूम लोगों की मौत के लिए जो भी दोषी हैं, उनके खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए और पीड़ित परिवारों को न्याय मिलना चाहिए। बीजेपी को शर्म आना चाहिए।
आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या पर ध्यानाकर्षण
कांग्रेस विधायक आतिफ अकील भोपाल में आवारा कुत्तों की लगातार बढ़ती संख्या और नियंत्रण में कमी को लेकर नगरीय विकास एवं आवास मंत्री का ध्यान आकर्षित करेंगे। वहीं वरिष्ठ भाजपा विधायक जयंत मलैया दमोह जिले के अंतर्गत सीतानगर सिंचाई परियोजना की मूल डीपीआर में किए गए परिवर्तन की जांच को लेकर जल संसाधन मंत्री का ध्यानाकर्षण करेंगे।
भाजपा विधायक दल की बैठक
आज शाम मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के आवास पर भाजपा विधायक दल की बैठक प्रस्तावित है। बैठक में मंत्रियों और विधायकों के साथ आगामी रणनीति पर चर्चा होगी। विपक्ष के सवालों का प्रभावी जवाब देने और मुख्य बजट को लेकर तैयारी पर विशेष जोर रहेगा। दूसरी ओर, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार की अध्यक्षता में कांग्रेस पहले ही अपनी रणनीति तय कर चुकी है। ऐसे में आज सदन में सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिल सकती है।
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मध्य प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र आज 28 जुलाई सोमवार से शुरू हो गया है. विधानसभा सत्र के लिए पक्ष और विपक्ष के विधायकों ने 3377 सवाल लगाए हैं. विपक्ष ने जल जीवन मिशन, कर्मचारियों की पदोन्नति नीति, सड़कों के हालात, प्रदेश में खाद-बीज की स्थिति जैसे कई मुद्दों को लेकर कई सवाल लगाए हैं. उधर विपक्ष के हर सवाल का जवाब देने के लिए सत्ता पक्ष ने भी कमर कस ली है.
सदन में रखा 2 मिनट का मौन
मध्य प्रदेश विधानसभा मानसून सत्र की कार्रवाई शुरु होने से पहले वंदे मातरम का गान हुआ. सदन में सचिवालय के कर्मचारी ड्रेस कोड में आए. वहीं विधानसभा में मृतकों को श्रद्धांजलि देने के लिए 2 मिनट का मौन रखा गया.
इधर विपक्ष ने आरक्षण को लेकर जमकर हंगामा किया. जिसके बाद विधानसभा की कार्रवाई मंगलवार तक के लिए हुई स्थगित
मृतकों को विधानसभा में श्रद्धांजलि
विधानसभा में भूतपूर्व विधानसभा सदस्य राजा सुरेंद्र बहादुर सिंह, रघुनाथ चौधरी, शिव शंकर लाल, भूतपूर्व केंद्रीय मंत्री सरदार सुखदेव सिंह, भूतपूर्व केंद्रीय उप मंत्री डॉक्टर गिरिजा व्यास, भूतपूर्व मुख्यमंत्री गुजरात विजय कुमार रुपाणी, सुप्रसिद्ध फिल्म अभिनेता मनोज कुमार, लोक कलाकार रामसहाय पांडे को विधानसभा में श्रद्धांजलि दी गई. इसके अलावा 22 अप्रैल 2025 को कश्मीर के अनंतनाग में हुए आतंकी हमले में अमृत नौसेना के अधिकारी और पर्यटकों के अलावा 12 जून 2025 को अहमदाबाद में एयर इंडिया के विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने से अमृत यात्रियों और मेडिकल स्टूडेंट को विधानसभा में श्रद्धांजलि दी गई.
कांग्रेस विधायकों का गिरगिट स्टंट
मध्य प्रदेश विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष बोले, "ओबीसी आरक्षण के मामले में गिरगिट की तरह रंग बदल रही सरकार".
मध्य प्रदेश विधानसभा में गिरगिट के खिलौने लेकर आए विधायक
27 प्रतिशत आरक्षण को लेकर मध्य प्रदेश विधानसभा में विपक्ष हमलावर. बैनर पोस्टर लेकर विधायक पहुंचे विधानसभा के सत्र में. भारतीय जनता पार्टी के विधायक प्रीतम लोधी ऐप बेस्ड टैक्सी से पहुंचे सदन.
सदन के बाहर कांग्रेस का प्रदर्शन
मध्य प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र शुरु होने से पहले कांग्रेस ने सदन के बाहर प्रदर्शन किया. विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार गिरगिट लेकर पहुंचे. नेता प्रतिपक्ष बोले ओबीसी आरक्षण के मामले में गिरगिट की तरह रंग बदल रही है सरकार.
]]>इच्छुक कंपनियों से मांगे गए ऑफर
सदन में अधिकारियों के लिए अभी किसी भी तरह का ड्रेस कोड नहीं है, लेकिन उन्हें निर्देश हैं कि वे शालीन कपड़ों में दिखें। अब अफसरों को विधानसभा सचिवालय द्वारा तय कोड के कपड़े पहनने होंगे। अफसरों, कर्मचारियों को विधानसभा सचिवालय ही कपड़े उपलब्ध कराएगा। सचिवालय ने इच्छुक कंपनियों से ऑफर मंगाए हैं। निविदा के लिए 10 जून तक का समय दिया गया है। दस जून के बाद विधानसभा सचिवालय निविदा स्वीकार नहीं करेगा।
क्या है वेल ऑफ द हाउस
वेल ऑफ द हाउस यानी सदन में विधानसभा सचिवालय की विभिन्न शाखाओं के अफसर-कर्मचारी बैठते हैं। इनमें विधान, प्रश्न, ध्यानाकर्षण शाखा प्रमुख हैं। प्रश्न, ध्यानाकर्षण शाखाओं के अफसर कर्मचारियों का काम कुछ समय के लिए रहता है। विधान शाखा के अफसरों का काम ज्यादा रहता है। सचिवालय रिपोर्टिंग विंग के अफसर, कर्मचारी पूरे समय बैठते हैं। कार्यवाही की रिपोर्टिंग इसी विंग के जिम्मे रहती है।
मध्य प्रदेश विधानसभा का शीतकालीन सत्र आज से शुरू हो गया। अमरवाड़ा से विधायक कमलेश शाह और बुधनी से विधायक रमाकांत भार्गव के शपथ ग्रहण से विधानसभा की कार्यवाही शुरू हुई। इस दौरान कांग्रेस विधायकों ने खाद की खाली बोरियां लेकर विरोध प्रदर्शन किया। वे किसानों को खाद नहीं मिलने का मुद्दा उठा रहे थे।
इसके बाद कार्यवाही कल तक के लिए स्थगित कर दी गई। शीतकालीन सत्र में सरकार जन विश्वास विधेयक प्रस्तुत करेगी, जिसके माध्यम से छोटे-छोटे मामलों को कोर्ट-कचहरी के स्थान पर अर्थदंड लगाने का अधिकार अधिकारियों को दिया जाएगा। इसके साथ ही वर्ष 2024-25 के लिए 17 दिसंबर को 15,000 करोड़ रुपये से अधिक के प्रथम अनुपूरक बजट के साथ नगर निगम और नगर पालिका अधिनियम और निजी विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक भी प्रस्तुत किए जाएंगे।
एमपी सरकार पेश करेगी विधेयक
कामकाज को सरल बनाने के लिए केंद्र सरकार ने वर्ष 2023 में जन विश्वास विधेयक प्रस्तुत किया था। इसी तरह मध्य प्रदेश सरकार भी विधेयक प्रस्तुत करने जा रही है। इसमें नगरीय विकास, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, ऊर्जा, श्रम, सहकारिता सहित अन्य विभागों के उन अधिनियमों में संशोधन किया जा रहा है, जिनमें दो-तीन माह की सजा या जुर्माने का प्रविधान है। ऐसे मामलों में समझौते का प्रविधान शामिल किया जा रहा है। उधर, नगर निगम, नगर पालिका और नगर परिषद के अध्यक्ष के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव तीन वर्ष की कार्यावधि पूरी होने के बाद प्रस्तुत करने और उसे पारित कराने के लिए तीन चौथाई पार्षदों का समर्थन आवश्यक संबंधी प्रविधान करने अधिनियम में संशोधन प्रस्तावित किया गया है।
भाजपा के दो विधायक की शपथ
विधानसभा के आज से प्रारंभ हुई शीतकालीन सत्र में सबसे पहले उपचुनाव में निर्वाचित दो विधायकों को शपथ दिलाई गई। लोकसभा चुनाव के समय छिंदवाड़ा जिले की विधानसभा सीट अमरवाड़ से कांग्रेस विधायक कमलेश शाह ने त्यागपत्र देकर भाजपा की सदस्यता ले ली थी। जुलाई 2024 में उपचुनाव कराए गए, जिसमें भाजपा के प्रत्याशी कमलेश शाह विजयी रहे। उन्होंने तब विधानसभा की सदस्यता नहीं ली थी। अब उन्हें शपथ दिलाई जाएगी। इसी तरह, शिवराज सिंह चौहान के विदिशा से सांसद निर्वाचित होने पर बुधनी और रामनिवास रावत के विधानसभा की सदस्यता से त्यागपत्र देने पर विजयपुर में उपचुनाव कराया गया था।
विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर ने निर्देश दिये हैं कि प्रदेश की विधानसभा को मानसून सत्र, 2025 तक पेपरलेस किया जाए। इसके लिए विधानसभा में नेशनल ई-विधान परियोजना (नेवा) लागू की जाये। उन्होंने इस परियोजना के लागू होने से पहले विधानसभा सदस्यों को भी इसकी पर्याप्त जानकारी देने को भी निर्देश दिये हैं। विधानसभा अध्यक्ष तोमर आज विधानसभा में नेवा हाउस कमेटी की बैठक को संबोधित कर रहे थे।
विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि यह परियोजना जल्द से जल्द लागू करने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि अब तक 23 प्रदेशों के 25 सदनों ने केन्द्र सरकार द्वारा प्रायोजित ई-विधान परियोजना लागू करने के लिए MOU पर हस्ताक्षर किये हैं। देश के 13 प्रदेशों के 14 सदनों में यह परियोजना लागू की जा चुकी है। विधानसभा अध्यक्ष तोमर ने कहा कि अब प्रत्येक दो माह में परियोजना की प्रगति से समिति को अवगत कराया जाये। बैठक में बताया गया कि इस परियोजना के लिये केन्द्र सरकार के "संसदीय कार्य मंत्रालय" को नोडल विभाग बनाया गया है।
उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने ई-विधान परियोजना में एन.आई.सी. का जिला स्तर तक सहयोग लिये जाने की बात कही। संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि इस परियोजना को लागू करने के लिए विधायकों की जो समिति बनायी गयी है वह समिति जल्द उन राज्यों का दौरा करे, जहां इस परियोजना को सफलतापूर्वक लागू किया जा चुका है। उन्होंने ई-विधान परियोजना के लिए साइबर सिक्यूरिटी पर भी विशेष ध्यान देने की बात कही। बैठक में विधानसभा के प्रमुख सचिव, अवधेश प्रताप सिंह ने बताया कि कुल परियोजना लागत का 60 प्रतिशत अंश केन्द्र सरकार द्वारा और 40 प्रतिशत राज्य सरकार वहन किया जायेगा। केन्द्र सरकार ने अभी तक 19 करोड़ 36 लाख रूपये लागत के परियोजना कार्यों का अनुमोदन कर दिया है। बैठक में टेबलेट, नेटवर्क और ई-लर्निंग एवं ई-फेसिलिटी सेंटर पर भी विचार किया गया। बैठक में तय हुआ कि विधायकों की सुविधा के लिए जिले के एन.आई.सी. सेंटर को नोडल ट्रेनिंग एजेंसी के तौर पर कहा जायेगा, जिससे विधायक सुविधाजनक तरीके से इस सेवा का लाभ उठा सकेंगे। परियोजना का प्रस्तुतिकरण अपर सचिव वीरेन्द्र कुमार ने दिया। बैठक में बताया गया कि केन्द्र सरकार के डिजिटल इंडिया प्रोग्राम के तहत देश की समस्त विधानसभाओं को पेपरलेस करने एवं उन्हें एक प्लेटफार्म पर लाने के उद्देश्य से ई-विधान (नेवा) लाँच किया गया है। बैठक में समिति के सदस्य विधायक सर्वअजय विश्नोई, बाला बच्चन, श्रीमती रीति पाठक, सुरेश राजे, नीतेन्द्र सिंह राठौर, गौरव सिंह पारधी, अपर मुख्य सचिव विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, संजय दुबे मौजूद थे।
]]>मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र का आगाज सोमवार को हुआ। सत्र के पहले ही कांग्रेस हंगामा के मूड में दिखी। कांग्रेस विधायकों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि इस बार की विधानसभा आसान होने वाली नहीं है। सदन की कार्रवाई शुरु होने से पहले ही कांग्रेस के सभी विधायक विधानसभा परिसर स्थित गांधी की प्रतिमा के पास नर्सिंग एप्रिन पहन कर जमकर हंगामा किया।
गले में नर्सिंग घोटाले की चिट लगाकर सदन में दाखिल हुए विधायक
खास बात यह भी थी कि कांग्रेस के सभी विधायक एप्रिन पहनने के साथ ही गले में नर्सिंग घोटाले की चिट लगाकर सदन में दाखिल हुए। इस मामले में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि प्रदेश में बड़ा नर्सिंग घोटाला हुआ है और पूर्व चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग की देख रेख में पूरा घोटाला किया गया है लिहाजा इतने बड़े घोटाले की जांच चल रही है तो नैतिकता के आधार पर भाजपा सरकार को विश्वास सारंग का इस्तीफा लेना चाहिए।
बच्चों के भविष्य के साथ हुए खिलवाड़ की जिम्मेदारी किसी को तो लेना पड़ेगा
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इस दौरान साफ शब्दों में कहा कि जिस प्रकार से प्रदेश के बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया गया है उसकी जिम्मेदारी तो किसी को लेनी होगी। जिन बच्चों का भविष्य अंधकार में जा रहा है उनसे जाकर पूछो उनके दिल में क्या गुजर रही है।
सारंग के इस्तीफे पर अड़े नेता प्रतिपक्ष
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक विश्वास सारंग का इस्तीफा नहीं हो जाता है, तब कांग्रेस की तरफ से विरोध प्रदर्शन का दौर जारी रहेगा। वहीं कांग्रेस के जवाब में राज्य मंत्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल ने कहा कि कांग्रेस विधायकों को कुछ नहीं आता। उन्हें अभी बहुत सीखने की जरुरत है। जब मामला सीबीआई के पास है और उसमें जांच चल रही है तो इंतजार करें कुछ दिनों में सब दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। लेकिन कांग्रेस नेताओं ने इस दौरान कहा कि सीबीआई भी तरीके से जांच नहीं कर रही है। सीबीआई के ही कई अफसर इसी मामले में जेल में है। सरकार को इस मामले को लेकर पूर्व जजों की एक कमेटी बनाने चाहिए जिसमें शिकायतकर्ता को भी शामिल करना चाहिए।
आज से शुरू हुआ मध्य प्रदेश विधानसभा का सत्र पहला ही दिन काफी हंगामेदार रहा. कांग्रेस की तरफ से भारतीय जनता पार्टी को नर्सिंग घोटाले को लेकर घेरा गया. कांग्रेस के दिग्गज नेता सचिन यादव, उमंग सिंघार और कई नेताओं ने गांधी प्रतिमा के सामने प्रदर्शन किया. नर्सिंग घोटाले पर बढ़ते विरोध प्रदर्शन के कारण सदन कल तक के लिए स्थगित कर दिया गा है.
उमंग सिंघार ने की सारंग के इस्तीफे की मांग
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा, नर्सिंग घोटाले में प्रदेश के अंदर 300 करोड़ की वसूली की गई है. उस समय मंत्री विश्वास सारंग ने अपने हिसाब से कानून बनाए हैं और फेरबदल किए हैं. कानून ने फटकार लगाई, लेकिन उन्होंने बात नहीं सुनी. आगे घोटाले न हों, इसको लेकर हम विश्वास सारंग के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं.
नर्सिंग घाेटाले पर कांग्रेस का विरोध
जानकारी के मुताबिक कांग्रेस नेता यहां एप्रिन पहनकर पहुंचे थे. कांग्रेस नेताओं ने तय किया है कि नर्सिंग घोटाले पर स्थगन प्रस्ताव लाएगी. इस बारे में विधायक विक्रांत भूरिया ने कहा कि "देखिए आज से यह आगाज हो गया है. सत्ता को जवाबदेह बनना पड़ेगा. जो सरकार रहती है. उसकी जवाबदारी क्या है? स्वास्थ्य देना सुरक्षा देना और शिक्षा देना इन तीनों में पूरी तरह से सरकार विफल रही है."
प्रश्नकाल के बाद नर्सिंग घोटाले पर कल चर्चा
विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि सरकार चर्चा के लिए तैयार है। मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव ने कहा कि सरकार चर्चा करने को तैयार है, लेकिन सदन की परंपरा के साथ चर्चा हो। मुख्यमंत्री ने कहा कि शालीनता के साथ अपनी बात रखी जाए। विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि सदन चर्चा के लिए है सभी लोगों की बात आ गई है। निश्चित रूप से दोनों पक्षों को मैंने सुना। लेकिन सदन नियम परंपरा और प्रक्रियाओं से चलता है। पुरानी भी कई परंपरा है। भावनाओं को भी कमजोर नहीं करना चाहिए। मैंने दोनों पक्षों को सुना है अलग से भी बात की है सदन में भी सुना है। मैं प्रतिपक्ष को कहना चाहता हूं कि आप दोनों लोगों ने मुझ पर छोड़ने के लिए कहा है। मैं कल उचित नियम के तहत इस पर चर्चा कराऊंगा। नेता प्रतिपक्ष ने समय की बात करने पर अध्यक्ष ने कहा कि प्रश्नकाल के बाद नर्सिंग घोटाले पर कल चर्चा होंगी।
भूरिया ने आगे कहा "जिस तरह से पहले व्यापम के माध्यम से फर्जी डॉक्टर तैयार करे गए और आज नर्सिंग घोटाले के माध्यम से फर्जी पैरामेडिकल स्टाफ तैयार किया गया है. क्या जनता के लोगों की या आम जनता की जान की कोई कीमत नहीं है? पैसा ही सब कुछ है? यह तो कोर्ट की जब फटकार पड़ी तब जाकर पता लगा कि सारे कॉलेजों में जबरदस्त धांधली चल रही है. अब बात यहां नहीं रुकेगी अब बात है तो लंबी जाएगी. नियम किसने 2018 में बनाए फर्जी कॉलेजों को मान्यता किसने दी? यह सबसे बड़ा सवाल है और इसमें विश्वास सारंज जवाबदेह दे हैं. और उनको इस्तीफा देना चाहिए."
मोहन सरकार का तीसरा सत्र
आपको बता दें कि 1 जुलाई से शुरू हो रहा सत्र मौजूदा सरकार का तीसरा सत्र है. इससे पहले दो सत्र हो चुके हैं. सीएम मोहन यादव सरकार का दूसरा सत्र 7 फरवरी 2024 से 14 फरवरी 2024 तक चला था. फिलहाल विपक्ष ने सत्र के पहले दिन ही नर्सिंग घोटाले को लेकर जमकर हंगामा शुरू कर दिया है.
पॉलिसी बनाने वाले अधिकारियों पर एक्शन हो
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि नर्सिंग फर्जीवाड़े मामले में चर्चा कराए जाने को लेकर नेता प्रतिपक्ष ने अध्यक्ष को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा की हम चाहते है कि सदन की 14 दिन की बैठकें पूरी चले। उन्होंने कहा कि विपक्ष के हंगामें को लेकर आरोप लगाए जाते हैं। हम चाहते हैं कि बीच का रस्ता निकल कर चर्चा कराई जाए। कोर्ट में जो मामला है उस पर हम चर्चा नहीं करना चाहते हैं। नर्सिंग काउंसिल की पॉलिसी बनाने वाले अधिकारियों पर एक्शन हो। इस पूरे घोटाले को लेकर कांग्रेस पर्दाफाश करेगी।
नए कानून लागू होने पर दी बधाई
मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को नए कानूनों के बदलाव को लेकर बधाई दी। सीएम ने कहा की आईपीसी की जगह साक्ष्य अधिनियम में बदलाव किया है। टोल टैक्स को लेकर सरकर ने नियम में परिवर्तन किया है। अवैध वसूली रोकने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है।
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