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– योगी सरकार की तत्परता से सुलझी बैंकिंग की तकनीकी समस्या, 14 मई से रुक गया था भुगतान
– तकनीकी समस्या के कारण रुक गया था अस्पतालों का 600 करोड़ रुपये का भुगतान
– 23 मई को जारी हुए 100 करोड़, अगले एक-दो दिन में 500 करोड़ रूपये का हो जाएगा भुगतान
लखनऊ
योगी सरकार द्वारा प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (ABPMJAY)को और अधिक प्रभावी तथा पारदर्शी बनाने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। योजना के तहत आयुष्मान कार्ड धारकों को बेहतर और समयबद्ध स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना योगी सरकार की प्राथमिकता है। इसी का नतीजा है कि योजना के शुरू होने के बाद अब तक 50 लाख से अधिक मरीजों ने 91 लाख से अधिक बार अस्पतालों में अपना इलाज कराया। इसके लिए योगी सरकार द्वारा 15 हजार करोड़ से अधिक अस्पतालों को भुगतान किया जा चुका है। वहीं 14 मई से 22 मई तक बैंक में तकनीकी समस्या से अस्पतालों का भुगतान रुक गया था, जिसे ठीक करके 23 मई से दोबारा शुरू कर दिया गया है।
23 मई को अस्पतालों को किया गया 100 करोड़ रु. का भुगतान
साचीज की सीईओ अर्चना वर्मा ने बताया कि 14 मई को नेशनल हेल्थ अथॉरिटी (एनएचए) और संबंधित बैंकों के बीच भुगतान फाइलों के आदान-प्रदान के दौरान तकनीकी समस्या उत्पन्न हो गई थी। इसके चलते लगभग 633 करोड़ रुपये की राशि होल्ड पर चली गई थी। भुगतान प्रक्रिया बाधित होने के कारण योजना से जुड़े अस्पतालों को क्लेम राशि मिलने में देरी हो रही थी, जबकि अधिकांश दावों को राज्य स्वास्थ्य एजेंसी द्वारा पहले ही स्वीकृति प्रदान की जा चुकी थी। तकनीकी बाधा के चलते अस्पतालों को समय से भुगतान नहीं मिल पा रहा था, जिससे निजी और सरकारी सूचीबद्ध अस्पतालों में चिंता की स्थिति बनी हुई थी। हालांकि प्रदेश सरकार ने इसे गंभीरता से लेते हुए तत्काल समाधान की दिशा में कार्रवाई शुरू की। चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने एनएचए और संबंधित बैंकों के साथ कई दौर की बैठकें कर समस्या के समाधान के लिए लगातार समन्वय बनाए रखा। उन्होंने बताया कि 22 मई को बैंक स्तर पर आई तकनीकी समस्या का सफलतापूर्वक समाधान कर लिया गया। इसके बाद 23 मई को अस्पतालों को 100 करोड़ रुपये का भुगतान जारी कर दिया गया है। वहीं, अधिकारियों के अनुसार अगले एक से दो दिनों के भीतर शेष लगभग 500 करोड़ रुपये का भुगतान भी संबंधित अस्पतालों को कर दिया जाएगा।
लगातार नए अस्पतालों को योजना से जोड़ा जा रहा
साचीज की सीईओ ने बताया कि तकनीकी समस्या पूरी तरह दूर होने के बाद भुगतान प्रक्रिया सामान्य रूप से शुरू कर दी गई है। अब सूचीबद्ध अस्पतालों को चरणबद्ध तरीके से भुगतान भेजा जा रहा है ताकि मरीजों के इलाज और स्वास्थ्य सेवाओं पर किसी प्रकार का असर न पड़े। उन्होंने बताया कि योगी सरकार लगातार नए अस्पतालों को योजना से जोड़ रही है ताकि ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों को भी बेहतर इलाज की सुविधा मिल सके। इसके अलावा गोल्डन कार्ड वितरण अभियान, ई-केवाईसी, हेल्प डेस्क और डिजिटल मॉनिटरिंग जैसी व्यवस्थाओं को भी मजबूत किया गया है। अपर मुख्य सचिव, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग अमित घोष ने भी योजना की प्रगति की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि अस्पतालों के भुगतान में किसी प्रकार की अनावश्यक देरी न हो। साथ ही तकनीकी प्रणाली को और अधिक मजबूत बनाया जाए ताकि भविष्य में इस प्रकार की समस्याओं की पुनरावृत्ति न हो।
मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान अंतिम व्यक्ति के चेहरे पर मुस्कान और आंखों में बेहतर भविष्य की उम्मीद जगा रहा है
रायपुर
छत्तीसगढ़ का सुकमा जिला, जो कभी अपनी भौगोलिक दुर्गमता के लिए जाना जाता था, आज स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक नई इबारत लिख रहा है। “मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान” के तहत वनांचल के उन हिस्सों तक डॉक्टर और दवाइयां पहुँच रही हैं, जहाँ पहुँचना कभी नामुमकिन सा लगता था। यह अभियान केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि बस्तर की पहाड़ियों में बसने वाले आदिवासियों के लिए जीवन का नया उजाला बनकर उभरा है। मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान आज सुकमा के अंतिम व्यक्ति के चेहरे पर मुस्कान और आंखों में बेहतर भविष्य की उम्मीद जगा रहा है।
दहलीज पर डॉक्टर- घर-घर जांच और उपचार
इस अभियान की सबसे बड़ी विशेषता इसकी पहुँच है। स्वास्थ्य कर्मी अब केवल अस्पतालों में मरीजों का इंतज़ार नहीं करते, बल्कि खुद पैदल चलकर दुर्गम गांवों तक पहुँच रहे हैं। मलेरिया, टीबी और कुष्ठ जैसी बीमारियों की मौके पर जांच कर रहे हैं। जीवनशैली बीमारियां, बीपी, शुगर, सिकलसेल और कैंसर जैसे गंभीर रोगों की पहचान कर उपचार के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।
संकल्प की शक्ति- 310 किलोमीटर का जीवन सफर
हाल ही में पुटेपढ़ गांव से एक मरीज को जिला अस्पताल तक पहुँचाने की घटना स्वास्थ्य विभाग के समर्पण का जीवंत उदाहरण है। कलेक्टर सुकमा के मार्गदर्शन में पोटकपल्ली की टीम ने मरीज को किस्टाराम से होते हुए सुकमा जिला अस्पताल पहुँचाया। 310 किलोमीटर की यह चुनौतीपूर्ण यात्रा केवल एक रेफरल नहीं था, बल्कि प्रभावी काउंसलिंग, समय पर निर्णय और मजबूत फॉलो-अप का परिणाम था, जिसने एक अनमोल जीवन बचा लिया।
आयुष्मान भारत- आर्थिक बेड़ियों से आजादी
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के अनुसार आयुष्मान भारत योजना गरीब परिवारों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। 5 लाख रूपए तक का मुफ्त इलाज अब ग्रामीणों को इलाज के लिए जमीन बेचने या कर्ज लेने की जरूरत नहीं पड़ती। हाल ही में किस्टाराम और मरईगुड़ा के 14 मरीजों के आयुष्मान कार्ड मौके पर ही बनाकर दिए गए, ताकि इलाज में एक क्षण की भी देरी न हो।
आयुर्वेद और आधुनिकता का संगम
छत्तीसगढ़ का 44 प्रतिशत वनाच्छादित क्षेत्र औषधीय गुणों का खजाना है। मुख्यमंत्री ने श्री साय ने पद्मश्री हेमचंद मांझी के योगदान को रेखांकित करते हुए बताया कि कैसे पारंपरिक आयुर्वेद से कैंसर जैसी बीमारियों का उपचार संभव हो रहा है। राज्य सरकार अब आधुनिक चिकित्सा के साथ-साथ इन प्राकृतिक संसाधनों को भी बढ़ावा दे रही है।
जमीनी स्तर पर व्यापक प्रभाव
अभियान के अंतर्गत केवल गंभीर रोगों का ही नहीं, बल्कि सामान्य विकारों का भी पूरा ध्यान रखा जा रहा है कोंटा क्षेत्र के 11 मरीजों को निःशुल्क चश्मा वितरण और मोतियाबिंद का परामर्श, अस्थमा और पैरों में सूजन जैसी समस्याओं के लिए विशेष जांच शिविर आयोजित कर उपचार किया गया।
पोटकपल्ली और मरईगुड़ा जैसे अंदरूनी इलाकों से आती सफलता की ये कहानियाँ इस बात का प्रमाण हैं कि जब प्रशासन और स्वास्थ्य कर्मी सेवा भाव से जुटते हैं, तो भूगोल की बाधाएं छोटी पड़ जाती हैं।
]]>नेशनल हेल्थ ऑथॉरिटी ने पुणे में आयोजित दो दिवसीय शिविर में किया सम्मानित
प्रदेश को आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना और आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम) के उत्कृष्ट संचालन को मिला पुरस्कार
प्रदेश में डिजिटलीकरण और व्यापक नेटवर्क से मरीजों को मिल रही बेहतर सुविधा
लखनऊ
योगी सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। योगी सरकार ने आयुष्मान भारत योजना का लाभ शत-प्रतिशत लाभार्थियों को देने एवं धरातल पर उतारने में पूरे देश में अग्रणी स्थान प्राप्त किया है। इसके लिए नेशनल हेल्थ ऑथॉरिटी (एनएचए) द्वारा पुणे में 17 और 18 अप्रैल को आयोजित दो दिवसीय चिंतन शिविर में प्रदेश को आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना और आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम) के उत्कृष्ट संचालन के लिए सम्मानित किया गया। यह जानकारी स्वास्थ्य विभाग की सचिव रितु माहेश्वरी और साचीज की सीईओ अर्चना वर्मा ने दी। उन्होंने बताया कि यह उपलब्धि प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और डिजिटलीकरण की दिशा में किये जा रहे प्रयासों का नतीजा है।
आयुष्मान से जुड़े अस्पतालों में मिल रही आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन की सुविधा
साचीज की सीईओ अर्चना वर्मा ने बताया कि प्रदेश में वर्तमान समय में कुल 6,433 अस्पताल आयुष्मान भारत योजना के तहत सूचीबद्ध हैं, जिनमें 3,521 निजी और 2,912 सरकारी अस्पताल शामिल हैं। यह आंकड़ा इस बात का प्रमाण है कि योगी ने स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को व्यापक बनाने के लिए मजबूत नेटवर्क तैयार किया है। स्वास्थ्य विभाग की सचिव रितु माहेश्वरी ने बताया कि इन अस्पतालों में बड़ी संख्या में ऐसे संस्थान शामिल हैं, जहां एबीडीएम-इनेबेल्ड एचएमआईएस(हॉस्पिटल मैनेजमेंट इंफॉर्मेशन सिस्टम) की सुविधा उपलब्ध है, जिससे मरीजों को डिजिटल और पारदर्शी सेवाएं मिल रही हैं। पिछले एक वर्ष में प्रदेश ने उच्च गुणवत्ता वाले अस्पतालों को प्राथमिकता देते हुए सूचीबद्ध करने की नीति अपनाई है।
गंभीर और जटिल बीमारियों के इलाज की सुविधा हुई बेहतर
स्वास्थ्य सचिव ने बताया कि हाल ही में 100 या उससे अधिक बेड वाले 55 बड़े अस्पतालों को योजना से जोड़ा गया है। इन अस्पतालों के शामिल होने से प्रदेश में द्वितीयक और तृतीयक स्तर की स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती मिली है, जिससे गंभीर और जटिल बीमारियों के इलाज की सुविधा और बेहतर हुई है। योगी सरकार ने केवल अस्पतालों की संख्या बढ़ाने पर ही नहीं, बल्कि सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने पर भी विशेष ध्यान दिया है। न्यूरोसर्जरी, नियोनेटल केयर, ऑन्कोलॉजी, रेडियोलॉजी, प्लास्टिक सर्जरी और बर्न मैनेजमेंट जैसी विशेष सेवाओं को प्राथमिकता देकर प्रदेश ने स्वास्थ्य सुविधाओं को नई ऊंचाई दी है। इन सुविधाओं के विस्तार से उन मरीजों को भी राहत मिली है, जिन्हें पहले इलाज के लिए बड़े शहरों या अन्य प्रदेश का रुख करना पड़ता था। इसका सबसे बड़ा लाभ ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को मिल रहा है। पहले जहां इन क्षेत्रों में उन्नत चिकित्सा सुविधाएं सीमित थीं, वहीं अब आयुष्मान भारत योजना के तहत बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं आसानी से उपलब्ध हो रही हैं। इससे न केवल स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ी है, बल्कि गरीब और कमजोर वर्गों के लिए इलाज का आर्थिक बोझ भी कम हुआ है।
जिले में पदस्थ महिला शक्ति के सहयोग से हासिल हुई उपलब्धि
छत्तीसगढ़ के सुदूर वनांचलों और चुनौतीपूर्ण भौगोलिक परिस्थितियों के बीच बसे बस्तर जिले ने जन-कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। राज्य पोर्टल द्वारा 11 मार्च 2026 तक जारी किए गए ताजा आंकड़ों के अनुसार बस्तर जिला आयुष्मान भारत और वय वंदन कार्ड वितरण के मामले में प्रदेश के शीर्ष प्रदर्शन करने वाले जिलों की अग्रिम पंक्ति में खड़ा हो गया है। कठिन रास्तों और भाषाई विविधताओं के बावजूद जिला प्रशासन की सक्रियता का ही परिणाम है कि आज बस्तर स्वास्थ्य सुरक्षा के मामले में कई विकसित और शहरी जिलों को पीछे छोड़ते हुए सफलता की नई इबारत लिख रहा है यह प्रगति मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में शासन की बस्तर में सुविधाओं के प्रति प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करता है।
जिले में पदस्थ महिला शक्ति के सहयोग से हासिल हुई उपलब्धि
बस्तर की इस अभूतपूर्व सफलता की पटकथा लिखने में जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों-कर्मचारियों की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। उल्लेखनीय है कि जिले में सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी-कर्मचारी के अधिकांश पदों पर महिलाओं की नियुक्ति है, जिन्होंने अपनी संवेदनशीलता और कर्तव्यनिष्ठा से इस अभियान को जन-आंदोलन बना दिया है। इन महिला स्वास्थ्य अधिकारियों – कर्मचारियों ने हाट-बाजारों से लेकर सुदूर दुर्गम गाँवों तक पहुँचने की रणनीति अपनाई, जिससे भाषाई और भौगोलिक बाधाएं भी विकास की राह नहीं रोक सकीं।
जिले में पदस्थ महिला शक्ति के सहयोग से हासिल हुई उपलब्धि
आयुष्मान भारत योजना के तहत शत-प्रतिशत कवरेज की दिशा में बढ़ते हुए बस्तर ने अब तक 98.2 प्रतिशत आबादी को सुरक्षा कवच प्रदान कर दिया है। जिले के कुल निर्धारित 7,87,364 सदस्यों के लक्ष्य के मुकाबले 7,73,468 कार्ड बनाए जा चुके हैं, जो न केवल जिले की प्रशासनिक सजगता को दर्शाता है बल्कि राज्य के औसत 90.8 प्रतिशत से भी कहीं अधिक है। विशेष रूप से पारीवारिक कवरेज के मामले में तो बस्तर ने अपने लक्ष्य को पार करते हुए 116.4 प्रतिशत की उपलब्धि हासिल की है, जो इस बात का प्रमाण है कि जिले का हर परिवार अब बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के दायरे में आ चुका है।
वरिष्ठ नागरिकों के सम्मान और उनकी सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी वय वंदन कार्ड योजना में भी बस्तर का प्रदर्शन स्वर्णिम रहा है। जिले ने न केवल अपने लिए निर्धारित 13,640 कार्डों के संशोधित लक्ष्य को प्राप्त किया, बल्कि 103.8 प्रतिशत की शानदार प्रगति के साथ अब तक 14,156 कार्ड जारी किए हैं। वर्तमान में बस्तर इस श्रेणी में समूचे छत्तीसगढ़ में तीसरे स्थान पर काबिज है। पिछले सात दिनों के भीतर जिले में लगभग 300 से ज्यादा नए कार्ड जारी किए गए हैं, जो यह स्पष्ट करता है कि अंतिम व्यक्ति तक लाभ पहुँचाने का यह अभियान अभी भी पूरी ऊर्जा के साथ जारी है।
केन्द्र और राज्य सरकार द्वारा आयुष्मान भारत योजना के तहत वरिष्ठ नागरिकों के लिए एक विशेष सुविधा शुरू की गई है। “आयुष्मान वय वंदना कार्ड“ के माध्यम से 70 वर्ष और उससे अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों को व्यक्तिगत रूप से 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज उपलब्ध कराया जाएगा। यह सुविधा उनके पारिवारिक आयुष्मान कार्ड से अलग होगी, जिससे वे स्वतंत्र रूप से स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठा सकेंगे। जिले में 62,137 पात्र हितग्राहियों का वय वंदना कार्ड बनाया जाना है, जिनमें से अब तक 7,834 हितग्राहियों (12.6 प्रतिशत) का कार्ड बन चुका है।
इस योजना के तहत बीपीएल परिवारों को आयुष्मान योजना के तहत 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज मिलता है। इसी प्रकार से एपीएल परिवारों को 50 हजार रुपये तक का इलाज मुफ्त उपलब्ध होता है। यदि परिवार में 70 वर्ष या उससे अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिक हैं, तो वे अपना वय वंदना कार्ड बनवाकर अतिरिक्त 5 लाख रुपये तक की अलग से स्वास्थ्य सुविधाएं प्राप्त कर सकते हैं। आयुष्मान वय वंदना कार्ड“ बनाने के लिए केवल आधार कार्ड की आवश्यकता होगी। यह कार्ड सरकारी स्पतालों और च्वाईस सेंटरों में मुफ्त में बनाया जाएगा। यदि पहले से आयुष्मान कार्ड बना हुआ है, तो ई-केवाईसी अनिवार्य होगी। वय वंदना कार्ड को मोबाइल ऐप या पोर्टल
https://beneficiary.nha.gov.in/
के माध्यम से आधार लिंक मोबाइल ओटीपी, बायोमेट्रिक फिंगरप्रिंट, या फेस ऑथेंटिकेशन द्वारा बनाया जा सकता है।
जिले में शत प्रतिशत हितग्राहियों को लाभ दिलाने कलेक्टर श्री विनय कुमार लंगेह के निर्देशानुसार बचे हुए हितग्राहियों के लिए विशेष महाअभियान चलाया जाएगा। इस अभियान के तहत ग्राम सचिव, रोजगार सहायक, मितानिन, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, बैंक सखियां, और अन्य विकासखंड स्तरीय कर्मचारी शिविर लगाकर कार्ड बनाने में सहायता करेंगे। स्वास्थ्य विभाग द्वारा 70 वर्ष और उससे अधिक आयु के सभी नागरिकों से अपील की गई है कि वे अपने आधार कार्ड के साथ नजदीकी सरकारी अस्पताल या च्वाईस सेंटर पर जाकर जल्द से जल्द वय वंदना कार्ड बनवा लें। इस कार्ड के माध्यम से उन्हें भविष्य में किसी भी स्वास्थ्य समस्या के दौरान आर्थिक कठिनाई का सामना नहीं करना पड़ेगा।
मध्य प्रदेश के शिवपुरी में कलेक्टर रविंद्र कुमार चौधरी ने सौ कर्मचारियों और अधिकारियों पर कार्रवाई की है. दरअसल प्रधानमंत्री के प्रोजेक्ट के तहत बनने वाले आयुष्मान कार्ड और अन्य योजनाओं को लेकर इन कर्मचारियों और अधिकारियों द्वारा लापरवाही बरती जा रही थी.
केंद्र सरकार की योजना के तहत 70 वर्ष से अधिक आयु के लोगों के लिए आयुष्मान कार्ड बनने का अभियान चलाया जा रहा है. इस अभियान को शिवपुरी जिले में कर्मचारियों और अधिकारियों द्वारा लापरवाही बरतते हुए पलीता लगाया जा रहा था. जब कलेक्टर रविंद्र कुमार चौधरी ने बैठक ली तो समीक्षा बैठक में लापरवाही सामने आई.
इसके बाद उन्होंने 100 कर्मचारियों को सस्पेंड करने के निर्देश दे दिए. इन कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा गया है. यह स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं पाए जाने पर और भी कार्रवाई हो सकती है. जिन कर्मचारियों पर कार्रवाई की गई है, उन पर आरोप है कि उन्होंने सरकारी योजना का लाभ गरीबों तक पहुंचाने काफी देर की है. इस कार्रवाई से पूरे शिवपुरी जिले में हड़कंप मच गया है.
इन नौ कर्मचारियों को किया गया निलंबित
शिवपुरी जिले के जिन नौ कर्मचारियों को लापरवाही बरतने के मामले में सस्पेंड किया गया है, उनमें चार सुपरवाइजर, चार एमपीडब्ल्यू और विकासखंड के अन्य कर्मचारी शामिल हैं. उनके नाम ओम प्रकाश जाटव, संजय गुप्ता, प्रकाश चंद्र राजपूत, मुकेश शर्मा, खेमराज, वीरेन्द्र गुप्ता, वीके शर्मा, सुखदेव पांडे है. इसके अलावा 91 कर्मचारियों से स्पष्टीकरण मांगा गया है.
]]>बुजुर्गों के लिए जुड़ेंगी नई सुविधाएं
आयुष्मान भारत योजना के सीईओ डॉ. योगेश भरसात ने कहा कि योजना के तहत रोजाना औसतन 6.5 करोड़ रुपए के चार हजार से अधिक मुफ्त उपचार किए जा रहे हैं। हर बुजुर्ग को जरूरी इलाज मिले, इसके लिए उनके आयुष्मान कार्ड बनाए जा रहे हैं। आयुष्मान योजना के तहत बुजुर्गों के लिए नई योजनाएं जोड़ी जाएंगी। इसको लेकर प्रस्ताव तैयार किए जा रहे हैं, जिसमें हर प्रदेश से सुझाव मांगे गए हैं।
आयुष विभाग के नोडल मीडिया अधिकारी डॉ राजीव मिश्रा ने बताया कि शिविरों में संबंधित क्षेत्र के आयुष चिकित्सालय एवं महाविद्यालय के चिकित्सा विशेषज्ञों द्वारा परिक्षेत्र के जनसामान्य को वृद्धावस्था जन्य विकारों में आयुष उपचार के लिए चिकित्सीय सेवाएं प्रदान की गई। इन शिविरों में दृष्टि, जोड़ों, श्रवण, छाती, रक्तचाप और रक्त शर्करा, हीमोग्लोबिन सहित अन्य जांचों से संबंधित सरल नैदानिक परीक्षा के आधार पर बुजुर्ग व्यक्तियों का स्वास्थ्य मूल्यांकन किया गया। साथ ही शिविर में रक्त शर्करा, हीमोग्लोबिन के लिए प्रयोगशाला परीक्षण सुविधा भी उपलब्ध कराई गई तथा आवश्यक आयुष औषधियों की निःशुल्क उपलब्धता भी सुनिश्चित कराई गई। बढ़ती उम्र में स्वस्थ रहने की अवधारणा, शारीरिक व्यायाम के महत्व, स्वस्थ आदतों और योग तथा रसायन के माध्यम से मानसिक तनाव को कम करने के लिए परामर्श एवं स्वास्थ्य जागरूकता प्रदान की गई।
डॉ. मिश्रा ने बताया कि इन शिविरों में आवश्यक सहयोग के लिए आयुष विभाग के आयुष्मान आरोग्य मंदिर के चिकित्सा अधिकारियों, फार्मासिस्ट, योग प्रशिक्षकों, बहुउद्देशीय कार्यकर्ताओं, आयुष महाविद्यालयों के छात्र/छात्राओं एवं स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को आयोजन को सफल बनाने में अपना योगदान दिया। बढ़ती उम्र में स्वस्थ रहने के लिए नियमित शारीरिक व्यायाम, संतुलित आहार और तनाव प्रबंधन हेतु प्रोत्साहक स्वास्थ्य देखभाल सेवाएं, जैसा कि आयुष प्रणालियों में विशेष रूप से दिनचर्या (दैनिक दिनचर्या), ऋतुचर्या (मौसमी देखभाल व्यवस्था), सहृत्त (अच्छा आचरण), योग, और अधारणीय वेग (गैर-दमनीय प्राकृतिक आग्रह) के बारे में जानकारी भी प्रदान गई। शिविरों में प्रारंभिक चिकित्सीय जांच उपरांत आगे की जांच और उपचार जैसे पंचकर्म/थोक्कानम थेरेपी/ इलाज-बिद तदबीर और क्षारसूत्र द्वारा पुरानी और अक्षम करने वाली बीमारियों के प्रबंधन के लिए आयुष औषधालयों/आयुष्मान आरोग्य मंदिर (आयुष)/आयुष अस्पतालों/आयुष शिक्षण अस्पतालों में रेफरल संबंधी जानकारी से शिविर में आए व्यक्तियों को जागरूक किया गया। सभी रोगियों की देखभाल की निरंतरता को आवश्यकतानुसार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र या जिला अस्पताल सहित उच्चतर केंद्रों पर रेफर करके तथा प्रथम स्तर की स्वास्थ्य सुविधा के लिए रिवर्स रेफरल के माध्यम से सुनिश्चित करने हेतु आवश्यक दिशा निर्देश प्रदान किए गए।
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कैशलेस इलाज चाहते हैं कर्मचारी संगठन
कर्मचारी संगठनों के अनुसार, वे कैशलेस उपचार की सुविधा चाहते हैं। ऐसे में सरकार कर्मचारी संगठनों के सुझावों पर अमल कर जल्द ही इस योजना को लागू कर सकती है। आयुष्मान भारत योजना की तर्ज पर मुख्यमंत्री आयुष्मान स्वास्थ्य बीमा योजना लाई जा रही है। इस योजना में कर्मचारियों के वेतन से अंशदान काटा जाएगा और शेष राशि सरकार जमा कराएगी।
10 लाख रुपए तक फ्री इलाज
योजना में प्रदेश के अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ सेवानिवृत्त कर्मचारियों के परिवारों को सामान्य इलाज के लिए पांच लाख रुपये और गंभीर मामलों में इलाज के लिए 10 लाख रुपये तक की फ्री चिकित्सा और ओपीडी सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।
सैलरी से कटेगी इतनी राशि
इस योजना के तहत कर्मचारियों के वेतन एवं पेंशन से 250 से 1000 रुपये तक मासिक अंशदान लिया जाएगा। शेष राशि सरकार मिलाएगी। उल्लेखनीय है कि सरकार ने फरवरी 2020 में प्रदेश के कर्मचारियों के लिए फ्री इलाज की घोषणा की थी। इसका आदेश भी जारी हुआ था, लेकिन योजना शुरू नहीं की जा सकी है। उत्तराखंड सरकार इस तरह की योजना वर्तमान में संचालित कर रही है। 2019 में कमलनाथ सरकार ने कर्मचारियों का स्वास्थ्य बीमा कराने व कैशलेस इलाज की सुविधा उपलब्ध कराने योजना का प्रस्ताव बनाया था, इनमें बीमा राशि का कुछ हिस्सा कर्मचारियों से लेकर पांच से दस लाख रुपये तक कैशलेस उपचार कराया जाना था, लेकिन 15 माह बाद ही सरकार बदल गई और शिवराज सरकार ने इस प्रस्ताव पर नए सिरे से काम किया। तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रदेश के संविदा कर्मियों आंगनबाड़ी कार्यकर्ता समेत कई तरह के शासकीय कर्मचारियों को योजना का लाभ देने की बात कही थी, लेकिन अब तक आयुष्मान जैसी सुविधा कर्मचारियों को उपलब्ध नहीं कराई जा सकी है।
इन कर्मचारियों को मिलेगा लाभ
नियमित, विनियमित, संविदा, शिक्षक संवर्ग, सेवानिवृत्त कर्मचारी, नगर सैनिक, कार्यभारित, राज्य की स्वशासी संस्थाओं में कार्यरत कर्मचारी, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका, मिनी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, पंचायत सचिव, ग्राम रोजगार सहायक, आशा एवं ऊषा कार्यकर्ता, आशा सुपरवाइजर और कोटवार स्वास्थ्य सुविधा का लाभ ले पाएंगे। इन कर्मचारियों को संख्या 15 लाख से अधिक है।