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कब है बगलामुखी जयंती?
साल 2026 में बगलामुखी जयंती 24 अप्रैल, शुक्रवार को मनाई जाएगी. अष्टमी तिथि 24 अप्रैल 2026 सुबह 07:18 बजे से शुरू होगी. तिथि का समापन 25 अप्रैल 2026 सुबह 05:51 बजे तक होगा. पूजा के लिए शुक्रवार का पूरा दिन बहुत शुभ रहने वाला है.
माँ बगलामुखी की महिमा
माँ बगलामुखी को स्तंभन की देवी माना जाता है. कहते हैं कि इनकी कृपा से इंसान की वाणी और शत्रुओं की बुद्धि पर नियंत्रण पाया जा सकता है. कोर्ट-कचहरी के मामलों या वाद-विवाद में सफलता पाने के लिए माँ बगलामुखी की साधना अचूक मानी जाती है.
पूजा की आसान विधि
माँ की पूजा में पीले रंग का विशेष महत्व है, इसलिए इसे पीताम्बरा उपासना भी कहते हैं. सुबह जल्दी उठकर स्नान करें, पीले रंग के कपड़े पहनें. पूजा के लिए पीले रंग के आसन का इस्तेमाल करें. माँ की मूर्ति या तस्वीर को गंगाजल से साफ करें. उन्हें पीले फूल, पीला चंदन, पीला फल और पीला भोग (जैसे बेसन के लड्डू) चढ़ाएं. पूजा के दौरान शुद्ध घी या सरसों के तेल का दीपक जलाएं. संभव हो तो इस दिन व्रत रखें और माँ के मंत्रों का जाप करें.
शक्तिशाली मंत्र
पूजा के समय इस मंत्र का जाप करना बहुत फलदायी माना जाता है. "ॐ ह्रीं बगलामुखी सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तंभय जिह्वान्कीलय बुद्धिं विनाशय ह्रीं ओम् स्वाहा।" मंत्र का जाप हल्दी की माला से करना सबसे उत्तम माना जाता है.
कहाँ है प्रमुख मंदिर?
माँ बगलामुखी के सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में मध्य प्रदेश के दतिया में स्थित पीताम्बरा पीठ और हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा में स्थित बगलामुखी मंदिर शामिल हैं. जयंती के दिन इन मंदिरों में विशेष अनुष्ठान और हवन किए जाते हैं, जिनमें शामिल होने के लिए दूर-दूर से भक्त आते हैं.
कब है बगलामुखी जयंती?
साल 2026 में बगलामुखी जयंती 24 अप्रैल, शुक्रवार को मनाई जाएगी. अष्टमी तिथि 24 अप्रैल 2026 सुबह 07:18 बजे से शुरू होगी. तिथि का समापन 25 अप्रैल 2026 सुबह 05:51 बजे तक होगा. पूजा के लिए शुक्रवार का पूरा दिन बहुत शुभ रहने वाला है.
माँ बगलामुखी की महिमा
माँ बगलामुखी को स्तंभन की देवी माना जाता है. कहते हैं कि इनकी कृपा से इंसान की वाणी और शत्रुओं की बुद्धि पर नियंत्रण पाया जा सकता है. कोर्ट-कचहरी के मामलों या वाद-विवाद में सफलता पाने के लिए माँ बगलामुखी की साधना अचूक मानी जाती है.
पूजा की आसान विधि
माँ की पूजा में पीले रंग का विशेष महत्व है, इसलिए इसे पीताम्बरा उपासना भी कहते हैं. सुबह जल्दी उठकर स्नान करें, पीले रंग के कपड़े पहनें. पूजा के लिए पीले रंग के आसन का इस्तेमाल करें. माँ की मूर्ति या तस्वीर को गंगाजल से साफ करें. उन्हें पीले फूल, पीला चंदन, पीला फल और पीला भोग (जैसे बेसन के लड्डू) चढ़ाएं. पूजा के दौरान शुद्ध घी या सरसों के तेल का दीपक जलाएं. संभव हो तो इस दिन व्रत रखें और माँ के मंत्रों का जाप करें.
शक्तिशाली मंत्र
पूजा के समय इस मंत्र का जाप करना बहुत फलदायी माना जाता है. "ॐ ह्रीं बगलामुखी सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तंभय जिह्वान्कीलय बुद्धिं विनाशय ह्रीं ओम् स्वाहा।" मंत्र का जाप हल्दी की माला से करना सबसे उत्तम माना जाता है.
कहाँ है प्रमुख मंदिर?
माँ बगलामुखी के सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में मध्य प्रदेश के दतिया में स्थित पीताम्बरा पीठ और हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा में स्थित बगलामुखी मंदिर शामिल हैं. जयंती के दिन इन मंदिरों में विशेष अनुष्ठान और हवन किए जाते हैं, जिनमें शामिल होने के लिए दूर-दूर से भक्त आते हैं.