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बांग्लादेश में आम चुनाव से ठीक 72 घंटे पहले राजनीति एक बार फिर सड़क पर उतर आई. शनिवार देर रात बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) और जमात-ए-इस्लामी के कार्यकर्ताओं के बीच हुई हिंसक झड़प में महिलाओं समेत 40 से ज्यादा लोग घायल हो गए. यह घटना ऐसे वक्त पर हुई है, जब 12 फरवरी को होने वाले मतदान से पहले चुनाव प्रचार सोमवार सुबह 7:30 बजे खत्म होने वाला है. प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, एक देर रात के कार्यक्रम में जमात पर पैसे बांटने का आरोप लगाते हुए BNP कार्यकर्ता विरोध दर्ज कराने पहुंचे. इसके बाद दोनों पक्षों ने समर्थक जुटाए और बात हाथापाई से लेकर पत्थरबाजी तक पहुंच गई. रातभर चले टकराव को मौजूदा चुनाव अभियान की सबसे गंभीर हिंसा बताया जा रहा है.
बांग्लादेश का चुनावी माहौल तनावपूर्ण
पिछले छह हफ्तों में अलग-अलग इलाकों में चुनावी हिंसा में कई लोग घायल हो चुके हैं. अगस्त 2024 में शेख हसीना के तख्तापलट के बाद यह पहला बड़ा चुनाव है. शेख हसीना की पार्टी को चुनाव से बाहर कर दिया गया है. इसी वजह से इसे 2009 के बाद का सबसे निर्णायक चुनाव माना जा रहा है.
चुनाव में किसके-किसके बीच है टक्कर?
12 फरवरी को होने वाले चुनाव में 12.7 करोड़ से अधिक मतदाता वोट डालने के पात्र हैं. मुकाबला मुख्य रूप से BNP और जमात-नेतृत्व वाले गठबंधन के बीच माना जा रहा है. BNP प्रमुख तारिक रहमान ने दावा किया है कि उनकी पार्टी 300 में से 292 सीटों पर चुनाव लड़कर सरकार बनाने लायक बहुमत हासिल करेगी. अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस ने चुनाव को ‘न्यू बांग्लादेश का उत्सव’ बताते हुए इसे स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण कराने का वादा किया है. हालांकि विश्लेषकों का कहना है कि लगातार हिंसा से प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर असर पड़ सकता है, खासतौर पर तब, जब सत्ता समीकरण उलट चुके हैं और सड़क पर दबदबा शेख हसीना के विपक्षी दलों का दिख रहा है.
बवाल का अर्थव्यवस्था पर असर
चुनाव का नतीजा देश की अर्थव्यवस्था के लिए अहम है. हालिया अशांति से गारमेंट जैसे प्रमुख उद्योग प्रभावित हुए हैं और बांग्लादेश को अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों से मदद की जरूरत पड़ी है. विदेश नीति के मोर्चे पर भी दिशा बदलने के संकेत हैं. विश्लेषकों के मुताबिक, BNP को भारत के प्रति अपेक्षाकृत संतुलित माना जाता है, जबकि जमात की भूमिका पाकिस्तान की ओर झुकाव की अटकलें बढ़ाती है.
]]>बांग्लादेश पिछले साल 11 दिसंबर को चुनाव का ऐलान होने के बाद से ही हिंसा का एक नया चरण शुरू हो गया है. उस्मान हादी नाम के एक युवा नेता के ऊपर हमले और 18 दिसंबर को उसकी मौत के बाद से यह और भी बढ़ गया. यह 2024 में शेख हसीना को सत्ता से बेदखल करने के बाद नए प्रकार का वायलेंस है, जिसमें अल्पसंख्यक खासकर हिंदुओं को निशाना बनाया जा रहा है. बांग्लादेश मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार पिछले 45 दिनों में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा की 15 घटनाएं हो चुकी हैं. शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद से यह देश में पहला चुनाव है, जो 12 फरवरी को होगा. इसे लेकर कट्टरपंथी बयान भी सामने आ रहे हैं. सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में बांग्लादेश के कुछ मौलवी और सार्वजनिक वक्ता हिंदुओं के खिलाफ भड़काऊ बयान देते हुए दिखाई दे रहे हैं.
देश के आम चुनावों से पहले मतदाताओं से हिंदू या गैर-मुस्लिम उम्मीदवारों का समर्थन न करने की अपील कर रहे हैं. ऐसे ही एक वीडियो में, कोई मौलवी, किसी टॉक शो के दौरान किसी सवाल का जवाब दे रहा है, जिसमें उससे पूछा जाता है कि क्या हिंदू को वोट दिया जा सकता है. इस पर मौलवी कहता है कि हिंदू को वोट देना जायज नहीं है. किसी भी काफिर को वोट देना इस्लाम में हराम है. ऐसा करना कुफ्र को बढ़ावा देना है.
एक और क्लिप वायरल हो रही है, जिसमें, मौलवियों को हिंदू धार्मिक स्थलों और संस्थानों के खिलाफ खुली धमकियां देते हुए सुना जा सकता है. वह मंच पर खड़े होकर कहता है, “बांग्लादेश में मंदिरों का नष्ट होना तय है, उनकी मूर्तियों का नष्ट होना तय है. कोई भी हिंदू बांग्लादेश में नहीं रह सकता, कोई भी इस्कॉन (ISKCON) नहीं रह सकता. दिल्ली के दलालों को दिल्ली वापस चले जाना चाहिए.” बांग्लादेश में इस्कॉन की बांग्लादेश में अच्छी खासी मौजूदगी है. शेख हसीना की सरकार जाने के बाद, इसके मंदिरों पर हमला किया गया था और पुजारियों को भी निशाना बनाया गया था.
प्रभात खबर इस वीडियो की पहचान या प्रसारण की तारीख की पुष्टि नहीं कर सका कि ये कब के हैं. क्या यह चुनाव के समय के हैं, या पहले के. हालांकि ये वायरल अभी ही हो रहे हैं. ये वीडियो ऐसे समय सामने आए हैं जब हाल के हफ्तों में बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों को निशाना बनाकर की गई हिंसक घटनाओं की एक श्रृंखला सामने आई है, जिस पर नई दिल्ली और मानवाधिकार संगठनों की ओर से तीखी प्रतिक्रियाएं आई हैं.
बांग्लादेश में पिछले लगभग 1 महीनें 5 हिंदुओं की मौत
बांग्लादेश में चुनावों की घोषणा के बाद से बीते कुछ हफ्तों में कम से कम पांच हिंदू पुरुषों की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई हत्या हुई है. हालिया घटनाओं में, उत्तर-पश्चिमी बांग्लादेश के नाओगांव जिले में 25 वर्षीय हिंदू युवक मिथुन सरकार की मौत हो गई, जब वह चोरी का आरोप लगाने वाली भीड़ से बचने के लिए एक नहर में कूद गया. 5 जनवरी को पलाश उपजिला में हत्या किए गए 40 वर्षीय किराना दुकानदार मणि चक्रवर्ती. उसी दिन जेसोर में गोली मारकर हत्या किए गए 38 वर्षीय आइस फैक्ट्री मालिक और दैनिक बीडी खबर के कार्यवाहक संपादक राणा प्रताप बैरागी.
अमृत मंडल नाम के एक युवक की हत्या कर दी गई, जिस पर उगाही करने का आरोप लगाया गया था. 50 वर्षीय खोकन चंद्र दास, जिन्हें 31 दिसंबर को काटकर मार डाला गया और आग लगा दी गई थी, बाद में अस्पताल में उनकी मौत हो गई. वहीं इससे पहले, 18 दिसंबर को दीपू चंद्र दास की बेरहमी से लिंचिंग की गई थी. इन मौतों के अलावा कई घरों को आग भी लगाई गई.
भारत ने सख्ती से निपटने की की मांग की
भारत ने इन हत्याओं के बाद बांग्लादेश से देश में सांप्रदायिक घटनाओं पर सख्ती से कार्रवाई करने का आग्रह किया है. नई दिल्ली में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि हम अल्पसंख्यकों के साथ-साथ उनके घरों और व्यवसायों पर चरमपंथियों द्वारा किए जा रहे बार-बार के हमलों के एक बेहद चिंताजनक पैटर्न को लगातार देख रहे हैं. उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं से तेजी और सख्ती से निपटा जाना चाहिए. जायसवाल ने इस महीने यह भी कहा कि इन मामलों की उपेक्षा केवल अपराधियों को और साहस देती है तथा अल्पसंख्यकों के बीच भय और असुरक्षा की भावना को गहरा करती है. इन घटनाओं ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित किया है.
ब्रिटेन में भी उठी कार्रवाई की मांग
ब्रिटेन सरकार ने बांग्लादेश में हो रही हर प्रकार की हिंसा की कड़ी आलोचना करते हुए वहां शांतिपूर्ण, स्वतंत्र और भरोसेमंद चुनाव कराने की अपील की है. बांग्लादेश में हिंदुओं और अन्य धार्मिक अल्पसंख्यकों की हत्याओं का मुद्दा ब्रिटिश संसद के निचले सदन हाउस ऑफ कॉमन्स में उठाया गया. विपक्षी कंजर्वेटिव पार्टी के सांसद बॉब ब्लैकमैन ने गुरुवार को संसद में बयान देते हुए लेबर पार्टी के नेतृत्व वाली सरकार से आग्रह किया कि वह बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए हस्तक्षेप करे और यह सुनिश्चित करे कि फरवरी में होने वाले चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष हों.
ब्रिटिश हिंदुओं के लिए बने सर्वदलीय संसदीय समूह (APPG) के अध्यक्ष ब्लैकमैन ने सांसदों से कहा कि हिंदुओं की हत्याओं और उनके मंदिरों को जलाए जाने की “डरावनी और भयावह स्थिति” ने उन्हें गहरे तौर पर झकझोर दिया है. उन्होंने कहा कि सड़कों पर खुलेआम हिंदुओं की हत्या की जा रही है, उनके घरों को आग के हवाले किया जा रहा है, मंदिरों को जलाया जा रहा है और अन्य धार्मिक अल्पसंख्यकों के साथ भी इसी तरह का व्यवहार हो रहा है.
जनमत संग्रह पर भी उठाए सवाल
ब्लैकमैन ने यह भी कहा कि अगले महीने तथाकथित स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराए जाने की बात कही जा रही है, जबकि बांग्लादेश की प्रमुख राजनीतिक पार्टी अवामी लीग को इन चुनावों में भाग लेने से प्रतिबंधित कर दिया गया है, जबकि जनमत सर्वेक्षणों के अनुसार उसे लगभग 30 प्रतिशत जनता का समर्थन हासिल है. उन्होंने आगे कहा कि इसी दौरान इस्लामी चरमपंथी समूहों ने एक जनमत संग्रह कराने का आह्वान किया है, जिससे बांग्लादेश के संविधान में स्थायी और व्यापक बदलाव हो सकता है.
ब्रिटेन सरकार का दावा मुद्दा उठाया गया
ब्लैकमैन ने हाउस ऑफ कॉमन्स के नेता एलन कैंपबेल से अनुरोध किया कि वे इस गंभीर विषय को विदेश मंत्री यवेट कूपर के समक्ष उठाएं. वह संसद को यह जानकारी दें कि ब्रिटेन सरकार बांग्लादेश में समावेशी चुनाव प्रक्रिया और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठा रही है. इस पर प्रतिक्रिया देते हुए एलन कैंपबेल ने कहा कि ब्रिटेन मानवाधिकारों के संरक्षण और प्रोत्साहन के लिए लंबे समय से प्रतिबद्ध रहा है. वह बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के साथ इस मुद्दे को लगातार उठाता रहेगा.
कैंपबेल ने ब्लैकमैन को भरोसा दिलाया कि वह उनके संसदीय वक्तव्य की जानकारी विदेश मंत्री तक पहुंचाएंगे. उन्होंने कहा कि विदेश, विकास और राष्ट्रमंडल कार्यालय (FCDO) उचित समय पर इस विषय पर एक आधिकारिक बयान जारी करने पर विचार करेगा. ब्लैकमैन का यह हस्तक्षेप उनकी पार्टी की वरिष्ठ नेता प्रीति पटेल द्वारा एक सप्ताह पहले विदेश मंत्री यवेट कूपर को लिखे गए पत्र के बाद सामने आया है. उस पत्र में पटेल ने बांग्लादेश की स्थिति को ‘बेहद चिंताजनक’ बताते हुए वहां बढ़ती हिंसा के मद्देनजर ब्रिटेन से सक्रिय हस्तक्षेप करने की मांग की थी.
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