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उल्हासनगर में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। उल्हासनगर नगरपालिका के पांच पूर्व पार्षद भाजपा से इस्तीफा देकर उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो गए। शिंदे की मौजूदगी में पार्टी में शामिल हुए नेताओं में जम्नू पुरसवानी, प्रकाश माखीजा, महेश सुखरामानी, किशोर वनवारी और मीना सोनदे शामिल हैं।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, इन नेताओं ने अपने इस्तीफे की वजह राज्य भाजपा अध्यक्ष रविंद्र चव्हाण की कार्यशैली को बताया। उनका कहना था कि मनमाने निर्णयों, पुराने कार्यकर्ताओं की उपेक्षा और राज्य नेतृत्व व स्थानीय संगठन के बीच बढ़ती दूरी ने संगठन में असंतोष को जन्म दिया। पूर्व पार्षदों ने आरोप लगाया कि स्थानीय समस्याओं और संगठन की चिंताओं को बार-बार उठाने के बावजूद कोई समाधान नहीं निकला।
1984 से पार्टी में, पर शिकायतें कभी सुनी नहीं गईं- जम्नू पुरसवानी
जम्नू पुरसवानी पांच बार के पार्षद और क्षेत्र के सबसे प्रभावशाली सिंधी नेताओं में से एक हैं। उन्होंने कहा कि वर्षों से लंबित शिकायतों को अनसुना किए जाने के कारण उन्हें यह कदम उठाना पड़ा। 1984 से भाजपा में सक्रिय पुरसवानी 17 वर्षों तक नगर निगम में भाजपा के समूह नेता रहे और दो बार जिला अध्यक्ष भी बने। उन्होंने कहा कि हमने अपनी चिंताएं बार-बार वरिष्ठ नेताओं तक पहुंचाईं, लेकिन कोई सुधारात्मक कार्रवाई नहीं हुई। ऐसे में हमारे पास पार्टी छोड़ने के अलावा कोई विकल्प नहीं था।
30 करोड़ रुपये की विकास निधि ठप होने का भी लगाया आरोप
पूर्व पार्षदों ने बताया कि 2023 में विधायक को आवंटित 30 करोड़ रुपये की विकास निधि का उपयोग नहीं हो सका। उनका आरोप है कि चव्हाण के निर्णयों की वजह से यह फंड अटका रहा, जिससे कई विकास कार्य ठप पड़ गए और आम नागरिकों व कार्यकर्ताओं में नाराज़गी बढ़ी।
सूत्रों के अनुसार, नेताओं ने अन्य दलों से जुड़ने पर भी विचार किया था, लेकिन व्यापक हिंदुत्व विचारधारा और NDA के ढांचे के भीतर बने रहने के लिए उन्होंने शिंदे की शिवसेना को चुना। उन्होंने यह भी खुलासा किया कि आगामी नगरपालिका चुनावों के लिए वे भाजपा–शिवसेना गठबंधन की मांग कर रहे थे, जिसे स्थानीय स्तर पर काफी समर्थन भी मिल रहा था। लेकिन चव्हाण के गठबंधन से इनकार और पार्टी में नए चेहरों को अधिक महत्व देने की नीति से पुराने कार्यकर्ता खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे थे।
नगरपालिका चुनावों से पहले भाजपा की मुश्किलें बढ़ीं
नगरपालिका चुनावों से पहले इन पांच अनुभवी नेताओं का भाजपा छोड़ना पार्टी के लिए बड़ा नुकसान माना जा रहा है। उल्हासनगर में सिंधी समुदाय की राजनीति में जम्नू पुरसवानी जैसे नेताओं का प्रभाव काफी व्यापक है, ऐसे में इस घटनाक्रम का स्थानीय राजनीतिक समीकरणों पर सीधा असर पड़ना तय माना जा रहा है।
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तेलंगाना माओवादी संगठन को एक और बड़ा झटका लगा है। राज्य की स्टेट कमेटी के दो शीर्ष नेताओं सहित कुल आठ माओवादियों ने वारंगल पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है। पुलिस की ओर से अभी आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है, लेकिन सूत्रों के अनुसार ये सभी माओवादी दो दिन पहले ही गुपचुप तरीके से समर्पण कर चुके हैं। सोमवार को इसकी आधिकारिक घोषणा होने की संभावना है।
आत्मसमर्पण करने वालों में सबसे प्रमुख नाम कोय्यादी संबय्या उर्फ आजाद का है। आजाद बीकेएसआर डिवीजन कमेटी का सचिव रह चुका है और दशकों तक माओवादी संगठन में रणनीतिक भूमिका निभाई है। उसका संगठन में प्रभाव और पकड़ बेहद मजबूत माना जाता था। इसके अलावा, अब्बास नारायण उर्फ रमेश, जो माओवादी तकनीकी टीम का प्रभारी था, ने भी आत्मसमर्पण किया। रमेश लंबे समय से रामागुंडम क्षेत्र में सक्रिय था।
सूत्रों का कहना है कि आजाद और स्टेट कमेटी के शीर्ष नेता दामोदर के बीच लंबे समय से चल रहा मतभेद और अंदरूनी टकराव इस आत्मसमर्पण का बड़ा कारण है। आजाद मुलुगु जिले के मोद्दुलागुडेम गांव का निवासी है। यदि पुलिस की ओर से पुष्टि होती है, तो यह कदम तेलंगाना-छत्तीसगढ़ सीमा क्षेत्र में सक्रिय माओवादी नेटवर्क के लिए गंभीर झटका माना जाएगा और संगठन की कार्यप्रणाली पर इसका व्यापक असर पड़ने की संभावना है।
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