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स्तनपान: स्वास्थ्य लाभ के साथ सामाजिक व आर्थिक सशक्तिकरण का आधार

विश्व स्तनपान सप्ताह में शिशु पोषण व्यवस्था को सुदृढ़ करने पर हुआ मंथन

भोपाल 

स्तनपान में निवेश करना न केवल एक स्वास्थ्य प्राथमिकता है, बल्कि यह एक सामाजिक एवं आर्थिक निवेश भी है, जो दीर्घकालिक रूप से समाज के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होता है। यह एक प्रमाणित तथ्य है कि समुचित स्तनपान से शिशु मृत्यु दर में वांछित कमी लाई जा सकती है। इसी उद्देश्य को केंद्र में रखते हुए विश्व स्तनपान सप्ताह पर एनएचएम कार्यालय, भोपाल में उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता मिशन संचालक एनएचएम डॉ. सलोनी सिडाना ने की। संचालक चिकित्सा शिक्षा डॉ. अरुणा कुमार, संचालक आईईसी डॉ. रचना दुबे, सहित विभिन्न विषय विशेषज्ञ उपस्थित रहे।

मिशन संचालक डॉ. सलोनी सिडाना ने कहा कि शासकीय चिकित्सालयों की भांति निजी चिकित्सालयों को भी मातृ-शिशु हितैषी संस्थान के रूप में विकसित किया जाना चाहिए। बैठक में स्तनपान को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए, इसके विकल्प के प्रचार-प्रसार पर रोक लगाने तथा निजी स्वास्थ्य संस्थानों में जागरूकता अभियान, प्रशिक्षण, निगरानी तंत्र और सहयोगात्मक नीति-संशोधन पर भी विस्तार से चर्चा की गई।

बैठक का प्रमुख उद्देश्य इन्फेंट मिल्क सब्सीट्यूट(आईएमएस) अधिनियम के प्रभावी प्रवर्तन एवं नीति निर्माण में सुधार के साथ-साथ शिशु एवं बाल आहार व्यवहारों को प्रोत्साहित करना था। साथ ही शासकीय तंत्र के सहयोग से निजी क्षेत्र को सशक्त बनाते हुए शिशु पोषण व्यवस्था को सुदृढ़ करने पर भी बल दिया गया। बैठक में गांधी चिकित्सा महाविद्यालय, भोपाल से डॉ. मंजूषा गोयल (विभागाध्यक्ष, शिशु रोग), डॉ. शबाना सुल्तान (विभागाध्यक्ष, स्त्री एवं प्रसूति रोग) तथा डॉ. शिखा मलिक (विभागाध्यक्ष, शिशु रोग) उपस्थित रहीं। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान भोपाल से डॉ. ज्योतीनाथ मोदी (प्राध्यापक, स्त्री एवं प्रसूति रोग) ने सहभागिता की। इसके अतिरिक्त, डॉ. पंकज शुक्ला (भारतीय चिकित्सक संघ), डॉ. महेश महेश्वरी (भारतीय शिशु रोग अकादमी के अध्यक्ष), डॉ. श्वेता आनंद (संयुक्त सचिव, शिशु रोग अकादमी), डॉ. आभा जैन (स्त्री रोग विशेषज्ञ महासंघ की अध्यक्ष), डॉ. रणधीर सिंह (मध्यप्रदेश नर्सिंग होम संघ के अध्यक्ष), डॉ. मनीष शर्मा (मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, भोपाल) तथा डॉ. राकेश श्रीवास्तव (सिविल सर्जन, जयप्रकाश चिकित्सालय, भोपाल) भी उपस्थित रहे। यूनिसेफ, मध्यप्रदेश से सुपुष्पा अवस्थी (पोषण विशेषज्ञ), डॉ. प्रशांत कुमार (स्वास्थ्य विशेषज्ञ), सुझिमली बरुआ एवं सुमोनिका मोर्या (सामाजिक व्यवहार परिवर्तन विशेषज्ञ), तथा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन से डॉ. हिमानी यादव (उपसंचालक, शिशु स्वास्थ्य) एवं राज्य स्तरीय सलाहकारों ने भी सहभागिता की।

 

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माँ का दूध अमृत है, हर नवजात को मिले जीवन की यह पहली सुरक्षा” : मंत्री सुश्री भूरिया https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=174608 Thu, 31 Jul 2025 13:36:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=174608 भोपाल 

विश्व स्तनपान सप्ताह हर साल अगस्त के पहले सप्ताह में मनाया जाता है। एक अगस्त से प्रारंभ हो रहे विश्व स्तनपान सप्ताह के अवसर पर महिला एवं बाल विकास मंत्री सुश्री सुशील निर्मला भूरिया ने प्रदेश की आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं और सभी नागरिकों का आहवान किया है कि बच्चे को जन्म के पहले घंटे में माँ का दूध और छह माह तक केवल माँ का दूध देना अत्यंत आवश्यक है। इस संदेश को घर-घर, गाँव-गाँव पहुँचाएं और माताओं को सही समय पर सही जानकारी देकर उन्हें सशक्त बनाएं।

मंत्री सुश्री भूरिया ने कहा कि माँ का दूध नवजात के लिए अमृत है। उन्होंने कहा कि स्तनपान नवजात शिशु के जीवन की सुरक्षा, पोषण और स्वास्थ्य की पहली एवं सबसे महत्वपूर्ण नींव है। पहला गाढ़ा दूध (कोलोस्ट्रम) शिशु को न केवल संक्रमण से बचाता है बल्कि उसमें रोग प्रतिरोधक क्षमता का विकास करता है। साथ ही माँ और शिशु के बीच पहले रिश्ते को भी सुदृढ़ बनाता है। उन्होंने चिंता जताई कि आज भी कई क्षेत्रों में परंपरागत भ्रांतियों के कारण नवजात को शहद, घुट्टी या पानी दिया जाता है, जो बच्चों की सेहत के लिए हानिकारक है।

आंगनवाड़ी कार्यकर्ता समाज में पोषण और स्वास्थ्य परिवर्तन की है अग्रदूत

महिला बाल विकास मंत्री सुश्री भूरिया ने कहा कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ता केवल सेविका नहीं, बल्कि समाज में पोषण और स्वास्थ्य परिवर्तन की अग्रदूत हैं। वे माताओं की भरोसेमंद मार्गदर्शक हैं और उनके प्रयासों से ही संभव हो पाएगा कि हर माँ को स्तनपान के महत्व की जानकारी और परिवार का सहयोग प्राप्त हो। उन्होंने कहा कि मातृत्व और शिशु स्वास्थ्य केवल महिला की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज का सामूहिक दायित्व है। इस विश्व स्तनपान सप्ताह में यह आवश्यक है कि हम सब मिलकर यह सुनिश्चित करें कि कोई भी नवजात माँ के दूध से वंचित न रहे।

 

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माँ का दूध अमृत है, हर नवजात को मिले जीवन की यह पहली सुरक्षा” : मंत्री सुश्री भूरिया https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=174609 Thu, 31 Jul 2025 13:36:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=174609 भोपाल 

विश्व स्तनपान सप्ताह हर साल अगस्त के पहले सप्ताह में मनाया जाता है। एक अगस्त से प्रारंभ हो रहे विश्व स्तनपान सप्ताह के अवसर पर महिला एवं बाल विकास मंत्री सुश्री सुशील निर्मला भूरिया ने प्रदेश की आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं और सभी नागरिकों का आहवान किया है कि बच्चे को जन्म के पहले घंटे में माँ का दूध और छह माह तक केवल माँ का दूध देना अत्यंत आवश्यक है। इस संदेश को घर-घर, गाँव-गाँव पहुँचाएं और माताओं को सही समय पर सही जानकारी देकर उन्हें सशक्त बनाएं।

मंत्री सुश्री भूरिया ने कहा कि माँ का दूध नवजात के लिए अमृत है। उन्होंने कहा कि स्तनपान नवजात शिशु के जीवन की सुरक्षा, पोषण और स्वास्थ्य की पहली एवं सबसे महत्वपूर्ण नींव है। पहला गाढ़ा दूध (कोलोस्ट्रम) शिशु को न केवल संक्रमण से बचाता है बल्कि उसमें रोग प्रतिरोधक क्षमता का विकास करता है। साथ ही माँ और शिशु के बीच पहले रिश्ते को भी सुदृढ़ बनाता है। उन्होंने चिंता जताई कि आज भी कई क्षेत्रों में परंपरागत भ्रांतियों के कारण नवजात को शहद, घुट्टी या पानी दिया जाता है, जो बच्चों की सेहत के लिए हानिकारक है।

आंगनवाड़ी कार्यकर्ता समाज में पोषण और स्वास्थ्य परिवर्तन की है अग्रदूत

महिला बाल विकास मंत्री सुश्री भूरिया ने कहा कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ता केवल सेविका नहीं, बल्कि समाज में पोषण और स्वास्थ्य परिवर्तन की अग्रदूत हैं। वे माताओं की भरोसेमंद मार्गदर्शक हैं और उनके प्रयासों से ही संभव हो पाएगा कि हर माँ को स्तनपान के महत्व की जानकारी और परिवार का सहयोग प्राप्त हो। उन्होंने कहा कि मातृत्व और शिशु स्वास्थ्य केवल महिला की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज का सामूहिक दायित्व है। इस विश्व स्तनपान सप्ताह में यह आवश्यक है कि हम सब मिलकर यह सुनिश्चित करें कि कोई भी नवजात माँ के दूध से वंचित न रहे।

 

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स्तनपान बच्चों और माताओं का मानवाधिकार, नर्स को चाइल्ड केयर लीव देने से किया इनकार, हाईकोर्ट ने लगाई फटकार, दिया ये आदेश https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=104055 Fri, 29 Nov 2024 09:26:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=104055 बेंगलुरु

कर्नाटक हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य और तंत्रिका विज्ञान संस्थान (NIMHANS) को अनिता जोसेफ नाम की नर्स को 120 दिन का चाइल्ड केयर लीव (CCL) देने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि स्तनपान बच्चों और माताओं के लिए एक मानवाधिकार है। इसे दोनों के लाभ के लिए संरक्षित और प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। कोर्ट के इस फैसले से पहले CAT ने पहले ही NIMHANS को चाइल्ड केयर लीव देने का निर्देश दिया था, जिसके खिलाफ NIMHANS ने हाईकोर्ट में अपील की थी। कोर्ट ने अपने इस फैसले में कार्यरत माताओं और उनके बच्चों के अधिकारों को मान्यता देने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया।

कोर्ट ने कही ये बात
कोर्ट ने कहा कि बच्चों को स्तनपान कराने और उनके साथ पर्याप्त समय बिताने का अधिकार माताओं को है। NIMHANS ने तर्क दिया कि ICU नर्स को छुट्टी देने से आवश्यक सेवाएं बाधित होंगी। न्यायालय ने इस तर्क को खारिज कर दिया और कहा कि एक नर्स की अनुपस्थिति से अत्यधिक कठिनाई कैसे होगी, यह समझ से परे है।

ये है मामला
जानकारी के अनुसार, अनिता जोसेफ ICU में नर्स हैं। उसने अपने बच्चे की देखभाल के लिए जनवरी 2023 से मई 2023 तक सीसीएल के लिए आवेदन किया था। NIMHANS ने यह कहते हुए उनके अनुरोध को अस्वीकार कर दिया कि ICU नर्स को 120 दिन की छुट्टी देने से आवश्यक सेवाएं बाधित होंगी। जोसेफ ने CAT का दरवाजा खटखटाया, जिसने उनके पक्ष में फैसला सुनाया। CAT ने बच्चे के शुरुआती वर्षों में स्तनपान और देखभाल के महत्व को स्वीकार किया। इस फैसले से असंतुष्ट NIMHANS ने ट्रिब्यूनल के आदेश को रद्द करने के लिए हाईकोर्ट का रुख किया।

हाईकोर्ट ने दिया इस बात का हवाला
हाईकोर्ट ने बाल अधिकारों पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन, 1989 का हवाला दिया। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि बच्चे का सर्वोत्तम हित प्राथमिक विचार होना चाहिए। समाज का दायित्व है कि वह इस लक्ष्य को आगे बढ़ाने के लिए स्तनपान को बढ़ावा दे। कोर्ट ने कहा कि NIMHANS, संविधान के अनुच्छेद 12 के तहत राज्य का एक साधन होने के नाते, एक आदर्श नियोक्ता के रूप में कार्य करना चाहिए। मातृत्व और बाल देखभाल अवकाश के दावों पर उचित विचार किया जाना चाहिए। हाईखोर्ट ने टिप्पणी की, कैजुअल लीव एक नियमित बात है, जबकि मातृत्व अवकाश एक गंभीर मामला है। इसी तरह, मेडिकल लीव बीमारी की प्रकृति पर निर्भर करती है। चाइल्ड केयर लीव के महत्व को भी कम नहीं आंका जा सकता।

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