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मध्यप्रदेश की प्रमुख नदियों पर पुलों का जाल बिछाया जाएगा। इनपर 18 से ज्यादा जलमग्नीय पुलों का प्लान तैयार किया गया है। इससे बारिश में टापू बनने वाले गांवों को राहत मिलेगी। लोक निर्माण विभाग (सेतु संभाग) ने ग्वालियर चंबल संभाग की प्रमुख नदियों- सांख, क्वारी, सिंध और पार्वती पर जलमग्नीय (सबमर्सिबल) पुलों का एक बड़ा नेटवर्क तैयार करने की योजना बनाई है। यह कदम न केवल बारिश में कट जाने वाले गांवों को मुख्य सडकों से जोड़ेगा, बल्कि क्षेत्र के आर्थिक विकास के नए द्वार भी खोलेगा। ग्वालियर जिले के तीन प्रमुख पुलों के साथ संभाग के भिण्ड, मुरैना, श्योपुर और शिवपुरी जिलों के प्रस्ताव शासन को भेजे जा चुके हैं, जिनमें से कई को हरी झंडी मिल गई है।
ग्वालियर- चंबल संभाग के ग्रामीण अंचलों में मानसून के दौरान मौत के सफर की तस्वीरें अब जल्द ही इतिहास बनने वाली हैं। योजना के तहत ग्वालियर में तीन पुलों पर काम शुरू हो गया है बोरिंग पूरी हो गई है। जिले में आवागमन को सुगम बनाने के लिए तीन महत्वपूर्ण स्थानों पर काम की स्पीड तेज हो गई है।
मोतीझील- तिघरा कैनाल रोड से मेहंदपुर मार्ग के बीच सांख नदी पर 950 लाख रुपए की लागत से बनने वाला पुल सबसे अहम है।
वर्तमान स्थिति: सांख नदी के साथ मोहना-उम्मेदगढ़ और घाटीगांव- जखोदा मार्ग पर प्रस्तावित पुलों के लिए बोङ्क्षरग का काम पूरा हो चुका है। जीएडी तैयार कर वरिष्ठ कार्यालय को भेज दी गई है। जल्द ही इनका टेंडर प्रक्रिया के बाद निर्माण शुरू होगा।
मुरैना और भिण्ड: कवारी नदी पर सबसे बड़ा दांव… मुरैना जिले में क्वारी नदी पर सबसे महंगे प्रोजेक्ट प्रस्तावित हैं। यहां 2235 लाख की लागत से कटेलापुरा- दोहाटी मार्ग और 2583 लाख की लागत से इटौरा सुजरमा मार्ग पर पुल बनने हैं। भिण्ड के कचोगरा में भी 1915 लाख का पुल प्रशासकीय स्वीकृति के अंतिम चरण में है। ये पुल मुरैना और भिण्ड के दूरस्थ अंचलों को जिला मुख्यालयों से सालभर जोड़कर रखेंगे।
शिवपुरी और श्योपुर: सिंध- पार्वती पर उम्मीदों का सेतु… संभाग में सबसे अधिक पुलों की सूची शिवपुरी जिले से है। यहां सिंध नदी पर मगरौनी-नरवर के बीच 3591 लाख और मिहाबरा-दोनी के बीच 2177 लाख के पुल बजट में शामिल हैं। वहीं, श्योपुर में पार्वती नदी पर 6400 लाख का विशाल पुल प्रस्तावित है, जिसका डिजाइन फाइनल हो चुका है।
सेतु संभाग (लोक निर्माण विभाग) के कार्यपालन यंत्री जोगेंदर सिंह यादव के अनुसार ग्वालियर के तीन पुलों सहित संभाग भर के पुलों के प्रस्ताव शासन को भेजे गए हैं। कुछ प्रोजेक्ट टेंडर प्रक्रिया में हैं, जबकि कुछ का तकनीकी मूल्यांकन जारी है। एक से दो महीने के भीतर निर्माण कार्य शुरू कराने का लक्ष्य है।
क्या होते हैं जलमग्नीय पुल
ये पुल सामान्य ऊंचे पुलों की तुलना में कम लागत वाले होते हैं। मानसून में अत्यधिक बाढ़ आने पर ये पानी में डूब जाते हैं, लेकिन इनका स्ट्रक्चर इस तरह डिजाइन होता है कि पानी उतरते ही ये पुन: यातायात के लिए सुरक्षित हो जाते हैं। संभाग की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए ये सबसे प्रभावी विकल्प माने जा रहे हैं।
हर साल की नाव वाली कहानी पर लगेगा विराम :
हर साल बारिश में ग्वालियर-चंबल की नदियां उफान पर होती हैं, जिससे दर्जनों गांव संपर्क विहीन हो जाते हैं। ग्रामीण जान जोखिम में डालकर नाव या ट्रैक्टर से नदी पार करते हैं। समय पर इलाज न मिलने से कई बार हादसे भी होते हैं। सेतु संभाग की इस योजना से नई उम्मीद जगी है।
ग्वालियर- चंबल संभाग के ग्रामीण अंचलों में मानसून के दौरान मौत के सफर की तस्वीरें अब जल्द ही इतिहास बनने वाली हैं। योजना के तहत ग्वालियर में तीन पुलों पर काम शुरू हो गया है बोरिंग पूरी हो गई है। जिले में आवागमन को सुगम बनाने के लिए तीन महत्वपूर्ण स्थानों पर काम की स्पीड तेज हो गई है।
मोतीझील- तिघरा कैनाल रोड से मेहंदपुर मार्ग के बीच सांख नदी पर 950 लाख रुपए की लागत से बनने वाला पुल सबसे अहम है।
वर्तमान स्थिति: सांख नदी के साथ मोहना-उम्मेदगढ़ और घाटीगांव- जखोदा मार्ग पर प्रस्तावित पुलों के लिए बोङ्क्षरग का काम पूरा हो चुका है। जीएडी तैयार कर वरिष्ठ कार्यालय को भेज दी गई है। जल्द ही इनका टेंडर प्रक्रिया के बाद निर्माण शुरू होगा।
मुरैना और भिण्ड: कवारी नदी पर सबसे बड़ा दांव… मुरैना जिले में क्वारी नदी पर सबसे महंगे प्रोजेक्ट प्रस्तावित हैं। यहां 2235 लाख की लागत से कटेलापुरा- दोहाटी मार्ग और 2583 लाख की लागत से इटौरा सुजरमा मार्ग पर पुल बनने हैं। भिण्ड के कचोगरा में भी 1915 लाख का पुल प्रशासकीय स्वीकृति के अंतिम चरण में है। ये पुल मुरैना और भिण्ड के दूरस्थ अंचलों को जिला मुख्यालयों से सालभर जोड़कर रखेंगे।
शिवपुरी और श्योपुर: सिंध- पार्वती पर उम्मीदों का सेतु… संभाग में सबसे अधिक पुलों की सूची शिवपुरी जिले से है। यहां सिंध नदी पर मगरौनी-नरवर के बीच 3591 लाख और मिहाबरा-दोनी के बीच 2177 लाख के पुल बजट में शामिल हैं। वहीं, श्योपुर में पार्वती नदी पर 6400 लाख का विशाल पुल प्रस्तावित है, जिसका डिजाइन फाइनल हो चुका है।
सेतु संभाग (लोक निर्माण विभाग) के कार्यपालन यंत्री जोगेंदर सिंह यादव के अनुसार ग्वालियर के तीन पुलों सहित संभाग भर के पुलों के प्रस्ताव शासन को भेजे गए हैं। कुछ प्रोजेक्ट टेंडर प्रक्रिया में हैं, जबकि कुछ का तकनीकी मूल्यांकन जारी है। एक से दो महीने के भीतर निर्माण कार्य शुरू कराने का लक्ष्य है।
क्या होते हैं जलमग्नीय पुल
ये पुल सामान्य ऊंचे पुलों की तुलना में कम लागत वाले होते हैं। मानसून में अत्यधिक बाढ़ आने पर ये पानी में डूब जाते हैं, लेकिन इनका स्ट्रक्चर इस तरह डिजाइन होता है कि पानी उतरते ही ये पुन: यातायात के लिए सुरक्षित हो जाते हैं। संभाग की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए ये सबसे प्रभावी विकल्प माने जा रहे हैं।
हर साल की नाव वाली कहानी पर लगेगा विराम :
हर साल बारिश में ग्वालियर-चंबल की नदियां उफान पर होती हैं, जिससे दर्जनों गांव संपर्क विहीन हो जाते हैं। ग्रामीण जान जोखिम में डालकर नाव या ट्रैक्टर से नदी पार करते हैं। समय पर इलाज न मिलने से कई बार हादसे भी होते हैं। सेतु संभाग की इस योजना से नई उम्मीद जगी है।
मप्र सड़क विकास निगम धार जिले के घाटाबिल्लौद से गुजरने वाली चंबल नदी पर बने ब्रिज को तोड़कर नया ब्रिज बनाने जा रहा है। इसके लिए टेंडर प्रक्रिया हो चुकी है। भोपाल की फर्म के माध्यम से ब्रिज का निर्माण करवाया जाएगा। ब्रिज निर्माण की प्रक्रिया प्रारंभ होते ही चंबल नदी के पुल से वाहनों का अवागमन बंद हो जाएगा। इसका सबसे ज्यादा असर इंदौर से होकर रतलाम-नीमच-मंदसौर जाने वाले लोगों पर होगा। निर्माण प्रारंभ होते ही इस रूट के लोगों को 5 किमी का अतिरिक्त चक्कर लगाकर नेशनल हाईवे इंदौर- अहमदाबाद के मार्ग का उपयोग करके लेबड़ तक आना होगा।
विभाग द्वारा मार्ग डायवर्सन प्लान बनाया गया है, जिसमें नेशनल हाईवे के ब्रिज से होकर पानखेड़ी और लेबड़ तक जाया जा सकेगा। इसको लेकर डायवर्सन प्लान अनुमति के लिए जिला प्रशासन को भेजा गया है। अनुमति मिलते ही प्लान पर काम शुरू हो जाएगा।
40 करोड़ रुपए प्रोजेक्ट पर खर्च होंगे:
चंबल नदी पर वर्तमान में सिंगल पट्टी ब्रिज है, जिसकी चौड़ाई करीब 20 फीट है। नया फोरलेन ब्रिज 24 मीटर चौड़ा होगा। दोनों ओर 12- 12 मीटर की सड़क रहेगी। 18 महीने निर्माण अवधि तय की गई है। करीब 40 करोड़ रुपए प्रोजेक्ट पर खर्च होंगे। सिंहस्थ 2028 के पूर्व इसे तैयार कर लिया जाएगा। नवीन पुल तैयार होने के बाद सुगम यातायात हो सकेगा।
वर्तमान का पुल उस दौर के वाहनों की संख्या को देखकर बनाया गया था। पुल अभी मजबूती से खड़ा है, लेकिन बड़े औद्योगिक सामग्रियों के वाहनों के लिए उपयोगी नहीं है। कुछ समय पूर्व बड़े औद्योगिक वाहनों को निकालने के लिए चंबल में अतिरिक्त अस्थाई मार्ग का निर्माण करके वाहनों को निकाला गया था। फोरलेन ब्रिज बनने के बाद इसे बड़े वाहनों के लिए राहत होगी।
मार्ग परिवर्तन का बोर्ड लगाया, यातायात हुआ कम
सड़क विकास निगम को अभी डायवर्सन रूट को लागू करने की अनुमति नहीं मिली है। वहीं विभाग ने पुल के पहले सड़क पर मार्ग परिवर्तन निर्माण कार्य प्रगतिरत है जैसे बोर्ड लगा दिए हैं। इसके कारण मार्ग पर यातायात का दबाव कम हो गया है। इधर, ब्रिज के माध्यम से इस पार आने वाले घाटाबिल्लौद के लोगों को आंतरिक छोटे-छोटे मार्गों का उपयोग करके इस पार से उस पार आना होगा। आगामी दिनों में पानखेड़ी और लेबड़ मार्ग पर यातायात का दबाव बढ़ जाएगा।
सड़क विकास निगम, धार के एसडीओ प्रदीप चौहान बताते हैं कि चंबल नदी पर फोरलेन ब्रिज निर्माण के लिए टेंडर प्रक्रिया हो चुकी है। रूट डायवर्सन प्लान बनाकर अनुमति के लिए स्थानीय प्रशासन को दिया गया है। अनुमति मिलने के बाद आगे का काम शुरू होगा। 18 महीने में कार्य पूर्ण करने की अवधि है।
बारिश में बढ़ेगी चुनौती, अभी डेढ़ माह का समय
चंबल नदी वर्तमान में पूरी तरीके से सूख चुकी है। यह समय पुल को डिस्मेंटल करने एवं बैस तैयार करने के लिए उपयुक्त है। डायवर्सन मार्ग के लिए जल्द अनुमति मिलती है तो काम को गति मिल जाएगी। बारिश का दौर प्रारंभ होते ही प्रोजेक्ट के तहत दो से तीन माह प्रभावित होंगे। अच्छी बारिश के दौरान चंबल नदी उफान पर रहती है। नदी तट के मंदिर तक डूब जाते हैं। ऐसी स्थिति में बारिश के पूर्व नींव का काम हो जाता है तो पानी कम होने पर आगे का काम किया जा सकता है।
तरबगंज की लाइफाइलन कहे जाने वाले ढेमवाघाट पुल का निर्माण वर्ष 2016 में हुआ था। 120 करोड़ की लागत से सरयू नदी पर बना 1132 मीटर लंबा पुल अयोध्या के सोहावल स्थित लखनऊ हाईवे से नवाबगंज को जोड़ रहा था, जो 2022 में सरयू नदी में उफान से कटान की चपेट में आ गया।
पहले पुल को जोड़ रही डेढ़ किलोमीटर लंबी सड़क (एप्रोच मार्ग) कटी,जिसके बाद पुल पर आवागमन बंद हो गया। वर्ष 2024 में नदी फिर तेवर में आई तो ढेमवाघाट को जोड़ने वाली अन्य प्रमुख सड़कें भी कट गईं। 2023 में इसके पुनर्निर्माण के लिए पीडब्ल्यूडी ने 42 करोड़ रुपये मांगा, जो शासन में स्वीकृत नहीं हुआ।
यही नहीं, बचा 150 मीटर हिस्सा भी बह गया। चार वर्षों से क्षतिग्रस्त सड़क के पुनर्निर्माण में नदी का रुख अड़ंगा बना है। बनने पर भी यह कैसे सुरक्षित रहेगा। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) रुड़की इस समस्या का उत्तर खोज रही है, लेकिन वह निष्कर्ष पर नहीं पहुंच पाई है।
एप्रोच मार्ग कट जाने से गोंडा के नवाबगंज अन्य क्षेत्रों के चार पहिया वाहनों को अयोध्या होते हुए फैजाबाद जाना पड़ता था जबकि अयोध्या के सोहावल समेत अन्य लोगों को नवाबगंज व अयोध्या होते हुए आना जाना पड़ता है। कैसरगंज सांसद करन भूषण सिंह ने मुख्यमंत्री से पीपा पुल निर्माण की मांग की थी।
इसके बाद दो करोड़ 16 लाख रुपये से 400 मीटर लंबे पुल बनाने की स्वीकृति शासन ने दी थी, जो अब बन गया है। लोक निर्माण खंड द्वितीय के प्रभारी अधिशासी अभियंता पीके त्रिपाठी ने बताया कि ढेमवाघाट पर पुल निर्माण पूरा हो गया है,जो गोंडा के साथ अयोध्या के लोगों के आवागमन को आसान बनाएगा।
]]>तरबगंज की लाइफाइलन कहे जाने वाले ढेमवाघाट पुल का निर्माण वर्ष 2016 में हुआ था। 120 करोड़ की लागत से सरयू नदी पर बना 1132 मीटर लंबा पुल अयोध्या के सोहावल स्थित लखनऊ हाईवे से नवाबगंज को जोड़ रहा था, जो 2022 में सरयू नदी में उफान से कटान की चपेट में आ गया।
पहले पुल को जोड़ रही डेढ़ किलोमीटर लंबी सड़क (एप्रोच मार्ग) कटी,जिसके बाद पुल पर आवागमन बंद हो गया। वर्ष 2024 में नदी फिर तेवर में आई तो ढेमवाघाट को जोड़ने वाली अन्य प्रमुख सड़कें भी कट गईं। 2023 में इसके पुनर्निर्माण के लिए पीडब्ल्यूडी ने 42 करोड़ रुपये मांगा, जो शासन में स्वीकृत नहीं हुआ।
यही नहीं, बचा 150 मीटर हिस्सा भी बह गया। चार वर्षों से क्षतिग्रस्त सड़क के पुनर्निर्माण में नदी का रुख अड़ंगा बना है। बनने पर भी यह कैसे सुरक्षित रहेगा। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) रुड़की इस समस्या का उत्तर खोज रही है, लेकिन वह निष्कर्ष पर नहीं पहुंच पाई है।
एप्रोच मार्ग कट जाने से गोंडा के नवाबगंज अन्य क्षेत्रों के चार पहिया वाहनों को अयोध्या होते हुए फैजाबाद जाना पड़ता था जबकि अयोध्या के सोहावल समेत अन्य लोगों को नवाबगंज व अयोध्या होते हुए आना जाना पड़ता है। कैसरगंज सांसद करन भूषण सिंह ने मुख्यमंत्री से पीपा पुल निर्माण की मांग की थी।
इसके बाद दो करोड़ 16 लाख रुपये से 400 मीटर लंबे पुल बनाने की स्वीकृति शासन ने दी थी, जो अब बन गया है। लोक निर्माण खंड द्वितीय के प्रभारी अधिशासी अभियंता पीके त्रिपाठी ने बताया कि ढेमवाघाट पर पुल निर्माण पूरा हो गया है,जो गोंडा के साथ अयोध्या के लोगों के आवागमन को आसान बनाएगा।
]]>पुल बंद रहने के कारण रायपुर से दुर्ग और दुर्ग से रायपुर आने-जाने वाली सभी गाड़ियों को दूसरे रास्तों से होकर गुजरना पड़ेगा। इस बड़े डायवर्सन से पहले सोमवार शाम को पुलिस और प्रशासन ने एक ट्रायल, यानी ट्रैफिक रिहर्सल किया।
राजधानी रायपुर और दुर्ग जिले को जोड़ने वाला खारुन पुल करीब 1 महीने के लिए बंद रहेगा। खारून नदी पर बना यह पुल काफी पुराना है और जर्जर हो चुका है। पुल की मरम्मत के लिए इसे बंद करने का फैसला किया गया है। पुल के मरम्मत कार्य के दौरान लोगों को मुश्किलें नहीं हो इसके लिए प्रशासन ने डायवर्जन प्लान तैयार किया है।
रायपुर-दुर्ग के लिए अहम पुल
नेशनल हाईवे 53 कुम्हारी टोल के पास खारुन नदी पर बना यह पुल दुर्ग को रायपुर से जोड़ने वाला मुख्य रास्ता है। यहां से हर दिन करीब डेढ़ लाख वाहन गुजरते हैं। दुर्ग और अमलेश्वर जाने के लिए इसी रास्ते का उपयोग किया जाता है। पुल में कई जगह दरारे हैं। इसके साथ ही हैवी वाहन गुजरने से पुल में कंपन भी होती है जिसके बाद इसकी मरम्मत का फैसला किया गया है।
मामले की जानकारी देते हुए प्रशासन ने बताया कि राष्ट्रीय राजमार्ग एनएच 53 पर बने दुर्ग से रायपुर खारून ब्रिज पर 1 अप्रैल 2026 से मरम्मत कार्य प्रारंभ होगा। जिसमें करीब 1 महीने का समय लगेगा।
करीब 35 साल पुराना है पुल
जानकारी के अनुसार, यह पुल करीब 35 साल पुराना है। इसकी लंबाई 200 मीटर और चौड़ाई 7 मीटर है। पुराना पुल जर्जर हो चुका है। पुराने पुल में 10 स्लैब और 60 बेयरिंग लगी हैं। जानकारी के अनुसार, मरम्मत के लिए पहले डामर की परत हटाई जाएगी। इसके बाद स्लैब को जैक से उठाकर नई बेयरिंग की जाएगी। पुल की मरम्मत पर करीब 16 करोड़ रुपए खर्च होने की बात कही गई है।
डायवर्जन प्लान भी तैयार
पुल बंद होने के कारण यात्रियों को मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में प्रशासन ने डायवर्जन प्लान तैयार किया है। 20 साल पहले इसी नदी पर एक और पुल का निर्माण किया गया था। जिसकी लंबाई 220 मीटर और चौड़ाई 7 मीटर है। खारुन नदी का पुराना पुल बंद होने से इस नए पुल का उपयोग रायपुर से दुर्ग जाने के लिए किया जाएगा।
दिन की बजाय शाम को हुआ रिहर्सल
पहले यह रिहर्सल सोमवार सुबह 9 बजे से दोपहर 12 बजे तक होना तय था, लेकिन किसी कारणवश इसे दिन में टाल दिया गया। बाद में इसे शाम 5 बजे से रात 8 बजे के बीच आयोजित किया गया। शाम के समय जब लोग अपने दफ्तरों और काम से घर लौट रहे होते हैं, उसी दौरान गाड़ियों को बदले हुए रास्तों से गुजारा गया।
नया मार्ग होने के कारण लोग कन्फ्यूज हो गए। नतीजतन, रायपुर से दुर्ग की ओर आने वाले लोगों को भारी जाम का सामना करना पड़ा। गाड़ियां रेंगती हुई नजर आईं और लोगों को घर पहुंचने में काफी अधिक समय लग गया।
गायब साइन बोर्ड ने बढ़ाई लोगों की मुसीबत
रिहर्सल के दौरान सबसे बड़ी परेशानी रोशनी की कमी रही। कई जगहों पर इतना अंधेरा था कि वाहन चालकों को रास्ता समझ नहीं आ रहा था। इसके अलावा, मार्गों पर यह बताने के लिए पर्याप्त और स्पष्ट साइन बोर्ड भी नहीं लगाए गए थे कि किस गाड़ी को किस दिशा में मुड़ना है और कौन सा रास्ता कहां जाता है।
पुलिसकर्मियों के ठहरने और ड्यूटी के लिए बनाए गए टेंट भी काफी कम थे। अचानक रास्ता बदले जाने और अधूरी तैयारियों के कारण आम जनता को सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ा।
SSP खुद पहुंचे मौके पर, सुधार करने के दिए निर्देश
रूट डायवर्सन के रिहर्सल को देखने के लिए दुर्ग के एसएसपी विजय अग्रवाल खुद मौके पर पहुंचे। उन्होंने पूरी व्यवस्था का बारीकी से निरीक्षण किया। इस दौरान दुर्ग और रायपुर दोनों जिलों के ट्रैफिक पुलिस अधिकारी अलग-अलग स्थानों पर खड़े होकर यातायात को नियंत्रित करने का प्रयास कर रहे थे।
कमियां देखकर उन्होंने अधिकारियों को तुरंत ट्रैफिक प्लान में आवश्यक सुधार करने का निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जनता को किसी भी प्रकार की असुविधा नहीं होनी चाहिए।
ट्रैफिक संभालने के लिए 55 जवानों की लगाई गई है ड्यूटी
इस पूरे एक महीने के लिए ट्रैफिक प्लान को अच्छे से लागू करने के लिए दुर्ग पुलिस ने 55 जवानों की ड्यूटी लगाई है। अधिकारियों का कहना है कि अगर सड़कों पर गाड़ियों का दबाव बढ़ा और जरूरत महसूस हुई, तो जवानों की संख्या और भी बढ़ा दी जाएगी।
ट्रैफिक पुलिस ने ट्रकों और बसों जैसे भारी वाहनों, बीच की साइज वाली गाड़ियों और कार-बाइक जैसी छोटी गाड़ियों के लिए अलग-अलग रास्ते तय कर दिए हैं।
कमियों को दूर करने तैयारी शरू
पुलिस प्रशासन का कहना है कि रिहर्सल इसीलिए किया गया, ताकि असल में पुल बंद होने से पहले इन सभी कमियों को पहचाना जा सके। पुलिस का दावा है कि मंगलवार रात 10:30 बजे से जब पुल पूरी तरह से बंद कर दिया जाएगा।
सड़कों पर पर्याप्त रोशनी और दिशा बताने वाले साइन बोर्ड जैसी सभी कमियों को हर हाल में दूर कर लिया जाएगा, ताकि अगले एक महीने तक आम जनता को सफर में कम से कम परेशानी का सामना करना पड़े। पुलिस ने लोगों से सफर में थोड़ा अतिरिक्त समय लेकर चलने की अपील भी की है।
]]>पुल बंद रहने के कारण रायपुर से दुर्ग और दुर्ग से रायपुर आने-जाने वाली सभी गाड़ियों को दूसरे रास्तों से होकर गुजरना पड़ेगा। इस बड़े डायवर्सन से पहले सोमवार शाम को पुलिस और प्रशासन ने एक ट्रायल, यानी ट्रैफिक रिहर्सल किया।
राजधानी रायपुर और दुर्ग जिले को जोड़ने वाला खारुन पुल करीब 1 महीने के लिए बंद रहेगा। खारून नदी पर बना यह पुल काफी पुराना है और जर्जर हो चुका है। पुल की मरम्मत के लिए इसे बंद करने का फैसला किया गया है। पुल के मरम्मत कार्य के दौरान लोगों को मुश्किलें नहीं हो इसके लिए प्रशासन ने डायवर्जन प्लान तैयार किया है।
रायपुर-दुर्ग के लिए अहम पुल
नेशनल हाईवे 53 कुम्हारी टोल के पास खारुन नदी पर बना यह पुल दुर्ग को रायपुर से जोड़ने वाला मुख्य रास्ता है। यहां से हर दिन करीब डेढ़ लाख वाहन गुजरते हैं। दुर्ग और अमलेश्वर जाने के लिए इसी रास्ते का उपयोग किया जाता है। पुल में कई जगह दरारे हैं। इसके साथ ही हैवी वाहन गुजरने से पुल में कंपन भी होती है जिसके बाद इसकी मरम्मत का फैसला किया गया है।
मामले की जानकारी देते हुए प्रशासन ने बताया कि राष्ट्रीय राजमार्ग एनएच 53 पर बने दुर्ग से रायपुर खारून ब्रिज पर 1 अप्रैल 2026 से मरम्मत कार्य प्रारंभ होगा। जिसमें करीब 1 महीने का समय लगेगा।
करीब 35 साल पुराना है पुल
जानकारी के अनुसार, यह पुल करीब 35 साल पुराना है। इसकी लंबाई 200 मीटर और चौड़ाई 7 मीटर है। पुराना पुल जर्जर हो चुका है। पुराने पुल में 10 स्लैब और 60 बेयरिंग लगी हैं। जानकारी के अनुसार, मरम्मत के लिए पहले डामर की परत हटाई जाएगी। इसके बाद स्लैब को जैक से उठाकर नई बेयरिंग की जाएगी। पुल की मरम्मत पर करीब 16 करोड़ रुपए खर्च होने की बात कही गई है।
डायवर्जन प्लान भी तैयार
पुल बंद होने के कारण यात्रियों को मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में प्रशासन ने डायवर्जन प्लान तैयार किया है। 20 साल पहले इसी नदी पर एक और पुल का निर्माण किया गया था। जिसकी लंबाई 220 मीटर और चौड़ाई 7 मीटर है। खारुन नदी का पुराना पुल बंद होने से इस नए पुल का उपयोग रायपुर से दुर्ग जाने के लिए किया जाएगा।
दिन की बजाय शाम को हुआ रिहर्सल
पहले यह रिहर्सल सोमवार सुबह 9 बजे से दोपहर 12 बजे तक होना तय था, लेकिन किसी कारणवश इसे दिन में टाल दिया गया। बाद में इसे शाम 5 बजे से रात 8 बजे के बीच आयोजित किया गया। शाम के समय जब लोग अपने दफ्तरों और काम से घर लौट रहे होते हैं, उसी दौरान गाड़ियों को बदले हुए रास्तों से गुजारा गया।
नया मार्ग होने के कारण लोग कन्फ्यूज हो गए। नतीजतन, रायपुर से दुर्ग की ओर आने वाले लोगों को भारी जाम का सामना करना पड़ा। गाड़ियां रेंगती हुई नजर आईं और लोगों को घर पहुंचने में काफी अधिक समय लग गया।
गायब साइन बोर्ड ने बढ़ाई लोगों की मुसीबत
रिहर्सल के दौरान सबसे बड़ी परेशानी रोशनी की कमी रही। कई जगहों पर इतना अंधेरा था कि वाहन चालकों को रास्ता समझ नहीं आ रहा था। इसके अलावा, मार्गों पर यह बताने के लिए पर्याप्त और स्पष्ट साइन बोर्ड भी नहीं लगाए गए थे कि किस गाड़ी को किस दिशा में मुड़ना है और कौन सा रास्ता कहां जाता है।
पुलिसकर्मियों के ठहरने और ड्यूटी के लिए बनाए गए टेंट भी काफी कम थे। अचानक रास्ता बदले जाने और अधूरी तैयारियों के कारण आम जनता को सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ा।
SSP खुद पहुंचे मौके पर, सुधार करने के दिए निर्देश
रूट डायवर्सन के रिहर्सल को देखने के लिए दुर्ग के एसएसपी विजय अग्रवाल खुद मौके पर पहुंचे। उन्होंने पूरी व्यवस्था का बारीकी से निरीक्षण किया। इस दौरान दुर्ग और रायपुर दोनों जिलों के ट्रैफिक पुलिस अधिकारी अलग-अलग स्थानों पर खड़े होकर यातायात को नियंत्रित करने का प्रयास कर रहे थे।
कमियां देखकर उन्होंने अधिकारियों को तुरंत ट्रैफिक प्लान में आवश्यक सुधार करने का निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जनता को किसी भी प्रकार की असुविधा नहीं होनी चाहिए।
ट्रैफिक संभालने के लिए 55 जवानों की लगाई गई है ड्यूटी
इस पूरे एक महीने के लिए ट्रैफिक प्लान को अच्छे से लागू करने के लिए दुर्ग पुलिस ने 55 जवानों की ड्यूटी लगाई है। अधिकारियों का कहना है कि अगर सड़कों पर गाड़ियों का दबाव बढ़ा और जरूरत महसूस हुई, तो जवानों की संख्या और भी बढ़ा दी जाएगी।
ट्रैफिक पुलिस ने ट्रकों और बसों जैसे भारी वाहनों, बीच की साइज वाली गाड़ियों और कार-बाइक जैसी छोटी गाड़ियों के लिए अलग-अलग रास्ते तय कर दिए हैं।
कमियों को दूर करने तैयारी शरू
पुलिस प्रशासन का कहना है कि रिहर्सल इसीलिए किया गया, ताकि असल में पुल बंद होने से पहले इन सभी कमियों को पहचाना जा सके। पुलिस का दावा है कि मंगलवार रात 10:30 बजे से जब पुल पूरी तरह से बंद कर दिया जाएगा।
सड़कों पर पर्याप्त रोशनी और दिशा बताने वाले साइन बोर्ड जैसी सभी कमियों को हर हाल में दूर कर लिया जाएगा, ताकि अगले एक महीने तक आम जनता को सफर में कम से कम परेशानी का सामना करना पड़े। पुलिस ने लोगों से सफर में थोड़ा अतिरिक्त समय लेकर चलने की अपील भी की है।
]]>इंदौर के लवकुश चौराहे पर बन रहे प्रदेश के पहले डबलडेकर ब्रिज का काम 80 प्रतिशत पूरा हो चुका है। चार माह में इस ब्रिज की सौगात मिल सकती है। यह ब्रिज मेट्रो ट्रैक और सुपर कॉरिडोर बने ब्रिज को पार कर उज्जैन रोड की तरफ उतरेगा। इस ब्रिज की अधिकतम ऊंचाई जमीन से 70 फीट है। ब्रिज के मध्य हिस्से के स्पान रखे जाना शेष है। इसके लिए विशेष क्रेन कंपनी ने मंगाई है। यह काम ट्रैफिक रोककर किया जाएगा।
अपनी ऊंचाई के कारण इस ब्रिज की लंबाई भी शहर के दूसरे ब्रिजों से ज्यादा है। यह ब्रिज डेढ़ किलोमीटर लंबा है और इसके निर्माण पर 300 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। डबलडेकर ब्रिज के बनने से हर दिन एक लाख लोगों की राह आसान होगी। सिंहस्थ के समय भी यह ब्रिज ट्रैफिक में मददगार साबित होगा। यह ब्रिज अरबिंदो अस्पताल के चौराहे पर खत्म होगा और वहां से इंदौर-उज्जैन छहलेन ब्रिज का काम शुरू होगा।
भुजा पर हो रहा डामरीकरण
ब्रिज की भुजा पर डामरीकरण शुरू हो चुका है। दोनों तरफ से यह काम जारी है। इसके अलावा ब्रिज के विद्युतीकरण और सौंदर्यीकरण का काम भी चल रहा है। जल्दी ही यह काम पूरा हो जाएगा। जून माह तक ब्रिज का निर्माण पूरा हो जाएगा। इसके बाद ट्रैफिक के लिए यह खोल दिया जाएगा।
इंदौर विकास प्राधिकरण के अफसरों का कहना है कि ब्रिज के मध्य हिस्से की डिजाइन में कर्व दिया गया है। इससे ब्रिज पर चलने वाला ट्रैफिक भी सुरक्षित रहेगा और सुंदर भी दिखाई देगा। आपको बता दें कि ब्रिज का भूमिपूजन तीन साल पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किया था। सुपर कॉरिडोर का ब्रिज सालभर पहले बन चुका था। उसकी दोनों भुजाओं से ट्रैफिक गुजर रहा है।
]]>80 करोड़ की लागत से बनेगा ब्रिज
दरअसल, देश के दो ज्योतिर्लिंग ओंकारेश्वर और महाकालेश्वर को जोड़ने के लिए मध्य प्रदेश में जो ओम सर्किट तैयार किया जा रहा है. उसके तहत खंडवा जिले में नर्मदा नदी के मोरटक्का पर करीब 1 किलोमीटर लंबाई का यह ब्रिज बनाया जा रहा है. 80 करोड़ की लागत से इंदौर और खंडवा को जोड़ने वाले इस ब्रिज के एक कोने पर माता अहिल्याबाई होल्कर की प्रतिमा होगी.
जबकि दूसरे पर नर्मदा माता की प्रतिमा स्थापित होने जा रही है. इतना ही नहीं ब्रिज के प्लेटफॉर्म से गुजरने पर श्रद्धालु ब्रिज के दोनों और देवी देवताओं की मूर्ति और म्यूरल ( म्यूरल का मतलब भित्ति या भित्ती चित्र होता है, यह दीवार पर बनाया गया चित्र होता है, यह सबसे पुरानी चित्रकलाओं में से एक होता है.) की पूजा अर्चना भी कर सकेंगे.
ब्रिज बनने से घट जाएगी ओंकारेश्वर की दूरी
ब्रिज के बन जाने से इंदौर और ओंकारेश्वर जाने के लिए फिलहाल 3 घंटे का समय लगता है. जहां अब देर से 2 घंटे में पहुंचा जा सकेगा. नेशनल हाईवे इंदौर के प्रोजेक्ट डायरेक्टर सुमेश बांझल बताते हैं कि, ''देश में धार्मिक आस्था को दर्शाने वाला पहला ब्रिज जल्द तैयार होने वाला है. जहां ब्रिज के दोनों ओर की एंट्री पर भव्य द्वार बनाए जा रहे हैं. इसके अलावा यहां एक टनल भी बनाई जा रही है, जो पूरी तरह से आध्यात्मिक डिजाइन पर आधारित होगी.''
ब्रिज की खासियत यह रहेगी कि ब्रिज के स्ट्रक्चर में पूरी थीम धार्मिक भावना का अनुरूप तैयार की गई है. इसके अलावा ब्रिज के स्ट्रक्चर में पौराणिक कथाओं और देवी देवताओं की प्रतिमा को उकेरा जा रहा है. शाम को नर्मदा नदी के प्रवाह क्षेत्र में जहां सूरज डूबता है. उस दौरान ब्रिज पर मंत्रोचार की ध्वनि और आकर्षक लाइटिंग होगी.
उज्जैन सिंहस्थ 2028 को लेकर किया जा रहा तैयार
''रेलिंग के बाद भी देवी-देवताओं की मूर्तियां और म्यूरल लगाए जाएंगे. जिससे कि यहां से गुजरने वाले यात्री नर्मदा नदी के ब्रिज पर धार्मिक भावना संरचना और खास तरह के धार्मिक स्ट्रक्चर को देखते हुए आध्यात्मिक माहौल के साथ ब्रिज से गुजर सके.'' उन्होंने बताया उज्जैन सिंहस्थ 2028 की तैयारी के मद्देनजर इसे तैयार किया जा रहा है. जिसे मेला आयोजन के पूर्वी तैयार कर लिया जाएगा.
]]>शहडोल रीवा मुख्य मार्ग में बाणसागर स्थित सोन नदी के ऊपर बने पुल का एक पिलर मंगलवार को अचानक कुछ नीचे झुक गया। साथ ही पुल के बीच एक गड्ढा भी हो गया। इस खतरे को देखते हुए वहां से आवाजाही बंद करा दी गई। दोनों ओर से आने वाले वाहनों की निकासी के लिए वैकल्पिक बुढ़वा, कूदरी व बघवार मार्ग से वाहनों की आवाजाही शुरू कराई गई है, ताकि उक्त मार्ग में जाम की स्थिति निर्मित न होने पाए।
पुलिस ने बताया कि मंगलावार सुबह उक्त मार्ग से पुलिस का एक वाहन गुजर रहा था, तभी पुल के एक ओर का पिलर झुका हुआ नजर आया। साथ ही पुलिया के बीच एक गड्ढा भी दिखाई दिया। उसके बाद उक्त मार्ग में संभावित खतरे को देखते हुए तत्काल ही थाना प्रभारी सुभाष दुबे ने संबंधित विभाग के अधिकारियों को इससे अवगत कराया। बाणसागर पुलिया में बैरिकेट्स लगाकर उससे आवाजाही बंद करवा दी गई। विदित हो कि बाणसागर स्थित सोन नदी में बने उक्त पुल शहडोल रीवा मार्ग का मुख्य केंद्र हैं।
वाहनों की आवाजाही बंद
विदित हो कि बाणसागर स्थित सोन नदी में बने उक्त पुल शहडोल रीवा मार्ग का मुख्य केंद्र हैं। इस मार्ग से सतना, रीवा समेत यूपी का सफर तय किया जाता हैं, लेकिन अचानक पुलिया का पिलर एक ओर झुक जाने से उक्त मार्ग से आवाजही करने से खतरे का अंदेशा हैं। इसलिए पुलिस द्वारा कलेक्टर, एसपी तथा एसडीएम समेत एम पी आर डी सी के जिम्मेदार अधिकारियों को इस संभावित खतरे की सूचना दे दी गईं हैं।
वाहनों के लिए वैकल्पिक मार्ग खोला
फिलहाल पुलिस द्वारा वाहन चालकों को वैकल्पिक मार्ग से आवाजाही करने के लिए कहा जा रहा हैं। देवलौंद थाना प्रभारी सुभाष दुबे ने बताया है कि पुल का एक हिस्सा शहडोल जिले में आता है और दूसरा हिस्सा रामनगर थाना जिला मैहर में आता है, हमने मैहर जिले में कंट्रोल रूम को सूचना दी है, एवं रामनगर थाने को भी बताया है। दोनों ओर पुलिस लगाकर मार्ग को बंद कर दिया गया है। एक वैकल्पिक मार्ग से वाहनों को आने जाने दिया जा रहा है।
इस मार्ग से सतना, रीवा समेत यूपी का सफर तय किया जाता है, लेकिन अचानक पुलिया का पिलर एक ओर झुक जाने से उक्त मार्ग से आवाजही करने से खतरे का अंदेशा है। इसलिए पुलिस द्वारा कलेक्टर, एसपी तथा एसडीएम समेत एम पी आरडीसी के जिम्मेदार अधिकारियों को इस संभावित खतरे की सूचना दे दी गई है। फिलहाल पुलिस द्वारा वाहन चालकों को वैकल्पिक मार्ग से आवाजाही करने के लिए कहा जा रहा है, लेकिन उक्त वैकल्पिक मार्ग से क्या बड़े और भारी वाहन गुजर पाएंगे यह भी बड़ा सवाल है।
देवलौंद थाना प्रभारी सुभाष दुबे ने बताया है कि पुल का एक हिस्सा शहडोल जिले में आता है, और दूसरा हिस्सा रामनगर थाना जिला मैहर में आता है। हमने मैहर जिले में कंट्रोल रूम को सूचना दी है और रामनगर थाने को भी बताया है। दोनों ओर पुलिस बेरिकेड लगाकर मार्ग को बंद कर दिया गया है। एक वैकल्पिक मार्ग से वाहनों को आने जाने दिया जा रहा है।
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