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पश्चिम बंगाल में बीजेपी की नई सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के एक फैसले ने पूरे बांग्लादेश में हलचल मचा दी है. सोमवार को हुई नई सरकार की पहली कैबिनेट बैठक में भारत-बांग्लादेश बॉर्डर पर बिना बाड़ वाले इलाकों में कांटेदार तार लगाने के लिए बीएसएफ को 45 दिनों के भीतर जमीन सौंपने का फैसला लिया गया. इस फैसले के बाद बांग्लादेश में राजनीतिक और सुरक्षा स्तर पर प्रतिक्रिया तेज हो गई है।
सुवेंदु सरकार के फैसले पर क्या बोला बांग्लादेश?
सुवेंदु सरकार के इस फैसले पर बांग्लादेश की ओर से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है. टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान के विदेश मामलों के सलाहकार हुमायुं कबीर ने कहा कि ‘बांग्लादेश को कांटेदार तार से डराया नहीं जा सकता.’ उन्होंने कहा कि चुनावी बयानबाजी और शासन चलाना अलग बात है और ढाका अब यह देखना चाहता है कि बंगाल सरकार चुनावी भाषणों को प्रशासनिक फैसलों में कितना बदलती है।
हुमायूं कबीर ने यह भी कहा कि अगर भारत वास्तव में लोगों के बीच रिश्ते मजबूत करना चाहता है तो उसे सीमा विवादों और सुरक्षा मामलों को ‘मानवीय दृष्टिकोण’ से देखना चाहिए. उन्होंने साफ कहा कि बांग्लादेश की प्राथमिक बातचीत भारत की केंद्र सरकार से होती है, न कि किसी राज्य सरकार से।
सीमा पर बांग्लादेशी गार्ड भी अलर्ट
सीमा पर कथित ‘पुश-बैक’ और हिंसा के मुद्दे पर भी बांग्लादेश ने कड़ा रुख दिखाया है. कबीर ने चेतावनी दी कि अगर सीमा पर लोगों की मौतें और जबरन धकेलने की घटनाएं जारी रहीं तो बांग्लादेश चुप नहीं बैठेगा. वहीं बांग्लादेश के गृह मंत्री सलाहुद्दीन अहमद ने कहा कि पश्चिम बंगाल चुनाव के बाद बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (BGB) को हाई अलर्ट पर रखा गया है और सीमा पर घुसपैठ रोकने के लिए बल पूरी तरह तैयार है।
दरअसल बीजेपी ने विधानसभा चुनाव से पहले अपने संकल्प पत्र में वादा किया था कि बंगाल-बांग्लादेश सीमा को पूरी तरह सुरक्षित किया जाएगा. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने चुनाव प्रचार के दौरान कहा था कि नई सरकार बनने के बाद पहली कैबिनेट बैठक में ही सीमा सुरक्षा से जुड़ा बड़ा फैसला लिया जाएगा. सोमवार को कैबिनेट की बैठक में उसी वादे को अमल में लाते हुए सीमा सुरक्षा बल (BSF) को जमीन ट्रांसफर का निर्णय लिया गया.
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बंगाल में सरकार बदलने के बाद भारत-बांग्लादेश सीमा सुरक्षा और अवैध घुसपैठ का मुद्दा आने वाले दिनों में और गर्मा सकता है. बीजेपी जहां इसे राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़कर देख रही है, वहीं बांग्लादेश इसे कूटनीतिक और मानवीय नजरिए से उठा रहा है।
वायरल हो रहा एक वीडियो
सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में सीनियर बीएसएफ अधिकारी अपनी आपबीती सुना रहे हैं। वह कहते हैं कि जब हमला हो रहा था, तब वहां खड़े किसी भी व्यक्ति ने हस्तक्षेप करने की कोशिश नहीं की। हालांकि, वायरल वीडियो की अभी तक पुष्टि नहीं हो पाई है। दूसरी ओर, राजस्थान में श्रीगंगानगर जिले के सीमावर्ती श्रीकरणपुर थाना क्षेत्र में पाकिस्तान सीमा के निकट खेत में एक बार फिर आधा किलोग्राम हेरोइन का पैकेट बरामद हुआ है। इससे पहले 2 नवंबर को इसी क्षेत्र में आधा किलोग्राम हेरोइन का पैकिट मिला था। पुलिस को आशंका है कि ये दोनों पैकेट पाकिस्तानी तस्करों की ओर से ड्रोन के माध्यम से गिराए गए होंगे। ये एक बड़ी हेरोइन की खेप का हिस्सा हो सकते हैं।
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आज के समय में लड़कियां बढ़-चढ़कर डिफेंस सेक्टर में शामिल हो रही हैं और काफी अच्छा कर रही हैं. वहीं इन दिनों उत्तर प्रदेश की एक बेटी अभी काफी चर्चा में हैं. उन्होंने सीमा सुरक्षा बल (BSF) में शामिल होने के पांच महीने के अंदर ही प्रमोशन पा लिया. ऐसा कहा जा रहा है कि सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) ने पूरे छह दशक के इतिहास में पहली बार किसी के ज्वॉइनिंग के बाद इतनी जल्दी किसी को प्रमोशन दिया है.
यूपी की बेटी ने रचा इतिहास
उत्तर प्रदेश में दादरी की रहने वाली शिवानी ने BSF में इतनी तेजी से पहचान हासिल करने वाली पहली महिला कांस्टेबल के रूप में इतिहास रच दिया है. वे बढ़ई की बेटी हैं. वे अपने परिवार की पहली सदस्य हैं जो भारत के डिफेंस सेक्टर में अपनी सेवा दे रही हैं.
विश्व वुशु चैंपियनशिप में जीता रजत पदक
दरअसल, 31 अगस्त से 8 सितंबर 2025 तक ब्राजील में आयोजित 17वीं विश्व वुशु चैंपियनशिप (World Wushu Championship 2025) में रजत पदक जीतने के बाद शिवानी को हेड कांस्टेबल के पद पर प्रमोशन मिला है. BSF के महानिदेशक दलजीत सिंह चौधरी ने सीमा सुरक्षा बल के एक शिविर में कांस्टेबल शिवानी की खाकी वर्दी पर हेड कांस्टेबल का रिबन लगाया और उनके प्रमोशन की घोषणा की.
बीएसएफ कांस्टेबल को प्रमोशन मिलने में कितना वक्त मिलता है?
बीएसएफ कांस्टेबल को प्रमोशन मिलने में आमतौर पर 15-18 वर्ष का समय लगता है. हालांकि, शिवानी ने महज 21 साल की उम्र में BSF हेड कांस्टेबल के पद पर प्रमोशन पाकर इतिहास रच दिया है.
स्वर्ण पदक जीतने की तैयारी
शिवानी ने इसी साल (2025) में जून महीने में बीसीएफ ज्वॉइन किया था. वे हर दिन करीब 4 घंटे ट्रेनिंग लेती हैं. उन्होंने 2025 के विश्व चैंपियनशिप में रजत पदक जीता था. वहीं उनका अगला गोल विश्व कप है और वे इसकी तैयारी कर रही हैं. वे स्वर्ण पदक जीतने की तैयारी करेंगी.
]]>चाइबासा निवासी रूंगटा भाइयों की ओर से पिता सीताराम रूंगटा की स्मृति को जीवंत रखने के लिए सीएसडब्ल्यूटी संग्राहालय को रिवाल्वर .45 वेबली मार्क-वी दान की गई है। यह रिवाल्वर साल 1914 का माडल है, जिसे इंग्लैंड की कंपनी द्वारा बनाया गया था। जानकारी के अनुसार, इसका उपयोग प्रथम विश्व युद्ध की शुरुआत के दौरान ब्रिटिश सेना द्वारा किया जाता था।
राम रुंगटा के नाम पर थी यह रिवाल्वर
यह रिवाल्वर एनएल रुंगटा के पिता सीता राम रुंगटा के नाम थी। उनका 1994 में निधन हो गया था। इसके बाद इसे आर्म्स डीलर के पास जमा करवा दिया गया था। इसी बीच दो साल पूर्व रुंगटा परिवार ने कोलकाता के एक अखबार में सीएसडब्ल्यूटी हथियार संग्रहालय पर एक लेख पढ़ा था, जिससे प्रभावित होकर उन्होंने रिवाल्वर बंदूक संग्रहालय को सौंपने का निश्चय किया।
रुंगटा परिवार ने हमारे झारखंड ब्यूरो के प्रतिनिधि को बताया कि जिला शस्त्र मजिस्ट्रेट, चाईबासा, झारखंड से अनुमति प्राप्त होने के बाद यह रिवाल्वर सीएसडब्ल्यूटी बीएसएफ इंदौर के डीआईजी सह कार्यवाहक महानिरीक्षक राजन सूद की उपस्थिति में दान की गई है।
नान सर्विसेबल की गई बंदूक
बता दें कि यह बंदूक पूर्व में चालू अवस्था में थी। इसे दान करने से पूर्व सभी औपचारिकरताएं पूरी की गई और इसे नान सर्विसेबल किया गया। ताकि इसका दोबारा उपयोग न किया गया जा सके। अब यह बंदूक सीएसडब्ल्यूटी बीएसएफ इंदौर के शस्त्र संग्रहालय में सुरक्षित रखी जाएगी।
उल्लेखनीय है कि यह संग्रहालय बीएसएफ के पुराने संग्रहालयों में से एक है, जिसकी स्थापना सन् 1967 में सीमा सुरक्षा बल के प्रथम महानिदेशक केएफ रूस्तम द्वारा की गई थी। संग्रहालय में 300 से अधिक हथियार प्रदर्शित किए गए हैं। इसमें 14 वीं शताब्दी से लेकर वर्तमान तक उपयोग में लाए जा रहे विभिन्न प्रकार के छोटे हथियार शामिल हैं।
]]>पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में सीमा सुरक्षा बल (BSF) के एक जवान को कथित तौर पर अगवा करने का मामला सामने आया है. आरोप है कि कुछ बांग्लादेशी नागरिक बीएसएफ के एक जवान को अगवा कर उसे बांग्लादेश की सीमा ले गए. हालांकि, कुछ ही घंटों बाद जवान को छोड़ दिया गया. लेकिन मामले की गंभीरता ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं.
रिपोर्ट के मुताबिक, बुधवार सुबह लगभग आठ बजे बीएसएफ को पता चला कि बांग्लादेश के कुछ ग्रामीण बीएसएफ के एक जवान को जबरन खींचकर बांग्लादेश की सीमा में ले गए और वहां उसे बांध दिया. इस घटना की जानकारी मिलने पर बीएसएफ के बड़े अधिकारी माल्दा सीमा की ओर रवाना हुए. बीएसएफ सूत्रों का कहना है कि बांग्लादेश के कुछ आपराधिक तत्व जवान को खींचकर बांग्लादेश की सीमा में ले गए.
बता दें कि यह घटना सुइटी थाना क्षेत्र के चांदनी चौक बॉर्डर आउटपोस्ट के पास हुई, जहां बीएसएफ की 71वीं बटालियन के जवान श्री गणेश सीमा पर संदिग्ध गतिविधियों की जांच कर रहे थे. शुरुआती रिपोर्ट्स में कहा जा रहा था कि जवान संदिग्ध घुसपैठियों का पीछा करते हुए अनजाने में बांग्लादेशी सीमा में प्रवेश कर गया था. लेकिन बाद में पता चला कि जवान भारतीय सीमा में ही था, बांग्लादेशी उसे जबरन सीमा पार खींच ले गए.
]]>23 अप्रैल को पंजाब के फिरोजपुर सेक्टर में ड्यूटी के दौरान पूर्णम कुमार शॉ गलती से पाकिस्तानी सीमा में प्रवेश कर गए थे। कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के अगले ही दिन यह घटना घटी। पाकिस्तान की सेना ने उन्हें हिरासत में ले लिया और उसके बाद से उनसे कोई संपर्क नहीं हो पाया था। भारत सरकार ने कूटनीतिक चैनल के जरिए दबाव बनाना शुरू कर दिया, जिसके बाद पाकिस्तान से उसकी रिहाई हुई।
बुधवार को पति से बात करने के बाद रजनी शॉ ने मीडिया से बात करते हुए कहा, "उन्होंने बताया कि उन्हें शारीरिक यातना नहीं दी गई, लेकिन मानसिक रूप से वे पूरी तरह थक चुके हैं। उन्हें हर रात पूछताछ के लिए उठाया जाता था। वह बोले कि उन्हें खाना तो मिलता था, लेकिन दांत साफ करने की अनुमति भी नहीं दी गई। उनकी आवाज में थकावट साफ झलक रही थी।"
तीन अलग-अलग जगहों पर रखा गया
रजनी ने यह भी बताया कि पूर्णम शॉ को तीन अलग-अलग जगहों पर ले जाया गया। उनमें से एक जगह संभवतः किसी एयरबेस के पास की जगह थी, क्योंकि वहां हवाई जहाजों की आवाजें आती थीं। यह सब उनके मानसिक तनाव को और बढ़ाने वाला अनुभव था।
रजनी शॉ ने गर्व के साथ कहा, “वह पिछले 17 वर्षों से देश की सेवा कर रहे हैं और आगे भी करते रहेंगे। हम सभी को उन पर गर्व है। वह फिर से ड्यूटी पर लौटेंगे।” अगर शॉ को जल्दी छुट्टी नहीं मिली, तो रजनी स्वयं पठानकोट जाकर उनसे मिलने की योजना बना रही हैं। आपको बता दें कि बुधवार शाम को पूर्णम कुमार शॉ को अटारी-वाघा सीमा के जरिए भारत लाया गया, जहां उनका मेडिकल परीक्षण और डिब्रीफिंग की गई।
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बीएसएफ के डीजी दलजीत सिंह चौधरी ने जम्मू के सीमावर्ती क्षेत्रों का दौरा किया और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में बीएसएफ कर्मियों के अमूल्य योगदान को लेकर उनकी सराहना की. वीरगति को प्राप्त जवानों को श्रद्धांजलि देते हुए महानिदेशक ने पलौरा स्थित बीएसएफ मुख्यालय में अमर प्रहरी स्मारक पर शहीद उपनिरीक्षक मोहम्मद इम्तियाज और आरक्षी दीपक चिंगाखम की स्मृति में पुष्पचक्र अर्पित किया.
दोनों जवानों ने इस ‘ऑपरेशन’ के दौरान अपनी सीमा चौकी की रक्षा में दुश्मन की भीषण गोलीबारी और गोलाबारी का सामना करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया. बीएसएफ ने ‘एक्स’ पर लिखा, “राष्ट्र की सेवा में उनके सर्वोच्च बलिदान को शत-शत नमन.”
बीएसएफ जम्मू के जवानों को संबोधित करते हुए महानिदेशक ने सबसे चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में देश की सीमाओं की सुरक्षा में बल की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया. उन्होंने पहलगाम आतंकी हमले के मद्देनजर सात मई को शुरू किए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में बीएसएफ जवानों के अटूट साहस, बहादुरी, दृढ़ समर्पण और अमूल्य योगदान की सराहना की.
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पाकिस्तान ने भारत के बीएसएफ जवान पूर्णम कुमार शॉ को वापस लौटा दिया है. पाकिस्तानी रेंजर्स ने अटारी वाघा सीमा के रास्ते बीएसएफ कॉन्स्टेबल को वापस भेजा है. वे पिछले करीब बीस दिनों से पाकिस्तान के कब्जे में थे. कॉन्स्टेबल पूर्णम कुमार सुबह 10:30 बजे वतन वापस लौटे हैं. उनसे पूछताछ की जा रही है.
कैसे पाकिस्तान पहुंच गए थे पूर्णम कुमार?
पूर्णम कुमार, गलती से इंटरनेशनल बॉर्डर क्रॉस करके पाकिस्तान पहुंच गए थे, जिसके बाद पाकिस्तान रेंजर्स ने उन्हें हिरासत में ले लिया. वे पंजाब के फिरोजपुर सेक्टर में तैनात थे. भारत ने 7 मई को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले किए. पाकिस्तान ने भी जवाबी हमले किए, जिससे तनाव बढ़ गया. ऐसे में पूर्णम के परिवार की चिंता और भी बढ़ गई.
पत्नी ने जताई थी उम्मीद
पूर्णम कुमार की पत्नी राजनी ने उम्मीद जताई थी कि डीजीएमओ की बातचीत में पूर्णम कुमार के मुद्दे को उठाया जाएगा. उन्होंने कहा था, 'जब भारतीय सेना ने 3 मई को एक पाकिस्तानी रेंजर को राजस्थान में हिरासत में लिया, तब लगा था कि शायद मेरे पति को भी छोड़ा जाएगा. लेकिन ऐसा नहीं हुआ. अब DGMO वार्ता से नई उम्मीद जगी है.'
राजनी ने यह भी कहा था कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने रविवार को उन्हें फोन किया और हरसंभव मदद का आश्वासन दिया. मुख्यमंत्री ने उनके ससुरालवालों की चिकित्सा सहायता की भी बात कही.
बीएसएफ जवान पूर्णम कुमार शॉ की पत्नी रजनी अपने पति के पाकिस्तान के हिरासत में लिए जाने की कहानी सुना ही रही थी तब ही इसी बीच उन्हें एक कॉल आती है. रजनी हमारा कॉल ऑन रखते हुए दूसरा कॉल पिक करती हैं, दूसरी तरफ से कुछ आवाज आती है और रजनी ऊंची आवाज में कहती हैं क्या बात कर रहे हैं, सच में? तब ही क्विंट के रिपोर्टर ने पूछा क्या हुआ, सब ठीक है? तब रजनी ये बोलते हुए कॉल कट कर देती हैं कि भैया मैं थोड़े देर में कॉल करती हूं.
रजनी के कॉल कट करते ही हमने तुरंत इंटरनेट पर बीएसएफ जवान पूर्णम से जुड़ी जानकारी देखने की कोशिश की. लेकिन हमें पूर्णम के पाकिस्तान में गलती से घुस जाने और परिवार से जुड़ी पुरानी खबरों के अलावा कुछ नया नहीं मिला.
दरअसल, 23 अप्रैल को पहलगाम हमले के बाद पाकिस्तान रेंजर्स ने बीएसएफ के एक जवान पूर्णम कुमार शॉ को हिरासत में ले लिया था. साव गलती से पाकिस्तान बॉर्डर में घुस गए थे. करीब 21 दिन बाद सीमा सुरक्षा बल (BSF) के जवान पूरनम कुमार शॉ को मंगलवार लगभग साढ़े 10 बजे पाकिस्तान ने भारत को सौंप दिया है. पाकिस्तानी रेंजर्स ने अटारी वाघा सीमा के रास्ते बीएसएफ कॉन्स्टेबल को वापस भेजा है.
मूल रूप से पश्चिम बंगाल के रहने वाले हैं शॉ जवान शॉ मूल रूप से पश्चिम बंगाल में हुगली के रिसड़ा गांव के रहने वाले हैं। वह 23 अप्रैल को फिरोजपुर में किसानों के साथ भारत-पाक बॉर्डर पर ड्यूटी कर रहे थे। इस दौरान वह गलती से एक पेड़ के नीचे बैठने के लिए पाकिस्तान की सीमा में दाखिल हो गए। जहां पाकिस्तानी रेंजर्स ने उन्हें पकड़ लिया और अपने साथ ले गए।
क्या है पूरी कहानी?
हिमाचल के कांगड़ा में बीएसएफ के 34 बटालियन में तैनात पूर्णम कुमार की ड्यूटी 16 अप्रैल 2025 को पंजाब के पठानकोट के पास फिरोजपुर में पोस्टिंग हुई थी. 22 अप्रैल को पहलगाम में आतंकियों ने 26 लोगों की जान ले ली. इसी बीच कॉन्स्टेबल पूर्णम कुमार शॉ 23 अप्रैल 2025 को दोपहर 11:50 बजे, फिरोजपुर सेक्टर के क्षेत्र में ड्यूटी के दौरान गलती से पाकिस्तान की सीमा में प्रवेश कर गए, जिसके बाद पाकिस्तानी रेंजर्स ने उन्हें हिरासत में ले लिया.
पहलगाम आतंकी हमला और ऑपरेशन सिंदूर
22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में पाकिस्तान समर्थित आतंकवादियों ने पर्यटकों और नागरिकों पर हमला किया, जिसे 26/11 मुंबई हमलों के बाद भारत में सबसे घातक आतंकी हमलों में से एक माना गया. इस हमले ने भारत की शून्य सहिष्णुता की नीति को और मजबूत किया.
जवाब में, भारत ने 7 मई को ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया, जिसमें भारतीय वायु सेना, थल सेना और नौसेना ने समन्वित रूप से पाकिस्तान और PoK में आतंकी शिविरों को नष्ट किया. इस ऑपरेशन ने न केवल आतंकी बुनियादी ढांचे को ध्वस्त किया, बल्कि पाकिस्तान को यह स्पष्ट संदेश दिया कि भारत किसी भी आतंकी गतिविधि को बर्दाश्त नहीं करेगा.
पाकिस्तान ने इस ऑपरेशन के बाद 7-8 मई की रात को भारत के 15 सैन्य ठिकानों जैसे श्रीनगर, जम्मू, पठानकोट और अमृतसर पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए. हालांकि, भारतीय नौसेना, वायु सेना और थल सेना के एकीकृत प्रयासों ने इन हमलों को पूरी तरह विफल कर दिया. भारतीय नौसेना ने अपनी वाहक युद्ध समूह (Carrier Battle Group) और उन्नत वायु रक्षा तंत्र का उपयोग कर पाकिस्तानी वायु तत्वों को समुद्री क्षेत्र में निष्क्रिय कर दिया.
गर्भवती पत्नी भी फिरोजपुर पहुंची थी 28 अप्रैल को BSF जवान की गर्भवती पत्नी रजनी पश्चिम बंगाल से फिरोजपुर पहुंची थी। यहां उन्होंने BSF के सीनियर अधिकारियों से मुलाकात की। वह 2 दिन फिरोजपुर में रुकी भी रहीं। हालांकि, उनकी तबीयत बिगड़ने की वजह से उन्हें वापस भेजा गया।
क्या है जीरो लाइन और उसका प्रोटोकॉल…
जीरो लाइन बेहद संवेदनशील हिस्सा: जीरो लाइन अंतरराष्ट्रीय सीमा का वह संवेदनशील हिस्सा होता है जहां दो देशों की सीमाएं बेहद पास होती हैं। भारत-पाकिस्तान की जीरो लाइन पर सीमित समय और परिस्थितियों में किसानों को खेती करने की अनुमति दी जाती है।
साथ ही उनकी सुरक्षा के लिए भारत की तरफ से BSF के जवान तैनात किए जाते हैं। इन जवानों को 'किसान गार्ड' भी कहा जाता है।
क्या कहता है प्रोटोकॉल: आमतौर पर ऐसी घटनाओं में 24 घंटे के भीतर जवानों को लौटा दिया जाता है। हालांकि, मौजूदा मामले में ऐसा नहीं किया गया। इस मामले में एक अधिकारी ने बताया कि पहले दोनों देशों के बीच अगर कोई जवान बॉर्डर पार कर लेता था तो फ्लैग मीटिंग के बाद उसे लौटा दिया जाता था। यह सामान्य बात थी, लेकिन पहलगाम में आतंकी हमले के बाद बदले हालात में यह घटना असामान्य हो गई है।
पहले भी गलती से जवान सीमा पार गए ऐसा कई बार हुआ है कि BSF या भारतीय सेना का कोई जवान गलती से जीरो लाइन पार कर गया हो और उसे पाकिस्तान रेंजर्स ने पकड़ लिया हो। बाद में उन्हें रिहा भी कर दिया गया। ऐसे कुछ बड़े मामले जान लीजिए…
2011 में BSF का एक जवान गलती से सीमा पार कर गया था। पाकिस्तान ने उसे करीब 10 दिन तक हिरासत में रखा। बाद में फ्लैग मीटिंग और राजनयिक दबाव के बाद रिहा किया गया।
साल 2016 में पठानकोट हमले के बाद BSF का एक जवान गलती से जम्मू सेक्टर में इंटरनेशनल बॉर्डर पार कर गया था। पाकिस्तान रेंजर्स ने उसे पकड़ लिया। फ्लैग मीटिंग के बाद साबित हो गया कि जवान ने गलती से सीमा पार की थी। उसे 24 घंटे के अंदर लौटा दिया गया।
साल 2020 में एक और BSF जवान गश्त के दौरान फेंसिंग के पार चला गया। पाकिस्तान रेंजर्स ने उसे हिरासत में लिया। कुछ घंटों की बातचीत और जांच के बाद उसे सुरक्षित भारत भेज दिया गया।
ज्यादातर मामलों में गलती से सीमा पार गए जवानों को लौटा दिया है। कुछ मामलों में पाकिस्तान ने जवान को हिरासत में रखा या तुरंत रिहाई से इनकार किया। ऐसा तब हुआ जब सीमा पर तनाव चल रहा हो। हालांकि, कभी कोई जवान गायब नहीं हुआ।
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पाकिस्तान की तरफ से सीमा पर हिमाकत बढ़ती जा रही है। सीमा सुरक्षा बल(BSF) के मुताबिक शुक्रवार और शनिवार की दरमयानी रात जम्मू सेक्टर में पाकिस्तान की तरफ से घुसपैठ की कोशिश की जा रही थी। जवानों को जब इसकी भनक लगी तो उन्होंने इस घुसपैठ की कोशिश को नाकाम कर दिया। इस पूरे घटनाक्रम में एक पाकिस्तानी घुसपैठिए को भी मार गिराया गया है।
बीएसएफ के आधिकारिक प्रवक्ता ने बताया कि शुक्रवार देर रात हमारे जवानों के जम्मू सीमा क्षेत्र के पास लगी अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर कुछ संदिग्ध गतिविधि नजर आई.. जब उन्होंने इस बात पर ध्यान दिया तो वहां पर एक घुसपैठिया सीमा को पार करने की कोशिश कर रहा था। हमारे जवानों से घुसपैठिए को आगे न बढ़ने और अपने आप को सरेंडर करने के लिए कहा…लेकिन उसने कोई जवाब नहीं दिया और आगे बढ़ता रहा.. आखिरकार खतरे को भांपते हुए हमारे जवानों ने उसे मार गिराया।
अधिकारियों ने बताया कि इस मामले को लेकर पाकिस्तानी रेंजर्स के सामने विरोध दर्ज कराया गया है। अभी फिलहाल घुसपैठिए की पहचान और उसके मकसद का पता लगाया जा रहा है।
]]>पश्चिम बंगाल के राज्यपाल डॉ. सी. वी. आनंद बोस ने कहा कि सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) न केवल देश की सीमाओं की रक्षा में उत्कृष्ट कार्य कर रहा है, इसलिए हम चैन की नींद सो पा रहे हैं। इतना ही नहीं बीएसएफ सीमावर्ती समुदायों की सेवा में भी एक अग्रणी भूमिका निभा रहा है।
बीएसएफ की यह पहल सीमावर्ती क्षेत्रों में रह रहे लोगों की जरूरतों को समझने और उन्हें सहयोग प्रदान करने की दिशा में एक प्रेरणादायक उदाहरण है। उन्होंने यह बात 118वीं वाहिनी की सीमा चौकी बांकरा में सीमावर्ती ग्रामीण समुदायों के लिए आयोजित एक मेडिकल कैंप, सिविक एक्शन और सांस्कृतिक कार्यक्रम का शुभारंभ करने के बाद कही। इस मौके पर बीएसएफ दक्षिण बंगाल सीमांत के महानिरीक्षक (आईजी) आईपीएस मनिंदर पी.एस. पवार विशेष तौर पर मौजूद रहे। समारोह में में सैंडरबिल ग्राम पंचायत और आसपास के गांवों से लगभग 1000 ग्रामीणों ने भाग लिया। इस अवसर पर राज्यपाल ने बच्चों को स्टेशनरी, युवाओं को खेल सामग्री और जरूरतमंदों को कंबल व अन्य आवश्यक वस्तुएं वितरित कीं। कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित मुफ्त चिकित्सा शिविर में ग्रामीणों का नि:शुल्क स्वास्थ्य परीक्षण किया गया और आवश्यक दवाइयां प्रदान की गईं। इस पहल का उद्देश्य सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं और अन्य जरूरी सेवाएं उपलब्ध कराना था। कार्यक्रम में क्षेत्रीय मुख्यालय कोलकाता के डीआईजी, बीएसएफ के अन्य वरिष्ठ अधिकारी, राज्य सरकार के स्थानीय प्रशासनिक अधिकारी, चिकित्सा अधिकारी, भारतीय रेड क्रॉस सोसाइटी और अन्य गैर सरकारी संगठनों (एनजीओ) के पदाधिकारी भी उपस्थित रहे।
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