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बीएसपी आवासों में, खासकर बड़े आवासों में केन्द्र और राज्य सरकार के बड़े अफसर लंबे समय से जमे हुए हैं। तत्संबंध में की गई शिकायतों को इस्पात मंत्रालय ने गंभीरता से लिया है। इस्पात मंत्रालय ने बीएसपी मैनेजमेंट से कहा है कि सरकारी अफसरों से आवास खाली कराने की कार्रवाई करें, कम्पनी आवास आवंटित करने की प्रथा को तत्काल प्रभाव से बंद करें।
ज्ञात हो कि सेक्टर 9, सेक्टर 10 सहित अन्य सेक्टरों के बीएसपी आवासों में केन्द्र और खासकर राज्य के सरकारी अफसर बड़ी संख्या में जमे हुए हैं। इनमें आईएएस और आईपीएस सहित अन्य अफसर शामिल हैं। सेक्टर 9 के बड़े आवास तो ज्यादातर सरकारी अफसरों के कब्जे में ही हैं। इनमें से कई अफसर वर्षों पूर्व रिटायर हो चुके हैं या कई का तबादला हो चुका है, बावजूद अपने रुतबे के बल पर आवासों में कब्जा जमाए में हुए हैं। बीएसपी आवासों सरकारी अफसरों के बड़ीसंख्या में कब्जा जमाये रखने की शिकायत केन्द्रीय इस्पात मंत्री, इस्पात सचिव पहुंची तक है।
बीएसपी आफिस स एसोसिएशन ने तो बाकायदा उनके खिलाफ मुहिम ही छेड़ रखा है। एसोसिएशन का कहना है कि सरकारी अफसरों ने बड़े आवासों में बड़ी संख्या में कब्जा जमा रखा है इसके चलते बीएसपी के अफसरों को बड़े आवास नहीं मिल रहे हैं। इस्पात मंत्रालय के दबाव के बाद बीएसपी मैनेजमेंट अब सरकारी अफसरों द्वारा कब्जा जमाकर रखे गए आवासों को खाली कराने की कार्रवाई की जा सकती है।
मैनेजमेंट ऐसे अफसरों की सूची राज्य सरकार को भेजकर भी उनसे आवास खाली कराने का अनुरोध कर सकता है। असल में राज्य के कई बड़े अफसर बीएसपी के बड़े आवासों का इस्तेमाल फार्म हाउस की तरह कर रहे हैं। इन अफसरों के पास राजधानी में भी आवास आवंटित है और वे सप्ताहांत में बीएसपी आवासों में आकर मात्र एक दो दिनों के लिए आते हैं। यह आवास खाली होने पर बीएसपी के बड़े अफसरों को आवंटित किए जा सकेंगे।
जरूरी मामलों को सेल बोर्ड में रखें
इस्पात मंत्रालय ने बीएसपी आवासों में सरकारी अफसरों के कब्जा जमाए रखने की शिकायतों को गंभीरता से लिया है। मंत्रालय की ओर से रिव्यू मीटिंग में राज्य और केन्द्र सरकार के अफसरों को कम्पनी आवास आवंटित करने की मौजदा प्रथा को तत्काल प्रभाव से बंद करने कहा गया।
भिलाई स्टील प्लांट में ई. क्यू. – 1 ( केवल सी 3 टाइप) / एन क्यू-4 (रूआबांधा सेक्टर) के चिन्हित एवं सूचीबद्ध आवास लायसेंस योजना के तहत 11 माह की अवधि के लिए एक बार आवंटन के लिए नगर सेवाएं विभाग ने आवेदन आमंत्रित किया है। सुरक्षा निधि के रूप में सी -3 टाइप के लिए 10 लाख रु. एवं एनक्यू-4 श्रेणी रुआंबांधा सेक्टर के लिए 8 लाख रु. सहित 11 माह की किराया राशि एडवांस में जमा करनी होगी।
अफसरों को 3600 रु. और कर्मियों को 1800 रु. प्रतिमाह किराया देना होगा। ज्ञात हो कि लाइसेंस योजना के तहत अफसरों कोसी 3 टाइप और कर्मियों को एनक्यू-4 श्रेणी के आवास आवंटित किए जाएंगे। खास बात यह है कि इन आवासों का रिनोवेशन करने के लिए मैनेजमेंट सहमत है। कारण, विगत वर्ष इस योजना को लांच किए जाने पर बहुत अच्छा रिस्पांस नहीं मिला था। अब चूंकि इन आवासों का रिनोवेशन किया जाना प्रस्तावित है और रिटेंशन स्कीम बंद कर दी गई है इसलिए इस बार लाइसेंस योजना को अच्छा रिस्पांस मिलने की संभावना है।
पहले आओ पहले पाओ
योजना के लिए प्रस्तावित आवास पहले आओ पहले पाओ के आधार पर आवंटित किया जाएगा। किसी एक आवास के विरूद्ध दो या अधिक आवेदन एक साथ प्राप्त होने पर लाटरी से चयन कर आबंटन की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। यह लाटरी नगर सेवाएं विभाग के महाप्रबंधक स्तर के अधिकारी के माध्यम से होगा। ऐसे कार्यपालक / गैर कार्यपालक जिनके स्वयं या पति/पत्नी के नाम पर भिलाई इस्पात संयंत्र के 20 किलोमीटर की परिधि क्षेत्र में आवास आबंटित है इस योजना के लिए पात्र नहीं होंगे एवं सभी आवेदकों को तत्संबंधी एक शपथपत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। आवास आबंटी को निर्धारित प्रपत्र के अनुसार (रू.50/- का नॉन ज्यूडिशियल स्टैंप पेपर) पर अनुबंध पत्र जमा करना होगा।
सुरक्षा निधि पर ब्याज नहीं मिलेगा
प्रबंधन द्वारा सुरक्षानिधि पर किसी भी प्रकार का ब्याज देय नहीं होगा। आवास रिक्त करने के पश्चात आवेदन देकर सुरक्षा निधि प्राप्त की जा सकती है। बिलों के भुगतान या अन्य राशि लंबित होने की दशा में बकाया राशि के समायोजन के पश्चात ही शेष राशि लौटाई जाएगी। विस्तृत जानकारी के लिए नगर सेवा विभाग के हाउसिंग लाइसेंस सेल से संपर्क किया जा सकता है।