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केंद्र और राज्य में डबल इंजन की सरकार का असर अब स्पष्ट रूप से सामने आने लगा है। वर्ष 2025-26 में केंद्रीय करों के हिस्से में 1,11,661 करोड़ रुपये मिलेंगे यानी वर्तमान वित्तीय वर्ष की तुलना में 15,908 करोड़ रुपये राज्य को अधिक मिलेंगे।
इतना ही नहीं विभिन्न केंद्रीय योजनाओं में सहायता अनुदान 45 हजार करोड़ रुपये के आसपास मिलेगा। दोनों राशि को मिला दिया जाए तो प्रदेश को आगामी वित्तीय वर्ष में डेढ़ लाख करोड़ रुपये से अधिक मिलेंगे।
5,247 करोड़ रुपये अतिरिक्त मिलेंगे
वहीं, 2024-25 के पुनरीक्षित अनुमान के अनुसार केंद्रीय करों के हिस्से में अब 5,247 करोड़ रुपये अतिरिक्त प्राप्त होंगे। उल्लेखनीय है कि नईदुनिया ने 'डबल इंजन के भरोसे मोहन सरकार, जागी डेढ़ लाख करोड़ मिलने की उम्मीद' शीर्षक से प्रकाशित खबर में पहले ही बता दिया कि आगामी वर्ष में प्रदेश को डेढ़ लाख करोड़ रुपये मिल सकते हैं।
जीएसटी के बाद प्रदेश के बजट का मुख्य आधार केंद्र सरकार से मिलने वाली सहायता होता है। वर्ष 2024-25 के बजट में एक लाख 40 हजार करोड़ रुपये के आसपास केंद्रीय करों में हिस्सा और केंद्रीय सहायता अनुदान मिलने का अनुमान लगाया गया था।
7.82 प्रतिशत के हिसाब से राशि मिलती है
अब इससे अधिक राशि राज्य को प्राप्त हो रही है। दरअसल, राज्यों को केंद्र सरकार कुल राजस्व का 41 प्रतिशत केंद्रीय करों में हिस्से के रूप में देती है। इसमें मध्य प्रदेश को 7.82 प्रतिशत के हिसाब से राशि मिलती है।
वर्तमान वित्तीय वर्ष के लिए यह 95 हजार 753 करोड़ रुपये अनुमानित थी। केंद्रीय करों से प्राप्त राशि के अनुपात में अब राज्य को 5,247 करोड़ रुपये अधिक प्राप्त होंगे। इसका उपयोग सरकार विकास परियोजनाओं को गति देने में करेगी।
यह राशि अगले वित्तीय वर्ष में 15,908 रुपये बढ़कर मिलेगी। केंद्रीय योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए सहायता अनुदान 45 हजार करोड़ रुपये से अधिक मिलेगा। यह लगभग 600 करोड़ रुपये अधिक रहेगा। निश्चित ही इसका असर योजनाओं के क्रियान्वयन पर पड़ेगा।
12 हजार करोड़ रुपये मिलेगी विशेष पूंजीगत सहायता
बजट में सरकार ने अधोसंरचना विकास को गति देने के लिए विशेष पूंजीगत सहायता योजना को निरंतर रखने का निर्णय लिया है। प्रदेश में पूंजीगत व्यय लगातार बढ़ाया जा रहा है। वर्ष 2024-25 में 15 हजार करोड़ रुपये प्राप्त करने के लक्ष्य रखा गया था।
6,187 करोड़ रुपये मिल चुके हैं और सात हजार करोड़ रुपये के प्रस्ताव भेजे गए हैं। सरकार को उम्मीद है कि आगामी वित्तीय वर्ष में भी 12 हजार करोड़ रुपये से अधिक इस योजना में प्रदेश को मिल जाएंगे। उल्लेखनीय है कि प्रदेश सरकार ने वर्तमान वित्तीय वर्ष में 64,738 करोड़ रुपये पूंजीगत निवेश का लक्ष्य रहा है।
जीएसडीपी का तीन प्रतिशत तक ऋण ले सकती है सरकार
राज्य सरकार ने बजट पूर्व बैठक में केंद्रीय वित्त मंत्री के समक्ष सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) के अनुपात में चार प्रतिशत तक ऋण लेने की अनुमति देने की मांग रखी थी, लेकिन इसे नहीं माना गया।
प्रदेश जीएसडीपी के अनुपात में तीन प्रतिशत तक ही भारतीय रिर्जव बैंक के माध्यम से बाजार से ऋण ले सकता है। आधा प्रतिशत ऋण ऊर्जा के क्षेत्र में सुधार के लिए निर्धारित कदम उठाने के लिए लिया जा सकता है। उल्लेखनीय है कि मार्च के प्रथम सप्ताह में जब 16वां वित्त आयोग आएगा तो एक बार फिर इस मुद्दे को बेहतर वित्तीय प्रबंधन का हवाला देकर उठाया जाएगा।
अब बजट को अंतिम रूप देने को जुटेगी राज्य सरकार
सूत्रों का कहना है कि आम बजट से प्रदेश को आगामी वित्तीय वर्ष में मिलने वाली राशि को लेकर स्थिति स्पष्ट हो गई है।
इसके आधार पर अब प्रदेश सरकार अपने बजट को अंतिम रूप देने में जुटेगी। यह इस बार चार लाख करोड़ रुपये तक हो सकता है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 15 फरवरी के पहले बजट को लेकर मंत्रियों और अधिकारियों के साथ बैठक करेंगे।
]]>केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जम्मू कश्मीर को 41,000.07 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं, जो अगस्त 2019 में अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के बाद केंद्र शासित प्रदेश बन गया। बजट में अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह को 6,212.06 करोड़ रुपये, चंडीगढ़ को 6,187.48 करोड़ रुपये, दादरा एवं नगर हवेली तथा दमन एवं दीव को 2,780 करोड़ रुपये, लद्दाख को 4,692.15 करोड़ रुपये, लक्षद्वीप को 1,586.16 करोड़ रुपये तथा पुडुचेरी को 3,432.20 करोड़ रुपये दिए गए हैं।
बजट में जनगणना से जुड़े काम के लिए मात्र 574.80 करोड़ रुपये (2024-25 में 572 करोड़ रुपये) आवंटित किए गए हैं, जिससे स्पष्ट संकेत मिलता है कि इस कवायद में और देरी होगी। जनगणना 2020-21 में होनी थी, लेकिन कोविड-19 महामारी के कारण इसे स्थगित कर दिया गया था। अर्धसैनिक बलों में सीआरपीएफ को 35,147.17 करोड़ रुपये ,बीएसएफ को 28,231.27 करोड़ रुपये, सीआईएसएफ को 16,084.83 करोड़ रुपये, भारत तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) को 10,370 करोड़ रुपये, सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) को 10,237.28 करोड़ रुपये और असम राइफल्स को 8,274.29 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। खुफिया ब्यूरो (आईबी) को 3,893.35 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।
राष्ट्रीय आपदा मोचन बल(एनडीआरएफ) को 1,922.59 करोड़ रुपये आवंटित किए गए। सीमा अवसंरचना एवं प्रबंधन के लिए 5,597.25 करोड़ रुपये, पुलिस अवसंरचना के विकास के लिए 4,379.20 करोड़ रुपये, महिला सुरक्षा से संबंधित योजनाओं के लिए 960.12 करोड़ रुपये, सुरक्षा संबंधी व्यय के लिए 4,876.34 करोड़ रुपये और (सीमावर्ती क्षेत्रों में) ‘वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम' के लिए 1,056.40 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।
बजट में मंत्रिमंडल को 1,024.30 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जिसके अंतर्गत मंत्रिपरिषद, कैबिनेट सचिवालय, प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ), सरकार के आतिथ्य पर होने वाले व्यय आते हैं। वहीं, प्राकृतिक आपदाओं के कारण राहत सहित विभिन्न सामाजिक सेवा गतिविधियों के लिए 2,721.20 करोड़ रुपये आवंटित किये गए हैं। सुरक्षित शहर परियोजना के लिए 215.34 करोड़ रुपये, राज्य सरकारों को अनुदान सहायता 3,494.39 करोड़ रुपये, केंद्र शासित प्रदेश सरकारों को अनुदान सहायता 1,515.02 करोड़ रुपये तथा पूर्वोत्तर क्षेत्र पर पूंजीगत परिव्यय के लिए 810.00 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।
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आज संसद में पीएम नरेंद्र मोदी सरकार के तीसरी पारी का पहल संपूर्ण बजट (Union Budget 2025) केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) द्वारा पेश किया गया. इस बार के बजट में किसानों, महिलाओं, शिक्षा, मेडिकल, MSME और स्टार्ट-अप के अलावा मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए भी कई बड़े ऐलान किए गए हैं. जिनमें इलेक्ट्रिक वाहनों (Electric Vehicles) में इस्तेमाल होने वाले लिथियम आयर बैटरी मैन्युफैक्चरिंग में मिलने वाली छूट भी शामिल है. इससे इलेक्ट्रिक वाहनों के सस्ते होने की उम्मीद है.
बजट भाषण के दौरान केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि, "कोबाल्ट पाउडर और अपशिष्ट, लिथियम आयन बैटरी (Lithium-Ion Battery) के स्क्रैप, सीसा, जस्ता और 12 अन्य महत्वपूर्ण खनिजों को छूट दी जाएगी. इसके अलावा इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए लिथियम-आयन बैटरी निर्माण हेतु 35 अतिरिक्त वस्तुओं को सीमा शुल्क से छूट दी जाएगी."
नेशनल मैन्युफैक्चरिंग मिशन को मजबूती:
इस बार के बजट में किसानों, महिलाओं, शिक्षा, मेडिकल, MSME और स्टार्ट-अप के अलावा मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए भी कई बड़े ऐलान किए गए हैं. सरकार की मेक इन इंडिया योजना को और बढ़ावा देने के लिए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ऐलान किया है कि, नेशनल मैन्युफैक्चरिंग मिशन (National Manufacturing Mission) को और भी मजबूत किया जाएगा, जिसका लाभ ऑटो सेक्टर को भी मिलेगा.
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए कई बड़े ऐलान किए. इस दौरान उन्होनें अपने स्पीच में कहा कि, "हमारी सरकार एक नेशनल मैन्युफैक्चरिंग मिशन का सेटअप करेगी. जो बड़े, मध्यम और छोटे इंडस्ट्री को कवर करेगा. यह मिशन केंद्रीय मंत्रालयों और राज्यों दोनों के लिए पॉलिसी सपोर्ट, एक्जीक्यूशन रोडमैप के साथ गर्वनेंस और मॉनिटरिंग का फ्रेमवर्क प्रदान करेगा.
उन्होंने कहा कि, "ये मिशन पर्यावरण को बेहतर बनाने के लिए क्लाइमेट फ्रेंडली डेवलपमेंट साथ-साथ क्लीन टेक मैन्युफैक्चरिंग को भी बेहतर बनाएगा. इस स्कीम का लक्ष्य डोमेस्टिक वैल्यू एडिशन को बेहतर बनाना है. जिसके तहत सोलर पीवी सेल्स, इलेक्ट्रिक व्हीकल बैटरी, मोटर, कंट्रोलर, इलेक्ट्रोलाइसर्स, विंड टर्बाइन, हाई वोल्टेज ट्रांसमिशन और ग्रिड स्केल बैटरी की मैन्युफैक्चरिंग को सहयोग देना है."
स्टार्ट-अप के लिए 20 करोड़ का लोन:
इस बार के बजट में स्टार्ट-अप को भी एक बड़ा तोहफा मिला है. वित्त मंत्री ने अपने भाषण में कहा कि, "स्टार्ट-अप के लिए लोन अमाउंट सीमा को बढ़ाकर अब 20 करोड़ रुपये कर दिया गया है. जो अब तक 10 करोड़ रुपये तक की सीमित था. ये सपोर्ट स्टार्ट-अप सेक्टर के 27 अलग-अलग एरिया में दिया जाएगा."
जाहिर है कि, इसका बड़ा लाभ देश के ऑटो सेक्टर में भी देखने को मिलेगा. बीते कुछ सालों में देश में कई नए स्टार्ट-अप ने एंट्री की है जो इलेक्ट्रिक वाहनों के निर्माण और बिक्री से जुड़े हैं. इसके अलावा सरकार द्वारा ईवी बैटरी, कंपोनेंट मैक्न्युफैक्चरिंग और मोटर सेक्टर को दिया जाने वाला सहयोग भी ऑटो इंडस्ट्री को बड़ा बल देगा.
बजट 2025 पेश होने के साथ ही टेक दुनिया में हलचल तेज हो गई है और मैन्युफैक्चरर्स से लेकर ग्राहकों तक के लिए यह बजट अच्छी खबरें लेकर आया है। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने घोषणा की है कि ढेरों डिवाइसेज की मैन्युफैक्चरिंग में लगने वाले पार्ट्स से इंपोर्ट ड्यूटी घटाई जा रही हैं। इसका सीधा फायदा यह होगा कि स्मार्टफोन्स, स्मार्ट टीवी और अन्य इलेक्ट्रॉनिक्स सस्ते होने वाले हैं।
बजट में मोबाइल फोन पर कस्टम ड्यूटी कम करने की घोषणा की गई है। इससे भारत में मैन्युफैक्चर होने वाले मोबाइल फोन्स की लागत कम होगी, जिसका सीधा फायदा ग्राहकों को मिलेगा। उन्हें नए स्मार्टफोन खरीदने के लिए कम खर्च करना पड़ेगा। मोबाइल कंपनियों ने सरकार से इंपोर्ट ड्यूटी कम करने की मांग की थी, ताकि ग्राहकों को फायदा हो सके और सरकार ने इस मांग को स्वीकार कर लिया है।
स्थानीय मैन्युफैक्चरिंग का मिलेगा फायदा
भारत में बैटरी मैन्युफैक्चरिंग पर जोर दिया जा रहा है। लिथियम-आयन बैटरी बनाने वाले घरेलू निर्माताओं को बढ़ावा दिया जाएगा। इससे देश में मोबाइल बैटरी बनाने की लागत कम होगी। मोबाइल फोन के साथ-साथ अन्य इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट्स जैसे LED-LCD टीवी के दाम भी कम किए जाएंगे। इन पर लगने वाली कस्टम ड्यूटी भी कम कर दी गई है।
बता दें, इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) और स्मार्टफोन्स की बढ़ती मांग को देखते हुए सरकार ने EV बैटरी बनाने में इस्तेमाल होने वाले 35 एडिशनल गुड्स और मोबाइल फोन बैटरी प्रोडक्शन में यूज होने वाले 28 एडिशनल गुड्स को छूट पाने वाले कैपिटल गुड्स की लिस्ट में शामिल करने का फैसला लिया है। इस तरह बैटरी मैन्युफैक्चरिंग भी सस्ते में होगी।
आसान भाषा में समझें तो इलेक्ट्रॉनिक्स या स्मार्टफोन्स की मैन्युफैक्चरिंग में लगने वाला खर्च कम हो गया है। ठीक इसी तरह बैटरी की लागत भी कम कर दी गई है। यही वजह है कि अब इन चीजों की कीमतें ग्राहकों के लिए भी घट सकती हैं और ये घोषणाएं सकारात्मक बदलाव दर्शाती हैं।
]]>वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मिडिल क्लास को बड़ा तोहफा दिया है। बजट भाषण के दौरान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि अब 12 लाख रुपये तक की आय पर कोई टैक्स नहीं लगेगा।
वित्त मंत्री ने प्रत्यक्ष कर पर बजट में कहा कि नए आयकर विधेयक में न्याय की भावना को प्रमुखता दी जाएगी। उन्होंने कहा कि टीडीएस की सीमा में बदलाव किए जाएंगे ताकि इसमें एकरूपता लाई जा सके। वरिष्ठ नागरिकों के लिए टीडीएस में छूट की सीमा को 50 हजार से बढ़ाकर एक लाख रुपये किया जाएगा। किराए से होने वाली आमदनी पर टीडीएस में छूट की सीमा को बढ़ाकर छह लाख रुपये किया जाएगा।
नॉन-पैन मामलों में उच्च टीडीएस के प्रावधान लागू रहेंगे। अपडेटेड रिटर्न दाखिल करने की सीमा को दो साल से बढ़ाकर चार साल किया जा रहा है।
वित्त मंत्री के बजट 2024 के अनुसार पहले किसी करदाता की सालाना आय 7 लाख 75 हजार रुपये तो स्टैंडर्ड डिडक्शन के 75,000 रुपये घटाने के बाद उसकी आमदनी 7 लाख रुपये सालाना हो जाती थी। ऐसे में उसे कोई टैक्स नहीं देना पड़ता था। इसका मतलब है अगर किसी व्यक्ति का मासिक वेतन 64000 या 64500 रुपये के आसपास थी तो नई कर प्रणाली के तहत उसकी आमदनी टैक्स फ्री थी।
वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य देश के मध्यमवर्गीय नागरिकों को आर्थिक मजबूती देना और उनके खर्च को संतुलित करना है। इस छूट से नौकरीपेशा और छोटे व्यवसायियों को सबसे ज्यादा फायदा होगा।
वित्त मंत्री ने कहा कि टीडीएस की प्रक्रिया को आसान बनाया जाएगा. सीनियर सिटिजन्स के लिए टैक्स छूट दोगुनी की जाती है. उनके लिए ब्याज पर छूट 50 हजार से बढ़ाकर 1 लाख की जा रही है. उन्होंने कहा कि TDS-TCS में कमी की जाएगी.
मोदी सरकार के बजट में गरीबी, युवाओं, किसानों और गरीबों पर फोकस किया गया. वहीं मिडिल क्लास का जिक्र अपने बजट से शुरुआत में करने के साथ ही वित्त मंत्री ने मिडिल क्लास से लिए सस्ते-महंगे की लिस्ट तो जारी कर दी, इसके साथ ही उन्होंने सबसे बड़ा ऐलान कर गया, जिसका इतंजार मिडिल क्लास को था . उन्होंने 12 लाख रुपये तक की इनकम को टैक्स फ्री कर दिया. यानी 12 लाख रुपये तक की इनकम पर कोई टैक्स नहीं लगेगा. न्यू टैक्स रिजीम में 12 लाख रुपये तक की कमाई पर कोई टैक्स नहीं लगेगा. वहीं स्टैंडर्ड डिडक्शन 75 हजार रुपये है.
बजट में अब तक के सबसे बड़े ऐलान
12 लाख तक की कमाई पर कोई इनकम टैक्स नहीं लगेगा.
वित्त मंत्री ने कहा- न्यू इनकम टैक्स बिल अगले हफ्ते लाया जाएगा. इन डायरेक्ट टैक्स रिफॉर्म को बाद में बताएंगे.
कैंसर की दवाएं सस्ती होंगी, पिछले 4 साल का IT रिटर्न एकसाथ फाइल कर सकेंगे.
वरिष्ठ नागरिकों के लिए TDS की सीमा 50 हजार से बढ़ाकर 1 लाख कर दी गई है.
इनकम टैक्स फाइलिंग की सीमा को 2 साल से बढ़ाकर 4 साल कर दिया है.
अगले 6 साल मसूर, तुअर जैसी दालों की पैदावार बढ़ाने के लिए फोकस रहेगा.
किसान क्रेडिट कार्ड पर कर्ज की लिमिट 3 लाख से बढ़ाकर 5 लाख होगी.
बिहार में मखाना बोर्ड बनेगा, इससे छोटे किसानों और व्यापारियों को फायदा.
छोटे उद्योगों को विशेष क्रेडिट कार्ड, पहले साल 10 लाख कार्ड जारी होंगे.
MSME के लिए लोन गारंटी कवर 5 करोड़ से बढ़ाकर 10 करोड़, 1.5 लाख करोड़ तक का कर्ज मिलेगा.
स्टार्टअप के लिए लोन 10 करोड़ से बढ़ाकर 20 करोड़ रुपए किया जाएगा। गारंटी फीस में भी कमी होगी.
]]>संसद में बजट सत्र की शुरुआत शुक्रवार, 31 जनवरी को हो चुकी है. बजट सत्र की शुरुआत (Budget Session 2025) राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अभिभाषण से हुई. राष्ट्रपति मुर्मू ने अपने अभिभाषण में दोनों सदनों को संबोधित किया. आइए जानते हैं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने अभिभाषण में क्या कहा?
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अभिभाषण की 10 बड़ी बातें
1. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संबोाधित करते हुए संविधान निर्माताओं को नमन किया और प्रयागराज में चल रहे महाकुंभ में मौनी आमास्या के दिन हुए हादसे पर दुख जताया. उन्होंने कहा किसानों के हित में कई निर्णय हुए. सरकार युवाओं, गरीबों के लिए काम कर रही है. भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने जा रही है. देश तेज गति से आगे बढ़ रहा है. किसान, गरीब सरकार की प्राथमिकता रही है. एक देश एक चुनाव पर सरकार काम कर रही है.
2. युवाओं की शिक्षा और रोजगार पर विशेष फोकस है. मेधावी छात्रों के लिए विशेष योजना है. 1 करोड़ कंपनियों को इंटर्नशिप की अवसर मिलेगा. पेपरलीक की घटना रोकने के लिए नया कानून.
3. सरकार नारी शक्ति को मजबूत करने पर भी काम कर रही है. सरकारी योजनाओं से गरीबों को सम्मान मिला है. सरकार का मंत्र सबका साथ, सबका विकास है. इस सरकार में आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत 70 वर्ष और उससे अधिक उम्र के 6 करोड़ वरिष्ठ नागरिकों को स्वास्थ्य बीमा देने का फैसला हुआ है. 2 करोड़ 25 लाख स्वामित्व कार्ड जारी किए हैं. 70 लाख स्वामित्व कार्ड पिछले 6 महीने में जारी किए हैं. पीएम किसान सम्मान निधि योजना के तहत करोड़ों किसानों को पिछले महीने में 41 हजार करोड़ रुपये का भुगतान किया गया. छोटे उद्यमियों के लिए मुद्रा ऋण की सीमा 10 लाख से बढ़ाकर 20 लाख रुपये की गई.
4. देश में वंदेभारत, अमृत भारत और नमो भारत ट्रेन चल रही है. पिछले छह महीने में 17 नई वंदेभारत और एक नमो भारत ट्रेन को जोड़ा गया. उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक परियोजना पूरी हो गई है और अब देश कश्मीर से कन्याकुमारी तक रेलवे लाइन से जुड़ जाएगा. इसके अलावा सरकार ने वक्फ बोर्ड और एक राष्ट्र एक चुनाव जैसे मुद्दों पर बड़े निर्णय लिए. GST का फायदा सभी राज्यों को मिला है.
5. सरकार महिलाओं के नेतृत्व में देश को सशक्त बनाने में, यानी ‘वूमेन लेड डेवलपमेंट' में विश्वास करती है. नारी शक्ति वंदन अधिनियम के जरिए लोकसभा और विधानसभा में आरक्षण जैसा बड़ा कदम उठाया है. राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के जरिए 91 लाख से अधिक स्वयं सहायता समूहों को सशक्त किया जा रहा है. 10 करोड़ से अधिक महिलाओं को जोड़ा. 9 लाख से अधिक की राशि दी जा रही है. 3 करोड़ लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य है. एक करोड़ 15 लाख से अधिक लखपति दीदी गरिमामयी जीवन जी रही हैं. केंद्र सरकार महिला नीत विकास (वूमेन लेड डेवलपमेंट) और महिलाओं के नेतृत्व में भारत को सशक्त बनाने में विशास करती है.
6. 2, 000 करोड़ रुपये की लागत से ‘मिशन मौसम' प्रारम्भ किया गया है, जिसका लाभ हमारे किसानों को भी मिलेगा.पूर्वोत्तर के लोगों में अलगाव की भावना को समाप्त करने का प्रयास किया है. पूरा देश उत्तर-पूर्व के आठ राज्यों की क्षमता को देख सके, इसके लिए प्रथम अष्टलक्ष्मी महोत्सव आयोजित किया गया. अनुच्छेद 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर में विकास का वातारण हुआ है. कश्मीर से कन्याकुमारी तक रेल कनेक्टिविटी शुरू की गई है. कश्मीर में दुनिया का सबसे ऊंचा रेल ब्रिज बना.
7. सरकार ने 8वें वेतन आयोग के गठन का निर्णय लिया है. इससे केंद्र सरकार के कर्मचारियों को बहुत फायद मिलेगा. डिजिटल धोखाधड़ी, साइबर अपराध और ‘डीपफेक' सामाजिक, आर्थिक और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए चुनौती. इंडिया एआई मिशन शुरू किया गया है. एआई डिजिटल तकनीक में भारत दुनिया को रास्ता दिखा रहा है.
राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा,"वह दिन दूर नहीं जब भारत अपना मानव अंतरिक्ष उड़ान गगनयान लॉन्च करेगा। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में भारत के योगदान को आगे बढ़ाने के लिए सरकार ने 'भारत AI मिशन' शुरू किया है।"
हाल ही में महाकुंभ में संगम हादसे का जिक्र करते हुए राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा,"ऐतिहासिक महाकुंभ चल रहा है। यह हमारी सांस्कृतिक परंपराओं और सामाजिक जागृति का त्योहार है. भारत और दुनिया के करोड़ों श्रद्धालुओं ने प्रयागराज में पवित्र डुबकी लगाई है। मौनी अमावस्या के दिन हुई दुर्घटना पर संवेदना व्यक्त करती हूं और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना करती हूं।''
रष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि समाज के पिछड़े वर्ग और सफाई कर्मचारियों को आसान लोन मुहैया कराने के लिए पीएम सूरज योजना का विस्तार किया गया है। पूरा देश नॉर्थ ईस्ट के आठ राज्यों की संभावनाओं को देख सके, इस दिशा में, पहले अष्टलक्ष्मी महोत्सव का आयोजन किया गया।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा,"कश्मीर में दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे ब्रिज बनाया गाया। कैंसर की दवाओं से कस्टम ड्यूटी खत्म किया गया। भारत दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक है।"
राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा,"मेरी सरकार ने Ease of doing business को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। दशकों तक हमारे देश के रेहड़ी-पटरी पर दुकान लगाकर आजीविका चलाने वाले भाई-बहन बैंकिंग व्यवस्था से बाहर रहे। आज उन्हें पीएम स्वनिधि योजना का लाभ मिल रहा है।"
]]>किस तरह की घोषणाएं हो सकती हैं
पहली घोषणा एविएशन इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश पर हो सकती है. सरकार ने पहले ही संकेत दिया है कि वह एयरपोर्ट्स और एयरलाइन सेवाओं के लिए भारी निवेश करने की योजना बना रही है. यह निवेश न केवल मौजूदा एयरपोर्ट्स के विस्तार के लिए होगा, बल्कि नए हवाई अड्डों के निर्माण के लिए भी होगा. इससे घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है. दूसरी घोषणा नए एयरलाइंस के लाइसेंस को लेकर हो सकती है. दरअसल, सरकार नए एयरलाइंस को लाइसेंस देने पर विचार कर रही है, जिससे कंपटीशन बढ़ेगा और यात्रियों को बेहतर सेवाएं मिलेंगी. इससे मौजूदा एयरलाइंस को भी अपने सेवा स्तर को सुधारने पर विचार करना पड़ेगा.
तीसरी घोषणा विमानन ईंधन पर टैक्स में छूट पर हो सकती है. विमानन ईंधन पर टैक्स में छूट देने का प्रस्ताव भी चर्चा में है. इससे एयरलाइंस की संचालन लागत कम होगी, जिससे वे टिकटों की कीमतों को प्रतिस्पर्धी बनाए रख सकेंगी. चौथी घोषणा सुरक्षा और तकनीकी सुधार पर हो सकती है. बजट में सुरक्षा उपायों को मजबूत करने और नई तकनीकों को अपनाने के लिए फंडिंग की घोषणा की जा सकती है. इससे न केवल सुरक्षा बढ़ेगी, बल्कि हवाई जहाज से यात्रा का अनुभव भी बेहतर होगा. 5वीं घोषणा डिजिटलाइजेशन और स्मार्ट एयरपोर्ट्स पर हो सकती है. दरअसल, सरकार स्मार्ट एयरपोर्ट्स के विकास पर जोर दे सकती है, जिसमें डिजिटल तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा. इससे यात्रियों को सुविधाजनक यात्रा अनुभव मिलेगा.
शेयर बाजार पर प्रभाव
इन संभावित घोषणाओं का सीधा असर एविएशन सेक्टर की कंपनियों के शेयरों पर पड़ सकता है. अगर बजट में सकारात्मक घोषणाएं होती हैं, तो कंपनियों जैसे इंडिगो, स्पाइसजेट और एअर इंडिया के शेयरों में तेजी देखने को मिल सकती है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर सरकार ने विमानन ईंधन पर टैक्स में छूट देने का निर्णय लिया, तो यह एयरलाइंस के प्रॉफिट को बढ़ा सकता है.
नई व्यवस्था के तहत किराये पर दी गई संपत्तियों के लिए कुछ रियायतें हैं. उदाहरण के लिए, आयकर अधिनियम की धारा 24 के अनुसार टैक्स योग्य किराये की इनकम से होम लोन ब्याज की कटौती की कोई सीमा नहीं है. हालांकि लोन पर ब्याज अक्सर किराये की आय से अधिक होता है, जिससे संपत्ति के मालिक को नुकसान होता है. दुर्भाग्य से, इस नुकसान की भरपाई अन्य स्रोतों से आय से नहीं की जा सकती है या नई टैक्स व्यवस्था में आगे नहीं बढ़ाई जा सकती है.
ICAI ने नई टैक्स व्यवस्था के तहत घर की प्रॉपर्टी से इनकम पर टैक्स के संबंध में तीन सिफारिशें पेश की हैं. आईसीएआई ने सरकार से रिक्वेस्ट किया है कि नई टैक्स व्यवस्था (New Tax Regime) के तहत 2 लाख रुपये तक के ब्याज पर कटौती की अनुमति दी जाए. आईसीएआई ने यह भी सुझाव दिया है कि मकान संपत्ति से होने वाले नुकसान को अन्य चीजों के अंतर्गत होने वाली आय से समायोजित करने की अनुमति दी जानी चाहिए. ऐसे मामलों में जहां किसी अन्य मद के अंतर्गत कोई आय नहीं है, आईसीएआई का प्रस्ताव है कि हानि को आगामी 8 टैक्स निर्धारण वर्षों के लिए गृह संपत्ति से आय के विरुद्ध समायोजित करने के लिए पात्र होना चाहिए. होम लोन लेने वालों और उद्योग विशेषज्ञों दोनों को उम्मीद है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) बेहतर टैक्स लाभ की उनकी लंबे समय से चली आ रही मांगों पर ध्यान देंगी.
पुरानी टैक्स व्यवस्था के तहत होम लोन
नई व्यवस्था लागू होने के बाद से पुरानी टैक्स व्यवस्था (Old Tax Regime) में कोई नई या बेहतर कर छूट लागू नहीं होने के बावजूद, विशेषज्ञ छूट में वृद्धि की वकालत कर रहे हैं. यह शहरी भारत में घर के स्वामित्व की बढ़ती लागत के जवाब में है. विशेषज्ञों का मानना है कि पुरानी टैक्स व्यवस्था में धारा 80सी और 24बी के तहत प्रदान की जाने वाली वर्तमान टैक्स कटौती अपर्याप्त है और वे घर के मालिकाना हक को और अधिक किफायती बनाने के लिए सुधारों की मांग कर रहे हैं.