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मध्यप्रदेश के भोपाल शहर में अवैध कॉलोनियों पर कार्रवाई का सिलसिला शुरु होने जा रहा है। हुजूर तहसील ने इसके लिए तहसीलदार आलोक पारे के नेतृत्व में टीम गठित की है। आज टीएल बैठक के बाद कार्रवाई शुरू होगी। ईंटखेड़ी और कृषि भूमि पर अवैध कॉलोनियों के निर्माण को हटाया जाएगा।
जानकारी के लिए बता दें कि इस दौरान संबंधित पर एफआइआर भी कराएंगे। ज्ञात हो कि प्रशासन पहले ही अवैध कॉलोनियां विकसित करने वाले 12 कॉलोनाइजर्स पर केस दर्ज कर चुका है। प्रशासन ने 31 गांवों में 113 अवैध कॉलोनियों चिह्नित की है। नामजद सूची तैयार की गई।
अवैध कॉलोनियों की भरमार
भोपाल में बीते कई दिनों से हुजूर और बैरसिया तहसील में एफआईआर दर्ज कराने की कार्रवाई तेज है, लेकिन कोलार, गोविंदपुरा, एमपी नगर और बैरागढ़ सर्किल के एसडीएम अवैध कॉलोनियों के खिलाफ कार्रवाई करने के मामले में गंभीर नजर नहीं आ रहे। जबकि, कलेक्टर इस मुद्दे पर पहले ही नाराजगी जता चुके हैं। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि अफसर अब किस आदेश का इंतजार कर रहे हैं।
लोगों से अपील- ‘इन्वेस्टमेंट नहीं करें’
जिला प्रशासन एवं जिला पंचायत की संयुक्त सर्वे रिपोर्ट पर हुजूर क्षेत्र की सवा सौ ऐसी कॉलोनियों को चिह्नित किया गया है, जिनमें बगैर किसी अनुमति के ही निर्माण कर लिया है। अवैध कब्जों को देखते हुए लोगों से अपील की है कि इन कॉलोनी में इन्वेस्टमेंट नहीं करें। जिन लोगों ने इन्वेस्टमेंट कर लिया है, उन्हें सुनवाई का मौका दिया जाएगा। जिला प्रशासन अवैध तरीके से की गई प्लॉटिंग और कंस्ट्रक्शन पर मप्र सरकार के निर्देशानुसार बुलडोजर चलाएगा।
90% कॉलोनियां किसानों की भूमि पर
बीते दिनों जांच करने पर ये जानकारी मिली है कि 90 प्रतिशत अवैध कॉलोनियां किसानों की जमीन पर हैं। हुजूर, कोलार, बैरसिया और गोविंदपुरा तहसील क्षेत्रों में बीते एक साल के भीतर भूमाफिया ने बड़े पैमाने पर अवैध कॉलोनियां विकसित की हैं। ये कॉलोनियां कृषि भूमि पर काटी गई हैं, जिनके लिए न तो ले-आउट स्वीकृत है और न ही किसी तरह की वैधानिक अनुमति ली गई।
]]>वन विभाग की कार्रवाई भले ही वन भूमि की सुरक्षा के नाम पर की गई हो, लेकिन इसने प्रशासन की प्राथमिकताओं और न्याय की समानता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वन विभाग की टीम में परिक्षेत्र सहायक अंजनी कुमार पटेल, मोतीलाल पटेल, बीट प्रभारी ब्रजेश बागरी, पुष्पेंद्र सिंह, स्थायी कर्मी ब्रदी प्रसाद कुशवाहा, राजू सिंह गोंड समेत सुरक्षा श्रमिक दल शामिल रहा। विभाग ने बताया कि कार्रवाई के बाद भूमि की गहरी खुदाई कर उसे पुनः सुरक्षित किया गया, ताकि भविष्य में दोबारा कब्जा न हो सके।
आदिवासियों की बेघर कहानी
कार्रवाई के दौरान जिन परिवारों के आशियाने उजड़े, वे अधिकतर आदिवासी और मजदूर वर्ग से ताल्लुक रखते हैं। कई परिवार वर्षों से इसी भूमि पर खेती या झोपड़ी बनाकर जीवन-यापन कर रहे थे। कार्रवाई के बाद अब वे बेघर और बेसहारा हो गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि “गरीबों पर बुलडोज़र चलता है, लेकिन बाबाओं और प्रभावशाली लोगों के कब्जे पर विभाग चुप रहता है।”
बाबा और पट्टा संस्कृति पर सवाल
सूत्र बताते हैं कि इसी परिक्षेत्र में कुछ धार्मिक संस्थाओं और आश्रमों को सामुदायिक उपयोग के नाम पर 100 से अधिक एकड़ वनभूमि दी गई है। स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं का आरोप है कि “वन संरक्षण के नाम पर सरकार दोहरा रवैया अपनाती है एक तरफ आदिवासी परिवारों को हटाया जा रहा है, दूसरी तरफ बाबाओं को वनभूमि पर ‘कानूनी कब्जा’ दिया जा रहा है।”
कार्रवाई का ब्योरा
वन परिक्षेत्राधिकारी नितेश कुमार गंगेले के नेतृत्व में हुई कार्रवाई में बीट शिवराजपुर और मोरा के अतिक्रमण को हटाया गया। शिवराजपुर बीट (कक्ष क्र. पी-265) में कुल 8.00 हेक्टेयर भूमि पर से कब्जा हटाया गया। अतिक्रमणकारियों में रामभगत यादव (4.00 हे.), कामता उर्फ नत्थू यादव (2.00 हे.), अन्नू यादव (1.00 हे.), अशोक यादव (0.50 हे.) और संदीप यादव (0.50 हे.) शामिल रहे। वहीं मोरा बीट (कक्ष क्र. पी-253) में 17.00 हेक्टेयर भूमि से कब्जा हटाया गया। इसमें जगलाल गोंड (4.00 हे.), रामू गोंड (4.00 हे.), चिंतामणि पाल (3.00 हे.), बबलू पाल (3.00 हे.) और सोनेलाल पाल (3.00 हे.) के नाम सामने आए।
मुरैना में गोवंश की हत्या के 2 आरोपियों के घर बुधवार को पुलिस ने बुलडोजर से ढहा दिए। पुलिस-प्रशासन का अमला बुधवार सुबह नूराबाद की बंगाली कॉलोनी पहुंचा। तीन घंटे में आरोपी जफ्फार खान और असगर खान के घर के अवैध निर्माण तोड़ दिए गए।
नूराबाद थाना प्रभारी ओपी रावत ने बताया, बंगाली काॅलोनी में 21 जून को बजरंग दल ने एक घर में गोमांस रखा होने की शिकायत मिली थी। लोगों ने कार्रवाई की मांग को लेकर नेशनल हाईवे जाम कर दिया था। जिसके बाद पुलिस ने आरोपी जफ्फार खान, असगर खान, शम्मी, अफसर, रेतुआ, बिश्नोई, मौसम, इकरार और साहू पर मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी। 3 दिन पहले ही मुख्य आरोपी असगर और उसके ससुर रेतुआ पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) भी लगाया गया है।
बता दें कि, 21 जून को बजरंग दल ने एक घर में गोमांस रखे होने की शिकायत की थी। इस मामले में लोगों ने सख्त एक्शन लिए जाने की मांग की थी। नेशनल हाईवे जाम करके प्रदर्शन भी किया गया था। बुधवार को आरोपी जफ्फार खान और असगर खान के घर पर बुलडोजर चलाया गया है। प्रशासन का कहना है कि, दोनों आरोपियों के घर अवैध कब्जा करके बनाए गए थे।
इस मामले में पुलिस ने बताया कि, बंगाली कॉलोनी में 21 जून को शिकायत की थी। जिसके बाद जफ्फार खान, असगर खान, शम्मी, अफसर, रेतुआ, बिश्नोई, मौसम, इकरार और साहू पर मामला दर्ज किया गया था। इस मामले में असगर खान और रेतुआ पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत मामला दर्ज किया गया था।
गोकशी से रोका तो जानलेवा हमला किया
21 जून को बंगाली कॉलोनी में रहने वाला दिलीप सिंह गुर्जर थाने पहुंचा। उसने पुलिस को बताया कि कॉलोनी के ही एक घर में कुछ लोगों ने गोकशी की है। उसने उन्हें रोकने की कोशिश की, आरोपियों ने उस पर जानलेवा हमला कर दिया। पुलिस मौके पर पहुंची। घर से एक बोरी में गोमांस बरामद किया। इस दौरान बड़ी संख्या में गोसेवक थाने पहुंच गए। उन्होंने यहां हंगामा कर दिया।
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