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मरीज को बेहतर उपचार के लिए मेकाहारा में करवाया जायेगा एडमिट
थायराइड कैंसर के चौथे स्टेज से पीड़ित है महिला, बीते नवंबर एम्स में करवाई गई थी कीमोथेरेपी
एक साल तक रायपुर में एम्स व मेकाहारा में इलाज के बाद टाटा मेमोरियल मुंबई में भी हुआ है उपचार
रायपुर
काटाबहरा (नगवाही) निवासी समलू मरकाम जिनकी पत्नी कपूरा मरकाम थायराइड कैंसर के चौथे स्टेज से पीड़ित है और चलने फिरने में असमर्थ है। उन्हें बाइक में लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे थे। यहां कलेक्टर श्री गोपाल वर्मा ने मामला संज्ञान में आते ही तत्काल एम्बुलेंस बुलवा कर पीड़िता को जिला अस्पताल में भर्ती करवाया और मुख्य चिकित्सा अधिकारी को उपचार के लिए निर्देशित किया। महिला को बेहतर उपचार के लिए रायपुर में एडमिट करवाया जाएगा।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया कि 11 नवंबर को ग्राम कांटाबहरा (नगवाही) के श्री समलु मरकाम द्वारा थायराइड कैंसर पीड़ित पत्नी श्रीमती कपूरा मरकाम को उपचार के लिए बाइक में लिटा कर उपचार के लिए ले जाने की सूचना संज्ञान में आने पर स्वास्थ्य विभाग की टीम 12 नवंबर को पीड़िता के घर पहुंची और उसे 108 एम्बुलेंस में बेहतर उपचार के लिए मेकाहारा रायपुर भेजा गया। यहां महिला को कैंसर रिसर्च युनिट में भर्ती कराया गया है जहां कैंसर विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में उनका इलाज हुआ।
उन्होंने आगे बताया कि पूर्व में पीड़िता के स्वास्थ्य समस्या की जानकारी मिलने पर प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र रेगांखार/सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र बोड़ला विकासखण्ड बोड़ला स्वास्थ्य विभाग के टीम द्वारा पीड़ित कपूरा मरकाम पति समलू मरकाम के ग्राम काटाबहरा (नगवाही) के निवास स्थान पर जाकर निरीक्षण करने पर पाया गया कि श्री समलू मरकाम द्वारा अपनी पत्नी कपूरा मरकाम के गले का गांठ में दर्द होने पर प्राथ. स्वा. रेगांखर जंगल में ईलाज के लिए ले जाया गया। वहां पदस्थ डाक्टर द्वारा जिला स्वासस्थ्य विभाग के अधिकारियों से मरीज के बीमारी के संबंध में चर्चा कर उपचार के लिए रायपुर रिफर किया गया। जहां वर्ष 2024 में एक वर्ष तक एम्स, मेकाहारा तथा डीकेएस अस्पताल सहित कुछ निजी अस्पतालों में ईलाज चला। इसके पश्चात जनवरी 2025 में टाटा मेमोरियल मुंबई में एक माह तक ईलाज चला। वहां से ईलाज उपरांत घर लाया गया। पीड़िता की परेशानी पुनः बढ़ने पर उन्हें 12 नवंबर को स्वास्थ्य विभाग द्वारा रायपुर विशेषज्ञ चिकित्सकों के पास ईलाज के लिए ले जाया गया। जहां वे 12 और 13 नवंबर को मेकाहारा में भर्ती रही और 14 से 19 नवंबर 2025 तक एम्स में भर्ती कर कीमोथेरेपी दी गई। जिसके पश्चात 20 नवंबर को मरीज को वापस घर लाया गया। जिसके पश्चात घर पर रहकर वह स्वास्थ्य लाभ ले रही थी। जिसके पश्चात महिला को आज फिर स्वास्थ्य खराब होने पर जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। यहां से उन्हें रायपुर में एडमिट करवाया जाएगा।
]]>हेल्थ सेक्टर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का असर तेजी से दिख रहा है. दिल्ली के भारत मंडपम में चल रहे एआई समिट में एक खास डिवाइस लोगों का ध्यान खींच रहा है. दावा किया गया है कि यह नया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस डिवाइस पेट से जुड़ी बीमारियों और खासतौर पर कैंसर का पता आसानी से और समय रहते लगा सकता है, जिससे मरीज को बीमारी के गंभीर होने से पहले इलाज मिल सकेगा.
विप्रो की चीफ टेक्निकल ऑफिसर संध्या अरुण के मुताबिक, यह डिवाइस शुरुआती स्टेज में ही कैंसर का पता लगा लेता है. इससे मरीज को समय पर इलाज मिल सकता है और कई मामलों में सर्जरी की जरूरत ही नहीं पड़ेगी.उनका कहना है कि जल्दी पहचान ही सबसे बड़ा फायदा है, क्योंकि बीमारी जितनी जल्दी पकड़ में आ जाएगी, इलाज उतना आसान और असरदार होगा. आइए विस्तार से जानते हैं इस डिवाइस के बारे में…
कैसे काम करती है मशीन?
यह एआई आर्म रोबोटिक एमआरआई मशीन सबसे पहले मरीज के पेट का स्कैन करती है. स्कैन का रिजल्ट रियल-टाइम स्क्रीन पर दिखाई देता है, जिससे डॉक्टर तुरंत समझ सकते हैं कि अंदर क्या समस्या है.
कैंसर का कैसे लगाएगी पता
स्कैन में अगर ट्यूमर या कैंसर से जुड़ी कोई असामान्यता दिखती है, तो एआई तुरंत उसका विश्लेषण करता है और बताता है कि तस्वीर में दिख रही चीज क्या है. कंपनी का कहना है कि 30–45 मिनट में पूरा स्कैन और रिपोर्ट तैयार हो जाती है.
मशीन में क्या है, क्या सिर्फ पेट होगा स्कैन?
विप्रो की ओर से बताया गया कि इस एआई मशीन में चार अलग-अलग आर्म लगी हुई हैं और इनसे पूरा शरीर स्कैन हो सकेगा. एक आर्म मिड-बॉडी स्कैन के लिए है और बाकी अलग-अलग हिस्सों के लिए हैं. इससे पूरे शरीर की जांच आसानी से की जा सकती है.
और क्या फायदे हैं इस मशीन के
दावा किया गया कि इस मशीन से समय और लागत दोनों की बचत होगी. साथ ही यह भारत में बनी पहली AI-संचालित MRI मशीन है, जो स्कैन समय में करीब 37 फीसदी की कमी लाती है. 75 फीसदी तक हीलियम की खपत घटाती है. यानि जांच होगी तेज़, सटीक और सस्ती होगी और मरीज को जल्दी इलाज मिल सकेगा.
बता दें कि नई AI तकनीक से मेडिकल जांच का तरीका लगातार बदल रहा है और भविष्य में कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का पता लगाना पहले से कहीं ज्यादा आसान हो सकता है.
]]>आने वाले दो दशकों में कैंसर और कितना खतरनाक रूप लेने वाला है? इससे संबंधित रिपोर्ट में जो बातें सामने आई हैं, वो निश्चित ही काफी डराने वाली हैं। ब्रिटेन की एक जानी-मानी चैरिटी ने चेतावनी दी है कि साल 2040 तक कैंसर के मामले रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच सकते हैं। हालात इतने बिगड़ सकते हैं कि हर दो मिनट में एक व्यक्ति में इस बीमारी का निदान होने की आशंका है।
वैसे तो ये रिपोर्ट केवल ब्रिटिश नागरिकों में कैंसर के बढ़ते जोखिमों को लेकर है, पर विशेषज्ञ इसे दुनियाभर के लिए बड़ी चेतावनी मान रहे हैं। बच्चे भी कैंसर की चपेट में आ रहे हैं जिसके कारण एक पूरी पीढ़ी पर कैंसर का गहरा साया देखा जा रहा है।
अगले दो दशकों में और बिगड़ सकते हैं हालात
'वन कैंसर वॉइस' नाम के 60 कैंसर संस्थानों वाले ग्रुप ने ये चौंकाने वाला अनुमान जारी किया है, जिसमें अगले दो दशकों में अकेले ब्रिटेन में कैंसर के 63 लाख नए मामलों का अनुमान लगाया गया है। विशेषज्ञों ने शोध के दौरान पाया है कि ब्रेस्ट, प्रोस्टेट और लंग्स कैंसर के मामले बहुत तेजी से बढ़ने वाले हैं। इसके कारण स्वास्थ्य सेवाओं पर अतिरिक्त बोझ बढ़ने की आशंका जताई गई है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बताया कि कैंसर के बढ़ते खतरे के लिए वैसे तो कई कारण जिम्मेदार पाए गए हैं। हालांकि मोटापे की बढ़ती दर, खराब डाइट, कुछ प्रकार के कैंसर को रोकने वाली वैक्सीन लगवाने में कमी और लोगों में बढ़ती धूम्रपान की आदत इसके लिए मुख्यरूप से जिम्मेदार है।
क्या कहती हैं विशेषज्ञ?
कैंसर रिसर्च यूके की चीफ एग्जीक्यूटिव मिशेल मिशेल ने चेतावनी दी है कि हममें से लगभग दो में से एक को अपनी जिंदगी में कैंसर का खतरा हो सकता है। इस बीमारी का असर हर किसी पर पड़ेगा, चाहे उन्हें खुद इस बीमारी का पता चले या उनके किसी दोस्त-परिवार के सदस्य या प्रियजन को ये समस्या हो। उन्होंने आगे कहा कि अगर अभी से कैंसर की रोकथाम के लिए कदम नहीं उठाए गए तो इंग्लैंड में इस रोग के मामले दुनिया के कई देशों को पीछे छोड़ सकते हैं।
यूके में कैंसर और इसके कारण होने वाली समय से पहले मौत का सबसे बड़ा कारण तंबाकू है।
कैंसर का खतरा उम्र से भी जुड़ा हुआ है, क्योंकि समय के साथ बीमारी को ट्रिगर करने वाले सेल्स में डैमेज का जोखिम भी काफी बढ़ सकता है।
कौन से कैंसर बढ़ा रहे खतरा?
कैंसर को लेकर किए गए अध्ययनों से पता चलता है कि ब्रिटेन में जिन कैंसर का जोखिम सबसे ज्यादा बढ़ता जा रहा है उनमें प्रोस्टेट, ब्रेस्ट, लंग्स, बाउल और मेलेनोमा स्किन कैंसर शीर्ष पांच पर हैं। ये सिर्फ ब्रिटेन ही नहीं दुनिया के अन्य देशों के लिए भी अलर्ट है।
कैंसर रोग विशेषज्ञों ने बताया कि हमारी रोजाना की गड़बड़ आदतें भी कैंसर के खतरे को बढ़ाती जा रही हैं। अमर उजाला में प्रकाशित रिपोर्ट में हमने बताया था कि किस तरह से डियोड्रेंट और परफ्यूम के इस्तेमाल के कारण भी कैंसर का जोखिम बढ़ सकता है।
इसके अलावा जिन लोगों को इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज की दिक्कत होती है, ऐसे लोगों में आगे चलकर बाउल कैंसर का खतरा 600 प्रतिशत तक ज्यादा हो सकता है। बाउल कैंसर को कोलन कैंसर या कोलोरेक्टल कैंसर के नाम से भी जाना जाता है।
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आने वाले दो दशकों में कैंसर और कितना खतरनाक रूप लेने वाला है? इससे संबंधित रिपोर्ट में जो बातें सामने आई हैं, वो निश्चित ही काफी डराने वाली हैं। ब्रिटेन की एक जानी-मानी चैरिटी ने चेतावनी दी है कि साल 2040 तक कैंसर के मामले रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच सकते हैं। हालात इतने बिगड़ सकते हैं कि हर दो मिनट में एक व्यक्ति में इस बीमारी का निदान होने की आशंका है।
वैसे तो ये रिपोर्ट केवल ब्रिटिश नागरिकों में कैंसर के बढ़ते जोखिमों को लेकर है, पर विशेषज्ञ इसे दुनियाभर के लिए बड़ी चेतावनी मान रहे हैं। बच्चे भी कैंसर की चपेट में आ रहे हैं जिसके कारण एक पूरी पीढ़ी पर कैंसर का गहरा साया देखा जा रहा है।
अगले दो दशकों में और बिगड़ सकते हैं हालात
'वन कैंसर वॉइस' नाम के 60 कैंसर संस्थानों वाले ग्रुप ने ये चौंकाने वाला अनुमान जारी किया है, जिसमें अगले दो दशकों में अकेले ब्रिटेन में कैंसर के 63 लाख नए मामलों का अनुमान लगाया गया है। विशेषज्ञों ने शोध के दौरान पाया है कि ब्रेस्ट, प्रोस्टेट और लंग्स कैंसर के मामले बहुत तेजी से बढ़ने वाले हैं। इसके कारण स्वास्थ्य सेवाओं पर अतिरिक्त बोझ बढ़ने की आशंका जताई गई है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बताया कि कैंसर के बढ़ते खतरे के लिए वैसे तो कई कारण जिम्मेदार पाए गए हैं। हालांकि मोटापे की बढ़ती दर, खराब डाइट, कुछ प्रकार के कैंसर को रोकने वाली वैक्सीन लगवाने में कमी और लोगों में बढ़ती धूम्रपान की आदत इसके लिए मुख्यरूप से जिम्मेदार है।
क्या कहती हैं विशेषज्ञ?
कैंसर रिसर्च यूके की चीफ एग्जीक्यूटिव मिशेल मिशेल ने चेतावनी दी है कि हममें से लगभग दो में से एक को अपनी जिंदगी में कैंसर का खतरा हो सकता है। इस बीमारी का असर हर किसी पर पड़ेगा, चाहे उन्हें खुद इस बीमारी का पता चले या उनके किसी दोस्त-परिवार के सदस्य या प्रियजन को ये समस्या हो। उन्होंने आगे कहा कि अगर अभी से कैंसर की रोकथाम के लिए कदम नहीं उठाए गए तो इंग्लैंड में इस रोग के मामले दुनिया के कई देशों को पीछे छोड़ सकते हैं।
यूके में कैंसर और इसके कारण होने वाली समय से पहले मौत का सबसे बड़ा कारण तंबाकू है।
कैंसर का खतरा उम्र से भी जुड़ा हुआ है, क्योंकि समय के साथ बीमारी को ट्रिगर करने वाले सेल्स में डैमेज का जोखिम भी काफी बढ़ सकता है।
कौन से कैंसर बढ़ा रहे खतरा?
कैंसर को लेकर किए गए अध्ययनों से पता चलता है कि ब्रिटेन में जिन कैंसर का जोखिम सबसे ज्यादा बढ़ता जा रहा है उनमें प्रोस्टेट, ब्रेस्ट, लंग्स, बाउल और मेलेनोमा स्किन कैंसर शीर्ष पांच पर हैं। ये सिर्फ ब्रिटेन ही नहीं दुनिया के अन्य देशों के लिए भी अलर्ट है।
कैंसर रोग विशेषज्ञों ने बताया कि हमारी रोजाना की गड़बड़ आदतें भी कैंसर के खतरे को बढ़ाती जा रही हैं। अमर उजाला में प्रकाशित रिपोर्ट में हमने बताया था कि किस तरह से डियोड्रेंट और परफ्यूम के इस्तेमाल के कारण भी कैंसर का जोखिम बढ़ सकता है।
इसके अलावा जिन लोगों को इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज की दिक्कत होती है, ऐसे लोगों में आगे चलकर बाउल कैंसर का खतरा 600 प्रतिशत तक ज्यादा हो सकता है। बाउल कैंसर को कोलन कैंसर या कोलोरेक्टल कैंसर के नाम से भी जाना जाता है।
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चिकित्सा विज्ञान में हुई अभूतपूर्व प्रगति के बावजूद 'कैंसर' आज भी दुनिया भर में मौत के प्रमुख कारणों में से एक बना हुआ है। जब शरीर की कोशिकाएं अनियंत्रित होकर स्वस्थ ऊतकों (Tissues) को नष्ट करने लगती हैं, तो यह घातक बीमारी जन्म लेती है। हालांकि, स्वास्थ्य विशेषज्ञ और भारत सरकार का आयुष मंत्रालय (Ministry of AYUSH) इस बात पर जोर देते हैं कि कैंसर कोई अपरिहार्य नियति नहीं है। सही जानकारी और अनुशासित जीवनशैली अपनाकर इस जानलेवा बीमारी के जोखिम को 40% तक कम किया जा सकता है।
आयुष मंत्रालय के दिशा-निर्देश: रोकथाम ही सबसे बड़ा इलाज
आयुष मंत्रालय के अनुसार, कैंसर से बचाव के लिए महंगे इलाज से बेहतर 'प्रिवेंटिव हेल्थकेयर' है। मंत्रालय ने कुछ बुनियादी आदतों को रेखांकित किया है जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाकर कैंसर कोशिकाओं को पनपने से रोक सकती हैं।
कैंसर मुक्त जीवन के 5 मुख्य स्तंभ
1. तंबाकू का पूर्ण त्याग: कैंसर से बचाव का सबसे पहला और अनिवार्य कदम है नशा मुक्ति। सिगरेट, बीड़ी, गुटखा और खैनी जैसे उत्पाद न केवल मुंह और फेफड़ों, बल्कि पेट और किडनी के कैंसर का भी मुख्य कारक हैं। मंत्रालय के अनुसार, तंबाकू छोड़ना ही सुरक्षा की सबसे पहली ढाल है।
2. संतुलित वजन और मेटाबॉलिज्म: मोटापा केवल हृदय रोग ही नहीं, बल्कि स्तन, आंत और गर्भाशय के कैंसर का भी आमंत्रण है। शरीर में अत्यधिक वसा (Fat) हार्मोनल असंतुलन पैदा करती है, जो ट्यूमर के विकास में सहायक हो सकता है।
3. सक्रिय जीवनशैली (Physical Activity): नियमित व्यायाम शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करता है। रोजाना कम से कम 30-45 मिनट का योग, प्राणायाम या तेज पैदल चलना कैंसर के जोखिम को न्यूनतम स्तर पर ले आता है।
4. 'रेनबो डाइट' का महत्व: आयुष मंत्रालय पोषक तत्वों से भरपूर आहार की वकालत करता है। अपनी थाली में रंग-बिरंगे फल, हरी सब्जियां, साबुत अनाज और एंटीऑक्सीडेंट युक्त मसालों (जैसे हल्दी, अदरक) को शामिल करना चाहिए। प्रोसेस्ड मीट और अत्यधिक चीनी युक्त जंक फूड से दूरी बनाना अनिवार्य है।
5. समय पर स्क्रीनिंग और मेडिकल चेकअप: कैंसर की शुरुआती पहचान ही जीवन रक्षा की कुंजी है। मैमोग्राफी (स्तन कैंसर के लिए) और पैप स्मीयर (सर्वाइकल कैंसर के लिए) जैसे नियमित टेस्ट करवाने से बीमारी को प्रथम चरण में ही पकड़ा जा सकता है, जहाँ इलाज की सफलता दर 90% से अधिक होती है।
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नई सुविधा का उद्देश्य मरीजों को सभी सेवाएं एक जगह उपलब्ध कराना है। प्रस्तावित कैंसर ब्लॉक में जांच से लेकर छह प्रकार के उपचार तक की व्यवस्थाएं होंगी, जिनमें कीमोथेरेपी, सर्जरी, टारगेट थेरेपी, रेडिएशन थेरेपी, मेंटल हेल्थ काउंसलिंग और स्टेम सेल ट्रीटमेंट शामिल हैं। वर्तमान में कैंसर मरीजों को जांच, सर्जरी और रेडिएशन के लिए अलग-अलग विभागों में जाना पड़ता है, जबकि नया ब्लॉक शुरू होने के बाद सभी विशेषज्ञ एक साथ मिलकर मरीज की स्थिति के अनुसार संयुक्त निर्णय लेंगे।
जांच से लेकर 6 तरह के इलाज तक की सुविधा नए कैंसर ब्लॉक में मरीजों को जांच से लेकर ट्रीटमेंट तक की सभी सेवाएं एक ही स्थान पर मिलेंगी। इसमें कीमोथेरेपी, सर्जरी, टारगेट थेरेपी, रेडिएशन थेरेपी, मेंटल हेल्थ काउंसलिंग और स्टेम सेल ट्रीटमेंट की व्यवस्था होगी। एम्स प्रशासन का कहना है कि फिलहाल कैंसर मरीजों को अलग-अलग विभागों में भटकना पड़ता है।
जांच एक जगह, सर्जरी दूसरी जगह और रेडिएशन तीसरी जगह होती है। लेकिन इस ब्लॉक के शुरू होने के बाद सभी विशेषज्ञ एक साथ मिलकर मरीज की स्थिति के अनुसार संयुक्त फैसले लेंगे।
गंभीर मरीजों के लिए ‘प्रेफरेंस सिस्टम’ तैयार होगा एम्स के इस नए ब्लॉक में स्मार्ट स्क्रीनिंग सिस्टम तैयार किया जा रहा है। अस्पताल में आने वाले हर मरीज को पहले एक स्क्रीनिंग यूनिट से गुजरना होगा। यहां डॉक्टर उनकी जांच करेंगे और यह तय करेंगे कि मरीज को कैंसर है या नहीं।
जिन मरीजों में कैंसर की पुष्टि होगी, उन्हें गंभीरता के आधार पर वर्गीकृत किया जाएगा। इससे जिन मरीजों की हालत गंभीर है, उन्हें कम वेटिंग में प्राथमिकता के आधार पर इलाज मिलेगा। वहीं, जिन मरीजों में सिर्फ कैंसर का संदेह होगा, उन्हें आवश्यक जांच के लिए अन्य संबंधित विभागों में भेजा जाएगा।
एमपी के इन जिलों से सबसे ज्यादा मरीज एम्स भोपाल के आंकड़ों के अनुसार, हर साल 36 हजार से ज्यादा कैंसर मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। इनमें से करीब 60% मरीज भोपाल के बाहर के हैं। सबसे ज्यादा केस आगर मालवा (3664), रायसेन (1776), विदिशा (1536), नर्मदापुरम (1216), सागर (1072), रीवा (944) जैसे जिले टॉप पर हैं।
हालांकि, इसका बड़ा कारण भोपाल से भौगोलिक नजदीकी है। यह भी सवाल उठता है कि इन जिलों के सिविल अस्पताल या मेडिकल कॉलेज में कैंसर इलाज की व्यवस्था मजबूत क्यों नहीं है?।
निदेशक बोले- रिसर्च-क्लिनिकल ट्रायल पर भी फोकस एम्स भोपाल के कार्यकारी निदेशक डॉ. माधवानंद कर ने बताया कि यह कैंसर ब्लॉक प्रदेश में कैंसर ट्रीटमेंट की दिशा बदल देगा। कैंसर के हर मरीज को समग्र इलाज की जरूरत होती है। अभी मरीजों को अलग-अलग विभागों में भागदौड़ करनी पड़ती है। इस ब्लॉक के शुरू होने से सर्जरी, कीमो और रेडिएशन सब एक ही छत के नीचे संभव हो जाएगा।
डॉ. माधवानंद ने यह भी कहा कि यहां रिसर्च और क्लिनिकल ट्रायल्स पर भी फोकस किया जाएगा, ताकि कैंसर के शुरुआती लक्षणों में ही सटीक इलाज शुरू किया जा सके।
गंभीर मरीजों के लिए प्रेफरेंस सिस्टम भी तैयार किया जा रहा है। अस्पताल में आने वाले हर मरीज की पहले स्क्रीनिंग यूनिट में जांच होगी, जिसके बाद यह तय किया जाएगा कि वह कैंसर रोगी है या नहीं। जिनमें बीमारी की पुष्टि होगी, उन्हें गंभीरता के आधार पर वर्गीकृत कर प्राथमिकता से उपचार दिया जाएगा। वहीं जिन मरीजों में सिर्फ कैंसर का संदेह होगा, उन्हें संबंधित विभागों में आगे की जांच के लिए भेजा जाएगा।
]]>महाराष्ट्र के हिंगोली जिले में 14,500 महिलाओं में कैंसर जैसे लक्षण पाए गए हैं। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश आबितकर ने गुरुवार को विधानसभा में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार की संजीवनी स्कीम के तहत स्क्रीनिंग के दौरान इन महिलाओं के बारे में यह जानकारी मिली। प्रकाश आबितकर ने अपने एक लिखित जवाब में विधानसभा में बताया कि 8 मार्च को महिला दिवस से सर्वे की शुरुआत की गई थी। इसके तहत कुल 2,92,996 महिलाओं के बीच जाकर सर्वे किया गया। इस सर्वे के दौरान महिलाओं से कुछ सवाल पूछे गए, जिनके उन्होंने जवाब दिया।
इन जवाबों के आधार पर ही यह पता चला है कि करीब 14,500 महिलाओं में कैंसर जैसे लक्षण हैं। उन्होंने कहा, 'कुल 14,542 महिलाओं में से तीन को गर्भाशय का कैंसर पाया गया है। इसके अलावा एक महिला को स्तन कैंसर है और 8 को माउथ कैंसर है। यह जानकारी जिला कलेक्टर की ओर से कैंसर को लेकर चलाए गए जागरूकता अभियान में सामने आई है। यह अभियान इसलिए चलाया गया है ताकि कैंसर की जानकारी शुरुआती स्टेज में ही पता चल सके और फिर उन लोगों का इलाज कराया जा सके।'
हालांकि स्वास्थ्य मंत्री ने यह भी कहा कि महिलाओं के लिए अलग से किसी कैंसर अस्पताल के निर्माण का प्रस्ताव नहीं है। उन्होंने यह जरूर कहा कि ग्रामीण इलाकों में स्क्रीनिंग की व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा ताकि पता चल सके कि महिलाओं में कैंसर की क्या स्थिति है। जिला अस्पतालों में भी इसकी जांच की सुविधा दी जा रही है। इसके लिए टाटा मेमोरियल अस्पताल से करार हुआ है।
टाटा मेमोरियल अस्पताल की ओर से एक टीम महीने में दो बार अस्पतालों में जाएगी और वहां कैंप लगाकर जांच करेगी। यही नहीं निचले स्तर पर जांच के लिए कैंसर योद्धाओं को ट्रेनिंग भी टीम की ओर से दी जाएगी। उन्होंने कहा कि राज्य के 8 जिला अस्पतालों में डे-केयर कीमोथेरेपी सेंटर भी शुरू किए गए हैं। इसके अलावा ऐसे सेंटर्स को राज्य के अन्य जिलों में भी स्थापित करने की तैयारी है।
]]>भारत में जल्द ही कैंसर, डायबिटीज, हार्ट संबंधी रोगों की दवाओं और एंटीबायोटिक्स की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है। सरकारी नियंत्रण में आने वाली इन दवाओं की कीमतों में 1.7% तक की वृद्धि की संभावना जताई जा रही है। यह असर अगले दो से तीन महीनों में दिखाई दे सकता है, क्योंकि मौजूदा समय में इन दवाओं का स्टॉक 90 दिनों का पहले से ही उपलब्ध है।
दवाओं के दाम बढ़ने की वजह
रिपोर्ट के अनुसार, ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD) के महासचिव राजीव ने बताया कि कच्चे माल और अन्य खर्चों में निरंतर हो रही बढ़ोतरी के कारण यह फैसला लिया गया है। इससे फार्मा इंडस्ट्री को कुछ राहत मिल सकती है।
फार्मा कंपनियों पर आरोप
रसायन और उर्वरक से संबंधित संसद की स्थायी समिति के अनुसार, फार्मा कंपनियों पर दवाओं की कीमतें बढ़ाने और नियामक नियमों का उल्लंघन करने के आरोप लग चुके हैं। राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) की रिपोर्ट में कहा गया है कि फार्मा कंपनियों ने 307 मामलों में नियमों का उल्लंघन किया है।
NPPA के अनुसार, ड्रग प्राइस कंट्रोल ऑर्डर (DPCO) 2013 के तहत दवाओं की अधिकतम कीमत तय की जाती है, और सभी निर्माता और विक्रेता इन कीमतों के भीतर ही दवाएं बेचने के लिए बाध्य होते हैं।
सरकार की राहत की कोशिश
इस साल के बजट में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 36 जीवन रक्षक दवाओं से कस्टम ड्यूटी को हटा देने का ऐलान किया था। उन्होंने कहा कि कैंसर, दुर्लभ बीमारियों और अन्य गंभीर क्रोनिक रोगों से पीड़ित मरीजों को राहत देने के लिए यह कदम उठाया गया है।
फार्मा कंपनियों पर लगे नियमों के उल्लंघन का आरोप
NPPA ड्रग प्राइस कंट्रोल ऑर्डर (DPCO), 2013 के तहत दवाओं की अधिकतम कीमत निर्धारित करता है. सभी दवा निर्माताओं और विक्रेताओं को इस तय कीमत (जीएसटी सहित) के भीतर ही दवा बेचने का निर्देश दिया गया है. इस साल के बजट में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 36 लाइफ सेविंग ड्रग्स से कस्टम ड्यूटी हटाने का ऐलान किया.
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने बजट भाषण में कहा था कि कैंसर, रेयर डिजीज और अन्य गंभीर क्रोनिक डिजीज से पीड़ित मरीजों को राहत देने के लिए सरकार ने 36 लाइफ सेविंग दवाओं से बेसिक कस्टम ड्यूटी (BCD) पूरी तरह हटाने का फैसला किया है.
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ओरेकल के सीईओ लैरी एलिसन ने बड़ा दावा किया है. उन्होंने कहा है कि जल्द ही कैंसर डिटेक्शन से लेकर वैक्सीनेशन तक सब 48 घंटे में किया जा सकेगा. कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी को लेकर लैरी एलिसन ये बड़ा दावा
को किया.
लैरी एलिसन ने कहा,'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के साथ 48 घंटों के अंदर कैंसर का पता लगाने से लेकर उसकी कस्टम वैक्सीन तक बनाई जा सकेगी. कल्पना कीजिए कि कैंसर का जल्दी पता लग जाए. आपके कैंसर के लिए जल्द से जल्द कस्टम कैंसर वैक्सीन का डेवलटमेंट हो जाए.' हालांकि, लैरी ने यह भी कहा है कि यह भविष्य का वादा है.
रूस के बाद वैक्सीन बनाने वाला दूसरा देश बनेगा US!
अगर अपने दावे के मुताबिक लैरी एलिसन कैंसर की वैक्सीन बनाने में कामयाब हो जाते हैं तो रूस के बाद अमेरिका दूसरा देश बन जाएगा, जो कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी के खिलाफ वैक्सीन तैयार कर लेगा. अमेरिका के लिए वैक्सीन जल्द से जल्द बनाना इसलिए भी जरूरी है क्योंकि रूस ऐलान कर चुका है कि उनके देश में 2025 से कैंसर की वैक्सीन लगनी शुरू हो जाएगी. रूस अपने नागरिकों को यह वैक्सीन मुफ्त में लगाएगा. ऐसे में अमेरिका इस बड़ी उपलब्धि में रूस से पिछड़ता नजर आ रहा है.
फ्लोरिडा में भी 4 मरीजों पर एक वैक्सीन का टेस्ट
कैंसर के इलाज को लेकर अमेरिका में पहले से कई कदम उठाए जा रहे हैं. मई 2024 में फ्लोरिडा यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने कैंसर के 4 मरीजों पर पर्सनलाइज्ड वैक्सीन का टेस्ट किया था. वैज्ञानिकों ने दावा किया था कि वैक्सीन लगने के दो दिन बाद ही मरीजों में मजबूत इम्युनिटी पैदा हो गई.
दुनिया में हर 6 में से एक मौत का कारण कैंसर
रूस के बाद अमेरिका से आए इस ऐलान का फायदा पूरी दुनिया को मिल सकता है. क्योंकि कैंसर एक ऐसी बीमारी है जिससे हर साल लाखों लोगों की मौत हो जाती है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, दुनियाभर में मौत की दूसरी सबसे बड़ी वजह कैंसर ही है. दुनिया में होने वाली हर 6 में से 1 मौत का कारण कैंसर है.
पांच सालों में कैंसर से 71 लाख लोगों की हुई मौत
भारत में भी कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. साल दर साल कैंसर के मरीज और इससे होने वाली मौतों की संख्या बढ़ रही है. 2025 तक भारत में कैंसर मरीजों की संख्या 15 लाख के पार होने की आशंका है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, भारत में 2019 से 2023 के बीच पांच साल में कैंसर के 71 लाख से ज्यादा मामले सामने आए हैं. 2023 में ही लगभग 15 लाख मामले सामने आए थे. इसी तरह इन पांच सालों में कैंसर से करीब 40 लाख लोगों की मौत हुई है. पांच साल में सबसे ज्यादा 8.28 लाख मौतें 2023 में हुई थी.
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भारत में कैंसर तेजी से फैल रहा है. यह एक ऐसी बीमारी है जिसका सही समय पर पता न चले तो इलाज मुश्किल हो जाता है. 2023 में ब्रिटिश मेडिकल जर्नल में पब्लिश हुई एक स्टडी में कहा गया था कि भारत में ब्रेस्ट कैंसर, प्रोस्टेट कैंसर जैसे कैंसर के मामले तेजी बढ़ रहे हैं. कुछ दिन पहले भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) ने कहा है कि भारत में कैंसर के मामले और मौतें 2022 से 2045 के बीच बढ़ने का अनुमान है.
ब्रिक्स देश यानी ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका में कैंसर के मामले, उनसे होने वाली मौतों और उनका रोजमर्रा की लाइफ पर प्रभाव दिखाने वाली स्टडी में इस बात का खुलासा हुआ है कि भारत में मुंह और ब्रेस्ट कैंसर के बढ़ने का जोखिम है. आईसीएमआर-नेशनल सेंटर फॉर डिजीज इन्फॉर्मेटिक्स एंड रिसर्च की रिसर्च के मुताबिक, पुरुषों में होंठ और मुंह के कैंसर के मामले सबसे अधिक पाए गए हैं जबकि महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर के मामले सबसे अधिक पाए गए.
क्या कहती है रिसर्च
कैंसर एपिडेमियोलॉजी में पब्लिश स्टडी के मुताबिक, दुनिया भर में कैंसर से होने वाली कुल मौतों में से 20 प्रतिशत मौतें ब्रिक्स देशों में होती हैं.
स्टडी के राइटर्स का कहना है, 'हमारा विश्लेषण भारत और दक्षिण अफ्रीका में 2022 और 2045 के बीच कैंसर के मामलों और मौतों में तेजी से वृद्धि होगी. स्टडी के राइटर सतीशकुमार ने बताया कि 2020 की तुलना में 2025 में भारत में कैंसर के मामलों में 12.8 प्रतिशत की वृद्धि होगी और कैंसर की घटनाओं में तेजी लगातार जारी रहेगी.'
निष्कर्ष क्या निकला
स्टडी के निष्कर्ष में इस बारे में जानकारी दी गई है कि कैंसर कितना कॉमन है, इससे कितनी मौतें होती हैं और इससे आम इंसान की लाइफ पर कितना प्रभाव होता है.
रिसर्च के मुताबिक, रूस में पुरुषों और महिलाओं में नए प्रकार के कैंसर के मामलों की दर सबसे अधिक थी. रूस में पुरुषों में सबसे आम प्रकार का कैंसर प्रोस्टेट, लंग्स और कोलोरेक्टल थे. अधिकांश ब्रिक्स देशों में महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर प्रमुख था. हालांकि, भारत में होंठ और मुंह के कैंसर का ट्रीटमेंट पुरुषों में सबसे अधिक बार किया गया.
दक्षिण अफ्रीका में पुरुषों और महिलाओं दोनों के लिए कैंसर से होने वाली मृत्यु दर सबसे अधिक थी. अगर रूस में सिर्फ पुरुषों की मौत सबसे अधिक कैंसर से हुई ती और महिलाओं की दक्षिण अफ्रीका में कैंसर से मौत सबसे अधिक हुई थी. स्टडी में यह भी बताया गया है कि भारत को छोड़कर सभी ब्रिक्स देशों में लंग्स कैंसर मौतों का सबसे बढ़ा कारण था.
भारत में बढ़ सकता है मौतों का आंकड़ा
रिसर्चर्स के अनुसार, आने वाले सालों में दक्षिण अफ्रीका और भारत में कैंसर के नए मामलों और कैंसर से संबंधित मौतों में सबसे अधिक वृद्धि होने की संभावना है. हालांकि ब्रिक्स देशों के पास कैंसर को कंट्रोल करने के तरीके हैं लेकिन फिर भी कैंसर के जोखिम और कैंसर की घटनाओं को प्रभावित करने वाले हेल्थ सिस्टम की जांच करनी काफी जरूरी है.
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