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यूपी में भ्रष्टाचार के खिलाफ जारी मुहिम के तहत धड़ाधड़ कार्रवाई की जा रही है। विजिलेंस, एंटी करप्शन के बाद अब सीबीआई ने भी रिश्वतखोरों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। मेरठ में सीबीआई ने कार्रवाई करते हुए मेरठ कैंट बोर्ड के मनोनीत सदस्य डॉ. सतीश चंद्र शर्मा को तीन लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ गिरफ्तार किया है। सीबीआई की टीम देर रात तक इस मामले में पूछताछ करती रही। हालांकि पूरी कार्रवाई की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हो सकी है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार भाजपा नेता और कैंट बोर्ड के मनोनीत सदस्य डॉ. सतीश शर्मा ने किसी सरकारी कार्य के एवज में एक ठेकेदार से रिश्वत की मांग की थी। ठेकेदार ने इसकी शिकायत सीबीआई से की जिसके बाद टीम ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जाल बिछाया। जैसे ही ठेकेदार ने रिश्वत की रकम डॉ. सतीश शर्मा को सौंपी मौके पर मौजूद सीबीआई की टीम ने उन्हें रंगेहाथ दबोच लिया। गिरफ्तारी के तुरंत बाद सीबीआई की टीम ने जांच का दायरा बढ़ाते हुए मेरठ के पल्लवपुरम स्थित अंसल टाउन में छापेमारी की। सूत्रों के अनुसार डॉ. सतीश शर्मा के आवास और अन्य ठिकानों पर दस्तावेजों की गहन छानबीन की जा रही है। सीबीआई की टीम फिलहाल मामले से जुड़े अन्य तथ्यों और संलिप्त लोगों की जानकारी जुटाने में लगी है। देर रात तक आगे की पूछताछ और कार्रवाई जारी थी।
कैंट बोर्ड में मचा हड़कंप
कैंट बोर्ड के सदस्य की इस तरह से गिरफ्तारी के बाद से स्थानीय प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मचा हुआ है। यह घटना भ्रष्टाचार के खिलाफ एक कड़ा संदेश मानी जा रही है। डॉ. सतीश चंद्र शर्मा भाजपा के वरिष्ठ नेता हैं, भाजपा नेता होने के नाते ही उन्हें कैंट बोर्ड में फरवरी-2022 में सदस्य नामित किया गया था। तब से उन्हें हर छह माह पर अवधि विस्तार दिया जा रहा है।
हापुड़ से जीएसटी विभाग का स्टेनो 24 हजार रुपये रिश्वत लेते गिरफ्तार
वहीं दूसरी ओर हापुड़ में विजिलेंस की टीम ने रिश्वतखोर को रंगे हाथ गिरफ्तार किया। टीम ने जीएसटी विभाग में सहायक आयुक्त राज्य कर खंड-4 के स्टेनो को 24 हजार रुपये रिश्वत लेते पकड़ा है। ग्राम दादरी निवासी चमन सिंह ने विजिलेंस टीम से शिकायत कर बताया था कि मोदीनगर रोड पर उसकी सावित्री बीज भंडार नाम से दुकान है। उन्होंने इसका जीएसटी नंबर लिया हुआ है। सहायक आयुक्त राज्य कर खंड-4 के स्टेनो जयदीप ने उनसे आठ मई को फोन कर अपने ऑफिस में आकर मिलने को कहा था। जब वह उनके ऑफिस गया तो स्टेनो जयदीप ने अपने कम्प्यूटर की स्क्रीन पर 48,000 रुपये का टैक्स शिकायतकर्ता की तरफ दिखाया। स्टेनो ने कहा कि अगर इसके आधे 24 हजार रुपये उसे
दे दें तो वह सारे टैक्स को अपने स्तर पर खत्म कर देगा।
चमन सिंह ने कहा कि उनके ऊपर ऐसा कोई टैक्स नहीं बनता है और न ही उसे किसी तरह का नोटिस दिया गया। अगर ऐसा कोई टैक्स बनता है तो वह उसे जमा करने को तैयार हैं। लेकिन स्टेनो जयदीप द्वारा 24 हजार रुपये की लगातार मांग की जाती रही। शिकायत के बाद विजिलेंस टीम ने आरोपी की धरपकड़ को जाल बिछाना शुरू कर दिया। शुक्रवार सुबह विजिलेंस टीम निरीक्षक रेनूका सिंह के नेतृत्व में रेवती कुंज स्थित जीएसटी कार्यालय पहुंची। चमन सिंह, स्टेनो जयदीप के पास पहुंचा और रिश्वत की रकम उसे सौंपी। जैसे ही आरोपी ने रुपये लिए विजिलेंस टीम ने तत्काल उसे दबोच लिया। कोतवाली प्रभारी निरीक्षक मनीष चौहान ने बताया विजिलेंस टीम की तहरीर पर स्टेनो जयदीप के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जा रहा है।
]]>यह मामला रांची निवासी विकास सिंह की शिकायत से जुड़ा है, जिसके आधार पर झारखंड-छत्तीसगढ़ शराब घोटाले को लेकर छत्तीसगढ़ में प्रकरण दर्ज किया गया था। वर्तमान में इस मामले की जांच प्रवर्तन निदेशालय और छत्तीसगढ़ आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (ईओडब्ल्यू) द्वारा की जा रही है।
हाई कोर्ट में तीन याचिकाएं लंबित
ईओडब्ल्यू द्वारा दर्ज प्राथमिकी से संबंधित इस प्रकरण में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में तीन याचिकाएं विचाराधीन हैं। इनमें झारखंड के तत्कालीन उत्पाद सचिव विनय कुमार चौबे, संयुक्त उत्पाद आयुक्त गजेंद्र सिंह और शिकायतकर्ता विकास सिंह की याचिकाएं शामिल हैं। इन याचिकाओं पर मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति अरविंद कुमार अग्रवाल की खंडपीठ में सुनवाई हुई।
महाधिवक्ता ने कोर्ट में रखा सीबीआइ का पत्र
सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता विवेक शर्मा ने न्यायालय के समक्ष सीबीआइ रायपुर के हेड ऑफ ब्रांच द्वारा भेजे गए पत्र की प्रति प्रस्तुत की। पत्र में बताया गया कि छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव की ओर से भेजा गया जांच संबंधी पत्र सीबीआइ ने वापस कर दिया है, क्योंकि एजेंसी इस मामले की जांच करने के लिए इच्छुक नहीं है। महाधिवक्ता ने कहा कि वे मामले के मेरिट पर अदालत के समक्ष पक्ष रखना चाहते हैं। इस पर कोर्ट ने अगली सुनवाई में दलीलें सुनने का निर्णय लिया।
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सीबीआई ने ऐसे ही दो एजेंटों की पहचान की, जिन्होंने राजस्थान और गुजरात से पीड़ितों को फंसाकर इन कंपाउंडों में भेजा था। इन दोनों आरोपियों को बचाए गए पीड़ितों के साथ भारत लौटते ही तत्काल गिरफ्तार कर लिया गया। थाईलैंड के रास्ते म्यांमार तक जालः जाँच से पता चला है कि अंतर्राष्ट्रीय संगठित सिंडिकेट भोले-भाले भारतीय नागरिकों को विदेशों में उच्च-वेतन वाली नौकरियों और आकर्षक रोजगार के अवसरों का झूठा वादा करके फंसाता है। उन्हें अक्सर थाईलैंड के रास्ते म्यांमार ले जाया जाता है। एक बार देश से बाहर ले जाने के बाद, उन्हें म्यांमार में एक जगह पर गलत तरीके से बंधक बना लिया जाता है और बड़े पैमाने पर साइबर धोखाधड़ी (Cyber Fraud) अभियानों में भाग लेने के लिए मजबूर किया जाता है। इन धोखाधड़ियों में डिजिटल अरेस्ट स्कैम, निवेश घोटाले और रोमांस फ्रॉड शामिल हैं, जो दुनिया भर के लोगों, यहाँ तक कि भारतीय नागरिकों को भी निशाना बनाते हैं।
तस्करी के शिकार लोगों को धमकी, कैद और शारीरिक शोषण का शिकार बनाया जाता है, और उन्हें अपनी इच्छा के विरुद्ध अवैध साइबर अपराध गतिविधियों में शामिल होने के लिए विवश किया जाता है। इन पीड़ितों को ही आमतौर पर "साइबर गुलाम" (Cyber Slaves) कहा जाता है। सीबीआई ने कहा है कि वह घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों के समन्वय से साइबर गुलामी और अंतरराष्ट्रीय मानव तस्करी के इस उभरते खतरे का मुकाबला करने के लिए प्रतिबद्ध है। सीबीआई ने सभी नागरिकों, विशेषकर युवा नौकरी तलाशने वालों से आग्रह किया है कि वे सोशल मीडिया, ऑनलाइन विज्ञापनों या अनधिकृत एजेंटों के माध्यम से दिए जा रहे विदेशी रोजगार के किसी भी प्रस्ताव के खिलाफ अत्यधिक सावधानी बरतें।
]]>सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक आदेश जारी करते हुए कहा कि अब किसी भी नागरिक की गिरफ्तारी से पहले पुलिस, ED, CBI या कोई भी जांच एजेंसी आरोपी को लिखित रूप से गिरफ्तारी का कारण बताएगी। अदालत ने स्पष्ट किया कि गिरफ्तारी मनमाने ढंग से नहीं हो सकती, बल्कि उसके पीछे ठोस, स्पष्ट और कानूनी आधार होना जरूरी है। अदालत ने कहा कि गिरफ्तार किए जाने वाले व्यक्ति को यह जानने का संवैधानिक अधिकार है कि उसे किस मामले में और किस धारा के तहत गिरफ्तार किया जा रहा है। इसके साथ ही एजेंसी को गिरफ्तारी के समय लिखित नोटिस/गिरफ्तारी मेमो देना अनिवार्य होगा।
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए पुलिस, ईडी, सीबीआई सहित सभी जांच एजेंसियों के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने कहा कि किसी भी व्यक्ति को गिरफ्तार करने से पहले या गिरफ्तार करने के तुरंत बाद, उसे उसकी समझ में आने वाली भाषा में लिखित रूप से गिरफ्तारी का कारण बताना अनिवार्य होगा। मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच ने कहा कि यदि गिरफ्तारी की वजह आरोपी को उसकी भाषा में लिखित रूप से नहीं बताई गई, तो ऐसी गिरफ्तारी और उसके बाद की रिमांड दोनों को अवैध माना जाएगा।
बता दें कि यह फैसला जुलाई 2024 में मुंबई में हुए बहुचर्चित बीएमडब्ल्यू हिट-एंड-रन केस से जुड़े ‘मिहिर राजेश शाह बनाम महाराष्ट्र सरकार’ मामले की सुनवाई के दौरान दिया गया। मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच ने इस मामले में सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि गिरफ्तार व्यक्ति को उसकी गिरफ्तारी से पहले या तुरंत बाद उसकी समझ में आने वाली भाषा में लिखित रूप से गिरफ्तारी का कारण बताना आवश्यक है।
इस फैसले में न्यायमूर्ति मसीह ने 52 पन्नों का विस्तृत निर्णय लिखा, जिसमें उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 22(1) के तहत गिरफ्तारी के कारणों की जानकारी देना केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता की मौलिक सुरक्षा है।अदालत ने यह भी कहा कि गिरफ्तार व्यक्ति को कारणों की जानकारी ‘यथाशीघ्र’ दी जानी चाहिए, ताकि आरोपी को अपने अधिकारों और कानूनी स्थिति का स्पष्ट ज्ञान हो सके।
अदालत ने अपने फैसले में निम्न प्रमुख बिंदु निर्धारित किए हैं
गिरफ्तार व्यक्ति को गिरफ्तारी के आधार बताना संविधान का आदेश है, और यह किसी भी परिस्थिति में टाला नहीं जा सकता।
गिरफ्तारी का कारण लिखित रूप में दिया जाना अनिवार्य होगा, और वह भाषा वही होनी चाहिए जिसे आरोपी समझ सके।
यदि गिरफ्तारी के समय अधिकारी तत्काल लिखित कारण देने में असमर्थ हो,
तो पहले मौखिक रूप से कारण बताए जाएं, और
बाद में लिखित नोटिस, रिमांड के लिए मजिस्ट्रेट के समक्ष प्रस्तुत किए जाने से कम से कम दो घंटे पहले, आरोपी को सौंपा जाना चाहिए।
यदि गिरफ्तारी के कारण लिखित रूप में नहीं बताए गए, तो
गिरफ्तारी और उसके बाद की रिमांड दोनों को अवैध माना जाएगा, और आरोपी को रिहा होने का अधिकार होगा।
देशभर में लागू होगा आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि इस आदेश की प्रति देश के सभी हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल, तथा सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को भेजी जाएगी। इससे सुनिश्चित होगा कि यह फैसला पूरे भारत में तुरंत प्रभाव से लागू हो।
]]>देशभर में तेजी से बढ़ रहे डिजिटल अरेस्ट स्कैम के मामलों पर अब सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए सख्ती दिखाई है। कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार (MHA सेक्रेटरी), सीबीआई, हरियाणा सरकार और अंबाला के साइबर क्राइम विभाग को नोटिस जारी किया है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि न्यायाधीशों के फर्जी हस्ताक्षरों के साथ जारी किए गए फर्जी न्यायिक आदेश न्याय प्रणाली में जनता के विश्वास की नींव को हिला देते हैं। यह कार्य न केवल कानून के शासन पर हमला है बल्कि न्यायपालिका की गरिमा पर सीधा प्रहार भी है।
वरिष्ठ नागरिक दंपति की शिकायत से शुरू हुआ मामला
यह कार्रवाई उस शिकायत के बाद हुई जिसमें एक वरिष्ठ नागरिक दंपति से पिछले महीने डिजिटल अरेस्ट स्कैम के जरिए उनकी जीवनभर की बचत ठगी गई थी। इस गंभीर घटना को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने खुद इस पर संज्ञान लिया।
जांच की स्थिति रिपोर्ट मांगी
सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा सरकार और अंबाला साइबर क्राइम के एसपी से अब तक हुई जांच की स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि इस तरह के साइबर अपराधों पर सख्त कदम जरूरी हैं ताकि लोगों का भरोसा डिजिटल व्यवस्था पर बना रहे।
पूर्व जस्टिस होंगे कमिटी प्रमुख
शीर्ष अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस अजय रस्तोगी को उस कमिटी का प्रमुख नियुक्त किया है, जो CBI की जांच की निगरानी (मॉनिटरिंग) करेगी। इस कमेटी में तमिलनाडु कैडर के दो आईपीएस अधिकारी, जो तमिलनाडु के निवासी न हों, शामिल किए जा सकते हैं। CBI अधिकारी हर महीने जांच की प्रगति रिपोर्ट इस समिति को सौंपेंगे।
SC ने मद्रास हाई कोर्ट की आलोचना
सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाई कोर्ट (चेन्नई बेंच) की भी आलोचना की कि उसने एक ऐसी याचिका पर विशेष जांच दल (SIT) गठित करने का आदेश दे दिया, जो वास्तव में केवल राजनीतिक रैलियों के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) बनाने की मांग कर रही थी। सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल से यह रिपोर्ट भी मांगी कि कैसे SOP से संबंधित याचिका को क्रिमिनल रिट याचिका के रूप में दर्ज किया गया।
चेन्नई बेंच को खारिज कर देनी चाहिए याचिका
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि करूर मामला मदुरै बेंच के अधिकार क्षेत्र में आता है, इसलिए चेन्नई बेंच को इसे बिना मुख्य न्यायाधीश की अनुमति के सुनवाई में नहीं लेना चाहिए था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चेन्नई बेंच को यह याचिका खारिज कर देनी चाहिए थी।
TVK ने कोर्ट के इस आदेश को दी चुनौती
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की बेंच ने यह अंतरिम आदेश TVK और अन्य पक्षों द्वारा दायर याचिका पर पारित किया। TVK ने 3 अक्टूबर को मद्रास हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसमें SIT गठित की गई थी। पार्टी ने यह आपत्ति भी जताई थी कि SIT में केवल तमिलनाडु पुलिस अधिकारी ही शामिल किए गए, और हाई कोर्ट ने TVK और विजय के खिलाफ नकारात्मक टिप्पणियां कीं। अन्य याचिकाओं में मदुरै बेंच के 3 अक्टूबर के आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें जांच CBI को सौंपने से इनकार किया गया था।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने मौखिक रूप से यह सवाल उठाया कि हाई कोर्ट ने यह आदेश कैसे पारित किया जब याचिका केवल SOP की मांग कर रही थी। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी पूछा कि जब AIADMK को उसी जगह रैली करने की अनुमति नहीं दी गई थी, तो TVK को कैसे दी गई, जबकि उस रास्ते को संकीर्ण (narrow passage) बताकर अनुमति से मना किया गया था। अदालत ने यह भी चिंता जताई कि 30 से 40 शवों का पोस्टमार्टम आधी रात को किया गया और सुबह 4 बजे अंतिम संस्कार कर दिया गया।
]]>19 साल से फरार महिला गिरफ्तार
महिला ने इसके बाद अपनी फेस सर्जरी करवाई और कई शहरों में छिपी रही. आखिरकार 19 साल से फरार चल रही महिला को सीबीआई नई तकनीक के आधार पर इंदौर से दबोच लिया. उसे बेंगलुरु ले जाया गया है. महिला ने अपनी पहचान छुपाई लेकिन सीबीआई ने इमेज सर्च एनालिटिक्स सॉफ्टवेयर की मदद से सफलता पाई.
कंपनी बनाकर लगाया बैंक को चूना
मामले के अनुसार धोखाधड़ी का ये मामला 2002 से 2005 के बीच का है. महिला ने अपने पति के साथ मिलकर बेंगलुरु के एक सरकारी बैंक से 8 करोड रुपए की धोखाधड़ी की. 1 अगस्त 2006 को सीबीआई की बेंगलुरु शाखा ने दोनों के खिलाफ शिकायत दर्ज की. मामला दर्ज होते ही दंपती अपनी पहचान छुपाकर रहने लगे. इस दौरान दंपती ने इंदौर को मुख्य अड्डा बनाया. ये महिला उस समय खुद के द्वारा बनाई गई एक कंपनी की डायरेक्टर थी. इसी कंपनी के सीईओ उसके पति रामानुजन मुथुरामलिंगम शेखर थे.
नाम बदलकर रहने लगे आरोपी पति-पत्नी
इसी कंपनी के नाम पर दंपती ने बैंक को चूना लगाया. धोखाधड़ी के बाद ये दंपती कई शहरों में छुपते रहे. साथ ही इन लोगों ने इंदौर में डेरा डाल लिया. पति ने अपना नाम कृष्ण कुमार गुप्ता और पत्नी ने अपना नाम गीता कृष्ण कुमार गुप्ता रख लिया. वहीं, सीबीआई लगातार दोनों आरोपियों की तलाश कर रही थी. इसी दौरान पुलिस को जानकारी मिली कि आरोपी दंपती इंदौर में रह रहे हैं. इसके बाद जांच पड़ताल की तो जानकारी सही पाई गई.
आरोपी महिला को बेंगलुरु की जेल भेजा
सीबीआई को ये भी पता चला कि आरोपी महिला के पति रामानुजम की 2008 में मौत हो गई थी. इसके बाद आरोपी महिला ने अपने फेस सर्जरी करवाई और बेफिक्र होकर रहने लगी. लेकिन सीबीआई ने इमेज सर्च एनालिसिस सॉफ्टवेयर और अन्य तकनीक का प्रयोग करते हुए महिला की फोटो का मिलान किया और उसके बाद गिरफ्तार कर लिया. महिला को बेंगलुरु ले जाया गया, वहां पर कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है.
]]>बुधवार को सीबीआई की टीम अचानक गुना पहुंची। टीम सीधे एसपी ऑफिस गई। वहां से आरोपी एसआई देवराज सिंह परिहार को अपने साथ लेकर रवाना हो गई। इस गिरफ्तारी से मामले में आगे की कार्रवाई की उम्मीद बढ़ गई है।
शादी के दिन देवा की गिरफ्तारी
बता दें कि बीलाखेड़ी गांव में रहने वाले देवा पारदी की शादी होने वाली थी। उसकी उम्र 25 साल थी। घर में तैयारियां चल रही थी। उसी शाम बारात गुना शहर के गोकुल सिंह चक्क जाने वाली थी। तभी म्याना पुलिस गांव पहुंची। पुलिस ने देवा और उसके चाचा गंगाराम को बारात में जाने वाले ट्रैक्टर से ही थाने ले गई। पुलिस का कहना था कि उन्हें एक चोरी के केस में पूछताछ करनी है और कुछ सामान बरामद करना है। लेकिन अगली ही शाम एक दुखद खबर आई। परिजनों को जिला अस्पताल से सूचना मिली कि एक पारदी युवक की लाश पोस्टमार्टम रूम में है। जब परिजन वहां पहुंचे, तो उन्हें देवा की मौत की जानकारी मिली।
मौत के बाद परिजनों का हंगामा
देवा की मौत की खबर से पूरे इलाके में बवाल मच गया। पारदी समुदाय की महिलाएं जिला अस्पताल पहुंची और विरोध प्रदर्शन किया। देवा की चाची और होने वाली दुल्हन ने गुस्से में अपने ऊपर पेट्रोल डालकर आग लगाने की कोशिश की। लेकिन वहां मौजूद पुलिसकर्मियों ने उन्हें बचा लिया। महिलाओं ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना था कि म्याना थाने में देवा और गंगाराम की बुरी तरह पिटाई की गई। इसी पिटाई के कारण देवा की मौत हो गई। इसके दो दिन बाद 17 जुलाई को महिलाओं ने कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन किया और अपने कपड़े तक उतार दिए थे।
जांच में जुटी सीबीआई
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए देवा की मां ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। मई 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने इस केस को सीबीआई को सौंप दिया। कोर्ट ने सीबीआई को आदेश दिया कि एक महीने में आरोपियों को गिरफ्तार किया जाए। इसी आदेश पर कार्रवाई करते हुए सीबीआई ने बुधवार को एसआई देवराज सिंह परिहार को गिरफ्तार किया। सीबीआई की रिपोर्ट के अनुसार इस मामले में और भी पुलिसकर्मी शामिल हैं। सीबीआई की कार्रवाई से अब उम्मीद है कि इस मामले में और भी गिरफ्तारियां होंगी।
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में आय से अधिक संपत्ति से जुड़े एक मामले में सीबीआई द्वारा छापामार कार्रवाई की है। बताया जा रहा है कि शहर में रहने वाले एक रिटायर्ड लोको पायलट के ठिकाने पर सीबीआई की दबिश के चलते हड़कंप मच गया।
बता दें कि, सीबीआई टीम ने 19 जून को देर रात अशोक शर्मा के आवास पर दबिश दी थी। सीबीआई ने रेलवे के पूर्व लोको पायलट के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज किया है।
भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत केस दर्ज
आय से अधिक संपत्ति के मामले में सीबीआई ने आरोपी अशोक शर्मा के खिलाफ केस दर्ज किया है। सीबीआई को अशोक शर्मा की निर्धारित इनकम (आय) से 63% ज्यादा संपत्ति मिली है। पूर्व लोको पायलट अशोक शर्मा के खिलाफ भ्रष्टाचार अधिनियम की धाराओं के तहत सीबीआई ने मामला दर्ज किया है। अब सीबीआई जांच करेगी कि उन्होंने वेतन के अलावा कहां कहां से किस मद से आय हुई है।