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जनगणना में किसी तथ्य को जानबूझकर छिपाने पर जनगणना अधिनियम 1948 की धारा 11 के तहत एक हजार रुपये जुर्माना एवं तीन साल की सजा का प्रावधान है। इस मामले में उत्तरदाता एवं प्रगणक के लिए दंड का एक समान प्रावधान है, जबकि जनगणना में प्राप्त तथ्यों को कोई प्रगणक बाहर साझा करता है तो आरोप साबित होने पर भी दंड का प्रावधान है।
जनगणना में बुधवार को सातवें दिन भी स्वगणना हुई। स्वगणना के दौरान कुछ लोगों के तथ्यों को छिपाने की चर्चा के बीच प्रगणक एवं पर्यवेक्षक भी सतर्क हो गए हैं। उनमें जनगणना अधिनियम के प्रावधानों की बातें हो रही हैं। यदि हाउस लिस्टिंग ब्लॉक में ज्यादा अनियमितता पाई जाएगी तो प्रगणक जिम्मेदार होंगे। वहीं किसी ब्लॉक में रहने वालों की संख्या बहुत कम होगी तो संदेह के आधार पर फिर पुनरीक्षण कराया जा सकता है।
गोरखपुर में चार्ज अधिकारी/एसडीएम सदर दीपक गुप्ता ने बताया कि जनगणना में प्रगणक घर-घर जाएंगे और भौतिक सत्यापन करके ही फीडिंग करेंगे। यदि किसी का बड़ा मकान है और उसने कमरे की संख्या कम बता दी है तो जनगणना कर्मी उसकी जांच करेंगे। यदि किसी के घर में दो या तीन कारें हैं और मकान मालिक उसमें एक ही कार को अपना बता रहा है तो हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट सहित अन्य माध्यम से भी जांच की जाएगी।
जनगणना में तथ्य छिपाया तो होगी तीन साल की जेल
इसे लेकर जिला जनगणना अधिकारी विनीत कुमार सिंह ने बताया कि जनगणना में किसी को चल-अचल संपत्ति छिपाने की आवश्यकता नहीं है। इसके तथ्यों से आयकर एवं अन्य सुविधाओं का कोई सरोकार नहीं है। जनगणना के दौरान किसी विवाद के बाद आरोप साबित होने पर जनगणना अधिनियम के अंतर्गत कार्रवाई की जाएगी।
जनगणना फॉर्म में हैरान कर देने वाले सवाल
वहीं, जनगणना के लिए भरे जाने वाले फॉर्म में कई सवाल और सही विकल्प हैरान कर देने वाले हैं। 34 सवालों में से एक सवाल यह भी है कि आपकी पत्नी कितनी हैं? अगर पत्नी दो होंगी तो डबल फैमिली यानी दो दंपति का विकल्प भरना होगा। अगर एक महिला के दो पति हों तो सिंगल फैमिली यानी एक दंपति माना जाएगा।
किसी भी परिवार में दंपति की गणना पत्नी की संख्या से ही निर्धारित होगी। जितनी पत्नियां, उतने ही दंपति। परिवार में दादा-दादी, पिता-माता और पुत्र-बहू हों तो इसका मतलब यह नहीं कि मुखिया वही होगा जो बड़ा होगा। यानी जरूरी नहीं है कि दादा या पिता ही मुखिया हों, कोई भी हो सकता है। परिवार के सदस्य जिसे मुखिया बताएंगे, वही फॉर्म में भरा जाएगा। जनगणना के लिए फॉर्म पूरी स्टडी से तैयार किया गया है। परिवार में चाहे जितने पुरुष और चाहे जितने उम्रदराज लोग हों, उन्होंने कहा कि बहू, पत्नी, दादी या पुत्री मुखिया है तो उसका ही नाम भरा जाएगा। परिवार की मुखिया उस परिवार की कोई भी महिला हो सकती है। मुखिया के लिए उम्र की सीमा नहीं है।
]]>जनगणना में बुधवार को सातवें दिन भी स्वगणना हुई। स्वगणना के दौरान कुछ लोगों के तथ्यों को छिपाने की चर्चा के बीच प्रगणक एवं पर्यवेक्षक भी सतर्क हो गए हैं। उनमें जनगणना अधिनियम के प्रावधानों की बातें हो रही हैं। यदि हाउस लिस्टिंग ब्लॉक में ज्यादा अनियमितता पाई जाएगी तो प्रगणक जिम्मेदार होंगे। वहीं किसी ब्लॉक में रहने वालों की संख्या बहुत कम होगी तो संदेह के आधार पर फिर पुनरीक्षण कराया जा सकता है।
गोरखपुर में चार्ज अधिकारी/एसडीएम सदर दीपक गुप्ता ने बताया कि जनगणना में प्रगणक घर-घर जाएंगे और भौतिक सत्यापन करके ही फीडिंग करेंगे। यदि किसी का बड़ा मकान है और उसने कमरे की संख्या कम बता दी है तो जनगणना कर्मी उसकी जांच करेंगे। यदि किसी के घर में दो या तीन कारें हैं और मकान मालिक उसमें एक ही कार को अपना बता रहा है तो हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट सहित अन्य माध्यम से भी जांच की जाएगी।
जनगणना में तथ्य छिपाया तो होगी तीन साल की जेल
इसे लेकर जिला जनगणना अधिकारी विनीत कुमार सिंह ने बताया कि जनगणना में किसी को चल-अचल संपत्ति छिपाने की आवश्यकता नहीं है। इसके तथ्यों से आयकर एवं अन्य सुविधाओं का कोई सरोकार नहीं है। जनगणना के दौरान किसी विवाद के बाद आरोप साबित होने पर जनगणना अधिनियम के अंतर्गत कार्रवाई की जाएगी।
जनगणना फॉर्म में हैरान कर देने वाले सवाल
वहीं, जनगणना के लिए भरे जाने वाले फॉर्म में कई सवाल और सही विकल्प हैरान कर देने वाले हैं। 34 सवालों में से एक सवाल यह भी है कि आपकी पत्नी कितनी हैं? अगर पत्नी दो होंगी तो डबल फैमिली यानी दो दंपति का विकल्प भरना होगा। अगर एक महिला के दो पति हों तो सिंगल फैमिली यानी एक दंपति माना जाएगा।
किसी भी परिवार में दंपति की गणना पत्नी की संख्या से ही निर्धारित होगी। जितनी पत्नियां, उतने ही दंपति। परिवार में दादा-दादी, पिता-माता और पुत्र-बहू हों तो इसका मतलब यह नहीं कि मुखिया वही होगा जो बड़ा होगा। यानी जरूरी नहीं है कि दादा या पिता ही मुखिया हों, कोई भी हो सकता है। परिवार के सदस्य जिसे मुखिया बताएंगे, वही फॉर्म में भरा जाएगा। जनगणना के लिए फॉर्म पूरी स्टडी से तैयार किया गया है। परिवार में चाहे जितने पुरुष और चाहे जितने उम्रदराज लोग हों, उन्होंने कहा कि बहू, पत्नी, दादी या पुत्री मुखिया है तो उसका ही नाम भरा जाएगा। परिवार की मुखिया उस परिवार की कोई भी महिला हो सकती है। मुखिया के लिए उम्र की सीमा नहीं है।
]]>यूपी में जनगणना 2027 के लिए स्वगणना शुरू हो चुकी है। अब लोग स्वगणना करा रहे हैं। पूछे जाने वाले सवाल उनको परेशान कर रहे हैं। परिवार कौन से मुख्य अनाज का उपयोग करता है? इसके विकल्प है गेहूं, चावल, बाजरा। अब उत्तर भारत में मुख्य रूप से गेहूं और चावल दोनों का उपयोग किया जाता है। समस्या यह है कि दोनों को विकल्प के रूप में नहीं रखा जा सकता है।
अगर गेहूं चुनेंगे तो चावल मिट जाएगा और चावल विकल्प में चुनेंगे तो गेहूं मिट जाएगा। लोगों का कहना है कि एक साथ दोनों क्यों नहीं रखा जा सकता है। सहायक निदेशक जनगणना जेके श्रीवास्तव का कहना है कि इस सवाल को रखने का मुख्य उद्देश्य था कि किस क्षेत्र के लोग कौन सा मुख्य अनाज खाते हैं। जिससे आगे कुछ योजनाएं बनानी हो तो उसके अनुसार की जाए।
प्रयागराज डीएम, मनीष कुमार वर्मा ने कहा कि जनगणना 2027 की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इस वक्त स्वगणना हो रही है। तीन दिनों में अच्छा रिस्पांस मिला है। हम जिले के सभी नागरिकों से अपील करते हैं कि वो स्वगणना में हिस्सा लें और अपना फॉर्म समय रहते भरें। ऐसा करने पर बाद में किसी प्रकार की समस्या नहीं होगी।
इस पोर्टल पर कराएं स्वगणना
http://se.census.gov.i n पोर्टल पर जाकर अपना राज्य, जिला भरकर भाषा व मोबाइल नंबर डालें और ओटीपी के बाद परिवार का मुखिया, गूगल मैप पर घर की लोकेशन भरने के बाद पूछे गए सवालों के जवाब देकर आसानी से स्वगणना कराई जा सकती है। अफसरों का कहना है कि प्रक्रिया में 10 से 15 मिनट का वक्त लगता है।
छह हजार से अधिक ने करा ली स्वगणना
आंकड़ों के अनुसार प्रयागराज में अब तक छह हजार से अधिक लोगों ने स्वगणना करा ली है। तीसरे दिन यूथ एवं स्पोर्ट्स डे के रूप में मनाया गया। जिला जनगणना अधिकारी विनीता सिंह ने बताया कि उत्तर प्रदेश शिक्षा चयन आयोग के अध्यक्ष सहित हंडिया तहसील व जसरा ब्लॉक के खिलाड़ियों, ग्रुप मुख्यालय 15 यूपी बटालियन के एनसीसी कैडेटों, अफसरों, राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयं सेवकों ने अपना स्वगणना फॉर्म भरा व इसे ऑनलाइन भी किया। जिला जनगणना अधिकारी ने बताया कि अभियान 21 मई तक चलेगा। उन्होंने प्रत्येक वर्ग से अपील की है कि सभी लोग आवेदन करें और जनगणना 2027 में सहयोग करें। 22 मई से 20 जून के बीच जब प्रगणक उनके घर आएं तो उसे अपने स्वगणना के बाद मिले नंबर को जरूर बताएं।
स्वगणना-2027 के व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए योगी सरकार ग्राम स्तर तक चलाएगी जागरूकता अभियान, हेल्पडेस्क स्थापित करने के निर्देश
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को किया था जनगणना-2027 के प्रथम चरण का शुभारंभ
नागरिकों से जनगणना पोर्टल पर जानकारी दर्ज करने की अपील
डेटा सुरक्षा और गोपनीयता के सभी मानकों के पालन का भरोसा
लखनऊ
उत्तर प्रदेश सरकार जनगणना- 2027 को पारदर्शी, तकनीक आधारित और सटीक बनाने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को प्रदेश में जनगणना-2027 के प्रथम चरण का औपचारिक शुभारंभ किया। इसी क्रम में शुक्रवार को पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं दिव्यांगजन सशक्तीकरण मंत्री नरेन्द्र कश्यप के सरकारी आवास पर जनगणना-2027 के अंतर्गत स्वगणना सत्र आयोजित किया गया। इस दौरान मंत्री नरेन्द्र कश्यप ने स्वगणना कर अपनी भागीदारी दर्ज कराई।
22 मई से मकान सूचीकरण होगा आरंभ
स्वगणना की इस पहल से नागरिकों को अपनी और अपने परिवार की जानकारी जनगणना पोर्टल http://se.census.gov.in पर ऑनलाइन माध्यम से दर्ज करने का अवसर मिलेगा। इसको लेकर प्रदेशवासियों से अपील की गई है कि वह जनगणना-2027 में उत्साहपूर्वक भाग लें और स्वगणना प्रक्रिया को सफल बनाने में अपनी भूमिका निभाएं। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य डेटा संकलन की प्रक्रिया को तेज करना और त्रुटिहीन एवं सटीक आंकड़े प्राप्त करना है। जनगणना-2027 के प्रथम चरण यानी स्वगणना प्रक्रिया में डेटा सुरक्षा और गोपनीयता के सभी मानकों का पूर्ण रूप से पालन सुनिश्चित किया जाएगा। स्वगणना की 15 दिनों की अवधि पूर्ण होने के बाद 22 मई से औपचारिक मकान सूचीकरण का कार्य शुरू किया जाएगा।
ग्राम स्तर तक चलेगा जागरूकता अभियान
स्वगणना-2027 के व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए योगी सरकार प्रदेश स्तर से लेकर जिला और ग्राम स्तर तक जागरूकता अभियान चलाएगी। साथ ही नागरिकों की सुविधा के लिए हेल्पडेस्क और सहायता केंद्र स्थापित किए जाने के लिए भी कहा गया है। कार्यक्रम के दौरान मंत्री नरेंद्र कश्यप ने सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को निर्देश दिया कि वह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशानुसार अपने-अपने स्तर पर इस कार्यक्रम का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करें। साथ ही अधिक से अधिक नागरिकों को इसमें सम्मिलित होने के लिए प्रेरित करें।
जनगणना 2027 के माध्यम से स्वगणना प्रक्रिया को मिलेगी नई दिशा
मंत्री नरेंद्र कश्यप ने कहा कि जनगणना 2027 के माध्यम से स्वगणना प्रक्रिया को नई दिशा मिलेगी। इससे प्राप्त आंकड़े राज्य की विकासपरक योजनाओं के निर्माण एवं क्रियान्वयन में अत्यन्त सहायक सिद्ध होंगे। कार्यक्रम में जनगणना कार्य निदेशालय तथा पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग के उच्चाधिकारी एवं विभागीय कर्मचारी उपस्थित रहे।
यूपी में जगणना की तैयारियां पूरी हो गई हैं। सात मई से स्व गणना (सेल्फ एन्युमिरेशन) कोई भी व्यक्ति कर सकता है। 21 मई तक अवसर मिलेगा। इसमें एक आईडी जनरेट होगी जिसे प्रगणक को देना होगा। इससे दोनों का काम आसान हो जाएगा। प्रगणक 22 मई से दरवाजे पर दस्तक देंगे। जनगणना में सेल्फ एन्युमिरेशन पोर्टल (एसई) नागरिकों को जनगणना 2027 के लिए घर बैठे खुद अपनी जानकारी ऑनलाइन भरने की सुविधा देगा। यह 16 भाषाओं में उपलब्ध है।
जिला जगणना अधिकारी ममता मालवीय ने बताया कि जनगणना के लिए घर बैठे स्व-जनगणना (सेल्फ एन्युमिरेशन) करने के लिए आधिकारिक पोर्टल https://se.census.gov.in पर जाना होगा। इसके लिए परिवार के मुखिया का मोबाइल नंबर डालना होगा। आधार और मकान से जुड़ी जानकारी इसमें भरनी होगी। एक मोबाइल नंबर से एक ही घर का लॉगिन किया जा सकेगा। सबसे पहले पोर्टल खोलें फिर अपना राज्य और कैप्चा भरें। इसके बाद स्वागत स्क्रीन आगे का मार्गदर्शन करेगी।
परिवार का मुखिया अपना नाम मोबाइल नंबर भर कर अपनी भाषा चुनेगा। ओटीपी से कन्फरमेशन होने के बाद जिला भरेंगे। लैंडमार्क मैप के साथ हाईलाइट होगा उसे चुना जाएगा। इसके बाद अपने घर का डिटेल भरेंगे। कोई गलती होने पर पोर्टल पर विकल्प मिलेगा और कोई चीज छूटेगी तो उसका भी संकेत मिलेगा। इसके बाद ड्राफ्ट सहेजें, संशोधन भी कर सकते हैं अंत में सबमिट कर दें। इसके बाद एच के साथ 11 अंकों का एसईआईडी नंबर दिखेगा। एसएमएस से भी यह नंबर आएगा। जब प्रगणक आपके घर आए तो उसे यह एसईआईडी नंबर दे दें तो समय बचेगा और सूचना भी सही से भरी जा सकेंगी।
जनगणना कार्यों की लगातार होगी मानीटरिंग
जनगणना प्रबंधन डिजिटली होगा। इस पोर्टल का नाम सीएमएसएस है। लखनऊ से सहायक निदेशक जनगणना राजेंद्र कुमार व सांख्यिकी अन्वेषक संस्कृति तिवारी भी इस कार्य में मुरादाबाद में मानीटरिंग कर रहे हैं। साथ ही मुरादाबाद स्तर से एसडीएम स्निग्धा चतुर्वेदी, माधव उपाध्याय पर्यवेक्षक अधिकारी के रूप में कार्य कर रहे हैं। जिले में आठ हजार से ज्यादा कर्मचारी जनगणना कार्य में लगेंगे।
घर की स्थिति से इस्तेमाल होने वाले अनाज तक सवाल
घर का नंबर, जनगणना का नंबर, घर की छत, फर्श कैसी, परिवार का क्रमांक, मुखिया का नाम, मकान का स्वामित्व, उपलब्ध कमरों की संख्या, विवाहित दंपतियों की संख्या, पेयजल के मुख्य स्रोत, पेयजल स्रोत की उपलब्धता कितने निकट, प्रकाश का मुख्य स्रोत, शौचालय की स्थिति, शौचालय का प्रकार, गंदे पानी की निकासी किससे जुड़ी, परिसर के अंदर स्नान की सुविधा है या नहीं, रसोई घर में एलपीजी, पीएनजी अथवा अन्य सुविधा, रेडियो, मोबाइल, स्मार्ट फोन की स्थिति, टेलिविजन में मुफ्त दूरदर्शन, डिश, केबिल कनेक्शन या अन्य व्यवस्था, इंटरनेट की सुविधा का इस्तेमाल, लैपटॉप डेस्कटॉप या मोबाइल यूज में होता, साइकिल, मोटर साइकिल, मोपेड है अथवा कार व अन्य 4 पहिया वाहन है अंतिम सवाल परिवार में उपभोग किए जाने वाला अनाज कौन सा है होगा।
जिला जनगणना अधिकारी, ममता मालवीय ने कहा कि जनगणना की हमारी तैयारी पूरी है। समय से सभी कार्य संपन्न करवाएंगे। 7 से 21 मई तक स्व गणना के बाद 22 मई से प्रगणक जाएंगे। अगर स्व गणना से आईडी बनाएंगे तो सहूलियत मिलेगी। प्रगणकों की ट्रेनिंग हो चुकी है।
]]>राजनैतिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने 30 अप्रैल 2025 को हुई अपनी बैठक में जनगणना 2027 में जातिगत गणना को शामिल करने का निर्णय लिया। इससे पहले 2011 की जनगणना तक केवल अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) की ही व्यवस्थित गणना होती थी।
इस पूरी प्रक्रिया के लिए 11,718.24 करोड़ रुपए का बजट तय किया गया है और डेटा सुरक्षा के लिए मजबूत इंतजाम किए गए हैं।जनगणना 2027 को दो चरणों में किया जाएगा, ताकि पूरे देश में व्यवस्थित और व्यापक तरीके से डेटा इकट्ठा किया जा सके।
सरकार के अनुसार, सुरक्षित डेटा सेंटर और बड़े कार्यबल की मदद से यह जनगणना भरोसेमंद जानकारी देगी, जिससे लक्षित और समावेशी नीति बनाना आसान होगा।
बयान में आगे कहा गया है कि जनगणना से जनसंख्या के रुझानों को सही तरीके से समझने में मदद मिलती है और इससे भोजन, पानी, ऊर्जा और बुनियादी ढांचे जैसे क्षेत्रों में बेहतर योजना बनाई जा सकती है। यह स्थानीय स्तर पर भी सटीक जानकारी देता है, ताकि सरकारी योजनाओं को सही जगह तक पहुंचाया जा सके।
स्वतंत्रता के बाद यह देश की आठवीं जनगणना होगी, जो पहले से ज्यादा अपडेट और विस्तृत जानकारी देगी। इससे बदलती सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों के अनुसार योजना बनाना आसान होगा।
जनगणना देश या किसी विशिष्ट क्षेत्र के सभी व्यक्तियों से संबंधित जनसांख्यिकीय, सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक आंकड़ों के संग्रह, संकलन, विश्लेषण और प्रसार की प्रक्रिया है। जनगणना के माध्यम से एकत्रित सूचनाओं का विशाल भंडार इसे योजनाकारों, प्रशासकों, शोधकर्ताओं और अन्य डेटा उपयोगकर्ताओं के लिए आंकड़ों का सबसे समृद्ध स्रोत बनाता है। जनगणना गवर्नेंस के लिए एक महत्वपूर्ण आधार के रूप में कार्य करती है, जो राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक क्षेत्रों में साक्ष्य-आधारित निर्णय लेने में सक्षम बनाती है।
यह दुनिया की सबसे बड़ी जनगणना होगी और डिजिटल तकनीक, मजबूत डेटा सुरक्षा और आसान प्रक्रियाओं के साथ यह डेटा-आधारित नीति निर्माण को और मजबूत बनाएगी।
]]>देश की डिजिटल कुंडली यानी जनगणना 2027 का आगाज गुरुवार से हो गया है। इस बार आपको प्रगणक के घर आने और घंटों पूछताछ का इंतजार करने की जरूरत नहीं है। स्व-गणना के जरिए अब नागरिक खुद पोर्टल पर अपनी और अपने परिवार की जानकारी अपडेट कर सकते हैं। हालांकि, इस पूरी प्रक्रिया में एक यूनिक एसई आईडी सबसे अहम कड़ी होगी, जिसे संभालकर रखना आपकी जिम्मेदारी होगी।
34 सवालों के जवाब और लोकेशन का मैप
ऑनलाइन जनगणना की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए इसे तकनीक से जोड़ा गया है। इसमें मोबाइल नंबर और ईमेल पर ओटीपी वेरिफिकेशन के साथ ही गूगल मैप के जरिए घर की सटीक लोकेशन भी दर्ज करनी होगी। परिवार के सदस्यों की शिक्षा, रोजगार और सामाजिक-आर्थिक स्थिति से जुड़े करीब 34 सवालों के जवाब देने होंगे।
डिजिटल जनगणना: ऐसे करें खुद का पंजीकरण
चरण प्रकिया
स्टेप 1-2 पोर्टल पर मोबाइल नंबर/ईमेल दर्ज कर ओटीपी से वेरिफिकेशन।
स्टेप 3-4 परिवार के मुखिया का विवरण और गूगल मैप पर घर की लोकेशन।
स्टेप 5-6 सदस्यों की संख्या, शिक्षा, रोजगार और आय से जुड़े 34 सवालों के जवाब।
स्टेप 7-8 जानकारी का प्रीव्यू कर फाइनल सबमिट और 'एसई आइडी' सुरक्षित करना।
क्यों जरूरी है आइडी: मई माह में जब प्रगणक आपके घर सत्यापन के लिए आएगा, तो आपको बस यह आइडी दिखानी होगी।
भूल गए तो क्या होगा: यदि आप आइडी गुम कर देते हैं या नहीं दिखा पाते, तो आपकी ऑनलाइन मेहनत बेकार जाएगी। प्रगणक को दोबारा शुरुआत से आपका डेटा मैनुअल भरना पड़ेगा।
ग्राउंड जीरो पर तैयारी: प्रगणकों को मिल रही ट्रेनिंग
एक तरफ नागरिक ऑनलाइन डेटा भर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर प्रशासन ने सत्यापन के लिए प्रगणकों और पर्यवेक्षकों की फौज तैयार कर ली है। शहर में आइआइटीटीएम और शिक्षा महाविद्यालय हजीरा में सघन प्रशिक्षण चल रहा है। ग्रामीण इलाकों में तहसील और विकासखंड स्तर पर मास्टर ट्रेनर्स कर्मचारियों को डिजिटल डेटा हैंडलिंग के गुर सिखा रहे हैं।
30 अप्रैल तक चलेगी स्व-गणना की प्रक्रिया
मध्यप्रदेश में 16 से 30 अप्रैल तक ऑनलाईन स्व-गणना का कार्य होगा। एक से 30 मई तक मकान सूचीकरण होगा। यह प्रक्रिया डिजिटल रूप से होगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश में जनगणना 2027 की प्रक्रिया के शुभारंभ अवसर पर मुख्यमंत्री निवास के समत्व भवन में आयोजित कार्यक्रम में यह विचार व्यक्त किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्व-गणना पोर्टल se.census.gov.in पर प्रारंभिक पंजीकरण कर प्रदेश में स्व-गणना प्रक्रिया का शुभारंभ किया।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जनगणना केवल आंकड़ों की प्रक्रिया नहीं बल्कि राष्ट्र के भविष्य को सही दिशा देने का महत्वपूर्ण कदम है। इससे हम जान सकेंगे कि विकास की धारा समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक सुगमता से पहुंच रही है या नहीं। यह जनगणना हमारी अगली पीढ़ी के उज्जवल भविष्य के लिए है।
]]>जनगणना का काम फरवरी 2027 में होगा। बैठक में अपर कलेक्टर प्रकाश नायक, पीसी शाक्य, जिला जनगणना अधिकारी भुवन गुह्रश्वता, एसडीएम, संयुक्त कलेक्टर, डिप्टी कलेक्टर सहित समिति के सदस्यगण एवं विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे। जनगणना कार्य निदेशालय संयुक्त निदेशक नामित यादव, सहायक निदेशक ऐन्सी रेजी ने प्रशिक्षण दिया।
10 लाख घरों की होगी मैपिंग
01 मई से शुरू हो रही जनगणना के लिए जिला प्रशासन ने तैयारी पूरी कर ली है। इस बार नागरिक डिजिटल तरीके से अपनी जानकारी सरकार तक पहुंचा सकेंगे। कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने बताया, डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जानकारी देने नागरिकों को इंडियन सेंसस डाटा कलेक्शन पोर्टल पर लॉग-इन करना होगा।
यहां नागरिकों से 33 तरह के प्रश्नों का जवाब मांगा जाएगा। यही जवाब मांगने 'डोर टू डोर' सर्वे भी होगा। जनगणना के लिए 8000 कर्मचारियों को प्रशिक्षण देने का काम शुरू कर दिया गया है। अभियान के तहत 10 लाख घरों की मैपिंग करने का टारगेट तय किया गया है। घरों की जियो टैगिंग से मैपिंग करने के बाद कर्मियों को रवाना किया जाएगा।
]]>
सरकारी तैयारियों के मुताबिक इस बार जनगणना कर्मी टैबलेट आधारित डिजिटल सिस्टम से डाटा दर्ज करेंगे, ताकि योजनाएं कागजी नहीं, जमीनी हकीकत पर बन सकें।
सबसे पहले घर की पहचान और बनावट
जनगणना टीम घर पहुंचते ही भवन नंबर और जनगणना मकान नंबर दर्ज करेगी। इसके बाद मकान की बुनियादी संरचना पर सवाल होंगे। फर्श किस सामग्री की है, दीवारें कच्ची हैं या पक्की, छत टीन, कंक्रीट या अन्य किस्म की है। मकान रिहायशी है, दुकान है या किसी और उपयोग में यह भी दर्ज होगा। मकान की हालत (अच्छी, रहने लायक या जर्जर) भी लिखी जाएगी। परिवार मुख्य रूप से कौन-सा अनाज खाता है गेहूं, चावल, मक्का या अन्य, यह भी जनगणना में शामिल रहेगा। अंत में एक मोबाइल नंबर लिया जाएगा, जिसका उपयोग केवल जनगणना से जुड़ी आधिकारिक सूचना पहुंचने के लिए किया जाएगा। यही जानकारी भविष्य की आवास योजनाओं की दिशा तय करेगी।
परिवार की पूरी प्रोफाइल बनेगी
घर के बाद बारी परिवार की होगी। परिवार में सामान्य रूप से रहने वाले लोगों की कुल संख्या, परिवार क्रमांक और परिवार के मुखिया का नाम दर्ज किया जाएगा। मुखिया का लिंग और यह भी कि वह अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति या अन्य वर्ग से है, यह पूछा जाएगा। घर में रहने वाले विवाहित दंपत्तियों की संख्या भी दर्ज होगी, जिससे पारिवारिक संरचना का सामाजिक विश्लेषण हो सके।
कमरे कितने, घर किसका
मकान का स्वामित्व किसके पास है खुद का, किराये का या अन्य, यह महत्वपूर्ण सवाल रहेगा। परिवार के पास रहने के लिए कुल कितने कमरे हैं, यह भी पूछा जाएगा। यह डाटा भीड़भाड़ और आवासीय घनत्व की वास्तविक स्थिति बताएगा।
पानी, बिजली, शौचालय की असली तस्वीर
पीने का पानी किस स्रोत से आता है, पानी घर में उपलब्ध है या बाहर से लाना पड़ता है। रोशनी का मुख्य साधन क्या है जैसे बिजली, सोलर या अन्य। शौचालय है या नहीं, है तो किस प्रकार का। गंदे पानी की निकासी की व्यवस्था, साथ ही यह भी दर्ज होगा कि घर में स्नानगृह है या नहीं।
रसोई का धुआं या गैस की लौ
जनगणना कर्मी यह भी पूछेंगे कि घर में अलग रसोई घर है या नहीं। एलपीजी या पीएनजी कनेक्शन है या नहीं और खाना पकाने में किस ईंधन का उपयोग होता है, लकड़ी, गोबर, कोयला या गैस। यह जानकारी उज्ज्वला जैसी योजनाओं के असर का वास्तविक मूल्यांकन करेगी।
इलेक्ट्रानिक और डिजिटल पहुंच भी होगी दर्ज
अब जनगणना में यह भी गिना जाएगा कि घर सूचना और तकनीक से कितना जुड़ा है। घर में रेडियो या ट्रांजिस्टर, टेलीविजन, इंटरनेट सुविधा, कंप्यूटर या लैपटाप है या नहीं, यह पूछा जाएगा। टेलीफोन, मोबाइल या स्मार्ट फोन की उपलब्धता भी दर्ज होगी। यह डाटा बताएगा कि डिजिटल इंडिया की योजनाएं गांव और शहर तक कितनी पहुंची हैं।
साइकिल से कार तक की गिनती
परिवार के पास साइकिल, स्कूटर, मोटरसाइकिल, मोपेड है या नहीं। कार, जीप या वैन जैसी चार पहिया गाड़ियों की जानकारी भी दर्ज होगी। इससे परिवार की आर्थिक स्थिति का एक बड़ा संकेत मिलेगा।
अहम हैं ये 33 सवाल
विशेषज्ञ मानते हैं कि यह सिर्फ डाटा संग्रह नहीं, बल्कि आने वाले दशक की नीतियों की नींव है। आवास, पेयजल, स्वच्छता, ऊर्जा, डिजिटल कनेक्टिविटी और सामाजिक कल्याण की योजनाएं इन्हीं आंकड़ों के आधार पर तय होंगी। इस बार जनगणना का मकसद सिर्फ कितने लोग है यह जानना नहीं, बल्कि यह समझना है कि लोग कैसे जी रहे हैं।
जानकारी अनुसार जनगणना-2027 का आयोजन दो चरणों में किया जाएगा। पहले चरण में मकान सूचीकरण और मकानों की गणना की जाएगी। यह प्रक्रिया अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच चयनित 30 दिनों में पूरी की जाएगी। पहले चरण के पूरा होने के बाद इससे संबंधित अधिसूचना राज्य राजपत्र में प्रकाशित की जाएगी।
सीमा स्थिरीकरण लागू
सरकार की सीमा स्थिरीकरण अधिसूचना के तहत 31 दिसंबर 2025 से 31 मार्च 2027 तक राज्य में किसी भी ग्रामीण या शहरी प्रशासनिक इकाई की सीमा या क्षेत्राधिकार में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा।
डिजिटल जनगणना की पूरी तैयारी
जनगणना 2027 इस बार पूरी तरह डिजिटल और तकनीक आधारित होगी। पहले चरण में कुल 33 प्रश्न पूछे जाएंगे, जो मकानों की स्थिति, उनके उपयोग, उपलब्ध बुनियादी सुविधाओं, घरेलू परिसंपत्तियों और परिवार द्वारा उपभोग किए जाने वाले मुख्य अनाज से जुड़े होंगे। केंद्र सरकार ने इन प्रश्नों को 23 जनवरी 2026 को विधिवत जारी कर दिया है। इस चरण की नोडल जिम्मेदारी राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग को सौंपी गई है।
जनगणना में इस बार शुरुआत से ही जियो-स्पैशियल डेटा और एनालिटिक्स के उपयोग को अनिवार्य किया गया है, जिससे हर मकान का डिजिटल मैपिंग आधारित रिकॉर्ड तैयार होगा। गृह मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार प्रक्रिया दो चरणों में होगी।
प्रथम चरण (अप्रैल–सितंबर 2026) में मकान सूचीकरण और आवास संबंधी जानकारी जुटाई जाएगी, जबकि द्वितीय चरण (फरवरी 2027) में जनसंख्या की वास्तविक गणना होगी। देशभर के लिए संदर्भ तिथि 1 मार्च 2027 की मध्यरात्रि तय की गई है।
]]>भारत की आगामी और आजादी के बाद की 8वीं जनगणना का पहला चरण 1 अप्रैल, 2026 से शुरू होगा, जिसमें देश भर के घरों की गिनती का कार्य किया जाएगा। भारत के महापंजीयक ने यह जानकारी दी। भारत के जनगणना आयुक्त और महापंजीयक, मृत्युंजय कुमार नारायण ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को लिखे पत्र में बताया है कि घरों के सूचीकरण अभियान (House-listing Operation- HLO) और आवास गणना (Housing Census) 1 अप्रैल, 2026 से शुरू होगी। इस चरण में प्रत्येक घर की आवासीय स्थिति, संपत्ति और उपलब्ध सुविधाओं से संबंधित जानकारी जुटाई जाएगी।
बहुप्रतीक्षित जनगणना की प्रक्रिया शुरू होने की तारीख का ऐलान कर दिया गया है। इस बार जनगणना दो चरणों में होनी है। रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया ने कहा कि अगले साल 1 अप्रैल से इसका पहला चरण शुरू हो जाएगा। इस चरण में लोगों से उनके घरों में मौजूद वाहन, इलेट्रॉनिक समाना और अन्य सुख सुविधाओं की चीजों की लिस्ट तैयार की जाएगी। इसके लिए सेंसस कमिश्नर और रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया ने राज्यों के मुख्य सचिवों को पत्र लिखा है। बता दें कि इस बार मोबाइल एप्लीकेशन का इस्तेमाल करके डिजिटल माध्यम से जनगणना करवाई जाएगी।
पहले चरण में कमान का सूचीकरण किया जाएगा। इसमें लोगों की आवासीय स्थिति, संप्तित और सुख-सुविधा के सामानों की जानकारी ली जाएगी। वहीं जनगणना के दूसरे चरण में घर में रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति की जनसांख्यिकीय, सामाजिक आर्थिक और अन्य जानकारियों इकट्ठी की जाएंगी। इसे पॉपुलेशन एन्यूमरेशन (PE) कहा जाएगा।
राज्यों के मुख्य सचिवों को लिखे गए पत्र में कहा गया है कि तय तारीख से पहले सुपरवाइजर और अन्य जनगणना अधिकारियों और कार्यकर्ताओं के कामों का बंटवारा कर दिया जाए। यह काम जिला स्तर पर किया जाएगा। सरकार ने कहा कि इस बार जनगणना में जाति की जानकारी भी दर्ज की जाएगी। जनगणना के कार्य के लिए 34 लाख सर्वे करने वाले और सुपरवाइजर लगाए जाएंगे। ये लोग फील्ड का काम करेंगे। इसके अलावा 30 हजार जनगणना पदाधिकारियों को तैनात किया जाएगा। ये अधिकारी जनगणना के दौरान मिली जानकारी का डेटा तैयार करेंगे। इसके बाद इस जानकारी को डिजिटलाइज किया जाएगा।
क्या-क्या पूछा जाएगा
ऑफिस ऑफ रजिस्ट्रार जनरल और सेंसस कमिश्नर ने करीब तीन दर्जन सवाल तैयार किए हैं जो जनगणना के दौरान लोगों से पूछे जाएंगे। इस सर्वे में हर शख्स से फोन, इंटरनेट, वान, रेडियो, टीवी, फ्रिज से जुड़ी जानकारी मांगी जाएगी। इसके अलावा लोगों से यह भी पूछा जाएगा कि वे कौन सा अनाज खाते हैं और पीने के पानी का स्रोत क्या है। लोगों से शौचालय, पानी की निकासी, नहाने और रसोई से जुड़ी जानकारी भी ली जाएगी। लोगों को एलपीजी या पीएनजी कनेक्शन की जानकारी भी देनी होगी।
जानकारी के मुताबिक लोगों से यह भी पूछा जाएगा कि उन्होंने छत, दीवारों और फर्श पर कौन सी सामग्री का इस्तेमाल किया है। घर में कितने लोग रहते हैं। घर में कितने कमर हैं। घर में कितने विवाहित दंपती हैं। घर का मुखिया महिला है या पुरुष। 1 मार्च 2027 तक जनगणना का अंतिम चरण पूरा होना है। अधिसूचना जारी होने के बाद ही एजेंसियों ने तैयारियां शुरू कर दी है। भारत में हर 10 सा में जनगणना करवाई जाती है। हालांकि इस बार कोरोना की वजह से जनगणना में देरी हुई है।
हाउसलिस्टिंग के लिए तैयार किए गए 3 दर्जन सवाल
महापंजीयक और जनगणना आयुक्त कार्यालय ने नागरिकों से पूछे जाने वाले लगभग तीन दर्जन सवाल तैयार किए हैं। इस बार सर्वे के दौरान घरों से फोन, इंटरनेट, वाहन (साइकिल, स्कूटर, मोटरसाइकिल, कार, जीप, वैन) और उपकरणों (रेडियो, टीवी, ट्रांजिस्टर) जैसी वस्तुओं के स्वामित्व के बारे में पूछा जाएगा।
नागरिकों से अनाज की खपत, पीने के पानी और लाइटिंग, शौचालयों के प्रकार और उन तक पहुंच, अपशिष्ट जल का निपटान, स्नान और रसोई की सुविधाएं, खाना पकाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले ईंधन और एलपीजी/पीएनजी कनेक्शन के बारे में भी पूछा जाएगा।
बाकी के सवालों में घर के फर्श, दीवारों और छत के लिए इस्तेमाल सामग्री, इसकी स्थिति, निवासियों की संख्या, कमरों की संख्या, विवाहित जोड़े और क्या घर की मुखिया महिला है या अनुसूचित जाति या जनजाति से है, यह सब शामिल हैं।
इसके बाद दूसरे चरण यानी जनसंख्या गणना (पीई) में, हर घर के सभी सदस्यों का डेमोग्राफ, सामाजिक-आर्थिक, सांस्कृतिक और बाकी जानकारी ली जाएगी।
प्रशासनिक सीमांकन की डेडलाइन 31 दिसंबर 2025
केंद्र सरकार ने सभी विभागों को 31 दिसंबर 2025 से पहले नगर निगमों, राजस्व गांवों, तहसीलों, उप-विभागों या जिलों की सीमाओं में कोई भी प्रस्तावित बदलाव करने का निर्देश जारी किया है। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि जनगणना के दौरान यानी 1 जनवरी 2026 और 31 मार्च 2027 के बीच प्रशासनिक यूनिट की सीमाओं में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा।
मौजूदा सीमाओं में किसी भी बदलाव की सूचना राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में जनगणना निदेशालयों और भारत के महापंजीयक को 31 दिसंबर 2025 तक देनी होगी, क्योंकि इसी दिन जनगणना 2027 के लिए, प्रशासनिक इकाइयों की सीमाएं फ्रीज कर दी जाएंगी।
नियमानुसार जिलों, उप-जिलों, तहसीलों, तालुकाओं और पुलिस स्टेशनों जैसी प्रशासनिक यूनिट की सीमाओं को निर्धारित करने के तीन महीने बाद ही जनगणना की जा सकती है।
काम बांटने के लिए बनेंगे ब्लॉक
गणना करने वाले कर्मचारियों के लिए काम का लोड बराबरी से बांटा जा सकते, इसके लिए, एक प्रशासनिक यूनिट को मैनेजेबल सेक्शन में डिवाइड किया जाता है जिन्हें ब्लॉक कहते हैं। ब्लॉक जनगणना के उद्देश्यों के लिए एक काल्पनिक मानचित्र पर किसी गांव या कस्बे के भीतर स्पष्ट परिभाषित क्षेत्र है।
इन्हें हाउसलिस्टिंग ऑपरेशन के दौरान हाउसलिस्टिंग ब्लॉक (एचएलबी) और जनसंख्या गणना के दौरान गणना ब्लॉक (ईबी) कहा जाता है और ये जनगणना के लिए सबसे छोटी प्रशासनिक यूनिट के रूप में काम करते हैं।
इस चरण में घरों की आवासीय स्थिति, संपत्ति की जानकारी,और उपलब्ध सुविधाओं जैसे- फोन, इंटरनेट, वाहन (साइकिल, स्कूटर, मोटरसाइकिल, कार, जीप, वैन), और अन्य उपकरणों (रेडियो, टीवी, ट्रांजिस्टर) के स्वामित्व के बारे में विवरण एकत्र किए जाएंगे।
इसके अलावा, लोगों से अनाज उपभोग, पेयजल और प्रकाश के स्रोत, शौचालयों के प्रकार और उपलब्धता, अपशिष्ट जल निपटान, स्नान और रसोई की सुविधाओं, खाना पकाने के लिए प्रयुक्त ईंधन और एलपीजी/पीएनजी कनेक्शन के बारे में भी पूछा जाएगा।
घर के फर्श, दीवारों और छत के लिए प्रयुक्त सामग्री, इसकी स्थिति, घर में रहने वालों की संख्या, कमरों की संख्या, विवाहित जोड़ों की उपस्थिति और क्या घर की मुखिया महिला है या अनुसूचित जाति या जनजाति से संबंधित है, जैसे अतिरिक्त प्रश्न भी पूछे जाएंगे।
दूसरा चरण (1 फरवरी, 2027 से): जनसंख्या गणना
इस चरण में हर घर में प्रत्येक व्यक्ति का जनसांख्यिकीय, सामाजिक-आर्थिक, सांस्कृतिक और अन्य विवरण एकत्र किया जाएगा।
यह चरण लद्दाख जैसे बर्फीले क्षेत्रों में 1 अक्टूबर, 2026 की संदर्भ तिथि और देश के बाकी हिस्सों में 1 मार्च, 2027 की संदर्भ तिथि के साथ होगा।
डिजिटल और स्व-गणना का प्रावधान
आगामी जनगणना की विशेषता यह है कि यह ‘मोबाइल एप्लीकेशन’ की मदद से डिजिटल माध्यम से की जाएगी। यह पारंपरिक कागजी प्रक्रिया से हटकर एक बड़ा बदलाव है। नागरिकों को स्व-गणना (Self-enumeration) का प्रावधान भी उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे वे खुद अपनी जानकारी दर्ज कर सकेंगे। महापंजीयक और जनगणना आयुक्त कार्यालय ने नागरिकों से पूछे जाने वाले लगभग तीन दर्जन प्रश्न तैयार किए हैं।
प्रशासनिक इकाइयों की सीमाओं में नहीं होगा बदलाव
जनगणना कार्य की सटीकता और सुचारु संचालन सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया है कि वे प्रशासनिक इकाइयों की सीमाओं में कोई भी प्रस्तावित परिवर्तन 31 दिसंबर, 2025 से पहले पूरा कर लें। इसके बाद किए गए बदलावों को जनगणना कार्य के लिए अंतिम नहीं माना जाएगा।
भारत के जनगणना आयुक्त और महापंजीयक, मृत्युंजय कुमार नारायण ने अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि जनगणना के लिए सभी गांवों और कस्बों को एक समान गणना प्रखंडों में विभाजित किया जाता है, और प्रत्येक प्रखंड के लिए एक गणक नियुक्त किया जाता है, ताकि जनसंख्या की गणना के दौरान किसी भी चूक या दोहराव से बचा जा सके। नियमों के अनुसार, जनगणना प्रशासनिक इकाइयों जैसे जिला, उप-जिला, तहसील, तालुका और थाना की सीमा निर्धारित होने के तीन महीने बाद ही की जा सकती है।
मुख्य सचिवों से यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि 1 जनवरी, 2026 और 31 मार्च, 2027 के बीच प्रशासनिक इकाइयों की सीमाओं में कोई बदलाव नहीं किया जाना चाहिए, जिस दौरान जनगणना का कार्य होगा। मौजूदा सीमाओं में किसी भी तरह के बदलाव की सूचना राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के जनगणना निदेशालयों एवं भारत के महापंजीयक को 31 दिसंबर, 2025 तक देनी होगी।
व्यापक पैमाने पर होगी तैनाती
जनगणना कार्य को सफलतापूर्वक संपन्न कराने के लिए 34 लाख से अधिक गणक (Enumerators) और पर्यवेक्षक (Supervisors) एवं लगभग 1.3 लाख जनगणना कार्यकर्ता तैनात किए जाएंगे। यह अब तक की 16वीं और आजादी के बाद की 8वीं जनगणना होगी।
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