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रायपुर में 15 अप्रैल 2026 को राज्य शासन की एक महत्वपूर्ण मंत्रिपरिषद बैठक आयोजित की जाएगी। यह बैठक मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में पूर्वान्ह 11:30 बजे से शुरू होगी। बैठक का आयोजन मंत्रालय महानदी भवन स्थित मंत्रिपरिषद कक्ष एम-5/20 में किया जाएगा, जहां प्रदेश के विभिन्न विभागों से जुड़े अहम प्रस्तावों और नीतिगत निर्णयों पर विचार-विमर्श किया जाएगा।
इस बैठक को लेकर प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां तेज कर दी गई हैं। माना जा रहा है कि इसमें विकास योजनाओं, बजट आवंटन, बुनियादी ढांचे के विस्तार, शिक्षा और रोजगार से जुड़े महत्वपूर्ण फैसले लिए जा सकते हैं। इसके अलावा राज्य में चल रही विभिन्न योजनाओं की समीक्षा भी एजेंडा का हिस्सा हो सकती है।
मुख्यमंत्री की अगुवाई में होने वाली इस बैठक से प्रदेश की नीतिगत दिशा तय होने की उम्मीद है। अधिकारियों और मंत्रियों के बीच समन्वय स्थापित कर जनहित से जुड़े निर्णयों को गति देने पर भी विशेष जोर रहेगा। यह बैठक आगामी समय में छत्तीसगढ़ के विकास एजेंडे को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
]]>इस बैठक को लेकर प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां तेज कर दी गई हैं। माना जा रहा है कि इसमें विकास योजनाओं, बजट आवंटन, बुनियादी ढांचे के विस्तार, शिक्षा और रोजगार से जुड़े महत्वपूर्ण फैसले लिए जा सकते हैं। इसके अलावा राज्य में चल रही विभिन्न योजनाओं की समीक्षा भी एजेंडा का हिस्सा हो सकती है।
मुख्यमंत्री की अगुवाई में होने वाली इस बैठक से प्रदेश की नीतिगत दिशा तय होने की उम्मीद है। अधिकारियों और मंत्रियों के बीच समन्वय स्थापित कर जनहित से जुड़े निर्णयों को गति देने पर भी विशेष जोर रहेगा। यह बैठक आगामी समय में छत्तीसगढ़ के विकास एजेंडे को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
]]>मुख्यमंत्री साय ने कहा कि संस्कृत शिक्षा आधुनिक युग में भी प्रासंगिक और उपयोगी है। संस्कृत भाषा और साहित्य हमारी विरासत का आधार हैं, जिन्हें हमें संरक्षित और संवर्धित करना चाहिए।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि देववाणी संस्कृत पर चर्चा के साथ यह सम्मेलन भारतीय संस्कृति, संस्कार और राष्ट्र को सुदृढ़ बनाने का एक महान प्रयास है। मुख्यमंत्री साय ने संस्कृत भाषा के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए संस्कृत भारती छत्तीसगढ़ और सरयूपारीण ब्राह्मण सभा छत्तीसगढ़ द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना की तथा उन्हें बधाई और शुभकामनाएँ दीं।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आधुनिक शिक्षा में संस्कृत भाषा को शामिल करने से विद्यार्थियों का बौद्धिक विकास सुनिश्चित होगा। संस्कृत में वेद, उपनिषद और पुराण जैसे ग्रंथों का विशाल भंडार है, जो दर्शन, विज्ञान और जीवन-मूल्यों का संदेश देते हैं। वेदों में वर्णित आयुर्वेद, गणित और ज्योतिष आज भी प्रासंगिक हैं और शोध का विषय हो सकते हैं। इन ग्रंथों में कर्म, ज्ञान और भक्ति के सिद्धांत स्पष्ट रूप से प्रतिपादित हैं, जो आधुनिक जीवन में शांति और संतुलन ला सकते हैं।ऐसे में संस्कृत शिक्षा आधुनिक युग में भी उतनी ही प्रासंगिक और उपयोगी है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि वेदों और उपनिषदों के ज्ञान को अपनाकर हम अपनी विरासत को संजोने के साथ-साथ अपने जीवन को भी समृद्ध बना सकते हैं। उन्होंने कहा कि हमें युवाओं को संस्कृत साहित्य से जोड़ने के लिए प्रेरित करना होगा, ताकि वे इस ज्ञान को नई पीढ़ी तक पहुँचा सकें।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि तकनीक के माध्यम से संस्कृत शिक्षा को आकर्षक और प्रासंगिक बनाया जा सकता है। राज्य में संस्कृत विद्वानों और शिक्षकों की सक्रिय भागीदारी से इस दिशा में ठोस कदम उठाए जा सकते हैं। उन्होंने आह्वान किया कि इस सम्मेलन के माध्यम से हमें संस्कृत विद्या के प्रचार-प्रसार और अगली पीढ़ी को जोड़ने का संकल्प लेना चाहिए।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री साय ने सरयूपारीण ब्राह्मण सभा, छत्तीसगढ़ के प्रचार पत्रक का विमोचन भी किया। विराट संस्कृत विद्वत्-सम्मेलन का आयोजन संस्कृत भारती छत्तीसगढ़ एवं सरयूपारीण ब्राह्मण सभा छत्तीसगढ़ के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।
सम्मेलन को संबोधित करते हुए संस्कृत भारती के प्रांताध्यक्ष डॉ. दादू भाई त्रिपाठी ने कहा कि इतिहास में ऐसे अनेक प्रमाण मिलते हैं, जिनसे सिद्ध होता है कि एक समय संस्कृत जनभाषा के रूप में प्रचलित थी। छत्तीसगढ़ी भाषा का संस्कृत से सीधा संबंध है। छत्तीसगढ़ी में पाणिनि व्याकरण की कई धातुओं का सीधा प्रयोग होता है। उन्होंने यह भी बताया कि सरगुजा क्षेत्र में सर्वाधिक आदिवासी विद्यार्थी संस्कृत की शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री साय ने कार्यक्रम में सरयूपारीण ब्राह्मण समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले व्यक्तियों को सम्मानित किया। इनमें गठिया रोग विशेषज्ञ डॉ. अश्लेषा शुक्ला, उत्कृष्ट तैराक अनन्त द्विवेदी तथा पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सच्चिदानंद शुक्ला शामिल थे।
सम्मेलन को दंडी स्वामी डॉ. इंदुभवानंद महाराज, सरयूपारीण ब्राह्मण सभा छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष डॉ. सुरेश शुक्ला और अखिल भारतीय संस्कृत भारती शिक्षण प्रमुख डॉ. श्रीराम महादेव ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर डॉ. सतेंद्र सिंह सेंगर, अजय तिवारी, बद्रीप्रसाद गुप्ता सहित बड़ी संख्या में संस्कृत शिक्षकगण, सामाजिक प्रतिनिधि और गणमान्यजन उपस्थित थे।
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