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स्कूल परिसर को केवल पढ़ाई की जगह नहीं, बल्कि ‘प्रापर्टी की कस्टडी’ यानी संपत्ति की सुरक्षा के लिए इस्तेमाल होने वाली जगह भी माना जाएगा। ऐसे में बिना अनुमति स्कूल में घुसना भारतीय दंड संहिता के तहत ‘हाउस ट्रेसपास’ (घर में घुसपैठ) का अपराध बन सकता है। यह महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए हाई कोर्ट ने पूर्व कांग्रेस प्रवक्ता विकास तिवारी की याचिका खारिज कर दी।
हाई कोर्ट के जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल ने धारा 452 (चोट, हमला या गलत तरीके से रोकने की तैयारी के बाद घर में घुसना), धारा 442 (घर में घुसने की परिभाषा) और धारा 441 (आपराधिक अतिक्रमण) की विस्तृत व्याख्या की। कोर्ट ने कहा कि इन धाराओं को साथ पढ़ने पर स्पष्ट होता है कि यदि कोई व्यक्ति किसी भवन, टेंट या पोत (वेसल) में आपराधिक अतिक्रमण करता है और वह स्थान या तो मानव निवास के रूप में, या पूजा स्थल के रूप में, या संपत्ति की कस्टडी के रूप में उपयोग में लिया जा रहा हो, तो उसे ‘हाउस ट्रेसपास’ माना जाएगा।
न्यायालय ने स्पष्ट किया कि हाउस ट्रेसपास की परिभाषा में तीन स्थितियां आती हैं पहला- मानव निवास के रूप में उपयोग होने वाला भवन, दूसरा – पूजा के लिए उपयोग होने वाला भवन, तीसरा- संपत्ति की कस्टडी के लिए उपयोग होने वाला भवन।
कोर्ट ने कहा कि स्कूल भवन को भले ही निवास या पूजा स्थल नहीं माना जा सकता, लेकिन वहां स्कूल का फर्नीचर और अन्य शैक्षणिक संपत्ति सुरक्षित रखी जाती है। इसलिए इसे ‘प्रापर्टी की कस्टडी’ की श्रेणी में रखा जा सकता है।
कोर्ट की टिप्पणी
हाई कोर्ट ने कहा कि आरोप तय करते समय केवल प्रथम दृष्टया उपलब्ध साक्ष्यों को देखा जाता है। ट्रायल कोर्ट ने उपलब्ध सामग्री के आधार पर आरोप तय किए हैं, जिनमें कोई त्रुटि नहीं है। न्यायालय ने कहा कि स्कूल भवन पर शिकायतकर्ता का वैध कब्जा था और याचिकाकर्ता को बिना अनुमति वहां जबरन प्रवेश करने का कोई अधिकार नहीं था। इसलिए धारा 452 के तहत आरोप तय करने में कोई कमी नहीं है। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट और रिविजनल कोर्ट के आदेश को सही ठहराते हुए याचिका खारिज कर दी।
याचिकाकर्ता और राज्य के तर्क
याचिकाकर्ता का कहना था कि वह सरकारी सर्कुलर और गाइडलाइन के खिलाफ स्कूल के कथित अवैध संचालन का विरोध कर रहा था। उसने तर्क दिया कि स्कूल ‘रहने की जगह’ की परिभाषा में नहीं आता, इसलिए धारा 452 के तहत आरोप तय नहीं किए जा सकते।
वहीं, राज्य की ओर से दलील दी गई कि कर्मचारियों के बयान से स्पष्ट है कि आरोपी बिना अनुमति परिसर में घुसा और अभद्र व्यवहार किया।
यह है पूरा मामला
आरोप है कि जून 2024 को विकास तिवारी साथियों के साथ सरोना स्थित कृष्णा किड्स एकेडमी के परिसर में घुसे, वहां गाली-गलौज की और महिला स्टाफ से बदसलूकी की। स्कूल के प्रशासक ने इसकी आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई थी।
सुनवाई के बाद ट्रायल कोर्ट ने आरोपी के खिलाफ आईपीसी की धारा 452, धारा 294 (अश्लील कृत्य) और धारा 34 (समान आशय) के तहत आरोप तय किए। आरोपित ने इस आदेश को रिविजनल कोर्ट में चुनौती दी, लेकिन वहां से भी राहत नहीं मिली। इसके बाद उसने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
]]>छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी देने का मामला सामने आया है। हाईकोर्ट के आधिकारिक वेबसाइट पर मिली इस धमकी के बाद पुलिस प्रशासन अलर्ट मोड पर आ गया। हाईकोर्ट परिसर को खाली कराकर तत्काल जांच की गई।हालांकि, इस दौरान कहीं कुछ नहीं मिला। ईमेल आईडी अब्दुल abdia@outlook.com से धमकी भरे मैसेज भेजा गया है, जिसमें "मद्रास टाइगर्स फॉर अजमल कसाब" संगठन का जिक्र है।पुलिस ने FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पूरा मामला चकरभाठा थाना क्षेत्र का है।
जैसी घटनाओं का हवाला देते हुए इसे एक “पवित्र मिशन” बताया गया। ईमेल में “अमोनियम-सल्फर आधारित आईईडी” (Improvised Explosive Devices) कोर्ट परिसर में लगाए जाने का दावा किया गया।
धमकी में एक कथित संगठन “मद्रास टाइगर्स फॉर अजमल कसाब” का नाम लिया गया और “ट्विनिंग आईईडी मेकनिज़्म” की बात कही गई, जिसमें मानव आत्मघाती हमलावरों द्वारा RFID तकनीक से लैस विस्फोटकों को सक्रिय किए जाने की बात थी। हालांकि ईमेल में यह भी कहा गया कि इस हमले का उद्देश्य केवल “संपत्ति को नुकसान पहुंचाना” है, लेकिन निर्दिष्ट समय सीमा के भीतर परिसर खाली न करने पर जनहानि की चेतावनी भी दी गई।
संदेश में कई राजनीतिक और सांप्रदायिक संदर्भ भी दिए गए, जिनमें कुछ राजनीतिक नेताओं के नाम और अंतरराष्ट्रीय घटनाओं से कथित संबंधों का उल्लेख शामिल था।
धमकी मिलने के बाद ऐहतियातन कोर्ट परिसर को खाली कराया गया और व्यापक तलाशी अभियान चलाया गया। स्निफर डॉग्स और बम डिटेक्शन उपकरणों के साथ सुरक्षाकर्मियों ने पूरे परिसर की गहन जांच की।
अब तक की जानकारी के अनुसार, किसी भी प्रकार का विस्फोटक पदार्थ बरामद नहीं हुआ है। हालांकि, जांच एजेंसियां मामले की गंभीरता को देखते हुए विस्तृत जांच में जुटी हैं।जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, और जानकारी सामने आने की संभावना है।
Gujarat हाईकोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी, ईमेल से मचा हड़कंप, कार्रवाई स्थगित
गुजरात हाईकोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी मिलने के बाद पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं. हाईकोर्ट के आधिकारिक ईमेल आईडी पर सोमवार को एक धमकी भरा ईमेल भेजा गया. इसमें कोर्ट परिसर को उड़ाने की बात कही गई थी.
धमकी की जानकारी मिलते ही हाईकोर्ट प्रशासन ने तुरंत पुलिस को सूचना दी. इसके बाद पुलिस की टीम बम और डॉग स्क्वाड के साथ हाईकोर्ट पहुंची और पूरे परिसर की गहन जांच शुरू कर दी गई. किसी भी तरह की अनहोनी से बचने के लिए कोर्ट की कार्यवाही दोपहर 1.30 बजे के बाद स्थगित कर दी गई.
गुजरात हाईकोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी
हाईकोर्ट भवन को पूरी तरह खाली करवा लिया गया है. अब किसी भी व्यक्ति को भीतर प्रवेश की अनुमति नहीं दी जा रही. ईमेल भेजने वाले ने धमकी के पीछे दो कारण बताए हैं. पहला, सावुक्कु शंकर की कथित अवैध गिरफ्तारी और दूसरा, अजमल कसाब को दी गई फांसी को अनुचित ठहराया गया है.
पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की
धमकी सिर्फ हाईकोर्ट तक सीमित नहीं थी. ईमेल में एडैपडी के पलानीसामी के ग्रीनवेज रोड स्थित निवास को भी निशाना बनाने की बात कही गई है. पुलिस ने ईमेल मिलने और जांच शुरू होने की पुष्टि की है. अधिकारियों का कहना है कि जांच के बाद आधिकारिक बयान जारी किया जाएगा. फिलहाल पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए सभी सुरक्षा उपाय लागू कर दिए गए हैं.
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