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कूनो नेशनल पार्क में लगातार हो रही भारी वर्षा ने एक बार फिर चीतों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि मादा चीता 'आशा' और उसके तीन शावक रविवार को पार्क की सीमा पार कर बागचा क्षेत्र की ओर निकल गए। इस समय जंगल में चारों ओर जलभराव और दलदल जैसी स्थिति है, जिससे ट्रैकिंग में भारी बाधा आ रही है।
जंगल के बाहर पहुंचना जोखिम भरा
पार्क की सीमा पार कर चुके चीतों के सामने नहर में डूबने और गड्ढों में फंसने का खतरा बना हुआ है। उल्लेखनीय है कि पिछले साल चीता 'पवन' की मौत पानी से भरे एक गड्ढे में गिरने से हो चुकी है। इसी को ध्यान में रखते हुए, वन विभाग की टीम विशेष सतर्कता बरत रही है, लेकिन वर्षा और रास्तों के बाधित होने के कारण ट्रैकिंग बेहद मुश्किल हो गई है।
गार्ड्स और ट्रैकर्स की सीमाएं
हालांकि सभी चीतों के गले में कालर आइडी लगे हुए हैं, फिर भी ट्रैकिंग टीमें बारिश के चलते मौके पर जल्दी नहीं पहुंच पा रहीं। पानी से भरे रास्तों और कीचड़ के कारण न तो गाड़ियों से पहुँचना संभव है और न ही पैदल ट्रैकिंग आसान रह गई है। इसी कारण, ट्रैकर्स और वनरक्षकों ने एक प्रस्ताव प्रबंधन के सामने रखा है कि मानसून खत्म होने तक चीतों को सुरक्षित बाड़ों में रखा जाए।
संक्रमण से बचाव के उपाय
कूनो डीएफओ थिरूकुरल आर ने बताया कि सभी चीतों को संक्रमण से बचाने के लिए एंटी एक्टो परजीवी दवा दी जा चुकी है। साथ ही लगातार निगरानी जारी है। कूनो नेशनल पार्क में इस समय कुल 26 चीते हैं, जिनमें 9 वयस्क (6 मादा, 3 नर) और 17 भारत में जन्मे शावक शामिल हैं। इनमें से 16 चीते अब खुले जंगल में विचरण कर रहे हैं।
शावकों के लिए स्थिति ज्यादा संवेदनशील
मादा चीतों के साथ मौजूद शावकों के लिए बारिश के मौसम में खुले जंगल में रहना और भी खतरनाक है। पानी भरे गड्ढों और दलदली जमीन में उनके फिसलने या फंसने का खतरा लगातार बना हुआ है। ट्रैकिंग रूट्स में पानी भरने से निगरानी टीमों की गतिविधि सीमित हो गई है, जो किसी भी आपात स्थिति में त्वरित सहायता में बाधा बन सकती है।
]]>कुनबे संग मादा चीता ने लांघी कूनों की सरहद
दरअसल, मादा चीता माधवी अपने 4 शावकों के साथ कूनो नेशनल पार्क की सीमा लांघकर चम्बल के बीहड़ में घुस गई थी. वह सबलगढ़ के जंगल से होते हुए रविवार सुबह पगारा डैम के आसपास दिखाई दी. ग्रामीणों ने मादा चीता को कुनबे के साथ आराम से सड़क पर विचरण करते देखा तो दहशत में आ गए. इसके बाद मादा चीता और उसके कुनबे की लोकेशन पगारा कोठी, नरहेगा और खोह का पुरा के आसपास देखी गई. कूनो राष्ट्रीय उद्यान से लगभग 50 किलोमीटर दूर खुले में चीतों के झुंड को देखकर ग्रामीण घबराए हुए थे. वहीं वन विभाग ने लोगों से अलर्ट रहने के अपील की थी.
5 बकरियों का चीता ने किया शिकार
यहां पर मादा चीता ने खोह का पुरा गांव निवासी विशाल बघेल की 3 बकरियों को अपना शिकार बनाया. इसके बाद मंगलवार को अपने शावकों के साथ देवगढ़ गांव के पास बीहड़ में नजर आई. यहां पर भी चीतों ने रामअवतार गुर्जर और पूरन गुर्जर की 2 बकरियों का शिकार किया. इस मामले में एसडीओ फारेस्ट माधो सिंह ने कहा, "एक सप्ताह पहले मादा चीता माधवी अपने 4 शावकों के साथ चंबल के बीहड़ में आ गई थी. उसने पिछले 2 दिन में 5 बकरियों का शिकार किया है. आज वह अपने कुनबे के साथ कूनो की ओर पलायन कर गई है. पीड़ित किसानों को बकरियों का हर्जाना दिया जाएगा.''
]]>कुनबे संग मादा चीता ने लांघी कूनों की सरहद
दरअसल, मादा चीता माधवी अपने 4 शावकों के साथ कूनो नेशनल पार्क की सीमा लांघकर चम्बल के बीहड़ में घुस गई थी. वह सबलगढ़ के जंगल से होते हुए रविवार सुबह पगारा डैम के आसपास दिखाई दी. ग्रामीणों ने मादा चीता को कुनबे के साथ आराम से सड़क पर विचरण करते देखा तो दहशत में आ गए. इसके बाद मादा चीता और उसके कुनबे की लोकेशन पगारा कोठी, नरहेगा और खोह का पुरा के आसपास देखी गई. कूनो राष्ट्रीय उद्यान से लगभग 50 किलोमीटर दूर खुले में चीतों के झुंड को देखकर ग्रामीण घबराए हुए थे. वहीं वन विभाग ने लोगों से अलर्ट रहने के अपील की थी.
5 बकरियों का चीता ने किया शिकार
यहां पर मादा चीता ने खोह का पुरा गांव निवासी विशाल बघेल की 3 बकरियों को अपना शिकार बनाया. इसके बाद मंगलवार को अपने शावकों के साथ देवगढ़ गांव के पास बीहड़ में नजर आई. यहां पर भी चीतों ने रामअवतार गुर्जर और पूरन गुर्जर की 2 बकरियों का शिकार किया. इस मामले में एसडीओ फारेस्ट माधो सिंह ने कहा, "एक सप्ताह पहले मादा चीता माधवी अपने 4 शावकों के साथ चंबल के बीहड़ में आ गई थी. उसने पिछले 2 दिन में 5 बकरियों का शिकार किया है. आज वह अपने कुनबे के साथ कूनो की ओर पलायन कर गई है. पीड़ित किसानों को बकरियों का हर्जाना दिया जाएगा.''
]]>जानकारी के अनुसार, शुक्रवार को भोपाल में केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव की उपस्थिति में चीता परियोजना की समीक्षा बैठक हुई। एनटीसीए अधिकारियों ने बताया कि अब तक देशभर में चीता परियोजना पर 112 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जा चुके हैं, जिसमें से 67 प्रतिशत व्यय मध्य प्रदेश में चीता पुनर्वास पर खर्च किया गया है।
चीता प्रोजेक्ट पर अब तक खर्च हो चुके 112 करोड़
भारत और केन्या के बीच भी अनुबंध पर सहमति बनाई जा रही है। देश में चीता प्रोजेक्ट पर अब तक 112 करोड़ रुपये से अधिक राशि व्यय की जा चुकी है। प्रोजेक्ट चीता के तहत ही अब गांधी सागर अभयारण्य में भी चीते चरणबद्ध रूप से विस्थापित किए जाएंगे।
भूपेंद्र यादव ने कहा कि मध्य प्रदेश में चल रहे वन्य प्राणियों की पुनर्वास परियोजनाओं की देखरेख के लिए वन, पर्यटन, पशु चिकित्सा, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, जनजातीय कार्य एवं परिवहन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों का एक टास्क फोर्स बनाया जाए। श्योपुर के 80 गांवों के 400 चीता मित्रों को प्रशिक्षित करने का अनुबंध कर सकते हैं।
चीतों को गांधी सागर अभयारण्य में लाया जाएगा
प्रोजेक्ट चीता के तहत राजस्थान की सीमा से सटे गांधी सागर अभयारण्य में चरणबद्ध तरीके से चीतों को बसाया जाएगा। अत: मध्य प्रदेश और राजस्थान के बीच अंतरराज्यीय चीता संरक्षण क्षेत्र स्थापित करने के लिए सैद्धांतिक सहमति बन गई है।
कुनो राष्ट्रीय उद्यान में चीतों के बारे में जानकारी देते हुए वन अधिकारियों ने बताया कि वहां 26 चीते हैं, जिनमें से 16 खुले जंगल में और 10 पुनर्वास केंद्र (बाड़ों) में हैं। अधिकारी ने बताया कि चीतों पर निगरानी रखने के लिए सैटेलाइट कॉलर आईडी का उपयोग करके 24 घंटे ट्रैकिंग की जाती है।
चीतों की जा रही है निगरानी
अधिकारियों ने कहा कि चीतों की निगरानी के लिए ‘सैटेलाइट कॉलर आईडी’ का उपयोग करके 24 घंटे निगरानी की जा रही है। अधिकारियों ने बताया कि मादा चीता ज्वाला, आशा, गामिनी और वीरा ने शावकों को जन्म दिया है। इतना ही नहीं, केएनपी में पर्यटकों की संख्या दो साल में दोगुनी हो गई है। अधिकारियों के मुताबिक पांच मादा और तीन नर सहित आठ नामीबियाई चीतों को 17 सितंबर, 2022 को केएनपी में छोड़ा गया था। उनके मुताबिक फरवरी 2023 में, 12 और चीतों को दक्षिण अफ्रीका से केएनपी में स्थानांतरित किया गया। वर्तमान में, केएनपी में 26 चीते हैं, जिनमें भारत में जन्मे 14 शावक शामिल हैं।
चीतों के कदम पड़ते ही बदल जाएगी गांधीसागर की रंगत
इस बीच मंदसौर से खबर है कि गांधीसागर अभयारण्य को भारत में चीता पुनर्स्थापन योजना के तहत चीतों का दूसरा घर बनने में अब महज एक दिन शेष है। कूनो नेशनल पार्क से दो नर चीते यहां छोड़े जा रहे हैं।
चीतों के यहां आने के बाद निश्चित ही गांधीसागर व आस-पास के क्षेत्र की रंगत बदल जाएगी। यहां पर्यटकों की आमद भी बढ़ेगी और निश्चित ही गांधीसागर, रामपुरा, भानपुरा की अर्थव्यवस्था भी बदलेगी।
वहीं अभयारण्य के लिहाज से देखे तो यहां की जैव विविधता भी समृद्ध होगी। चीते के आने से इसमें भी सितारे जड़ जाएंगे। गांधीसागर अभयारण्य में अभी तो चीते बाड़ों में ही रखे जाएंगे। कुछ माह बाद इन्हें खुले जंगल में छोड़ा जाएगा। इसके बाद गांधीसागर व आस-पास के नगरीय क्षेत्रों की आर्थिक स्थिति में भी परिवर्तन आएगा।
]]>बताया जा रहा है कि चीतों की शिफ्टिंग के लिए चीता स्टीयरिंग कमेटी ने अपनी हरी झंडी दे दी है। इस संबंध में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव और केन्द्रीय वन मंत्री भूपेन्द्र यादव के बीच आज गुरुवार को होने वाली बैठक के बाद शिफ्टिंग की आधिकारिक घोषणा की जा सकती है।
मध्यप्रदेश के कूनो में इस समय कुल 26 चीते हैं। इनमें 12 वयस्क और 14 शावक शामिल हैं। इनमें से 6 वयस्क और 11 शावक, यानी कुल 17 चीते, कूनो नेशनल पार्क के खुले जंगल में स्वतंत्र रूप से विचरण कर रहे हैं।
वन विभाग ने शुरू कर दी तैयारी
अफ्रीका, केन्या के प्रतिनिधिमंडलों और केंद्र सरकार की सात सदस्यीय हाइपावर कमेटी के निरीक्षण के बाद आखिरकार तय हो गया कि भारत की धरती पर जन्म लेने वाले चीतों से ही गांधीसागर आबाद होना है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की हां होते ही वन विभाग ने तैयारी शुरू कर दी है।
दो नर चीतों को लाया जा रहा है
फिलहाल यहां कूनो नेशनल पार्क में जन्मे लेने वाले दो नर चीतों को लाया जा रहा है। उन्हें 20 अप्रैल को यहां छोड़ा जाएगा। इसकी तैयारी गांधीसागर अभयारण्य में काफी समय पहले से चल रही थी। मंदसौर के डीएफओ संजय रायखेरे ने बताया कि 6400 हेक्टेयर में चीतों के लिए बड़े बाड़े बनकर तैयार हैं। इनमें आठ क्वारंटाइन बाड़े भी हैं। शुरुआत में चीतों को क्वारंटीन बाड़ों में रखा जाएगा।
गांधीसागर अभयारण्य को अनुकूल बताया था
बता दें कि केंद्र सरकार की सात सदस्यीय हाइपावर कमेटी ने निरीक्षण के बाद दिल्ली में वन मंत्रालय को सौंपी रिपोर्ट में गांधीसागर अभयारण्य को चीतों के लिए पूरी तरह से अनुकूल बताया था, तो केंद्र सरकार ने यहां कूनो से ही चीते भेजने का निर्णय लिया है। विशेषज्ञों ने बाड़े, क्वारंटाइन बाड़ों, हाइमास्ट कैमरा, जलस्रोत मानीटरिंग के लिए बनाए गए स्थल और उपचार केंद्र सहित सभी तैयारी देखी हैं।
बड़े जानवरों का शिकार नहीं कर सकता चीता
चीता बड़े जंगली जानवरों का शिकार नहीं कर सकता है। ऐसे में गांधी सागर अभयारण्य क्षेत्र में 1250 चीतल और हिरणों को चीतों के भोजन के लिए छोड़ने का लक्ष्य है। अभी तक करीब 472 हिरण-चीतल छोड़े गए हैं। भोपाल के वन विहार, नरसिंहगढ़ सेंचुरी और कान्हा टाइगर सफारी आदि स्थानों से हिरण व चीतल को पकड़कर यहां छोड़े जा रहे हैं।
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नौकरी से निकालने के बाद वापस रखा
कूनो नेशनल पार्क में चीता ज्वाला और उसके बच्चों को पानी पिलाने के बाद सत्यनारायण गुर्जर चर्चा में आए थे। वन विभाग से जुड़ी एक निजी गाड़ी के ड्राइवर सत्यनारायण गुर्जर को वीडियो वायरल होने के बाद हटा दिया गया था लेकिन अब उन्हें वापस रख लिया गया है। तीन दिन बाद सत्यनारायण अपने समाज के सम्मान समारोह में पहुंचे।
वीडियो पर क्या बोले सत्यनारायण
सत्यनारायण ने वीडियो की सच्चाई बताते हुए कहा, 'जब से कूनो में चीते आए हैं, मैं उनसे जुड़ा हुआ हूं। मेरी निजी गाड़ी ट्रैकिंग टीम के लिए किराए पर ली गई थी। उस दिन चीते प्यासे थे, तो मैंने उन्हें पानी पिला दिया। वीडियो वायरल होने के बाद मुझे हटा दिया गया, लेकिन एक दिन पहले पार्क प्रबंधन ने मुझे वापस बुला लिया। अब कोई शिकवा नहीं है।'
वीडियो वायरल होने से मचा था हड़कंप
पिछले शनिवार को एक वीडियो वायरल हुआ था। इसमें एक युवक जंगल में चीता ज्वाला और उसके बच्चों को पानी पिला रहा था। इससे वन विभाग में हड़कंप मच गया था। जांच में पता चला कि यह युवक सत्यनारायण गुर्जर है। वह चीता ट्रैकिंग टीम की अनुबंधित निजी गाड़ी का ड्राइवर है। पार्क प्रबंधन ने इसे नियमों का उल्लंघन माना और उसे तुरंत हटा दिया। हालांकि, सोशल मीडिया यूजर्स और गुर्जर समाज ने सत्यनारायण का समर्थन किया। मामला बढ़ने पर प्रबंधन ने उन्हें वापस काम पर रख लिया।
फूल माला पहनाकर किया स्वागत
मंगलवार को सत्यनारायण श्योपुर के ढेंगदा गांव में गुर्जर समाज के भगवान देव नारायण मंदिर पहुंचे। वहां समाज के लोगों ने उन्हें फूल माला पहनाकर और मिठाई खिलाकर सम्मानित किया। सत्यनारायण ने कहा, 'मेरे परिवार की कई पीढ़ियां जंगल में रहती आई हैं। मुझे जानवरों से लगाव है। उस दिन ट्रैकिंग टीम के साथ था, तो सुबह चीते प्यासे दिखे। मैंने उन्हें पानी पिला दिया। किसी ने वीडियो बना लिया, जो वायरल हो गया। डीएफओ के निर्देश पर मुझे हटा दिया गया था, लेकिन अब वापस बुलाया गया है। मैं प्रशासन का आभारी हूं।' श्योपुर गुर्जर समाज के अध्यक्ष देवी शंकर गुर्जर ने कहा, 'सत्यनारायण ने प्यासे चीतों को पानी पिलाकर गौरवपूर्ण कार्य किया। इसलिए हमने उनका सम्मान किया।'
]]>सिंह परियोजना के डायरेक्टर ने बताया कि मां और चारों शावक पूरी तरह स्वस्थ हैं. खजूरी वन क्षेत्र अहेरा पर्यटन जोन का हिस्सा है, जिसके कारण अब पर्यटकों को सफारी के दौरान चीतों को देखने का मौका मिल सकता है.
17 चीते अब खुले जंगल में
गामिनी और उसके चार शावकों को जंगल में छोड़े जाने के बाद अब कूनो नेशनल पार्क में 17 चीते खुले में स्वतंत्र रूप से विचरण कर रहे हैं. अधिकारियों ने पुष्टि की कि सभी चीते स्वस्थ हैं
गामिनी ने 10 मार्च, 2024 को छह शावकों को जन्म दिया था, लेकिन बाद में दो शावकों की मौत हो गई. इससे पहले, 21 फरवरी 2025 को नामीबियाई मादा चीता ज्वाला और उसके चार शावकों को भी केएनपी के जंगल में छोड़ा गया था.
चीता परियोजना की शुरुआत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 17 सितंबर 2022 को अपने जन्मदिन के अवसर पर नामीबिया से लाए गए 8 चीतों (पांच मादा और तीन नर) को कूनो नेशनल पार्क में छोड़कर इस ऐतिहासिक परियोजना की शुरुआत की थी. इसके बाद फरवरी 2023 में दक्षिण अफ्रीका से 12 अतिरिक्त चीतों को केएनपी में स्थानांतरित किया गया. इस परियोजना का उद्देश्य भारत में चीतों की विलुप्त प्रजाति को पुनर्जनन करना और वन्यजीव संरक्षण के साथ-साथ पर्यटन को बढ़ावा देना है.
KNP में चीतों की कुल संख्या 26
वर्तमान में कूनो नेशनल पार्क में चीतों की कुल संख्या 26 हो गई है, जिसमें भारतीय धरती पर जन्मे 14 शावक शामिल हैं. यह परियोजना न केवल जैव विविधता को संरक्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है, बल्कि क्षेत्र में पर्यटन और रोजगार के नए अवसर भी पैदा कर रही है. गामिनी और उसके शावकों को जंगल में छोड़ने से चीता संरक्षण के प्रयासों को और मजबूती मिली है.
खाजुरी वन क्षेत्र में छोड़ा गया गामिनी और उसके शावकों को
अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक उत्तम कुमार शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि गामिनी और उसके 12 माह के चार शावकों (दो नर और दो मादा) को श्योपुर जिले के खाजुरी वन क्षेत्र में छोड़ा गया है। यह क्षेत्र अहेरा टूरिज्म ज़ोन का हिस्सा है, जिससे अब पर्यटकों को जंगल सफारी के दौरान चीतों को देखने का मौका मिल सकता है।
वन्यजीव संरक्षण और पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा कि कूनो नेशनल पार्क में चीतों की बढ़ती संख्या से पर्यटकों को उनके प्राकृतिक आवास में देखने का अवसर मिलेगा, जिससे पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश सरकार वन्यजीव संरक्षण और पर्यटन को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए प्रतिबद्ध है।
गामिनी के पहले शावकों की जानकारी
गामिनी ने 10 मार्च 2024 को अपने पहले लिटर में छह शावकों को जन्म दिया था, लेकिन बाद में दो शावकों की मृत्यु हो गई थी।
सिंह परियोजना के डायरेक्टर ने बताया कि मां और चारों शावक पूरी तरह स्वस्थ हैं. खजूरी वन क्षेत्र अहेरा पर्यटन जोन का हिस्सा है, जिसके कारण अब पर्यटकों को सफारी के दौरान चीतों को देखने का मौका मिल सकता है.
17 चीते अब खुले जंगल में
गामिनी और उसके चार शावकों को जंगल में छोड़े जाने के बाद अब कूनो नेशनल पार्क में 17 चीते खुले में स्वतंत्र रूप से विचरण कर रहे हैं. अधिकारियों ने पुष्टि की कि सभी चीते स्वस्थ हैं
गामिनी ने 10 मार्च, 2024 को छह शावकों को जन्म दिया था, लेकिन बाद में दो शावकों की मौत हो गई. इससे पहले, 21 फरवरी 2025 को नामीबियाई मादा चीता ज्वाला और उसके चार शावकों को भी केएनपी के जंगल में छोड़ा गया था.
चीता परियोजना की शुरुआत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 17 सितंबर 2022 को अपने जन्मदिन के अवसर पर नामीबिया से लाए गए 8 चीतों (पांच मादा और तीन नर) को कूनो नेशनल पार्क में छोड़कर इस ऐतिहासिक परियोजना की शुरुआत की थी. इसके बाद फरवरी 2023 में दक्षिण अफ्रीका से 12 अतिरिक्त चीतों को केएनपी में स्थानांतरित किया गया. इस परियोजना का उद्देश्य भारत में चीतों की विलुप्त प्रजाति को पुनर्जनन करना और वन्यजीव संरक्षण के साथ-साथ पर्यटन को बढ़ावा देना है.
KNP में चीतों की कुल संख्या 26
वर्तमान में कूनो नेशनल पार्क में चीतों की कुल संख्या 26 हो गई है, जिसमें भारतीय धरती पर जन्मे 14 शावक शामिल हैं. यह परियोजना न केवल जैव विविधता को संरक्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है, बल्कि क्षेत्र में पर्यटन और रोजगार के नए अवसर भी पैदा कर रही है. गामिनी और उसके शावकों को जंगल में छोड़ने से चीता संरक्षण के प्रयासों को और मजबूती मिली है.
खाजुरी वन क्षेत्र में छोड़ा गया गामिनी और उसके शावकों को
अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक उत्तम कुमार शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि गामिनी और उसके 12 माह के चार शावकों (दो नर और दो मादा) को श्योपुर जिले के खाजुरी वन क्षेत्र में छोड़ा गया है। यह क्षेत्र अहेरा टूरिज्म ज़ोन का हिस्सा है, जिससे अब पर्यटकों को जंगल सफारी के दौरान चीतों को देखने का मौका मिल सकता है।
वन्यजीव संरक्षण और पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा कि कूनो नेशनल पार्क में चीतों की बढ़ती संख्या से पर्यटकों को उनके प्राकृतिक आवास में देखने का अवसर मिलेगा, जिससे पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश सरकार वन्यजीव संरक्षण और पर्यटन को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए प्रतिबद्ध है।
गामिनी के पहले शावकों की जानकारी
गामिनी ने 10 मार्च 2024 को अपने पहले लिटर में छह शावकों को जन्म दिया था, लेकिन बाद में दो शावकों की मृत्यु हो गई थी।
खुले जंगल में होगा 17 चीतों का दीदार
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर यह खुशखबरी देते हुए कहा, " कूनो में बढ़ेगा चीतों का कुनबा! कूनो नेशनल पार्क के खजूरी पर्यटन जोन में दक्षिण अफ्रीका से आई मादा चीता गामिनी अपने दो नर और दो मादा शावकों के साथ कल खुले जंगल में छोड़ी जाएगी. सफारी के दौरान पर्यटकों को चीतों को उनके प्राकृतिक आवास में देखने का अवसर मिलेगा, जिससे निश्चित ही पर्यटकों की संख्या में वृद्धि होगी. मध्य प्रदेश सरकार वन्यजीव संरक्षण और पर्यटन को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए संकल्पित है."
बता दें कि पर्यटन के लिहाज से भी यह एक बड़ा कदम है क्योंकि लंबे अरसे से भारत में सैलानियों को चीतों के दीदार की आस है और हाल ही में जंगल में आजाद छोड़े गए चीते पर्यटकों की नजर में आने लगे हैं. ऐसे में पांच और चीतों को छोड़े जाने से चीता सफारी में साइटिंग की उम्मीदें और बढ़ गई हैं. अब कूनो में 17 चीतों को सफारी के दौरान देखा जा सकता है.
कूनो में बढ़ेगा चीतों का कुनबा !
कूनो नेशनल पार्क के खजूरी पर्यटन जोन में दक्षिण अफ्रीका से आई मादा चीता गामिनी अपने दो नर और दो मादा शावकों के साथ कल खुले जंगल में छोड़ी जाएगी। सफारी के दौरान पर्यटकों को चीतों को उनके प्राकृतिक आवास में देखने का अवसर मिलेगा जिससे निश्चित ही…
— Dr Mohan Yadav (@DrMohanYadav51) March 16, 2025
कूनो में कब-कब कितने चीते छोड़े गए?
सबसे पहले 4 दिसम्बर 2024 को नर चीता पावन और अग्नि को जंगल में छोड़ा गया था. इसके बाद इसी साल 2 बार कुल 10 चीतों को छोड़ा जा चुका है. 6 फरवरी 2025 को मादा चीता धीरा, आशा और तीन शावक तो मुख्यमंत्री ने आजाद किया था. वहीं 21 फरवरी 2025 को मादा चीता ज्वाला और उसके चार शावकों को जंगल में रिलीज किया गया था. वहीं अब 17 मार्च 2025 को मादा अफ्रीकी चीता गामिनी, उसके दो नर शावक और दो मादा शावक जंगल में छोड़े जा रहे हैं.
17 मार्च को 17 होगी आजाद चीतों की संख्या
कूनो नेशनल पार्क प्रबंधन द्वारा 12 चीतों को आजाद किया जा चुका है. इससे पहले मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 21 परवरी को 5 चीतों को रिलीज किया था. वहीं अब 17 मार्च को 5 और चीते कूनो के खुले जंगलों में छोड़े जाने से इनकी संख्या 17 पहुंच जाएगे. सोमवार को दक्षिण अफ्रीका से लाई गई मादा चीता गामिनी और उसके दो नर शावक और दो मादा शावक खुले जंगल में तूफानी रफ्तार से दौड़ते नजर आएंगे.
]]>खुले जंगल में होगा 17 चीतों का दीदार
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर यह खुशखबरी देते हुए कहा, " कूनो में बढ़ेगा चीतों का कुनबा! कूनो नेशनल पार्क के खजूरी पर्यटन जोन में दक्षिण अफ्रीका से आई मादा चीता गामिनी अपने दो नर और दो मादा शावकों के साथ कल खुले जंगल में छोड़ी जाएगी. सफारी के दौरान पर्यटकों को चीतों को उनके प्राकृतिक आवास में देखने का अवसर मिलेगा, जिससे निश्चित ही पर्यटकों की संख्या में वृद्धि होगी. मध्य प्रदेश सरकार वन्यजीव संरक्षण और पर्यटन को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए संकल्पित है."
बता दें कि पर्यटन के लिहाज से भी यह एक बड़ा कदम है क्योंकि लंबे अरसे से भारत में सैलानियों को चीतों के दीदार की आस है और हाल ही में जंगल में आजाद छोड़े गए चीते पर्यटकों की नजर में आने लगे हैं. ऐसे में पांच और चीतों को छोड़े जाने से चीता सफारी में साइटिंग की उम्मीदें और बढ़ गई हैं. अब कूनो में 17 चीतों को सफारी के दौरान देखा जा सकता है.
कूनो में बढ़ेगा चीतों का कुनबा !
कूनो नेशनल पार्क के खजूरी पर्यटन जोन में दक्षिण अफ्रीका से आई मादा चीता गामिनी अपने दो नर और दो मादा शावकों के साथ कल खुले जंगल में छोड़ी जाएगी। सफारी के दौरान पर्यटकों को चीतों को उनके प्राकृतिक आवास में देखने का अवसर मिलेगा जिससे निश्चित ही…
— Dr Mohan Yadav (@DrMohanYadav51) March 16, 2025
कूनो में कब-कब कितने चीते छोड़े गए?
सबसे पहले 4 दिसम्बर 2024 को नर चीता पावन और अग्नि को जंगल में छोड़ा गया था. इसके बाद इसी साल 2 बार कुल 10 चीतों को छोड़ा जा चुका है. 6 फरवरी 2025 को मादा चीता धीरा, आशा और तीन शावक तो मुख्यमंत्री ने आजाद किया था. वहीं 21 फरवरी 2025 को मादा चीता ज्वाला और उसके चार शावकों को जंगल में रिलीज किया गया था. वहीं अब 17 मार्च 2025 को मादा अफ्रीकी चीता गामिनी, उसके दो नर शावक और दो मादा शावक जंगल में छोड़े जा रहे हैं.
17 मार्च को 17 होगी आजाद चीतों की संख्या
कूनो नेशनल पार्क प्रबंधन द्वारा 12 चीतों को आजाद किया जा चुका है. इससे पहले मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 21 परवरी को 5 चीतों को रिलीज किया था. वहीं अब 17 मार्च को 5 और चीते कूनो के खुले जंगलों में छोड़े जाने से इनकी संख्या 17 पहुंच जाएगे. सोमवार को दक्षिण अफ्रीका से लाई गई मादा चीता गामिनी और उसके दो नर शावक और दो मादा शावक खुले जंगल में तूफानी रफ्तार से दौड़ते नजर आएंगे.
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