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चार दिन तक चली सूर्य उपासना की परंपरा मंगलवार को सुबह पूरी हो गई। कार्तिक शुक्ल सप्तमी पर आज छठ महापर्व का आखिरी दिन है। भोपाल के 52 घाटों पर सुबह की पहली किरण के साथ श्रद्धालुओं ने उगते सूर्य को दूध, जल और प्रसाद से अर्घ्य अर्पित किया। इसी के साथ 36 घंटे का निर्जला व्रत पूर्ण हुआ। नगर निगम ने घाटों पर सुरक्षा, रोशनी, पेयजल और सफाई की व्यवस्था की थी। पुलिस और प्रशासनिक टीमें भी सुबह से मौजूद रहीं। श्रद्धालुओं ने शांति और अनुशासन के साथ पूजा संपन्न की। दरअसल, भोपाल में लोक आस्था के महापर्व छठ पूजा का समापन सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य अर्पित करने के साथ हुआ। चार दिनों से चल रही सूर्य उपासना की परंपरा भक्ति, अनुशासन और उत्साह के माहौल में पूरी हुई। प्रदेशभर के साथ भोपाल में भी श्रद्धालु सुबह की पहली किरण के साथ घाटों पर पहुंचे और सूर्य देव तथा छठी मैया से परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।
लोक आस्था और सूर्योपासना का महापर्व छठ पूजा देशभर में पूरे उत्साह, श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया. बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, दिल्ली से लेकर नोएडा, चंडीगढ़ और मुंबई तक घाटों पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी. गोरखपुर के गुरु गोरखनाथ घाट, पटना के कंकड़बाग और दीघा घाट, और नोएडा के कालिंदी कुंज तट पर हजारों श्रद्धालु परिवारों सहित पहुंचे.
छठ महापर्व के दौरान घाट भक्ति गीतों, ढोलक की थाप और पारंपरिक गीतों से गुलजार रहे. छठ घाटों पर वेदी को केले से पारंपरिक तौर पर सजाया गया..
इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने भी बीजेपी नेता संजय मयूख के आवास पर पूजा-अर्चना में हिस्सा लिया. प्रशासन की ओर से सुरक्षा और व्यवस्थाओं के लिए विशेष इंतजाम किए गए. चार दिन चलने वाला यह पर्व सूर्य देव और छठी मैया की आराधना के साथ संपन्न हुआ, जिसने एक बार फिर पूरे देश को आस्था और एकता के रंग में रंग दिया.
दिल्ली के यमुना नदी के वासुदेव घाट पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी छठ पूजा में हिस्सा लेने वाले हैं. उनकी इस यात्रा के मद्देनजर घाटों पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है. वहीं, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भी खुद घाटों का दौरा कर पूजा की तैयारियों का जायजा लिया है.
बिहार में इस बार छठ का राजनीतिक रंग भी देखने को मिला. विधानसभा चुनाव में कई राजनीतिक दलों के उम्मीदवार घाटों पर पहुंचे और श्रद्धालुओं का आशीर्वाद लिया. राजनेताओं की मौजूदगी ने माहौल को और भी खास बना दिया.
छठ का महापर्व फिर से बड़े उत्साह से मनाया जा रहा है, जहां हर कोई सूर्य देव के प्रति आस्था और परिवार की खुशहाली की प्रार्थना करता नजर आ रहा है.
देश के कई प्रमुख क्षेत्रों जैसे पटना, गोपालगंज, मऊ, वाराणसी, नोएडा, और दिल्ली के घाटों पर सुबह और शाम की पूजा में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ रहा है.
आस्था का अद्भुत संगम
राजधानी के 52 घाटों पर मंगलवार को आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। कमला पार्क, वर्धमान पार्क, खटलापुरा घाट, प्रेमपुरा घाट, हथाईखेड़ा डैम, बरखेड़ा और घोड़ा पछाड़ डैम पर हजारों श्रद्धालु एकत्र हुए। घाटों पर पारंपरिक गीतों की गूंज, दीयों की रोशनी और पूजा की तैयारियों से वातावरण भक्ति से भर गया।
36 घंटे का निर्जला उपवास समाप्त
सुबह जैसे ही सूरज की पहली किरण जल में पड़ी, व्रती महिलाओं ने दूध और जल से अर्घ्य अर्पित किया। इसके साथ ही 36 घंटे का निर्जला उपवास समाप्त हुआ। अर्घ्य के बाद व्रती महिलाओं ने पारण कर व्रत का समापन किया। भोजन में चावल, दाल, साग, सब्जी, पापड़, बड़ी, पकौड़ी और चटनी का पारंपरिक प्रसाद शामिल रहा।
पुलिस का अमला रहा तैनात
नगर निगम की ओर से सभी घाटों पर सफाई, पेयजल, रोशनी और सुरक्षा की व्यवस्थाएं की गई थीं। पुलिस व प्रशासनिक अमला सुबह से ही तैनात रहा। शीतलदास की बगिया में भी छठ पर्व की रौनक देखने लायक रही। यहां भोपाल दक्षिण-पश्चिम क्षेत्र के विधायक भगवान दास सबनानी ने पहुंचकर श्रद्धालुओं को पर्व की शुभकामनाएं दीं। भोजपुरी एकता मंच की ओर से सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें लोकगीतों और भजनों ने समा बांध दिया।
इस साल अधिक श्रद्धालु घाटों पर पहुंचे
भोजपुरी एकता मंच के अध्यक्ष कुंवर प्रसाद ने बताया कि सोमवार शाम अस्त होते सूर्य को अर्घ्य देने के बाद श्रद्धालु पूरी रात भजन-कीर्तन में लीन रहे। मंगलवार सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य अर्पित करने के साथ चार दिन की पूजा संपन्न हुई। इस बार पिछले वर्षों की तुलना में कहीं अधिक श्रद्धालु घाटों पर पहुंचे। दीपों की जगमगाहट, फूलों की सजावट और लोकगीतों की मधुर ध्वनि से पूरा भोपाल छठ मैया की भक्ति में डूबा नजर आया।
]]>चार दिन तक चली सूर्य उपासना की परंपरा मंगलवार को सुबह पूरी हो गई। कार्तिक शुक्ल सप्तमी पर आज छठ महापर्व का आखिरी दिन है। भोपाल के 52 घाटों पर सुबह की पहली किरण के साथ श्रद्धालुओं ने उगते सूर्य को दूध, जल और प्रसाद से अर्घ्य अर्पित किया। इसी के साथ 36 घंटे का निर्जला व्रत पूर्ण हुआ। नगर निगम ने घाटों पर सुरक्षा, रोशनी, पेयजल और सफाई की व्यवस्था की थी। पुलिस और प्रशासनिक टीमें भी सुबह से मौजूद रहीं। श्रद्धालुओं ने शांति और अनुशासन के साथ पूजा संपन्न की। दरअसल, भोपाल में लोक आस्था के महापर्व छठ पूजा का समापन सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य अर्पित करने के साथ हुआ। चार दिनों से चल रही सूर्य उपासना की परंपरा भक्ति, अनुशासन और उत्साह के माहौल में पूरी हुई। प्रदेशभर के साथ भोपाल में भी श्रद्धालु सुबह की पहली किरण के साथ घाटों पर पहुंचे और सूर्य देव तथा छठी मैया से परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।
लोक आस्था और सूर्योपासना का महापर्व छठ पूजा देशभर में पूरे उत्साह, श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया. बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, दिल्ली से लेकर नोएडा, चंडीगढ़ और मुंबई तक घाटों पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी. गोरखपुर के गुरु गोरखनाथ घाट, पटना के कंकड़बाग और दीघा घाट, और नोएडा के कालिंदी कुंज तट पर हजारों श्रद्धालु परिवारों सहित पहुंचे.
छठ महापर्व के दौरान घाट भक्ति गीतों, ढोलक की थाप और पारंपरिक गीतों से गुलजार रहे. छठ घाटों पर वेदी को केले से पारंपरिक तौर पर सजाया गया..
इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने भी बीजेपी नेता संजय मयूख के आवास पर पूजा-अर्चना में हिस्सा लिया. प्रशासन की ओर से सुरक्षा और व्यवस्थाओं के लिए विशेष इंतजाम किए गए. चार दिन चलने वाला यह पर्व सूर्य देव और छठी मैया की आराधना के साथ संपन्न हुआ, जिसने एक बार फिर पूरे देश को आस्था और एकता के रंग में रंग दिया.
दिल्ली के यमुना नदी के वासुदेव घाट पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी छठ पूजा में हिस्सा लेने वाले हैं. उनकी इस यात्रा के मद्देनजर घाटों पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है. वहीं, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भी खुद घाटों का दौरा कर पूजा की तैयारियों का जायजा लिया है.
बिहार में इस बार छठ का राजनीतिक रंग भी देखने को मिला. विधानसभा चुनाव में कई राजनीतिक दलों के उम्मीदवार घाटों पर पहुंचे और श्रद्धालुओं का आशीर्वाद लिया. राजनेताओं की मौजूदगी ने माहौल को और भी खास बना दिया.
छठ का महापर्व फिर से बड़े उत्साह से मनाया जा रहा है, जहां हर कोई सूर्य देव के प्रति आस्था और परिवार की खुशहाली की प्रार्थना करता नजर आ रहा है.
देश के कई प्रमुख क्षेत्रों जैसे पटना, गोपालगंज, मऊ, वाराणसी, नोएडा, और दिल्ली के घाटों पर सुबह और शाम की पूजा में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ रहा है.
आस्था का अद्भुत संगम
राजधानी के 52 घाटों पर मंगलवार को आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। कमला पार्क, वर्धमान पार्क, खटलापुरा घाट, प्रेमपुरा घाट, हथाईखेड़ा डैम, बरखेड़ा और घोड़ा पछाड़ डैम पर हजारों श्रद्धालु एकत्र हुए। घाटों पर पारंपरिक गीतों की गूंज, दीयों की रोशनी और पूजा की तैयारियों से वातावरण भक्ति से भर गया।
36 घंटे का निर्जला उपवास समाप्त
सुबह जैसे ही सूरज की पहली किरण जल में पड़ी, व्रती महिलाओं ने दूध और जल से अर्घ्य अर्पित किया। इसके साथ ही 36 घंटे का निर्जला उपवास समाप्त हुआ। अर्घ्य के बाद व्रती महिलाओं ने पारण कर व्रत का समापन किया। भोजन में चावल, दाल, साग, सब्जी, पापड़, बड़ी, पकौड़ी और चटनी का पारंपरिक प्रसाद शामिल रहा।
पुलिस का अमला रहा तैनात
नगर निगम की ओर से सभी घाटों पर सफाई, पेयजल, रोशनी और सुरक्षा की व्यवस्थाएं की गई थीं। पुलिस व प्रशासनिक अमला सुबह से ही तैनात रहा। शीतलदास की बगिया में भी छठ पर्व की रौनक देखने लायक रही। यहां भोपाल दक्षिण-पश्चिम क्षेत्र के विधायक भगवान दास सबनानी ने पहुंचकर श्रद्धालुओं को पर्व की शुभकामनाएं दीं। भोजपुरी एकता मंच की ओर से सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें लोकगीतों और भजनों ने समा बांध दिया।
इस साल अधिक श्रद्धालु घाटों पर पहुंचे
भोजपुरी एकता मंच के अध्यक्ष कुंवर प्रसाद ने बताया कि सोमवार शाम अस्त होते सूर्य को अर्घ्य देने के बाद श्रद्धालु पूरी रात भजन-कीर्तन में लीन रहे। मंगलवार सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य अर्पित करने के साथ चार दिन की पूजा संपन्न हुई। इस बार पिछले वर्षों की तुलना में कहीं अधिक श्रद्धालु घाटों पर पहुंचे। दीपों की जगमगाहट, फूलों की सजावट और लोकगीतों की मधुर ध्वनि से पूरा भोपाल छठ मैया की भक्ति में डूबा नजर आया।
]]>छठ पूजा में बिना 'ठेकुआ' के पूजा अधूरी मानी जाती है। यह खास प्रसाद गेहूं के आटे, गुड़ और घी से बनाया जाता है। इसे बड़े स्नेह और शुद्धता से तैयार किया जाता है ताकि प्रसाद का स्वाद और भक्ति दोनों बरकरार रहें।
आइए जानते हैं इसे बनाने की रेस्पी:- इसे बनाने के लिए दो कप गेहूं का आटा, एक कप कद्दूकस किया गुड़, चौथाई कप घी, एक बड़ा चम्मच सौंफ, आधा छोटा चम्मच इलायची पाउडर, चौथाई कप नारियल बुरादा और आधा कप पानी चाहिए।
एक पैन में आधा कप पानी डालकर गर्म करें, फिर उसमें गुड़ डालें और धीमी आंच पर पिघला लें। जब गुड़ पूरी तरह घुल जाए तो उसे छानकर ठंडा होने के लिए अलग रख दें। इसके बाद आटे में घी डालकर मोयन बनाएं और बाकी सारी चीजें मिलाकर सख्त आटा गूंथ लें। फिर छोटी-छोटी लोइयां बनाकर हथेली से दबाएं और सांचे से डिजाइन करें। मध्यम आंच पर घी में सुनहरा और खस्ता होने तक तलें। जब ठेकुआ ठंडा हो जाए तो इसे साफ डिब्बे में रख लें। यह लंबे समय तक कुरकुरा बना रहता है।
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छठ पूजा का व्रत महिलाएं अपने परिवार और पुत्र की दीर्घायु के लिए करती हैं. इस बार छठ के पर्व की शुरुआत 25 अक्टूबर, शनिवार से होने जा रही है और इसका समापन 28 अक्टूबर, मंगलवार को होगा. छठ के पर्व ये चार दिन बहुत ही महत्वपूर्ण होते हैं जिसमें पहला होता है नहाय-खाय, दूसरा खरना, तीसरा संध्या अर्घ्य और चौथा ऊषा अर्घ्य-पारण. चलिए अब छठ के पर्व की सभी तिथियों के बारे में जानते हैं.
छठ पर्व 2025 कैलेंडर (Chhath Puja 2025 Calender)
पहला दिन- नहाय खाय, जो कि 25 अक्टूबर 2025 को है.
दूसरा दिन- खरना, जो कि 26 अक्टूबर को है.
तीसरा दिन- संध्या अर्घ्य, जो कि 27 अक्टूबर को किया जाएगा.
चौथा दिन- ऊषा अर्घ्य, जो कि 28 अक्टूबर को किया जाएगा.
छठ पर्व के चार दिनों का महत्व
नहाय खाय (Nahay Khay)- छठ पूजा का पहला दिन होता है नहाय खाय. इस दिन व्रती किसी पवित्र नदी में स्नान करके, इस पवित्र व्रत की शुरुआत करती हैं. स्नान के बाद भोजन ग्रहण किया जाता है, जिससे व्रत की शुरुआत हो जाती है. इस दिन सूर्योदय सुबह 6 बजकर 28 मिनट पर होगा और सूर्यास्त शाम 5 बजकर 42 मिनट पर होगा.
खरना (Kharna)- छठ पूजा का दूसरा दिन होता है खरना. खरना को लोहंडा भी कहा जाता है. इस दिन व्रती पूरे दिन निर्जला उपवास रखती हैं. शाम के समय व्रती मिट्टी के चूल्हे पर आम की लकड़ी जलाकर गुड़ की खीर (रसिया) और घी से बनी रोटी तैयार करती हैं. सूर्य देव की विधिवत पूजा के बाद यही प्रसाद सबसे पहले ग्रहण किया जाता है. इस प्रसाद को खाने के बाद व्रती अगले दिन सूर्य को अर्घ्य देने तक अन्न और जल का पूर्ण रूप से त्याग करती हैं.
संध्या अर्घ्य (Sandhya Arghya)- छठ पूजा का तीसरा और महत्वपूर्ण दिन होता है संध्या अर्घ्य. इस दिन व्रती दिनभर बिना जल पिए निर्जला व्रत रखती हैं. फिर, शाम को व्रती नदी में डूबकी लगाते हुए ढलते हुए सूरज को अर्घ्य देती हैं. इस दिन सूर्य अस्त शाम 5 बजकर 40 मिनट पर होगा.
ऊषा अर्घ्य (Usha Arghya)- इस पूजा का चौथा और आखिरी दिन होता है ऊषा अर्घ्य. इस दिन सभी व्रती और भक्त नदी में डूबकी लगाते हुए उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देते हैं. इस दिन सूर्योदय सुबह 6 बजकर 30 मिनट पर होगा. अर्घ्य देने के बाद, 36 घंटे का व्रत प्रसाद और जल ग्रहण करके खोला जाता है, जिसे पारण कहा जाता है.
छठ पूजा महत्व
छठ पूजा सूर्य देव और छठी मईया की आराधना का पर्व है, जिसे शुद्धता, आस्था और अनुशासन का प्रतीक माना जाता है. इस दिन व्रती पूरी निष्ठा और संयम के साथ सूर्य देव को अर्घ्य देकर जीवन में सुख, समृद्धि और संतानों के कल्याण की कामना करते हैं. यह पर्व प्रकृति, जल और सूर्य की उपासना से जुड़ा है, जो मानव जीवन में ऊर्जा और सकारात्मकता के महत्व को दर्शाता है.
]]>कभी बदहाल था अन्नपूर्णा तालाब, अब बनेगा धार्मिक आयोजन का केंद्र
एक समय पर अन्नपूर्णा तालाब की हालत बेहद खराब थी। चारों ओर गंदगी, कचरे के ढेर और जलकुंभी से भरे इस तालाब के आसपास लोग आना तक पसंद नहीं करते थे। नगर निगम द्वारा कुछ समय पूर्व इस तालाब की साफ-सफाई करवाई गई और आसपास के क्षेत्र में विकास कार्य कराए गए, जिससे स्थिति में सुधार आया। अब निगम यहां छठ पूजा के मद्देनजर विशेष घाट निर्माण करने जा रहा है। इसके लिए निगम द्वारा टेंडर जारी किए गए हैं, जिनमें घाट निर्माण के साथ-साथ परिसर का समग्र सौंदर्यीकरण भी शामिल है।
उत्तर भारतीय समुदाय के लिए विशेष तैयारी, तय होगी समय सीमा
छठ पूजा उत्तर भारतीय समुदाय का प्रमुख पर्व है और इंदौर में इसकी लोकप्रियता को देखते हुए नगर निगम इसे व्यवस्थित ढंग से मनाने के लिए कार्य कर रहा है। अन्नपूर्णा तालाब पर बन रहे इन घाटों की योजना इस तरह से तैयार की जा रही है कि श्रद्धालुओं को जगह, सुविधा और स्वच्छता के स्तर पर कोई परेशानी न हो। निगम अधिकारियों का कहना है कि कार्यों के लिए समय सीमा निर्धारित की जाएगी ताकि त्यौहार से पहले सभी निर्माण पूर्ण हो जाएं। साथ ही अन्य क्षेत्रों में भी छठ पूजा के लिए उपयुक्त जमीनों की तलाश की जा रही है, जहां भविष्य में घाट बनाए जा सकें।
सुखलिया क्षेत्र की सड़कों पर चलेगा विकास कार्य, बदलेगी ड्रेनेज व्यवस्था
नगर निगम द्वारा केवल धार्मिक स्थलों पर ही नहीं, बल्कि शहर के अन्य इलाकों में भी बुनियादी ढांचे के सुधार के लिए काम किया जा रहा है। सुखलिया और आसपास की कॉलोनियों जैसे खातीपुरा, पन्नानगर, सूरज नगर में वर्षों पुरानी ड्रेनेज लाइनों के कारण बार-बार चोकिंग की शिकायतें मिल रही थीं। अब इन क्षेत्रों में डेढ़ करोड़ रुपये की लागत से नई और बड़ी ड्रेनेज लाइनें बिछाने का काम शुरू किया जा रहा है। इसके लिए टेंडर जारी कर दिए गए हैं। साथ ही पुराने टूटे-फूटे चेंबर भी सुधारे जाएंगे, जिससे स्थानीय निवासियों को राहत मिलेगी और जल निकासी की व्यवस्था बेहतर होगी।
वाहन पार्क करने वाले मनोज कुमार यादव का कहना है कि पार्किंग पर्ची पर 10 रुपये लिखे हैं और उसे काटकर 50 रुपये की पर्ची थमा दी गई है। पार्किंग वसूली करने वाले अपनी मनमर्जी कर रहे हैं जो सरासर अन्याय है। यह सारा मामला कैमरे में कैद हो गया है।
]]>देश के कई राज्यों में धूमधाम से छठ महापर्व मनाया जा रहा है। मध्य प्रदेश में भी त्योहार की धूम है। भोपाल में रहने वाले पूर्वांचलियों के लिए खास इंतजाम किए गए हैं। उनके लिए 50 से ज्यादा घाटों का निर्माण किया गया है। जहां श्रद्धालुओं की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए तमाम व्यवस्थाएं की गई हैं। छठ के तीसरे दिन व्रती अस्तालगामी सूर्य को अर्घ्य देते हैं। व्रतधारी भगवान को जल या दूध से अर्घ्य देते हैं और फल अर्पित करते हैं।
अर्घ्य का क्या टाइम
छठ के तीसरे दिन व्रतधारी घाट या तालाब में जाकर अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देंगे। मध्य प्रदेश में शाम को 5.39 बजे सूर्य अस्त होगा। इसी समय सूर्य भगवाम को श्रद्धालु जल अर्पित करेंगे।
क्यों मनाया जाता है छठ
ऐसा माना जाता है कि सबसे पहले माता सीता ने बिहार के मुंगेर में गंगा तट पर छठ पूजन किया था। तभी से बिहार में इसकी शुरुआत हुई। माता सीता जब श्री रामचंद्र के साथ वनवास पर गई थीं, कब उन्होंने मुंगेर में छठ पर्व मनाया था। आज के समय में बिहार के अलावा कई राज्यों और यहां तक की विदेश में भी यह त्योहार मनाया जाता है। पांच नवंबर को नहाय खाय से शुरू हुए पर्व के दूसरे दिन खरना होता है। तीसरे दिन अस्तालगामी सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। चौथे दिन उदयमान सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत समाप्त हो जाता है।
मोहन यादव ने दी शुभकामनाएं
राज्य के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने लोगों को छठ पूजा की बधाई दी है। उन्होंने एक्स पर लिखा, 'जय हो छठी मैया… लोक आस्था एवं सूर्य उपासना के महापर्व 'छठ पूजा' के द्वितीय दिन 'खरना' की समस्त प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। छठी मैया आप सभी के जीवन में आरोग्य, सुख-समृद्धि एवं प्रगति प्रदान करें, यही कामना करता हूं।'
]]>छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में चार दिवसीय छठ महापर्व की आज यानी मंगलवार से शुरुआत हो गई है। पहले दिन मंगलवार को व्रती नहाय-खाय के साथ 72 घंटे का निर्जला व्रत शुरू कर चुके हैं। इस बार महादेवघाट स्थित खारून नदी तट और 60 तालाबों पर व्रती अर्घ्य देंगे। महादेवघाट में छठ पूजा को लेकर पूरी तैयारी कर ली गई है।
इस बार सात नवंबर को महादेवघाट पर भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम होगा। इसमें अंतर्राष्ट्रीय लोक गायिका कल्पना पटवारी (मुंबई), अंतर्राष्ट्रीय लोक गायिका गायत्री यादव (लखनऊ), लोक गायिका परिणीता राव पटनायक, मशहूर छत्तीसगढ़ी लोक गायक दुकालू यादव और अन्य स्थानीय कलाकार छठ गीतों से समां बांधेंगे। सभी व्रतियों और श्रद्धालुओं को छठी मइया की भक्ति में डूबोयेंगे। छठ महापर्व आयोजन समिति के अध्यक्ष राजेश कुमार सिंह ने बताया कि समिति के सदस्यों ने महादेव घाट रायपुर में पहुंचकर श्रमदान किया । रायपुर नगर निगम की ओर से भी महादेव घाट की सफाई की जा रही है। महादेव घाट को पूरी तरह से सजाया संवारा गया है। आयोजन प्रमुख राजेश सिंह, संरक्षक मंडल के सलाहकार परमानंद सिंह, रविंद्र सिंह, सत्येंद्र सिंह गौतम, आयोजन उप प्रमुख कन्हैया सिंह, संतोष सिंह, कोषाध्यक्ष सुनील कुमार सिंह, सचिव प्रचार प्रसार महादेव घाट बृजेश कुमार सिंह, राकेश सिंह, विधि व्यवस्था प्रमुख अजय शर्मा, घाट व्यवस्था प्रमुख वेद नारायण एवं रविंद्र शर्मा, अनिल कुमार सिंह, मनोज सिंह, संजय सिंह, जयप्रकाश सिंह, रणजीत मिश्रा, संजीव सिंह, जयंत सिंह, सरोज सिंह, संतोष सिंह एवं अन्य सदस्य ने आज महादेव घाट पर अपना श्रम दान किया।
महादेवघाट और 60 तालाबों पर अर्घ्य देंगे व्रती
इस बार महादेवघाट स्थित खारून नदी तट और 60 तालाबों पर व्रती अर्घ्य देंगे। महादेवघाट में छठ पूजा को लेकर पूरी तैयारी कर ली गई है। चार दिवसीय छठ महापर्व की शुरुआत पांच नवंबर से नहाय खाय के साथ शुरू हो गई है। इस बार महादेव घाट रायपुर में छठ महापर्व बड़े ही धूमधाम और भव्यता के साथ मनाया जा रहा है। इसे लेकर छठ महापर्व आयोजन समिति महादेव घाट के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने कमर कस ली है।
नहाय खाय के साथ छठ महापर्व शुरू
पहले दिन पांच नवंबर को नहाय खाय के साथ छठ महापर्व की शुरुआत हुई। इसके बाद 6 नवंबर को खरना, 7 नवंबर को डूबते सूर्य को अर्घ्य और 8 नवंबर को उगते सूर्य को अर्घ्य देकर छठ महापर्व का समापन होगा। छठ पर्व को शक्ति पूजा और सूर्य सष्टी व्रत के नाम से भी जाना जाता है। यह पर्व मुख्य रूप से पूर्वी भारत के बिहार, झारखंड, पूर्वांचल, पश्चिम बंगाल और नेपाल के तराई क्षेत्रों में मनाया जाता है। छठ पूजा सूर्य और उनकी बहन छठी मैया को समर्पित है। त्योहार और व्रत के अनुष्ठान कठोर है। चार दिनों तक मनाए जाने वाले इस व्रत में महिलायें पवित्र स्नान, उपवास और निर्जल, लंबे समय तक पानी में खड़े रहना, प्रसाद, प्रार्थना और सूर्य देवता को अर्घ्य देना शामिल है। बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश के लोग जिस देश और राज्यों में बसे हैं। वहां अपनी संस्कृतियों को आज भी संजोये हुए हैं।
छठ पूजा को लेकर कई मान्यताए है जो इस के व्रत को और भी खास बनाती है. छठ पूजा पर रखे जाने वाला व्रत सबसे कठिन व्रतों में से एक माना जाता है. यह व्रत संतान के लिए रखा जाता है उनकी लंबी उम्र ,अच्छी सेहत और सुख-समृद्धि के लिया 36 घंटे का निर्जला व्रत रखते है. यह व्रत महिलायें रखती है और इसके कुछ कड़े नियम भी है जिनका पालन भी करना पड़ता है.
इन बातों का रखें ध्यान
पौराणिक मान्यता के अनुसार सूर्य देवता जीवन और ऊर्जा के स्रोत माने जाते हैं। उनकी आराधना से मनुष्य को स्वास्थ्य, समृद्धि और सुख-शांति की प्राप्ति होती है। कहा जाता है कि सूर्य देवता ने अपने तेज से संसार को प्रकाश दिया और अंधकार को मिटाया। इसलिए, सूर्य को अर्घ्य देकर श्रद्धालु अपनी इच्छाओं और आकांक्षाओं की पूर्ति की कामना करते हैं।
छठी मईया को गौरी, उषा या छठ देवी भी कहा जाता है और वह सूर्य देवता की बहन मानी जाती हैं। उनका विशेष रूप से आदिवासी और ग्रामीण समुदायों में बहुत सम्मान है। छठ पूजा के दौरान, श्रद्धालु विशेष रूप से छठी मईया की आराधना करते हैं, जिनसे उन्हें संतान सुख और परिवार में सुख-शांति की प्राप्ति की उम्मीद होती है।
पौराणिक कथाओं के अनुसार, जो लोग सच्चे मन से छठी मईया की पूजा करते हैं, उनको परिवार में कभी भी दुख और दरिद्रता का सामना नहीं करना पड़ता। छठी मईया के प्रति श्रद्धा और भक्ति से मनुष्य के जीवन में सुख और समृद्धि का आगमन होता है।
छठ पूजा का आयोजन मुख्य रूप से कार्तिक महीने में, शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से लेकर सप्तमी तक किया जाता है। इस पूजा में विशेष रूप से उपवास किया जाता है। इस अवसर पर लोग नदी, तालाब या किसी जल स्रोत के किनारे जाकर पूजा करते हैं।
छठ पूजा की शुरुआत नहाय-खाय से होती है, इस दिन श्रद्धालु स्नान करके विशेष पकवान बनाते हैं, जिसमें चावल, चना का दाल और कद्दू की सब्जी शामिल है। दूसरे दिन, जिसे ‘खरना’ कहा जाता है, उपवास रखकर शाम को खीर का प्रसाद बनाया जाता है। इसी प्रसाद को खाने के बाद शुरू होता है निर्जला व्रत। तीसरे दिन, श्रद्धालु नदियों के किनारे जाकर डूबते सूर्य को अर्घ्य देते हैं और फिर चौथे दिन उगते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देने के पश्चात परिवार के सभी सदस्य प्रसाद ग्रहण करते हैं।
बिहारी समाज के अनुसार छठ पूजा सिर्फ एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति और परंपरा की एक अमूल्य धरोहर है। बिहार के लोग छठ पूजा को सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक उत्सव के रूप में मनाते हैं, जो भारतीय संस्कृति की गहराई को दर्शाता है।
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