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दंतेवाड़ा और नारायणपुर की सीमा पर अबूझमाड़ के जंगलों में सुरक्षाबल के साथ चल रहे मुठभेड़ में नक्सलियों को भारी नुकसान होने की खबर है. रात तीन बजे से चल रही दोनों तरफ से फायरिंग में नक्सलियों के बड़े कैडर के मारे जाने की आशंका जताई जा रही है. दंतेवाड़ा एसपी गौरव रॉय ने बताया कि 40 से 50 बड़े कैडर की नक्सलियों की मौजूदगी की सूचना है.
40 से 50 बड़े कैडर की नक्सलियों की मौजूदगी की सूचना पर दंतेवाड़ा, नारायणपुर, कोण्डागांव और बस्तर जिले से जवानों ने इलाके की घेराबंदी की है. जवानों को इंद्रावती एरिया कमेटी के नक्सलियों की मौजूदगी की खबर थी. घेरने के बाद सुबह तीन बजे से दोनों तरफ से लगातार हैवी फायरिंग हो रही है. बस्तर आईजी सुंदरराज पी. ने नक्सलियों को भारी नुकसान होने की संभावना बताई है. उन्होंने कहा कि अभी भी रुक-रुक कर फायरिंग चल रही है. सर्चिंग भी जारी है. सभी जवान सुरक्षित हैं. बड़े कैडर के नक्सलियों के मारे जानी की आशंका है.
]]>छत्तीसगढ़ के अबूझमाड़ जंगल में 54,543 हेक्टेयर भूमि में फैले भारतीय सेना की प्रस्तावित युद्धाभ्यास रेंज के लिए 9,601 लोगों की आबादी वाले 52 गांवों को खाली करना होगा। नारायणपुर जिला प्रशासन के एक आंतरिक सर्वेक्षण में यह बात सामने आई है। नारायणपुर जिला कलेक्टर की एक आंतरिक रिपोर्ट में कहा गया है कि सेना की रेंज नारायणपुर जिले की कोहकामेटा तहसील में 13 ग्राम पंचायतों के अंतर्गत 52 गांवों को कवर करेगी।
प्रस्तावित क्षेत्र अत्यधिक संवेदनशील है। इसलिए विस्तृत सर्वेक्षण करने के लिए सरकार की ओर से ड्रोन, पुलिस बल, वन विभाग के कर्मियों और राज्य स्तर से अनुभवी वरिष्ठ अधिकारियों को तैनात करने का आदेश जारी करना उचित होगा। इस विस्तृत सर्वेक्षण कार्य के लिए धन राज्य सरकार द्वारा आवंटित किया जाना चाहिए। 7 अगस्त को छत्तीसगढ़ राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने ओरछा तहसील के सोनपुर-गरपा क्षेत्र में अबूझमाड़ जंगल में सेना की युद्धाभ्यास रेंज की स्थापना के संबंध में जिला कलेक्टर को पत्र लिखा था। इसने 13 सितंबर 2017, 21 नवंबर 2017 और 17 फरवरी 2021 के अपने पिछले पत्रों का हवाला दिया और कलेक्टर से सेना रेंज के बारे में तुरंत जानकारी भेजने का अनुरोध किया। इस कदम को युद्धाभ्यास रेंज स्थापित करने की प्रक्रिया में तेजी लाने की दिशा में एक कदम के रूप में देखा गया। अबूझमाड़ महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ के बीच फैला है। इसे 'अज्ञात पहाड़ी' के रूप में जाना जाता है, क्योंकि ब्रिटिश काल के बाद से 6,000 वर्ग किमी के घने जंगल का सर्वेक्षण नहीं किया गया है। यह जंगल माओवादी गतिविधियों का केंद्र है। कहा जाता है कि सीपीआई (माओवादी) के लगभग एक दर्जन वरिष्ठ कैडर अभी भी वहां डेरा डाले हुए हैं। पिछले छह महीनों में अबूझमाड़ में माओवादियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच मुठभेड़ में वृद्धि हुई है। जिला प्रशासन की रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रस्तावित भारतीय सेना युद्धाभ्यास रेंज के सभी गांव सर्वेक्षण रहित हैं और स्थानीय निवासियों के पास अपने घर, बगीचे और खेत हैं। रिपोर्ट में कहा गया है, "चूंकि गांवों का सर्वेक्षण नहीं किया गया है, इसलिए जमीन पर रहने वालों को भूस्वामी माना जाना चाहिए। विस्थापन के मामले में पुनर्वास उपायों के साथ-साथ मुआवजे का फैसला उच्च स्तर पर किया जाना चाहिए।" जिला प्रशासन के अनुसार, इन गांवों में 2,417 परिवार (राशन कार्ड के अनुसार) हैं, जिनकी कुल आबादी 9,601 है। घरों की संख्या 2,417 है। पशु शेडों की संख्या 2,417, कृषि भूमि लगभग 4,834 हेक्टेयर और आवासीय भूमि 97 हेक्टेयर है। रिपोर्ट के अनुसार, इस पूरी जमीन का अनुमानित मुआवजा लगभग 70,28,64,000 रुपये है। सेना के एक अधिकारी ने कहा कि सेना की युद्धाभ्यास रेंज टैंक प्रशिक्षण और विभिन्न युद्धक्षेत्र परिदृश्यों के अनुकरण के लिए एक समर्पित क्षेत्र प्रदान करती है। इससे सैनिकों को सुरक्षित वातावरण में अपने कौशल को सुधारने में मदद मिलती है। छत्तीसगढ़ के खुफिया अधिकारियों का मानना है कि सीपीआई (माओवादी) के अधिकांश वरिष्ठ नेता महाराष्ट्र सीमा और नारायणपुर-महाराष्ट्र-बीजापुर ट्राइजंक्शन के पास अबूझमाड़ के दक्षिणी और दक्षिण-पश्चिमी हिस्से में डेरा डाले हुए हैं।
]]>छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले में पुलिस फोर्स के नक्सल विरोधी ऑपरेशन 'नक्सलवाद से माड़ को बचाओ' में सुरक्षा बलों को बड़ी कामयाबी मिली है। पांच दिनों तक तक चले अभियान में पुलिस फोर्स ने नक्सलियों के कोर इलाके में घुसकर आठ नक्सलियों को मार गिराया है। इनमें 4 महिला नक्सली भी शामिल हैं। मुठभेड़ में कई नक्सलियों के घायल होने की भी खबर है। मारे गये सभी नक्सलियों के शव लेकर जवान नारायणपुर पहुंच गये हैं। इन 6 नक्सलियों पर 8-8 लाख यानी कुल 48 लाख का इनाम था। इस अभियान में महिला कमांडो की विशेष भूमिका रही।
मुठभेड़ के दौरान एसटीएफ का एक जवान बलिदान हो गया और दो जवान घायल हुए हैं। जिनका रायपुर के एक निजी हॉस्पिटल में इलाज चल रहा है। घायल जवानों की स्थिति खतरे से बाहर है। सीएम और डिप्टी सीएम ने रविवार को उनसे मुलाकात भी की। वीरगति प्राप्त जवान को आज रायपुर और उसके गृह जिले जशपुर में नमन कर श्रद्धांजलि दी गई। फिर अंतिम संस्कार किया गया। फोर्स को ज्वॉइंट ऑपरेशन में नारायणपुर, कोंडागांव, दंतेवाडा, कांकेर जिलों के एलिट फोर्सेस डीआरजी और एसटीएफ के साथ 53वी वाहिनी आईटीबीपी और बीएसएफ 135वीं वाहिनी के कुल 1400 जवान शमिल रहे। एक महीने के भीतर तीसरी बड़ी सफलता और 45 दिनों के भीतर चौथी बड़ी सफलता है। 30 अप्रैल काकुर में, 24 मई को रखवाया में, 8 जून को ईरपनार-भट्बेड़ा में इसी अभियान के तहत बड़ी कामयाबी मिली थी।
मौके से ये हथियार बरामद ———-
0- 1 नग इंसास रायफल
0- 2 नग 303 रायफल, 3 नग 315 बोर रायफल,
0- 1 नग बीजीएल लांचर सहित भारी मात्रा में विस्फोटक सामान
0- अन्य नक्सली दैनिक उपयोगी सामग्री
मारे गये नक्सलियों के नाम और पद ——–
0- सुदरू, सीवायपीसी- पीएलजीए कंपनी नं. 01/डीव्हीसीएम, 8 लाख इनामी
0- वर्गेश, सीवायपीसी- पीएलजीए कंपनी नं. 01/डीव्हीसीएम, 8 लाख इनामी
0- ममता, सीवायपीसी- पीएलजीए कंपनी नं. 01/डीव्हीसीएम, 8 लाख इनामी
0- समीरा, पीपीसीएम- पीएलजीए कंपनी नं. 01, 8 लाख इनामी
0- कोसी, पीपीसीएम- पीएलजीए कंपनी नं. 01, 8 लाख इनामी
0- मोती, पीपीसीएम- पीएलजीए कंपनी नं. 01, 8 लाख इनामी
0- अन्य 2 नक्सलियों की पहचान की कार्यवाही जारी है।
वीरगति को प्राप्त जवान
0- एसटीएफ आरक्षक 606 नितेश एक्का उम्र 27 वर्ष निवासी जिला जशपुर
घायल दो जवान
0- एसटीएफ आरक्षक 1075 लेखराम नेताम उम्र 28 वर्ष निवासी जिला धमतरी।
0- एसटीएफ आरक्षक 831 कैलाश नेताम उम्र 33 वर्ष निवासी जिला कोण्डागांव।
अब तक 131 माओवादियों के शव बरामद
बस्तर आईजी सुन्दरराज पी ने बताया कि वर्ष 2024 में अब तक बस्तर संभाग के अंतर्गत हुए एनकाउंटर्स में अब तक कुल 131 माओवादियों के शव बरामद की गई, जिसमें सर्वाधिक जिला बीजापुर- 51, कांकेर-34 एवं नारायणपुर- 26 माओवादियों को मुठभेड़ में मार गिराया गया है।