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महाराष्ट्र में हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों में महायुति (BJP, शिवसेना-शिंदे गुट, और अन्य सहयोगी दलों) ने शानदार जीत दर्ज की है। इस जीत के बाद मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस और अजित पवार ने राज्य के मीडिया के सामने आकर अपनी प्रतिक्रिया दी और जनता का धन्यवाद किया। महायुति के नेताओं ने विक्ट्री साइन दिखाते हुए यह स्पष्ट किया कि यह जीत राज्य की जनता की जीत है और अब उनकी जिम्मेदारी पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गई है।
सीएम शिंदे: "यह जनता की सरकार है"
प्रेस कॉन्फ्रेंस में सबसे पहले मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने संबोधित किया। उन्होंने कहा, "यह महायुति के लिए ऐतिहासिक और रिकॉर्ड जीत है। हम महाराष्ट्र की जनता के आभारी हैं जिन्होंने हमें अपना आशीर्वाद दिया और हमें विश्वास में लिया। हम उन सभी बाधाओं को हटाने में सफल रहे हैं, जो महाविकास अघाड़ी (MVA) सरकार के दौरान राज्य में उत्पन्न हुई थीं। जनता ने यह चुनाव अपने हाथों में लिया और हमारे ऊपर अपना विश्वास जताया।" शिंदे ने आगे कहा, "हमारी सरकार आम जनता की सरकार है। मेरे लिए मुख्यमंत्री का मतलब 'चीफ मिनिस्टर' नहीं, बल्कि 'कॉमन मैन' है। हम आम लोगों की समस्याओं को समझते हुए, उनके लिए काम करेंगे। हमारी सरकार महिलाओं, बच्चों और किसानों के कल्याण के लिए समर्पित रहेगी। हम चाहते हैं कि हर आम आदमी को सुपरमैन जैसा महसूस हो, ताकि उनका जीवन बेहतर हो।"
फडणवीस ने जताया आभार
डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस ने कहा, "यह जीत सिर्फ महायुति की नहीं, बल्कि महाराष्ट्र की जनता की जीत है। हमें यह जीत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में मिली है और यह जनता के विश्वास का प्रतीक है। हम महाराष्ट्र की जनता के आगे नतमस्तक हैं। इस जीत ने हमारी जिम्मेदारी और भी बढ़ा दी है। हम राज्य के सर्वांगीण विकास के लिए प्रतिबद्ध हैं।" फडणवीस ने राज्य की जनता का धन्यवाद करते हुए कहा कि यह चुनाव यह साबित करता है कि महाराष्ट्र के लोग अच्छे शासन की ओर देख रहे हैं और उनकी उम्मीदों पर महायुति खरा उतरेगी। "हम सभी दायित्वों को पूरी जिम्मेदारी से निभाएंगे," उन्होंने कहा।
अजित पवार का बयान: "विरोधियों को जवाब मिला"
डिप्टी सीएम और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के वरिष्ठ नेता अजित पवार ने भी प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, "यह जीत महायुति के लिए गर्व का पल है। हमें इस जीत के लिए अपनी जिम्मेदारी और भी बढ़ी हुई महसूस हो रही है। हम महाराष्ट्र में वित्तीय अनुशासन लाएंगे, ताकि विकास के सभी वादे पूरे हो सकें।" अजित पवार ने 'लड़की हूं, लड़ सकती हूं' योजना को 'गेम चेंजर' बताया और कहा, "यह योजना महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए अहम साबित हुई और इसने हमारी कठिनाइयों को दूर किया।" उन्होंने कहा, "कई लोग जो ईवीएम (इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन) के मुद्दे पर सवाल उठा रहे थे, उन्हें यह याद रखना चाहिए कि हमें लोकसभा चुनाव में भी ईवीएम से ही हार का सामना करना पड़ा था। ऐसे लोग अब शून्य हो गए हैं और उन्हें अपनी हार का जवाब मिल चुका है।"
महायुति का गठबंधन अगले पांच साल तक होगा मजबूत
अजित पवार ने आगे कहा, "यह महायुति सिर्फ एक चुनावी गठबंधन नहीं है, बल्कि हम अगले पांच साल तक महाराष्ट्र के सर्वांगीण विकास के लिए मिलकर काम करेंगे। हम सभी पार्टियों के बीच समन्वय बनाए रखेंगे और राज्य की प्रगति के लिए प्रतिबद्ध रहेंगे।"
महायुति की जीत का कारण
महायुति की इस ऐतिहासिक जीत के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं। इन कारणों में प्रमुख हैं:
1. विकास के मुद्दे पर ध्यान: महायुति ने अपने चुनावी प्रचार में विकास को प्राथमिकता दी थी, और खासतौर पर महिला सशक्तिकरण और किसानों की समस्याओं को प्रमुख मुद्दा बनाया था।
2. लड़की हूं, लड़ सकती हूं योजना: यह योजना महिलाओं के लिए एक अहम बदलाव साबित हुई और महिलाओं का व्यापक समर्थन हासिल किया।
3. विरोधियों की नकारात्मक राजनीति का जवाब: महायुति ने विरोधियों के आरोपों का डटकर सामना किया और उनका जवाब दिया, जिससे जनता के बीच महायुति की छवि मजबूत हुई।
]]>शिंदे ने कहा, ‘‘हमने लाडकी बहिन योजना शुरू की, जिसके तहत पात्र महिलाओं को हर महीने 1,500 रुपए दिए जा रहे हैं। यदि आप हमारी ताकत बढ़ाते हैं, तो हम मासिक राशि 2,000 रुपए तक बढ़ा देंगे। यदि आप बड़ा जनादेश देते हैं, तो हम इसे बढ़ाकर 3,000 रुपए कर देंगे। हम इस राशि को बढ़ाने में संकोच नहीं करेंगे।'' उन्होंने कहा, ‘‘विपक्ष यह कहकर हमारी आलोचना करता है कि राज्य सरकार बाद में खाली खजाना बताकर इस योजना को बंद कर देगी। लेकिन उन्हें यह नहीं भूलना चाहिए कि राज्य का खजाना लोगों के लिए है।''
शिंदे ने कहा कि जब उनकी सरकार ने महिला यात्रियों के लिए सरकारी बसों का किराया 50 प्रतिशत कम कर दिया था, तब भी चिंताएं जताई गई थीं और कहा गया था कि इस कदम से राज्य परिवहन निगम को और अधिक घाटा होगा। उन्होंने कहा, ‘‘इसके विपरीत इस पहल की शुरुआत के बाद बस सेवा का इस्तेमाल करने वाली महिलाओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई, जो अंततः महाराष्ट्र राज्य सड़क परिवहन निगम (एमएसआरटीसी) के लिए लाभकारी साबित हुआ।''
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