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मध्यप्रदेश की राजनीति में राज्यसभा की तीसरी सीट को लेकर कांग्रेस के भीतर हलचल तेज हो गई है। आंकड़ों के हिसाब से यह सीट कांग्रेस के लिए सुरक्षित मानी जा रही थी, लेकिन बदले राजनीतिक समीकरणों और संभावित क्रॉस वोटिंग के खतरे ने पार्टी नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है। यही वजह है कि अब इस सीट पर किसी बड़े और भरोसेमंद चेहरे को उतारने की रणनीति पर गंभीर मंथन चल रहा है। सूत्रों के मुताबिक, पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ का नाम सबसे मजबूत दावेदार के रूप में तेजी से उभरा है। पार्टी हाईकमान को यह समझ आ रहा है कि अगर कमलनाथ मैदान में उतरते हैं, तो किसी भी विधायक के लिए क्रॉस वोटिंग करना आसान नहीं होगा। उनकी पकड़ संगठन और विधायकों दोनों पर मजबूत मानी जाती है, जिससे तीसरी सीट कांग्रेस के खाते में सुरक्षित जा सकती है।
हालांकि, राहुल गांधी की पहली पसंद मीनाक्षी नटराजन को बताया जा रहा है। वे संगठन में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं और पार्टी के भीतर उनकी मजबूत स्वीकार्यता है। वहीं, दिग्विजय सिंह पीसी शर्मा के नाम पर जोर दे रहे हैं, जबकि सज्जन सिंह वर्मा, कमलेश्वर पटेल और बाला बच्चन जैसे नाम भी चर्चा में बने हुए हैं। दरअसल, मध्यप्रदेश से राज्यसभा की तीन सीटें खाली हो रही हैं। दो सीटों पर भाजपा की स्थिति मजबूत मानी जा रही है, लेकिन तीसरी सीट के लिए 58 वोटों की जरूरत है।
कांग्रेस के पास तकनीकी रूप से 66 विधायक हैं, लेकिन कुछ विधायकों की वोटिंग को लेकर संशय और कुछ संभावित समीकरणों ने यह संख्या प्रभावी रूप से कम कर दी है। ऐसे में पार्टी किसी भी तरह का जोखिम नहीं लेना चाहती। हरियाणा में हुई क्रॉस वोटिंग जैसी घटनाएं भी कांग्रेस नेतृत्व के लिए चेतावनी बनी हुई हैं। इसी वजह से दिल्ली दरबार इस बार पूरी सावधानी से फैसला लेना चाहता है। यदि भाजपा आदिवासी कार्ड खेलती है, तो बाला बच्चन जैसे नाम भी अचानक मजबूत हो सकते हैं।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि प्रदेश कांग्रेस के भीतर चल रही गुटबाजी भी इस चुनाव को प्रभावित कर सकती है। जीतू पटवारी, उमंग सिंघार और दिग्विजय सिंह के अलग-अलग समीकरणों के बीच कमलनाथ ही एक ऐसे नेता माने जा रहे हैं, जिन पर सभी पक्ष सहमति बना सकते हैं। अब सबकी नजर दिल्ली पर टिकी है। फैसला चाहे मीनाक्षी नटराजन के पक्ष में जाए या कमलनाथ के नाम पर मुहर लगे, इतना तय है कि राज्यसभा की यह तीसरी सीट कांग्रेस के लिए सिर्फ एक चुनाव नहीं, बल्कि संगठनात्मक ताकत और राजनीतिक प्रतिष्ठा की बड़ी परीक्षा बन चुकी है।
]]>अमेरिका में वाइट हाउस संवाददाताओं (WHCA) के वार्षिक रात्रिभोज कार्यक्रम में गोलीबारी की चर्चाएं दुनियाभर में हैं। इधर, भारत में कांग्रेस विधायक विजय वडेट्टीवार ने विवादित बयान दे दिया है। उनका कहना है कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर गोलियां चलनी ही थीं। साथ ही कहा है कि भारत में भी लोगों की यही भावना है। हमले में ट्रंप सुरक्षित हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, वडेट्टीवार ने कहा, 'ट्रंप दुनिया में दबदबना बनाना चाहते थे और दूसरे देशों को अस्थिर करना चाहते थे। जैसी करनी वैसी भरनी…। चूंकि चीजें ऐसी नहीं हुईं, जैसी उन्होंने उम्मीद की थी तो ये होना ही था।' उन्होंने कहा कि भारत में भी जनता का मूड कुछ अलग नहीं है। हालांकि, उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया। उन्होंने कहा, 'चूंकि यहां लोग बाहर नहीं आ रहे हैं, तो भ्रम बना हुआ है कि सब ठीक है। लेकिन लोगों की भावना वैसी ही है कि भारत को तबाह किया जा रहा है।'
कांग्रेस विधायक ने घटना की निंदा की। उन्होंने कहा, ‘इतने उच्च पद पर बैठे व्यक्ति के साथ ऐसा नहीं होना चाहिए था, लेकिन जनता की प्रतिक्रिया आमतौर पर दिखाती है कि नेतृत्व कैसा है।’
वाइट हाउस में गोलीबारी
यह घटना रात करीब 8:34 बजे की है, जब मेहमानों को रात्रिभोज परोसा जा रहा था। उस समय राष्ट्रपति ट्रंप, एसोसिएशन की अध्यक्ष वेइजिया जियांग और 'मेंटलिस्ट' ओज पर्लमैन के साथ बातचीत करते नजर आ रहे थे। पर्लमैन वॉशिंगटन हिल्टन में आयोजित इस मुख्य कार्यक्रम में अपना शो पेश करने वाले थे। खुफिया सेवा के अधिकारियों और अन्य सुरक्षाकर्मियों ने राष्ट्रपति, प्रथम महिला मेलानिया ट्रंप, उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस और द्वितीय महिला उषा वेंस को सुरक्षा घेरा बना कक्ष से बाहर ले गए।
कुछ घंटों बाद, ट्रंप ने वाइट हाउस में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित किया और घोषणा की कि सुरक्षाकर्मियों ने कैलिफोर्निया के एक व्यक्ति को पकड़ लिया है। ट्रंप ने रविवार को कहा कि रात्रिभोज में हथियारों के साथ घुसने की कोशिश करने वाला आरोपी प्रशासन के अधिकारियों को निशाना बनाना चाहता था और उसके परिवार ने पहले ही कानून प्रवर्तन एजेंसियों के समक्ष इसे लेकर चिंता जताई थी।
हमलावर की हुई पहचान
अधिकारियों के अनुसार, संदिग्ध की पहचान कैलिफोर्निया निवासी 31 वर्षीय कोल टॉमस एलन के रूप में हुई है और उसे गिरफ्तार कर लिया गया है। उसे सोमवार को अमेरिका के न्याय विभाग की ओर से आपराधिक आरोपों का सामना करना पड़ सकता है। न्याय विभाग के कार्यवाहक प्रमुख टोड ब्लैंच ने बताया कि आरोपी ट्रेन से कैलिफोर्निया से वाशिंगटन आया था और कार्यक्रम से कुछ दिन पहले ही उस होटल में ठहरा था, जहां यह समारोह आयोजित किया गया था।
मध्यप्रदेश में राज्यसभा की तीन सीट खाली हो रही हैं जिसके चुनाव होने वाले हैं। मध्यप्रदेश में विधायकों की संख्या के हिसाब से दो सीट भाजपा और एक कांग्रेस के पास जाना तय है। इसके चलते कांग्रेस में अंदरूनी घमासान चल रहा है। दावेदारों की फेहरिस्त में सांसद रही मीनाक्षी नटराजन का नाम सबसे ऊपर है, जिसे कांग्रेस सुप्रीमो व लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी (rahul gandhi) आगे बढ़ा सकते हैं। मध्यप्रदेश मे इस वक्त राज्यसभा के 11 सांसद है। इनमें भाजपा के जॉर्ज कुरियन और सुमेर सिंह सोलंकी और कांग्रेस के दिग्विजय सिंह का कार्यकाल 21 जून 2026 को खत्म होने वाला है।
वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह (digvijay singh) ने भी दांव खेलते हुए कमलनाथ सरकार में मंत्री रहे पीसी शर्मा (pc sharma) का नाम आगे कर दिया। उनका तर्क है कि कांग्रेस के पास मजबूत ब्राह्मण नेता नहीं है। शर्मा को बनाने से बड़े समाज की पार्टी को सहानुभूति मिलेंगी। इधर, सांसद रहे सज्जन सिंह वर्मा (sajjan singh verma) भी राज्यसभा जाना चाहते हैं। हालांकि उनके साथ विडंबना है कि लॉबिंग करने वाला दिल्ली में कोई बड़ा नेता नहीं है। हालांकि उन्हें विश्वास है कि पार्टी दलित कार्ड खेलते हुए उन्हें मौका दे सकती है।
कांग्रेस के लिए जीत आसान नहीं
राज्यसभा सदस्य बनने के लिए 58 वोट की आवश्यकता है तो कांग्रेस के पास कुल 66 वोट थे। उसमें विधायक मुकेश मल्होत्रा (mukesh malhotra) को सुप्रीम कोर्ट ने विधायक बने रहने की राहत तो दे दी है, लेकिन वोटिंग का अधिकार छीन लिया। बुधवार को दतिया विधायक राजेंद्र भारती (rajendra bharti) को कोर्ट ने जेल भेज दिया। उनके वोट को लेकर भी संकट खड़ा है। इसके अलावा निर्मला सप्रे का वोट भी उन्हें नहीं मिलेगा। ऐसी स्थिति में कांग्रेस के पास 63 वोट ही बचे हैं जिसमें से पांच वोट क्रॉस वोटिंग में चले गए तो खेल बदल जाएगा। तीसरी सीट भी भाजपा के पास जा सकती है। ऐसा ही कुछ जादू भाजपा हरियाणा में दिखा चुकी है।
देखें राजनीतिक गणित
0-कांग्रेस के विधायक मकेश मल्होत्रा वोट नहीं डाल पाएंगे। कोर्ट ने हाल ही में उनका चुनाव शून्य घोषित कर दिया था, लेकिन वे अपील में चले गए तो उन्हें स्टे दे दिया, लेकिन वोट नहीं डाल पाएंगे।
0-विपक्ष के उपनेता हेमंत कटारे ने बजट सत्र में पारिवारिक कारण बताकर इस्तीफा दे दिया था। हालांकि कटारे ने साफ कर दिया है कि उनका किसी से कोई विवाद भी नहीं है और वे भाजपा में जाने का सोच भी नहीं सकते हैं।
0- इसके अलावा बीना से कांग्रेस विधायक निर्मला सप्रे पर भी दल बदल कानून के तहत मामला चल रहा है।
0-कल ही दतिया से कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को कोर्ट ने धोखाधड़ी के मामले में दोषी करार दिया। गुरुवार को उन्हें तीन साल की सजा सुना दी। अब ऐसी स्थिति में वे विधायक रहेंगे तो ही वोट डाल पाएंगे।
कांग्रेस ने नहीं चुकाया इतना बिजली बिल
नोटिस की जानकारी लगते ही आम जनता सहित कोंग्रेसी नेता भी हैरान रह गए. वहीं, जिला अध्यक्ष गगन यादव ने कहा, '' हमें अभी कोई जानकारी नहीं है लेकिन यह बीजेपी की साजिश लग रही है. जानकारी के मुताबिक बिल नहीं चुकाए जाने पर MPEB के अधिकारियों ने कांग्रेस कार्यालय जाकर पूछताछ की थी लेकिन जब संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो कांग्रेस कार्यालय के बाहर नोटिस चस्पा कर दिया. एमपीईबी के मुताबकि कांग्रेस कार्यालत का 10 हजार 101 रु का बिल बकाया है और उन्हें भुगतान का अंतिम अवसर पहले ही दिया जा चुका है.
ये लिखा है कुर्की नोटिस में
MPEB के द्वारा चिपकाए गए नोटिस में लिखा है, '' आपके द्वारा विद्युत कनेक्शन क्रमांक 1201021567 के विद्युत बिल का भुगतान नियत तिथि के अंदर भुगतान नहीं किया गया है. यह कि आपके उक्त विद्युत कनेक्शन पर बकाया राशि रु. 10101 का बिल भुगतान हेतु लंबित है. अतः मध्य प्रदेश इलेक्ट्रिकल अंडर टेकिंग (बकाया राशि) वसूली अधिनियम 1959 की धारा 147 में निहित प्रावधानों के अंतर्गत आपको यह नोटिस प्रेषित किया जा रहा है, कि आप कंपनी की बकाया राशि इस नोटिस प्राप्ति के 7 दिवस के भीतर जमा कर दें अन्यथा उक्त राशि उपरोक्त अधिनियम की धारा 6 के अनुसार बकाया भू-राजस्व के रूप में म.प्र. भू-राजस्व संहिता 1959 के तहत एक पक्षीय कार्रवाई करते हुये राजस्व अधिकारियों के माध्यम से संपत्ति कुर्की की कार्रवाई कर बकाया राशि की वसूली की जाएगी.
क्या बोले छतरपुर कांग्रेस जिला अध्यक्ष
जब मामले में छतरपुर कोंग्रेस जिला अध्यक्ष गगन यादव से बात की तो उन्होंने कहा, '' मुझे जानकारी नहीं है लेकिन आप ने बताया तो पता चला है, हम दिखवाते हैं. सिर्फ 10 हजार रु के लिए नोटिस चिपकाना उचित नहीं है. यह बीजेपी की साजिश लग रही है.
वहीं, जब मामले में MPEB के अधिकारी केएस घोसी से बात की गई तो उन्होंने कहा, '' यह रूटीन प्रकिया है. अभी मार्च चल रहा है इसलिए नोटिस भेजे जा रहे हैं. कुछ लोग नोटिस ले लेते हैं, वहीं कुछ नहीं लेते तो चस्पा करने पड़ते हैं. शहर में बिजली का 9 करोड़ बकाया जिसकी वसूली के लिए लगातार प्रयास चल रहा है.''
]]>कांग्रेस ने नहीं चुकाया इतना बिजली बिल
नोटिस की जानकारी लगते ही आम जनता सहित कोंग्रेसी नेता भी हैरान रह गए. वहीं, जिला अध्यक्ष गगन यादव ने कहा, '' हमें अभी कोई जानकारी नहीं है लेकिन यह बीजेपी की साजिश लग रही है. जानकारी के मुताबिक बिल नहीं चुकाए जाने पर MPEB के अधिकारियों ने कांग्रेस कार्यालय जाकर पूछताछ की थी लेकिन जब संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो कांग्रेस कार्यालय के बाहर नोटिस चस्पा कर दिया. एमपीईबी के मुताबकि कांग्रेस कार्यालत का 10 हजार 101 रु का बिल बकाया है और उन्हें भुगतान का अंतिम अवसर पहले ही दिया जा चुका है.
ये लिखा है कुर्की नोटिस में
MPEB के द्वारा चिपकाए गए नोटिस में लिखा है, '' आपके द्वारा विद्युत कनेक्शन क्रमांक 1201021567 के विद्युत बिल का भुगतान नियत तिथि के अंदर भुगतान नहीं किया गया है. यह कि आपके उक्त विद्युत कनेक्शन पर बकाया राशि रु. 10101 का बिल भुगतान हेतु लंबित है. अतः मध्य प्रदेश इलेक्ट्रिकल अंडर टेकिंग (बकाया राशि) वसूली अधिनियम 1959 की धारा 147 में निहित प्रावधानों के अंतर्गत आपको यह नोटिस प्रेषित किया जा रहा है, कि आप कंपनी की बकाया राशि इस नोटिस प्राप्ति के 7 दिवस के भीतर जमा कर दें अन्यथा उक्त राशि उपरोक्त अधिनियम की धारा 6 के अनुसार बकाया भू-राजस्व के रूप में म.प्र. भू-राजस्व संहिता 1959 के तहत एक पक्षीय कार्रवाई करते हुये राजस्व अधिकारियों के माध्यम से संपत्ति कुर्की की कार्रवाई कर बकाया राशि की वसूली की जाएगी.
क्या बोले छतरपुर कांग्रेस जिला अध्यक्ष
जब मामले में छतरपुर कोंग्रेस जिला अध्यक्ष गगन यादव से बात की तो उन्होंने कहा, '' मुझे जानकारी नहीं है लेकिन आप ने बताया तो पता चला है, हम दिखवाते हैं. सिर्फ 10 हजार रु के लिए नोटिस चिपकाना उचित नहीं है. यह बीजेपी की साजिश लग रही है.
वहीं, जब मामले में MPEB के अधिकारी केएस घोसी से बात की गई तो उन्होंने कहा, '' यह रूटीन प्रकिया है. अभी मार्च चल रहा है इसलिए नोटिस भेजे जा रहे हैं. कुछ लोग नोटिस ले लेते हैं, वहीं कुछ नहीं लेते तो चस्पा करने पड़ते हैं. शहर में बिजली का 9 करोड़ बकाया जिसकी वसूली के लिए लगातार प्रयास चल रहा है.''
]]>एक यूट्यूब चैनल को दिए इंटरव्यू में कांग्रेस नेता ने विदेशी कंपनियों में भारतीयों की संख्या जिक्र करते हुए अपनी बात को रखा। उन्होंने कहा कि भारत ने अपनी शिक्षा संस्थाओं के जरिए युवा प्रतिभा का एक बड़ा आधार तैयार किया है, लेकिन भारत में ही नई खोजों के लिए इसका लाभ उठाने में नई दिल्ली पूरी तरह से असमर्थ रही है। उन्होंने कहा, "हमने बहुत सारी युवा प्रतिभा का निर्माण किया है, लेकिन यह अपरिपक्व है। इस प्रतिभा ने भारत का नहीं बल्कि दुनिया की तमाम बहुराष्ट्रीय कंपनियों को प्रोग्रामिंग, कानून, उद्योग, लॉजिस्टिक्स, इनोवेशन, बैंकिंग में मदद की है। इस प्रतिभा के दम पर भारत ने वैश्विक स्तर के प्रोडक्ट्स नहीं बनाए, बल्कि इस प्रतिभा का इस्तेमाल दूसरे की सेवा के लिए किया।"
अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए सैम पित्रोदा ने कहा, "न हो भारत ने अपना खुद का सोशल मीडिया प्लेटफार्म तैयार किया और न ही माइक्रोसॉफ्ट जैसी कोई बड़ी कंपनी तैयार कर पाए। हमने अपना खुद का ऑपरेटिंग सिस्टम तक नहीं बनाया। यह शर्म की बात है कि 1.5 अरब आबादी वाले देश के पास खुद का ऑपरेटिंग सिस्टम भी नहीं है। हम मोबाइल फोन के लिए भी ऑपरेटिंग सिस्टम नहीं बना पाए। हमने सचमुच अपनी युवा प्रतिभा का उपयोग दूसरों की सेवा के लिए किया है।"
भाजपा हुई हमलावर
वरिष्ठ कांग्रेस नेता की तरफ से आई इस टिप्पणी पर सत्ताधारी भाजपा ने तीखी प्रतिक्रिया दी। भाजपा की तरफ से प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा कि 'लश्कर ए कांग्रेस' के मुख्य सलाहकार ने एक बार फिर से झूठ बोलकर भारत का मजाक उड़ाने की कोशिश की है। उन्होंने लिखा, "एआई समिट में कांग्रेस के टॉपलेस ऐक्ट के बाद लश्कर ए कांग्रेस के मुख्य सलाहकार सैम पित्रोदा मैदान में हैं। एक एक बार फिर भारत को बदनाम करने के एजेंडे पर। अंकल सैम झूठ बोलकर भारत का मजाक उड़ाते हैं। कहते हैं कि भारत पर शर्म आती है कि उसने मोबाइल के लिए ऑपरेटिंग सिस्टम तक विकसित नहीं किया है।"
उन्होंने पित्रोदा की टिप्पणियों का खंडन करते हुए भारत में विकसित ऑपरेटिंग सिस्टम जैसे बॉस लिनक्स, माया ओएस, प्राइमओएस, भारओएस, इंडस ओएस और एनएक्सटीक्वांटम ओएस का उदाहरण देते हुए कहा कि कांग्रेस का "एकमात्र मिशन झूठ बोलकर भारत को बदनाम करना है।"
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असम में इसी साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। भाजपा के लिए यहां सत्ता बचाने की चुनौती है। भगवा खेमा अगर यहां सरकार बनाने में सफल होता है तो असम में यह हैट्रिक होगी। भाजपा ने इसके लिए पूरी ताकत झोंक दी है। बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन ने हाल ही में पार्टी कार्यकर्ताओं को असम विधानसभा में 50% वोट लाने का लक्ष्य दिया है। आपको बता दें कि पिछले विधानसभा चुनाव में में बीजेपी का वोट शेयर 33.2 % था। वहीं, सत्ता में वापसी की कोशिश कर रही कांग्रेस को उस समय जबरदस्त झटका लगा जब पूर्व प्रदेश अध्यक्ष ने पार्टी छोड़ दी।
भाजपा अध्यक्ष के द्वारा दिए गए टारगेट को अगर बीजेपी हासिल कर लेती है तो सभी दलों का सूपड़ा साफ कर देगी। विपक्ष सिर्फ 20-28 सीटों पर सिमट जाएगा। आपको बता दें कि असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की लोकप्रियता अभी भी कायम है।
कांग्रेस की बात करें तो असम विधानसभा की राह आसान नहीं है। वरिष्ठ नेता भूपेन बोरा के इस्तीफे से जहां पार्टी आंतरिक चुनौती से जूझ रही है, वहीं महाजोत में भी सब कुछ ठीक नहीं है। सीट बंटवारे में ज्यादा से ज्यादा सीट हासिल करने को लेकर महाजोत के कई घटकदल दबाव बनाए हुए हैं। असम में अप्रैल में चुनाव हो सकते हैं।
तमाम कोशिशों के बावजूद कांग्रेस असम में पार्टी को एकजुट रखने में विफल रही। भूपेन बोरा ने आखिरकार पार्टी छोड़ दी। पार्टी को डर है कि भूपेन बोरा के साथ उनके भरोसेमंद कई विधायक और नेता भाजपा में शामिल हो सकते हैं। इससे मतदाताओं में पार्टी की छवि कमजोर होगी। इसके साथ महाजोत में सीट बंटवारा भी कांग्रेस के लिए बड़ी चुनौती है। क्योंकि, 2021 के महाजोत में कई बदलाव हुए हैं। एआईयूडीएफ और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (बीपीएफ) दोनों महाजोत से अलग हो चुके हैं। बीपीएफ अब एनडीए का हिस्सा है, वहीं मौलाना बदरुद्दीन अजमल की अगुआई में एआईयूडीएफ अकेले चुनाव लड़ेगा।
वहीं, असम जातीय परिषद और अखिल गोगोई का रायजोर दल अब महाजोत में शामिल हैं। कांग्रेस ने एजेपी और रायजोर दल दोनों को महाजोत में 11-11 सीट देने की पेशकश की है, पर दोनों दल इससे ज्यादा सीट की मांग कर रहे हैं। कांग्रेस इन्हें अधिक सीट देती है, तो चुनाव में कांग्रेस को कम सीट पर लड़ना होगा।असम में दूसरे दलों के साथ गठबंधन किए बगैर भाजपा की अगुआई वाले एनडीए को शिकस्त देना कांग्रेस के लिए आसान नहीं है।
]]>दरअसल, बीते दिन अल सुबह कोतवाली थाने के सामने स्थित भाजपा के पूर्व विधायक दुर्गालाल विजय के घर तड़के हुई, जिसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है.
घर से AC का आउटडोर यूनिट अज्ञात चोर चुरा ले गया. चोरी की घटना की जानकारी मिलने के बाद कांग्रेस विधायक बाबू जंडेल की खुशी का तो जैसे ठिकाना ही नहीं रहा और उन्होंने भाजपा नेता के यहां चोरी करने वाले चोर को ही धन्यवाद दे डाला. इतना ही नहीं, कांग्रेस विधायक ने यहां तक कह दिया कि ऐसे चोर को तो वह इनाम देंगे.
पूर्व विधायक दुर्गालाल विजय ने इसे मामूली बात कह मीडिया से बात करने से मना कर दिया लेकिन उनके घर पर काम करने वाले कर्मी रामू सुमन का कहना है कि रात को अज्ञात चोरों ने घर के पीछे से घुसकर चोरों ने घटना अंजाम दिया है. मेरी ड्यूटी खत्म हो गई थी. इसके बाद देर रात चोरी हुई है. उधर पूर्व विधायक के आवेदन पर कोतवाली पुलिस अज्ञात चोर की पतारसी में जुट गई है.
]]>गडवाल से विधायक कृष्ण मोहन रेड्डी यहां जुबली हिल्स स्थित मुख्यमंत्री आवास पर मुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ए रेवंत रेड्डी और अन्य पार्टी नेताओं की मौजूदगी में कांग्रेस में शामिल हुए। ऐसी अटकलें हैं कि आने वाले दिनों में बीआरएस के और विधायक सत्तारूढ़ पार्टी में शामिल हो सकते हैं। पिछले साल हुए विधानसभा चुनावों में बीआरएस ने कुल 119 विधानसभा क्षेत्रों में से 39 पर जीत हासिल की थी, जबकि कांग्रेस 64 सीटें जीतकर सत्ता में आई थी।
बीआरएस के सात विधायकों के कांग्रेस में शामिल होने के बाद कांग्रेस विधायकों की संख्या 71 हो गई। बृहस्पतिवार रात को बीआरएस के छह विधानपार्षद सत्तारूढ़ कांग्रेस में शामिल हो गए थे। इसके साथ ही 40 सदस्यीय विधान परिषद में कांग्रेस के सदस्यों की संख्या 10 हो गई।
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